RBI का 3 सरकारी बैंकों पर बड़ा एक्शन… लगाया 2.17 करोड़ से अधिक का जुर्माना

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने अलग-अलग नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के कारण तीन सार्वजनिक बैंकों (Three Public Sector Banks) पर कुल दो करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक ने एक बयान में बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स पर भी तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडियाआरबीआई के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग की समुचित व्यवस्था न करने और परिसंपत्ति वर्गीकरण तंत्र में मानवीय हस्तक्षेप करने के लिए 95.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने पाया कि बैंक ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए ग्राहकों को अलग-अलग चैनलों पर 24 घंटे रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। बैंक ऑफ इंडियाइसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक पर प्राथमिक सेक्टर को लोन देने और जमा पर ब्याज संबंधी नियमों के उल्लंघन का आरोप है। बैंक ने प्राथमिक क्षेत्रों के 25 हजार रुपये तक के लोन देने पर भी सर्विस चार्ज, निरीक्षण शुल्क और प्रोसेसिंग चार्ज वसूले थे। इसके अलावा बैंक ने सावधि जमा खातों पर मैच्योरिटी की तारीख से पैसे ग्राहकों को देने की तारीख तक के लिए ब्याज भुगतान नहीं किया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडियासेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर केवाईसी और बुनियादी बचत बैंक जमा खाता संबंधी नियमों के उल्लंघन के कारण 63.60 लाख का जुर्माना लगा है। वह तय समय सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री में कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड अपडेट करने में विफल रहा था। इसके अलावा बैंक को कुछ ग्राहकों के एक से अधिक बुनियादी बचत बैंक जमा खाता खोलने का भी दोषी पाया गया। पाइन लैब्स पर भी एक्शनकेंद्रीय बैंक ने पाइन लैब्स को प्रीपेड भुगतान तंत्र संबंधी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया और उस पर तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने बताया कि तीन सार्वजनिक बैंकों और पाइन लैब्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लिखित जवाब और मौखिक सुनवाई में दिये गये जवाब असंतोषजनक पाए जाने के बाद जुर्माने की कार्रवाई की गई है। एचएसबीसी पर भी लगा था जुर्मानाहाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन (एचएसबीसी) पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बैंक पर निष्क्रिय खातों और बिना दावे वाली जमा राशि से जुड़े कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है। बैंक की निगरानी संबंधी जांच उसके 31 मार्च, 2025 तक के वित्तीय हालात के आधार पर की गई थी। जांच में आरबीआई के निर्देशों के पालन में कमी मिलने के आधार पर बैंक को नोटिस जारी किया गया। आरबीआई ने कहा कि नोटिस पर बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियां और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद यह पाया गया कि बैंक पर लगे आरोप सही हैं। इसी कारण उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया।
31 मार्च तक निपटा लें ये जरूरी काम….. इस दिन खत्म हो जा रही है डेडलाइन

नई दिल्ली। एक अप्रैल (April 1st) से नए फाइनेंशियल ईयर (New Financial Year) की शुरुआत होने वाली है। इससे पहले, 31 मार्च को खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर में कुछ जरूरी काम निपटा लेने होंगे। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई ऐसी डेडलाइन (Deadline) हैं जो 31 मार्च को पूरी हो रही हैं। इनमें इनकम टैक्स (Income Tax) और इन्वेस्टमेंट (Investment) से जुड़ी डेडलाइन (Deadline) भी शामिल हैं। वेतन आयोग को सुझाव देने की डेडलाइन8वें वेतन आयोग ने वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित सुधारों के लिए सुझाव और राय आमंत्रित किए हैं, जिसके लिए अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई है। यह डेडलाइन केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न हितधारकों के लिए है। बता दें कि वेतन आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए MyGov पोर्टल पर 18 सवालों का एक विस्तृत प्रश्नावली जारी किया है। इस प्रश्नावली