पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम चर्चा के केंद्र में है, जो अब तक राष्ट्रीय राजनीति से दूर था, लेकिन जल्द ही संसद के उच्च सदन में पहुंच सकता है। निवाड़ी जिले के ऐतिहासिक नगर ओरछा के निवासी महेश केवट का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की राह काफी आसान हो गई है। यदि कांग्रेस को अदालत से राहत नहीं मिलती, तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, मल्लाह, माझी, भोई और रैकवार समाज के पहले राज्यसभा सांसद बनेंगे। ओरछा के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मोहल्ले में रहने वाले महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। वे वर्ष 2000 से 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने वाले महेश के परिवार का धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव है। उनके परिवार के सदस्य ओरछा के प्रसिद्ध फूलबाग स्थित लाला हरदौल बैठका की वर्षों से सेवा करते आ रहे हैं। उनके छोटे भाई आज भी नियमित रूप से यहां सेवा कार्य करते हैं। महेश स्वयं सीमेंट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। महेश केवट का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के दौरान स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए निष्कासन की कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में जब मामले की जांच हुई तो प्रदेश स्तर पर उनके निष्कासन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद भाजपा संगठन ने वर्ष 2023 में औपचारिक रूप से निष्कासन समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने महेश के राजनीतिक कद को और अधिक चर्चा में ला दिया। भाजपा संगठन में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई, जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हों लेकिन अब तक बड़े पदों पर न पहुंचे हों। इसी रणनीति के तहत सामाजिक रूप से प्रभावशाली लेकिन राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले केवट और निषाद समाज पर फोकस किया गया। महेश केवट को पहले मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया और अब उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट का चयन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रणनीति नहीं है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां निषाद, केवट और मल्लाह समाज की बड़ी राजनीतिक भूमिका है। ओरछा की भौगोलिक स्थिति झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण महेश केवट भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी प्रचारक साबित हो सकते हैं। मध्य प्रदेश में भी ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर केवट, मल्लाह, कहार, धीमर और निषाद समाज का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा का यह दांव आगामी चुनावों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक छोटे नगर के जनप्रतिनिधि से लेकर राज्यसभा सांसद बनने की दहलीज तक पहुंचे महेश केवट की कहानी अब प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व के उभार का बड़ा उदाहरण बनती नजर आ रही है।
राज्यसभा चुनाव पर सियासी संग्राम तेज: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग के दरवाजे

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार करार दिया है। इस फैसले के विरोध में पार्टी ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक व्यापक आंदोलन शुरू कर दिया है और अब मामला सीधे चुनाव आयोग के समक्ष पहुंच गया हैबुधवार को भोपाल में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास शुरू किया। वहीं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गणवेश टांगकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यालय का मुख्य गेट बंद रखा गया था, जिसके बाद कार्यकर्ता विरोध दर्ज कर लौट गए। इधर दिल्ली में कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नामांकन निरस्त करने का निर्णय न केवल पक्षपातपूर्ण है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। दरअसल, भाजपा ने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाई है। इसी आधार पर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। चुनाव अधिकारियों ने आपत्ति को उचित मानते हुए नामांकन रद्द कर दिया। कांग्रेस का तर्क है कि यह मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है और इसका चुनावी हलफनामे में उल्लेख अनिवार्य नहीं था। तेलंगाना से कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित मामले में नोटिस मिलने पर मीनाक्षी नटराजन पहले ही जवाब दे चुकी थीं। उन्होंने दलील दी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत निजी शिकायतों का जवाब देना नागरिक का अधिकार है और ऐसी शिकायतों को आपराधिक मामला मानकर चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करना आवश्यक नहीं है। रेड्डी ने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम से यह आशंका पैदा होती है कि चुनाव आयोग किसी प्रकार के दबाव में काम कर रहा है। राज्यसभा चुनाव के इस विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस जहां इसे “लोकतंत्र की हत्या” और “सीट चोरी” बता रही है, वहीं भाजपा चुनाव आयोग के फैसले को नियमों के अनुरूप बता रही है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और कांग्रेस की शिकायत पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं, जो राज्यसभा चुनाव की दिशा और राजनीतिक माहौल दोनों को प्रभावित कर सकता है।
