इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य उन नामों को हटाना था जो अब मतदान के पात्र नहीं रह गए थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार हटाए गए 42 लाख नामों में वे लोग शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है जो लंबे समय से अनुपस्थित हैं या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं। इसके अलावा डुप्लिकेट एंट्रीज यानी एक ही मतदाता के दो जगह नाम होने की समस्या को भी इस बार तकनीक और जमीनी सत्यापन के जरिए सख्ती से खत्म किया गया है। जहाँ एक तरफ नामों की छंटनी हुई वहीं लोकतंत्र के इस उत्सव में नए साथियों को जोड़ने का काम भी जारी रहा। प्रदेश भर से नए नाम जोड़ने के लिए लगभग 1 लाख 69 हजार 573 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से पात्र युवाओं और नागरिकों को अंतिम सूची में जगह दी गई है।
इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का सबसे व्यापक और गहरा असर राजधानी भोपाल में देखने को मिला है। भोपाल की सात विधानसभा सीटों पर करीब 3.80 लाख से लेकर 4.38 लाख तक नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। विशेषकर गोविंदपुरा और नरेला जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्रों में लगभग 2 लाख वोटरों के नाम हटे हैं। इसी तरह भोपाल मध्य दक्षिण-पश्चिम और हुजूर विधानसभा क्षेत्रों में भी भारी कटौती की गई है जबकि बैरसिया में यह प्रभाव अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा कम रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना आगामी चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
प्रक्रिया की बात करें तो इसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट प्रकाशन के साथ हुई थी जिसमें शुरुआती तौर पर 42.74 लाख संदिग्ध नामों की पहचान की गई थी। इसके बाद जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान दावा-अपत्ति का दौर चला जिसमें राजनीतिक दलों ने अपनी सक्रियता दिखाई और आम जनता ने भी अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करवाया। आज यानी 21 फरवरी को सभी आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम सूची का डिजिटल और फिजिकल प्रकाशन किया जा रहा है। नागरिक अब सीधे मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी CEO मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट ceoelection.mp.gov.in पर जाकर अपना नाम देख सकते हैं।