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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खरगे एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में कथित रूप से महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी का खुलासा नहीं करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी दस्तावेजों में एक ट्रस्ट से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे चुनावी पारदर्शिता और वैधानिक दायित्वों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली द्वारा दर्ज कराई गई है। उनका आरोप है कि कलबुर्गी स्थित सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट, जिसकी स्थापना मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा की गई थी, उससे संबंधित वित्तीय विवरण चुनावी हलफनामे में शामिल नहीं किए गए। शिकायत के अनुसार ट्रस्ट की कुल परिसंपत्तियां 31 मार्च 2023 तक लगभग 36.86 करोड़ रुपये आंकी गई थीं, लेकिन इनका उल्लेख चुनावी दस्तावेजों में नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी वित्तीय स्थिति, संपत्तियों और संभावित हितों से जुड़ी जानकारियां स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। उनका आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय हितों और उससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विवरणों को सार्वजनिक न करना चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से कानूनी समीक्षा कराए जाने की मांग भी की गई है। शिकायत में ट्रस्ट के ट्रस्टी रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, आयकर दस्तावेजों तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कराने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि चुनावी हलफनामे में आवश्यक जानकारियां पूरी तरह प्रस्तुत की गई थीं या नहीं। शिकायत में चुनावी पारदर्शिता से जुड़े कानूनी प्रावधानों और विभिन्न न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि यदि किसी उम्मीदवार द्वारा जानबूझकर अथवा अनजाने में भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाती है, तो उसकी तथ्यात्मक जांच की जानी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनावी घोषणाओं की सत्यता और पूर्णता सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और संबंधित प्राधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा किए जाने की मांग की गई है। अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार का आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, मल्लिकार्जुन खरगे या कांग्रेस पार्टी की ओर से भी इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया और संभावित जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी हलफनामों में दी जाने वाली जानकारी की पारदर्शिता लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का विषय रही है। यदि मामले में औपचारिक जांच आगे बढ़ती है तो संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और क्या किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है।

MPL 2026: इंदौर में क्रिकेट का तिहरा धमाका, मालवा-निमाड़ सहित तीन बड़े मुकाबले आज

मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (MPL) का रोमांच गुरुवार को अपने चरम पर है। इंदौर में डेली कॉलेज ग्राउंड और होलकर स्टेडियम पर आज तीन अहम मुकाबले खेले जा रहे हैं, जिनमें अलग-अलग क्षेत्रों की टीमें एक-दूसरे से टकरा रही हैं। दिन की शुरुआत उज्जैन फाल्कन्स और जबलपुर रॉयल लायंस के मुकाबले से हुई, जिसमें दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी। मालवा स्टैलियन्स vs रॉयल निमाड़ ईगल्स: मध्य प्रदेश की बड़ी भिड़ंतदूसरा मुकाबला मालवा स्टैलियन्स और रॉयल निमाड़ ईगल्स के बीच हो रहा है। यह मैच इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जा रहा है, जहां बल्लेबाजों के लिए अनुकूल पिच पर बड़े स्कोर की उम्मीद की जा रही है। मालवा स्टैलियन्स अपनी अंक तालिका में स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरी है, जबकि रॉयल निमाड़ ईगल्स आक्रामक खेल के दम पर जीत हासिल करने की कोशिश में है।  रात का रोमांच: चंबल घड़ियाल्स vs ग्वालियर चीतादिन का तीसरा और सबसे रोमांचक मुकाबला रात 7:30 बजे होलकर स्टेडियम की फ्लडलाइट्स में खेला जाएगा। इसमें चंबल घड़ियाल्स और ग्वालियर चीता आमने-सामने होंगे। चंबल घड़ियाल्स अपनी मजबूत गेंदबाजी के लिए जानी जाती है, जबकि ग्वालियर चीता की टीम आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर मैच पलटने की क्षमता रखती है। यह मुकाबला अंक तालिका के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। चौके-छक्कों की उम्मीद, दर्शकों के लिए फुल एंटरटेनमेंहोलकर स्टेडियम और डेली कॉलेज ग्राउंड की पिचें अब तक बल्लेबाजों के लिए मददगार रही हैं। ऐसे में आज के सभी मुकाबलों में बड़े शॉट्स, तेज रनगति और रोमांचक मोड़ देखने की पूरी संभावना है। दर्शकों के लिए यह दिन क्रिकेट से भरपूर मनोरंजन लेकर आया है, जहां हर मैच के साथ उत्साह और बढ़ता जा रहा है।

