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ऋतुराज गायकवाड़ के बल्ले से निकला दम तो युवा वैभव सूर्यवंशी रहे फ्लॉप: जानिए क्यों तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी पर उठ रहे हैं तीखे सवाल

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के सितारों से सजी इंडिया ‘ए’ ने दांबुला के मैदान पर मेजबान श्रीलंका ‘ए’ को 8 विकेट के बड़े अंतर से मात देकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन तो किया, लेकिन इस एकतरफा जीत के बाद भी टीम मैनेजमेंट और सेलेक्टर्स के चेहरे पर पूरी तरह से संतुष्टि के भाव नजर नहीं आ रहे हैं। इस मुकाबले में मिली शानदार कामयाबी के बावजूद कुछ ऐसी तकनीकी और रणनीतिक कमियां उजागर हुई हैं, जिसके कारण इस जीत के मायने क्रिकेट पंडितों को थोड़े अधूरे और चिंताजनक लग रहे हैं। टीम का शीर्ष क्रम और मध्यक्रम आगामी बड़े दौरों के लिहाज से अभी भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आ रहा है। मैच के सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने एक बार फिर अपनी क्लास और बेहतरीन फॉर्म का परिचय दिया। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण के सामने सूझबूझ और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन बनाते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी और दमदार बल्लेबाजी की। ऋतुराज की इस कप्तानी पारी के दम पर ही भारत ने मेजबान टीम द्वारा दिए गए लक्ष्य को बेहद आसानी से महज दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। ऋतुराज का यह प्रदर्शन उन्हें मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खटखटाने के लिए एक बार फिर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पेश करता है। हालांकि, इस चमकीली पारी के दूसरी तरफ युवा और होनहार सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का फ्लॉप होना टीम के लिए एक बड़ा झटका रहा। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर इंडिया ‘ए’ की जर्सी पहनने वाले वैभव इस महत्वपूर्ण मुकाबले में पूरी तरह से असहज नजर आए और बिना कोई बड़ा योगदान दिए बेहद सस्ते में पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने के कारण पावरप्ले में टीम को जो आक्रामक शुरुआत मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी। वैभव की इस असफलता ने आगामी मैचों के लिए ओपनिंग स्लॉट की स्थिरता पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है। जीत के रास्ते में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा की बल्लेबाजी शैली रही। टी20 और आधुनिक सीमित ओवरों के क्रिकेट के इस दौर में जहां बल्लेबाज पहली ही गेंद से कड़ा प्रहार करने की कोशिश करते हैं, वहीं तिलक वर्मा ने मैदान पर कछुआ गति से बल्लेबाजी की। उनके बल्ले से रनों की गति इतनी धीमी थी कि एक समय पर मजबूत स्थिति में दिख रही भारतीय टीम पर भी अनावश्यक दबाव बनता हुआ दिखने लगा था। तिलक की इस अत्यधिक रक्षात्मक और धीमी अप्रोच को देखकर कमेंटेटर्स और क्रिकेट विश्लेषक भी हैरान रह गए, क्योंकि वे अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि दांबुला में मिली इस 8 विकेट की बड़ी जीत के बाद भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और जानकारों को यह सफलता पूरी तरह से संपूर्ण नहीं लग रही है। आगामी समय में होने वाली मुख्य अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाओं और टीम इंडिया के कड़े शेड्यूल को देखते हुए ‘ए’ टीम के खिलाड़ियों से केवल मैच जीतने की ही नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट के मापदंडों के अनुरूप प्रभावी खेल दिखाने की उम्मीद की जाती है। यदि वैभव सूर्यवंशी की निरंतरता और तिलक वर्मा के स्ट्राइक रेट की समस्या का जल्द समाधान नहीं तलाशा गया, तो आने वाले मैचों में टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज

