75 की उम्र में पहली बार विलेन बनेंगी शबाना आजमी, ‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी से होगी दमदार टक्कर

नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों में शामिल ‘आवारापन’ के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब 19 साल बाद इस फिल्म का सीक्वल ‘आवारापन 2’ दर्शकों के बीच आने जा रहा है और इस बार फिल्म में एक ऐसा चेहरा जुड़ा है, जिसने इसकी चर्चा को कई गुना बढ़ा दिया है। हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी फिल्म में एक दमदार नेगेटिव किरदार निभाने जा रही हैं। खास बात यह है कि लंबे और शानदार फिल्मी करियर के बावजूद शबाना आजमी पहली बार पर्दे पर पूर्ण रूप से विलेन के रूप में दिखाई देंगी। फिल्म में इमरान हाशमी एक बार फिर अपने लोकप्रिय किरदार ‘शिवम’ के रूप में नजर आएंगे। वहीं दिशा पाटनी भी अहम भूमिका में दिखाई देंगी। लेकिन सबसे ज्यादा उत्सुकता शबाना आजमी के किरदार ‘नफीसा’ को लेकर है, जिसे अंडरवर्ल्ड की बेहद प्रभावशाली और खतरनाक महिला सरगना के रूप में पेश किया जाएगा। फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि यह किरदार कहानी का सबसे मजबूत और यादगार पहलू बन सकता है। जानकारी के अनुसार, फिल्म के लेखक बिलाल सिद्दीकी ने शुरुआत में इस किरदार को एक पुरुष अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में तैयार किया था। हालांकि बाद में निर्माता विशेष भट्ट ने कहानी में महिला विलेन को शामिल करने का सुझाव दिया। इस विचार ने पूरी कहानी की दिशा बदल दी और ‘नफीसा’ नाम का एक नया और प्रभावशाली किरदार सामने आया। इसके बाद मेकर्स को लगा कि इस भूमिका के लिए शबाना आजमी से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। विशेष भट्ट के मुताबिक, शबाना आजमी की अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस इस किरदार को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगी। उनका मानना है कि दर्शक शबाना को इस रूप में देखकर चौंक जाएंगे। फिल्म में उनका किरदार केवल खलनायिका नहीं होगा, बल्कि कहानी की दिशा तय करने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण चरित्र होगा। फिल्म से जुड़ने का शबाना आजमी का फैसला भी मेकर्स के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने 18 सितंबर 2025 को आधिकारिक रूप से इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की सहमति दी थी। भट्ट परिवार और शबाना आजमी के बीच वर्षों पुराने पारिवारिक संबंध भी इस सहयोग की एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं। ‘आवारापन 2’ का निर्देशन नितिन कक्कड़ कर रहे हैं, जबकि इसकी पटकथा बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है। फिल्म का निर्माण विशेष भट्ट के बैनर तले किया जा रहा है। फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत के मौके पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। गौरतलब है कि ‘आवारापन’ का पहला भाग वर्ष 2007 में रिलीज हुआ था। महेश भट्ट द्वारा निर्मित और मोहित सूरी द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने अपने भावनात्मक कथानक, शानदार संगीत और इमरान हाशमी के दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। अब लगभग दो दशक बाद लौट रही इस फ्रेंचाइजी से दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की कसौटी पर कितना सफल साबित होती है।
भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन

भोपाल। जय नारायण कॉलेज भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शनऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (जेएनसीबीएम), भोपाल में भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन (बीएमए) के सहयोग से दो दिवसीय “लीडकॉन 2026” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ. नेहा शर्मा के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को करियर निर्माण, नेतृत्व विकास तथा उद्योग जगत की वर्तमान आवश्यकताओं से अवगत कराना था। बीएमए के वरिष्ठ समन्वयक अधिकारी एडवोकेट जीके छिब्बर ने शुक्रवार को बताया कि आगे भी हमारी इस तरह की गतिविधियों को बड़ी योजना है जिस पर कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में चार प्रतिष्ठित मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों का मार्गदर्शन किया। इनमें अमेरिका स्थित नेटलिंक सॉफ्टवेयर ग्रुप की एचआर प्रोफेशनल मोनिका सांगवानी, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट के एचआर एवं औद्योगिक संबंध (आईआर) विशेषज्ञ अनिल दुबे, जीआरआई एचआर सॉल्यूशंस के एचआर सलाहकार विजय जी. जैन तथा ल्यूपिन लिमिटेड की पूर्व एचआर प्रमुख विंसी सेबेस्टियन शामिल थीं। