58 वर्षीय खानचंद सिंह पिछले काफी समय से गंभीर रूप से बीमार थे। अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. सुनील कुमार के अनुसार उनकी तबीयत हाल के दिनों में काफी बिगड़ गई थी और 21 फरवरी से उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। शुक्रवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।
पिता की गंभीर हालत की सूचना मिलने पर रिंकू सिंह को टी20 विश्व कप बीच में छोड़कर लौटना पड़ा था। हालांकि 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले वह चेन्नई में टीम से दोबारा जुड़ गए थे लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। रिंकू सिंह के पूर्व कोच मसूद अमिनी ने अलीगढ़ से मीडिया को बताया कि खानचंद सिंह पिछले कुछ समय से लिवर कैंसर से संघर्ष कर रहे थे और अंतिम दिनों में उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।
गौरतलब है कि अलीगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता की अहम भूमिका रही। खानचंद सिंह गैस सिलेंडर आपूर्ति का काम करते थे और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने परिवार का पालन-पोषण किया। शुरुआत में वह बेटे के क्रिकेट खेलने के पक्ष में नहीं थे लेकिन जब रिंकू को शानदार प्रदर्शन पर मोटरसाइकिल इनाम में मिली तो उन्होंने बेटे का पूरा समर्थन करना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने तमाम अभावों के बावजूद रिंकू के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग दिया।
परिवार के अनुसार खानचंद सिंह का अंतिम संस्कार अलीगढ़ में किया जाएगा। रिंकू सिंह भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए चेन्नई से लौट रहे हैं। आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में 1 मार्च को कोलकाता में भारत का मुकाबला वेस्टइंडीज से होना है जो टीम इंडिया के लिए करो या मरो जैसा अहम मैच माना जा रहा है। वेस्टइंडीज को हराने पर भारत सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। हालांकि पिता के निधन के चलते इस मुकाबले में भी रिंकू सिंह की उपलब्धता को लेकर संशय बना हुआ है।