तान्या मित्तल का लग्जरी लाइफस्टाइल, कहा—मेरा घर 7-स्टार होटल से भी शाही, एक फ्लोर सिर्फ कपड़ों के लिए….

Tanya Mittal Lifestyle : तान्या मित्तल अपने आलीशान लाइफस्टाइल और दौलत से जुड़ी कहानियों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया कि महाकुंभ के दौरान उनके बॉडीगार्ड्स ने पुलिस अधिकारियों और लोगों की जान बचाई थी। अब बिग बॉस 19 के घर के अंदर भी तान्या अपने आलीशान घर को लेकर सुर्खियों में हैं। नीलम से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका घर किसी भी फाइव-स्टार या सेवन-स्टार होटल से ज्यादा भव्य है। Tanya ने बताया कि उनके घर का एक पूरा फ्लोर सिर्फ उनके कपड़ों के लिए है, जहां हर फ्लोर पर पांच-पांच हेल्पर तैनात हैं। अपने घर को उन्होंने ‘धरती पर स्वर्ग’ बताया और कहा कि जो भी उनके मैंशन में एक बार आएगा, उसे दोबारा होटल में ठहरने का मजा नहीं आएगा। उनके आलीशान दावों ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। इस संबंध में सामने आया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा, “यार मुझे तो इसका घर देखना है।” दूसरे ने कहा, “दीदी को शायद जल्द ही BB19 के घर से बाहर जाना होगा।” तीसरे ने कमेंट किया, “ये स्वर्ग तो इसे 5-स्टार होटल जैसा लगता है।” चौथे ने लिखा, “यार ये किस दुनिया में रहती है।” View this post on Instagram A post shared by @mriidul_bb
BCCI ने टीम इंडिया के लीड स्पॉन्सर के लिए जारी किया टेंडर, कई बड़ी कंपनियां बोली से बाहर

Who Will be Team India new title sponsor: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के लिए नए टाइटल स्पॉन्सर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर राष्ट्रीय टीम के प्रमुख स्पॉन्सर अधिकारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह फैसला ड्रीम11 के पीछे हटने के बाद लिया गया है, जिसने हाल ही में बीसीसीआई को सूचित किया कि संसदीय कानून के तहत वास्तविक धन-आधारित ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगने से वह अब स्पॉन्सरशिप जारी नहीं रख पाएगा। इन कंपनियों को नहीं मिलेगा मौका BCCI ने अपने टेंडर की शर्तों में साफ किया है कि कुछ कैटेगरी की कंपनियों को बोली लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इनमें अल्कोहल, तंबाकू, सट्टेबाजी, रियल मनी गेमिंग (फैंटेसी स्पोर्ट्स को छोड़कर), क्रिप्टोकरंसी, पोर्नोग्राफी और वे ब्रांड शामिल हैं जिनसे सार्वजनिक नैतिकता को ठेस पहुंच सकती है। बोर्ड ने यह जानकारी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर साझा की। टेंडर दस्तावेज़ जमा करने की अंतिम तारीख 12 सितंबर तय की गई है, जबकि बिड प्रस्तुत करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर होगी। इसके बाद ही यह साफ होगा कि टीम इंडिया का नया टाइटल स्पॉन्सर कौन होगा। ड्रीम11 का बीसीसीआई के साथ 2023 से 2026 तक 44 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 358 करोड़ रुपये) का बड़ा करार था। फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म My11Circle के साथ मिलकर दोनों कंपनियों ने भारतीय क्रिकेट टीम और आईपीएल को स्पॉन्सर करते हुए बीसीसीआई को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। यह भी पढ़ें: https://chambalkichugli.com/mitchell-starc-took-retirement-from-t20-international-cricket-in-2024-know-the-real-reason-for-this/ बीसीसीआई की नई जर्सी स्पॉन्सरशिप डील मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीसीसीआई 2025 से 2028 