रिश्तेदार ने युवती को दूसरे को सौंपा, युवक ने एक महीने तक बंधक बनाकर किया दुष्कर्म

गुना। जिले के मधुसूदनगढ़ क्षेत्र में एक युवती के अपहरण और दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों में युवती का एक रिश्तेदार भी शामिल है, जिसने भरोसे को तोड़ते हुए उसे दूसरे व्यक्ति के हवाले कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, 17 जून को 22 वर्षीय युवती ने मधुसूदनगढ़ पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि वह अपने रिश्तेदार बीरमजी भील के घर पर थी। 21 अप्रैल को बीरमजी भील ने बलबान सिंह भील को घर बुलाया और ज़बरदस्ती युवती को उसके साथ भेज दिया। युवती के अनुसार, बलबान सिंह भील उसे जबरदस्ती अपने घर ले गया, जहां उसने युवती को करीब एक महीने तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान बलबान सिंह ने बार-बार उसका यौन शोषण किया और विरोध करने पर मारपीट भी की। 30 अप्रैल की रात मौका मिलते ही युवती किसी तरह वहां से भाग निकली और अपने घर पहुंची। पुलिस ने दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार युवती की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीरमजी भील और बलबान सिंह भील के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मुखबिरों से मिली सूचना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 24 वर्षीय बलबान सिंह भील (निवासी जलालपुर) और 66 वर्षीय बीरमजी भील (निवासी मोहरी) शामिल हैं। सख्त कार्रवाई का वादा पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। गुना के पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी ने कहा कि पुलिस महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों को गंभीरता से लेती है। ऐसे अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल: नवरात्र से पहले दुर्गा प्रतिमा कारखाने पर छापा, मूर्ति निर्माण पर बवाल

भोपाल। राजधानी भोपाल में नवरात्र से पहले धार्मिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। रविवार को शहर के एक दुर्गा प्रतिमा निर्माण कारखाने पर हिंदूवादी संगठनों ने छापा मारा और प्रतिमाओं की जांच की। आरोप है कि कुछ मूर्तियां देवी दुर्गा के पारंपरिक स्वरूप से मेल नहीं खा रही थीं। उन्हें “आस्था के साथ खिलवाड़” बताया गया। हिंदू संगठनों का आरोप है कि मूर्तिकार पारंपरिक शैली की उपेक्षा कर आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा जनरेट की गई तस्वीरें शामिल हैं। उनका कहना है कि इन तकनीकों के आधार पर बनाई जा रही मूर्तियों में देवी दुर्गा का स्वरूप धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं से मेल नहीं खा रहा। छापे के दौरान एक ऐसी प्रतिमा भी देखी गई, जिसका रूप न तो महिषासुर मर्दिनी जैसा था और न ही वह शेर पर सवार माता की पारंपरिक छवि को दर्शा रही थी। इस पर आपत्ति जताते हुए प्रतिमा निर्माण का कार्य तत्काल रोक दिया गया। मूर्तिकार को सख्त चेतावनी दी गई कि भविष्य में केवल परंपरागत स्वरूप वाली मूर्तियों का ही निर्माण किया जाए। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष ने कहा “मां दुर्गा की प्रतिमा को किसी भी सूरत में कार्टून जैसा नहीं बनने दिया जाएगा। देवी का स्वरूप पारंपरिक होना चाहिए…चाहे वह महिषासुर मर्दिनी हो, शेर पर सवार माता हो या काली माता।” इस दौरान कुछ हिंदूवादी कार्यकर्ता मूर्तिकार की धार्मिक पहचान पूछते भी नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण मुसलमानों द्वारा नहीं कराया जाना चाहिए। साथ ही शहर की दुर्गा समितियों से अपील की गई कि वे केवल पारंपरिक और धार्मिक भावनाओं के अनुरूप प्रतिमाओं को ही स्वीकार करें। यह घटना नवरात्र की तैयारियों के बीच सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने की आशंका भी पैदा कर रही है।