एनडीए में शामिल होने की खबरों को किया खारिज, शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा- दीदी के साथ खड़ा हूं और रहूंगा

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के संभावित राजनीतिक रुख को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने उन अटकलों को सिरे से खारिज किया है जिनमें उन्हें पार्टी के कथित बागी सांसदों की सूची में शामिल बताया जा रहा था। सिन्हा ने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और उनका साथ छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता। राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं तेज थीं कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे अपना राजनीतिक भविष्य किसी नए समीकरण के साथ जोड़ सकते हैं। इसी बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी के कई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग राजनीतिक रुख अपनाने की इच्छा जताई है। इन चर्चाओं में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी सामने आया था। हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उनके जीवन और राजनीतिक सफर के कठिन दौर में उनका साथ दिया था। ऐसे में उनके प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सम्मान हमेशा बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार की बगावत या दल बदल से जुड़े नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। सूत्रों के अनुसार भी ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने किसी पत्र या प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हों। उनके करीबी लोगों का कहना है कि उनके नाम को लेकर जो दावे किए गए, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है। दरअसल हाल के दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से शुभकामनाएं देने के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला था। प्रधानमंत्री के लगातार लंबे कार्यकाल को लेकर दिए गए उनके संदेश को कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने अलग नजरिए से देखा था। हालांकि अब स्वयं सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी नेता को बधाई देना राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। शत्रुघ्न सिन्हा वर्तमान में पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने हालिया लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। फिल्म जगत से राजनीति में आए सिन्हा लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध भी रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी देखने को मिले हैं। हाल के दिनों में कुछ नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज किया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि संगठन मजबूत है और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। शत्रुघ्न सिन्हा के ताजा बयान को तृणमूल कांग्रेस के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। उनके स्पष्ट रुख ने पार्टी के भीतर संभावित टूट या बड़े स्तर पर असंतोष की चर्चाओं को फिलहाल कमजोर कर दिया है। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और दलों की नजर बनी रहेगी।

इंदौर मौसम अपडेट: प्री-मानसून कमजोर, दो–तीन दिन बारिश से राहत नहीं – उमस बढ़ाएगी परेशानी

मध्‍य प्रदेश । इंदौर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, लेकिन राहत की बारिश फिलहाल दूर नजर आ रही है। पिछले 24 घंटों में जहां दिन के तापमान में करीब 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं रात का तापमान 1 डिग्री बढ़ गया है। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले दिन की तुलना में मामूली वृद्धि के साथ दर्ज हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे रात में भी गर्मी का असर बना रहा।  प्री-मानसून कमजोर, बारिश का इंतजार लंबाइस बार इंदौर में प्री-मानसून गतिविधियां बेहद कमजोर बनी हुई हैं। अब तक शहर में केवल करीब 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जो सामान्य से काफी कम मानी जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की कोई संभावना नहीं है। आसमान साफ रहेगा, लेकिन उमस लोगों को परेशान करती रहेगी।  प्रदेश में बारिश, लेकिन इंदौर में सूखा जैसा मौसममध्य प्रदेश के कई हिस्सों में ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण तेज आंधी और बारिश का दौर जारी है। ग्वालियर, जबलपुर, बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र में मौसम सक्रिय है, लेकिन इंदौर और आसपास का इलाका इस सिस्टम से लगभग बाहर बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी वजह से इंदौर में बादलों की सक्रियता नहीं बन पा रही है और बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में भी राहत नहीमौसम विभाग का अनुमान है कि 13 जून के आसपास ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट रहेगा, लेकिन इंदौर में फिलहाल बारिश की कोई मजबूत संभावना नहीं दिख रही है। उमस और गर्मी से बढ़ी परेशानीबारिश न होने और हवा में नमी बढ़ने के कारण शहर में उमस का असर तेज हो गया है। दिन में गर्म हवाएं और रात में चिपचिपी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। लोग अब मानसून की औपचारिक एंट्री का इंतजार कर रहे हैं, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में राहत मिल सके।

पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया। राउत ने कहा कि उन्हें कुछ ऐसी जानकारियां और तस्वीरें प्राप्त हुई हैं, जिनमें अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिजीत दीपके के बीच कथित मुलाकात होने की बात कही जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी तस्वीरें भेजी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे अमेरिका में हुई एक बैठक से जुड़ी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं कोई सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं और केवल उनके पास पहुंची सूचनाओं का उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय में वह और जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेतृत्व को लेकर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में चर्चा बढ़ी हुई है। हाल के दिनों में इस संगठन की गतिविधियों और अभियानों ने सोशल मीडिया सहित राजनीतिक मंचों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में कथित मुलाकात को लेकर दिया गया बयान तुरंत राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विवाद बढ़ने के बाद अभिजीत दीपके ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संजय राउत के दावे को आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी मुलाकात की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण छात्र हैं और प्रधानमंत्री के सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल स्तर को देखते हुए ऐसी मुलाकात की कल्पना भी करना कठिन है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि यदि कोई तस्वीर सामने आई है तो वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक से तैयार की गई हो सकती है। दीपके ने कहा कि उनका संगठन स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधियां किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध पर आधारित नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल उनके विचारों का समर्थन करना चाहता है तो यह उसका निर्णय हो सकता है, लेकिन संगठन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण अपुष्ट दावे और तस्वीरें तेजी से चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि इस विवाद में भी दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कथित तस्वीरों और दावों की सत्यता क्या है। फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि संजय राउत के बयान और अभिजीत दीपके के खंडन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी सामने आती है तो विवाद की दिशा और प्रभाव दोनों स्पष्ट हो सकेंगे।

इंदौर: पॉश इलाके के बंगले में AC ब्लास्ट से भीषण आग, बड़ा हादसा टला

मध्‍य प्रदेश । इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र स्थित शिव शक्ति नगर के एक पॉश बंगले में मंगलवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि घर में लगे एयर कंडीशनर (AC) में शॉर्ट सर्किट के बाद जोरदार धमाका हुआ, जिसके चलते पूरी इमारत आग की चपेट में आ गई। आग की लपटें और घना काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई देने लगा, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घटना रिवाज गार्डन के पीछे स्थित बंगला नंबर 5 की है, जो रितेश राजेंद्र दुबे का बताया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तेज गर्मी के बीच AC में तकनीकी खराबी के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और फिर अचानक ब्लास्ट हो गया। इसके बाद आग तेजी से पूरे घर में फैल गई। आग लगते ही घर के अंदर मौजूद लोग और स्टाफ घबरा गए और चीख-पुकार मच गई। कई लोग अंदर फंस गए, लेकिन समय रहते स्थानीय लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही कनाड़िया थाना पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घर में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों ने करीब 8 हजार लीटर पानी की बौछार की और लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। हालांकि, इस घटना में बंगले के अंदर काफी सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के सही कारणों की जांच कर रहे हैं। शुरुआती तौर पर AC में शॉर्ट सर्किट को ही हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

सरकार का बड़ा गैस सुधार अभियान, PNG वाले उपभोक्ताओं को छोड़ना पड़ सकता है LPG कनेक्शन

