लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के दौरान बिरला ने संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए संतुलित भूमिका निभाई। इस पत्र पर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखकर कहा कि सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रति स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बिरला के उस वक्तव्य की भी प्रशंसा की, जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और नियमों की सर्वोच्चता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे संतुलित और धैर्यपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान में अंतर होना चाहिए। संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां युवाओं, महिलाओं और सभी वर्गों की आवाज को स्थान मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बिरला की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के पत्र पर ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी में संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पत्र सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का उदाहरण है और सभी सांसदों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा। उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इसे 50 से अधिक विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। 11 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। ओम बिरला ने नैतिक आधार पर स्वयं को चर्चा से अलग रखा था। अंत में ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और सदन स्थगित कर दिया गया। इसके अगले दिन ओम बिरला ने फिर से अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।
पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को

Electionनई दिल्ली। चुनाव आयोग ने रविवार को पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है। पुडुचेरी, केरल और असम में 09 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। सभी के नतीजे 0 4 मई को आयेंगे। असम, पुडुचेरी और केरल की सभी 126, 30 और 140 सीटों पर 16 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को की जाएगी। उम्मीदवार 26 मार्च तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 152 सीटो पर 30 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 06 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 07 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 09 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 142 सीटो पर 02 अप्रैल अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 09 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 10 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। इसके अलावा आयोग ने आज गोवा की पोंडा, गुजरात की उमरेठ, कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ, महाराष्ट्र की राहुरी और बारामती, नगालैंड की कोरिडांग (एसटी) तथा त्रिपुरा की धर्मनगर पर उपचुनाव की घोषणा की है। इन सभी सीटों पर संबंधित विधायकों के निधन के कारण रिक्ति उत्पन्न हुई है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव कराया जाएगा। इनमें से गुजरात और महाराष्ट्र की सीटों पर 23 अप्रैल और बाकी सभी सीटों पर 09 अप्रैल को मतदान होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ दिल्ली में आज चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से जुड़ी पत्रकार वार्ता की। इसमें कुमार ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन सभी जगह पर आदर्श आचार संहिता लग गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग नियम और व्यवस्था के तहत काम करता है और आचार संहिता लगने से पूर्व लिए गए सरकारी फैसलों और राजनीतिक बयानों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद दिए गए बयानों और प्रशासनिक निर्णय पर चुनाव आयोग कड़ी नजर रखेगा। चुनाव आयोग के अनुसार असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं। कुल 824 विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 25 लाख चुनाव कर्मी चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 07 मई तमिलनाडु का 10 मई, असम 20 मई और केरल 23 मई को समाप्त होगा। वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा का कार्यकाल 15 जून तक है। कुल 824 विधानसभा सीटों में असम में 126, केरल में 140, पुडुचेरी में 30, तमिलनाडु में 234 और पश्चिम बंगाल में 294 सीटें हैं। असम में 09 एससी और 19 एसटी सीटें, केरल में 14 एससी और 02 एसटी सीटें, पुडुचेरी में 05 एससी सीटें, तमिलनाडु में 44 एससी और 02 एसटी सीटें तथा पश्चिम बंगाल में 68 एससी और 16 एसटी सीटें आरक्षित हैं। आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता लगभग 17.4 करोड़ हैं। असम में लगभग 2.50 करोड़, केरल में 2.70 करोड़, पुडुचेरी में करीब 9.44 लाख, तमिलनाडु में लगभग 5.67 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब 6.44 करोड़ मतदाता हैं।
