चैत्र अमावस्या 18 मार्च, फिर 15 दिन महोत्सवों की भरमार, नवरात्र से हनुमान जयंती तक उत्सवों का दौर

नई दिल्ली। हिंदू नववर्ष की शुरुआत करीब है। हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस साल 18 मार्च को चैत्र अमावस्या है और इसके अगले दिन, 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 का नया वर्ष प्रारंभ होगा, जिसे रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा। गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्र19 मार्च से हिंदू नववर्ष का स्वागत गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में महाराष्ट्र में किया जाएगा, जबकि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे युगादी के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन से मां दुर्गा की आराधना का 9 दिवसीय पर्व, चैत्र नवरात्र, भी शुरू होगा। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का आयोजन किया जाएगा। मार्च में प्रमुख व्रत-त्योहार20 मार्च 2026 (शुक्रवार): सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व झूलेलाल जयंती। 21 मार्च 2026 (शनिवार): मत्स्य जयंती, गौरी पूजा और राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाने वाला गणगौर पर्व। 26 मार्च 2026 (गुरुवार): चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि, हवन और कन्या पूजन का आयोजन। 27 मार्च 2026 (शुक्रवार): रामनवमी का पर्व और नवरात्र का समापन, ज्वारों का विसर्जन भी इसी दिन। 29 मार्च 2026 (रविवार): कामदा एकादशी व्रत। 31 मार्च 2026 (मंगलवार): जैन धर्मावलंबियों का महापर्व महावीर जयंती। 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार): हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा व्रत। इस दिन चैत्र मास का समापन भी होगा।
युवराज के 6 छक्कों से नहीं, क्रिस गेल के 175 रन के वर्ल्ड रिकॉर्ड से है वैभव सूर्यवंशी की नजर

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में उभरते युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी बेहद कम उम्र में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। महज 14 साल की उम्र में क्रिकेट जगत में तेजी से पहचान बनाने वाले इस युवा बल्लेबाज ने अब अपना अगला बड़ा लक्ष्य भी तय कर लिया है। दिलचस्प बात यह है कि वह टी20 क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के लगाने के रिकॉर्ड को नहीं बल्कि क्रिस गेल के ऐतिहासिक 175 रनों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं। उत्साहित हाल ही में आयोजित भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सालाना आयोजन के दौरान मशहूर कमेंटेटर हर्षा भोगले ने वैभव सूर्यवंशी से एक दिलचस्प सवालपूछा। उनसे कहा गया कि अगर उन्हें तीन बड़े रिकॉर्ड्स में से किसी एक को तोड़ने का मौका मिले तो वह किसे चुनेंगे। इन विकल्पों में एक ओवर में छह छक्के लगाने का रिकॉर्ड आईपीएल में 175 रन की सबसे बड़ी पारी और आईपीएल में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड शामिल था। इस सवाल के जवाब में वैभव सूर्यवंशी ने बिना ज्यादा सोचे सीधे क्रिस गेल के 175 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ने की इच्छा जाहिर की। उनका मानना है कि टी20 क्रिकेट में इतनी बड़ी पारी खेलना किसी भी बल्लेबाज के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। वैभव सूर्यवंशी ने पिछले आईपीएल सीजन में डेब्यू करते ही सनसनी मचा दी थी। उन्होंने अपने पहले ही मैच की पहली गेंद पर छक्का लगाकर क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अपने डेब्यू सीजन में उन्होंने शानदार शतक भी लगाया और सिर्फ 7 मैचों में 252 रन बनाकर अपनी धमाकेदार बल्लेबाजी का नमूना पेश किया। इसके बाद से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। आईपीएल के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय जूनियर स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन किया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने ICC अंडर-19 क्रिकेट विश्व कपका खिताब भी अपने नाम किया। इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने 175 रनों की तूफानी पारी खेलकर टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। वैभव के नाम आईपीएल में 35 गेंदों पर दूसरी सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। इस सूची में पहले स्थान पर क्रिस गेल हैं जिन्होंने 30 गेंदों में शतक लगाकर इतिहास रचा था।टी20 क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के लगाने का कारनामा सबसे पहले भारतीय दिग्गज बल्लेबाज युवराज सिंह ने किया था। उन्होंने 2007 में आयोजित ICC T20 विश्व कप 2007 के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। वहीं क्रिस गेल ने 2013 के आईपीएल में पुणे वॉरियर्स के खिलाफ 175 रनों की नाबाद पारी खेलकर टी20 क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी पारी का रिकॉर्ड बनाया था। पिछले 13 सालों में टी20 क्रिकेट का स्तर काफी बदल चुका है लेकिन आज तक कोई भी बल्लेबाज इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाया है। हालांकि जिस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी वैभव सूर्यवंशी करते हैं उसे देखकर क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में वह इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को चुनौती दे सकते हैं।
