व्रत में मीठा भी और हेल्दी भी, खजूर से बने साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड की आसान रेसिपी

नई दिल्ली:नवरात्रि के व्रत शुरू होते ही ज्यादातर घरों में खाने का मेन्यू लगभग एक जैसा हो जाता है। साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा या फिर साधारण फलाहार बार-बार बनने लगता है। कुछ ही दिनों में लोगों को कुछ अलग और हल्का खाने का मन होने लगता है। ऐसे समय में अगर व्रत के दौरान कुछ मीठा, ठंडा और हेल्दी मिल जाए तो स्वाद के साथ ऊर्जा भी मिलती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक खास रेसिपी तेजी से ट्रेंड कर रही है, जिसे बिना चीनी का साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड कहा जा रहा है। इस रेसिपी को फूड कंटेंट क्रिएटर वृत्ता साहनी ने शेयर किया है और खास बात यह है कि इसमें चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता। मिठास के लिए खजूर का उपयोग किया जाता है, जो प्राकृतिक स्वीटनर की तरह काम करता है। इसके साथ मखाने, बादाम, काजू और ताजे फलों का मिश्रण इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता है। यही वजह है कि यह डिश व्रत रखने वालों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। नवरात्रि के दौरान लोग सात्विक और हल्का भोजन करना पसंद करते हैं, लेकिन विकल्प सीमित होने की वजह से अक्सर एक ही तरह का खाना बनता है। साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड इसी पारंपरिक फलाहार का एक नया और हेल्दी रूप है। इसमें साबूदाना, दूध, ड्राई फ्रूट्स और ताजे फलों का संतुलित मिश्रण होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और स्वाद भी बरकरार रहता है। इस रेसिपी की एक और खासियत यह है कि इसमें बाजार में मिलने वाले कस्टर्ड पाउडर की जरूरत नहीं पड़ती। कस्टर्ड का बेस पूरी तरह से मखाने और मेवों से तैयार किया जाता है। इसके लिए लगभग एक कप भुने हुए मखाने, आधा कप बादाम, दस काजू, थोड़ा केसर और इलायची पाउडर लिया जाता है। मिठास के लिए लगभग बारह से पंद्रह खजूर का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी चीजें स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देती हैं, जो व्रत के दिनों में काफी फायदेमंद होता है। कस्टर्ड बनाने के लिए सबसे पहले बादाम, काजू, मखाने, खजूर, केसर और इलायची को एक बाउल में डालकर उसमें एक कप गर्म दूध मिला दिया जाता है। इस मिश्रण को लगभग तीस मिनट तक भिगोकर रखा जाता है ताकि खजूर मुलायम हो जाएं और मेवे अच्छी तरह फूल जाएं। इसके बाद इन सभी चीजों को मिक्सर में पीसकर गाढ़ा और क्रीमी पेस्ट तैयार किया जाता है। यही पेस्ट पूरे कस्टर्ड का बेस बनता है और इसमें खजूर की हल्की मिठास और केसर की खुशबू स्वाद को खास बना देती है। इसके बाद एक बर्तन में करीब दो कप दूध हल्का गर्म किया जाता है और उसमें तैयार किया हुआ मेवों का पेस्ट डालकर धीमी आंच पर चलाया जाता है। अब इसमें पहले से उबला या स्टीम किया हुआ साबूदाना मिलाया जाता है। पकने के बाद साबूदाना पारदर्शी मोतियों जैसा दिखने लगता है, जो कस्टर्ड में अच्छा टेक्सचर देता है। कुछ देर तक मिश्रण को चलाने के बाद यह कस्टर्ड जैसा गाढ़ा हो जाता है। जब यह थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसमें कटे हुए ताजे फल जैसे आम, केला, अनार और अंगूर मिलाए जाते हैं। फल न केवल स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि शरीर को विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी देते हैं। तैयार साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड को एक से दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दिया जाए तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। परोसते समय ऊपर से कटे हुए पिस्ता या गुलाब की पंखुड़ियां डालकर इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है। यह डिश न केवल स्वादिष्ट है बल्कि मखाने, दूध और ड्राई फ्रूट्स की वजह से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इसी कारण इसे नवरात्रि व्रत के दौरान एक हेल्दी और एनर्जी देने वाला विकल्प माना जा रहा है।
चेहरे पर नेचुरल ग्लो चाहते हैं? रोज़ डाइट में शामिल करें ये 5 फल, 15 दिनों में दिखेगा फर्क

नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सिर्फ महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ फलों में मौजूद विटामिन एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और प्राकृतिक निखार लाते हैं। प्रदूषण तनाव और गलत खानपान अक्सर चेहरे पर दाग धब्बे और झुर्रियों का कारण बनते हैं। ऐसे में फलों का नियमित सेवन आपकी त्वचा को स्वस्थ जवान और ग्लोइंग बनाए रख सकता है। पपीता पपीता में पपेन नामक एंजाइम होता है जो मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। यह त्वचा की रंगत को साफ करता है और हाइड्रेशन बनाए रखता है। विटामिन ए से भरपूर पपीता पाचन सुधारने के साथ साथ त्वचा को अंदर से पोषण भी देता है। संतरा संतरा विटामिन सी और सिट्रिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। यह कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है जिससे त्वचा का ढीलापन कम होता है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। इसके नियमित सेवन से डार्क स्पॉट्स हल्के पड़ते हैं और त्वचा स्वस्थ दिखती है। अनार अनार को जवानी का फल कहा जाता है। यह शरीर में खून बढ़ाता है और चेहरे पर गुलाबी निखार लाता है। इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से त्वचा की सुरक्षा करते हैं और समय से पहले झुर्रियों को रोकते हैं।तरबूज तरबूज में लगभग 92% पानी होता है जो त्वचा की कोशिकाओं को अंदर से हाइड्रेटेड प्लंप और फ्रेश रखता है। इसमें मौजूद लाइकोपीन त्वचा को सूरज की जलन और लालिमा से बचाता है। गर्मियों में तरबूज का सेवन स्किन ग्लो के लिए बेहद फायदेमंद है। कीवी कीवी में विटामिन सी और ई की उच्च मात्रा होती है। यह त्वचा की मरम्मत में मदद करता है दाग धब्बों को कम करता है और आंखों के नीचे काले घेरे घटाता है। नियमित सेवन से त्वचा में कसावट और निखार आता है।कैसे और कब खाएं फलों का पूरा फायदा उठाने के लिए उन्हें सुबह खाली पेट या दोपहर के नाश्ते में खाना सबसे अच्छा है। जूस के बजाय साबुत फल खाएं ताकि फाइबर भी मिल सके। यदि आप लगातार 15 दिनों तक इन 5 फलों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो चेहरे पर साफ और प्राकृतिक ग्लो महसूस किया जा सकता है।
भारत में सबसे ज्यादा बारिश कहां होती है, मेघालय का मावसिनराम क्यों है दुनिया का सबसे बरसाती इलाका

नई दिल्ली:भारत एक ऐसा देश है जहां मौसम और भौगोलिक विविधता की वजह से हर क्षेत्र का जलवायु अलग दिखाई देता है। कहीं रेगिस्तान की तपती गर्मी है तो कहीं पहाड़ों की ठंडी हवाएं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा बारिश किस जगह होती है। इसका जवाब है मेघालय राज्य का एक छोटा सा गांव मावसिनराम। यह स्थान न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाले इलाके के रूप में जाना जाता है। Mawsynram मेघालय के East Khasi Hills जिले में स्थित है। यहां सालाना औसतन लगभग 11872 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। इतनी अधिक वर्षा के कारण इस जगह का नाम Guinness World Records में भी दर्ज किया गया है। तुलना के लिए अगर भारत के बड़े शहरों को देखें तो वहां सालभर में औसतन केवल 700 से 1000 मिलीमीटर बारिश होती है। यानी मावसिनराम में होने वाली बारिश कई शहरों की तुलना में लगभग 10 से 15 गुना ज्यादा है। इस इलाके में इतनी ज्यादा बारिश होने के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। मावसिनराम खासी पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है और सीधे बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के रास्ते में पड़ता है। जब दक्षिण पश्चिम मानसून की नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ियों से टकराती हैं तो वे ऊपर की ओर उठती हैं और भारी बारिश होती है। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में Orographic Rainfall कहा जाता है। मावसिनराम में खासकर जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान लगातार बारिश होती रहती है। कई बार तो यहां एक ही दिन में 1000 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश भी दर्ज की गई है। यही वजह है कि यह इलाका दुनिया के सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। बारिश को मापने के लिए आमतौर पर मिलीमीटर यानी मिमी का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। एक मिलीमीटर बारिश का मतलब होता है कि यदि पानी जमीन से बहकर कहीं और न जाए और न ही वाष्पित हो, तो जमीन पर एक मिलीमीटर मोटी पानी की परत बन जाएगी। इस हिसाब से अगर मावसिनराम में सालभर में 11872 मिमी बारिश होती है तो इसका मतलब है कि वहां लगभग 11.8 मीटर तक पानी जमा हो सकता है। बारिश को मापने के लिए रेन गेज नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। भारत में मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र करने का काम India Meteorological Department यानी आईएमडी करता है। यही संस्था देशभर में बारिश और मौसम के आंकड़ों को रिकॉर्ड करती है। मावसिनराम की अत्यधिक वर्षा इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाती है। यहां चारों तरफ हरियाली, झरने और बादलों से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इतनी ज्यादा बारिश के कारण यहां भूस्खलन और मिट्टी कटाव जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि मेघालय का मावसिनराम भारत का सबसे ज्यादा वर्षा वाला स्थान है और अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और मानसूनी प्रभाव के कारण यह दुनिया भर में खास पहचान रखता है।
जंग के बीच भारत के लिए रवाना हुआ तेल टैंकर ‘जग लाडकी’, कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकला फुजैरा से