मध्यप्रदेश। जबलपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सदर शाखा से जुड़ा एक बड़ा बैंकिंग फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर्स सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर उसे असली बताने की रिपोर्ट तैयार की गई और उसके आधार पर करीब 43 लाख रुपए का गोल्ड लोन स्वीकृत करा लिया गया। मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और गोल्ड लोन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस के अनुसार यह कथित फर्जीवाड़ा दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच किया गया। शिकायत में कहा गया है कि बैंक द्वारा अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर ने कुछ ग्राहकों के साथ मिलकर नकली आभूषणों को असली सोना प्रमाणित किया। बैंक ने वैल्यूअर की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिया और संबंधित आभूषण बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख दिए गए। जानकारी के मुताबिक बैंक ने न्यू रामनगर स्थित एक ज्वेलरी कारोबारी को गोल्ड वैल्यूअर के रूप में अधिकृत किया था। आरोप है कि उन्होंने बैंक में आए कई ग्राहकों के नकली सोने को अपनी जांच रिपोर्ट में असली बताया, जिसके आधार पर लोन स्वीकृत हुए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक अन्य अधिकृत वैल्यूअर ने भी एक मामले में कथित रूप से नकली आभूषणों को असली प्रमाणित किया। मामले का खुलासा तब हुआ जब गोल्ड लोन लेने वाले कई खाताधारकों ने निर्धारित अवधि के बाद भी अपनी किस्तें जमा नहीं कीं। बैंक की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद लॉकर में रखे गए गिरवी आभूषणों की दोबारा जांच कराई गई। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि जिन आभूषणों के आधार पर लोन स्वीकृत किए गए थे, उनमें से कई नकली थे। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू की और फरवरी 2026 में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। कैंट थाना पुलिस के मुताबिक शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा बैंक को हुए नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन प्रक्रिया में वैल्यूअर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला माना जाएगा। हालांकि मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। बैंक प्रबंधन भी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहा है। पूरे घटनाक्रम पर अब जांच एजेंसियों और बैंक अधिकारियों की नजर बनी हुई है।

टॉप-10 की रेस में शामिल होने वाले एकमात्र अंग्रेज खिलाड़ी बने हैरी केन..

नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत से पहले मैदान पर उतरने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की वित्तीय संपत्तियों का एक बड़ा खुलासा हुआ है। खेल के मैदान पर विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले ये अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैदान से बाहर आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। हाल ही में जारी की गई एक वैश्विक सूची के अनुसार, क्लब फुटबॉल, भारी-भरकम विज्ञापन अनुबंधों और दूरदर्शी निजी व्यावसायिक निवेशों के दम पर इन खेल सितारों ने अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। इस सूची के वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। रोनाल्डो की कुल अनुमानित संपत्ति अब एक अरब पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 12,773 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है। सऊदी अरब के प्रतिष्ठित क्लब अल-नस्र के साथ हुआ उनका सालाना 173 मिलियन पाउंड का करार उनकी कमाई का मुख्य जरिया है। इसके अतिरिक्त, रोनाल्डो ने खेल से इतर होटल श्रृंखला, अत्याधुनिक जिम, खुद के फैशन ब्रांड और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर अपनी वित्तीय स्थिति को बेहद मजबूत किया है। इस धनकुबेर सूची में दूसरे स्थान पर अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाने वाले कप्तान लियोनल मेसी का नाम शामिल है। मेसी की कुल अनुमानित नेटवर्थ 742 मिलियन पाउंड यानी करीब 9,476 करोड़ रुपये आंकी गई है। अमेरिकी क्लब इंटर मियामी से मिलने वाले वेतन के अलावा वैश्विक खेल ब्रांड एडिडास सहित कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ उनकी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी उनकी इस विशाल कमाई का एक बड़ा आधार है। वहीं, ब्राजील के स्टार फारवर्ड नेमार इस फेहरिस्त में 334 मिलियन पाउंड (लगभग 4,266 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से बने हुए हैं। बार्सिलोना और पीएसजी के बाद अब अल-हिलाल क्लब से मिलने वाले पैसों और दुनिया के सबसे महंगे जूता ब्रांड के साथ उनके विज्ञापन सौदे ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है। फ्रांस के युवा सनसनी किलियन एमबाप्पे इस सूची में चौथे स्थान पर काबिज हैं। स्पेनिश जाइंट रियल मैड्रिड के साथ हुए उनके नए अनुबंध और नाइकी व हबलोट जैसे लग्जरी ब्रांडों के साथ एंडोर्समेंट के चलते उनकी नेटवर्थ 186 मिलियन पाउंड (करीब 2,376 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी सूची में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र खिलाड़ी उनके कप्तान हैरी केन हैं। जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए खेलने वाले हैरी केन 110 मिलियन पाउंड (लगभग 1,405 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ पांचवें स्थान पर हैं। सूची के निचले आधे हिस्से की बात करें तो मिस्र के स्टार मोहम्मद सलाह 104 मिलियन पाउंड के साथ छठे स्थान पर हैं, जिन्हें लिवरपूल क्लब से प्रति सप्ताह करीब चार लाख पाउंड का भारी-भरकम वेतन मिलता है। उनके बाद दक्षिण कोरिया के सोन ह्युंग-मिन (74 मिलियन पाउंड) सातवें और अल्जीरिया के रियाद महरेज (63 मिलियन पाउंड) आठवें स्थान पर हैं। नॉर्वे के युवा गोल मशीन एरलिंग हालैंड और कोलंबिया के जेम्स रोड्रिगेज दोनों ही 59-59 मिलियन पाउंड (लगभग 754 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ क्रमशः नौवें और दसवें स्थान पर मौजूद हैं। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि आधुनिक युग में फुटबॉल केवल एक खेल मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा वैश्विक बिजनेस मॉडल बन चुका है।

उज्जैन के ईदगाह क्षेत्र में वाहनों पर फिर हमला, एक रात में 6 कारों समेत कई गाड़ियों के कांच फूटे

मध्यप्रदेश। उज्जैन के ईदगाह क्षेत्र में खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्थानीय रहवासियों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार देर रात अज्ञात लोगों ने क्षेत्र में खड़ी छह कारों और एक मैजिक वाहन को निशाना बनाते हुए उनके कांच फोड़ दिए। घटना के बाद इलाके में भय और नाराजगी का माहौल है। प्रभावित लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले करीब एक महीने से वाहन मालिक लगातार ऐसी वारदातों का सामना कर रहे हैं। स्थानीय रहवासी आशीष अटोदिया के अनुसार मंगलवार रात करीब 10 बजे जब वे घर से बाहर निकले और अपनी गाड़ी की स्थिति देखी, तो उसमें तोड़फोड़ पाई गई। आसपास खड़ी अन्य गाड़ियों की जांच करने पर पता चला कि कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया है। इनमें स्विफ्ट डिजायर, वैगनआर, क्विड और सोनेट जैसी कारें शामिल हैं। कुछ वाहनों के साइड ग्लास तो कुछ के पीछे के कांच तोड़े गए हैं। घटना से वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता सताने लगी है। रहवासियों के मुताबिक एक दिन पहले भी एक मैजिक वाहन पर ईंट फेंककर हमला किया गया था। क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि ईदगाह के पास लगभग 20 से 25 परिवार अपनी गाड़ियां नियमित रूप से खड़ी करते हैं। इनमें से करीब 10 से 12 वाहनों को अलग-अलग दिनों में नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इससे पहले एक ऑल्टो कार और एक मैजिक वाहन भी तोड़फोड़ की घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। पिछले दो-तीन दिनों में इस तरह की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि कुछ लोग क्षेत्र में वाहनों के खड़े होने का विरोध कर रहे हैं। रहवासियों का दावा है कि पहले भी कुछ व्यक्तियों द्वारा यहां वाहन पार्क नहीं करने की बात कही गई थी। हालांकि तोड़फोड़ की घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं और उनकी मंशा क्या है, इसका अभी तक कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी है। रहवासियों के अनुसार जिन स्थानों पर वाहन खड़े किए जाते हैं, वे कैमरों के ब्लाइंड स्पॉट में आते हैं। इसी वजह से फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां रिकॉर्ड नहीं हो पाई हैं। लोगों का मानना है कि यदि कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए या उनका एंगल बदला जाए तो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इससे पहले भी एक वाहन मालिक द्वारा पुलिस में शिकायत की गई थी, लेकिन आरोपियों तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली। अब एक साथ कई वाहनों को नुकसान पहुंचने के बाद क्षेत्र के रहवासी सामूहिक रूप से चिमनगंज मंडी थाने में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही पुलिस से क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने और दोषियों की जल्द पहचान कर कार्रवाई करने की मांग भी की जा रही है। रहवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो लोगों में असुरक्षा की भावना और बढ़ सकती है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर महाकाल दरबार में विशेष पूजन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की राष्ट्र समृद्धि की कामना