एलपीजी बुकिंग घटकर 77 लाख हुईं, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं: सरकार

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने सरकार ने कहा है कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी तरह की कमी नहीं है। देश में घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी रिफिल की बुकिंग में गिरावट आई है, यह घटकर अब करीब 77 लाख पर पहुंच गई है, जबकि 13 मार्च को ये 88.8 लाख थी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि देशभर में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, जबकि तेल विपणन कंपनियों के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। मंत्रालय के मुताबिक हालिया दहशत में कमी आने के बाद एलपीजी बुकिंग 88 लाख से घटकर लगभग 77 लाख रह गई है। केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें और ऑनलाइन रिफिल बुक करें। मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी तरह की कमी नहीं है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रभाव पर जारी दैनिक अपडेट में बताया कि ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग का हिस्सा बढ़कर लगभग 87 फीसदी हो गया है, जो पहले 84 फीसदी था। इसका श्रेय तेल विपणन कंपनियों के डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा देने और लोगों को एलपीजी डीलरशिप पर लंबी कतारों में खड़ा होकर आवश्यकता से ज्यादा खरीदारी करने से रोकने वाले अभियान को दिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश की सभी घरेलू रिफाइनरी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और पर्याप्त कच्चे तेल का भंडारण बनाए हुए हैं। देश पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए इन ईंधनों का कोई आयात आवश्यक नहीं है। तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन खुदरा बिक्री केंद्रों या एलपीजी वितरकों के पास भंडारण खत्म होने की कोई जानकारी नहीं दी है। पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की आपूर्ति नियमित रूप से बनाए रखी जा रही है। एलपीजी बुकिंग में गिरावट आई है। इससके एक दिन पहले शनिवार को लगभग 77 लाख बुकिंग दर्ज की गई थी, जबकि 13 मार्च, 2026 को यह संख्या 88.8 लाख थी। इसके साथ ही ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग बढ़कर 84 फीसदी से लगभग 87 फीसदी हो गया है। मंत्रालय के मुताबिक घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देना और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना फिलहाल जारी रहेगा, विशेषकर घरों और प्राथमिक क्षेत्रों जैसे अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों के लिए। केंद्र सरकार ने बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन के लिए निर्देश जारी किए हैं। वहीं, राज्य सरकारें पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए कड़ाई से निगरानी और कार्रवाई कर रही हैं। पेट्रोयिम मंत्रालय के मुताबिक एलपीजी का उत्पादन अधिकतम किया गया है और बुकिंग अंतराल को समुचित रूप से निर्धारित किया गया है, ताकि समान वितरण भी सुनिश्चित हो सके। अद्यतन जानकारी में सरकार ने कहा कि विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों को 24 घंटे हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहा है। 