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आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका: दोष के हिसाब से चुनें पानी का तापमान

नई दिल्ली स्नान सिर्फ शरीर की सफाई नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य से शरीर का अहम हिस्सा है। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीकों से स्नान करने से शरीर के दोष वात, पित्त और कफ बने रहते हैं। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, संस्थान के पानी का तापमान भी एक जैसा होना चाहिए। गुनगुना पानी सबसे अच्छा हैयदि आपके शरीर में रूखापन, ठंडे हाथ-पैर, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह वात दोष का संकेत हो सकता है। गुनगुने पानी से स्नान करेंसंस्थान के बाद तेल से अभ्यंग (मालिश) जरूर करेंइससे शरीर का रूखापन कम होगा और त्वचा को पोषण मिलेगा गुनगुना पानी वात को शांति देता है और शरीर को आराम का अनुभव कराता है। कफ प्रकृति: गर्म पानी से मिलेगा फायदायदि शरीर में भारीपन, सुस्ती, बार-बार सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, तो यह कफ दोष बढ़ने का संकेत है। गर्म पानी से स्नान करेंसुबह का समय नहाना बहुत खतरनाक हैठंडा पानी से परहेज़, क्योंकि इससे कफ और बढ़ सकता है गर्म पानी शरीर को सक्रिय करता है और कफ को कम करने में मदद करता है। पित्त प्रकृति: सामान्य या ठंडा पानी सहीयदि आपको गर्मी अधिक लगती है, पसीना अधिक आता है, मुंहासे या जलन की समस्या रहती है, तो यह पित्त दोष का संकेत है। सामान्य या साधारण ठंडे पानी से स्नान करेंबहुत ज्यादा ठंडा पानी का उपयोग न करेंइससे शरीर का सबसे अच्छा स्टॉक रहता है यह विधि शरीर की गर्मी को शांत करती है और पित्त को नियंत्रित करती है। स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियमबहुत ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म पानी रोज न लेंभोजन के तुरंत बाद स्नान न करेंसुबह स्नान करना सबसे अच्छा माना जाता हैमौसम और शरीर की स्थिति के अनुसार पानी की तापमान में गिरावट शरीर की प्रकृति की प्रशंसा, संभवतः पूरा लाभआयुर्वेद के अनुसार अगर आप अपनी प्रकृति के अनुसार स्नान करते हैं, तो यह सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता है, बल्कि कई शर्तों से भी सिखाता है।