तक 140 मैचों के लिए करीब 452 करोड़ रुपये की जर्सी स्पॉन्सरशिप डील की तलाश कर रहा है। यह अनुबंध ड्रीम11 के भुगतान की तुलना में ज्यादा लाभकारी माना जा रहा है। नए स्पॉन्सर को घरेलू और विदेशी दोनों तरह की द्विपक्षीय सीरीज के साथ-साथ एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) और आईसीसी के बहु-टीम टूर्नामेंटों में भी शामिल किया जाएगा। बीसीसीआई ने हर द्विपक्षीय मैच के लिए 3.5 करोड़ रुपये और एसीसी व आईसीसी मुकाबलों के लिए 1.5 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। यह राशि ड्रीम11 की तुलना में अधिक है, हालांकि बायजू से होने वाली कमाई से अब भी कम है। बीसीसीआई एशिया कप से पहले टीम इंडिया के लिए नया शर्ट स्पॉन्सर ढूंढने की कोशिश कर रहा है, हालांकि सीमित समय के कारण इसमें देरी की संभावना है। बावजूद इसके, बोर्ड को भरोसा है कि महिला वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले एक नई कंपनी के साथ करार हो जाएगा।
बारिश के मौसम में बेहद खूबसूरत दिखती हैं ये जगहें, इस मानसून बनाएं घूमने का प्लान

Monsoon Best Destinations In MP: मानसून के मौसम में ठंडी-ठंडी बारिश में बाहर घूमने का मज़ा ही कुछ अलग होता है। हल्की बारिश की बूँदों और ठंडी हवा के बीच गरमा-गरम चाय की चुस्की हर किसी को भाती है। दुनिया भर में कई ऐसी जगहें हैं जहां मानसून के दौरान जाना खासा पसंद किया जाता है। इस मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है, नदियाँ अपनी मधुर धुन में बहती हैं, और तालाब पानी से भर जाते हैं। ऐसे में घूमने का मन करना स्वाभाविक है। अगर आप भी इस मानसून में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मध्य प्रदेश आपके लिए एक स्वर्ग समान साबित हो सकता है। यहां की खूबसूरती, प्राकृतिक नज़ारे और मानसून की रौनक मिलकर एक अनोखा अनुभव देते हैं। आइए जानते हैं उन खास जगहों के बारे में, जहां इस मानसून में आपको जरूर जाना चाहिए। मांडू इंदौर के पास स्थित मांडू मध्य प्रदेश का एक शानदार पर्यटन स्थल है, जो खासकर मानसून के मौसम में अपनी खूबसूरती से हर किसी का मन मोह लेता है। यहाँ की हरियाली और बरसाती नज़ारे इस ऐतिहासिक जगह की आकर्षण को और भी बढ़ा देते हैं। मांडू में रानी रूपमती महल, जहाज महल और बाज बहादुर महल जैसे प्राचीन स्मारक आपको इतिहास और प्रेम कहानियों की जीवंत झलक दिखाते हैं। इन प्राचीन स्थापत्य कलाकृतियों के बीच घूमते हुए मानसून का आनंद दोगुना हो जाता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग मांडू की इस मनमोहक वादियों का दौरा करने आते हैं। पचमढ़ी पचमढ़ी का नाम सुनते ही हर किसी के मन में एक खूबसूरत हिल स्टेशन की तस्वीर उभरती है। मानसून के मौसम में यह पहाड़ों की रानी सचमुच स्वर्ग की छटा बिखेरती है, जहाँ हर तरफ हरियाली की चादर बिछी होती है। मध्य प्रदेश का यह एकमात्र प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ठंडी हवाओं के लिए जाना जाता है। यहाँ आकर आप अपनी सभी चिंताओं को भूलकर इस सुरम्य घाटी की वादियों में खो जाएंगे और प्रकृति की गोद में एक नया सुकून महसूस करेंगे। अमरकंटक अमरकंटक प्राकृतिक सुंदरता का एक अनमोल खजाना है, जो हर नेचर लवर के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। यहाँ की हरियाली, ठंडे झरने, ऊँचे पहाड़ और शांत नदियाँ मानसून के मौसम में और भी मनमोहक लगती हैं। अगर आप इस मानसून में कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अपने बैग पैक करें और अमरकंटक की सुरम्य वादियों में एक यादगार सफर का आनंद लें। यहाँ की खूबसूरती आपके दिल को छू जाएगी और आप प्रकृति की गोद में खुद को तरोताजा महसूस करेंगे। खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बुंदेलखंड का ऐतिहासिक शहर खजुराहो अपने विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के लिए जाना जाता है। ये मंदिर चंदेल राजाओं द्वारा 950 से 1050 के बीच निर्मित किए गए थे और उनकी अद्भुत शिल्प कला आज भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। खजुराहो का पुराना नाम ‘खर्जुरवाहक’ था। 