28 फरवरी के बाद से लगभग 1.94 लाख यात्रियों को भारत लौटाया गया है। मंत्रालय के मुताबिक सरकारी तेल विपणन कंपनियां डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा दे रही हैं, घबराकर बुकिंग करने से रोक रही हैं। एलपीजी वितरकों को रविवार को भी खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपूर्ति सुचारू रहे। सरकार ने कहा कि नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। साथ ही उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे घबराकर बुकिंग न करें, डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें। इसके अलावा नागरिकों को पीएनजी जैसी वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच विमानन सुरक्षा निगरानी संस्था नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से एयर इंडिया को लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अस्थायी छूट दी है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को दी जानकारी में बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया यूरोप और अमेरिका जाने के लिए लंबा मार्ग अपनाकर उड़ानें संचालित कर रही है। विमानन नियामक डीजीसीए ने पायलटों के उड़ान और कार्य समय-सीमा में अस्थायी ढील दी है, जो 30 अप्रैल तक लागू रहेगी। डीजीसीए ने इस छूट के तहत लंबी दूरी की उड़ानों में दो पायलटों के लिए उड़ान समय 11 घंटे 30 मिनट और कार्य अवधि 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, पायलटों के समय-सारणी में 30 मिनट की अतिरिक्त सुविधा की जरूरत को भी छूट दी गई है। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की जेद्दा उड़ान में कार्य अवधि 11 घंटे 55 मिनट है, जो अनुमत सीमा से 10 मिनट अधिक है। डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि उड़ान समय वह अवधि है जब विमान उड़ान भरने के लिए जमीन से उठकर सुरक्षित लैंडिंग तक चलता है। कार्य अवधि तब शुरू होती है जब पायलट अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करता है और तब खत्म होती है जब वह अंतिम उड़ान के इंजन बंद होने के बाद अपनी ड्यूटी समाप्त करता है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में कटौती की है। डीजीसीए ने कहा कि यह छूट पायलटों की सुरक्षा और थकान को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि लंबा मार्ग अपनाने के बावजूद उड़ान संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।
2030–2036 के वैश्विक खेल चक्र की तैयारी अभी से जरूरी: जय शाह

नई दिल्ली। भारतीय खेलों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत पर जोर देते हुए आईसीसी अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि देश को 2030 से 2036 के वैश्विक खेल चक्र की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल महासंघों, कॉरपोरेट जगत, खिलाड़ियों और मीडिया के समन्वित प्रयास से ही भारत अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। जय शाह रविवार को स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजेएफआई) के गोल्डन जुबली राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन आयोजित ग्रैंड स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया था, जिसकी मेजबानी दिल्ली स्पोर्ट् जर्नलिस्ट एसोसिएशन (डीएसजेए) ने की। जय शाह ने कहा कि मौजूदा प्रतियोगिताओं पर ध्यान देने के साथ-साथ भविष्य की बड़ी खेल प्रतियोगिताओं के लिए भी अभी से तैयारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और 2036 ओलंपिक जैसे आयोजनों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी, तभी भारत वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना पाएगा। भारतीय क्रिकेट की हालिया उपलब्धियों का जिक्र करते हुए शाह ने 2019 से 2026 के दौर को स्वर्णिम काल बताया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में भारतीय क्रिकेट ने अंडर-19 टूर्नामेंट से लेकर बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों तक हर स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने भारत की टी20 विश्व कप जीत को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए खेल पत्रकारों की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने इन उपलब्धियों को देशभर के करोड़ों प्रशंसकों तक पहुंचाया। कॉरपोरेट क्षेत्र खेलों की वृद्धि का अहम आधारकॉन्क्लेव में संजय भान ने कहा कि पिछले दशक में भारतीय खेलों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि क्रिकेट के अलावा फुटबॉल, हॉकी और गोल्फ जैसे खेल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज कॉरपोरेट केवल जर्सी पर लोगो लगाने वाले प्रायोजक नहीं रह गए हैं, बल्कि वे लीग स्थापित करने, जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकसित करने और खिलाड़ियों के लिए पेशेवर मंच तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही उन्होंने खेल मीडिया को भी इस पूरे