बार-बार सिर दर्द से हैं परेशान? इसकी वजह हो सकती है आपकी डाइजेशन प्रॉब्लम

नई दिल्ली हम अक्सर सिर दर्द को लेकर तनाव, थकान या अधिक काम का नतीजा मान लेते हैं, लेकिन अगर समस्या बार-बार हो रही है तो इसका एक बड़ा कारण खराब पाचन भी हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में पाचन तंत्र और मस्तिष्क का गहरा संबंध होता है। जब पेट सही तरीकों से काम नहीं करता तो इसका असर सिर पर भी दिखने लगता है। पाचन क्रिया तो सिर दर्द क्यों होता है?जब पाचन क्रिया खराब होती है तो शरीर में गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इससे शरीर के दोष-वात, पित्त और कफ-असंतुलित हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे मस्तिष्क के तंत्रिकाओं को प्रभावित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप बार-बार सिर दर्द, भारीपन या चक्कर जैसे चित्र सामने आते हैं। आयुर्वेद में यह सिर्फ सिर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे शरीर का संकेत है कि अंदर कुछ समानता है। पेन किलर नहीं, जड़ पर काम करोअक्सर लोगों को सिर दर्द होता ही है, पेनकिलर लेकर तुरंत राहत पा लेते हैं, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी समाधान है। अगर वास्तविक वसा पाचन है, तो दवा से दर्द दब जाएगा, लेकिन समस्या बार-बार खत्म हो जाएगी। इसलिए जरूरी है कि पेट को ठीक किया जाए। आयुर्वेदिक उपाय जो दिला सकता है राहतनासिका क्रिया: नाक में औषधीय तेल की कुछ बूंदें गिराने से मस्तिष्क पर दबाव कम होता है और पित्त की मात्रा होती है।धनिया-मिश्री का पानी: रात में रात भर पीने से कब्ज में आराम मिलता है और पाचन सुदृढ होता है।सोंठ का लेप: सोंठ (सुखी अदरक) को पानी में वृद्धावस्था में लगाने से सिर दर्द में आराम मिल सकता है। खान-पान से क्या है कनेक्शन?ग़लत खान-पान जैसे अधिकतर ताल-भुना, क्षार या देर रात का खाना पाचन को ख़राब करता है। इससे गैस और कोष्ठबद्धता होती है, जो सिर दर्द का कारण बन सकती है। इसलिए— प्रभाव और सुपाच्य भोजन करेंसमय पर खाना बनानाअधिक पानी पियेदेर रात भारी भोजन से गोद लेना कब किराया लेना जरूरी है?यदि सिर दर्द लगातार बना रहता है, बहुत तेज होता है या अन्य लक्षण (जैसे उल्टी, चक्कर आना, नजरें धुंधली होना) भी साथ में हैं, तो इसे दांतों में न लें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यह किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। पेट ठीक है तो सिर भी ठीक हैसिर दर्द को केवल सिर तक सीमित सीमा तक गलत माना जा सकता है। सही पाचन, संतुलित आहार और कठिनाइयों से इस समस्या को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल से राहत के आसान उपाय, अपनाएं ये प्राकृतिक तरीके

नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव की स्थिति आम बात है। काम और निजी जिंदगी में चल रही उठा-पटक के बीच जिंदगी को मापना कर पाना मुश्किल होता है, और तनाव को झेलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चाहते हैं कि जब भी शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़े तो शरीर के बाकी हार्मोन भी असंतुलित हो जाएं। ऐसे में अगर लंबे समय तक लगातार यही लेवल बना रहे तो इससे शरीर को भारी नुकसान हो सकता है। कोर्टिसोल को सरल भाषा में तनाव हार्मोन के नाम से जाना जाता है। यह दोनों किडनी के ऊपर बनी एक ग्रंथि है, जिसे एड्रेनल ग्रंथि कहा जाता है। इसकी सक्रियता अगर शरीर में ज्यादा होती है तो यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक बन जाता है। यह खराब आदत, तनाव, कम नींद, खराब खाना और कम शारीरिक स्थिति से अधिक बनना लगता है। इससे चिंता, वजन कम होना, कमजोरी महसूस होना, सिर भारी होना और नींद में परेशानी बनी रहती है, लेकिन आयुर्वेद में कॉर्टिसोल को कम करने के प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं। गहरी नींद के लिए कोर्टिसोल को कम करना बहुत जरूरी है। अच्छी और गहरी नींद लेने से शरीर में भरपूर हार्मोन बनता है, जो कॉर्टिसोल को कम करने में मदद करता है। रोजाना कम से कम 8-10 घंटे की नींद जरूर लें। इससे मन तन और दोनों प्रभाव महसूस होते हैं। अपरिभाषित में इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाएं। साथ ही, बार-बार खाने से बचें और तय समय पर खाना बनाएं, जिससे पेट को खाना पचाने के लिए पूरा समय मिले और पोषण भी पूरे शरीर को मिले। आंतरायिक फास्टिंग कोर्टिसोल को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। कोर्टिसोल को कम करने के लिए धूप और विटामिन डी का बड़ा रोल है। प्रतिदिन 10 मिनट की धूप जरूर लें। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी तरह से होती है और कोर्टिसोल का प्रभाव शरीर पर कम दिखाई देता है। इसके साथ ही सॉसेज युक्त आहार लेना भी होता है। अपने आहार में केला, नारियल पानी, हरी सब्जी, टमाटर और मूंगफली को जरूर शामिल करें।

पनीर का सेवन हर किसी के लिए सही नहीं! जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज

नई दिल्ली शाकाहारी लोगों के लिए पनीर प्रोटीन एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। स्वाद और पोषण से भरपूरता के कारण यह बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को पसंद आता है। लेकिन हर सामान हर किसी के लिए हर समय सही नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीके से खाया जाए तो अमृत समान होता है, अन्यथा यह पाचन संबंधी घटक भी पैदा हो सकता है। किन लोगों को पनीर खाने से बचना चाहिए?सबसे पहले उन लोगों की बात करें जिनमें पनीर सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से ही खाना चाहिए- यूरिक एसिड बढ़ा हुआ हो: जिन लोगों को हाई यूरिक एसिड की समस्या है, उन्हें कम खाना खाना चाहिए। अधिक प्रोटीनयुक्त यूरिक एसिड को बढ़ाया जा सकता है, जिससे जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है।फ़्रैंच पाचन वाले लोग: फ़्लोचाडा डी फ़ाल्कन है, उन्हें भारी मात्रा में चीज़ मिल सकती है। कच्ची चीज़ में पेट में गैस, दर्द और अपच की वजह बन सकती है।कफ या सांस की समस्या: साइनसाइटिस या बार-बार खांसी-जुकाम से परेशान लोगों को खाना कम खाना चाहिए, क्योंकि इसमें कफ हो सकता है।मोटापा और उच्च कोलेस्ट्रॉल: मोटापे या उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। पनीर खाने का सही तरीका क्या है?पनीर बनाने के लिए उसका सही सेवन अत्यंत आवश्यक है- हमेशा ताज़ा और घर का बना हुआ पनीर ही आकर्षककच्ची चीज़ खाने से बचते हुए, इसे पकाकर ही सेवन करेंपाचन के लिए अदरक, काली मिर्च और हल्दी जैसे पाउडर के साथ प्रभावीअधिक तला-भुना या भारी ग्रेवी वाला पनीर नियमित रूप से न स्थिर पनीर खाने का सही समयआयुर्वेद के अनुसार पनीर का सेवन दिन के समय में आदर्श में करना सबसे अच्छा माना जाता है। रात में पनीर खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि उस समय पाचन शक्ति कम हो जाती है और इससे पेट में भारीपन, गैस और अपच का कारण बन सकता है। क्यों होती है पनीर से परेशानी?पनीर “गुरु” (भारी) खाद्य पदार्थों में आता है, यानी इसे पचाने में समय लगता है। गलत समय, गलत मात्रा या गलत तरीके से खाना खाने से खट्टी डकार, गैस और पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सही तरीके अपनाएँ, लाभ लाभपनीर सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसकी सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से खाना जरूरी है। अगर आप अपने शरीर की जरूरत और पाचन क्षमता के अनुसार इसका सेवन करेंगे, तो यह आपको पोषण भी देगा और नुकसान से भी बचाएगा।

दिल्ली का नया बजट 2026-27: राजधानी में तेजी से डिलीवरी और प्रशासनिक सुधारों का रोडमैप