क्यों प्रसिद्ध है ग्वालियर? जानिए इस ऐतिहासिक शहर की खास बातें

Why is Gwalior Famous: मध्य प्रदेश को उसकी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विविधता के लिए जाना जाता है। इन सबमें ग्वालियर का नाम सबसे ऊपर आता है। चंबल के करीब बसे इस शहर ने इतिहास के पन्नों में अपनी खास पहचान बनाई है। चाहे वो वीरता की गाथाएं हों, स्थापत्य की मिसालें या फिर संगीत की मधुर धुनें…आइए जानते हैं इस शहर से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें… संगीत की आत्मा ग्वालियर को यूं ही ‘City of Music’ नहीं कहा जाता। यूनेस्को ने 2023 में इसे आधिकारिक रूप से “संगीत का शहर” घोषित किया। यह वही धरती है जहां महान संगीतकार और अकबर के नवरत्नों में शामिल तानसेन का जन्म हुआ था। तानसेन की ध्रुपद शैली ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नई ऊंचाई दी। आज भी उनके सम्मान में हर साल तानसेन संगीत समारोह का आयोजन होता है। देश का पहला भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) यहीं स्थापित हुआ था, जिसे आज अटल बिहारी वाजपेयी IIIT के नाम से जाना जाता है। 1997 में स्थापित यह संस्थान तकनीक और इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। जय विलास पैलेस के भव्य झूमरों की कहानी ग्वालियर के जय विलास पैलेस में ऐसी भव्यता देखने को मिलती है जो देश में कहीं और मुश्किल से मिलती है। इस महल की सबसे बड़ी खासियत हैं यहाँ लगे दो विशाल झूमर, जिनका वजन करीब 7 टन है। इन झूमरों को भारत के सबसे बड़े झूमरों में गिना जाता है । कहा जाता है कि इन झूमरों की मजबूती जांचने के लिए उनकी छत पर हाथियों को चलाया गया था। जब कोई मेहमान इस महल में कदम रखता है, तो इन झूमरों की भव्यता और चमक देख कर दंग रह जाता है। दुनिया का दूसरा सबसे पुराना ‘शून्य’ ग्वालियर किला गणितीय इतिहास की दृष्टि से भी बेहद खास है। इस किले की दीवारों पर स्थित चतुर्भुज मंदिर में दुनिया का दूसरा सबसे पुराना ज्ञात ‘शून्य’ (0) अंक उकेरा गया है। यह मंदिर 876 ईस्वी में प्रतिहार शासक बोज देव के शासनकाल में बनवाया गया था। ग्वालियर का प्रतिष्ठित सिंधिया स्कूल ग्वालियर की शिक्षा व्यवस्था भी पूरे देश में अलग पहचान रखती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है सिंधिया स्कूल, जो भारत के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित स्कूलों में गिना जाता है। इस स्कूल की औसत वार्षिक फीस करीब 12 लाख रुपये बताई जाती है, जो इसे एक एलिट बोर्डिंग स्कूल बनाती है। राजा माधवराव सिंधिया द्वारा 1897 में स्थापित यह स्कूल आज भी शाही परंपराओं और आधुनिक शिक्षा का अनोखा संगम पेश करता है। यहां देशभर से विद्यार्थी आते हैं। कई नामी-गिरामी हस्तियां इस स्कूल के पूर्व छात्र रह चुके हैं। ग्वालियर की धरती से निकला एक महान नेता ग्वालियर देश को दिशा देने वाले महान व्यक्तित्वों की जन्मभूमि रहा है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को यहीं, ग्वालियर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।
भाजपा नेता ने की आत्महत्या की कोशिश, अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद लिया फैसला

भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी नेता जीत निशोदे ने वीडियो वायरल होने के बाद अपनी जान लेने की कोशिश की । जीत निशोदे ने फांसी लगाकर अपनी जान लेने का खौफनाक कदम उठाया । नेता को पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। बता दें वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। बता दें कि भोपाल के अरेरा मंडल के भाजपा युवा मोर्चा महामंत्री जीत निशोड़े का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में नेता एक युवती के साथ अश्लील हरकत