खराब फॉर्म से शानदार वापसी तक का सफर
अभिषेक के लिए यह विश्व कप अब तक आसान नहीं रहा था। ग्रुप स्टेज के तीन मुकाबलों में वह लगातार शून्य पर आउट हुए थे। सुपर-8 के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी वह महज 15 रन ही बना सके। उनकी खराब फॉर्म के चलते टीम इंडिया को हर मैच में कमजोर शुरुआत मिल रही थी और प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
हालांकि टीम मैनेजमेंट ने धैर्य दिखाया और उन पर भरोसा कायम रखा। जिम्बाब्वे के खिलाफ मौका मिलने पर अभिषेक ने इस विश्वास को सही साबित किया। संजू सैमसन के साथ पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने शुरुआत में संयम बरता और फिर लय मिलते ही आक्रामक अंदाज अपनाया।
30 गेंदों में बदली मैच की तस्वीर
बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने सिर्फ 30 गेंदों में 55 रन ठोक दिए, जिसमें 4 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। उनकी तेज पारी की बदौलत भारत ने 4 विकेट पर 256 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 184 रन पर सिमट गई और भारत ने 72 रन से मुकाबला अपने नाम किया।
यह अर्धशतक सिर्फ आंकड़ा नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास की वापसी का प्रतीक था। लंबे समय बाद अभिषेक अपने स्वाभाविक खेल में नजर आए और टीम को वह शुरुआत दिलाई, जिसकी जरूरत थी।
वेस्टइंडीज मुकाबले से पहले राहत
जिम्बाब्वे के खिलाफ इस प्रदर्शन से टीम इंडिया को सुपर-8 के आखिरी मुकाबले से पहले बड़ी राहत मिली है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या अभिषेक अपनी इस लय को बरकरार रख पाते हैं। युवराज की सीख साफ है-बल्ला बोलेगा, तो जवाब अपने आप मिल जाएगा।