के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों, न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट कर्मचारियों, नियामक संस्थाओं के सदस्यों, कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों से राय मांगी गई है। ITR-U की डेडलाइन31 मार्च तक अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) फाइल करने की डेडलाइन है। जिन लोगों ने अपनी कोई इनकम रिपोर्ट नहीं की है या इनकम का गलत हिसाब लगाया है, जिससे उनकी इनकम टैक्स देनदारी कम हो गई है, उनके पास अब इस गलती को सुधारने का मौका है। ऐसे लोग ITR-U फाइल करके ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखें कि ITR-U फाइल करने के लिए आपको पेनल्टी और ब्याज के तौर पर अतिरिक्त इनकम टैक्स देना होगा और ITR-U के जरिए टैक्स रिफंड का कोई दावा नहीं किया जा सकता। पहले ITR-U का इस्तेमाल पिछले दो सालों की गलतियों को सुधारने के लिए किया जा सकता था लेकिन बजट 2025 में, इस समयसीमा को बढ़ाकर पिछले चार सालों तक कर दिया गया है। अगर आप रिटर्न सही समय पर भरने या सही डेटा देने से चूक गए हैं तो समझदारी इसी में है कि आप अभी अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करें और ITR-U फाइल कर दें। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप अभी ITR-U फाइल नहीं करते हैं और बाद में इनकम टैक्स विभाग आपको पकड़ लेता है, तो आप पर अभी ITR-U फाइल करने के लिए लगने वाली पेनल्टी से कहीं ज्यादा बड़ी पेनल्टी लगाई जा सकती है। धारा 80C के तहत टैक्स बचाने का आखिरी मौकापुराने टैक्स सिस्टम को मानने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 31 मार्च निवेश करने का आखिरी मौका है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे विकल्पों में योगदान 31 मार्च से पहले पूरा कर लेना चाहिए। इन निवेशों में देरी करने का मतलब हो सकता है कि आप मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए कीमती टैक्स छूट से चूक जाएं। – नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले यह आवेदन कर लेना चाहिए। इससे अप्रैल 2026 से ही डिडक्टर सही दर पर TDS काट सकेंगे। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है लेकिन प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी है।– वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) का TDS रिटर्न जमा करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है। PAN कार्ड नियमों की समय सीमा31 मार्च के बाद आप सिर्फ आधार का इस्तेमाल करके PAN के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। इसलिए अगर आप कम से कम डॉक्यूमेंट्स और बिना किसी परेशानी के PAN कार्ड के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो आपको यह 31 मार्च को या उससे पहले करना होगा। उसके बाद, पैन एप्लीकेशन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, वोटर ID, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी। जरूरत पड़ने पर एफिडेविट और दूसरे सरकारी डॉक्यूमेंट्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। नियोक्ताओं को निवेश के प्रमाण जमा करनाआपको 31 मार्च 2026 की समय सीमा तक अपने नियोक्ता को अपने निवेश के प्रमाण जमा करने होंगे। इनमें मकान किराया भत्ता (HRA) के दावों के लिए किराए की रसीदें, जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान की रसीदें, ELSS निवेश विवरण, PPF पासबुक या जमा की रसीदें शामिल हैं।
आज का राशिफल: 28 मार्च, मेष से मीन राशि तक का दिन कैसा रहेगा, पढ़ें पूरी जानकारी

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रह और नक्षत्रों की चाल से 12 राशियों के दिन का अंदाजा लगाया जाता है। 28 मार्च 2026 के लिए राशिफल में बताया गया है कि किन राशि वालों को लाभ मिलेगा और किन लोगों को सतर्क रहना होगा। मेष मेष राशि वालों के लिए समय ठीक ठाक है, लेकिन मन अशांत रहेगा। उतार-चढ़ाव के बीच खुद को नियंत्रित करना जरूरी है। दांपत्य सुख में वृद्धि होगी। नौकरी में बदलाव के साथ तरक्की और आय में वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। वृषभ वृषभ राशि वालों के लिए मिलाजुला समय है। प्रोफेशनल लाइफ में आज आत्मविश्वास से काम पूरे होंगे। मित्र के सहयोग से आय बढ़ सकती है। कारोबार में वृद्धि होगी, लेकिन भागदौड़ अधिक रहेगी। मिथुन मिथुन राशि वालों के लिए कंफ्यूजन का समय है। आत्मविश्वास में कमी रह सकती है। प्रोफेशनल्स का सपोर्ट आपके लिए लाभकारी रहेगा। जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकते हैं। अधिकारियों से बातचीत में संभलकर रहें। कर्क कर्क राशि के लोगों का मन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। कारोबार में लाभ के मौके मिलेंगे। जीवन में भागदौड़ अधिक रहेगी। शैक्षिक कार्यों में मान-सम्मान मिलेगा। गलत फैसलों और विवादों से दूर रहें। सिंह सिंह राशि के लोगों का आत्मविश्वास उच्च रहेगा और मन प्रसन्न रहेगा। पर्सनल लाइफ में लवर के साथ कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। शैक्षिक और बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान मिलेगा। वाहन सुख में वृद्धि होगी। तुला बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ेगी। विदेश यात्रा के अवसर मिल सकते हैं। वस्त्रों आदि पर खर्च बढ़ेंगे। धन की प्राप्ति संभव है। हेल्थ का ध्यान रखें। समृद्धि आपके पक्ष में रहेगी। धनुधनु राशि वालों को पर्सनल लाइफ में अच्छा समय मिलेगा। घर खरीदने का विचार करें। प्रोफेशनल लाइफ में फोकस बनाए रखें। धन संबंधी मामलों में एक्सपर्ट की सलाह लेना लाभकारी रहेगा। मकर मकर राशि वालों को अपनी स्थिति बनाए रखना जरूरी है। लाइफस्टाइल संतुलित रखें। विवादों से दूर रहें। ऑफिस में सहयोगियों का सपोर्ट अहम रहेगा। कुंभ कुंभ राशि वालों को उधार देने से बचना चाहिए। फाइनेंस से जुड़े मामलों में सतर्क रहें। किसी पर अंधविश्वास न करें। हेल्थ और लाइफस्टाइल में सुधार लाएं।कन्या कन्या राशि के लोगों के लिए पॉजिटिव रहना जरूरी है। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में किसी की गाइडेंस लें। वाहन और घर खरीद सकते हैं, लेकिन खर्चों पर कंट्रोल रखें। योग और मेडिटेशन आपके लिए लाभकारी होंगे। वृश्चिक वृश्चिक राशि वालों को रिस्क लेने से बचना चाहिए। पार्टनर के साथ भावनाओं को साझा करें। अपने रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें। एनर्जी बनाए रखने के लिए एक्सरसाइज करें। मीन मीन राशि वालों को आर्थिक स्थिति पर खास ध्यान देना होगा। प्लानिंग करके काम करें। तनाव महसूस होने पर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। प्रोफेशनल लाइफ में फोकस और एरर फ्री काम करना जरूरी है।
आयुर्वेद का खजाना हैं पपीते के पत्ते, जानें फायदे और सही इस्तेमाल का तरीका

नई दिल्ली। अक्सर लोग पपीता खाते समय उसके पत्तों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन वास्तव में ये पत्ते कई औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पपीते के पत्ते शरीर को अंदर से मजबूत बनाने और कई समस्याओं से राहत दिलाने में बेहद प्रभावी हैं। पपीते के पत्तों में विटामिन A C और E प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें पपेन नामक एंजाइम और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इन्हें प्राकृतिक औषधि माना जाता है। पाचन तंत्र के लिए पपीते के पत्ते किसी वरदान से कम नहीं हैं। इनमें मौजूद एंजाइम भोजन को जल्दी पचाने में मदद करते हैं जिससे गैस अपच और पुरानी कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। इसके अलावा पपीते के पत्तों का रस लिवर के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं जिससे लिवर डिटॉक्स होता है और उसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डेंगी के दौरान भी पपीते के पत्तों का उपयोग लाभकारी माना जाता है। यह प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाने में सहायक हो सकता है हालांकि इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह उपयोगी है क्योंकि इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साथ ही इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। सिर्फ सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी पपीते के पत्ते फायदेमंद हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को निखारते हैं और मुंहासों को कम करने में मदद करते हैं। वहीं बालों की जड़ों को मजबूत बनाकर उनके विकास को भी बढ़ावा देते हैं। हालांकि पपीते के पत्तों का सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है। सही तरीके से उपयोग करने पर यह साधारण सा पत्ता आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
वैश्विक संकट के बीच मानवता की अंतिम सुरक्षा-रेखा है ऊर्जा संरक्षण

