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गौरी, किरण राव और बच्चे मौजूद, इरफान पठान ने शेयर किया खास वीडियो..

नई दिल्ली:बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने 14 मार्च को अपना 61वां जन्मदिन बेहद खास अंदाज में मनाया। इस मौके पर घर की शांति और परिवार की गर्मजोशी ने माहौल को और खास बना दिया। आमिर के जन्मदिन पर परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे, जिसमें उनकी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट, पूर्व पत्नी किरण राव और बच्चे जुनैद, इरा और आजाद शामिल थे। इस खास मौके पर कुछ करीबी दोस्त और पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान भी आमिर के साथ जश्न में शामिल हुए। इरफान पठान ने इस सेलिब्रेशन का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। वीडियो में आमिर खान केक काटते हुए नजर आए और उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। वीडियो के कैप्शन में इरफान ने लिखा, आमिर भाई को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इरा खान को अगत्सु फाउंडेशन के जरिए मेंटल हेल्थ के लिए अवेयरनेस और सपोर्ट पर काम करते देखना अच्छा लगा। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर फैंस का दिल जीत लिया और बधाइयों की लड़ी लग गई। इस अवसर ने यह भी दिखाया कि आमिर खान अपने निजी जीवन में कितने मिलनसार और पारिवारिक मूल्यवान हैं। जहां उनके प्रोफेशनल लाइफ में वे लगातार अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध रहते हैं, वहीं अपने परिवार के साथ बिताया गया समय भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गौरी स्प्रैट और किरण राव दोनों ही बच्चों के साथ मौजूद रहकर आमिर के जन्मदिन को और यादगार बनाते दिखे। वर्क फ्रंट की बात करें तो आमिर खान आखिरी बार फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ में नजर आए थे। यह फिल्म 20 जून 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था। आमिर की फिल्मों का हमेशा से ही दर्शकों पर गहरा प्रभाव पड़ा है और उनकी अदाकारी की तारीफ होती रही है। फिलहाल, आमिर खान प्रोडक्शंस की नई फिल्म ‘एक दिन’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। इस फिल्म में आमिर के बेटे जुनैद खान और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म 1 मई को सिनेमाघरों में आने वाली है और इसे लेकर दर्शकों में उत्साह काफी बढ़ा हुआ है। इस फिल्म के माध्यम से आमिर खान ने अपने बेटे जुनैद को बड़े पर्दे पर लाकर नया अध्याय शुरू किया है। आमिर खान का जन्मदिन न केवल परिवार और करीबी दोस्तों के लिए खास रहा, बल्कि फैंस के लिए भी खुशी का अवसर बना। सोशल मीडिया पर जन्मदिन की बधाइयों का सिलसिला लगातार जारी रहा। उनके फैंस ने हर जगह जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजकर इस दिन को और भी खास बना दिया। इस तरह आमिर खान ने 61वें जन्मदिन को अपने परिवार और मित्रों के बीच खुशियों और प्यार के साथ सेलिब्रेट किया, जो उनके जीवन के प्रेरणादायक और सकारात्मक पक्ष को दर्शाता है।

SRU Steels सहित टॉप 5 पेनी स्टॉक्स ने निवेशकों को लगाया झटका..