मध्यप्रदेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन के साथ देश की प्रगति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई। महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, बाल योगी उमेश नाथ, भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन किया गया। साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों के तहत 108 जाप का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य, सामाजिक समरसता और विकास की निरंतरता के लिए प्रार्थना की। भाजपा के मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया है। इस अवसर को उपलब्धियों और जनसेवा के संकल्प के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित विशेष पूजा का उद्देश्य देश के विकास और जनकल्याण के लिए प्रार्थना करना है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब कल्याण, आधारभूत संरचना के विस्तार, डिजिटल सेवाओं के विकास, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में कार्य किए गए हैं। इन्हीं उपलब्धियों के उपलक्ष्य में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महाकाल के दरबार में आकर आभार व्यक्त किया और राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की। धार्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में कार्यकर्ताओं ने भगवान महाकाल के जयकारे लगाए और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में पूरे समय श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नेताओं ने कहा कि जनता के विश्वास और सहयोग से देश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता रहा है। इसी परंपरा के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर यह धार्मिक आयोजन किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र की उन्नति, समाज के कल्याण और नागरिकों के सुख-समृद्धि की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

इंग्लैंड और वेल्स में 12 जून से सजेगा महिला टी20 विश्व कप का भव्य मंच: 12 सर्वश्रेष्ठ टीमों के बीच 24 दिनों तक मचेगा क्रिकेट का घमासान