1986 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। यह स्थान न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह भी इसे सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं। मानसून के मौसम में जब चारों ओर हरियाली और झरनों की आवाज़ गूंजती है, तो खजुराहो की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है। अगर आप मानसून में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो खजुराहो आपकी यात्रा के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होगा, जहां इतिहास और प्रकृति का अनूठा संगम आपका स्वागत करता है। ओरछा रामराजा की नगरी ओरछा एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। बेतवा नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर 16वीं सदी में बुंदेला राजपूत प्रमुख रुद्र प्रताप ने स्थापित किया था। ओरछा के राजाओं द्वारा निर्मित भव्य मंदिर और स्मारक यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को दिखाते हैं। खासकर मानसून के मौसम में, जब चारों ओर हरियाली और नमी की वजह से इन ऐतिहासिक स्थलों की खूबसूरती और भी निखर उठती है, तब यह जगह और भी आकर्षक हो जाती है। यही वजह है कि मानसून में भी हजारों पर्यटक ओरछा की वादियों में अपनी यात्रा का आनंद लेने आते हैं। भेड़ाघाट मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित भेड़ाघाट अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे देखकर विदेश की खूबसूरत जगहें भी फीकी लगने लगती हैं। यहाँ की संगमरमर जैसी चमकदार चट्टानें और चारों ओर फैली हरियाली इस स्थान की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है। भेड़ाघाट की घाटी में बोटिंग का अनुभव बेहद रोमांचक होता है, जिसे हर प्रकृति प्रेमी के लिए मिस नहीं करना चाहिए। यहां की 100 फीट ऊंची संगमरमर की चट्टानें और धुआंधार जलप्रपात खास तौर पर आकर्षण का केंद्र हैं। जलप्रपात की तेज़ बहती धाराएं दूर से धुएं की तरह दिखती हैं, और इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है। भेड़ाघाट की ये चट्टानें मैग्नीशियम से भरपूर होने के कारण नर्म होती हैं, जिसने समय के साथ इस घाटी को एक अनोखा रूप दिया है। यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहते हैं, तो मानसून के मौसम में भेड़ाघाट की यात्रा आपके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी। यह भी पढ़ें: https://chambalkichugli.com/bhind-is-the-unique-district-of-mp-where-6-rivers-flow/
मिचेल स्टार्क ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, 2024 में खेला था आखिरी मुकाबला, जानिए इसकी असली वजह

