जांच के अनुसार यह पूरा फर्जीवाड़ा नेशनल लोक अदालत के दौरान अंजाम दिया गया। 14 मार्च 2026 को वार्ड 33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी की यूजर आईडी का दुरुपयोग कर 106 फर्जी प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर रसीदें जारी की गईं। इन रसीदों में करीब 14.69 लाख रुपए टैक्स जमा होना दर्शाया गया जबकि बैंक खातों के मिलान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई तो घोटाले की परतें खुलती चली गईं।
जांच में सामने आया कि वार्ड 24 में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर शिराज उलहक और योजना शाखा में कार्यरत मोहम्मद समीर खान ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। आरोप है कि दोनों संपत्ति मालिकों को आधे टैक्स में भुगतान कराने का लालच देते थे। इसके लिए उन्होंने वार्ड 24 की एक ऑपरेटर के माध्यम से वार्ड 33 के प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल किए और उसी का उपयोग कर फर्जी रसीदें जारी कर दीं। लोगों से वसूली गई रकम सरकारी खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प ली गई।
इस घोटाले ने नगर निगम के ऑनलाइन टैक्स सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वार्ड की यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग दूसरे वार्ड में कर इतनी बड़ी संख्या में फर्जी रसीदें जारी होना तकनीकी व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है। अब पूरे सिस्टम के तकनीकी ऑडिट और अन्य वार्डों के रिकॉर्ड की भी जांच की मांग उठने लगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसी तरह की अनियमितताएं अन्य स्थानों पर भी तो नहीं हुई हैं।
इस मामले का सबसे बड़ा नुकसान उन नागरिकों को हुआ जिन्होंने आरोपियों को टैक्स की राशि देकर वैध समझकर रसीदें प्राप्त कर ली थीं। बाद में उनके खातों में वही टैक्स दोबारा बकाया दिखाया गया। यानी जिन्होंने भुगतान किया वही दोबारा निगम के रिकॉर्ड में बकायादार बन गए। इससे आम लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि दोनों आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं लेकिन अब तक नगर निगम ने उनसे गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू नहीं की है और न ही उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार ने कहा है कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नगर निगम दोषियों के खिलाफ कितनी तेजी और सख्ती से आगे की कार्रवाई करता है।