नई दिल्ली । महिला क्रिकेट जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का बिगुल बज चुका है। आगामी 12 जून से इंग्लैंड और वेल्स की मेजबानी में क्रिकेट के इस सबसे छोटे और रोमांचक प्रारूप का महाकुंभ शुरू होने जा रहा है। इस भव्य वैश्विक प्रतियोगिता में दुनिया की 12 सर्वश्रेष्ठ टीमें प्रतिष्ठित ट्रॉफी को अपने नाम करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। कुल 24 दिनों तक चलने वाले इस व्यापक टूर्नामेंट का समापन 5 जुलाई को क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाले खिताबी मुकाबले के साथ होगा। टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार सभी 12 टीमों को दो अलग-अलग ग्रुपों में विभाजित किया गया है। ग्रुप-1 में भारतीय टीम को मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान, बांग्लादेश और पहली बार इस वैश्विक मंच पर जगह बनाने वाली नीदरलैंड की टीम के साथ रखा गया है। वहीं ग्रुप-2 में मेजबान इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, आयरलैंड और स्कॉटलैंड की टीमें शामिल हैं। टूर्नामेंट का उद्घाटन मुकाबला 12 जून को एजबेस्टन के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड और एशियाई चैंपियन श्रीलंका के बीच खेला जाएगा, जो इस टूर्नामेंट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें विशेष रूप से 14 जून की तारीख पर टिकी हुई हैं, जब एजबेस्टन के ऐतिहासिक मैदान पर भारत और पाकिस्तान की महिला टीमें आमने-सामने होंगी। दोनों देशों के बीच होने वाला यह मुकाबला हमेशा की तरह भारी दबाव, रोमांच और खेल भावना से भरपूर होने की उम्मीद है। भारतीय टीम के लिए सेमीफाइनल की राह आसान नहीं होगी, क्योंकि ग्रुप चरण में उन्हें न केवल पाकिस्तान बल्कि दक्षिण अफ्रीका और महिला क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम ऑस्ट्रेलिया की कड़ी चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। भारत अपने ग्रुप चरण के मुकाबले एजबेस्टन, हेडिंग्ले, ओल्ड ट्रैफर्ड और लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदानों पर खेलेगा। इस विश्व कप की कुछ प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो पूरे टूर्नामेंट के दौरान कुल 33 कड़े मुकाबले खेले जाएंगे। दर्शकों के रोमांच को दोगुना करने के लिए आईसीसी ने इस बार के कार्यक्रम में पांच ट्रिपल हेडर (एक दिन में तीन मैच) और पांच डबल हेडर (एक दिन में दो मैच) को शामिल किया है। नीदरलैंड की महिला टीम के लिए यह आयोजन बेहद खास है क्योंकि वह अपने इतिहास में पहली बार महिला टी20 विश्व कप की मुख्य प्रतियोगिता में भाग ले रही है। भारतीय समयानुसार ग्रुप चरण के मुकाबले दोपहर 3:00 बजे, शाम 7:00 बजे और रात 11:00 बजे से प्रसारित किए जाएंगे। ग्रुप चरण के कड़े मुकाबलों के बाद शीर्ष पर रहने वाली टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करेंगी। टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल मुकाबला 30 जून को द ओवल के मैदान पर भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे से खेला जाएगा, जबकि दूसरा सेमीफाइनल मैच इसी मैदान पर 2 जुलाई को रात 11:00 बजे आयोजित होगा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम इस बार अपनी तैयारियों को पुख्ता कर पहली बार टी20 विश्व कप के खिताब को चूमने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी बादशाहत को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी, जिससे इस बार का विश्व कप इतिहास का सबसे प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट बनने जा रहा है।

फीमेल पार्टनर से बहस के बाद कंक्रीट की सीढ़ियों पर मायूस बैठा दिखा 13 साल का गोरिल्ला