करते नजर आ रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद पार्टी का खूब मजाक उड़ा था। आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद संगठन ने कार्रवाई करते हुए जीत निशोड़े को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और पद से हटाने का फैसला किया। अरेरा मंडल अध्यक्ष अभिषेक पुरोहित ने जीत निशोड़े को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया। घर का दरवाजा तोड़ वीडियो बनाने का मामला इस वीडियो में दिख रही लड़की ने जीतू निषाद को अपना होने वाला पति बताया है और गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। लड़की का कहना है कि कांग्रेस ने जीतू निषाद को निशाना बनाने के लिए यह वीडियो बनाया है। घर का दरवाजा तोड़कर दरवाजे से निजी वीडियो बनाने का आरोप है। ‘कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के कुछ लोगों ने चुपके से मेरा और मेरे होने वाले पति का निजी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। इसकी साफ वजह यह है कि मेरे पति बीजेपी में हैं।’ पुलिस पर गंभीर आरोप वीडियो में दिख रही लड़की ने यह भी कहा कि ‘इस संबंध में शाहपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है, लेकिन पुलिस भी ठीक से जवाब नहीं दे रही है। आरिफ मसूद इस मामले में उन पर दबाव बना रहे हैं, इसलिए वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। मैं बस यही चाहती हूं कि अंकित दुबे, अज्जू, विशाल राव और दीपू, ये चार नाम सामने आए हैं, इन लोगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई हो।’ फिलहाल, शिकायत के आधार पर शाहपुरा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीएम ने 12वीं के टॉपर्स को दी स्कूटी की चाबी, बोले – “विदेश पढ़ाई के लिए जाना हो तो जाओ…

भोपाल। “बच्चों, तुम खूब पढ़ो, आगे बढ़ो। अगर पढ़ाई के लिए विदेश जाने की इच्छा हो, तो चिंता मत करना। विदेश जाकर पढ़ने का सारा खर्च सरकार उठाएगी। तुम्हें आगे बढ़ते हुए देखकर हमें सुकून मिलता है।” यह प्रेरणादायक संदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मेधावी छात्रों को स्कूटी वितरण कार्यक्रम के दौरान दिया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। नौकरी मांगने नहीं, देने वाले बनो: सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे युवाओं को नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना चाहिए। इसी उद्देश्य से सरकार विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेशभर के 7,832 मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी दी जा रही है। उन्होंने स्कूटी को ‘भाग्य से जुड़ा गति वाहन’ बताते हुए छात्रों को मेहनत और लगन से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं को सशक्त बनाने की पहल कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12वीं की टॉपर कोमल पाठक समेत अन्य विद्यार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से स्कूटी की चाबी सौंपी। इस दौरान उन्होंने सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल, गुनगा की छात्रा हर्षिता यादव के साथ स्कूटी पर बैठकर संवाद भी किया। हँसी-ठिठोली के माहौल में उन्होंने छात्रा से मुस्कुराते हुए पूछा …”गिरा तो नहीं दोगी?” मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 7,832 बारहवीं के टॉपर विद्यार्थियों के बैंक खातों में स्कूटी खरीदने हेतु राशि जमा कराई गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने 20 लाख से अधिक छात्राओं को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के लिए सशक्त कदम उठाते हुए सैनिटरी पैड हेतु ₹61 करोड़ की राशि वितरित की है। प्रत्येक छात्रा को ₹300 देने की यह योजना उनके स्वास्थ्य को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।