– योगेश कुमार गोयल आज जब विश्व एक बार फिर भू-राजनीतिक तनावों के दौर से गुजर रहा है और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है, तब ऊर्जा केवल विकास का साधन नहीं बल्कि अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है। तेल और गैस के दामों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और ऊर्जा स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर विवश कर दिया है कि क्या आधुनिक सभ्यता ने अपनी बुनियाद अत्यधिक अस्थिर संसाधनों पर खड़ी कर दी है। इस परिप्रेक्ष्य में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं बल्कि मानवता की सुरक्षा का सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय बनकर उभर रहा है। ऊर्जा आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग है, चाहे वह उद्योगों की मशीनें हों, परिवहन के साधन हों, डिजिटल अर्थव्यवस्था हो या घरेलू जीवन की सुविधाएं किंतु विडंबना यह है कि जिस ऊर्जा पर हमारी प्रगति आधारित है, वही अब संकट का कारण बनती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की ‘एनर्जी प्रोग्रेस रिपोर्ट 2024’ के अनुसार आने वाले दशक में वैश्विक ऊर्जा मांग में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है जबकि जीवाश्म ईंधनों के भंडार तेजी से सीमित होते जा रहे हैं। ऐसे में यदि ऊर्जा संरक्षण और दक्षता को प्राथमिकता नहीं दी गई तो भविष्य में ऊर्जा संकट केवल आर्थिक चुनौती नहीं रहेगा बल्कि सामाजिक अस्थिरता और वैश्विक संघर्षों का कारण भी बन सकता है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य इस खतरे को और स्पष्ट करता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हो रही हैं। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। दरअसल भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम नागरिक के जीवन पर पड़ता है। पैट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि केवल परिवहन लागत को नहीं बढ़ाती बल्कि खाद्य पदार्थों से लेकर निर्माण सामग्री तक हर क्षेत्र में महंगाई को जन्म देती है। इस परिप्रेक्ष्य में ऊर्जा संरक्षण राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण आधार बन जाता है। भारत तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था है और यहां ऊर्जा की मांग निरंतर बढ़ रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की ‘इंडिया एनर्जी आउटलुक 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी ऊर्जा उपभोक्ता अर्थव्यवस्था बन जाएगा। ऐसे में यदि ऊर्जा खपत को संतुलित नहीं किया गया तो विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाएगा। यही कारण है कि भारत ने ऊर्जा दक्षता और संरक्षण को अपनी नीति का केंद्रीय तत्व बनाया है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा लागू ऊर्जा संरक्षण अधिनियम और ‘उजाला’ जैसे कार्यक्रमों ने यह साबित किया है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। 36 करोड़ से अधिक एलईडी बल्बों का वितरण और उससे हुई 48 बिलियन यूनिट बिजली की बचत इस बात का प्रमाण है कि यदि नीति और जनभागीदारी साथ आएं तो ऊर्जा संरक्षण एक जनांदोलन बन सकता है। ऊर्जा संरक्षण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह किसी नई तकनीक या बड़े निवेश पर निर्भर नहीं है बल्कि यह हमारे दैनिक व्यवहार में छोटे-छोटे बदलावों से ही संभव है। उदाहरण के लिए, अनावश्यक रूप से जलती लाइटों को बंद करना, ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग करना, एयर कंडीशनर का सीमित प्रयोग, सार्वजनिक परिवहन को अपनाना और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना, ये सभी कदम न केवल ऊर्जा बचाते हैं बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखते हैं। यदि भारत का प्रत्येक परिवार प्रतिदिन केवल एक यूनिट बिजली की बचत करे तो यह देश के लिए ऊर्जा क्रांति के समान होगा। ऊर्जा संरक्षण का संबंध केवल बिजली तक सीमित नहीं है बल्कि यह जल, पर्यावरण और स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। ऊर्जा उत्पादन में जल का व्यापक उपयोग होता है और जल की बर्बादी सीधे ऊर्जा की बर्बादी में बदल जाती है। इसी प्रकार, ऊर्जा के अत्यधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जो जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि का मुख्य कारण है। आज जब दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, तब ऊर्जा संरक्षण इस दिशा में सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकता है। अक्षय ऊर्जा इस संकट का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है लेकिन