नई दिल्ली । सोशल मीडिया के इस दौर में वन्य जीवों के कई ऐसे वीडियो सामने आते हैं जो इंसानों को हैरान कर देते हैं, लेकिन जापान के एक चिड़ियाघर से सामने आया ताजा मामला बेहद अनोखा और गुदगुदाने वाला है। यहां रहने वाले 13 साल के एक नर गोरिल्ला, जिसका नाम ‘कियोमासा’ है, का एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। इस वीडियो में गोरिल्ला अपनी फीमेल पार्टनर के साथ हुए एक घरेलू विवाद के बाद जिस तरह गहरे तनाव और दार्शनिक अंदाज में बैठा नजर आ रहा है, उसने पूरी दुनिया के सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिड़ियाघर के बाड़े में कियोमासा और उसकी मादा साथी के बीच किसी बात को लेकर जोरदार बहस हो गई थी। हालांकि, चिड़ियाघर के प्रबंधकों और अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के बीच इस तरह के छोटे-मोटे मतभेद बेहद सामान्य हैं, लेकिन कियोमासा इस मामूली झगड़े को कुछ ज्यादा ही दिल पर ले बैठा। इस नोकझोंक के तुरंत बाद का जो नजारा कैमरे में कैद हुआ, उसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक को अचंभित कर दिया है, क्योंकि गोरिल्ला का यह व्यवहार हूबहू किसी परेशान इंसान जैसा था। विवाद शांत होने के बाद, कियोमासा अपनी मादा साथी से दूर पिंजरे में बनी कंक्रीट की सीढ़ियों पर जाकर बिल्कुल अकेला बैठ गया। करीब 62 सेकंड के इस वायरल क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि वह किसी गहरे सदमे या आत्मचिंतन में डूबा हुआ है। सबसे मजेदार बात यह है कि उसने किसी दार्शनिक या गंभीर संकट में फंसे इंसान की तरह अपनी ठुड्डी पर हाथ रख रखा है। वह रह-रहकर अपना सिर खुजलाता है, अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ता है और शून्य में एकटक घूरने लगता है, जैसे वह अपनी जिंदगी के किसी बहुत बड़े और जटिल फैसले के बारे में विचार कर रहा हो। कियोमासा के इस अद्भुत और इंसानी अंदाज को देखकर इंटरनेट जगत में मजेदार टिप्पणियों और मीम्स की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को विशेष रूप से शादीशुदा पुरुषों की वास्तविक पारिवारिक परिस्थितियों और उनके आपसी वैवाहिक विवादों से जोड़कर देख रहे हैं। कई यूजर्स ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह गोरिल्ला निश्चित रूप से अपने दिमाग में उस पूरी लड़ाई को दोबारा रीप्ले कर रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर उससे ऐसी क्या गलती हो गई, जिससे उसकी पार्टनर इतनी ज्यादा नाराज हो गई। कुछ लोगों ने तो कियोमासा की इस गहरी सोच को देखते हुए उसका नया नाम ‘गोरिलियो द फिलॉस्फर’ तक रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने जीव वैज्ञानिकों को भी एक बार फिर इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित किया है कि गोरिल्ला इंसानों के कितने करीब हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गोरिल्ला को इंसानों का सबसे नजदीकी रिश्तेदार माना जाता है और उनका लगभग 98 प्रतिशत डीएनए पूरी तरह से इंसानों से मेल खाता है। वे अत्यधिक संवेदनशील और सामाजिक प्राणी होते हैं, जो इंसानों की ही तरह क्रोध, ईर्ष्या, प्रेम, दुख, अवसाद और पछतावे जैसी जटिल मानसिक भावनाओं को गहराई से महसूस करने और उन्हें अपनी शारीरिक मुद्राओं के माध्यम से प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं।

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप

मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को उज्जैन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौन प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी ने नामांकन निरस्त किए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक बताया। उज्जैन के टॉवर चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस मौन प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। दोपहर एक बजे शुरू हुए कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष रवि राय, कांग्रेस नेता अजित सिंह, महिला कांग्रेस, सेवा दल, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, पार्षद और अन्य संगठनात्मक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि होती है तथा किसी भी उम्मीदवार के नामांकन से जुड़े निर्णयों में सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से न केवल पार्टी के उम्मीदवार को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया गया, बल्कि कांग्रेस के विधायकों के मतदान अधिकार भी प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि नामांकन पत्र में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत कमी थी तो उसे नियमानुसार दूर करने का अवसर दिया जा सकता था। कांग्रेस नेता अजित सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन निरस्त किए जाने के पीछे सुनियोजित प्रयास हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों ने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो पार्टी आगे भी विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से विरोध दर्ज कराएगी। राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं और नियमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है। फिलहाल उज्जैन में हुआ यह मौन प्रदर्शन कांग्रेस के उस व्यापक विरोध अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके माध्यम से पार्टी नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है।