तंत्र का अहम हिस्सा बताया, जो खिलाड़ियों की कहानियों को देशभर तक पहुंचाता है। मीडिया अभियान से बढ़ता है खेलों का उत्साहनेविल बस्तावाला ने कहा कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान मीडिया अभियान राष्ट्रीय उत्साह पैदा करने और खिलाड़ियों को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एशियाई खेलों से पहले चलाए गए ‘मिशन 100’ अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआत में यह लक्ष्य कठिन लग रहा था, लेकिन मीडिया के सहयोग से पूरे देश में विश्वास पैदा हुआ और भारत ने अंततः 100 से अधिक पदक जीतने में सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि प्रसारक और मीडिया खेलों के आसपास सकारात्मक माहौल और कहानी गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे खिलाड़ी और प्रशंसक दोनों प्रेरित होते हैं। पारदर्शिता से बढ़ेगा कॉरपोरेट निवेशकॉन्क्लेव में रेमस डि क्रूज ने खेल संगठनों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि खेल महासंघ मजबूत प्रशासन और स्पष्ट नीतियों के साथ काम करें तो इससे कॉरपोरेट क्षेत्र का भरोसा बढ़ेगा और खेलों में निवेश भी बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय और राज्य स्तर के खेल संगठनों में बेहतर प्रशासनिक सुधार से जमीनी स्तर पर खेलों के विकास के नए अवसर खुल सकते हैं। एसजेएफआई के गोल्डन जुबली राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन आयोजित यह ग्रैंड स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य और भविष्य की दिशा पर चर्चा का प्रमुख मंच बना, जिसमें प्रशासकों, कॉरपोरेट प्रतिनिधियों, प्रसारकों और खेल पत्रकारों ने भाग लिया।
द. अफ्रीका ने शानदार गेंदबाजी करके पहले टी-20 में न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराया

माउंट माउंगानुई। चार खिलाड़ियों के डेब्यू वाली दक्षिण अफ्रीका की युवा टीम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए रविवार को न्यूजीलैंड को पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मात्र 91 रन पर समेट दिया और फिर 7 विकेट से जीत दर्ज कर ली। बे ओवल मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में न्यूजीलैंड की पूरी टीम 14.3 ओवर में 91 रन पर ऑलआउट हो गई। जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने 16.4 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 20 गेंद शेष रहते मैच अपने नाम कर लिया। दक्षिण अफ्रीका की ओर से ओपनर कॉनर एस्टरहुइजन ने 48 गेंदों में नाबाद 45 रन की पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई। डेब्यू कर रहे डायन फॉरेस्टर ने भी उनका अच्छा साथ दिया और अंत तक 16 रन बनाकर नाबाद रहे। एस्टरहुइजन ने 17वें ओवर की चौथी गेंद पर काइल जैमीसन को छक्का लगाकर मैच समाप्त किया। न्यूजीलैंड के स्पिनरों ने पिच से थोड़ी मदद लेते हुए कुछ समय तक मुकाबले में वापसी की कोशिश की। कप्तान मिचेल सैंटनर ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए अपने चार ओवर में केवल 8 रन देकर एक विकेट लिया। मैच के बाद दक्षिण अफ्रीका के कप्तान केशव महाराज ने कहा, “हमारी योजनाएं पूरी तरह सफल रहीं और गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन किया। यह युवा गेंदबाज़ी आक्रमण था, लेकिन जिस काम के लिए कहा गया उन्होंने उसे बेहतरीन तरीके से निभाया। अंत में थोड़ा दबाव जरूर था, लेकिन कॉनर और डायन ने परिपक्वता दिखाते हुए टीम को जीत दिलाई।” न्यूजीलैंड इस मैच में अपनी विश्व कप टीम के आठ खिलाड़ियों के बिना उतरा, जिनमें शीर्ष छह बल्लेबाज़ भी शामिल थे। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी कीवी टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पावरप्ले में ही पांच विकेट गिर गए। इसके बाद टीम संभल नहीं सकी और टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपना 10वां सबसे कम स्कोर बना बैठी। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज़ जेराल्ड कोएट्ज़ी ने शुरुआती झटके देते हुए डेवोन कॉनवे और टॉम लैथम को आउट किया और 2 विकेट लेकर 14 रन दिए। वहीं ऑटनील बार्टमैन ने 2 विकेट लेकर न्यूजीलैंड के शीर्ष क्रम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इसके बाद 19 वर्षीय न्कोबानी मोकोएना ने निचले क्रम को समेटते हुए 3 विकेट लेकर 26 रन दिए। न्यूजीलैंड की ओर से जिमी नीशम (26) और मिचेल सैंटनर (15) के बीच 26 रन की साझेदारी ही सबसे बड़ी रही। मोकोएना को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। उन्होंने कहा, “डेब्यू मैच में खेलना मेरे लिए खास अनुभव था। शुरुआत के दो ओवर अच्छे नहीं गए थे, लेकिन मैंने अपनी योजना पर भरोसा रखा और अंत में उसका फायदा मिला।” मैच के बाद न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर ने कहा, “पिच में हमारी उम्मीद से ज्यादा मदद थी, खासकर शुरुआती ओवरों में। दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज़ों ने शुरुआत से ही दबाव बनाया और पावरप्ले में विकेट गिरने के बाद वापसी करना मुश्किल हो गया।”
संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : सिंधिया

– केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का किया शुभारंभ भोपाल। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ऐतिहासिक गौरवशाली नगरी चंदेरी सदियों से कला, संस्कृति और अद्भुत कारीगरी की पहचान रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विरासत भी, विकास भी के मंत्र के साथ यह ऐतिहासिक शहर संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया रविवार शाम को मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री सिंधिया और संस्कृति मंत्री लोधी ने चंदेरी मेला ग्राउंड में आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि ऐतिहासिक गौरवशाली चंदेरी नगरी में महान संगीतज्ञ बैजू बावरा समारोह का आयोजन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ग्वालियर में महान संगीतज्ञ तानसेन तथा चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का आयोजन वृहद स्तर पर हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि चंदेरी में पग-पग और डग-डग पर प्राचीन ऐतिहासिक धराहरें हैं, जो प्राचीन काल का इतिहास बताती हैं। चंदेरी की इस माटी के साथ सिंधिया परिवार का सदैव हृदय से संबंध रहा है। मध्य प्रदेश के एक छोर पर बसी चंदेरी ने समूचे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के अंचल को एक बट वृक्ष के रूप में छाया दी है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में संगीत सम्राट तानसेन तथा चंदेरी में महान संगीतज्ञ बैजू बावरा समारोह के बीच प्रतिवर्ष प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, जिससे ग्वालियर के साथ-साथ आने वाले समय में चंदेरी का भी महत्व संगीत के क्षेत्र में विश्व में चिरस्थाई हो सके। संस्कृति मंत्री लोधी ने कहा कि भारत की संस्कृति में संगीत को आत्मा में अभिव्यक्ति माना गया है। संगीत को नादमय माना गया है। संपूर्ण जगत नादमय में है सृष्टि का आधार नाद है और सभी इसी इसी नाद से प्रेरित होकर अपनी साधना की अभिव्यक्ति करते हैं। भारत की परंपरा में संगीत को ही ईश्वर से संवाद का माध्यम माना जाता है। जहां संगीत है, वहां नृत्य है, जहां नृत्य है, वहां ईश्वर है और जहां ईश्वर है, वहां मंगल ही मंगल होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत साधना की इसी महान परंपरा ने स्वामी हरिदास, तानसेन, बैजू बावरा जैसे महान संगीतज्ञों को जन्म दिया है। बैजू बावरा महान संगीत परंपरा के तपस्वी थे, जो हमेंशा संगीत साधना से आत्मा की यात्रा तक ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ऐसे आयोजन लगातार किए जा रहे हैं, जिससे संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। शुभारंभ अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने चंदेरी में तीन दिवसीय बैजू बावरा समारोह के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैजू बावरा समारोह का आयोजन प्रति वर्ष चंदेरी में नियमित रूप से कराया जाएगा। राज्य स्तरीय साहित्य कला क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने कलाकारों का किया सम्मानकार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मध्य प्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार साहित्य कला क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का सम्मान किया। इनमें दत्तात्रय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार से- नंदिता तिवारी (कृति शीर्षक– स्क्रैप मटेरियल), रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार से -अनुश्री गुप्ता (कृति शीर्षक -सुंदरकांड एवं समकालीन कथा), नारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार से- गोविंद विश्वकर्मा (कृति शीर्षक मृत्युंजय), मुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार – प्रतिभा सिंह (कृति शीर्षक- संपूर्ण रामायण), देवकृष्ण जटाशंकर जोशी पुरस्कार – मोहन विश्वकर्मा (कृति शीर्षक- मैं और मेरी सहेली), जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार -आकाश जाटव (कृति शीर्षक ग्वालियरनेस 2), लक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार – शैलजा सुल्लेरे (कृति शीर्षक – हनुमान चालीसा), राममनोहर सिन्हा पुरस्कार -अनूप श्रीवास्तव (कृति शीर्षक– मांडू सीरीज) एवं विष्णु चिंचालकर पुरस्कार से आदित्य सिंह राजपूत बैलेंस वन (कृति शीर्षक- स्क्रैप मटेरियल) को अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप सम्मान पट्टिका, 51 हजार रुपये की कर मुक्त राशि, शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया गया। समारोह के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों ने रूपंकर कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की। इस प्रदर्शनी में राज्य रूपंकर कला पुरस्कार हेतु आमंत्रित कलाकृतियों में से चयनित 80 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिसमें चित्र एवं मूर्तिकला शामिल हैं। तत्पश्चात हुनर– प्रदर्शनी सह विक्रय में शिल्पकलाओं का अवलोकन किया गया, जिसमें शिल्पकारों द्वारा चंदेरी साड़ी, गौ शिल्प, माटी शिल्प, लकड़ी के खिलौने इत्यादि की सराहना की।
MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्कूली बच्चों को सस्ती दर पर किताबें, यू Gwalior नीफॉर्म व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए सात दिवसीय पुस्तक मेला (बुक फेयर) लगने जा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप यह बुक फेयर मौजूदा मार्च माह के दौरान ग्वालियर मेला में सूर्य नमस्कार तिराहा के समीप स्थित शिल्प बाजार परिसर में लगेगा। कलेक्टर रुचिका चौहान ने रविवार की शाम संबंधित अधिकारियों एवं पुस्तक विक्रेताओं के साथ शिल्प बाजार परिसर पहुँचकर पुस्तक मेले की तैयारियों का जायजा लिया। कलेक्टर ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि पुस्तक मेला अवधि के दौरान बाजार में किसी भी पुस्तक की दुकान से स्कूली पुस्तकें व स्टेशनरी नहीं बेची जा सकेंगीं। इस पर पुस्तक विक्रेताओं एवं एसोसिएशन के अधिकारियों ने सहमति जताई। साथ ही कहा कि पुस्तक विक्रेताओं ने कहा कि पुस्तक मेला को लेकर हम उत्साहित हैं। पुस्तक मेले में प्रत्येक दुकानदार द्वारा किताबों, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म की बिक्री पर आकर्षक छूट भी प्रदान की जायेगी। पुस्तक मेला परिसर के निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी, डीपीसी रविन्द्र तोमर एवं मेला सचिव सुनील बाबू त्रिपाठी सहित अन्य संबंधित अधिकारी, पुस्तक विक्रेता एसोसिएशन के पदाधिकारी व पुस्तक विक्रेता मौजूद थे। पुस्तक विक्रेताओं को जिले के विभिन्न स्कूलों के पाठ्यक्रम उपलब्ध करा दिए गए हैं। कलेक्टर ने इस मौके पर पुस्तक विक्रेताओं से कहा कि वे निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकों के सेट बच्चों एवं उनके अभिभावकों को उपलब्ध कराएं। वेंडर्स यानी पुस्तक विक्रेताओं द्वारा पुस्तक मेला मे किताबें, स्टेशनरी व ड्रेस खरीदने वाले अभिभावकों को विशष छूट दी जायेगी। पुस्तक मेला लगने से अनाधिकृत प्रिंटिग कर पुस्तक बेचने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रोक लगेगी। मार्च माह के द्वितीय पखवाड़े में लगने जा रहे पुस्तक मेले में सीबीएसई, आईएसई एवं एमपी बोर्ड से संबंध सभी निजी स्कूलों के पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकें व यूनीफॉर्म उपलब्ध रहेंगी। जिला प्रशासन द्वारा बच्चों व उनके अभिभावकों के हित को ध्यान में रखकर लिए गए पुस्तक मेला लगाने के निर्णय का पुस्तक प्रकाशकों (पब्लिशर्स) व डीलर्स ने स्वागत किया है। कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान पुस्तक मेले की रूपरेखा के संबंध में विस्तार से चर्चा की। पुस्तक विक्रेताओं ने पिछले साल जिन दुकानदारों को जो दुकानें आवंटित की गई थीं, उन्हीं दुकानों का इस बार भी आवंटन करने का आग्रह किया। कलेक्टर ने कहा कि पुस्तक विक्रेताओं की सहमति से ही आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जायेगा। उन्होंने शिल्प बाजार परिसर की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, शौचालय व पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि पुस्तक मेला परिसर में फूड स्टॉल भी लगवाए जाएं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिये पुस्तक मेला परिसर में बुक बैंक भी स्थापित किया जायेगा। ऐसे स्कूली विद्यार्थी जो अपनी पिछली कक्षा की किताबें दान करना चाहते हैं वे बुक बैंक में अपनी किताबें जमा कर सकेंगे। ज्ञात हो पिछली साल बनाए गए बुक बैंक से 700 जरूरतमंद बच्चों ने नि:शुल्क पुस्तकें प्राप्त की थीं। पुस्तक विक्रेताओं एवं स्कूली बच्चों व उनके अभिभावकों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से हैल्पलाईन नंबर भी जारी कराया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कॉर्डिनेटर आईटी सेल अरविंद तोमर (मोबा. 