Mitchell Starc Retirement: ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। 35 वर्षीय स्टार्क अब अपना पूरा ध्यान टेस्ट क्रिकेट और 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप पर केंद्रित करना चाहते हैं। उन्होंने अपना आखिरी टी-20 मुकाबला 2024 टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान खेला था।मिचेल स्टार्क का टी-20 इंटरनेशनल करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 65 टी-20 मुकाबलों में हिस्सा लिया और कुल 79 विकेट अपने नाम किए। वह ऑस्ट्रेलिया के लिए टी-20 फॉर्मेट में दूसरे सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2022 में वेस्टइंडीज के खिलाफ देखने को मिला, जहाँ उन्होंने 4 विकेट झटके थे। स्टार्क ने ऑस्ट्रेलिया की 2021 टी-20 वर्ल्ड कप विजेता टीम में भी अहम भूमिका निभाई थी, जो UAE में आयोजित हुआ था। उनकी रफ्तार और अनुभव ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ी आक्रमण को मजबूती दी और टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाने में मदद की। स्टार्क के संन्यास के पीछे की असली वजह मिचेल स्टार्क ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि टेस्ट क्रिकेट हमेशा उनकी पहली प्राथमिकता रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में ऑस्ट्रेलिया का टेस्ट शेड्यूल काफी व्यस्त रहने वाला है। 2026 में उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू सीरीज़, साउथ अफ्रीका का दौरा, न्यूजीलैंड के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज़, और जनवरी 2027 में भारत में पांच टेस्ट मैचों की अहम सीरीज़ खेलनी है। इसके अलावा, मेलबर्न में इंग्लैंड के खिलाफ एक ऐतिहासिक “150वीं सालगिरह टेस्ट” भी शामिल है, जो बेहद खास माना जा रहा है। इसके तुरंत बाद इंग्लैंड में प्रतिष्ठित एशेज सीरीज़ भी खेली जाएगी। टेस्ट क्रिकेट के साथ-साथ स्टार्क की नजरें अब अक्टूबर-नवंबर 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप पर भी टिकी हैं, जहां ऑस्ट्रेलिया मौजूदा चैंपियन के रूप में उतरेगा। https://mahakaushaltimes.com/ujjain-mahakal-mandir-collector-will-make-the-diside/ स्टार्क ने कहा “भारत दौरा, एशेज और 2027 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों को देखते हुए मैंने यह फैसला लिया है, ताकि मैं तरोताजा और फिट रह सकूं। साथ ही, इससे टी-20 टीम को नई गेंदबाजी इकाई तैयार करने का समय भी मिलेगा, जो अगले वर्ल्ड कप के लिए जरूरी है।”
ग्वालियर की इन जगहों को करें एक्सप्लोर, इतिहास और खूबसूरती से भरे 5 टूरिस्ट डेस्टिनेशन

Gwalior Tourism: मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक शहर ग्वालियर अपनी अनोखी विरासत और खूबसूरती के लिए मशहूर है। ऊँचाई पर स्थित ग्वालियर किला हो या प्राचीन मंदिर और भव्य महल, हर जगह इतिहास की झलक मिलती है। संगीत और संस्कृति से समृद्ध यह शहर पर्यटकों के लिए किसी खजाने से कम नहीं। इस लेख में हम आपको ग्वालियर के उन प्रमुख पर्यटन स्थलों से रूबरू कराएंगे, जो हर सैर को यादगार बना देते हैं। ग्वालियर किला ग्वालियर का किला भारत के सबसे भव्य और मजबूत किलों में गिना जाता है। पहाड़ी की ऊँचाई पर स्थित यह किला पूरे शहर का मनमोहक नज़ारा प्रस्तुत करता है। किले परिसर में बने गुजरी महल, मान मंदिर महल और सहस्रबाहु मंदिर अपनी-अपनी खासियत के लिए प्रसिद्ध हैं। गुजरी महल अब संग्रहालय के रूप में स्थापित है, जहाँ प्राचीन मूर्तियों का अनोखा संग्रह देखने को मिलता है। मान मंदिर महल अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है। वहीं सहस्रबाहु मंदिर नक्काशीदार दीवारों और कलात्मक शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है। जय विलास पैलेस म्यूजियम ग्वालियर का जय विलास पैलेस म्यूजियम सिंधिया राजवंश की वैभवशाली जीवनशैली को करीब से दिखाता है। 