चिड़ियों की बीट से बने 'गुआनो' फॉस्फेट ने रातों-रात चमका दी थी किस्मत: अंधाधुंध खनन और गलत वित्तीय फैसलों से तबाह हो गई पूरी अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली । वैश्विक इतिहास में किसी राष्ट्र के आर्थिक उत्थान और पतन की कई कहानियां दर्ज हैं, लेकिन प्रशांत महासागर के एक छोटे से द्वीप देश नाउरू का किस्सा दुनिया में सबसे अनोखा और अप्रत्याशित माना जाता है। दुनिया के नक्शे पर एक सूक्ष्म बिंदु के समान दिखने वाले इस देश ने किसी तेल के कुएं या सोने की खदान के दम पर नहीं, बल्कि केवल और केवल समुद्री चिड़ियों की बीट (पॉटी) के जरिए वह रूतबा हासिल किया था, जिसे देखकर दुनिया के बड़े और शक्तिशाली देश भी दंग रह गए थे। प्रशांत महासागर के माइक्रोनेशिया क्षेत्र में स्थित नाउरू दुनिया का सबसे छोटा स्वतंत्र गणराज्य है, जिसका क्षेत्रफल इतना सीमित है कि कोई भी व्यक्ति कुछ ही घंटों में पैदल चलकर इसकी सीमा नाप सकता है। इस नन्हे से द्वीप की कायापलट के पीछे एक बेहद दिलचस्प प्राकृतिक वैज्ञानिक कारण रहा है। दरअसल, इस सुदूर द्वीप पर हजारों सालों से लाखों की संख्या में प्रवासी और स्थानीय समुद्री पक्षी आते थे। इन पक्षियों की बीट सालों-साल एक के ऊपर एक जमा होती रही, जिसने कालांतर में एक बेहद सख्त और कड़क चट्टान का रूप धारण कर लिया। वैज्ञानिक भाषा में इस विशेष प्राकृतिक जमाव को ‘गुआनो’ कहा जाता है, जो उच्च गुणवत्ता वाले फास्फेट से पूरी तरह समृद्ध था। इस गुआनो फॉस्फेट में फास्फोरस की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह दुनिया का सबसे बेहतरीन और मांग में रहने वाला प्राकृतिक उर्वरक यानी खाद बन गया, जिसकी वैश्विक कृषि बाजार में भारी मांग थी। साल 1968 में जब नाउरू को औपनिवेशिक नियंत्रण से स्वतंत्रता मिली, तो इस नई सरकार ने अपने इस प्राकृतिक फॉस्फेट खनन का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। इसके बाद वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बीच नाउरू की किस्मत रातों-रात पूरी तरह बदल गई। दुनिया भर के देश अपनी खेती को बेहतर बनाने के लिए इस बेहतरीन प्राकृतिक खाद को ऊंचे दामों पर खरीदने लगे, जिससे नाउरू पर विदेशी मुद्रा की अंधाधुंध बारिश होने लगी। कुछ ही वर्षों के भीतर यह छोटा सा द्वीप प्रति व्यक्ति आय के मामले में खाड़ी के तेल उत्पादक देशों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे अमीर देश बन गया। अचानक आई इस अकूत संपत्ति ने वहां के नागरिकों की जीवनशैली को पूरी तरह से विलासिता में बदल दिया। जिस द्वीप पर कभी यातायात के सामान्य साधन भी उपलब्ध नहीं थे, वहां लगभग हर परिवार के पास कई महंगी विदेशी स्पोर्ट्स कारें आ गईं। लोग सामान्य खरीदारी करने के लिए भी सीधे निजी विमानों से विदेशों का रुख करने लगे। सरकार ने अपनी जनता के लिए पूरी तरह से टैक्स फ्री व्यवस्था लागू कर दी और शिक्षा, चिकित्सा जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ और मुफ्त कर दीं। तत्कालीन समय में पैसे की कोई कमी न होने के कारण दूरदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और अंधाधुंध खर्च का दौर शुरू हो गया। हालांकि, प्रकृति के इस अनमोल खजाने पर टिकी यह विलासिता लंबे समय तक नहीं चल सकी। धन के अत्यधिक लालच में आकर द्वीप की पूरी जमीन का बिना किसी वैज्ञानिक और भविष्य की योजना के अंधाधुंध खनन किया गया। अत्यधिक खुदाई के कारण पूरा द्वीप एक बंजर और पथरीले मरुस्थल में तब्दील हो गया, जिससे वहां की उपजाऊ मिट्टी पूरी तरह नष्ट हो गई और खेती करना असंभव हो गया। धीरे-धीरे फॉस्फेट का यह सीमित खजाना पूरी तरह समाप्त हो गया। जब मुख्य आय का स्रोत बंद हुआ, तो देश की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह गई। फॉस्फेट के दौर में सरकार द्वारा किए गए तमाम गलत अंतरराष्ट्रीय निवेश भी पूरी तरह डूब गए, जिससे देश भारी विदेशी कर्ज के जाल में फंस गया और आज अपनी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह अन्य देशों की सहायता पर निर्भर है।

