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मोहन भागवत बनाम राज ठाकरे: 'भाषा की राजनीति' पर छिड़ी नई जंग, मनसे प्रमुख ने फिल्म हस्तियों की मौजूदगी को बताया 'दहसत की भीड़'


मुंबई/नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित भव्य समारोह अब एक बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया है। इस कार्यक्रम में सलमान खान, अक्षय कुमार, रवीना टंडन और करण जौहर जैसी दिग्गज फिल्मी हस्तियों की मौजूदगी ने जितनी सुर्खियां बटोरी थीं, उससे कहीं ज्यादा चर्चा अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के तीखे बयानों की हो रही है। राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला करते हुए दावा किया है कि मंच पर बैठे सितारे किसी वैचारिक प्रेम के कारण नहीं, बल्कि सत्ता की दहशत के कारण वहां जुटे थे।

राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि समारोह में शामिल लोग मोदी सरकार के डर से वहां मौजूद थे। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि अगर यह डर नहीं होता, तो कोई भी इतने उबाऊ और बोरिंग भाषण सुनने के लिए अपना समय खराब नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ प्रमुख मोहन भागवत को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि यह भीड़ उनके प्रति स्नेह या सम्मान के कारण उमड़ी थी। उनके अनुसार, यह केंद्र की सत्ता का रसूख था जिसने बॉलीवुड को कतार में खड़ा कर दिया।

हमले का दूसरा बड़ा मोर्चा ‘भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता’ पर था। दरअसल, मोहन भागवत ने अपने संबोधन में भाषा के नाम पर आंदोलन करने को एक ‘बीमारी’ करार दिया था। इस पर पलटवार करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि भारत में राज्यों का गठन ही भाषाई आधार पर हुआ है। कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति से प्रेम करना अगर बीमारी है, तो यह पूरे देश में फैली है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बाहरी लोग किसी प्रदेश में आकर वहां की संस्कृति का अनादर करते हैं, तब स्थानीय लोगों का आक्रोश स्वाभाविक है, इसे बीमारी कहना वास्तविकता को नकारना है।

राज ठाकरे ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जब गुजरात में यूपी-बिहार के लोगों को निकाला गया था, तब भाईचारे का संदेश देने वाले ये लोग कहां थे? उन्होंने मराठी समाज की सहनशीलता को कमजोरी समझने की चेतावनी देते हुए कहा कि संघ को गैर-राजनीतिक होने का दावा छोड़कर परोक्ष राजनीति बंद करनी चाहिए। अंत में उन्होंने चुनौती दी कि यदि संघ सच में सद्भाव चाहता है, तो उसे पहले केंद्र द्वारा थोपी जा रही हिंदी पर खुलकर अपना स्टैंड साफ करना चाहिए।

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