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन 2026-27 का बजट सर्वसम्मति से पास हो गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट पेश करते हुए स्पष्ट किया कि अब राजधानी में काम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। उनका संदेश साफ था, यह नई सरकार है और काम करने का तरीका भी नया है। अब फोकस सिर्फ डिलीवरी पर होगा। सीएम ने भरोसा दिलाया कि अधूरे प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे, जनता के पैसे का सही हिसाब होगा और हर नागरिक को उसका हक मिलेगा। रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की बुनियादी सुविधाएं अब उनकी सरकार की प्राथमिकता हैं। अब दिल्ली को बहाने नहीं, परिणाम चाहिए। अब हेडलाइन्स नहीं, गाइडलाइन्स के साथ काम होगा और हर नागरिक को उसका अधिकार दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। यह बयान प्रशासनिक बदलाव और तेज कामकाज का संकेत देता है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर है। सीएम ने कहा, दिल्ली के सर्वांगीण विकास के लिए इस बार पूंजीगत खर्च पर अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटन किया गया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में काम आएगा। सीएम ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए बताया कि दिल्ली पर ₹47,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज छोड़ा गया, जिसमें ₹27,547 करोड़ अब भी बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया, PWD के एक प्रोजेक्ट में बिना काम हुए ₹250 करोड़ का भुगतान कर दिया गया, जो गंभीर अनियमितता को दिखाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार खिलाड़ियों, EWS वर्ग, स्कॉलरशिप, अवॉर्ड्स और किशोरी योजना से जुड़े लंबित भुगतान को साफ कर रही है। बजट में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया गया है। सीएम ने बताया कि मुनक नहर के साथ ₹5,000 करोड़ की एलिवेटेड रोड बनाई जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी। इसके अलावा मेट्रो विस्तार, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन और सड़कों के बड़े निर्माण पर भी जोर दिया गया है। ग्रीन और एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार भी इस बजट का अहम हिस्सा हैं। दिल्ली में पहली बार 4,200 हेक्टेयर रिज एरिया को फॉरेस्ट लैंड घोषित किया गया है और अगले चार साल में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत लाइसेंस प्रक्रिया आसान होगी, फायर NOC डिजिटल किया जाएगा और 1.5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज को बिजली कनेक्शन देने की योजना है। इस बजट के साथ सीएम रेखा गुप्ता ने यह साफ कर दिया कि अब बहाने नहीं, सिर्फ परिणाम होंगे। जमीनी बदलाव, बुनियादी सुविधाओं की तेजी और प्रशासनिक सुधार दिल्ली के नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाएंगे और राजधानी के विकास की दिशा को नई गति देंगे।

जमाखोरी पर बड़ा एक्शन LPG जब्ती और FIR तेज मांग से पेट्रोल डीजल व्यवस्था पर दबाव

भोपाल । मध्यप्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल डीजल की आपूर्ति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जमाखोरी और अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में अब तक 9 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है जबकि 2888 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाना है। प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया गया जिसमें अब तक 2046 स्थानों पर छापेमारी और निरीक्षण किया गया। इन कार्रवाइयों के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर अवैध रूप से संग्रहित पाए गए जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में एलपीजी और पेट्रोल डीजल का कुल स्टॉक पर्याप्त है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि दूसरी ओर जमीनी स्थिति कुछ जिलों में अलग नजर आ रही है। पेट्रोल और डीजल की सामान्य दैनिक बिक्री जहां लगभग 18548 लाख लीटर रहती है वहीं हाल के दिनों में कई जिलों में इसकी मांग 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गई है। इस अचानक बढ़ी मांग के चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें देखी गईं और कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी बन गई। सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए वितरण केंद्रों पर अतिरिक्त समय तक काम किया जा रहा है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके। इसी बीच पेट्रोल पंप संचालकों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने अब तक दी जाने वाली क्रेडिट सुविधा को बंद कर दिया है जिसके तहत पंप संचालकों को भुगतान के लिए एक सप्ताह का समय मिलता था। इस व्यवस्था के खत्म होने से कई पेट्रोल पंपों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है और कुछ पंपों पर ईंधन की उपलब्धता संकट के स्तर तक पहुंच गई है। पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि तेल कंपनियां न तो उधारी की सुविधा दे रही हैं और न ही पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं जिससे पंप संचालकों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल करीब 4500 पेट्रोल पंप संचालित हैं जिनमें से लगभग 260 केवल भोपाल में हैं। ऐसे में यदि सप्लाई और भुगतान की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर एक तरफ प्रशासन जमाखोरी पर सख्ती दिखा रहा है तो दूसरी ओर बढ़ती मांग और बदली हुई सप्लाई व्यवस्था ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस संकट का समाधान कैसे निकालती हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित

नई दिल्ली। देश की प्रमुख कोयला कंपनी Coal India Limited ने कोकिंग कोल की गुणवत्ता सुधारने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा निवेश ऐलान किया है। कंपनी करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च कर 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। इस कदम को भारत के स्टील सेक्टर को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि इन वॉशरियों को 2029-30 तक चालू कर दिया जाए। क्षमता में होगा बड़ा इजाफा, दोगुनी से ज्यादा बढ़ेगी ताकतनई वॉशरियों की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTY) होगी। फिलहाल Coal India Limited के पास 10 वॉशरियों का नेटवर्क है, जिसकी कुल क्षमता 18.35 MTY है। यानी आने वाले वर्षों में कंपनी अपनी वॉशिंग क्षमता को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगी। इससे न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि कोयले की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। क्या होती है कोकिंग कोल वॉशरी?कोकिंग कोल वॉशरी एक ऐसा संयंत्र होता है, जहां कच्चे कोयले से राख, मिट्टी और पत्थर जैसी अशुद्धियों को हटाया जाता है। इससे कोयले की गुणवत्ता बेहतर होती है और वह स्टील उत्पादन के लिए उपयुक्त बन जाता है। भारत में कोयले में राख की मात्रा 25% से 45% तक होती है, जो इसकी गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऐसे में वॉशरियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कहां लगेंगी नई वॉशरियां? नई बनने वाली 8 वॉशरियों में से-5 वॉशरियां (14.5 MTY) Central Coalfields Limited के तहत स्थापित की जाएंगी3 वॉशरियां (7 MTY) Bharat Coking Coal Limited के अंतर्गत विकसित होंगी इसके अलावा कंपनी मौजूदा वॉशरियों के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण पर भी करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। पुरानी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और निजी साझेदारीCoal India Limited राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत अपनी पुरानी वॉशरियों का भी उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही है। कुछ बंद पड़ी इकाइयों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी Tata Steel जैसी निजी कंपनियों के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग बढ़ा रही है, ताकि वॉशिंग क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके। आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचतभारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की कमी के कारण भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। Coal India Limited की यह पहल आयात निर्भरता कम करने, लागत घटाने और घरेलू स्टील उद्योग को सस्ता व बेहतर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगी।   आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदमयह निवेश न सिर्फ कोल सेक्टर बल्कि पूरे औद्योगिक ढांचे को मजबूती देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुछ मिनटों की स्क्रीन टाइम, लेकिन पहचान की गारंटी: संध्या मृदुल की कहानी..

नई दिल्ली: फिल्मी दुनिया में अक्सर यही माना जाता है कि बड़ा रोल ही बड़ी पहचान दिलाता है, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो छोटे किरदार में भी दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। संध्या मृदुल इन्हीं कलाकारों में से एक हैं। साल 2002 में आई फिल्म साथिया में सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उन्होंने अपने दमदार अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा। रानी मुखर्जी के किरदार की बहन दीना के रूप में संध्या ने एक छोटे रोल में भी ऐसा प्रभाव छोड़ा कि दर्शकों और क्रिटिक्स ने उन्हें नोटिस करना शुरू कर दिया। यही वह फिल्म थी जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी और उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत कलाकार के रूप में स्थापित किया। संध्या मृदुल का जन्म मुंबई में हुआ। उनके पिता पी.आर. मृदुल पेशे से वकील थे और बाद में जज बने। बचपन में ही परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया और पढ़ाई के लिए उन्हें जयपुर भेजा गया। संध्या के जीवन में बड़ा झटका तब आया जब 14 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनके बड़े भाई ने उनकी जिम्मेदारी संभाली। पढ़ाई में संध्या ने हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने गणित में ग्रेजुएशन किया और पोस्ट ग्रेजुएशन मार्केटिंग में की, इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट जॉब भी की। साधारण नौकरी से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना आसान नहीं था, लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया। टीवी शो स्वाभिमान से उनके करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद बनेगी अपनी बातकोशिश और हू ब हू जैसे धारावाहिकों ने उन्हें टीवी की दुनिया में मजबूत पहचान दिलाई। टीवी के बाद संध्या मृदुल ने फिल्मों की ओर रुख किया। साथिया के बाद उन्होंने साल 2005 में आई पेज 3 में एयर होस्टेस का किरदार निभाया, जिसे क्रिटिक्स ने खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेडडेडलाइन: सिर्फ 24 घंटे और द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। संध्या सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने टीवी और वेब सीरीज में भी काम किया और हर प्लेटफॉर्म पर अपनी छाप छोड़ी। झलक दिखला जा में फर्स्ट रनर-अप रहने से उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। उनकी मेहनत और प्रतिभा के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स और नॉमिनेशन भी मिले, जिनमें पेज 3 के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का सम्मान शामिल है। अपने करियर के दौरान संध्या ने कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने हमेशा अलग और चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुना और अपनी एक्टिंग से दर्शकों को प्रभावित किया। संध्या मृदुल की कहानी यह साबित करती है कि छोटा रोल भी बड़ा प्रभाव छोड़ सकता है, बशर्ते उसमें प्रतिभा और मेहनत हो।

जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी हल्दी कंपनियों के बीच ‘मिस-सेलिंग’ पर सहमति की तैयारी की है। प्रस्तावित नए नियम जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं, जैसे मुख्य उद्देश्य निवेशकों को गलत या बुनियादी जानकारी हासिल करने वाले वित्तीय योजनाओं पर रोक लगाना है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद यदि किसी ग्राहक को पता चलता है कि उसके साथ धोखे से कोई उत्पाद निकाला गया है, तो वह शिकायत करेगा और जांच के मामले में सही पाए जाने पर बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा। मिस-सेलिंग क्या है? आसान भाषा में‘मिस-सेलिंग’ का मतलब ग्राहक की ज़रूरत, प्रोफ़ाइल या समझ के आधार पर वित्तीय उत्पाद युवाओं के लिए गलत जानकारी है। ऐसा अक्सर होता है जब बैंक कर्मचारी अपने निवेशकों या इंसेंटिव के दबाव में निवेशकों को बीमा, फंड फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचते हैं। कई बार रिस्क, लॉक-इन होम या रिटर्न से जुड़ी अहम जानकारी छिपा ली जाती है। उदाहरण के तौर पर पर-एफडी ने ग्राहकों को यूलिप से “सेफ इन्वेस्टमेंट” में शामिल कियालोन के साथ इंश्योरेंश जॉइंट देनाबुजुर्ग व्यक्ति को लंबी अवधि की स्थायित्व थमा देना ये सभी मिस-सेलिंग के क्लासिक केस माने जाते हैं। जुलाई 2026 से क्या बदला जाएगा? भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित पदासीन पदों के लिए आवेदकों के लिए स्पष्ट और बंधनकारी प्रणाली बनाई जाएगी। यदि ग्राहक को समय सीमा निर्धारित नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर सकता है। अगर जांच में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो-उत्पादों को रद्द करना होगाग्राहक को पूरी रकम लौटानी होगीहुए नुकसान की खोज भी करनी होगीइसके अलावा, बैंकों को अपने कर्मचारियों को ऐसे उत्पाद बेचने के लिए गलत प्रोत्साहन देने से भी रोकना होगा। सिस्टम से सुपरमार्केट प्लांटनए स्नातक के अधीन संस्थानों को हर स्टायर्ड पार्टी उत्पाद की बिक्री के लिए 30 दिन के अंदर ग्राहक से अंतिम संस्कार लेना अनिवार्य होगा। इस डेटा के आधार पर हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिस्टम में टुकड़े और टुकड़े होंगे। बदनसीब की वजहपिछले कुछ वर्षों में बैंकों की ऑर्थोडॉक्स पार्टी के उत्पादों की कमाई तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का कमीशन कमाया। इसी प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार और जनरल जनरल को अब सबसे ज्यादा छूट दी गई है। हाल ही में निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को अपने मूल कार्य-जमा और कर्ज-पर ध्यान देने की सलाह दी थी। वेबसाइट के लिए क्या जरूरी है?ऐसे विंटेज को भी रहने की ज़रूरत है। किसी भी वित्तीय उत्पाद के रिकॉर्ड्स से पहले— सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ेंजोखिम और ऑटोमोबाइल को मंजूरीकेवल मूल्यवान वादों पर भरोसा न करेंआवश्यकता है लिखित जानकारी लेने की यदि आपको लगता है कि आपके साथ कुछ गलत हुआ है, तो आप अपने बैंक की वेबसाइट या संबंधित लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वाद-विवाद के हित में बड़ा कदमभारतीय रिज़र्व बैंक का यह कदम नेटवर्क सिस्टम में निवेशकों की रक्षा करने की दिशा को बढ़ाना और महत्व देना माना जा रहा है। इससे मिस-सेलिंग जैसी समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।

