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बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान


नई दिल्ली । बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए एक कदम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद जो तस्वीर सामने आई है वह चौंकाने वाली भी है और कहीं न कहीं सादगी की मिसाल भी पेश करती है। ऊंचे पदों पर बैठे इन अधिकारियों के पास न तो भारी भरकम संपत्ति है और न ही आलीशान जीवनशैली के संकेत हर जगह नजर आते हैं।

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के मामले में यह सामने आया कि उनकी पत्नी के पास उनसे अधिक संपत्ति है। उनके पास नकद राशि मात्र 15400 रुपये है जबकि बैंक खातों में सीमित जमा और थोड़े से निवेश हैं। उनके पास एक पुरानी कार और बहुत कम मात्रा में सोना है। इससे यह साफ होता है कि उच्च पद पर होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है।

वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का मामला भी चर्चा में है क्योंकि उनके पास नकद राशि बिल्कुल नहीं है। हालांकि उनके बैंक खातों में अच्छी खासी रकम जमा है और आभूषण के रूप में भी निवेश है। यह दर्शाता है कि आज के दौर में कई अधिकारी नकद रखने की बजाय डिजिटल और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कई अधिकारियों की संपत्ति में और भी दिलचस्प पहलू सामने आए हैं। जैसे अरविंद कुमार चौधरी के पास खुद की कोई कार नहीं है जबकि नर्मदेश्वर लाल के पास न तो जमीन है और न ही वाहन। यह ऐसे उदाहरण हैं जो आम धारणा को चुनौती देते हैं कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के पास अपार संपत्ति होती ही है।

इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव कुमार अनुपम के पास मात्र 5000 रुपये नकद हैं जबकि उनकी कुल बचत बैंक और अन्य योजनाओं में जमा है। यह भी एक संकेत है कि अब वित्तीय प्रबंधन का तरीका बदल रहा है और लोग नकद की बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कुछ अधिकारियों ने निवेश के अलग अलग तरीके अपनाए हैं। धर्मेंद्र सिंह के पास जहां बैंक बैलेंस और बॉन्ड निवेश है वहीं उनके पास दो गाय और दो बछड़े भी हैं जो पारंपरिक और ग्रामीण निवेश का उदाहरण पेश करते हैं। वहीं कुंदन कृष्णन ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आधुनिक वित्तीय योजना को अपनाया है।

इस पूरी सूची में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आती है कि बिहार के कई अधिकारी सादगी भरा जीवन जी रहे हैं और अपनी आय को सोच समझकर अलग अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। कहीं परंपरागत साधन हैं तो कहीं आधुनिक वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह खुलासा न सिर्फ पारदर्शिता को बढ़ावा देता है बल्कि आम लोगों के बीच यह संदेश भी देता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सादगी और संतुलित जीवनशैली को अपनाते हैं। यह तस्वीर उस सोच को बदलने का काम करती है जिसमें अक्सर यह मान लिया जाता है कि ऊंचे पद का मतलब अत्यधिक संपत्ति और विलासिता ही होता है।

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