हथियार लाइसेंस पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा – दो हथियार वाले परिवार को तीसरा लाइसेंस…

ग्वालियर। हाईकोर्ट ने बुधवार को हथियार लाइसेंस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बंदूक रखना मौलिक अधिकार नहीं है। यह शासन का विवेकाधिकार है कि वह किसे हथियार रखने का लाइसेंस प्रदान करता है। इसी आदेश के तहत, कोर्ट ने अशोकनगर के हरदीप कुमार अरोरा की साल 2012 में दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत में की गई याचिका अशोकनगर के हरदीप कुमार अरोरा ने राज्य शासन द्वारा पिस्टल/रिवॉल्वर का लाइसेंस आवेदन खारिज किए जाने के खिलाफ ग्वालियर हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका तर्क था कि वे कृषक हैं। अपनी आजीविका व सुरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस प्राप्त करना चाहते हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जिला दंडाधिकारी और कमिश्नर ने साल 2010 में उनके पक्ष में सिफारिश की थी, लेकिन फरवरी 2011 में राज्य शासन ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। क्षेत्र में हथियारों के दुरुपयोग को लेकर चिंता सरकारी अधिवक्ता रवींद्र दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि हरदीप कुमार अरोरा के पास पहले से ही 315 बोर की बंदूक का लाइसेंस मौजूद है, जबकि उनके पिता के नाम पर 12 बोर की बंदूक का लाइसेंस है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में शादियों और धार्मिक आयोजनों में हथियारों के दुरुपयोग से कई हादसे हो चुके हैं। इसी कारण क्षेत्र में पहले से ही हथियारों का व्यापक प्रचलन और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां हैं। हथियार लाइसेंस प्रशासनिक विवेकाधिकार कोर्ट ने राज्य सरकार का पक्ष स्वीकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक शांति और सुरक्षा सर्वोपरि है। हथियार लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकना बेहद आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शस्त्र अधिनियम की धारा 13 और 14 के तहत लाइसेंस प्रदान करना प्रशासनिक विवेकाधिकार है। जब तक किसी व्यक्ति को अपनी जान का वास्तविक खतरा न हो, तब तक उसे हथियार लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।
श्योपुर के 4 युवक नेपाल में फंसे, सरकार से मांगी मदद, वीडियो वायरल…

4 Youths From Sheopur Stuck Amidst Violence In Nepal: नेपाल की राजधानी काठमांडू में हाल ही में हुई हिंसा के बाद गुरुवार को स्थिति नियंत्रण में जरूर है, लेकिन एहतियातन सेना ने राजधानी और आसपास के इलाकों में तीसरे दिन भी कर्फ्यू जारी रखा है। इस बीच मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के चार युवक और उनका दिल्ली निवासी एक साथी काठमांडू में फंसे हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए वीडियो जारी कर भारत सरकार और भारतीय दूतावास से सुरक्षित वापसी के लिए मदद की अपील की है। हिंसा में फंसे श्योपुर के चार युवक श्योपुर के शाहरुख खान, हर्ष दंडोतिया, अनूप दंडोतिया और विक्की निर्मल 3 सितंबर को अपने दिल्ली निवासी दोस्त राहुल राजपूत के साथ कार से नेपाल घूमने निकले थे। उनका प्लान 9 सितंबर को लौटने का था, लेकिन काठमांडू में अचानक भड़की हिंसा और बिगड़े हालात के कारण वे वहीं फंस गए। सुरक्षा कारणों से स्थानीय प्रशासन ने कर्फ्यू लगा रखा है, जिससे उनके लिए बाहर निकलना और भारत लौटना बेहद मुश्किल हो गया है। युवकों का वीडियो वायरल काठमांडू में फंसे श्योपुर और दिल्ली के पांच युवकों ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी स्थिति बताई है। वीडियो में उन्होंने कहा, “हम पिछले तीन दिन से यहां फंसे हुए हैं। मैंने पहले भी वीडियो डाली थी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। हमने एसपी से भी बात की थी, पर कोई जवाब नहीं मिला।” उन्होंने आगे कहा, “समझ में नहीं आ रहा क्या करें, कैसे निकलें? हर जगह कर्फ्यू लगा है। किसी का कोई रिस्पॉन्स नहीं आ रहा है। हमारे घर वाले बहुत परेशान हैं। कृपया इस वीडियो को आगे तक पहुंचाएं और जितना जल्दी हो सके, हमें सुरक्षित घर पहुंचाया जाए।”
