Apple WWDC 2026 डेट फाइनल iOS 27 और नए AI फीचर्स पर रहेगा फोकस..

नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे चर्चित इवेंट्स में से एक Apple का Worldwide Developers Conference यानी WWDC 2026 अब आधिकारिक रूप से घोषित हो चुका है। यह आयोजन 8 जून से 12 जून तक चलेगा और इसकी शुरुआत 8 जून को होने वाले कीनोट से होगी। हर साल की तरह इस बार भी Apple अपने नए सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी इनोवेशन को दुनिया के सामने पेश करेगा, जिससे डेवलपर्स और टेक प्रेमियों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में WWDC का फोकस हार्डवेयर से हटकर सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज्यादा केंद्रित हो गया है। इस बार भी यही ट्रेंड जारी रहने की संभावना है, जहां Apple अपने ऑपरेटिंग सिस्टम्स के नए वर्जन जैसे iOS 27, macOS 27, iPadOS 27, watchOS 27, visionOS 27 और tvOS 27 को पेश कर सकता है। इन अपडेट्स के जरिए यूजर्स को बेहतर परफॉर्मेंस, नए फीचर्स और अधिक स्मूद एक्सपीरियंस मिलने की उम्मीद है। WWDC 2026 में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय Apple का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI रहने वाला है। कंपनी अपने लंबे समय से इंतजार किए जा रहे Siri अपग्रेड को पेश कर सकती है, जिसमें स्मार्ट और ज्यादा एडवांस फीचर्स शामिल होंगे। इसके साथ ही Apple Intelligence को और मजबूत बनाने की दिशा में भी कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नए AI फीचर्स में Google के Gemini AI का भी सपोर्ट देखने को मिल सकता है, जिससे Apple का इकोसिस्टम और भी पावरफुल बन सकता है। इवेंट के तुरंत बाद डेवलपर्स को नए सॉफ्टवेयर के शुरुआती बीटा वर्जन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अपने ऐप्स को नए सिस्टम के अनुसार तैयार कर सकें। यह प्रक्रिया हर साल Apple के डेवलपर कम्युनिटी को नई टेक्नोलॉजी के साथ अपडेट रहने का अवसर देती है। आम यूजर्स के लिए ये सभी अपडेट्स साल के अंत तक रिलीज किए जाने की संभावना रहती है, जिससे वे नए फीचर्स का फायदा उठा सकें। Apple की वाइस प्रेसिडेंट Susan Prescott ने कहा कि WWDC कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां दुनिया भर के डेवलपर्स एक साथ आकर इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाते हैं। यह इवेंट न केवल नए प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन है, बल्कि एक ग्लोबल कम्युनिटी को जोड़ने का भी माध्यम है। इसके अलावा Apple अपने Swift Student Challenge के जरिए छात्रों को भी प्रोत्साहित करता है, जिसमें विजेताओं को Apple Park में खास अनुभव दिया जाता है। इस पहल का उद्देश्य युवा डेवलपर्स को प्रेरित करना और उन्हें भविष्य की टेक्नोलॉजी से जोड़ना है।
ट्रंप पर दबाव बढ़ा, सीनेट में डेमोक्रेट नेताओं ने ईरान संघर्ष की आलोचना की

वाशिंगटन । वाशिंगटन अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और लंबे संघर्ष के खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा, “ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा।” शूमर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की योजना को लेकर साफ जवाब देने में विफल हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस के बयान भी विरोधाभासी बताया और कहा, “यह क्या हो रहा है? कमांडर-इन-चीफ की लीडरशिप नहीं दिख रही। या तो भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे, या दोनों एक साथ हैं।” शूमर ने युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत लगभग 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर हो गई है। यह वृद्धि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक उछालों में से एक है। सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि और गहराई से शामिल होने पर अमेरिका बिना रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंस सकता है। उनके अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता लगभग पूरी तरह नष्ट कर दी है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। सीनेटर पीटर वेल्च ने सरकार के रुख की आलोचना करते हुए 200 अरब डॉलर के युद्ध फंड का विरोध किया। उन्होंने आर्थिक असर पर चिंता जताई और बताया कि पेट्रोल की कीमतें कम से कम 1 डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे आम अमेरिकी परिवार को सालाना लगभग 2,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा, उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर लगभग 1,000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सीनेटर सारा जैकब्स ने इसे अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम लोगों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध है क्या, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी। इस तरह, डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप पर दबाव बढ़ाया है कि वह युद्ध की स्पष्ट रणनीति पेश करें, पारदर्शिता सुनिश्चित करें और अमेरिका के आर्थिक और सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करें।
जीएसटी पोर्टल गाइड टैक्स रिफंड रिटर्न और शिकायत का पूरा समाधान..

