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NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 दिन के प्रतिबंध को दी वैधता; परीक्षा की शुचिता पर सख्त रुख

नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति को कानूनी मजबूती प्रदान कर दी है। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए पांच दिनों के अस्थायी प्रतिबंध को उचित और आवश्यक बताते हुए उसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित और परीक्षा की पवित्रता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। न्यायालय के अनुसार, यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से परीक्षा संबंधी गोपनीय सूचनाओं के प्रसार, पेपर लीक या संगठित नकल की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियों को समय रहते प्रभावी कदम उठाने का अधिकार है। कोर्ट ने माना कि सरकार द्वारा लिया गया निर्णय एक निवारक कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य संभावित अनियमितताओं को रोकना था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। सरकार का पक्ष था कि कुछ संगठित समूह परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाना आवश्यक समझा गया ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। अदालत ने यह भी माना कि संबंधित आदेश विधिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था और इसमें निर्धारित प्रावधानों का पालन किया गया। न्यायालय ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन जब मामला लाखों छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़ा हो, तब नियामक संस्थाओं को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। सुनवाई के दौरान प्लेटफॉर्म की ओर से यह तर्क दिया गया कि पूरे मंच को ब्लॉक करना अत्यधिक कठोर कदम है और केवल संदिग्ध खातों या समूहों पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। हालांकि अदालत इस तर्क से सहमत नहीं हुई। न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित एजेंसियों को व्यापक स्तर पर दुरुपयोग की आशंका दिखाई देती है, तो परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक कदम भी उठाए जा सकते हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि सीमित अवधि के लिए लगाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग ने परीक्षा संचालन को जहां अधिक सुविधाजनक बनाया है, वहीं साइबर दुरुपयोग और सूचना लीक जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में प्रशासन और न्यायपालिका दोनों परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दे रहे हैं। इस निर्णय के बाद अब NEET-UG री-एग्जाम की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक एजेंसियां और अधिक सतर्क नजर आ रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और तकनीकी नियंत्रण के जरिए परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि छात्रों के हित और परीक्षा की शुचिता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज

नई द‍िल्‍ली । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बासठवें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामी सहयोग संगठन की ओर से जम्मू कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का भ्रम या गलत व्याख्या स्वीकार नहीं की जा सकती। भारतीय प्रतिनिधि ने मंच पर कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत इरादों पर आधारित हैं तथा इनका उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने घरेलू संकट और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रचार का सहारा लेता रहा है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन द्वारा की गई टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और यह एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। भारत ने यह दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा था और है तथा हमेशा रहेगा और इस वास्तविकता को कोई भी बयान बदल नहीं सकता। भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि असली मुद्दा वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और जिसे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के रूप में जाना जाता है। भारत ने आरोप लगाया कि वहां दशकों से लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सैन्य दबाव के कारण जनता की मूलभूत स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया है। भारत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और लगातार असंतोष और अशांति का कारण बनी हुई है। भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और फिर खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की दोहरी नीति लंबे समय से देखी जा रही है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविकता को नहीं बदल सकते और न ही तथ्यों को छिपा सकते हैं। सिंधु जल संधि पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा कि यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में हुआ था जब क्षेत्रीय स्थिति अलग थी लेकिन अब समय बदल चुका है और जल संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखना होगा। भारत ने संकेत दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते और किसी भी प्रकार की साझेदारी तभी संभव है जब पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो। भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और स्थिरता के पक्ष में है लेकिन किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बयानों को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना है तथा वह इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे

मध्यप्रदेश । भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल शुक्रवार सुबह धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चहल ने तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में रहकर पूजा-अर्चना की। उनके मंदिर पहुंचने की खबर मिलते ही श्रद्धालुओं और क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला। जानकारी के अनुसार, युजवेंद्र चहल सुबह करीब 3 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का दर्शन किया। आरती के दौरान चहल पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। महाकाल मंदिर की आध्यात्मिक और दिव्य वातावरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। भस्म आरती में शामिल होने के बाद चहल ने नंदी महाराज का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार उन्होंने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों के माध्यम से उन्होंने विशेष पूजा कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन और पूजन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से युजवेंद्र चहल का सम्मान किया गया। मंदिर प्रशासन ने उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में युजवेंद्र चहल ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें जो आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे शब्दों में व्यक्त करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। चहल ने यह भी कहा कि जब भी उन्हें बाबा महाकाल का बुलावा मिलेगा, वे दोबारा उज्जैन आकर दर्शन अवश्य करेंगे। गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट, फिल्म और राजनीति जगत की कई नामचीन हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में मत्था टेकने आती रही हैं। अब इस कड़ी में भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल का नाम भी जुड़ गया है।