सोमवती अमावस्या पर भूलकर भी न करें इन 5 विशेष वस्तुओं का दान: पुण्य की जगह लग सकता है दोष, घर में आ सकती है दरिद्रता

नई दिल्ली । सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या सोमवार के दिन पड़ने के कारण यह सोमवती अमावस्या का विशेष योग बना रही है। इस बार की सोमवती अमावस्या ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन कई बड़े और दुर्लभ ग्रहों के संयोग बन रहे हैं। जहां एक ओर सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिससे वृषभ संक्रांति का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ज्येष्ठ अधिक मास का समापन भी इसी दिन हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का एक साथ त्रिवेणी संगम हो रहा है। इस दौरान सूर्य देव की कृपा से युक्त वृद्धि योग और शाम तक रहने वाले सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग में किए गए कार्यों को अक्षय फल देने वाला माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस शुभ बेला में किए गए दान से कुंडली के विभिन्न ग्रहों की पीड़ा शांत होती है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। हालांकि, ज्योतिषियों का कहना है कि अमावस्या के दिन दान करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना अनिवार्य है, क्योंकि गलत चीजों का दान पुण्य की जगह दोष का भागी बना सकता है। शास्त्रों के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर वस्त्र दान महादान की श्रेणी में आता है, लेकिन इस दिन किसी को भी फटे, मैले या अत्यंत पुराने वस्त्र देने से बचना चाहिए। ऐसी अनुपयोगी वस्तुओं का दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होती और मानसिक तनाव बढ़ता है। इसी प्रकार, पितरों की तृप्ति के लिए अन्न दान का विशेष महत्व है, परंतु दान में दिया जाने वाला अनाज पूरी तरह साफ, शुद्ध और खाने योग्य होना चाहिए। कीड़े लगे या पूरी तरह बेकार हो चुके अनाज का दान करने से पूर्वज रुष्ट हो जाते हैं, जिससे परिवार को पितृदोष का सामना करना पड़ सकता है। इस पावन तिथि पर नमक के दान को भी पूरी तरह वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या के दिन किसी अन्य व्यक्ति को नमक का दान करने से घर की संचित लक्ष्मी चली जाती है और परिवार में दरिद्रता का वास होने लगता है। इसके साथ ही, इस दिन शनि देव से जुड़ी धातु यानी लोहे का दान भी सामान्य लोगों को नहीं करना चाहिए। लोहे के साथ-साथ इस दिन सरसों के तेल का दान करने से भी बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि सरसों के तेल का उपयोग पूजा-पाठ और दीप प्रज्वलन के लिए किया जा सकता है। अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने घरों में पड़े फटे-पुराने या टूटे हुए जूते-चप्पल अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद को दे देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवती अमावस्या जैसी पवित्र तिथि पर फटे या अनुपयोगी जूते-चप्पल दान करने से कुंडली में शनि देव का अशुभ प्रभाव तेजी से बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में बड़ी बाधाओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, इस महासंयोग पर केवल साफ, उपयोगी और सात्विक वस्तुओं का ही दान करना श्रेयस्कर रहता है।