इसकी सफलता भी ऊर्जा संरक्षण पर ही निर्भर करती है। सौर, पवन और जैव ऊर्जा जैसे स्रोतों का विस्तार तभी प्रभावी होगा, जब ऊर्जा की कुल मांग को नियंत्रित किया जाए। भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और स्मार्ट ग्रिड जैसी तकनीकें इस दिशा में नई संभावनाएं खोल रही हैं लेकिन इन सबका मूल आधार ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग ही है। शहरीकरण के बढ़ते दबाव ने भी ऊर्जा खपत को तेजी से बढ़ाया है। महानगरों में ऊंची इमारतें, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और बढ़ती वाहन संख्या ऊर्जा की मांग को कई गुना बढ़ा देती है। ऐसे में हरित भवन निर्माण, सौर पैनलों का उपयोग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना आवश्यक हो जाता है। यदि भवन निर्माण में ऊर्जा दक्षता को प्राथमिकता दी जाए तो बिजली की खपत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी होगा बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। ऊर्जा संरक्षण का एक महत्वपूर्ण आयाम औद्योगिक क्षेत्र भी है। उद्योगों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने से उत्पादन लागत में कमी आती है और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि ऊर्जा संरक्षण को केवल सरकारी नीति या अभियान के रूप में न देखा जाए बल्कि इसे एक सामाजिक संस्कृति के रूप में विकसित किया जाए। विद्यालयों में ऊर्जा शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाए, मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाई जाए और प्रत्येक नागरिक को यह समझाया जाए कि ऊर्जा की बचत केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य है। जब तक ऊर्जा संरक्षण
जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता : बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम और पारंपरिक भ्रांतियाँ

डॉ. शैलेश शुक्ला भारत आज दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। 2024 में भारत की जनसंख्या लगभग 145 करोड़ को पार कर गई है। यह एक ऐसी समस्या है जो देश के विकास, संसाधनों, पर्यावरण और लोगों के जीवन स्तर पर सीधा असर डालती है। एक तरफ जहाँ देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती आबादी उस तरक्की को खा जा रही है। सड़कों पर भीड़, अस्पतालों में लंबी कतारें, स्कूलों में जगह की कमी और बेरोजगारी — ये सब बढ़ती जनसंख्या के प्रत्यक्ष परिणाम हैं। इस लेख में हम बढ़ती जनसंख्या से होने वाले नुकसानों को समझेंगे और उन पारंपरिक विचारधाराओं का खंडन करेंगे जो अधिक संतान पैदा करने को प्रेरित करती हैं। भारतीय समाचार विश्लेषण बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम : गरीबी और भुखमरी : लेख लेखन कार्यशाला जब किसी परिवार में कमाने वाला एक होता है और खाने वाले दस, तो गरीबी अपने आप आ जाती है। यही बात पूरे देश पर लागू होती है। भारत में उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा तेजी से आबादी बढ़ रही है। नतीजा यह होता है कि प्रति व्यक्ति आय कम रह जाती है। करोड़ों लोग आज भी दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहे हैं। गरीबी का सीधा संबंध अधिक जनसंख्या से है। बेरोजगारी : हर साल लाखों युवा पढ़-लिखकर नौकरी ढूँढने निकलते हैं, लेकिन नौकरियाँ उतनी तेजी से नहीं बढ़तीं जितनी तेजी से लोग बढ़ रहे हैं। एक सरकारी पद के लिए लाखों आवेदन आते हैं। इससे निराशा, अपराध और सामाजिक अस्थिरता बढ़ती है। अगर जनसंख्या नियंत्रित होती तो हर हाथ को काम मिलना आसान होता। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ : सरकारी स्कूलों में एक कक्षा में 60-70 बच्चे बैठते हैं, जहाँ शिक्षक का ध्यान हर बच्चे पर देना असंभव हो जाता है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की इतनी भीड़ होती है कि डॉक्टर को एक मरीज को देखने के लिए मुश्किल से दो मिनट मिलते हैं। बढ़ती आबादी के कारण सरकार चाहकर भी हर व्यक्ति तक अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुँचा पाती। पर्यावरण का विनाश : ज्यादा लोग यानी ज्यादा जमीन की जरूरत, ज्यादा पानी की खपत, ज्यादा प्रदूषण और ज्यादा कचरा। जंगल काटकर बस्तियाँ बसाई जा रही हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, भूजल का स्तर गिर रहा है। जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि है। अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाली पीढ़ियों को साफ पानी और स्वच्छ हवा भी नसीब नहीं होगी। आवास और शहरीकरण की समस्या : शहरों में जगह कम पड़ रही है। मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही है। लोग तंग और अस्वच्छ जगहों पर रहने को मजबूर हैं। ट्रैफिक जाम, पानी की कमी और बिजली की समस्या — ये सब अधिक जनसंख्या का ही नतीजा है। अपराध और सामाजिक अशांति : जब लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होतीं तो अपराध बढ़ता है। भूख, बेरोजगारी और निराशा लोगों को गलत रास्ते पर धकेलती है। अधिक जनसंख्या वाले इलाकों में चोरी, लूट और हिंसा की घटनाएँ ज्यादा देखी जाती हैं। पारंपरिक भ्रांतियाँ और उनका खंडन : हमारे समाज में कई ऐसी पुरानी मान्यताएँ प्रचलित हैं जो लोगों को अधिक संतान पैदा करने के लिए प्रेरित करती हैं। इन मान्यताओं की जड़ें धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में हैं। आइए इन भ्रांतियों को एक-एक करके समझें और उनका तर्कपूर्ण खंडन करें। भ्रांति 1 : संतान से मोक्ष मिलता है : यह सबसे प्रचलित मान्यता है कि पुत्र के बिना मोक्ष नहीं मिलता। कहा जाता है कि पुत्र पिंडदान करेगा तो पूर्वज मुक्त होंगे। इस मान्यता के कारण लोग बेटे की चाह में कई संतानें पैदा करते रहते हैं। खंडन : अगर हम धर्मग्रंथों को गहराई से पढ़ें तो मोक्ष कर्म, ज्ञान और भक्ति से मिलता है, संतान की संख्या से नहीं। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि मोक्ष का मार्ग निष्काम कर्म और आत्मज्ञान है। कोई भी धर्मग्रंथ यह नहीं कहता कि जिसके ज्यादा बच्चे होंगे, उसे ज्यादा पुण्य मिलेगा। मोक्ष व्यक्ति के अपने आचरण, सदाचार और आध्यात्मिक साधना पर निर्भर करता है। अगर संतान से ही मोक्ष मिलता तो संन्यासियों, साधुओं और ऋषि-मुनियों को मोक्ष कैसे प्राप्त होता? शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद — इन सबने संतान नहीं उत्पन्न की, फिर भी ये महापुरुष माने गए। भ्रांति 2 : बेटा जरूरी है, बेटी से काम नहीं चलता : समाज में यह धारणा गहरी जड़ें जमाए बैठी है कि बेटा वंश आगे बढ़ाता है, बुढ़ापे का सहारा बनता है और अंतिम संस्कार करता है। इसलिए लोग बेटे की चाह में बच्चे पैदा करते रहते हैं। खंडन : आज के समय में बेटियाँ हर क्षेत्र में बेटों से आगे निकल रही हैं। चाहे सेना हो, अंतरिक्ष हो, खेल हो या प्रशासन — बेटियाँ हर जगह अपना परचम लहरा रही हैं। कई बेटियाँ अपने माता-पिता की बुढ़ापे में बेटों से बेहतर देखभाल करती हैं। रही बात अंतिम संस्कार की, तो आज कानूनी रूप से बेटी को भी यह अधिकार प्राप्त है। जो लोग बेटे की चाह में पाँच-छह बेटियाँ पैदा कर देते हैं, वे न उन बेटियों को अच्छी शिक्षा दे पाते हैं, न अच्छा जीवन। यह कोई समझदारी नहीं, बल्कि मूर्खता है। भ्रांति 3 : ज्यादा बच्चे यानी बुढ़ापे का सहारा : कई लोग सोचते हैं कि जितने ज्यादा बच्चे होंगे, बुढ़ापे में उतना ज्यादा सहारा मिलेगा। उनका मानना है कि एक-दो बच्चे हुए तो कौन देखभाल करेगा। खंडन : सच्चाई यह है कि आज के समय में ज्यादा बच्चे होने का मतलब ज्यादा सहारा नहीं बल्कि ज्यादा खर्चा और ज्यादा चिंता है। अगर आप दो बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हैं, उन्हें संस्कारवान बनाते हैं तो वे दो बच्चे दस बच्चों से बेहतर देखभाल करेंगे। दूसरी तरफ, अगर पाँच-छह बच्चे हों और किसी को भी अच्छी शिक्षा या संस्कार न मिले, तो वे सब मिलकर भी बुढ़ापे में सहारा नहीं बन पाएँगे। आज वृद्धाश्रमों में ऐसे बहुत से बुजुर्ग हैं जिनके चार-पाँच बच्चे हैं, लेकिन कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं।
Ola-Hero को टक्कर देने आ रहे VinFast के नए ई-स्कूटर, लॉन्च की तैयारी पूरी

नई दिल्ली। वियतनाम की ऑटो कंपनी VinFast अब भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने पुष्टि की है कि वह अपने तीन इलेक्ट्रिक स्कूटर Evo, Feliz और Viper को भारत में लॉन्च करेगी। ऑटोकार की रिपोर्ट के अनुसार, इन स्कूटर्स को भारतीय सड़कों और उपयोग के हिसाब से तैयार किया जाएगा, ताकि लोकल कंडीशंस में बेहतर परफॉर्मेंस मिल सके।