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महाशिवरात्रि 2026: निशीथ काल में करें भगवान भोलेनाथ की आराधना, बन रहे हैं कई दुर्लभ संयोग


नई दिल्ली । फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि 2026 का हिंदू धर्मावलंबियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद के लिए श्रद्धालु तीर्थों घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना शिवलिंग अभिषेक और मंत्र जाप की तैयारियों में व्यस्त रहते हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि को लेकर धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कई दुर्लभ शुभ संयोग बन रहे हैं जिनके कारण यह पर्व और भी अधिक कल्याणकारी माना जा रहा है।

धार्मिक परंपरा में शिव साधना के श्रेष्ठतम समय के रूप में निशीथ काल को विशेष स्थान दिया गया है। माना जाता है कि यह आधी रात का वह समय है जब भगवान शिव अपने भक्तों की शरण में विशेष रूप से उपलब्ध रहते हैं। इसलिए इस काल में शिवलिंग पर अभिषेक धूप-दीप फल-फूल अर्पित करना और मंत्रों का जाप विशिष्ट फलदायक माना जाता है।

निशीथ काल का समय 15 फरवरी 2026

इस महाशिवरात्रि पर रात लगभग 12:09 बजे से 01:01 बजे तक का निशीथ काल उत्पन्न होगा। इस अवधि को पूजा-अर्चना मंत्रोच्चारण और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ समय माना गया है। धार्मिक परंपरा में कहा गया है कि इस समय किया गया शिवलिंग पूजन विशेष लाभ और आशीर्वाद प्रदान करता है।

दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई शुभ राजयोग एक साथ बन रहे हैं जो अत्यंत दुर्लभ और सकारात्मक प्रभाव वाले हैं लक्ष्मी-नारायण राजयोग: बुध और शुक्र के संयोग से बन रहा है जो समृद्धि और वैभव का संकेत देता है। बुधादित्य राजयोग: बुध और सूर्य के मेल से यह योग बन रहा है जो बुद्धि सम्मान और सेल्फ-एक्सप्रेशन को सुदृढ़ करता है।

शुक्रादित्य योग: शुक्र और सूर्य के मिलन से यह योग बन रहा है जो सौंदर्य कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। शनि-शश महापुरुष राजयोग कुंभ राशि में शनि की स्थिति से यह विशेष योग बन रहा है जो अनुशासन ज्ञान और स्थिरता का सूचक है। पंचग्रह राजयोग: सूर्य बुध शुक्र शनि और राहु के एक साथ होने से यह योग बन रहा है जो अत्यंत दुर्लभ तथा शक्तिशाली माना जाता है।

इन सभी योगों का एक साथ बनना साधारण नहीं है इसलिए ज्योतिषियों के अनुसार यह समय आध्यात्मिक उन्नति सकारात्मक परिवर्तन और जीवन में संतुलन लाने के लिए बेहद अनुकूल है। कहा जाता है कि इस अवधि में किए गए उपाय और पूजा-अर्चना का प्रभाव तीन-गुणा बढ़ जाता है और कई राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है।

विशेष सुझाव:

इस निशीथ काल में शिवलिंग पर जल दूध गंगाजल तथा बेलपत्र अर्पित करें।  ॐ नमः शिवाय का जाप श्रवण मनन के साथ करें। ध्यान और भक्ति भाव से शिवस्तुति करें ताकि आध्यात्मिक उन्नति का अधिकतम लाभ प्राप्त हो। इस महाशिवरात्रि पर सही मुहूर्त और संयोग का लाभ उठाकर शिव भक्तों को भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद अत्यंत शुभ फलदायी सिद्ध होगा।

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