98935-87573) से संपर्क कर पुस्तक मेला के संबंध मे जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। साथ ही पुस्तक मेला के संबंधित समस्याएं भी दर्ज कराई जा सकेंगी। स्कूलों द्वारा निर्धारित पुस्तकों के सेट की कीमत का परीक्षण कराया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला शिक्षा अधिकारी व जिला परियोजना समन्वयक को जल्द से जल्द यह परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिछली साल के पुस्तक मेले में अभिभावकों व विद्यार्थियों द्वारा दर्ज किए गए फीड बैक का अध्ययन कर इस बार के मेले को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं।
Summer Skin Care Tips: गर्मियों में त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार टिप्स

नई दिल्ली:गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और लगातार बढ़ते तापमान के साथ लोगों को तेज धूप और पसीने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस मौसम में केवल सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी हो जाता है। चिलचिलाती धूप में बाहर निकलते ही त्वचा टैनिंग, सनबर्न और रूखी हो सकती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी त्वचा गर्मियों में भी हेल्दी और चमकदार बनी रहे तो कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाना जरूरी है। 1. सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल यदि आप छात्र हैं या काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलते हैं, तो एसपीएफ 30+ वाला सनस्क्रीन चेहरे और हाथ-पांव पर रोजाना लगाना बेहद जरूरी है। इसे दिन में 3 से 4 बार दोहराना चाहिए। इससे त्वचा टैन होने, सनबर्न और रूखेपन से बची रहती है। 2. पर्याप्त पानी पिएं गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने का खतरा अधिक होता है। इसलिए दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए। यह न केवल त्वचा को हाइड्रेट रखता है बल्कि पूरे शरीर को भी ठंडक और ऊर्जा देता है। 3. मौसमी फल शामिल करें फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है और ये विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। गर्मियों में तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा जैसे मौसमी फल न सिर्फ ताजगी देते हैं बल्कि त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं। 4. हल्के और सूती कपड़े पहनें भीषण गर्मी में हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें। इससे शरीर में गर्मी कम लगेगी और पसीने की समस्या भी कम होगी। घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ, टोपी, धूप का चश्मा या छाता का इस्तेमाल करें ताकि त्वचा तेज धूप से सुरक्षित रहे। 5. तेज धूप में बाहर निकलने से बचें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे तेज होती है। इस समय बाहर निकलने से त्वचा टैन और सनबर्न होने का खतरा बढ़ जाता है। कोशिश करें कि इस समय बाहर जाना जरूरी न हो। टैनिंग को दूर करने के घरेलू उपाय अगर धूप में त्वचा टैन हो जाती है, तो घर पर कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। एलोवेरा जेल, दही, खीरे या टमाटर का रस टैनिंग हटाने में मदद करते हैं। इन्हें त्वचा पर हल्के हाथों से लगाएं और 15-20 मिनट बाद धो लें। ये उपाय त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसका नमी स्तर भी बनाए रखते हैं। गर्मी में थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या से आपकी त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ, चमकदार और हाइड्रेटेड बनी रहेगी।
मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया। विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था। 2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं। कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।