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को रोजगार की तैयारी, साक्षात्कार में सफलता, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल तथा कॉर्पोरेट जगत की अपेक्षाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए। समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आर. जी. चौकसे (पूर्व अधिष्ठाता, अकादमिक एवं छात्र कल्याण, एनआईटीटीटीआर, भोपाल) तथा भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन (बीएमए) के प्रतिनिधि श्री आमिर खान, प्रबंधक, बीएमए विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा महाविद्यालय के वार्षिक समाचार-पत्र (न्यूजलेटर) का विमोचन किया गया। समाचार-पत्र में विद्यार्थियों की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों एवं संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों को स्थान दिया गया है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोविंद भार्गव, कुलसचिव डॉ. मोहित पंड्या, निदेशक डॉ. रविशंकर मिश्रा, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. मीतू सिंह, प्रवेश निदेशक अरुण पटेल एवं प्राचार्य डॉ. नेहा शर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, निरंतर सीखने तथा अपने कौशल का सतत विकास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को उद्योग जगत की अपेक्षाओं को समझने तथा अपने करियर को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगभग 250 विद्यार्थियों की सहभागिता वाला यह दो दिवसीय कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय प्रबंधन, भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों की सराहना की गई। लीडकॉन 2026 विद्यार्थियों के लिए भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली आयोजन सिद्ध हुआ।
“बचपन को मिले श्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार”

बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026– ललित गर्ग –हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। उसके हाथों में औजार, ईंट, बर्तन, हथौड़े, कूड़े की बोरी या कारखानों की मशीनें नहीं, बल्कि किताबें, खिलौने, रंग, सुनहले सपने और संभावनाएं होनी चाहिए। बचपन जीवन का वह स्वर्णिम काल है जिसमें व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार, शिक्षा और भविष्य की नींव रखी जाती है। यदि यही काल श्रम, शोषण और अभाव की भट्टी में झोंक दिया जाए तो केवल एक बच्चे का नहीं, पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- आईअलओ द्वारा 2002 में शुरू किए गए इस दिवस का उद्देश्य बाल श्रम की भयावहता के प्रति वैश्विक चेतना जगाना और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों को गति देना है। वर्ष 2026 में भी यह दिवस ऐसे समय पर आ रहा है जब दुनिया तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक प्रगति के नए आयाम छू रही है, लेकिन दूसरी ओर करोड़ों बच्चे आज भी शिक्षा और बचपन के अधिकार से वंचित हैं। यह विडम्बना मानव सभ्यता के सामने एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। जब हम किसी ढाबे, होटल, चाय की दुकान, कारखाने, गैरेज, ईंट-भट्टे, खेत या ट्रैफिक सिग्नल पर किसी मासूम बच्चे को कठिन श्रम करते देखते हैं, तब अक्सर हमारी संवेदना कुछ क्षणों के लिए जागती है और फिर हम अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि कब तक हम इस पीड़ा को सामान्य मानते रहेंगे? क्या हम उस बचपन की चीख नहीं सुन पा रहे जो अपने अधिकारों से वंचित होकर मजदूरी के अंधेरे में खो रहा है? आज भी विश्व में करोड़ों बच्चे किसी न किसी रूप में बाल श्रम में संलग्न हैं। इनमें से बड़ी संख्या खतरनाक परिस्थितियों में काम करती है, जहां उनका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास बाधित होता है। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता, विस्थापन, तस्करी, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और कमजोर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाएं बाल श्रम की प्रमुख वजहें हैं। परिवार की आर्थिक विवशताएं बच्चों को स्कूल की बजाय काम की दुनिया में धकेल देती हैं। लेकिन गरीबी का समाधान बच्चों से काम कराना नहीं, बल्कि परिवारों को सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। बाल श्रम केवल आर्थिक समस्या नहीं है; यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। यह बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, आत्मविश्वास और भविष्य छीन लेता है। जो बच्चा विद्यालय में होना चाहिए, वह यदि कारखाने में है, तो यह केवल उस बच्चे की नहीं, पूरे समाज की विफलता है। बाल श्रम गरीबी का चक्र भी बनाए रखता है, क्योंकि अशिक्षित बच्चा बड़ा होकर कम आय वाले कार्यों तक सीमित रह जाता है और अगली पीढ़ी भी उसी अभाव में जीने को मजबूर होती है। भारत सहित अनेक देशों में बाल श्रम रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आईअलओ के कन्वेंशन 138 और कन्वेंशन 182 न्यूनतम कार्य आयु और बाल श्रम के सबसे खतरनाक रूपों पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। भारत में भी बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा शिक्षा का अधिकार कानून मौजूद हैं। लेकिन कानूनों की प्रभावशीलता उनके कठोर और ईमानदार क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। कई बार कानूनी प्रावधान होने के बावजूद बाल श्रम छिपे हुए रूपों में जारी रहता है। आज आवश्यकता केवल कानून बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने की है। बाल श्रम को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाए जाने चाहिए। विद्यालयों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, मीडिया, उद्योग जगत और नागरिक समाज को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। जिस प्रकार पर्यावरण संरक्षण और महिला अधिकारों को लेकर वैश्विक चेतना विकसित हुई है, उसी प्रकार बाल अधिकारों के लिए भी विश्वव्यापी जनमत तैयार करना होगा। कैसा विरोधाभास है कि हमारा समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते लेकिन क्या इस उम्र के लगभग 25 से 30 करोड़ बच्चों से बाल मजदूरी के जरिए उनका बचपन और उनसे पढने का अधिकार छीनने का यह सुनियोजित षड्यंत्र नहीं लगता? मिसाल के तौर पर एक कानून बनाकर हमने बच्चों से उनका बचपन छिनने की कुचेष्टा की है। इस कानून में हमने यदि पारिवारिक कामधंधा या रोजगार है तो 4 से 14 की उम्र के बच्चों से कानूनन काम कराया जा सकता है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह कैसी विडम्बना है कि जब इस उम्र के बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, खानदानी व्यवसाय के नाम पर एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा, खेलकूद और सामान्य बाल्य सुलभ व्यवहार से वंचित किया जा रहा है और हम अपनी पीठ थपथपाए जा रहे हैं। बच्चों को बचपन से ही आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर हकीकत में हम उन्हें पैसा कमाकर लाने की मशीन बनाकर अंधकार में धकेल रहे हैं। विशेष रूप से डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग बाल श्रम उन्मूलन के लिए किया जा सकता है। प्रत्येक उद्योग और आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शी निगरानी, बाल श्रम शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल, त्वरित कार्रवाई तंत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणालियां विकसित की जा सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी आपूर्ति श्रृंखला में कहीं भी बाल श्रम का उपयोग न हो। जो कंपनियां ऐसा करती पाई जाएं, उनके विरुद्ध कठोर आर्थिक और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। बाल श्रम समाप्त करने का सबसे प्रभावी उपाय गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा है। केवल विद्यालय खोल देना पर्याप्त नहीं है; शिक्षा ऐसी हो जो बच्चों को आकर्षित करे, जीवनोपयोगी कौशल दे और उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास करे। गरीब परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का विस्तार आवश्यक है। यदि परिवार की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित होगी तो बच्चों को मजदूरी के लिए भेजने की मजबूरी भी कम होगी। हमें यह भी समझना होगा कि बचपन केवल जीवित रहने का नाम नहीं है; बचपन का अर्थ है सपने देखने की स्वतंत्रता, खेलने का अधिकार, सीखने का
बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। बिहार में वर्ष 2016 में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस पहल का विशेष रूप से महिलाओं ने स्वागत किया था, क्योंकि इससे घरेलू हिंसा, आर्थिक नुकसान और शराब की लत से जुड़ी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, आठ वर्ष बाद सामने आए आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामलेभारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुषों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे NFHS-5 (2019-21) के 15.4 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। इतना ही नहीं, 0.4 प्रतिशत महिलाओं ने भी शराब पीने की बात मानी है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शराबबंदी के बावजूद शराब सेवन पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है। ग्रामीण इलाकों में अधिक प्रभावहीन दिखी शराबबंदीसर्वे के मुताबिक ग्रामीण बिहार में 17.1 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 12.8 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों में अवैध शराब की उपलब्धता और निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण प्रतिबंध का असर अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। शराब की जगह नशीली दवाओं की ओर बढ़ा रुझानविशेषज्ञों के अनुसार शराबबंदी के बाद नशे के आदी लोगों का एक वर्ग अन्य विकल्पों की ओर मुड़ गया। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के चिकित्सकों ने भी नशीली दवाओं, नींद की गोलियों और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के दुरुपयोग में वृद्धि की ओर संकेत किया है। हाल के वर्षों में पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेपें भी जब्त की हैं। कोडीन का अधिक मात्रा में सेवन नशे का प्रभाव पैदा करता है और इसे शराब के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। चार साल में NDPS मामलों में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरीराष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए लागू NDPS अधिनियम के तहत बिहार में दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2020 में जहां ऐसे 964 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 2,411 तक पहुंच गई। यानी चार वर्षों में करीब 150 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़े उठा रहे हैं बड़े सवालशराबबंदी लागू होने के समय उम्मीद की गई थी कि इससे नशे की प्रवृत्ति में कमी आएगी, परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सामाजिक समस्याओं पर नियंत्रण मिलेगा। लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि शराब सेवन पूरी तरह नहीं रुका और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। NFHS और NCRB के आंकड़े मिलकर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या केवल प्रतिबंध लगाने से नशे की समस्या का स्थायी समाधान संभव है, या इसके लिए जागरूकता, पुनर्वास और प्रभावी निगरानी जैसे व्यापक उपायों की भी आवश्यकता है।
15 जून का दुर्लभ ग्रह संयोग चमकाएगा किस्मत, बुधादित्य राजयोग से 4 राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 15 जून को एक महत्वपूर्ण ग्रह परिवर्तन होने जा रहा है। ग्रहों के राजा सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही बुध देव विराजमान हैं। सूर्य और बुध की युति से अत्यंत शुभ बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा, जिसे करियर, प्रतिष्ठा, बुद्धि और आर्थिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस योग के शुरुआती चरण में चंद्रमा की उपस्थिति से त्रिग्रही योग का प्रभाव भी बनेगा, जिससे इसका शुभ असर और बढ़ जाएगा। इस महासंयोग का सबसे अधिक लाभ चार राशियों के जातकों को मिलने की संभावना है। मेष राशि: करियर में तरक्की और कारोबार में लाभ के संकेतमेष राशि के जातकों के लिए यह योग कार्यक्षेत्र में नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति और वेतन वृद्धि मिलने के योग हैं, जबकि नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भी सफलता मिल सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय नई शुरुआत और विस्तार के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। बाजार में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लाभ के अवसर मजबूत होंगे। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी पुरानी परेशानियों में भी राहत मिलने की संभावना है। वृषभ राशि: अटके काम बनेंगे, भाग्य देगा साथवृषभ राशि वालों के लिए यह राजयोग लंबे समय से रुके हुए कार्यों को गति दे सकता है। सरकारी प्रक्रियाओं या अन्य कारणों से अटके मामलों के समाधान के संकेत हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। इसके अलावा धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी तथा लंबी दूरी की यात्राओं के योग भी बन सकते हैं। मिथुन राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, मिलेगा मान-सम्मानमिथुन राशि में ही यह बुधादित्य राजयोग बनने से इस राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। कार्यस्थल पर नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी और वरिष्ठ अधिकारियों से सराहना प्राप्त हो सकती है। व्यापार में बड़ी डील या नया अवसर मिलने के संकेत हैं। आर्थिक मामलों में अचानक लाभ हो सकता है और अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना भी बन रही है। इस दौरान व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और संवाद कौशल से लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सिंह राशि: आय में वृद्धि और पारिवारिक सुखसूर्य की स्वामित्व वाली सिंह राशि के लिए यह ग्रह संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। आय के नए स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और धन संचय के अवसर बढ़ेंगे। पारिवारिक जीवन में चल रही समस्याएं दूर होने के संकेत हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और रिश्तों में मधुरता आएगी। वहीं निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा यह संयोगज्योतिष शास्त्र में बुधादित्य राजयोग को बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता, आर्थिक प्रगति और सामाजिक प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। 15 जून को बनने वाला यह विशेष ग्रह संयोग कई लोगों के लिए नए अवसर और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।
MP: भिंड-मुरैना समेत 6 जिलों में आज ओलावृष्टि का अलर्ट, 17-18 जून तक प्रदेश में दस्तक दे सकता है मानसून

भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री अब 3 से 4 दिन की देरी से होने के संकेत हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून 17 से 18 जून के बीच प्रदेश के दक्षिणी जिलों में पहुंच सकता है। अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो अगले 10 से 15 दिनों के भीतर यह पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। मानसून के आगमन से पहले प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक शुक्रवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, बुरहानपुर, खंडवा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। आंधी की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। इन जिलों में बरकरार रहेगा गर्मी का असरमौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों में आंधी या बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। ऐसे में इन क्षेत्रों में गर्मी का असर जारी रहने की संभावना है। ग्वालियर में आधा इंच बारिश, कई जिलों में बदला मौसमगुरुवार को प्रदेश में आंधी और बारिश के बीच गर्मी का प्रभाव भी बना रहा। ग्वालियर में करीब आधा इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं मंडला, सिवनी, दतिया समेत कई जिलों में शाम तक बारिश हुई। दूसरी ओर कई शहरों के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। जबलपुर में 41.3 डिग्री, भोपाल और उज्जैन में 39.7 डिग्री तथा इंदौर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। खजुराहो और नौगांव रहे सबसे गर्मप्रदेश में सबसे अधिक तापमान खजुराहो और नौगांव में 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा दमोह में 42.8 डिग्री, सतना में 42.7 डिग्री, रीवा में 42.5 डिग्री, दतिया में 42.2 डिग्री, टीकमगढ़ और मंडला में 42 डिग्री, उमरिया में 41.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 41.4 डिग्री, मलाजखंड में 41.1 डिग्री, रायसेन और राजगढ़ में 41 डिग्री, गुना में 40.7 डिग्री, खंडवा में 40.5 डिग्री, सागर में 40.4 डिग्री तथा श्योपुर में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। ब्रेक के बाद फिर सक्रिय हुआ मानसूनमौसम विभाग के अनुसार एक दिन के विराम के बाद 11 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर से प्रगति की है। यदि मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और 17 या 18 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। इन मौसम प्रणालियों का दिख रहा असरमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ लाइन गुजर रही है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। इन्हीं मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।