नई दिल्ली । देश में ऊर्जा संसाधनों के बेहतर उपयोग और गैस वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में उन उपभोक्ताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनके पास एक साथ PNG और LPG दोनों कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को भविष्य में अपने LPG कनेक्शन की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यकता पड़ने पर उसे सरेंडर करने के लिए कहा जा सकता है। सरकार का मानना है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे उसी प्रणाली का उपयोग करना चाहिए। इससे गैस वितरण नेटवर्क अधिक व्यवस्थित होगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई शहरों और कस्बों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में घरों तक सीधे गैस पहुंचने लगी है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही घर में दो अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन बनाए रखना वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। यही कारण है कि अब ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिसमें उपभोक्ताओं को उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार एक विकल्प चुनना पड़ सकता है। इससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक पारदर्शी और संतुलित बन सकेगी। PNG को बढ़ावा देने के पीछे आर्थिक और रणनीतिक दोनों कारण बताए जा रहे हैं। पाइप्ड गैस व्यवस्था में उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और स्टोरेज जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा गैस की आपूर्ति लगातार बनी रहती है, जिससे घरेलू उपयोग में सुविधा बढ़ जाती है। शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पहले ही इस व्यवस्था को अपना चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बदलते हालात को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक हो गया है। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच सरकार ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दे रही है जो लंबे समय तक टिकाऊ और व्यवस्थित साबित हो सकें। PNG नेटवर्क का विस्तार भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत गैस वितरण कंपनियों को ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान करने का निर्देश दिया जा सकता है, जिनके रिकॉर्ड में PNG और LPG दोनों कनेक्शन दर्ज हैं। इसके बाद संबंधित उपभोक्ताओं को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए सूचना भेजी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य किसी प्रकार की असुविधा पैदा करना नहीं बल्कि उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। हालांकि जिन इलाकों में अभी PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां LPG सिलेंडर व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रसोई गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार का बदलाव प्रस्तावित नहीं है। सरकार का फोकस फिलहाल उन क्षेत्रों पर है जहां पाइप्ड गैस नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क के विस्तार के साथ गैस वितरण व्यवस्था और अधिक आधुनिक, प्रभावी तथा उपभोक्ता-केंद्रित बन सकती है। इससे न केवल ऊर्जा प्रबंधन बेहतर होगा बल्कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

सुकेश चंद्रशेखर केस में जैकलीन की राहत की उम्मीदों को झटका, सुप्रीम कोर्ट की पीठ बदलेगी

नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चर्चित मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका लगा है। उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ के एक न्यायाधीश ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया, जिसके बाद अब इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी। इससे अभिनेत्री की कानूनी चुनौती पर फैसला फिलहाल आगे के लिए टल गया है। जैकलीन फर्नांडिस ने उस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को बरकरार रखा गया था। अभिनेत्री का पक्ष है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि सुनवाई के शुरुआती चरण में ही प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया। सुनवाई के दौरान संबंधित न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि एक जुड़े हुए मामले में उनका पारिवारिक संबंध पेशेवर रूप से सामने आया था। इसी कारण उन्होंने निष्पक्षता और न्यायिक मर्यादा को प्राथमिकता देते हुए स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करने का निर्णय लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस याचिका को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वर्तमान पीठ का कोई सदस्य शामिल न हो। यह मामला 200 करोड़ रुपये के कथित धन शोधन प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें कथित ठगी और अवैध वित्तीय लेनदेन की जांच लंबे समय से जारी है। हाल ही में एक निचली अदालत ने अभिनेत्री, कथित मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। इसी आदेश और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही को चुनौती देते हुए जैकलीन ने उच्च न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि अभिनेत्री का संपर्क मुख्य आरोपी के साथ बना हुआ था और उन्हें विभिन्न माध्यमों से महंगे उपहार तथा आर्थिक लाभ प्राप्त हुए थे। जांच के दौरान उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बाद में पूरक आरोपपत्र में उनका नाम भी शामिल किया गया, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अभियोजन पक्ष का दावा है कि मुख्य आरोपी ने एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रभावशाली व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को कथित रूप से ठगा। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से बड़ी रकम की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया और उसके बाद धन के स्रोत तथा उपयोग को छिपाने की कोशिश की गई। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी न्यायाधीश का स्वयं को मामले से अलग करना न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य और पारदर्शी हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष वातावरण में हो और भविष्य में किसी प्रकार के हितों के टकराव की आशंका न रहे। अब इस मामले की अगली सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी। कानूनी हलकों में इस पर नजर बनी हुई है क्योंकि आने वाले दिनों में यह तय होगा कि अभिनेत्री की याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