नई दिल्ली:पिछले दो हफ्तों में शेयर बाजार ने निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल पेश किया। इस दौरान खासकर कम कीमत वाले पेनी स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 15 ऐसे पेनी स्टॉक्स रहे जिनमें 15% से लेकर 55% तक की गिरावट दर्ज की गई। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले टॉप 5 स्टॉक्स की पहचान की गई है, जो निवेशकों के लिए चेतावनी के रूप में काम कर सकते हैं। इन स्टॉक्स का चयन एक विशेष स्क्रीनिंग के आधार पर किया गया। इसका उद्देश्य ऐसे कम कीमत वाले और सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाले शेयर ढूंढना था, जिन पर हाल ही में दबाव दिखा। इस स्क्रीन में मार्केट कैप 1,000 करोड़ रुपये से कम, शेयर की कीमत 20 रुपये से कम और न्यूनतम ट्रेडिंग वॉल्यूम 5 लाख शेयर जैसी शर्तें शामिल थीं। सूची में सबसे ऊपर एसआरयू स्टील्स (SRU Steels) है। कंपनी ने पिछले दो हफ्तों में 56% की भारी गिरावट दर्ज की। इसका पिछला क्लोजिंग प्राइस 1.47 रुपये था और मार्केट कैप मात्र 8.81 करोड़ रुपये। 1995 में स्थापित यह कंपनी मुख्य रूप से स्टेनलेस स्टील की ट्रेडिंग के बिजनेस में सक्रिय है। दूसरे नंबर पर सुफा फार्माकेम (Supha Pharmachem / Remedium Lifecare) है, जिसने 34% की गिरावट दिखाई। इसका पिछला क्लोजिंग प्राइस 0.45 रुपये रहा। 1988 में स्थापित यह कंपनी एडवांस्ड फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट्स और अन्य फार्मा उत्पादों की ट्रेडिंग करती है। तीसरे स्थान पर पारले इंडस्ट्रीज (Parle Industries) है, जिसने 33% का नुकसान झेला। इसका क्लोजिंग प्राइस 4.96 रुपये था। 1983 में स्थापित यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है। चौथे नंबर पर है ए-1 एसिड लिमिटेड (A-1 Acid), जिसने 28% की गिरावट दर्ज की। पिछला क्लोजिंग प्राइस 18.16 रुपये था और मार्केट कैप 835 करोड़ रुपये। 2004 में स्थापित यह कंपनी एसिड और केमिकल्स की होलसेल ट्रेडिंग के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन बिजनेस में भी सक्रिय है। पांचवें नंबर पर है नवकार अर्बनस्ट्रक्चर (Navkar Urbanstructure), जिसने 27% की गिरावट दर्ज की। इसका क्लोजिंग प्राइस 0.95 रुपये और मार्केट कैप 107 करोड़ रुपये रहा। 1992 में स्थापित यह कंपनी RCC और RMC पाइप्स सहित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण और विकास में सक्रिय है। पेनी स्टॉक्स निवेशकों को आकर्षित करते हैं क्योंकि इनकी कीमत कम होती है और इनमें जल्दी मुनाफा कमाने की संभावना रहती है। लेकिन इनके साथ जुड़े जोखिम भी कम नहीं हैं। कम लिक्विडिटी और अधिक अस्थिरता के कारण इन स्टॉक्स को बेचना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा इन कंपनियों के बारे में जानकारी सीमित होती है, जिससे कीमतों में हेरफेर और अचानक क्रैश का खतरा रहता है। बिना स्पष्ट रणनीति और जोखिम प्रबंधन के निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए, अगर आप भी पेनी स्टॉक्स में निवेश करते हैं, तो बाजार की हालिया गतिविधियों पर नज़र रखना और समझदारी से निर्णय लेना बेहद जरूरी है।