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से रवाना हो गया है। सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि हमले के बावजूद जहाज ने सफलतापूर्वक तेल लोड किया और भारत की ओर प्रस्थान कर गया। सरकार के मुताबिक यह जहाज करीब 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैरा से निकला। जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला चौथा भारतीय ध्वज वाला जहाज है। हमले के दौरान कर रहा था तेल लोडिंगसरकारी जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 को जब ‘जग लाडकी’ फुजैरा के सिंगल प्वाइंट मूरिंग पर कच्चा तेल लोड कर रहा था, उसी समय फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। इसके बावजूद जहाज ने अपनी लोडिंग प्रक्रिया पूरी की और सुरक्षित तरीके से भारत के लिए रवाना हो गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावितमाना जा रहा है कि इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए अहम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग खाड़ी देशों से तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है। दो गैस टैंकर भी पार कर चुके हैं क्षेत्रशनिवार को भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है। ‘शिवालिक’ 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि ‘नंदा देवी’ 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। कुल 28 जहाज फंसे थे क्षेत्र मेंस्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज और पूर्वी हिस्से में 4 जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी हिस्से में फंसे जहाजों में भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘जग प्रकाश’ भी शामिल था। ‘जग प्रकाश’ ने शुक्रवार को इस मार्ग को पार कर लिया। यह जहाज ओमान के सोहार बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के तांगा बंदरगाह की ओर रवाना हुआ है और इसके 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय नाविक सुरक्षितसरकार ने बताया कि इस क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और समुद्री गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं। ऊर्जा जरूरतों पर असरभारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और लगभग 60% एलपीजी आयात करता है। संघर्ष से पहले भारत के कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था। वहीं गैस का लगभग 30% और एलपीजी का 85 से 90% हिस्सा सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आयात किया जाता था। तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कुछ कमी की भरपाई की है। वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति घटाई गई है और होटल व रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली एलपीजी में भी कटौती की गई है। सरकार की निगरानी जारीसरकार के अनुसार जहाजरानी महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर रख रहा है। नियंत्रण कक्ष सक्रिय होने के बाद अब तक नाविकों और उनके परिवारों से जुड़े करीब 2,995 फोन कॉल और 5,357 से अधिक ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से अब तक 276 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में भी मदद की गई है, जिनमें पिछले 24 घंटों में लौटे 23 नाविक शामिल हैं।
बिहार राज्यसभा चुनाव: पटना में रातभर ‘होटल पॉलिटिक्स’, 4 कांग्रेस विधायक नॉट रीचेबल

