विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में सबसे पहले चेहरे की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करने से त्वचा पर जमा गंदगी अतिरिक्त तेल और बैक्टीरिया हट जाते हैं। बार बार चेहरा धोने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी भी कम हो सकती है।
कई लोग मानसून में मॉइस्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं लेकिन यह सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बारिश के मौसम में भी त्वचा को नमी की जरूरत होती है। इसलिए हल्का और नॉन ऑयली मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए ताकि त्वचा हाइड्रेट रहे और चिपचिपाहट भी महसूस न हो।
बारिश के दिनों में धूप कम दिखाई देती है लेकिन अल्ट्रावॉयलेट किरणें बादलों के बीच से भी त्वचा तक पहुंचती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलना चाहिए। कम से कम एसपीएफ तीस वाला सनस्क्रीन त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है।
मानसून में पसीना अधिक आने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं जिससे मुंहासे और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ जाती है। सप्ताह में एक या दो बार हल्के स्क्रब से त्वचा की सफाई करना लाभदायक माना जाता है। हालांकि अधिक स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना मौसमी फल हरी सब्जियां और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देता है। तली भुनी और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन कम करने से मुंहासों की समस्या भी कम हो सकती है।
यदि बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही साफ पानी से चेहरा और हाथ पैर धो लें तथा सूखे तौलिए से अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसलिए जल्द से जल्द सूखे और साफ कपड़े पहनना बेहतर होता है।
मेकअप का इस्तेमाल करने वालों को मानसून में हल्के और वाटरप्रूफ उत्पाद चुनने चाहिए। रात को सोने से पहले मेकअप पूरी तरह हटाकर त्वचा की सफाई करना जरूरी है ताकि रोमछिद्र बंद न हों और त्वचा स्वस्थ बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से बारिश के मौसम में भी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और संक्रमण मुक्त रखा जा सकता है। यदि लगातार खुजली लालपन दाने या फंगल संक्रमण जैसी समस्या बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।