गैस सिलेंडर न मिलने से भड़की महिला, एजेंसी पर किया हंगामा; लोगों ने कहा माता आ गई,

मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के जौरा क्षेत्र से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है जहां घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान एक महिला ने गैस एजेंसी के बाहर जमकर हंगामा कर दिया। कई दिनों से सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर लगा रही महिला जब इस बार भी खाली हाथ रह गई तो उसने वहीं खड़े होकर जोर जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। इस दौरान वह जीभ निकालकर अजीब हरकतें करने लगी जिससे वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला एजेंसी के गेट के पास खड़ी होकर जोर जोर से चिल्ला रही है और कर्मचारियों से बार बार गैस सिलेंडर देने की मांग कर रही है। इसी दौरान वह जीभ निकालकर डरावनी आवाजें भी निकालने लगती है। उसकी हरकतों को देखकर वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसे माता आना बता दिया और कहने लगे कि महिला पर देवी का साया आ गया है। हालांकि कई लोग उसे समझाने और शांत कराने की कोशिश करते भी दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि महिला पिछले कई दिनों से घरेलू गैस सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर लगा रही थी। बार बार आने के बावजूद जब उसे सिलेंडर नहीं मिला तो उसका गुस्सा फूट पड़ा। गुस्से और हताशा में उसने एजेंसी के गेट को पकड़कर जोर जोर से हिलाना भी शुरू कर दिया और उसे तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर मौजूद अन्य उपभोक्ता और कर्मचारी भी उसकी स्थिति देखकर हैरान रह गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके में पिछले कुछ दिनों से घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर दिक्कतें आ रही थीं। कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेने के लिए बार बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। इसी वजह से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इस पूरे मामले को लेकर जौरा के एसडीएम शुभम शर्मा का कहना है कि हाल ही में गैस बुकिंग के सर्वर में तकनीकी समस्या आ गई थी जिसके कारण कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अब सर्वर की समस्या ठीक कर दी गई है और एजेंसियों में गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं के नंबर के अनुसार सिलेंडर दिए जा रहे हैं। एसडीएम ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो की जानकारी मिली है और महिला को किस वजह से परेशानी हुई इसकी भी जांच कराई जाएगी। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि देर तक चले इस पूरे हंगामे के बाद भी महिला को उस समय गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया और उसे खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
यूपी में LPG गैस की किल्लत का असर, 250 छोटे उद्योग बंद, 40% स्ट्रीट फूड ठेले ठप

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में लखनऊ समेत कई जिलों में एलपीजी गैस की किल्लत का असर साफ दिख रहा है। घरेलू सिलेंडरों के लिए गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति न होने से छोटे और मझोले उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। स्ट्रीट फूड दुकानों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा बंद हो गया है और गैस आधारित उद्योगों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है। घरेलू गैस संकटलखनऊ में कई दिनों से लोग सिलेंडर बुक कराने के बाद भी गैस प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। मोबाइल बुकिंग से भी सिलेंडर नहीं मिल रहा। जिनके पास सिर्फ एक सिलेंडर बचा है, उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उद्योगों और स्ट्रीट फूड पर असरकरीब 250 छोटे उद्योग पूरी तरह बंद हो गए हैं। प्लास्टिक, पैकेजिंग और दवा उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। ब्रज मंडल के स्कूलों में अब मिड-डे मील लकड़ी के चूल्हों पर बनाना पड़ रहा है। फिरोजाबाद में बंद होने वाले चूड़ी कारखानों की संख्या 90 से बढ़कर 112 हो गई। एटा और कासगंज में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। वाराणसी और पूर्वांचल में औद्योगिक क्षेत्रों में गैस संकट के कारण लगभग 30 प्रतिशत उत्पादन ठप रहा। पैकेजिंग इकाइयों में एक सप्ताह से उत्पादन रुक चुका है। रेलवे स्टेशनों के बेस किचन, फूड