नई दिल्ली: भारत में जीएसटी एक एकीकृत कर प्रणाली है जिसने कई प्रकार के केंद्रीय और राज्य करों को समाप्त कर एक सिंगल टैक्स सिस्टम की व्यवस्था बनाई है यह प्रणाली 2017 में लागू की गई थी और इसके बाद से टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाएं काफी आसान और पारदर्शी हो गई हैं जीएसटी पोर्टल इस पूरे सिस्टम का डिजिटल माध्यम है जहां से टैक्स से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं जीएसटी पोर्टल का उद्देश्य टैक्सपेयर्स को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वे बिना किसी कागजी प्रक्रिया के अपने टैक्स संबंधित कार्य ऑनलाइन कर सकें इस पोर्टल के माध्यम से रिटर्न फाइल करना टैक्स का भुगतान करना रिफंड के लिए आवेदन करना और किसी भी तरह की शिकायत दर्ज करना बहुत आसान हो गया है यह पोर्टल व्यवसायियों प्रोफेशनल्स और आम टैक्सपेयर्स के लिए एक सिंगल विंडो की तरह कार्य करता है यदि आप जीएसटी पोर्टल में लॉगिन करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा इसके बाद होमपेज पर आपको लॉगिन का विकल्प दिखाई देगा जिस पर क्लिक करने के बाद आपको अपना यूजरनेम और पासवर्ड दर्ज करना होगा इसके साथ ही एक कैप्चा कोड भी भरना आवश्यक होता है सही जानकारी दर्ज करने के बाद लॉगिन पर क्लिक करते ही आप अपने जीएसटी डैशबोर्ड में पहुंच जाते हैं पहली बार उपयोग करने वाले यूजर्स को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है इसके लिए उन्हें पोर्टल पर रजिस्टर विकल्प का चयन करना होता है और अपनी आवश्यक जानकारी भरनी होती है रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक अस्थायी यूजरनेम और पासवर्ड प्राप्त होता है जिसे उपयोग करके आप पहली बार लॉगिन कर सकते हैं पहली बार लॉगिन करते समय सिस्टम आपसे पासवर्ड बदलने के लिए कहता है जिससे आपके अकाउंट की सुरक्षा सुनिश्चित होती है अगर किसी कारणवश आप अपना यूजरनेम या पासवर्ड भूल जाते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है पोर्टल पर फॉर्गेट यूजरनेम और फॉर्गेट पासवर्ड का विकल्प दिया गया है इसके माध्यम से आप अपने GSTIN या अन्य पहचान विवरण दर्ज करके ओटीपी वेरिफिकेशन के जरिए अपनी लॉगिन जानकारी को पुनः प्राप्त कर सकते हैं यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाधा के अपने अकाउंट तक पहुंचने में मदद करती है जीएसटी पोर्टल केवल लॉगिन तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह टैक्स से जुड़े सभी कार्यों को एक ही जगह पर पूरा करने की सुविधा देता है आप यहां से अपने टैक्स की गणना कर सकते हैं रिटर्न फाइल कर सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं इसके अलावा रिफंड के लिए आवेदन करना और उसकी स्थिति को ट्रैक करना भी आसान है अगर आपको किसी प्रकार की समस्या होती है तो जीएसटी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है जिससे आप सीधे संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं डिजिटल प्रणाली होने के कारण यह प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होती है इस प्रकार जीएसटी पोर्टल ने टैक्स सिस्टम को सरल और सुविधाजनक बना दिया है जिससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है यह एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो भारत के टैक्स ढांचे को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाता है
भारतीय बाजार में रिकवरी के संकेत रुपया 91- तक मजबूत हो सकता है रिपोर्ट..