भोपाल में बच्चों के लिए नई पहल: शुरू होगा ‘लिटिल रीडर्स क्लब’, कहानी, क्विज और क्रिएटिव एक्टिविटी से बढ़ेगा पढ़ने का शौक

नई दिल्ली। भोपाल में बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर कर किताबों की दुनिया से जोड़ने और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की जा रही है। शहर की प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी, न्यू मार्केट में 14 जून (रविवार) से ‘लिटिल रीडर्स क्लब’ का शुभारंभ किया जाएगा। यह क्लब 4 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य उन्हें कहानियों, पुस्तकों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करना है। लाइब्रेरी प्रबंधन के अनुसार, इस क्लब को विशेष रूप से बच्चों की उम्र के अनुसार दो समूहों में बांटा गया है। ‘लिटिल बड्स’ समूह में 4 से 8 वर्ष के बच्चों को कहानी सुनाने, चित्र पुस्तकों की दुनिया से परिचित कराने और प्रारंभिक पठन गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। वहीं ‘पेज टर्नर्स’ समूह (9 से 14 वर्ष) के बच्चों के लिए पुस्तक पठन के साथ-साथ संवादात्मक चर्चा, विचार-विमर्श और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर जोर दिया जाएगा। शुभारंभ कार्यक्रम 14 जून को शाम 5 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों के लिए कई रोचक गतिविधियां शामिल होंगी। इनमें ‘बुक जैकेट डिजाइन’ के तहत बच्चे अपनी पसंदीदा किताब का नया कवर तैयार करेंगे और उस पर आकर्षक परिचय लिखेंगे। इसके अलावा ‘बुक पिच’ गतिविधि में बच्चे विज्ञापन विशेषज्ञ की तरह अपनी पसंदीदा पुस्तक को प्रस्तुत करेंगे, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में कहानी वाचन, पुस्तक चर्चा, चित्रकला, क्राफ्ट, शब्द और पहेली खेल, रचनात्मक लेखन, रोल प्ले, क्विज प्रतियोगिता और समूह गतिविधियां भी शामिल होंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति, टीमवर्क और संचार कौशल को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। लाइब्रेरी के प्रबंधक यतीश भटेले ने बताया कि यह क्लब हर 15 दिनों में नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा, ताकि बच्चों में लगातार पढ़ने की आदत विकसित हो सके। क्लब का संचालन तूलिका श्री और अनीर्बन चक्रवर्ती करेंगे, जो लंबे समय से साहित्य और बाल गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इस पहल को लेकर अभिभावकों में भी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि आज के डिजिटल युग में बच्चों को किताबों से जोड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में यह क्लब बच्चों के मानसिक विकास और रचनात्मक सोच को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भोपाल ब्रेकिंग: बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में भीषण आग, 70 फीट तक उठीं लपटें, लगातार धमाकों से दहला इलाका

नई दिल्ली। भोपाल में शुक्रवार तड़के एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब बैरागढ़ रोड स्थित हलालपुरा इलाके में एक पटाखा दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। यह हादसा सुबह करीब 3 बजे हुआ, जब पूरा इलाका गहरी नींद में था। आग लगते ही दुकान के अंदर रखे पटाखों में लगातार विस्फोट शुरू हो गए, जिससे पूरा क्षेत्र तेज धमाकों से गूंज उठा और आसपास के लोग दहशत में आ गए। आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें आसमान में करीब 70 फीट तक उठती दिखाई दीं। लगातार हो रहे धमाकों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और आसपास की सड़कों तक पटाखों के टुकड़े उड़कर गिरने लगे। यह दुकान हलालपुरा क्षेत्र में स्थित सुंदर वन गार्डन के ठीक सामने है, जो मुख्य सड़क से सटी हुई है। दिन के समय इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक रहता है और आसपास वाहन भी खड़े रहते हैं, लेकिन गनीमत रही कि