नई दिल्ली। इंदौर की तीन साल दो महीने की अनिका शर्मा दुर्लभ जेनेटिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 से जूझ रही है और उसके इलाज के लिए समय के खिलाफ जंग जारी है। डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट करती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर पड़ती जाती हैं और बैठने-चलने से लेकर सांस लेने तक में दिक्कत होने लगती है। अनिका के इलाज के लिए जीन थेरेपी का एक विशेष इंजेक्शन जरूरी है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई गई है।
यह दवा स्विट्जरलैंड की फार्मा कंपनी Novartis बनाती है और इसे तय वजन सीमा के भीतर लगाना आवश्यक होता है।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि इंजेक्शन 13.5 किलो वजन से पहले लगना चाहिए। फिलहाल अनिका का वजन लगभग 10.5 किलो है। इसी कारण पिछले तीन महीनों से परिवार डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उसका नियंत्रित आहार दे रहा है, ताकि वजन सीमा पार न हो और इलाज का अवसर बना रहे। परिवार का कहना है कि उम्र से जुड़ी एक समयसीमा निकल चुकी है, इसलिए अब वजन की शर्त ही आखिरी उम्मीद है।
इलाज के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि की जरूरत है।
परिजन अब तक क्राउड फंडिंग और दान के जरिए करीब 5 करोड़ 60 लाख रुपए जुटा चुके हैं, जबकि लगभग 3 करोड़ 40 लाख रुपए अभी और चाहिए। अनिका के माता-पिता अलग-अलग शहरों में जाकर लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं। सांस लेने में दिक्कत और संक्रमण के खतरे के बावजूद बच्ची इलाज की उम्मीद में संघर्ष कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार SMA एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें जीन थेरेपी के जरिए शरीर में दोषपूर्ण जीन को बदलने या उसकी भरपाई करने की कोशिश की जाती है।
चूंकि मरीजों की संख्या कम होती है और रिसर्च व ट्रायल की लागत बहुत अधिक होती है, इसलिए दवा महंगी है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिल जाए तो बीमारी की प्रगति को रोका जा सकता है, लेकिन देर होने पर नष्ट हो चुकी कोशिकाओं को वापस नहीं लाया जा सकता।
अब अनिका की जिंदगी समाज के सहयोग और समय पर जुटने वाली राशि पर टिकी है। हर गुजरता दिन परिवार के लिए उम्मीद और चिंता, दोनों साथ लेकर आ रहा है।