भारत में ऐसे होगी एंट्री शुरुआती चरण में ये स्कूटर CKD यूनिट्स के रूप में भारत लाए जाएंगे और तमिलनाडु स्थित प्लांट में असेंबल किए जाएंगे। कंपनी ने राज्य सरकार के साथ MoU साइन किया है, जिसके तहत थूथुकुडी के SIPCOT इंडस्ट्रियल पार्क में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन पर अपनी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। भारतीय बाजार में इनका सीधा मुकाबला TVS iQube, Bajaj Chetak, Ola S1, Ather Rizta और Hero Vida जैसे इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से होगा। VinFast स्कूटर्स के फीचर्स Viper इस नई लाइनअप का सबसे प्रीमियम मॉडल होगा, जिसमें एडवांस डिजाइन और नई टेक्नोलॉजी दी जाएगी। इसमें LED प्रोजेक्टर हेडलैंप, स्मार्ट-की सिस्टम, व्हीकल ट्रैकिंग, रिमोट सर्च और एंटी-थेफ्ट फीचर्स मिलेंगे। इसमें 3,000W BLDC इन-हब मोटर दी गई है, जो इसे 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड तक पहुंचने में सक्षम बनाती है। Feliz भी लगभग इसी परफॉर्मेंस के साथ आएगा, जबकि Evo में 2,450W इन-हब मोटर दी जाएगी। ये दोनों मॉडल भी 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड हासिल कर सकते हैं। वहीं, Evo Lite वर्जन की स्पीड 50 किमी/घंटा से कम रखी गई है, जिससे इसे बिना ड्राइविंग लाइसेंस के चलाया जा सकता है। बैटरी और रेंज इन सभी स्कूटर्स में बैटरी स्वैप टेक्नोलॉजी दी जाएगी। सीट के नीचे दो बैटरी स्लॉट होंगे, जिनमें 1.5 kWh की LFP बैटरियां लगेंगी। दोनों बैटरियों के फुल चार्ज होने पर Evo करीब 165 किमी तक चल सकता है, जबकि Viper और Feliz लगभग 156 किमी की रेंज देने में सक्षम होंगे। खबरों के मुताबिक, कंपनी ने Evo सीरीज के लिए एडवांस बुकिंग भी शुरू कर दी है, जिससे शुरुआती ग्राहकों को खास लाभ मिलने की संभावना है।
नवरात्रि का अंतिम दिन: मां सिद्धिदात्री की महिमा और कथा से मिलेगा सुख समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन महानवमी पर मां सिद्धिदात्री पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन मां दुर्गा के नौवें और पूर्ण स्वरूप की आराधना का होता है, जिसे सिद्धियों की दात्री कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा के बाद उनकी कथा का पाठ करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। कहा जाता है कि शिवने भी मां की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें अष्टसिद्धियां प्रदान कीं। यही कारण है कि भगवान शिव का एक रूप अर्धनारीश्वर कहलाता है, जिसमें वे आधे शिव और आधी शक्ति के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक कथा के अनुसार जब असुरों का अत्याचार बढ़ गया और देवता परेशान हो उठे, तब सभी देवताओं ने विष्णुऔर भगवान शिव से सहायता की प्रार्थना की। इसके बाद सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा गया। यह स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी माना जाता है, जो भक्तों के जीवन से भय और बाधाओं को दूर करता है। ऐसी मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की आराधना के बिना किसी भी देवी-देवता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। देवी हिमालय के शिखर पर विराजमान होकर समस्त सिद्धियों की रक्षा करती हैं और अपने भक्तों को ज्ञान, बुद्धि, स्वास्थ्य और धन का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। महानवमी के दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से मां की पूजा करते हैं, कथा सुनते और पढ़ते हैं तथा अंत में आरती कर भोग अर्पित करते हैं। पूजा के समापन पर मां से क्षमा याचना करना भी अत्यंत आवश्यक माना गया है। भक्त विनम्र भाव से प्रार्थना करते हैं कि पूजा में हुई किसी भी त्रुटि को मां क्षमा करें और अपने आशीर्वाद से जीवन को सुखमय बनाएं। यह पावन दिन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से जीवन की हर बाधा दूर की जा सकती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की कथा और पूजा से न केवल आध्यात्मिक बल मिलता है बल्कि जीवन में सफलता और संतुलन भी प्राप्त होता है।
AI तकनीक से प्रभावित 5-Star AC की कीमत, जानें कंपनी ने क्या कहा

नई दिल्ली। आज का दौर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। अब AI सिर्फ इंसान की जिंदगी को आसान नहीं बना रहा, बल्कि घर में इस्तेमाल होने वाले सामान—जैसे AC, TV, वैक्यूम क्लीनर—को भी स्मार्ट बना रहा है। AI की मदद से ये प्रोडक्ट पावर सेविंग, बेहतर कूलिंग और यूजर के बिहेवियर को समझकर खुद एडजस्ट होने लगे हैं। हाइसेंस ग्रुप इंडिया के सीईओ पंकज राणा ने बताया कि आने वाले समय में AI होम एप्लायंसेस की हर कैटेगरी में नजर आएगा। उन्होंने कहा कि हाइसेंस के अधिकांश टीवी में AI पहले से मौजूद है, जिससे यूजर को बेहतर विजुअल और ऑडियो एक्सपीरियंस मिलता है। AC में AI का कमालपंकज राणा के मुताबिक, AC में AI यूजर के व्यवहार को समझकर कूलिंग अपने आप एडजस्ट करता है। इसमें वॉयस कंट्रोल और पावर सेविंग फीचर्स भी शामिल हैं। भारतीय गर्मी के हिसाब से ये फीचर्स 20–30 प्रतिशत तक एनर्जी की बचत कर सकते हैं। इसका मतलब है कि बिजली का बिल कम आएगा और AC की स्मार्ट परफॉर्मेंस भी बढ़ेगी। ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में AIAI सिर्फ प्रोडक्ट को स्मार्ट बनाने तक सीमित नहीं है। यह ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में भी मदद करता है। दुनिया भर में जीरो कार्बन फैक्ट्रियों में AI बेस्ड प्रोसेस का इस्तेमाल होता है। हाइसेंस ने भारत में मेक इन इंडिया के तहत लोकल असेंबली और ग्रीन सप्लाई चेन की शुरुआत की है। इससे एफिशिएंट प्रोडक्ट बनेंगे और इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी। कॉपर की बढ़ती कीमत का असरAC, TV और रेफ्रिजरेटर में कॉपर का इस्तेमाल ज्यादा होता है। AC में 100 प्रतिशत कॉपर ट्यूबिंग होती है, जिससे बेहतर हीट ट्रांसफर, मजबूती और लंबी लाइफ मिलती है। कॉपर की बढ़ती कीमतों की वजह से 5 स्टार AC की कीमत 7–8 प्रतिशत और 3 स्टार AC की कीमत 2–4 प्रतिशत बढ़ जाएगी। लोकल प्रोडक्शन और आसान सर्विसिंगहाइसेंस ने आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में नए प्लांट में पायलट प्रोडक्शन शुरू किया है। इसमें लोकल कंपोनेंट्स का इस्तेमाल बढ़ेगा, सप्लाई चेन आसान होगी और डिलीवरी तेज होगी। साथ ही, स्क्रू फ्री प्लास्टिक लॉक डिजाइन से सर्विसिंग आसान होगी। नई AC रेंज2026 से लागू नए स्टैंडर्ड के अनुसार हाइसेंस ने AC का प्रोडक्शन शुरू किया है। नई रेंज में 1 टन, 1.5 टन और 2 टन कैपेसिटी के 10–12 मॉडल होंगे। इसमें 3 स्टार और 5 स्टार दोनों रेटिंग उपलब्ध हैं। इन्वर्टर टेक्नोलॉजी के जरिए बेहतर कूलिंग, कम आवाज और ज्यादा एनर्जी एफिशिएंसी मिलेगी।
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1700 अंक लुढ़का, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। दो दिनों की तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी सेगमेंट में भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1690 अंक यानी 2.25% गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 486 अंक या 2.09% टूटकर 22,819 पर आ गया। वहीं, निफ्टी बैंक 1433 अंक गिरकर 52,274 पर क्लोज हुआ। इस गिरावट की बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर 10 दिनों तक हमला न करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाने की घोषणा की है, फिर भी बाजार में नकारात्मक असर बना हुआ है।टॉप शेयरों में बड़ी गिरावट बीएसई के टॉप 30 शेयरों में एयरटेल, टीसीएस और पावरग्रिड को छोड़कर बाकी 27 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव रिलायंस इंडस्ट्रीज पर रहा, जिसके शेयर 4.60% गिरकर 1347 रुपये पर आ गए। इसके अलावा इंडिगो, बजाज फाइनेंस और एसबीआई में करीब 4% की गिरावट देखने को मिली, जबकि अन्य कई शेयर 2% से अधिक टूटे। निवेशकों को भारी नुकसान बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 431 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 422 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह निवेशकों को करीब 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। गिरावट के प्रमुख कारण मुनाफावसूली का दबाव: पिछले दो सत्रों में करीब 3.5% की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट रही। स्मॉल और मिडकैप शेयरों में करीब 1.7% की गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ के शेयर 1-3% तक गिरे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया। जियो-पॉलिटिकल तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है। ट्रंप के बयान के बावजूद बाजार इस अनिश्चितता को नकारात्मक रूप में ले रहा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा। कच्चे तेल की कीमतें: शुक्रवार को कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ गया। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: भारतीय रुपया 94 प्रति डॉलर के पार चला गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंता ने आयात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है।VIX में उछाल: बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया VIX करीब 9% बढ़कर 28 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में और गिरावट की आशंका को दर्शाता है।