रिटायरमेंट से 5 महीने पहले लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक के ठिकानों पर छापा, करोड़ों की संपत्ति की जांच

मध्‍य प्रदेश । इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के विभिन्न ठिकानों पर बुधवार को छापामार कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार कंडवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के सत्यापन और प्रारंभिक जांच के बाद विशेष न्यायालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर कार्रवाई की योजना बनाई गई। अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार रात से ही टीमों को अलर्ट कर दिया गया था और बुधवार सुबह विभिन्न स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान इंदौर स्थित आवासीय और व्यवसायिक परिसरों सहित अन्य संपत्तियों की जांच की गई। अधिकारियों ने दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्ति संबंधी अभिलेखों का परीक्षण शुरू किया है। लोकायुक्त का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों और आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है। पूछताछ के दौरान संबंधित अधिकारी की ओर से वेतन के अतिरिक्त कुछ अन्य आय स्रोतों की जानकारी भी जांच दल को दी गई। इनमें परिवार द्वारा संचालित व्यवसाय, किराये से होने वाली आय तथा पत्नी की आय संबंधी विवरण शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियां इन दावों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर रही हैं ताकि वास्तविक आय और अर्जित संपत्तियों के बीच संबंध स्थापित किया जा सके। कार्रवाई के दौरान एक बैंक लॉकर की भी जांच की गई, जहां से सोने के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। लोकायुक्त जांच में इंदौर स्थित व्यवसायिक भवन, आवासीय संपत्तियों, प्लॉट और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि होने संबंधी जानकारी भी सामने आई है। संबंधित दस्तावेजों की वैधता, खरीद के समय की परिस्थितियों तथा भुगतान के स्रोतों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां संपत्ति के बाजार मूल्य और घोषित आय के बीच अंतर का भी विश्लेषण कर रही हैं। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार संबंधित अधिकारी लगभग तीन दशक की सेवा अवधि में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ रहे हैं। जांच के दौरान उनके सेवाकाल, आय विवरण, संपत्ति घोषणाओं और वित्तीय अभिलेखों का भी परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों के सत्यापन और मूल्यांकन के बाद विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। लोकायुक्त ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांचाधीन है। जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सत्यापन के बाद ही यह तय किया जाएगा कि आय और संपत्ति के बीच कितना अंतर है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी। फिलहाल दस्तावेजी जांच और संपत्तियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू

मध्‍य प्रदेश । मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर ढांचों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने ‘ऑपरेशन डेंजर’ के तहत शहरभर में चिन्हित खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में 100 से अधिक भवनों को जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को नगर निगम की विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है और संबंधित संपत्ति मालिकों को कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह के मुताबिक, अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिन इमारतों की स्थिति अत्यंत खतरनाक पाई गई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर जर्जर संरचनाओं को हटाने और ध्वस्त करने का कार्य कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जा सके। अभियान के तहत शहर के अलग-अलग जोन और वार्डों में निगम की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से भवनों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले सभी गंभीर रूप से खतरनाक भवनों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए। नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई भवन अत्यधिक जर्जर दिखाई देता है या उसकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जानी चाहिए। इसके अलावा जिन मकान मालिकों के भवन कमजोर या क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, उन्हें भी समय रहते आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी गई है। प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता मिलकर संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। इसी कारण निगम लगातार जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी कर रहा है ताकि लोग जोखिमपूर्ण भवनों के प्रति गंभीरता दिखाएं। जर्जर भवनों पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने मानसून से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी, नालों की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और कंट्रोल रूम की सक्रियता बढ़ाई गई है। निगम का दावा है कि बारिश के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे तैयार रहेंगी। नगर निगम का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में मानसून पूर्व यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित हादसों को समय रहते रोका जा सके।