तुलसी गबार्ड ने जारी किए कोविड बायोलैब्स दस्तावेज, एंथनी फौसी पर खुफिया जानकारी प्रभावित करने के गंभीर आरोप

नई द‍िल्‍ली । अमेरिका में कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड द्वारा कुछ ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं, जिन्हें पहले प्रतिबंधित और वर्गीकृत माना जाता था। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद अमेरिका की वैज्ञानिक, खुफिया और राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। गबार्ड के अनुसार, इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि अमेरिकी-वित्त पोषित जैविक प्रयोगशालाओं से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर तैयार किए गए खुफिया आकलनों को प्रभावित किया और बाद में कांग्रेस के सामने दिए गए बयान में इस तरह के किसी भी हस्तक्षेप से इनकार किया। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट को ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक पहल का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके तहत महामारी की उत्पत्ति और उससे जुड़े सरकारी निर्णयों की फिर से समीक्षा की जा रही है। इस प्रक्रिया में विभिन्न खुफिया अधिकारियों की गवाही और आंतरिक संचार दस्तावेजों का भी अध्ययन किया गया है। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि जब कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर बहस तेज हुई कि यह प्राकृतिक रूप से फैला या चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला से जुड़ा है, तब कई स्तरों पर वैज्ञानिक और खुफिया समुदाय के बीच चर्चा हुई। इन बातचीतों में फौसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें कहा गया कि उन्होंने कुछ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को खुफिया आकलन प्रक्रिया में सुझाव देने के लिए प्रभावित किया। गबार्ड ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और खुफिया जानकारी के मूल्यांकन में हस्तक्षेप किया। उन्होंने यह भी कहा कि महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान जाने के बाद अब जनता को पूरी सच्चाई और पारदर्शिता मिलनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2021 में अमेरिकी खुफिया समुदाय के भीतर ईमेल और आंतरिक संवाद में फौसी को एक विशेषज्ञ के रूप में संदर्भित किया गया था, जिनकी सलाह को कई मामलों में महत्वपूर्ण माना गया। इसी वजह से कुछ आकलन प्रक्रियाओं में उनकी राय को शामिल करने पर चर्चा हुई। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच यह भी सामने आया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अभी तक कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर किसी एक निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं। कुछ एजेंसियों का मानना है कि वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से मानवों में फैला, जबकि कुछ इसे प्रयोगशाला से जुड़ी दुर्घटना की संभावना मानते हैं। इस मुद्दे पर वैज्ञानिक समुदाय भी लंबे समय से विभाजित है और विभिन्न रिपोर्टें अलग-अलग निष्कर्षों की ओर इशारा करती रही हैं। नए दस्तावेजों के जारी होने के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है और आने वाले समय में इस पर और राजनीतिक तथा वैज्ञानिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

महाकाल नगरी में लापरवाही का वीडियो वायरल: ई-रिक्शा की छत पर बैठाकर घुमाया श्रद्धालु, पुलिस ने किया जब्त

मध्यप्रदेश । उज्जैन में महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क है। इसी बीच एक ई-रिक्शा चालक की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने न केवल यातायात नियमों की अनदेखी की बल्कि एक यात्री की जान भी जोखिम में डाल दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो में ई-रिक्शा क्रमांक 4778 दिखाई दे रहा है, जिसमें निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई गई थीं। इतना ही नहीं, एक यात्री वाहन की छत पर बैठकर सफर करता नजर आया। सड़क पर चल रहे अन्य लोगों ने इस खतरनाक दृश्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन यातायात पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में वीडियो सही पाए जाने पर ई-रिक्शा को जब्त कर लिया गया और चालक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि चालक द्वारा वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना और यात्री को छत पर बैठाकर परिवहन करना गंभीर नियम उल्लंघन है। इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए वाहन का चालान तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से अपील की है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें। कुछ समय बचाने या अधिक कमाई के लालच में नियमों की अनदेखी करना जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ओवरलोड वाहनों में सफर न करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही दिखाई देने पर तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