भोपाल में मनाई गई मां कर्मा देवी की 1010वीं जयंती, निकली भव्य शोभायात्रा

नई दिल्ली। साहू समाज की आराध्य देवी मां कर्मा देवी की 1010वीं जयंती राजधानी में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। जयंती के अवसर पर लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां सुबह मां कर्मा देवी का पुष्प श्रृंगार और महाआरती संपन्न हुई। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण था और समाज के पदाधिकारी, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मध्य प्रदेश तैलिक साहू सभा के प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक साहू ने बताया कि महाआरती में प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश साहू, महासचिव अनिल कुमार साहू, डॉ. प्रकाश सेठ, हरिशंकर साहू, मदनलाल साहू, जिला अध्यक्ष रविंद्र साहू सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान महिलाएं और युवाओं ने भक्ति गीत और धार्मिक भजन प्रस्तुत किए, जिससे पूरे मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल बना। जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो मंगलवारा, जैन मंदिर रोड, इतवारा, इलेक्ट्रॉनिक मार्केट, सराफा चौक, लखेरापुरा, भवानी चौक, सोमवारा, चौकी इमामबाड़ा और छोटे भैया कॉर्नर होते हुए पुनः मंदिर परिसर में समाप्त हुई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। शोभायात्रा में घोड़ा-बग्गी, दुल्दुल घोड़ी, आकर्षक धार्मिक झांकियां और कलश धारण की महिलाएं शामिल थीं। इसके साथ ही महाकाल भक्त मंडल के सैकड़ों युवा मां कर्मा देवी के जयकारों के साथ यात्रा में शामिल होकर भक्ति और उत्साह का वातावरण बनाते रहे। शोभायात्रा के समापन के बाद मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई, जिससे सभी ने सामूहिक रूप से धार्मिक और सामाजिक उल्लास का अनुभव किया। इसके अतिरिक्त, छोला विश्राम घाट स्थित मां कर्मा देवी की प्रतिमा पर भी समाजजनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सुदामा प्रसाद साहू, हिम्मत साहू, रमेश साहू, मदनलाल साहू, भगवानदास साहू, विवेक साहू, प्रीतम साहू, विनोद साहू, राकेश साहू, जितेंद्र साहू, सुनील साहू और निक्की साहू सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम ने भोपाल में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक प्रस्तुत किया। भक्ति, उत्साह और श्रद्धा के इस संगम ने जयंती समारोह को यादगार बना दिया।

नेपाल में तीर्थयात्रियों की बस खाई में गिरी, 7 की मौत, 7 घायल

नई दिल्ली । नेपाल के गंडकी प्रांत के गोरखा जिले में शनिवार रात एक दुखद सड़क हादसा हुआ जिसमें भारतीय तीर्थयात्रियों से भरी बस खाई में गिर गई। मनाकामना मंदिर से दर्शन कर लौट रही इस बस में 7 लोगों की मौत हो गई और 7 घायल हो गए। हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक जारी रहा। पुलिस के अनुसार श्रद्धालुओं को लेकर जा रही माइक्रोबस मनाकामना मंदिर से तनहुन जिले के अंबुखैरेनी इलाके की ओर जा रही थी तभी सड़क फिसलने के कारण लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गई। बस में एक दर्जन से ज्यादा यात्री सवार थे। घायल यात्रियों को भरतपुर स्थित चितवन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भेजा गया। गोरखा जिला ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रमुख सूरज अर्याल ने बताया कि मृतकों में दो महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं सभी भारतीय नागरिक हैं। जिला पुलिस प्रमुख भरत बहादुर बीके ने मृतकों की पहचान मुथु कुमार (58) अनामालिक (58) मीनाक्षी (59) शिवगामी (53) विजयल (57) मीना (58) और तमिलरसी (60) के रूप में की। हादसे में बस का ड्राइवर सुरक्षित बच गया जबकि उसका सहायक घायल हुआ। नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और गंभीरता पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। विश्व बैंक की स्टडी के अनुसार 2007 के बाद नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान तीन गुना बढ़ चुका है और अब यह देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) का लगभग 1.5% है। सड़क हादसों में मरने वालों में 70% से अधिक पैदल यात्री साइकिल सवार और मोटरसाइकिल चालक जैसे संवेदनशील रोड यूजर शामिल होते हैं। नेपाल में पहाड़ी इलाकों में संकरी और खराब सड़कें भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाएं भूकंप और भूगर्भीय अस्थिरता परिवहन व्यवस्था की सीमाएं और वाहन ओवरलोडिंग जैसी वजहों से सड़क हादसे आम हैं। उदाहरण के तौर पर फरवरी में धादिंग जिले में एक पर्यटक बस 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी जिसमें 19 लोगों की मौत हुई थी और 25 घायल हुए थे। विशेषज्ञ बताते हैं कि नेपाल का ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम है। सड़क किनारों पर गहरी खाइयां और ढलान होने के कारण थोड़ी सी गलती या खराब मौसम में वाहन आसानी से फिसल सकते हैं। संकरी घुमावदार सड़कें सुरक्षा दीवारों की कमी भूस्खलन और मिट्टी खिसकने जैसी घटनाएं हादसों की संभावना बढ़ाती हैं। पुराने वाहन ओवरलोडिंग और ड्राइवरों का अपर्याप्त प्रशिक्षण भी जोखिम बढ़ाता है। सरल शब्दों में कहें तो नेपाल में पहाड़ खराब सड़कें भारी बारिश और कमजोर बुनियादी ढांचा मिलकर सड़क हादसों की संख्या और गंभीरता को बढ़ाते हैं। मनाकामना मंदिर से लौटते समय हुए इस दुखद हादसे ने एक बार फिर नेपाल की सड़क सुरक्षा की चिंताओं को उजागर किया है।