प्लाजा और जन-आहार संचालन के लिए भी सिलेंडर की आपूर्ति जरूरी हो गई। प्रशासन की कार्रवाई और सुरक्षाजौनपुर में एक एजेंसी पर तोड़फोड़ की कोशिश की गई, बलिया में गैस गोदाम के मैनेजर को धमकी दी गई। मुरादाबाद में एजेंसी पर छापेमारी की गई और अमरोहा में चार दिन गैस न मिलने पर गजरौला मार्ग पर जाम लग गया। हमीरपुर में जिला पूर्ति विभाग ने सुमेरपुर ब्लॉक में छापेमारी कर चार जगहों से 18 सिलेंडर जब्त किए। होटल-रेस्टोरेंट भी प्रभावितगोरखपुर में कमर्शियल सिलेंडर की कमी से होटल और रेस्टोरेंट संचालक कोयला, लकड़ी और डीजल भट्ठी का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद 87 एजेंसियों ने 25,000 से अधिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध कराया। राजनीतिक प्रतिक्रियाएलपीजी संकट को लेकर सपा और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि नोटबंदी के बाद अब सिलेंडरों के लिए भी मारामारी हो रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सिलेंडरों की कमी से कोविड-जैसे हालात बन रहे हैं और कारोबार प्रभावित हो रहा है।
व्रत में मीठा भी और हेल्दी भी, खजूर से बने साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड की आसान रेसिपी

नई दिल्ली:नवरात्रि के व्रत शुरू होते ही ज्यादातर घरों में खाने का मेन्यू लगभग एक जैसा हो जाता है। साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा या फिर साधारण फलाहार बार-बार बनने लगता है। कुछ ही दिनों में लोगों को कुछ अलग और हल्का खाने का मन होने लगता है। ऐसे समय में अगर व्रत के दौरान कुछ मीठा, ठंडा और हेल्दी मिल जाए तो स्वाद के साथ ऊर्जा भी मिलती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक खास रेसिपी तेजी से ट्रेंड कर रही है, जिसे बिना चीनी का साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड कहा जा रहा है। इस रेसिपी को फूड कंटेंट क्रिएटर वृत्ता साहनी ने शेयर किया है और खास बात यह है कि इसमें चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता। मिठास के लिए खजूर का उपयोग किया जाता है, जो प्राकृतिक स्वीटनर की तरह काम करता है। इसके साथ मखाने, बादाम, काजू और ताजे फलों का मिश्रण इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता है। यही वजह है कि यह डिश व्रत रखने वालों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। नवरात्रि के दौरान लोग सात्विक और हल्का भोजन करना पसंद करते हैं, लेकिन विकल्प सीमित होने की वजह से अक्सर एक ही तरह का खाना बनता है। साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड इसी पारंपरिक फलाहार का एक नया और हेल्दी रूप है। इसमें साबूदाना, दूध, ड्राई फ्रूट्स और ताजे फलों का संतुलित मिश्रण होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और स्वाद भी बरकरार रहता है। इस रेसिपी की एक और खासियत यह है कि इसमें बाजार में मिलने वाले कस्टर्ड पाउडर की जरूरत नहीं पड़ती। कस्टर्ड का बेस पूरी तरह से मखाने और मेवों से तैयार किया जाता है। इसके लिए लगभग एक कप भुने हुए मखाने, आधा कप बादाम, दस काजू, थोड़ा केसर और इलायची पाउडर लिया जाता है। मिठास के लिए लगभग बारह से पंद्रह खजूर का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी चीजें स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देती हैं, जो व्रत के दिनों में काफी फायदेमंद होता है। कस्टर्ड बनाने के लिए सबसे पहले बादाम, काजू, मखाने, खजूर, केसर और इलायची को एक बाउल में डालकर उसमें एक कप गर्म दूध मिला दिया जाता है। इस मिश्रण को लगभग तीस मिनट तक भिगोकर रखा जाता है ताकि खजूर मुलायम हो जाएं और मेवे अच्छी तरह फूल जाएं। इसके बाद इन सभी चीजों को मिक्सर में पीसकर गाढ़ा और क्रीमी पेस्ट तैयार किया जाता है। यही पेस्ट पूरे कस्टर्ड का बेस बनता है और इसमें खजूर की हल्की मिठास और केसर की खुशबू स्वाद को खास बना देती है। इसके बाद एक बर्तन में करीब दो कप दूध हल्का गर्म किया जाता है और उसमें तैयार किया हुआ मेवों का पेस्ट डालकर धीमी आंच पर चलाया जाता है। अब इसमें पहले से उबला या स्टीम किया हुआ साबूदाना मिलाया जाता है। पकने के बाद साबूदाना पारदर्शी मोतियों जैसा दिखने लगता है, जो कस्टर्ड में अच्छा टेक्सचर देता है। कुछ देर तक मिश्रण को चलाने के बाद यह कस्टर्ड जैसा गाढ़ा हो जाता है। जब यह थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसमें कटे हुए ताजे फल जैसे आम, केला, अनार और अंगूर मिलाए जाते हैं। फल न केवल स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि शरीर को विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी देते हैं। तैयार साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड को एक से दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दिया जाए तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। परोसते समय ऊपर से कटे हुए पिस्ता या गुलाब की पंखुड़ियां डालकर इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है। यह डिश न केवल स्वादिष्ट है बल्कि मखाने, दूध और ड्राई फ्रूट्स की वजह से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इसी कारण इसे नवरात्रि व्रत के दौरान एक हेल्दी और एनर्जी देने वाला विकल्प माना जा रहा है।