मोदी सरकार के 12 साल….. विकास और जन कल्याण को रहे समर्पित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि उनकी सरकार (Government) के पिछले 12 वर्ष विश्वास, विकास और जन कल्याण को समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद और सबसे पहले राष्ट्र भावना से प्रेरित होकर युवाओं, महिलाओं और किसान भाई-बहनों को सशक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। पीएम मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘अथक प्रयासों के फलस्वरूप ही आज देश ने बुनियादी ढांचे से लेकर डिजिटल क्रांति तक विश्व स्तर पर एक नई पहचान हासिल की है।’ उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार सेवा, सुशासन और समृद्धि के इस पथ पर निरंतर अग्रसर रहेगी। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारी सरकार के बीते 12 वर्ष विश्वास, विकास और जन कल्याण को समर्पित रहे हैं। देश के140 करोड़ लोगों के आशीर्वाद और राष्ट्र प्रथम की भावना से हमने युवाओं, महिलाओं और अपने किसान भाई-बहनों को सशक्त बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। यह हमारे अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिजिटल क्रांति तक आज देश को दुनिया भर में एक नई पहचान मिली है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए हम सेवा, सुशासन और समृद्धि के इसी पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।’ मोदी सरकार का 12 वर्ष का कार्यकाल पूराकेंद्र में मोदी सरकार का 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। पीएम मोदी की ओर से निम्नलिखित कार्यों का जिक्र किया गया… गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएंप्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 81 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं और देशभर में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। महिला सशक्तिकरणप्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। महिलाओं के नाम पर 32 करोड़ से अधिक जन धन बैंक खाते खोले गए हैं। सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि लखपति दीदी कार्यक्रम के तहत 3 करोड़ महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे अधिक हो चुकी है। साथ ही 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं 91 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बुनियादी ढांचे का विकासप्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल में शुरू और पूर्ण किए गए प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख किया। इनमें अटल सेतु, सुदर्शन सेतु, चिनाब रेल पुल, बोगीबील पुल और पंबन सी ब्रिज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत का मेट्रो रेल नेटवर्क अब 26 शहरों में फैलकर 1,100 किलोमीटर से अधिक लंबा हो चुका है। वहीं देश में 164 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा हवाई अड्डों की संख्या भी 74 से बढ़कर 164 हो गई है। युवाओं पर विशेष ध्यानप्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 2 करोड़ लोगों को कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) प्रदान किया गया है। उन्होंने मुद्रा योजना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। साथ ही भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है और अब देश में 2.2 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप मौजूद हैं। छात्रों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारप्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 60 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि अब 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में संचालित 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को आवश्यक दवाएं बाजार मूल्य की तुलना में 90 प्रतिशत तक की छूट पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य खर्च में काफी कमी आई है। राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षाराष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद (लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म) के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई का भी जिक्र किया और कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए अभियान को और मजबूत किया गया है। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक दौर के प्रतीकों को हटाने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत से प्रेरित नए नौसैनिक ध्वज (नेवल एनसाइन) को अपनाया गया है, जो भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि मोदी सरकार के आने से पहले सरकार में बैठे लोगों के लिए सत्ता का उद्देश्य अपनी सत्ता बरकार रखना मात्र बन गया था, मोदी ने राष्ट्र प्रथम की सोच पैदा की और पूरे देश को उससे जोड़ा। उन्होंने कहा कि दुनिया में अमेरिका, चीन और किसी भी विकसित हुए देश को देखें तो वहां के लोगों ने -एक सपना लेकर तरक्की की। मोदी के नेतृत्व में भारत सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूल मंत्र के साथ 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के सपने के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ की आबादी, और पूरे संगठन को इस सपने के साथ जोड़ा है। विकसित भारत आज सामूहिक संकल्प बन चुका है। सरकार इसी संकल्प के साथ चल रही है।
MP में CM मोहन यादव का बड़ा फैसला….शासकीय नौकरी में दो बच्चों की अधिकतम सीमा समाप्त

