केमिकल प्लांट में मजदूरों की सुरक्षा पर जोर, मिलेगा खास प्रशिक्षण CM मोहन यादव ने मुंबई में किया ऐलान
इंडिया केम-2026 में खतरनाक रसायनों से काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और ट्रेनिंग पर खास जोर दिया गया। साथ ही बीना प्रोजेक्ट का ऐलान हुआ।

देश में तेजी से बढ़ते रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की सेहत, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन को लेकर सरकार ने काफी संजीदा रुख लिया है, मुंबई में इंडिया केम-2026 के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने साफ कहा कि जो प्रमुख फैक्ट्रियां खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें कर्मचारियों को सुरक्षित कामकाज और बचाव के लिए खास ट्रेनिंग की एक ठोस व्यवस्था देनी है. साथ में खतरनाक औद्योगिक कचरे और समुद्र में अपशिष्ट निपटान के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर अलग अलग मंत्रालयों के साथ मिलकर कुछ वास्तविक ठोस समाधान भी बनाए जा रहे हैं,
इसी सुरक्षा और बेहतर औद्योगिक प्रबंधन वाले विजन के बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अनुप्रिया पटेल ने मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में तीन दिवसीय इंडिया केम-2026 का दीप जलाकर शुभारंभ किया. इस सुव्यवस्थित आयोजन में ‘केमिकल फ्रेटरनिटी रिपोर्ट’ पुस्तिका का विमोचन हुआ, और देश विदेश की रसायन, पेट्रोकेमिकल, पॉलिमर और एग्रोकेमिकल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सुरक्षित और आधुनिक उत्पादन के मुद्दों पर चर्चा की.
दवा और पैकेजिंग सेक्टर को ताकत देगा बीना का 50 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट
स्वास्थ्य और आम जनजीवन से जुड़े सेक्टरों को आगे बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन में बीना के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की पेट्रोकेमिकल परियोजना का बड़ा ऐलान कर दिया. इस प्रोजेक्ट से हर साल 22 लाख टन से ज्यादा पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, और सीएम ने बताया कि इससे जीवनरक्षक दवा, फार्मा, सुरक्षित पैकेजिंग, प्लास्टिक, कपड़ा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को जरूरत का कच्चा माल समय पर मिलेगा. साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी खुलेंगे.
बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा इंतजाम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उद्योगों के संचालन को लेकर सरकार की तैयारियों का ब्योरा देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में नई इकाइयां लगाने के लिए जमीन, पर्याप्त पानी, निर्बाध बिजली और पहले से तैयार औद्योगिक ढांचे जैसी सुविधाएं पहले ही पूरी योजना के साथ मुहैया कराई जा रही हैं. बीना परियोजना के साथ साथ विजयपुर में गेल का गैस प्रसंस्करण ढांचा और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना भी राज्य के व्यवस्थित औद्योगिक विस्तार में बड़ी भूमिका निभाएंगी.
छोटे और मध्यम उद्यमों को सुरक्षित और आधुनिक माहौल में उत्पादन इकाइयां लगाने का मौका देने के लिए सरकार दो बड़े प्लास्टिक पार्क भी बना रही है. इसके तहत रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलोवा में 93 एकड़ भूमि पर प्लास्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जहां पॉलिमर आधारित उद्योगों को सारी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी.
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने टेक्सटाइल क्षेत्र के व्यवस्थित विकास के लिए पीएम मित्रा पार्क की तैयारियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कपड़ा उद्योग में निवेश और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ाकर मध्यप्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी जा रही है, धीरे धीरे लेकिन लगातार.
सप्लाई चेन की बाधाओं से निपटने और 2040 के लक्ष्य की तैयारी
वैश्विक स्तर पर आने वाली आपात स्थितियों और प्रबंधन चुनौतियों की बात करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की रुकावटें, चुनौती तो हैं ही, लेकिन उन्हें नए अवसर की तरह देखना होगा. उन्होंने यह भी बताया कि साल 2040 तक भारत के केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश पूरी क्षमता से साथ देगा.
पिछले सालों के विकास का ब्योरा देते हुए सीएम ने कहा कि 2014 में भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था, जो अब दोगुने से भी ज्यादा हो गया है. वहीं 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में लगभग एक लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI भी आया है.
महाराष्ट्र में 3600 इकाइयों का संचालन और तीन लाख लोगों को रोजगार
सम्मेलन के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने अपने राज्य के औद्योगिक प्रबंधन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा देश की तरक्की के लिए सकारात्मक है. फडनवीस ने बताया कि महाराष्ट्र में करीब 3,600 रसायन उद्योग सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जो देश के केमिकल सेक्टर के सकल मूल्यवर्धन (GVA) में 19 फीसदी और निर्यात में 17 फीसदी योगदान देते हैं. इसके अलावा राज्य में करीब तीन लाख लोगों की आजीविका और रोजगार का सहारा भी यही से निकलता है.
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन मंत्री नड्डा ने बताया ग्लोबल सहयोग का प्लान
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत सरकार केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर को वैश्विक मानकों के साथ दुनिया भर में आगे ले जाने के लिए काम कर रही है. इसी दिशा में भारत ने ओमान, न्यूजीलैंड और यूके (UK) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन किए हैं, और यूरोपियन यूनियन के साथ समझौते के लिए कोशिशें लगातार चल रही हैं.
आयोजन के दौरान ‘केमिकल फ्रेटरनिटी रिपोर्ट’ के साथ साथ फिक्की-ईवाई का नॉलेज पेपर भी जारी किया गया. इंडिया केम के इस 14वें संस्करण में तीन दिनों तक सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीकी नवाचार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर गहन मंथन चल रहा है. इसमें मध्यप्रदेश की बीना परियोजना एक अहम कड़ी साबित होगी, ऐसे ही कहा गया.



