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शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शिक्षा का विस्तार होना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने यह विचार शुक्रवार शाम गांधी नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल के रजत जयंती समारोह में व्यक्त किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्कूल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और सेवाभावी पदाधिकारियों का सम्मान भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी बनने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक, समर्पित जनप्रतिनिधि, कुशल व्यापारी और अच्छे किसान बनने की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ऐसे प्रकल्पों से जुड़ें, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक के उपयोग के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज गूगल और अन्य वैश्विक संस्थाओं में भारतीय उच्च पदों पर कार्यरत हैं और देश का नाम रौशन कर रहे हैं।

इस अवसर पर डॉ. यादव ने सागर समूह के स्कूल सहित सातवें शिक्षण संस्थान के शुभारंभ पर बधाई दी और समूह की शिक्षा क्षेत्र में 25 वर्ष की उपलब्धियों को सराहा। समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा निर्मित विज्ञान मॉडल—जैसे प्लांट्स द्वारा जल प्रदूषण रोकना, विंड मिल और लाइव गार्ड मैनेजमेंट—का अवलोकन किया। साथ ही मिट्टी के शिल्प निर्माण करने वाले बच्चों से संवाद कर उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की।

मुख्यमंत्री ने कक्षा 10 वीं में अंशुमन मौर्य को भी सम्मानित किया, जिन्होंने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया में तीसरी रैंक हासिल की।

कार्यक्रम को रामेश्वर शर्मा ने भी संबोधित किया। समारोह की शुरुआत में सागर समूह के प्रमुख सुधीर अग्रवाल, सिद्धार्थ अग्रवाल और सागर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत किया।

डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कार, मूल्य और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का मार्ग भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में श्रेष्ठता, नैतिक मूल्यों और समाज के लिए योगदान देने की प्रेरणा दी।

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