चेहरे पर नेचुरल ग्लो चाहते हैं? रोज़ डाइट में शामिल करें ये 5 फल, 15 दिनों में दिखेगा फर्क

नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सिर्फ महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ फलों में मौजूद विटामिन एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और प्राकृतिक निखार लाते हैं। प्रदूषण तनाव और गलत खानपान अक्सर चेहरे पर दाग धब्बे और झुर्रियों का कारण बनते हैं। ऐसे में फलों का नियमित सेवन आपकी त्वचा को स्वस्थ जवान और ग्लोइंग बनाए रख सकता है। पपीता पपीता में पपेन नामक एंजाइम होता है जो मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। यह त्वचा की रंगत को साफ करता है और हाइड्रेशन बनाए रखता है। विटामिन ए से भरपूर पपीता पाचन सुधारने के साथ साथ त्वचा को अंदर से पोषण भी देता है। संतरा संतरा विटामिन सी और सिट्रिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। यह कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है जिससे त्वचा का ढीलापन कम होता है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। इसके नियमित सेवन से डार्क स्पॉट्स हल्के पड़ते हैं और त्वचा स्वस्थ दिखती है। अनार अनार को जवानी का फल कहा जाता है। यह शरीर में खून बढ़ाता है और चेहरे पर गुलाबी निखार लाता है। इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से त्वचा की सुरक्षा करते हैं और समय से पहले झुर्रियों को रोकते हैं।तरबूज तरबूज में लगभग 92% पानी होता है जो त्वचा की कोशिकाओं को अंदर से हाइड्रेटेड प्लंप और फ्रेश रखता है। इसमें मौजूद लाइकोपीन त्वचा को सूरज की जलन और लालिमा से बचाता है। गर्मियों में तरबूज का सेवन स्किन ग्लो के लिए बेहद फायदेमंद है। कीवी कीवी में विटामिन सी और ई की उच्च मात्रा होती है। यह त्वचा की मरम्मत में मदद करता है दाग धब्बों को कम करता है और आंखों के नीचे काले घेरे घटाता है। नियमित सेवन से त्वचा में कसावट और निखार आता है।कैसे और कब खाएं फलों का पूरा फायदा उठाने के लिए उन्हें सुबह खाली पेट या दोपहर के नाश्ते में खाना सबसे अच्छा है। जूस के बजाय साबुत फल खाएं ताकि फाइबर भी मिल सके। यदि आप लगातार 15 दिनों तक इन 5 फलों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो चेहरे पर साफ और प्राकृतिक ग्लो महसूस किया जा सकता है।
भारत में सबसे ज्यादा बारिश कहां होती है, मेघालय का मावसिनराम क्यों है दुनिया का सबसे बरसाती इलाका

नई दिल्ली:भारत एक ऐसा देश है जहां मौसम और भौगोलिक विविधता की वजह से हर क्षेत्र का जलवायु अलग दिखाई देता है। कहीं रेगिस्तान की तपती गर्मी है तो कहीं पहाड़ों की ठंडी हवाएं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा बारिश किस जगह होती है। इसका जवाब है मेघालय राज्य का एक छोटा सा गांव मावसिनराम। यह स्थान न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाले इलाके के रूप में जाना जाता है। Mawsynram मेघालय के East Khasi Hills जिले में स्थित है। यहां सालाना औसतन लगभग 11872 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। इतनी अधिक वर्षा के कारण इस जगह का नाम Guinness World Records में भी दर्ज किया गया है। तुलना के लिए अगर भारत के बड़े शहरों को देखें तो वहां सालभर में औसतन केवल 700 से 1000 मिलीमीटर बारिश होती है। यानी मावसिनराम में होने वाली बारिश कई शहरों की तुलना में लगभग 10 से 15 गुना ज्यादा है। इस इलाके में इतनी ज्यादा बारिश होने के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। मावसिनराम खासी पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है और सीधे बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के रास्ते में पड़ता है। जब दक्षिण पश्चिम मानसून की नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ियों से टकराती हैं तो वे ऊपर की ओर उठती हैं और भारी बारिश होती है। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में Orographic Rainfall कहा जाता है। मावसिनराम में खासकर जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान लगातार बारिश होती रहती है। कई बार तो यहां एक ही दिन में 1000 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश भी दर्ज की गई है। यही वजह है कि यह इलाका दुनिया के सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। बारिश को मापने के लिए आमतौर पर मिलीमीटर यानी मिमी का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। एक मिलीमीटर बारिश का मतलब होता है कि यदि पानी जमीन से बहकर कहीं और न जाए और न ही वाष्पित हो, तो जमीन पर एक मिलीमीटर मोटी पानी की परत बन जाएगी। इस हिसाब से अगर मावसिनराम में सालभर में 11872 मिमी बारिश होती है तो इसका मतलब