नई दिल्ली:भारतीय शेयर बाजार में आने वाले महीनों में मजबूत वापसी के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और शेयरों के वैल्यूएशन में कमी के चलते बाजार में सुधार की संभावना बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूती दिखाते हुए 91 के स्तर तक पहुंच सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा 6.83 प्रतिशत से घटकर लगभग 6.65 प्रतिशत तक आ सकती है। यह बदलाव अगले दो से तीन महीनों में देखने को मिल सकता है, जब बाजार सामान्य स्थिति में लौटने लगेगा। हालांकि, पिछले कुछ समय में बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी पिछले तीन कारोबारी सत्रों में करीब 5 प्रतिशत तक गिरा, जिसकी मुख्य वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। इसके बावजूद उम्मीद जताई गई है कि यह ट्रेंड जल्द बदल सकता है और भारत निवेश के लिए आकर्षक बाजार बनकर उभर सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6.6 प्रतिशत रह सकती है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति बढ़कर 4.3 प्रतिशत और चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अगर वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल की कीमतें और बढ़ती हैं और ब्रेंट 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला जाता है, तो भारत के लिए आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में चालू खाता घाटा 2.5 प्रतिशत से अधिक हो सकता है और व्यापार घाटा 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मौजूदा तेल कीमतों के स्तर पर सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में लगभग 19.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती करनी पड़ सकती है। साथ ही एलपीजी पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी का भार भी सरकार को उठाना पड़ सकता है।
एजुकेशन लोन रिजेक्शन: मध्य प्रदेश के मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से शिक्षा के क्षेत्र में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देने के दावों के बावजूद शिक्षा ऋण एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करने वाले लगभग आधे छात्र खाली हाथ रहे। लोकसभा में प्रस्तुत ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 22,728 छात्रों ने लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन केवल 12,547 को ही लोन मिल सका। यानी करीब 45 प्रतिशत छात्रों के आवेदन रिजेक्ट हुए या लंबित रहे। विशेष रूप से 8,065 छात्रों ने अपना आवेदन वापस ले लिया, जो जटिल प्रक्रिया, देरी या बैंक की शर्तों के कारण उम्मीद छोड़ देने का संकेत देता है। इसके अलावा, 1,032 आवेदन सीधे रिजेक्ट हो गए और 1,084 आवेदन अब भी लंबित हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार अनिश्चितता में फंसे हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार कम आय वर्ग के परिवारों के छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। 4.5 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों के 9,505 छात्रों को लोन स्वीकृत किया गया। 4.5 लाख से 8 लाख की आय वाले 1,118 छात्रों और 8 लाख से अधिक आय वाले 1,924 छात्रों को ही लोन मिला। यह दर्शाता है कि उच्च आय वर्ग के लिए बैंक अपेक्षाकृत कम लोन देते हैं। सरकार ने कम आय वर्ग के छात्रों के लिए विशेष योजना भी बनाई है। केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना CSIS के तहत 4.5 लाख तक की आय वाले छात्रों को 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। वहीं, नई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तक की आय वाले मेधावी छात्रों को 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट मिलती है। बैंकों द्वारा आवेदन रिजेक्ट करने के पीछे कई कारण हैं। इसमें मुख्य कारण हैं छात्र के अभिभावक का खराब क्रेडिट स्कोर, कॉलेज या पाठ्यक्रम का QHEI मानक में न होना, आय प्रमाण पत्र या KYC दस्तावेजों में खामियां। हालांकि अब 7.5 लाख तक के लोन के लिए गारंटी जरूरी नहीं है, बैंक अक्सर सुरक्षा की मांग करते हैं। विश्लेषण से पता चलता है कि गरीब और कम आय वर्ग पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता है। देश भर में सबसे ज्यादा लोन आवेदन इसी वर्ग से आते हैं, लेकिन बैंक की कड़ी शर्तें और तकनीकी कमियां उनके लिए चुनौती बन जाती हैं। लोकसभा में चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि बैंक छोटे लोन देने में हिचकते हैं क्योंकि इनमें जोखिम और रिकवरी की चुनौती अधिक होती है। छात्रों के लिए यह स्थिति उनकी उच्च शिक्षा और करियर योजना के लिए गंभीर बाधा बन रही है।
युद्ध की मार सबसे ज्यादा बच्चों, पर मध्य पूर्व में बढ़ता मानवीय संकट….

