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INDORE COURT DECISION: इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

INDORE COURT DECISION: इंदौर । इंदौर जिला न्यायालय ने सड़क दुर्घटना से संबंधित एक प्रकरण में अत्यंत संवेदनशील, मानवीय एवं दूरदर्शी निर्णय पारित करते हुए न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने आरक्षक की मृत्यु के उपरांत मुआवजा निर्धारण करते समय उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु को भी मृतक का आश्रित मानते हुए मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है।

यह मामला सीहोर जिले के जवरा थाना क्षेत्र में घटित एक भीषण सड़क दुर्घटना से संबंधित है। जानकारी के अनुसार आरक्षक सतीश, पिता कैलाश रुडेलें, जो उस समय झाबुआ जिले में पदस्थ थे, कार से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार एवं लापरवाही से चल रहे एक ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना की गंभीरता इतनी अधिक थी कि आरक्षक सतीश सहित एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

दुर्घटना के समय मृतक की पत्नी रेखा सात माह की गर्भवती थीं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया। इसके पश्चात पीड़ित परिवार की ओर से न्यायालय में मुआवजा प्राप्त करने हेतु दावा याचिका प्रस्तुत की् की गई।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीरता से लिया कि मृतक की पत्नी गर्भवती थी और गर्भ में पल रहा शिशु भी मृतक पर पूर्ण रूप से आश्रित माना जाना चाहिए। इस आधार पर न्यायालय ने गर्भस्थ शिशु को भी आश्रितों की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए मुआवजे का निर्धारण किया।

अधिवक्ता श्री राजेश खंडेलवाल के अनुसार, न्यायालय ने मृतक की पत्नी, दो नाबालिग बच्चों, माता, गर्भस्थ शिशु तथा साथ रहने वाले छोटे भाई को आश्रित मानते हुए कुल 50 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया है। इसके अतिरिक्त 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

कानूनी विशेषज्ञों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। वहीं पीड़ित परिवार ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय उनके जीवन को पुनः स्थिरता देने में सहायक सिद्ध होगा। यह फैसला न केवल न्याय की भावना को सुदृढ़ करता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में स्थापित हुआ है।

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