नई दिल्ली। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदान से पहले पटना के होटल पनाश में महागठबंधन के विधायकों को एकत्रित किया गया, जहां कांग्रेस के चार विधायकों के पहुंचने का देर रात तक इंतजार होता रहा। सूत्रों के मुताबिक इन चार विधायकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे राजनीतिक हलकों में सस्पेंस की स्थिति बन गई है। बिहार विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं। इनमें से अभी तक केवल दो विधायक किशनगंज से कमरूल होदा और चनपटिया से अभिषेक रंजन ही होटल पनाश पहुंचे हैं। कमरूल होदा ने दावा किया कि बाकी चार विधायक भी जल्द पहुंच जाएंगे और कांग्रेस के सभी विधायक महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। जिन विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है उनमें मनिहारी से मनोहर सिंह, फारबिसगंज से मनोज विश्वास, अररिया सदर से अब्दुर रहमान और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। महागठबंधन खासकर राजद के नेता इन विधायकों से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को एक जगह रोककर रखना महागठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी संभावित क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। इसी क्रम में राजद नेता तेजस्वी यादव भी होटल पनाश पहुंचे और विधायकों के साथ बैठक की। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि महागठबंधन के पक्ष में कुल 48 विधायक समर्थन में आ सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास कुछ नहीं है, लेकिन बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का मौजूदा संख्या बल 41 है, जिसे बढ़ाकर 48 तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच पटना के एसएसपी कार्तिकेय कुमार शर्मा ने बताया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। होटल पनाश में AIMIM के सभी पांच विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी मौजूद हैं, जो इस चुनाव में महागठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी भूमिका भी अहम मानी जा रही है। आज होगा मतदानबिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान कराया जा रहा है। वोटिंग सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी और परिणाम भी आज ही घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव के लिए कुल छह उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनके नामांकन वैध पाए गए हैं। जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के दो और रामनाथ ठाकुर के तीन नामांकन सेट दाखिल किए गए हैं, जबकि भाजपा ने नितिन नबीन को उम्मीदवार बनाया है। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 वोट जरूरी होते हैं। वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसके लिए चार सीटें जीतना आसान माना जा रहा है। वहीं महागठबंधन के पास कुल 41 विधायक हैं, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका राजद की है और वह एक सीट पर मजबूत स्थिति में है। हालांकि पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। इस सीट पर AIMIM और BSP जैसे छोटे दलों के विधायकों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। AIMIM के पास 5 और BSP के पास 1 विधायक है, जिससे इस सीट के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
एमपी में दो दिन झुलसाएगी तेज गर्मी, फिर 18-19 मार्च को बदलेगा मौसम, बारिश के आसार

भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी से बचने के लिए लोगों ने अब इंतजाम शुरू कर दिए हैं। राजधानी भोपाल में कई घरों को ग्रीन नेट से ढककर धूप के असर को कम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि घरों का तापमान ज्यादा न बढ़े। वहीं इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिन तक तेज गर्मी का असर बना रहेगा। इसके बाद 18 और 19 मार्च को कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले रविवार को ग्वालियर-चंबल संभाग में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दिया। क्षेत्र में दिनभर बादल छाए रहे, जिससे तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक अब यह सिस्टम कमजोर पड़ गया है। मौसम विभाग ने बताया कि 16 और 17 मार्च को प्रदेश में कहीं भी बारिश या बादल का अलर्ट नहीं है। हालांकि 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश में 18 और 19 मार्च को देखने को मिल सकता है। कई जिलों में तापमान में गिरावटमौसम विभाग के अनुसार रविवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री, दतिया में 32.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन क्षेत्रों में मौसम में बदलाव की संभावना पहले ही जताई गई थी। शाम तक बारिश दर्ज नहीं हुई, लेकिन बादलों की वजह से तापमान में गिरावट देखी गई। वहीं पिछले तीन दिनों से लू के असर वाले नर्मदापुरम में भी तापमान घटकर 38.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, उज्जैन में 35.5 डिग्री और जबलपुर में 35.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अप्रैल–मई में पड़ेगी सबसे ज्यादा गर्मीमौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल अप्रैल और मई सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे। इन महीनों के दौरान ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने की संभावना है।
हार्ट अटैक का खतरा कम! रोज सुबह खाली पेट खाएं शहद और लहसुन

नई दिल्ली । दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखना आज के जीवन में बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार शहद और लहसुन में मौजूद पोषक तत्व हृदय और इम्यूनिटी दोनों के लिए लाभकारी हैं। आयुर्वेद और प्राचीन चिकित्सा पद्धति में इसे प्राकृतिक स्वास्थ्य संजीवनी माना जाता है। लहसुन के फायदे लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं है बल्कि यह नसों में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करता है। इसमें एलिसिन नामक तत्व प्राकृतिक एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। यह रक्त संचार को सुचारू रखता है और खून को गाढ़ा होने से रोकता है जिससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। लहसुन में मौजूद सल्फर और अन्य रसायन इसे जीवाणुरोधी बनाते हैं।शहद के फायदे शहद में फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ साथ त्वचा के संक्रमण खुजली और लालिमा को कम करता है। इसके एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण श्वसन रोगों में लाभकारी हैं। शहद लहसुन का मिश्रण जब लहसुन की कलियों को शहद में भिगोया जाता है तो इनके औषधीय गुण दोगुने हो जाते हैं। यह मिश्रण रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाता और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है। पुरानी खांसी सर्दी जुकाम और अस्थमा में मदद करता है। शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालता और कब्ज जैसी समस्याएं दूर करता है। एंटी इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करते हैं। कैसे तैयार करें एक साफ कांच की बरनी लें। उसमें ताजा लहसुन की कलियों को छीलकर डालें। बरनी को शुद्ध शहद से भरें और ढक्कन बंद कर दें। इसे 5 7 दिन के लिए छोड़ दें ताकि लहसुन और शहद फर्मेंट हो जाएं। सेवन का तरीका रोज सुबह खाली पेट इस मिश्रण से एक लहसुन की कली और थोड़ा शहद चबाकर खाएं। यह आपके हृदय और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद फायदेमंद है।
विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी

नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, आगामी वर्षों में विश्व स्तर पर कई संकट और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हो सकती हैं। पं. गौतम का कहना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहेगा, और इसे केवल भविष्यवाणी के रूप में ही नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए। विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, मौसम संबंधी आपदाओं, महामारी और असामान्य प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बनी रहेगी। ज्योतिषाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य भय फैलाना नहीं है, बल्कि समाज को संभावित परिस्थितियों के प्रति सचेत करना है। पं. गौतम ने सभी लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर सतर्कता और तैयारी रखी जाए, तो इन संभावित आपदाओं का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कम उम्र में बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा खराब लाइफस्टाइल और अनकंट्रोल शुगर जिम्मेदार

नई दिल्ली:आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें किडनी की बीमारियां सबसे चिंताजनक मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शरीर में बिना किसी स्पष्ट संकेत के धीरे धीरे विकसित होती रहती हैं। यही वजह है कि इन्हें साइलेंट किलर भी कहा जाता है। जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं तब तक कई बार बीमारी काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी होती है। देश में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ये दोनों ही समस्याएं किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण मानी जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है तो उसे नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। समय पर जांच से बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव हो सकता है। नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उपेंद्र सिंह के अनुसार पिछले दो से तीन वर्षों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में भी किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे सेडेंटरी लाइफस्टाइल अत्यधिक तनाव शरीर में पानी की कमी और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक क्रॉनिक किडनी डिजीज और किडनी स्टोन के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। क्रॉनिक किडनी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे धीरे शरीर को प्रभावित करती है। कई मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब यह बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है और किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर आज भी किडनी रोग के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीजों में इन दोनों में से एक या दोनों समस्याएं मौजूद होती हैं। इसके अलावा दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के जिम सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेना शरीर में पानी की कमी और खराब जीवनशैली भी किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण बन रहे हैं। कई मामलों में बीमारी की देर से पहचान होने के कारण मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ जाती है जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। हालांकि समय रहते सावधानी बरती जाए तो किडनी की बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पैरों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे पेशाब में झाग आए पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव महसूस हो या लगातार थकान और भूख में कमी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा उल्टी आना जी मिचलाना या अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना भी किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट क्रिएटिनिन टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना नमक का सेवन सीमित करना धूम्रपान से दूर रहना और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

नई दिल्ली। हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान को लेकर भारत के रुख पर कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार देशहित में सही कदम उठा रही है। होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा दुनिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और संतुलित कूटनीति से होना चाहिए। पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध जरूरीहोसबाले ने कहा कि संघ हमेशा पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देता है। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता बनी रहना पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि वहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। भारतीयता और हिंदुत्व पर क्या बोलेहोसबाले ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार हिंदुत्व केवल एक विचार या मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है, जो समाज में समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है। संघ में मुस्लिम और महिलाओं की भूमिकासंघ में सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति संघ से जुड़ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में पहले से ही कई मुस्लिम कार्यकर्ता सक्रिय हैं। महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि शाखा की कार्यप्रणाली में महिलाएं शामिल नहीं होतीं, लेकिन संघ की कई अन्य गतिविधियों और संगठनों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं। बेसहारा गोवंश पर भी बोलेबेसहारा गोवंश के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गायों को केवल दूध के लिए उपयोगी न समझें, क्योंकि गोबर और गौमूत्र भी कई तरह से उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें सड़कों पर छोड़ना उचित नहीं है। बीजेपी से संबंध पर दिया जवाबराजनीति में संघ की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कई विचारधाराएं हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संघ की विचारधारा को अपनाया। इसी वजह से संघ से जुड़े कई लोग राजनीति में सक्रिय होकर देशहित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं। हरियाणा में बड़ा RSS केंद्र बनाने की तैयारीसभा के दौरान उत्तर भारत में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पानीपत (हरियाणा) में बड़ा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यहां पट्टीकल्याणा स्थित माधव दृष्टि साधना केंद्र को नागपुर स्थित मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में संघ के कार्यों को समन्वित किया जा सकेगा। तीन दिवसीय सभा की प्रमुख बातेंRSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के भविष्य की योजनाओं और गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं। सभा में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन विस्तार की रणनीति पर भी चर्चा हुई। साथ ही अगले वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।