है कि वहां लगभग 11.8 मीटर तक पानी जमा हो सकता है। बारिश को मापने के लिए रेन गेज नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। भारत में मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र करने का काम India Meteorological Department यानी आईएमडी करता है। यही संस्था देशभर में बारिश और मौसम के आंकड़ों को रिकॉर्ड करती है। मावसिनराम की अत्यधिक वर्षा इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाती है। यहां चारों तरफ हरियाली, झरने और बादलों से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इतनी ज्यादा बारिश के कारण यहां भूस्खलन और मिट्टी कटाव जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि मेघालय का मावसिनराम भारत का सबसे ज्यादा वर्षा वाला स्थान है और अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और मानसूनी प्रभाव के कारण यह दुनिया भर में खास पहचान रखता है।
जंग के बीच भारत के लिए रवाना हुआ तेल टैंकर ‘जग लाडकी’, कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकला फुजैरा से

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से रवाना हो गया है। सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि हमले के बावजूद जहाज ने सफलतापूर्वक तेल लोड किया और भारत की ओर प्रस्थान कर गया। सरकार के मुताबिक यह जहाज करीब 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैरा से निकला। जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला चौथा भारतीय ध्वज वाला जहाज है। हमले के दौरान कर रहा था तेल लोडिंगसरकारी जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 को जब ‘जग लाडकी’ फुजैरा के सिंगल प्वाइंट मूरिंग पर कच्चा तेल लोड कर रहा था, उसी समय फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। इसके बावजूद जहाज ने अपनी लोडिंग प्रक्रिया पूरी की और सुरक्षित तरीके से भारत के लिए रवाना हो गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावितमाना जा रहा है कि इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए अहम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग खाड़ी देशों से तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है। दो गैस टैंकर भी पार कर चुके हैं क्षेत्रशनिवार को भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है। ‘शिवालिक’ 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि ‘नंदा देवी’ 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। कुल 28 जहाज फंसे थे क्षेत्र मेंस्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज और पूर्वी हिस्से में 4 जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी हिस्से में फंसे जहाजों में भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘जग प्रकाश’ भी शामिल था। ‘जग प्रकाश’ ने शुक्रवार को इस मार्ग को पार कर लिया। यह जहाज ओमान के सोहार बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के तांगा बंदरगाह की ओर रवाना हुआ है और इसके 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय नाविक सुरक्षितसरकार ने बताया कि इस क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और समुद्री गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं। ऊर्जा जरूरतों पर असरभारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और लगभग 60% एलपीजी आयात करता है। संघर्ष से पहले भारत के कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था। वहीं गैस का लगभग 30% और एलपीजी का 85 से 90% हिस्सा सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आयात किया जाता था। तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कुछ कमी की भरपाई की है। वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति घटाई गई है और होटल व रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली एलपीजी में भी कटौती की गई है। सरकार की निगरानी जारीसरकार के अनुसार जहाजरानी महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर रख रहा है। नियंत्रण कक्ष सक्रिय होने के बाद अब तक नाविकों और उनके परिवारों से जुड़े करीब 2,995 फोन कॉल और 5,357 से अधिक ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से अब तक 276 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में भी मदद की गई है, जिनमें पिछले 24 घंटों में लौटे 23 नाविक शामिल हैं।
बिहार राज्यसभा चुनाव: पटना में रातभर ‘होटल पॉलिटिक्स’, 4 कांग्रेस विधायक नॉट रीचेबल

