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बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। विभागीय कार्रवाई के तहत पहले निलंबित किए गए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अब पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिससे पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल की जा सके।

बीकेटीसी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत मंदिर अधिकारी की लिखित तहरीर पर दर्ज हुई, जिसके बाद मामला विभागीय जांच से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

जानकारी के अनुसार, मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की सूचना मिलने के बाद मंदिर समिति ने प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना मंदिर की धनराशि के साथ कथित अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ। इसी आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, चढ़ावे की गिनती, धनराशि के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

बताया गया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को भी संज्ञान में लिया गया था। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आने का उल्लेख किया गया, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई आवश्यक समझी गई। इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

बीकेटीसी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। समिति का मानना है कि यदि संबंधित कर्मचारी को पद पर बनाए रखा जाता तो जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रहती। इसी कारण पहले प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निलंबन किया गया और बाद में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

अब पुलिस जांच और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त तथ्य या अन्य संबंधित पहलू सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। फिलहाल प्रशासन और मंदिर समिति दोनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय किए जाएंगे और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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