KKR vs MI: 35 मुकाबलों में किस टीम का रहा दबदबा? जानिए पूरा रिकॉर्ड

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में जब मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स का मुकाबला होगा- तो मुकाबला सिर्फ दो मैचों के बीच नहीं बल्कि इतिहास के बीच और स्थिर फॉर्म के बीच भी होगा। अब तक दोनों टीमों के बीच कुल 35 मैच खेले जा चुके हैं, जिसमें मुंबई इंडियंस ने 24 गोलकीपर की स्पष्ट बढ़त बनाई है, जबकि केकर को सिर्फ 11 जीत ही मिल पाई हैं। प्रारंभिक प्रारंभिक में एमआई का पूर्ण तरह का बाज़ारआईपीएल के शुरुआती सीज़न में मुंबई इंडियंस ने केकेआर पर पूरी तरह से सुपरमार्केट बनाया। 2008 और 2009 में ऑल सब्जेक्ट मुंबई ने जीत हासिल की। इसके बाद 2010 और 2011 में भी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और जीत हासिल की। उस दौर में केकेआर की मुंबई के सामने पहली नजर थी। बीच के सीज़न में केकेआर ने दी टक्कर2012 से 2015 के बीच कोलकाता नाइट राइडर्स ने वापसी के संकेत दिये। खास तौर पर 2014 और 2015 में खेले गए 4 मैचों में से 3 में जीत हासिल कर केकेआर ने दिखाया कि वह अब ग्रुप में शामिल हो सकते हैं। इस दौरान टीम ने अपना सामान भी रखा। 2016-2018: फिर एमआई का अनडोर राज2016 से 2018 के बीच मुंबई इंडियंस ने केकेआर के खिलाफ लगातार 7 गोलकीपर से अपनी बादशाहत साबित की। यह दौर पूरी तरह से मुंबई के नाम पर रखा जा रहा है, जहां केकर को जीत के लिए परेशान होना पड़ा। हाल के प्राचीन में नवीनतम रुझानअगर पिछले 4 सीजन की बात करें तो कहानी में कुछ अलग नजर आती है। इस दौरान खेले गए 6 मुकाबलों में से 4 मैचों में कोलकाता नाइट राइडर्स ने जीत हासिल की है। इससे साफ है कि केकेआर अब मजबूत कंपनी लौट आई है और मुंबई को चुनौती दे रही है। एमआई आगे, केकेआर पीछे लेकिन मजबूतमुंबई इंडियंस आईपीएल की सबसे सफल रेस में से एक है और 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में कुल 5 खिताब जीते हैं। वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स ने 2012, 2014 और 2024 में 3 बार ट्रॉफी अपने नाम की है। दोनों ग्राफिक्स के पास के मैच विनर प्लेयर्स की भरमार है, जो ग्लूकोज़ को चकमा देते हैं। स्टार खिलाड़ियों से भरी स्क्वॉडमुंबई इंडियंस के वैज्ञानिक हार्दिक पंड्या कर रहे हैं, जबकि टीम में रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और जसप्रित बुमरा जैसे मैच विनर खिलाड़ी मौजूद हैं। दूसरी ओर केकर के पास अजिंक्य रहाणे, सुनील नरेन और रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ी हैं, जो किसी भी मैच का रुख बदल सकते हैं। इतिहास एमआई के साथ, फॉर्म केकेआर के पक्ष मेंकुल मिलाकर आंकड़े मुंबई इंडियंस के पक्ष में हैं, लेकिन कोलकाता नाइट राइडर्स के प्रदर्शन के आधार पर कोई भी दस्तावेज नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में आईपीएल 2026 का यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।