19वीं सदी में निर्मित यह भव्य महल यूरोपीय शैली की शानदार वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है। म्यूजियम में शाही वस्त्र, प्राचीन हथियार, आकर्षक फर्नीचर और राजघराने से जुड़ी कई दुर्लभ वस्तुएं संजोई गई हैं। यहाँ का दरबार हॉल विशेष आकर्षण का केंद्र है, जहाँ लगे विशाल झूमर राजसी वैभव की कहानी बयां करते हैं। तानसेन का मकबरा ग्वालियर स्थित तानसेन का मकबरा भारतीय संगीत परंपरा का अनमोल धरोहर स्थल है। यह महान संगीतज्ञ तानसेन की समाधि है, जो अकबर के नवरत्नों में से एक थे। उनकी गूंजती हुई रागिनी और गायकी आज भी संगीत प्रेमियों को प्रेरित करती है। हर वर्ष दिसंबर में यहाँ तानसेन संगीत समारोह आयोजित होता है, जिसमें देशभर से नामी कलाकार शिरकत करते हैं और सुरों की महफ़िल सजाते हैं। यह स्थल संगीत प्रेमियों के लिए एक तीर्थ जैसा महत्व रखता है। सूर्य मंदिर ग्वालियर का सूर्य मंदिर अपनी भव्यता और आधुनिक स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। बिरला परिवार द्वारा निर्मित यह मंदिर दिल्ली स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर की प्रतिकृति माना जाता है। मंदिर में भगवान सूर्य की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। यहाँ का शांत वातावरण ध्यान के लिए आदर्श माना जाता है। साथ ही इसकी नक्काशीदार मूर्तिकला और सुंदर वास्तुकला इसे ग्वालियर का एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बनाती हैं। फूल बाग ग्वालियर का फूल बाग शहर के सबसे सुंदर और मनमोहक उद्यानों में गिना जाता है। यहाँ रंग-बिरंगे फूलों की विभिन्न किस्में पर्यटकों और स्थानीय लोगों का मन मोह लेती हैं। सुबह-शाम टहलने के लिए यह स्थान बेहद आनंददायक है। बच्चों के खेलने के लिए भी विशेष जगह उपलब्ध होने के कारण यह परिवार संग समय बिताने का आदर्श स्थल है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण फूल बाग ग्वालियर आने वाले प्रत्येक पर्यटक के लिए एक अच्छा गंतव्य है।
डेफ ओलंपिक में दिखेगा MP का टैलेंट, धनंजय टेनिस टीम में शामिल

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर निवासी टेनिस खिलाड़ी धनंजय दुबे ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन जापान में होने वाले डेफ ओलंपिक के लिए किया गया है। धनंजय 15 से 27 नवंबर तक टोक्यो में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। प्रदर्शन से मिला ओलंपिक का टिकट अहमदाबाद में 20 से 27 अगस्त तक हुए ट्रायल में धनंजय दुबे ने बेहतरीन खेल दिखाकर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। इसी प्रदर्शन के दम पर उनका चयन डेफ ओलंपिक के लिए हुआ है। धनंजय मध्यप्रदेश के विक्रम अवार्ड से सम्मानित टेनिस खिलाड़ी हैं। इससे पहले वे साल 2022 में ब्राज़ील डेफ ओलंपिक में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। खेल और नौकरी दोनों में संतुलन बना रहे धनंजय धनंजय दुबे न केवल टेनिस कोर्ट पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं बल्कि पेशेवर जीवन में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे वर्तमान में अहमदाबाद में आयकर इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। हाल ही में 29 जनवरी को पुणे में आयोजित लॉन टेनिस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा 21-22 फरवरी को बेंगलुरु में हुई इंटर सर्विसेज प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मार्च में नेशनल चैंपियनशिप में दो सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया।
ग्वालियर पुलिस के सामने घोड़े को लेकर छिड़ा विवाद, राजीनामे से सुलझा मामला