जंगल से बाहर आया कूनो का चीता, एक सप्ताह से वन विभाग कर रहा है ट्रैकिंग, ग्रामीणों में फैली दहशत

मुरैना। मुरैना जिले के कैलारस और रामपुर इलाकों में बीते एक सप्ताह से कूनो नेशनल पार्क से भटका एक चीता लगातार घूम रहा है। इस जंगली जानवर की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल है। शुरुआत में चीता रामपुर क्षेत्र के टेलरी और सालई गांवों में दिखाई दिया था, लेकिन अब उसकी मौजूदगी कैलारस के देवरी, मनहारी, गोलहरी, विभूति और मामचोन गांवों तक दर्ज की गई है। लगातार मिल रही लोकेशन अपडेट्स के बाद वन विभाग की टीम भी सतर्क हो गई है और चीते की ट्रैकिंग में जुटी हुई है। मामचोन गांव में दिखाई दिया कूनो से भागा चीता कैलारस जनपद के मामचोन गांव में आज कूनो नेशनल पार्क से भटका चीता फिर से दिखाई दिया। गांव में जैसे ही चीता नजर आया, ग्रामीणों ने उसकी तस्वीरें अपने मोबाइल में कैद कर लीं। इससे पहले भी यह चीता कुछ पालतू बकरों को शिकार बना चुका है, जिससे ग्रामीणों के बीच डर और भी गहरा गया है। चीते की मौजूदगी की सूचना मिलते ही मॉनिटरिंग टीम और मुरैना वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची । ग्रामीणों में दहशत का माहौल सबलगढ़ वन विभाग की रेंजर हिना खान ने जानकारी दी कि श्योपुर कूनो से भागा हुआ चीता पिछले एक सप्ताह से मुरैना जिले के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि कूनो से आई मॉनिटरिंग टीम लगातार चीते की लोकेशन ट्रैक कर रही है और हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। हमारी स्थानीय वन विभाग की टीम भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रही है। हालांकि, चीता लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे ट्रैकिंग में मुश्किलें आ रही हैं।
ग्वालियर वाले घर को बताया था महल, सच्चाई सामने आते ही Tanya Mittal हुईं ट्रोल

ग्वालियर | सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट तान्या मित्तल (Tanya Mittal) इन दिनों सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। शो में उनकी गेम स्ट्रैटेजी के साथ-साथ उनके शाही लाइफस्टाइल के दावे भी दर्शकों के बीच चर्चा का कारण बने हुए हैं। तान्या ने घर के अंदर अपनी अमीरी और रहन-सहन को लेकर ऐसे दावे किए हैं, जिन्हें लेकर अब सोशल मीडिया पर उनकी सच्चाई जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। तान्या के दावों पर ग्वालियर के इंफ्लुएंसर्स का तंज बिग बॉस 19 में एंट्री के दौरान तान्या मित्तल ने अपने ग्वालियर स्थित घर को “महल” और “स्वर्ग” से भी बेहतर बताया था। उन्होंने यहां तक दावा किया कि उनके घर के आगे 7 स्टार होटल भी छोटे लगते हैं। तान्या की इस शाही बयानबाज़ी ने दर्शकों का ध्यान तो खींचा, लेकिन जब असलियत सामने आई तो सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स सक्रिय हो गए। ग्वालियर के कुछ स्थानीय इंफ्लुएंसर्स ने भी उनके घर को दिखाते हुए तंज कसे हैं। उनके दावों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया ड्रामा करार दिया। रियलिटी दिखाने सिटी सेंटर तक पहुंचे क्रिएटर्स बिग बॉस 19 में तान्या मित्तल द्वारा अपने घर को “महल” बताने के बाद अब यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया क्रिएटर्स ग्वालियर के सिटी सेंटर, साइड नंबर-1 स्थित उनके घर पर पहुंचने लगे