काशी की दिव्यता से अभिभूत हुए अमित सियाल: गंगा आरती में शामिल होकर बोले- मां गंगा के सान्निध्य में मिली अद्भुत आत्मिक शांति

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज जगत के चर्चित अभिनेता अमित सियाल का हालिया वाराणसी दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता ने इस बार आध्यात्मिक अनुभवों की तलाश में काशी का रुख किया, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लेकर मां गंगा का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने काशी की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक वातावरण को करीब से महसूस किया। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली गंगा आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र मानी जाती है। इसी दिव्य आयोजन में अभिनेता अमित सियाल अपने सहयोगी पुनीत सिंह के साथ शामिल हुए। घाट पर पहुंचकर उन्होंने मां गंगा के समक्ष श्रद्धा भाव से नमन किया और वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन में भाग लिया। गंगा आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय दिखाई दिया। घाट पर गूंजते शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की जगमगाहट और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस भव्य दृश्य को देखकर अभिनेता भी गहराई से प्रभावित नजर आए। उन्होंने आरती के प्रत्येक चरण को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ देखा तथा इस अनुभव को अपने जीवन के विशेष क्षणों में से एक बताया। अभिनेता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहां का वातावरण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के तट पर बैठकर और आरती का दर्शन करके उन्हें एक अलग तरह की आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हुआ, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना आसान नहीं है। अपने प्रवास के दौरान अमित सियाल ने आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका में अपने अनुभव दर्ज करते हुए लिखा कि काशी की यात्रा उनके लिए अत्यंत यादगार रही। उन्होंने उल्लेख किया कि मां गंगा की आरती का दिव्य स्वरूप मन को भीतर तक स्पर्श करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है। साथ ही उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की। घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच भी अभिनेता की उपस्थिति को लेकर उत्साह देखा गया। हालांकि उन्होंने अपने दौरे को पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव तक सीमित रखा तथा श्रद्धालुओं की तरह ही आरती में भाग लिया। इस दौरान उनका सम्मान भी किया गया और उन्हें पारंपरिक स्मृति चिह्न भेंट किए गए। अमित सियाल लंबे समय से फिल्मों और डिजिटल मंचों पर अपने प्रभावशाली अभिनय के लिए जाने जाते हैं। कई चर्चित वेब सीरीज और फिल्मों में अपने दमदार किरदारों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच उनका यह आध्यात्मिक प्रवास दर्शाता है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच भी लोग मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की तलाश में धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। काशी की इस यात्रा ने अभिनेता को न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से उनके जुड़ाव को भी उजागर किया। गंगा आरती में उनकी सहभागिता और उससे जुड़ी भावनाएं अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है। उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे। उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

किडनी कैंसर पर जागरूकता जरूरी शराब और धूम्रपान बढ़ाते हैं जोखिम, समय पर पहचान से बच सकती है जान