नई दिल्ली। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदान से पहले पटना के होटल पनाश में महागठबंधन के विधायकों को एकत्रित किया गया, जहां कांग्रेस के चार विधायकों के पहुंचने का देर रात तक इंतजार होता रहा। सूत्रों के मुताबिक इन चार विधायकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे राजनीतिक हलकों में सस्पेंस की स्थिति बन गई है। बिहार विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं। इनमें से अभी तक केवल दो विधायक किशनगंज से कमरूल होदा और चनपटिया से अभिषेक रंजन ही होटल पनाश पहुंचे हैं। कमरूल होदा ने दावा किया कि बाकी चार विधायक भी जल्द पहुंच जाएंगे और कांग्रेस के सभी विधायक महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। जिन विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है उनमें मनिहारी से मनोहर सिंह, फारबिसगंज से मनोज विश्वास, अररिया सदर से अब्दुर रहमान और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। महागठबंधन खासकर राजद के नेता इन विधायकों से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को एक जगह रोककर रखना महागठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी संभावित क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। इसी क्रम में राजद नेता तेजस्वी यादव भी होटल पनाश पहुंचे और विधायकों के साथ बैठक की। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि महागठबंधन के पक्ष में कुल 48 विधायक समर्थन में आ सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास कुछ नहीं है, लेकिन बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का मौजूदा संख्या बल 41 है, जिसे बढ़ाकर 48 तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच पटना के एसएसपी कार्तिकेय कुमार शर्मा ने बताया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। होटल पनाश में AIMIM के सभी पांच विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी मौजूद हैं, जो इस चुनाव में महागठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी भूमिका भी अहम मानी जा रही है। आज होगा मतदानबिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान कराया जा रहा है। वोटिंग सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी और परिणाम भी आज ही घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव के लिए कुल छह उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनके नामांकन वैध पाए गए हैं। जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के दो और रामनाथ ठाकुर के तीन नामांकन सेट दाखिल किए गए हैं, जबकि भाजपा ने नितिन नबीन को उम्मीदवार बनाया है। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 वोट जरूरी होते हैं। वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसके लिए चार सीटें जीतना आसान माना जा रहा है। वहीं महागठबंधन के पास कुल 41 विधायक हैं, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका राजद की है और वह एक सीट पर मजबूत स्थिति में है। हालांकि पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। इस सीट पर AIMIM और BSP जैसे छोटे दलों के विधायकों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। AIMIM के पास 5 और BSP के पास 1 विधायक है, जिससे इस सीट के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
एमपी में दो दिन झुलसाएगी तेज गर्मी, फिर 18-19 मार्च को बदलेगा मौसम, बारिश के आसार

भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी से बचने के लिए लोगों ने अब इंतजाम शुरू कर दिए हैं। राजधानी भोपाल में कई घरों को ग्रीन नेट से ढककर धूप के असर को कम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि घरों का तापमान ज्यादा न बढ़े। वहीं इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिन तक तेज गर्मी का असर बना रहेगा। इसके बाद 18 और 19 मार्च को कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले रविवार को ग्वालियर-चंबल संभाग में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दिया। क्षेत्र में दिनभर बादल छाए रहे, जिससे तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक अब यह सिस्टम कमजोर पड़ गया है। मौसम विभाग ने बताया कि 16 और 17 मार्च को प्रदेश में कहीं भी बारिश या बादल का अलर्ट नहीं है। हालांकि 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश में 18 और 19 मार्च को देखने को मिल सकता है। कई जिलों में तापमान में गिरावटमौसम विभाग के अनुसार रविवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री, दतिया में 32.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन क्षेत्रों में मौसम में बदलाव की संभावना पहले ही जताई गई थी। शाम तक बारिश दर्ज नहीं हुई, लेकिन बादलों की वजह से तापमान में गिरावट देखी गई। वहीं पिछले तीन दिनों से लू के असर वाले नर्मदापुरम में भी तापमान घटकर 38.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, उज्जैन में 35.5 डिग्री और जबलपुर में 35.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अप्रैल–मई में पड़ेगी सबसे ज्यादा गर्मीमौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल अप्रैल और मई सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे। इन महीनों के दौरान ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने की संभावना है।