हैं। दो मंजिला साधारण घर को दिखाते हुए कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा जा रहा है … “यही है बिग बॉस की तान्या मित्तल का महल।” इस ट्रेंड के चलते तान्या सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल हो रही हैं। उनकी ‘रॉयल इमेज’ पर सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रोलिंग के बीच बढ़ी तान्या की फैन फॉलोइंग बिग बॉस में किए गए बयानों को लेकर तान्या मित्तल जहां एक ओर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उनका सपोर्ट भी कर रहे हैं। कोई उन्हें ‘बड़बोला’ कहकर मज़ाक बना रहा है, तो किसी को उनकी आत्मविश्वास से भरी पर्सनालिटी पसंद आ रही है। दिलचस्प बात ये है कि इस विवाद के बीच तान्या की फैन फॉलोइंग में भी तेजी से इज़ाफा हुआ है। दावा था महल जैसा घर, हकीकत में निकला दो मंजिला मकान बिग बॉस के मंच पर तान्या मित्तल ने अपने ग्वालियर स्थित घर को “महल” और “स्वर्ग” जैसा बताया था, लेकिन जब एक मीडिया संस्थान उनकी सिटी सेंटर, साइड नंबर-1 स्थित संपत्ति पर पहुंचा, तो हकीकत कुछ और ही सामने आई। तान्या का घर एक साधारण दो मंजिला मकान निकला। इस घर का एक हिस्सा किसी बैंक या दुकान को किराए पर दिया गया है, जबकि शेष हिस्से में उनका परिवार निवास करता है। न तो घर की बनावट में कोई शाही झलक दिखी और न ही कोई ऐसा एलीट इंफ्रास्ट्रक्चर जो उसे “महल” जैसा साबित करे। दावा था हर फ्लोर पर नौकरों की मौजूदगी शो के दौरान तान्या मित्तल ने दावा किया था कि उनके घर के हर फ्लोर पर नौकर तैनात रहते हैं। उनका लाइफस्टाइल पूरी तरह से रॉयल है। हालांकि पड़ताल में सामने आया कि पूरे घर में केवल एक घरेलू कर्मचारी मिला, जो सामान्य घरेलू कामों में उनकी मदद करता है। इस दावे और हकीकत के बीच के फर्क को लेकर सोशल मीडिया पर फिर से बहस छिड़ गई है।
आदिवासी समुदायों के बीच हिंसक झड़प, एक व्यक्ति की मौत…

गुना। बमौरी थाना क्षेत्र के छिकारी-चाकरी इलाके में मंगलवार को वन भूमि को लेकर आदिवासी समुदाय के दो समूहों के बीच गंभीर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि पंचायत के सामने ही दोनों पक्षों के बीच जमकर पथराव और हथियार चले। इस झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए हैं। वन भूमि को लेकर हिंसक झड़प चाकरी गांव में भील और भिलाला समुदाय के बीच लंबे समय से वन भूमि को लेकर विवाद चल रहा था। मंगलवार को इस विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई, जिसमें दोनों पक्षों ने जमीन पर अपने-अपने दावे प्रस्तुत किए। पंचायत में समाधान न निकलने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया और जल्द ही झड़प का रूप ले लिया। देखते ही देखते सैकड़ों लोग आपस में भिड़ गए और गोफन सहित हथियार चलने लगे। इस हिंसक झड़प में भील समाज के 55 वर्षीय गंगाराम को पेट में पत्थर लगने से मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस बल की तैनाती झड़प की सूचना मिलते ही एसडीएम, तहसीलदार और एसडीओपी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंच गया। प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए गांव में डेरा डाल दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम को गांव में सहज प्रवेश नहीं करने दिया। फिलहाल पुलिस बल गांव में तैनात है। वन भूमि विवाद में एक की मौत कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि विवाद फतेहगढ़ और बमौरी के सेंटर पॉइंट पर हुआ, जहां करीब 60 हेक्टेयर वन भूमि पर भिलाला समाज खेती करता था। वहीं भील समाज भी इस जमीन पर अपना अधिकार जताता था। इसी जमीन को लेकर दोनों समुदायों के बीच टकराव हुआ। एसडीओपी विवेक अष्टाना ने बताया कि दोनों पक्षों से गोफन चले, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई है।