हालिया आकलन के अनुसार कोविड-19 के बाद दुनिया भर की कंपनियों ने केवल एक देश पर निर्भर रहने की रणनीति से दूरी बनानी शुरू की है। इसके स्थान पर चीन+1, फ्रेंडशोरिंग और नियरशोरिंग जैसी रणनीतियों को अपनाया जा रहा है, जिससे सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित, लचीली और जोखिमों से कम प्रभावित रहे। इस वैश्विक बदलाव ने भारत को नए निवेश और उत्पादन अवसर उपलब्ध कराए हैं।
रिपोर्ट में दुनिया की प्रमुख विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि महामारी के बाद भारत ने अपनी औसत विनिर्माण वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। महामारी-पूर्व अवधि की तुलना में हाल के वर्षों में उत्पादन वृद्धि तेज हुई है और भारत वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र लगातार प्रतिस्पर्धी बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सफलता के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं। देश का विशाल घरेलू बाजार, तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सुधार, डिजिटल परिवर्तन और निवेश के अनुकूल नीतियों ने उद्योगों का भरोसा बढ़ाया है। इसके साथ ही वैश्विक कंपनियां उत्पादन इकाइयों के विस्तार के लिए भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही हैं।
औद्योगिक क्षेत्र को गति देने में सरकार की विभिन्न योजनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना, औद्योगिक कॉरिडोर, पीएम गति शक्ति जैसी पहलों ने विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने का रास्ता तैयार किया है। इन पहलों के कारण कई क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू हुई हैं और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बने रहने के लिए भारत को लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, औद्योगिक आधारभूत ढांचे को और मजबूत बनाने तथा घरेलू सप्लायर नेटवर्क का विस्तार करने पर लगातार काम करना होगा। कारोबार करने में आसानी को बेहतर बनाना, नई तकनीकों को उद्योगों में तेजी से अपनाना और मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी उपयोग भी भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
विश्लेषकों के अनुसार यदि वर्तमान सुधारों की गति बनी रहती है और वैश्विक निवेश का प्रवाह इसी तरह जारी रहता है, तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के अग्रणी विनिर्माण केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। इससे न केवल निर्यात क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार, औद्योगिक विकास और आर्थिक वृद्धि को भी नई गति मिलेगी। बदलती वैश्विक सप्लाई चेन के इस दौर में भारत के सामने एक दीर्घकालिक अवसर मौजूद है, जिसे प्रभावी नीतियों और मजबूत औद्योगिक ढांचे के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।