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं? ओएमसी की रिफाइनरी कीमतों पर तैयारी और जनता को क्या मिलेगा फायदा

नई दिल्ली  में पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां यानी ओएमसी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशिया संकट से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद ओएमसी को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है। इस परिस्थिति से निपटने के लिए ओएमसी अब रिफाइनरियों को कम दरों पर पेट्रोल और डीजल देने पर विचार कर रही हैं। विशेष रूप से रिफाइनरी ट्रांसपोर्टेशन शुल्क यानी आरटीपी पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने का विकल्प इस योजना का मुख्य हिस्सा है। आरटीपी वह इंटरनल प्राइस है, जिस पर रिफाइनरियां अपने मार्केटिंग सेगमेंट को ईंधन बेचती हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिफाइनरियां कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ मार्केटिंग कंपनियों पर न डाल सकें। यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इस प्रस्तावित कदम से रिफाइनरियां आरटीपी के जरिये अपने बढ़े हुए खर्च का पूरा बोझ आगे नहीं बढ़ा पाएंगी और उन्हें इसका एक हिस्सा खुद वहन करना होगा। इस तरह ओएमसी को घाटा कम करने का अवसर मिलेगा और खुदरा कीमत स्थिर रखी जा सकेगी। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) जैसी एकीकृत कंपनियां इस घाटे की भरपाई अपने रिफाइनिंग और विपणन परिचालन के बीच कर सकती हैं। लेकिन मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल), चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) जैसी एकल रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में योगदान सीमित है। ये कंपनियां अपना उत्पादन मुख्य रूप से ओएमसी को बेचती हैं, इसलिए उनके मार्जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार यदि यह आरटीपी पर रोक या छूट निजी रिफाइनरियों पर भी लागू होती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी निजी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। ये कंपनियां अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा ओएमसी को बेचती हैं, इसलिए उनके लाभ में कमी आने की संभावना है। इस पूरे कदम का मकसद जनता को सीधा फायदा पहुंचाना है, यानी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रह सकें। हालांकि रिफाइनरियों और निजी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि आम लोग फिलहाल कीमतों की बढ़ोतरी से बचेंगे, लेकिन कंपनियों को घाटा सहना पड़ेगा। इस योजना से यह साफ होता है कि ओएमसी सरकार और जनता की ओर से कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, जबकि रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ेगा। अगर वैश्विक तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो यह कदम ओएमसी और रिफाइनरियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, लेकिन आम जनता के लिए फिलहाल राहत का संकेत है।

ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष से पूरे इलाके में तनाव चरम पर है। इस बीच इजरायल डिफेंस फोर्स आईडीएफ के प्रवक्ता बीजी एफी डेफ्रिन ने आईएएनएस को हालात की गंभीरता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालिया संघर्ष का मुख्य मकसद ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को नियंत्रित करना है। आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा हमने दो हफ्ते पहले इजरायल पर संभावित खतरे को हटाने के लिए कार्रवाई की। ईरान ने वर्षों से अपनी न्यूक्लियर क्षमता विकसित की है और जून में किए गए हमले के बाद वे इसे फिर से शुरू कर रहे थे। उनका प्रयास यह था कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को जमीन के नीचे छिपाया जाए ताकि इजरायल और अमेरिका के बमों से बचा जा सके। यह हमारे लिए गंभीर खतरा है। एफी डेफ्रिन ने ईरान के मिसाइल प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार ईरान हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर बना रहा था जिनकी रेंज 2 000 से 3 000 किलोमीटर तक थी। इन मिसाइलों का उद्देश्य इजरायल पर हमला करना था। वे महीने में सैकड़ों हथियार तैयार करने की योजना बना रहे थे और यह स्तर हमारे लिए बर्दाश्त के बाहर था उन्होंने कहा। प्रवक्ता ने कहा कि अब ईरान ने खाड़ी देशों और कमर्शियल तेल जहाजों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वे अपने पुराने मित्र देशों ओमान यूएई बहरीन और सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं जिन्होंने ईरान के साथ कभी बुरा नहीं किया। इनके हमले मिलिट्री टारगेट पर नहीं बल्कि सिविलियन टारगेट जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और बुर्ज खलीफा पर हो रहे हैं। यह केवल उनकी असली प्रवृत्ति दिखाता है। एफी डेफ्रिन ने जोर देकर कहा कि आईडीएफ इस स्थिति को गंभीरता से देख रहा है। पड़ोसी देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं और यह इतिहास का एक मौका है। हमारा लक्ष्य पूरे इलाके में स्थायी शांति बनाना है। ईरान केवल इजरायल के लिए खतरा नहीं है बल्कि यह एक क्षेत्रीय समस्या है जिसे सुलझाना जरूरी है। आईडीएफ प्रवक्ता की यह प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि इजरायल ईरानी न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों साथ ही उनके बढ़ते आक्रामक रवैये को लेकर सतर्क है। साथ ही खाड़ी देशों और वैश्विक तेल परिवहन पर ईरानी हमलों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरे केवल द्विपक्षीय नहीं हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। आईडीएफ के अनुसार इलाके में शांति बनाए रखना और पड़ोसी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब उनकी प्राथमिकता बन गई है।

व्हाइट हाउस के बाहर ईरान विरोधी रैली, अमेरिकी कार्रवाई पर इरानियों ने जताया उत्साह

नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की हालिया कार्रवाई को लेकर कई लोग खुलेआम समर्थन जता रहे हैं। इस समर्थन और ईरानी खामेनेई शासन का विरोध करने के लिए प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर एक बड़ी रैली में जुटे। रैली में शामिल अधिकांश लोग कभी ईरान में रहते थे और उन्होंने अमेरिकी मीडिया को बताया कि वे ट्रंप के हमलों को 1979 से देश पर राज कर रहे इस्लामिक शासन को गिराने का अवसर मानते हैं। प्रदर्शनकारी साइरस कियान ने कहा कि उन्होंने अपनी पहली 25 साल की जिंदगी ईरान में बिताई। उन्होंने जोर देकर कहा अगर ट्रंप आसमान से दबाव डालना जारी रखते हैं तो ईरानी लोग इस राज को खत्म कर देंगे। रैली में शामिल लोगों ने अमेरिकी कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाल रंग की हैट पहनी थी जिस पर मेक ईरान ग्रेट अगेन लिखा था। इस रैली को आयोजित करने वाले संगठन डीसी प्रोटेस्ट्स फॉर ईरान के वॉलंटियर रेजा मौसवी ने कहा राष्ट्रपति ने कहा था कि मदद आ रही है। उन्होंने वादा किया और उस पर कायम रहे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मौजूदा ईरानी शासन को खत्म करना और देश के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी को अगला नेता बनाने के लिए समर्थन देना था। प्रदर्शन में शामिल वॉलंटियर मरजीह मिर्जासलेही ने कहा हम चाहते हैं कि हमारे शाह ईरान वापस आएं क्योंकि वे अकेले ही ईरान को फिर से महान बना सकते हैं। मरजीह ने 2007 में ईरान छोड़ दिया था। कई प्रदर्शनकारी अमेरिकी और ईरानी झंडे और पोस्टर लेकर आए थे जिनमें पहलवी को ट्रंप के साथ खड़ा दिखाया गया था। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने अमेरिका से कहा कि अमेरिकी इंडस्ट्रियल प्लांट्स को इलाके से हटाया जाए। IRGC ने आम लोगों से भी अपील की कि वे उन जगहों को खाली करें जहां अमेरिकी शेयरहोल्डर मौजूद हैं ताकि किसी भी खतरे या नुकसान से बचा जा सके। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पिछले दो दिनों में ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि इन हमलों में गैर-सैन्य फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया और कई आम लोग मारे गए। इससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अस्थिर हो गई है और अमेरिकी-ईरानी तनाव चरम पर है। इस रैली और ईरानी प्रतिक्रिया से साफ है कि अमेरिका की हालिया कार्रवाई ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है। प्रदर्शनकारी अमेरिकी हस्तक्षेप को ईरानी शासन को बदलने का अवसर मान रहे हैं जबकि ईरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और नागरिकों को जोखिम से बचाने के लिए सतर्क है।

एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप इस हफ्ते 61,715 करोड़ रुपए घटा, एसबीआई और बजाज फाइनेंस को भी नुकसान

नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप इस हफ्ते 61,715 करोड़ रुपए घटा है। इसकी वजह वैश्विक अस्थिरता के कारण शेयर बाजार में तेज बिकवाली होना है।इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत में उछाल के कारण पिछले हफ्ते सेंसेक्स में 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत और निफ्टी में 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे निवेशकों का सेंटीमेंट बाजार को लेकर नकारात्मक हो गया है, जिसके कारण बाजार में भारी गिरावट हुई और बीएसई पर सूचीबंद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप करीब 20 लाख करोड़ रुपए कम होकर 430 लाख करोड़ रुपए हो गया। एचडीएफसी बैंक के साथ देश की शीर्ष कंपनियों का मार्केट कैप इस हफ्ते 4.48 लाख करोड़ रुपए कम हो गया है। इसमें एसबीआई, बजाज फाइनेंस, टीसीएस और रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एलआईसी, इन्फोसिस और एचयूएल नाम शामिल है। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप 61,715.32 करोड़ रुपए कम होकर 12,57,391.76 करोड़ रुपए हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का मार्केटकैप 89,306.22 करोड़ रुपए कम होकर 9,66,261.05 करोड़ रुपए हो गया है। बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 59,082.49 करोड़ रुपए कम होकर 5,32,053.54 करोड़ रुपए हो गया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्केटकैप 53,312.52 करोड़ रुपए कम होकर 8,72,067.63 करोड़ रुपए हो गया है। आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 42,205.04 करोड़ रुपए कम होकर 8,97,844.78 करोड़ रुपए रह गया है। भारती एयरटेल का मार्केटकैप 38,688.78 करोड़ रुपए कम होकर 10,28,431.72 करोड़ रुपए हो गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केटकैप 33,289.88 करोड़ रुपए कम होकर 18,68,293.17 करोड़ रुपए हो गया है। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) का बाजार पूंजीकरण 31,245.49 करोड़ रुपए कम होकर 4,88,985.57 करोड़ रुपए हो गया है। इन्फोसिस का मार्केटकैप 24,230.96 करोड़ रुपए कम होकर 5,06,315.58 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, एफएमजीसी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का मार्केट कैप 15,401.57 करोड़ रुपए कम होकर 5,07,640.94 करोड़ रुपए हो गया है।

ट्रंप ने ईरान डील से किया इनकार, नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर जताया शक

