असगर जहांगीर ने कहा कि दुश्मन देशों को किसी भी प्रकार की सूचना देना सीधे तौर पर जासूसी की श्रेणी में आता है और इसके लिए कठोरतम दंड का प्रावधान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हमले से प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें या वीडियो साझा करता है तो यह दुश्मन को यह संकेत देने जैसा है कि उनका हमला सही जगह पर हुआ है। इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ मानी जाएंगी।
यह सख्त रुख ऐसे समय में सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका द्वारा हाल ही में ईरान के तेल भंडार को निशाना बनाते हुए हमला किया गया। इस हमले के वीडियो भी सार्वजनिक किए गए जिसके बाद ईरान की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
ईरान के अधिकारियों के मुताबिक पिछले अक्टूबर में पारित किए गए नए जासूसी कानून के तहत अब दुश्मन देशों को किसी भी प्रकार की सूचना भेजना गंभीर अपराध माना जाएगा। इस कानून में दोषी पाए जाने पर न सिर्फ संपत्ति जब्त की जा सकती है बल्कि मौत की सजा तक दी जा सकती है।
इसी क्रम में ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिन पर अमेरिका और इजरायल से जुड़ी खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील जानकारी भेजने का आरोप है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर सुरक्षित स्थानों की जानकारी देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी प्राप्त की थी।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों को पूर्वी अजरबैजान प्रांत के ओस्कू इलाके से हिरासत में लिया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिया गया है। इससे पहले भी इसी तरह के आरोपों में दो अन्य लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है जिससे यह साफ है कि ईरान इस मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने क्षेत्रीय समर्थन को लेकर इराक का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इराकी लोग इस संघर्ष में मजबूरी से नहीं बल्कि साझा इतिहास पहचान और धार्मिक मूल्यों के आधार पर ईरान के साथ खड़े हैं।
कुल मिलाकर अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान का यह कड़ा रुख यह संकेत देता है कि देश अपनी आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है और किसी भी प्रकार की जासूसी गतिविधि को सख्ती से कुचलने के लिए तैयार है।