Police Solved The “horse” Dispute: ग्वालियर में रविवार को एक अनोखी घटना सामने आई। एक घोड़ा रहस्यमयी तरीके से बार-बार तीन किलोमीटर दूर महलगांव इलाके के एक ही घर पहुंच जाता था। घरवाले हर बार घोड़े को संभालते और पुलिस को भी सूचना देते, ताकि उन पर चोरी का शक न हो। ग्वालियर में घोड़े का मज़ेदार विवाद सुलझा रविवार को महलगांव के निवासी किन्नू अपने घर बार-बार आने वाले घोड़े को लेकर विश्वविद्यालय थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि एक साल में यह घोड़ा दूसरी बार उनके घर पहुँच गया है। किन्नू ने घोड़े को खिला-पिला कर अपने घर बाँध लिया था। मामले की पड़ताल में पता चला कि घोड़ा थाटीपुर निवासी कोमल का है। पुलिस ने कोमल को थाने बुलाया, जिन्होंने शुरू में किन्नू पर घोड़ा चोरी करने का आरोप लगाया। पुलिस के हस्तक्षेप से मामला समझौते और राजीनामे के साथ सुलझ गया। थाने में समझौते के दौरान घोड़े के मालिक कोमल ने स्वीकार किया कि घोड़े की देखभाल और खिलाने पर जितना खर्च हुआ है, उसकी भरपाई वे करेंगे। हालांकि, इस बात का कारण न तो कोमल बता पाए और न ही किन्नू कि आखिर घोड़ा बार-बार तीन किलोमीटर दूर उनके घर क्यों पहुंच जाता है। यह रहस्यमयी आदत सभी के लिए पहेली बनी हुई है। https://chambalkichugli.com/supreme-court-initiative-on-transgender-inclusive-sex-education-notices-to-six-states-including-ncert/ पुलिस ने कराया समझौता एएसआई सुरेन्द्र सिंह (विश्वविद्यालय थाना) ने बताया कि घोड़े को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हो गया है। समझौते के तहत घोड़े को खिलाने-पिलाने का खर्च मालिक को चुकाना होगा। साथ ही पुलिस ने घोड़े के मालिक को यह सलाह भी दी कि वह अपने घोड़े को बांधकर रखे, ताकि भविष्य में इस तरह का विवाद दोबारा न हो।
ट्रांसजेंडर समावेशी सेक्स एजुकेशन पर सुप्रीम कोर्ट की पहल, NCERT समेत छह राज्यों को नोटिस

Comprehensive Sexuality Education: देशभर के स्कूलों में यौन शिक्षा को ट्रांसजेंडर समावेशी बनाने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और छह राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह पहल दिल्ली की वसंत वैली स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा काव्या मुखर्जी साहा की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आई है। ट्रांसजेंडर समुदाय की अनदेखी पर उठे सवाल काव्या मुखर्जी साहा की याचिका में तर्क दिया गया है कि एनसीईआरटी और एससीईआरटी की मौजूदा किताबों में Comprehensive Sexuality Education (CSE) के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय का जिक्र तक नहीं है। उनका कहना है कि यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही जेंडर संवेदनशीलता और विविधता की शिक्षा नहीं दी गई, तो समाज में बराबरी और स्वीकार्यता स्थापित करना असंभव होगा। https://chambalkichugli.com/ashoknagar-is-associated-with-the-history-of-tretayug-and-dwapar-era/ समावेशी शिक्षा पर बाध्यकारी दिशा-निर्देश की मांग याचिका में स्पष्ट किया गया है कि देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थानों में जेंडर सेंसिटाइजेशन और ट्रांसजेंडर इनक्लूसिव यौन शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। इसके लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी करने की गुहार लगाई गई है। इसी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और छह राज्यों को नोटिस भेजकर विस्तृत जवाब मांगा है।