नई दिल्ली:मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष ने एक बार फिर मानवीय संकट को गहरा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष UNICEF ने चिंता जताते हुए बताया है कि इस हिंसा में अब तक 2100 से अधिक बच्चे या तो मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। संगठन के उप कार्यकारी निदेशक टेड चैबन ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि संघर्ष के 23 दिन बीतने के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर दिन औसतन 87 बच्चे इस संघर्ष का शिकार बन रहे हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। ईरान में 206 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि लेबनान में 118, इजरायल में 4 और कुवैत में 1 बच्चे की जान गई है। इसके अलावा लगातार बमबारी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेशों के चलते लाखों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार ईरान में लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें करीब 8 लाख 64 हजार बच्चे शामिल हैं। वहीं लेबनान में 10 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, जिनमें लगभग 3 लाख 70 हजार बच्चे हैं। इससे स्पष्ट है कि युद्ध का सबसे बड़ा असर मासूमों और उनके भविष्य पर पड़ रहा है। टेड चैबन ने चेतावनी दी कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले से ही मध्य पूर्व में लगभग 4 करोड़ 48 लाख बच्चे ऐसे हालात में रह रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में संघर्ष से प्रभावित हैं। ऐसे में मौजूदा हिंसा इनकी स्थिति को और भी बदतर बना सकती है। लेबनान की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि वहां 350 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को अस्थायी राहत शिविर में बदल दिया गया है, जिससे लगभग 1 लाख बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इसके साथ ही पानी की व्यवस्था बाधित हुई है और कई स्वास्थ्यकर्मियों की भी जान जा चुकी है, जो राहत कार्यों को और कठिन बना रहा है। UNICEF ने अब तक 250 से अधिक शिविरों और दूर-दराज के इलाकों में करीब 1 लाख 51 हजार लोगों तक सहायता पहुंचाई है। साथ ही 46 हजार लोगों को स्वच्छ पानी और सैनिटेशन की सुविधा दी जा रही है, लेकिन संगठन ने यह भी कहा कि जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं और संसाधन सीमित पड़ रहे हैं। अंत में टेड चैबन ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की और कहा कि इस संघर्ष को रोकने के लिए एक राजनीतिक समाधान बेहद जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस संकट पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।
नवरात्रि 2026: मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए सोलह श्रृंगार और आवश्यक पूजा सामग्री

नई दिल्ली । नवरात्रि के पावन अवसर पर माता दुर्गा की आराधना केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि समर्पण और भाव का उत्सव भी है। शास्त्रों के अनुसार जब भक्त मां के दरबार में जाता है, तो वह केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि अपनी आस्था और कृतज्ञता भी अर्पित करता है। इसलिए मंदिर में खाली हाथ जाना उचित नहीं माना जाता। पूजा के दौरान स्वच्छ वस्त्र पहनना, पुरुषों का तिलक और महिलाओं का सिर ढकना भी अनिवार्य माना जाता है। माता के सोलह श्रृंगार का महत्व देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए सोलह श्रृंगार अर्पित किए जाते हैं। इन श्रृंगारों में शामिल हैं: लाल चुनरी चूड़ी इत्र सिंदूर बिछिया महावर मेहंदी काजल गजरा कुमकुम बिंदी माला या मंगलसूत्र पायल नथ कान की बाली फूलों की वेणी यह श्रृंगार सौभाग्य, सुंदरता और भक्त के समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अर्पित वस्तुओं का महत्वअक्षत (चावल): अखंडता और समृद्धि का प्रतीक लाल पुष्प: शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार चुनरी: श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक, जीवन में सुरक्षा और सौभाग्य लाती है सिक्का: दान और त्याग का संकेत, आर्थिक स्थिरता की कामना ऋतु फल: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, स्वास्थ्य और संतुलन का संदेश इन अर्पणों का वास्तविक महत्व उनके पीछे छिपे भाव में होता है। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। नवरात्रि में माता को समर्पण और भक्ति भाव के साथ श्रृंगार और अर्पण करने से मनोबल बढ़ता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भक्त का जीवन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध बनता है।
चैत्र शुक्ल नवमी 2026: राम जन्मोत्सव की पूजा का सही समय और विधि