घटना देर रात हुई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना मिलते ही फतेहगढ़, बैरागढ़, गांधीनगर सहित कई फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर फाइटर्स ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन लगातार हो रहे धमाकों के कारण राहत कार्य में कठिनाई आई। करीब साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, हालांकि सुबह 7 बजे तक भी दुकान से धुआं उठता रहा। फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दुकान में बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया था, जो पूरी तरह जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। घटना स्थल के पास ही एक पेट्रोल पंप भी स्थित है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर एक तरफ की सड़क को बंद कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित रहा। साथ ही बिजली विभाग ने एहतियातन इलाके की बिजली सप्लाई भी बंद कर दी, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसा शॉर्ट सर्किट से हुआ या किसी अन्य वजह से। स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं, प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की बात कही है।
आज का राशिफल 12 जून 2026: मिथुन राशि में दिखेगा आर्थिक उछाल, जानें सभी 12 राशियों का हाल

नई दिल्ली । 12 जून 2026 का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर, आर्थिक प्रगति और पारिवारिक सुख लेकर आ रहा है। मिथुन राशि के जातकों के लिए दिन विशेष रूप से लाभकारी रहेगा, वहीं कुछ राशियों को सतर्कता और धैर्य की आवश्यकता होगी। मेष राशि: नए प्रयोगों से बढ़ेगा लाभमेष राशि के जातक आज अपने कार्यों में अलग सोच के साथ आगे बढ़ेंगे। करियर में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे और पारिवारिक सहयोग बढ़ेगा। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वृषभ राशि: निवेश में रखें सावधानीवृषभ राशि वालों को आज व्यापार में सामान्य स्थिति का सामना करना पड़ेगा। कोई भी बड़ा निर्णय सोच-समझकर लें। लुभावने प्रस्तावों से बचें और कानूनी मामलों में सावधानी रखें। मिथुन राशि: आर्थिक पक्ष में जबरदस्त उछालमिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन बेहद शुभ है। कारोबार में तेजी आएगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बड़े लक्ष्य पूरे होंगे और कार्यक्षेत्र में अनुकूलता मिलेगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा और सफलता के नए रास्ते खुलेंगे। कर्क राशि: रिश्तों में बढ़ेगा स्नेहकर्क राशि के लोग परिवार और मित्रों के साथ अच्छा समय बिताएंगे। कार्यक्षेत्र में नई योजनाओं को गति मिलेगी और सम्मान बढ़ेगा। सिंह राशि: अवसरों से भरा दिनसिंह राशि वालों के लिए करियर में नए अवसर मिलेंगे। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। आय में वृद्धि के योग हैं। कन्या राशि: सावधानी से करें कार्यकन्या राशि वालों को स्वास्थ्य और कार्य दोनों में सतर्क रहना होगा। छोटी गलती नुकसान का कारण बन सकती है। तुला राशि: दांपत्य जीवन में मधुरतातुला राशि के जातकों के लिए पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। व्यापार विस्तार के योग बनेंगे और रिश्तों में मजबूती आएगी। वृश्चिक राशि: खर्चों पर रखें नियंत्रणवृश्चिक राशि वालों को बजट और खर्च पर ध्यान देने की जरूरत है। भावनाओं में बहने से बचें। धनु राशि: संवाद से मिलेगा लाभधनु राशि के जातकों के लिए मित्रों और परिवार के साथ समय अच्छा रहेगा। प्रतिभा प्रदर्शन में सफलता मिलेगी। मकर राशि: निजी मामलों पर फोकस बढ़ेगामकर राशि वालों का ध्यान निजी जीवन और कार्यक्षेत्र दोनों पर रहेगा। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। कुंभ राशि: आत्मविश्वास में बढ़ोतरीकुंभ राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। भाई-बंधुओं का सहयोग मिलेगा और कार्यों में तेजी आएगी। मीन राशि: आर्थिक मजबूती का समयमीन राशि वालों के लिए घर-परिवार में सुख और समृद्धि बढ़ेगी। आर्थिक योजनाएं सफल होंगी और धन लाभ के योग बनेंगे। 12 जून 2026 का दिन कुल मिलाकर कई राशियों के लिए प्रगति और अवसरों से भरा रहेगा। विशेष रूप से मिथुन राशि वालों के लिए यह दिन आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टि से बेहद शुभ साबित होगा।
मनुस्मृति और भारतीय संविधान : नीति-निदेशक तत्वों का तुलनात्मक दृष्टिकोण..