नई द‍िल्‍ली । किडनी कैंसर दुनिया भर में तेजी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यह वैश्विक स्तर पर 14वां सबसे आम कैंसर माना जाता है, जिसमें हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी होती है। पुरुषों, बुजुर्गों और विकसित देशों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी केवल इन्हीं वर्गों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किडनी कैंसर का समय पर पता चल जाए तो सर्जरी, थेरेपी और अन्य आधुनिक उपचारों के माध्यम से मरीज की जान बचाई जा सकती है। समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। किडनी कैंसर को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं, जो इसके समय पर निदान और उपचार में बाधा बन सकती हैं। एक आम धारणा यह है कि यह बीमारी केवल बुजुर्गों को होती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन युवाओं में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं। शोध बताते हैं कि 50 वर्ष से कम उम्र के लगभग एक तिहाई मामलों में यह बीमारी पाई जा सकती है। खराब जीवनशैली, धूम्रपान, शराब का सेवन, आनुवांशिक कारण और पहले से मौजूद किडनी संबंधी बीमारियां इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। एक और आम मिथक यह है कि पेशाब में खून आना हमेशा किडनी कैंसर का संकेत होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्षण कई अन्य बीमारियों में भी दिख सकता है, जैसे यूटीआई या संक्रमण। हालांकि यदि कई दिनों तक पेशाब का रंग लाल, बरगंडी या गहरा दिखाई दे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। लिंग को लेकर भी एक गलत धारणा है कि महिलाओं में किडनी कैंसर का खतरा अधिक होता है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। पुरुषों में इसका जोखिम महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना पाया गया है। इसका एक कारण धूम्रपान और कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों के संपर्क में आना भी माना जाता है। हालांकि बार-बार होने वाले यूटीआई या संक्रमण से ग्रस्त महिलाओं को भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा यह भी एक मिथक है कि शराब का सेवन केवल लिवर को नुकसान पहुंचाता है, किडनी को नहीं। डॉक्टरों के अनुसार शराब और धूम्रपान दोनों ही किडनी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। ये आदतें शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ा देती हैं। अनुमान के अनुसार, इन आदतों के कारण पुरुषों में लगभग 30 प्रतिशत और महिलाओं में लगभग 25 प्रतिशत किडनी कैंसर के मामले जुड़े हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कदम है। स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान और शराब से दूरी, नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से इस गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

कैमरे के सामने छलक पड़े बाघा के आंसू: मां की याद में भावुक हुए तन्मय वेकारिया, शूटिंग बीच में रोकनी पड़ी

नई दिल्ली । छोटे पर्दे के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय से प्रसारित हो रहे कॉमेडी शो के सेट पर हाल ही में एक ऐसा भावुक क्षण देखने को मिला, जिसने कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों को भी भावुक कर दिया। दर्शकों को वर्षों से हंसाने वाले अभिनेता तन्मय वेकारिया, जो अपने चर्चित किरदार ‘बाघा’ के लिए जाने जाते हैं, शूटिंग के दौरान अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सके और कैमरे के सामने ही रो पड़े। इस अप्रत्याशित घटना के बाद कुछ समय के लिए शूटिंग रोकनी पड़ी। बताया जा रहा है कि एक भावनात्मक दृश्य की शूटिंग चल रही थी, जिसमें उनके किरदार से जुड़ा महत्वपूर्ण सीन फिल्माया जा रहा था। जैसे ही कैमरा चालू हुआ और कलाकारों ने अपने संवादों की तैयारी शुरू की, तन्मय वेकारिया अचानक भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह खुद को संभाल नहीं सके। सेट पर मौजूद कलाकार और क्रू सदस्य पहले तो स्थिति को समझ नहीं पाए, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि वह अपनी निजी भावनाओं से गुजर रहे हैं। उनकी हालत देखकर पूरी यूनिट चिंतित हो गई। शूटिंग को तत्काल रोक दिया गया ताकि अभिनेता को समय और मानसिक सहारा मिल सके। इस दौरान शो से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया और उन्हें भावनात्मक समर्थन दिया। माहौल कुछ समय के लिए पूरी तरह शांत और गंभीर हो गया। कुछ देर बाद जब तन्मय वेकारिया सामान्य हुए तो उन्होंने अपनी मां से जुड़ी कई यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके अभिनय सफर में उनकी मां का योगदान और समर्थन बेहद महत्वपूर्ण रहा है। जब भी उन्हें दर्शकों की सराहना मिलती थी, उनकी मां सबसे अधिक खुश होती थीं। उनकी सफलता और लोकप्रियता को देखकर उनकी मां गर्व महसूस करती थीं और यही बातें उस समय उन्हें बार-बार याद आ रही थीं। अभिनेता ने बताया कि परिवार का भावनात्मक साथ किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने अपनी मां के साथ बिताए गए कई यादगार पलों को याद किया और कहा कि जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। यही वजह रही कि शूटिंग के दौरान अचानक भावनाएं उमड़ पड़ीं और वह खुद को संभाल नहीं पाए। यह घटना दर्शाती है कि कलाकार चाहे कितने भी लोकप्रिय क्यों न हों, वे भी सामान्य इंसानों की तरह भावनाओं और यादों से जुड़े रहते हैं। कैमरे के सामने हमेशा मुस्कुराते रहने वाले कलाकारों के जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं, जब निजी भावनाएं पेशेवर जिम्मेदारियों पर भारी पड़ जाती हैं। सेट पर मौजूद लोगों ने भी इस संवेदनशील पल को पूरी समझदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाला। वर्षों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा यह शो आज भी भारतीय टेलीविजन का एक प्रमुख नाम बना हुआ है। शो के विभिन्न किरदारों ने दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है और तन्मय वेकारिया का किरदार भी उनमें से एक है। उनकी सरल अभिनय शैली और हास्य प्रस्तुति ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई है। हालिया घटना ने उनके व्यक्तित्व का एक भावनात्मक पक्ष सामने लाया है। यह केवल एक कलाकार के आंसुओं की कहानी नहीं, बल्कि उन यादों और रिश्तों की झलक है जो जीवन भर इंसान के साथ बने रहते हैं। दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले अभिनेता का यह भावुक रूप लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम कर रहा है।