नई दिल्ली । भारत के हर कोने में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव यानी राम नवमी का पर्व बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। साल 2026 में यह तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में व्रत और पूजन की सही तारीख को लेकर भ्रम उत्पन्न हो गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवमी तिथि इस बार 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। लेकिन सूर्योदय के समय नवमी तिथि विद्यमान रहने के कारण 27 मार्च को राम नवमी मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस समय में भगवान राम का पूजन और व्रत विधिपूर्वक संपन्न किया जा सकता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ने पर देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लेने का निर्णय लिया। राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ से प्राप्त खीर को कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा ने ग्रहण किया, और इस प्रकार चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जन्म के समय पांच ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित थे, जो उनके दिव्य स्वरूप और प्रभाव को दर्शाता है। साथ ही, चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। नवरात्रि में श्रद्धालु मां को सोलह श्रृंगार अर्पित करते हैं। इसमें लाल चुनरी, चूड़ी, इत्र, सिंदूर, बिछिया, महावर, मेहंदी, काजल, गजरा, कुमकुम, बिंदी, माला या मंगलसूत्र, पायल, नथ, कान की बाली और फूलों की वेणी शामिल हैं। ये श्रृंगार माता के सौभाग्य, सुंदरता और भक्त के समर्पण का प्रतीक हैं। अर्पित की जाने वाली वस्तुओं का भी विशेष महत्व है। अक्षत चावल, अखंडता और समृद्धि का प्रतीक है, लाल पुष्प शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, चुनरी श्रद्धा और सम्मान दर्शाती है, सिक्का दान और त्याग का संकेत देता है, जबकि ऋतु फल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देते हैं। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इस साल 2026 में राम नवमी और चैत्र नवरात्रि का संगम भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है, इसलिए तय मुहूर्त और विधि के अनुसार पूजन और व्रत करना अत्यंत शुभ माना गया है।
ईरान तनाव के बीच अमेरिका की कूटनीति तेज भारत, कनाडा केन्या से अहम बातचीत

नई दिल्ली:मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मार्को रुबियो के नेतृत्व में अमेरिका ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इस क्रम में उन्होंने भारत कनाडा और केन्या के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत के साथ हुई बातचीत में एस जयशंकर के साथ मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और बदलते हालात पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने आपसी रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिका ने इस दौरान वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने पर जोर दिया। साथ ही हैती में शांति बहाली के प्रयासों और वहां की स्थिति पर भी विचार साझा किए गए। केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ हुई बातचीत में अमेरिका ने ईरान के मुद्दे पर केन्या के रुख की सराहना की। दोनों नेताओं ने खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की गतिविधियों की निंदा पर चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान अमेरिका ने हैती में शांति स्थापित करने के लिए केन्या के योगदान की भी सराहना की। अमेरिका की यह पहल इस बात का संकेत है कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान ढूंढने की दिशा में काम कर रहा है। एशिया अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संवाद बढ़ाकर अमेरिका अपनी कूटनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है। यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि अमेरिका ईरान और मध्य पूर्व के मुद्दों को लेकर बेहद गंभीर है और वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति के तहत आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
जबलपुर हाईकोर्ट का सख्त रुख: VC नियुक्ति पर जवाब न देने पर नोटिस और जुर्माना

जबलपुर । जबलपुर से बड़ी खबर सामने आई है जहां रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने जवाब पेश न किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने संबंधित पक्ष पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और जवाब प्रस्तुत करने की अंतिम मोहलत दी है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने अप्रैल 2025 में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बावजूद कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। मामला NSUI के जबलपुर जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कुलगुरु की नियुक्ति को चुनौती दी गई है और आरोप लगाया गया है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में UGC के नियमों की अनदेखी की गई। नियमों के अनुसार कुलगुरु पद के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में इस अनिवार्यता की पालना नहीं की गई जिससे नियुक्ति विवादास्पद बन गई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में समय पर जवाब न देने से न्याय प्रक्रिया बाधित होती है। इसी वजह से कोर्ट ने संबंधित पक्ष को जुर्माना लगाया और 6 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की है। इस सुनवाई में कुलगुरु नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर विस्तार से विचार होगा। इस कार्रवाई से यह संदेश भी दिया गया है कि कोर्ट किसी भी पक्ष की लापरवाही या जवाब न देने की स्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को भी चेतावनी मिल गई है कि नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। इसी बीच जबलपुर और विश्वविद्यालय प्रशासन में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इससे शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट की सख्ती अब पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक संकेत के रूप में देखी जा रही है कि नियमों का पालन करना और जवाबदेही तय समय पर देना अनिवार्य है।