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव को लेकर संभावित समझौते को खारिज कर दिया है। शनिवार को एनबीसी न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है लेकिन प्रस्तावित शर्तें काफी अच्छी नहीं हैं”। उन्होंने साफ किया कि जब तक युद्ध की स्थिति जारी है वाशिंगटन जल्दबाजी में कोई सीजफायर डील नहीं करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा ईरान डील करना चाहता है और मैं इसे नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें अभी पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने संभावित समझौते की शर्तों पर अधिक जानकारी देने से इनकार किया लेकिन यह स्वीकार किया कि न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को छोड़ना किसी भी मामले में प्राथमिकता होगी। इंटरव्यू में ट्रंप ने अमेरिकी फोर्स द्वारा ईरान के रणनीतिक ऑयल हब खार्ग आइलैंड पर स्ट्राइक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खार्ग आइलैंड को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है लेकिन जरूरत पड़ने पर हम फिर से हमला कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऊर्जा लाइनों को नहीं छुआ क्योंकि उन्हें फिर से बनाने में सालों लग जाते हैं। ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के जीवित होने पर भी संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं। अभी तक कोई उन्हें सार्वजनिक रूप में नहीं देख पाया है। मैं सुन रहा हूं कि वह जिंदा नहीं हैं और अगर हैं तो उन्हें अपने देश के लिए स्मार्ट काम करना चाहिए और वह है सरेंडर करना।” ट्रंप ने किसी खास ईरानी नेता को भविष्य के विकल्प के रूप में नामित करने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका के पास ऐसे लोग हैं जो देश के भविष्य के लिए बेहतरीन नेतृत्व कर सकते हैं। उन्होंने ग्लोबल ऊर्जा की कीमतों के बीच रूस के तेल पर लगाए गए बैन को अस्थायी रूप से कम करने की रणनीति का भी जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार यह बैन 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद लगाया गया था और संकट खत्म होते ही इसे वापस ले लिया जाएगा। यूक्रेन को मदद देने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि हमें जिस आखिरी इंसान से मदद चाहिए वह वोलोडिमिर जेलेंस्की हैं। उनका यह बयान वैश्विक राजनीति और सुरक्षा स्थिति में अमेरिका के रुख को स्पष्ट करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का ईरान डील से इनकार और नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर संदेह ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई अस्थिरता की संभावना पैदा कर दी है। ट्रंप ने अपनी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य सटीकता को सबसे ऊपर रखा है जबकि वार्ता और रणनीतिक समझौते फिलहाल लंबित हैं।

सोने और चांदी ने इस हफ्ते सीमित दायरे में कारोबार किया, कीमतों में मामूली बदलाव

नई दिल्ली। सोने और चांदी ने इस हफ्ते एक सीमित दायरे में कारोबार किया है। इस कारण से सोने और चांदी की कीमतों में मामूली कमी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत इस हफ्ते 352 रुपए कम होकर 1,58,399 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,58,751 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। समीक्षा अवधि में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,45,416 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,45,093 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,18,799 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,19,063 रुपए प्रति 10 ग्राम था। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी मामूली गिरावट देखी गई। यह एक हफ्ते में 235 रुपए कम होकर 2,60,488 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 2,60,723 रुपए प्रति किलो थी। हाजिर बाजार में 24 कैरेट के सोने ने 12 मार्च को 1,60,303 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम भाव छुआ। वहीं, न्यूनतम भाव 13 मार्च को 1,58,399 रुपए प्रति 10 ग्राम का रहा। चांदी ने 10 मार्च को 2,70,944 रुपए प्रति किलो का उच्चतम भाव छुआ। वहीं, न्यूनतम भाव 9 मार्च को 2,60,056 रुपए प्रति किलो का देखा गया। इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली है। सोना और चांदी का दाम क्रमशः 5,061.70 डॉलर प्रति औंस और 81.343 डॉलर प्रति औंस था, जो कि एक हफ्ते पहले क्रमश: 5,158.70 डॉलर प्रति औंस और 84.311 डॉलर प्रति औंस था। सोने और चांदी में कमजोरी की वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स इस हफ्ते 100 के पार निकलकर 100.360 पर बंद हुआ है, जो कि बीते पांच महीनों का डॉलर का सबसे उच्चतम स्तर है।