अक्षय कुमार ने वैष्णो देवी में टेका माथा ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज से पहले फैंस में बढ़ा उत्साह

नई द‍िल्‍ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आगामी फिल्म वेलकम टू द जंगल को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। फिल्म की रिलीज से ठीक पहले अभिनेता आध्यात्मिक यात्रा पर निकले और जम्मू कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी के पवित्र दरबार पहुंचे जहां उन्होंने विधिवत दर्शन कर माता का आशीर्वाद लिया। अक्षय कुमार के वैष्णो देवी पहुंचने की खबर सामने आते ही श्रद्धालुओं और उनके फैंस में उत्साह का माहौल बन गया। त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित इस पवित्र मंदिर परिसर में जैसे ही अभिनेता नजर आए वहां मौजूद लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी। कई प्रशंसकों ने उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश की जबकि कुछ लोग दूर से ही उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। इस दौरान अक्षय कुमार पारंपरिक सफेद कुर्ता पहने हुए दिखाई दिए जो उनकी सादगी और धार्मिक आस्था को दर्शा रहा था। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले अभिनेता बेस कैंप कटरा पहुंचे जहां से उन्होंने आगे की यात्रा शुरू की। अधिकारियों के अनुसार अक्षय कुमार ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ गुफा मंदिर में दर्शन किए और कुछ समय तक पूजा अर्चना में भी शामिल रहे। पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ और अभिनेता की उपस्थिति को सुचारु रूप से संभाला जा सके। मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने में सहयोग किया और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा। अक्षय कुमार का यह धार्मिक दौरा उनकी फिल्म वेलकम टू द जंगल की रिलीज से ठीक पहले हुआ है जिससे फिल्म को लेकर चर्चा और भी बढ़ गई है। यह फिल्म मशहूर कॉमेडी फ्रेंचाइजी वेलकम का अगला हिस्सा बताई जा रही है जिसका निर्देशन अहमद खान कर रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ कई बड़े सितारे नजर आने वाले हैं। इनमें सुनील शेट्टी दिशा पाटनी जैकलीन फर्नांडिस रवीना टंडन लारा दत्ता अरशद वारसी तुषार कपूर श्रेयस तलपड़े आफताब शिवदासानी और जैकी श्रॉफ जैसे नाम शामिल हैं। लगभग 34 कलाकारों की बड़ी स्टारकास्ट के कारण यह फिल्म पहले से ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म वेलकम टू द जंगल 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म कॉमेडी और एंटरटेनमेंट के दम पर दर्शकों को फिर से उसी फ्रेंचाइजी का पुराना मजा देगी जिसके लिए वेलकम सीरीज जानी जाती है। अक्षय कुमार का वैष्णो देवी दर्शन न केवल उनकी व्यक्तिगत आस्था को दर्शाता है बल्कि उनके फैंस के बीच भी सकारात्मक संदेश देता है। रिलीज से पहले इस तरह की आध्यात्मिक यात्रा ने फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।