अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली के लिए जरूरी आपूर्ति मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही को रोकना है।
हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पुल अभी पूरी तरह चालू नहीं था और सेना द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में आम नागरिक भी शामिल हैं, जो नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ईरान का एक बड़ा पुल नष्ट कर दिया गया है और अब इसका उपयोग संभव नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी बहुत कुछ होना बाकी है और ईरान को जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि जब देश की सुरक्षा की बात आती है तो हर नागरिक सैनिक बन जाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान इस तरह के हमलों से डरने वाला नहीं है और पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा।
इस बीच, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक स्तर पर भी हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिले हैं। रूस चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया है।इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।