लेखक: डॉ. राकेश कुमार आर्य भारतीय संविधान में अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति-निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है। ये ऐसे संवैधानिक निर्देश हैं जो राज्य को लोककल्याण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, यद्यपि इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता। संविधान सभा के सलाहकार सर बी.एन. राव ने इन तत्वों को नैतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में रखने का सुझाव दिया था, जिसे संविधान सभा ने स्वीकार किया। नीति-निदेशक तत्वों का मूल उद्देश्य यह है कि राज्य एक कल्याणकारी व्यवस्था की ओर अग्रसर हो। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये तत्व न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते, फिर भी शासन की नीतियों के निर्माण में इनका विशेष महत्व है। अनुच्छेद 38 से 51 तक विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है। इनमें सामाजिक न्याय, समानता, आजीविका के अवसर, श्रमिक कल्याण, समान वेतन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम पंचायतों का सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, समान नागरिक संहिता तथा अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे व्यापक विषय शामिल हैं। अनुच्छेद 39 विशेष रूप से राज्य को यह निर्देश देता है कि वह संपत्ति और संसाधनों के समान वितरण की दिशा में कार्य करे तथा पुरुषों और महिलाओं को समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करे। इसी प्रकार अनुच्छेद 39क में निःशुल्क विधिक सहायता और समान न्याय की व्यवस्था की बात कही गई है। अनुच्छेद 41 से 43 तक रोजगार, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार जैसे विषयों पर बल दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की अवधारणा प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य देश में समान कानून व्यवस्था स्थापित करना है। अनुच्छेद 45 और 46 शिक्षा, विशेषकर बाल शिक्षा तथा कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक उत्थान पर केंद्रित हैं। इसके बाद अनुच्छेद 47 सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण स्तर सुधारने का दायित्व राज्य पर डालता है। अनुच्छेद 48 कृषि और पशुपालन तथा 48क पर्यावरण संरक्षण पर बल देता है। अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के संरक्षण, अनुच्छेद 50 न्यायपालिका और कार्यपालिका के पृथक्करण तथा अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने का निर्देश देता है। इस संदर्भ में लेखक द्वारा मनुस्मृति की परंपरा का उल्लेख करते हुए यह विचार प्रस्तुत किया गया है कि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में भी राज्य के कर्तव्यों को लोककल्याण, अनुशासन और न्याय व्यवस्था से जोड़ा गया था। मनु के अनुसार राजा का प्रमुख कर्तव्य प्रजा की रक्षा, न्याय व्यवस्था का पालन और अपराध नियंत्रण माना गया है। लेख में यह भी बताया गया है कि महर्षि मनु के विचारों के अनुसार शासक को संसाधनों का उपयोग लोकहित में करना चाहिए तथा प्राप्त संपदा को शिक्षा, धर्म, अनाथों और समाज कल्याण में लगाना चाहिए। साथ ही शासक के लिए यह भी आवश्यक माना गया है कि वह राज्य की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखे। राजा के विभिन्न रूपों—जैसे इंद्र, सूर्य, वायु, यम, वरुण, चंद्र आदि—के माध्यम से शासन के विविध गुणों का प्रतीकात्मक वर्णन किया गया है, जिसमें न्याय, अनुशासन, लोकप्रियता, निगरानी और दंड व्यवस्था जैसे तत्वों को जोड़ा गया है। समग्र रूप से यह लेख यह स्थापित करने का प्रयास करता है कि भारतीय संविधान के नीति-निदेशक तत्व आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की लोककल्याणकारी अवधारणा को स्पष्ट करते हैं, जबकि प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में भी राज्य के कर्तव्यों को नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों से जोड़ने की परंपरा रही है। इस प्रकार दोनों दृष्टिकोणों में भिन्न ऐतिहासिक संदर्भों के बावजूद लोककल्याण, न्याय और सुव्यवस्था की भावना को एक समान रूप से महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।