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) और इसके लिए आवेदन करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब उन्हें 2 बच्चों वाले नियम का पालन नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को ना सिर्फ नए प्रस्ताव को वापस लेने का आदेश दिया, बल्कि पुराने नियमों को भी खत्म करने को कहा है। यादव ने प्रस्तावित सिविल सर्विसेज रूल्स के मसौदे से उस नियम को हटाने का आदेश दिया, जिसके तहत सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम दो बच्चों की सीमा निर्धारित करने की बात कही गई थी। मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहामध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है। नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शनदरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है।
MP: नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- फर्जी बात पेश की

भोपाल। मंगलवार को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से कांग्रेस (Congress) की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Rajya Sabha candidate Meenakshi Natarajan) का नामांकन रद्द कर दिया गया. चुनाव अधिकारियों ने पाया कि उनके नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए हलफनामे में एक मामले से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर छिपाई गई थी। यह घटनाक्रम तब हुआ, जब बीजेपी नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए नटराजन की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की. बीजेपी का आरोप था कि लीडर नेता ने तेलंगाना में चल रहे एक अदालती मामले की जानकारी अपने चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी, यह एक जरूरी दस्तावेज है, जिसे उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय जमा करना होता है। पार्टी ने तर्क दिया कि जानकारी न देना ज़रूरी जानकारी छिपाने के बराबर है और इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन रद्द होने के बाद बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस का पूरा विधायक दल एकजुट है और सभी विधायक लगातार पार्टी बैठकों में शामिल हो रहे हैं, तब उसे समझ आ गया कि खरीद-फरोख्त की राजनीति सफल नहीं होगी. उनके मुताबिक, बीजेपी ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर पहले ही यह दिखा दिया था कि उसकी राजनीतिक शुचिता किस स्तर पर पहुंच चुकी है. जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायकों में कोई टूट नहीं है, तब इस स्थिति से निपटने के लिए एक ‘फर्जी बात’ पेश कर दी। मीनाक्षी ने कहा कि जिस मामले को आधार बनाकर उनका नामांकन रद्द किया गया, वह केवल एक कानूनी नोटिस था. उस पर न तो किसी अदालत ने संज्ञान लिया था और न ही कोई मामला दर्ज हुआ था. उन्होंने कहा कि वह मामला प्री-कॉग्निसेंस स्टेज पर था, इसलिए उसे चुनावी हलफनामे में दर्ज करने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई कानूनी मामला ही अस्तित्व में नहीं है, तब जानकारी छिपाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है. उनके मुताबिक, अगर किसी मामले में अदालत संज्ञान ले चुकी होती या उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके होते और वह उसे छिपातीं, तब यह आरोप उचित माना जा सकता था। कांग्रेस लीडर ने यह भी आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर के आखिरी आदेश में उनकी तरफ से रखे गए कानूनी तर्कों का कोई उल्लेख नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि इससे साफ हो जाता है कि यह फैसला किस राजनीतिक दबाव और मंशा से प्रेरित था. मीनाक्षी नटराजन ने कहा, “यह ऐसी कानूनी लड़ाई नहीं है, जिसे हम अदालत में हार गए हों, बल्कि यह वह लड़ाई है जिसे हमने राजनीतिक इच्छाशक्ति के सामने गंवाया है। उन्होंने आगे कहा कि यह लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है, जो पहले वोट चोरी से शुरू हुई और अब सीट चोरी तक पहुंच गई है. चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष संवैधानिक संस्था की तरह नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के एक फ्रंटल संगठन की तरह काम कर रहा है. उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
50 कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में EU…. युद्ध में रूस की आर्थिक मदद का आरोप

ब्रूसेल्स। यूरोपीय यूनियन (European Union- EU) ने यूक्रेन (Ukraine) पर हमले को लेकर रूस (Russia) के खिलाफ अपने प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत यूरोपीय संघ ने रूस की ‘वॉर इकोनॉमी’ को कमजोर करने के लिए अपना 21वां प्रतिबंध पैकेज प्रस्तावित किया है। इस नए पैकेज की जद में भारत (India) स्थित कुछ कंपनियां भी आ सकती हैं। रूसी अर्थव्यवस्था की कथित तौर पर मदद करने के आरोप में यूरोपीय यूनियन करीब 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल यानी निर्यात प्रतिबंध लगाने जा रहा है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास (Vice President Kaja Kalas) ने इन नए प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए कहा कि ब्रुसेल्स पिछले दो सालों में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस कदम का मुख्य मकसद रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ढहाना है। बता दें कि काजा कलास हाल ही में पाकिस्तान का दौरा कर यूरोप लौटी हैं। किन देशों की कंपनियों पर लटकी तलवार?नए प्रतिबंध पैकेज का मुख्य फोकस रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को सीमित करना और युद्ध के लिए हो रही उसकी फाइनेंसिंग को रोकना है। एक्सपोर्ट प्रतिबंधों वाली 50 कंपनियों की सूची में भारत के अलावा चीन, तुर्किये, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा ड्रोन निर्माण से जुड़ी 30 से ज्यादा नई संस्थाओं/कंपनियों को भी इस सूची में जोड़ा गया है। बैंकों और क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा ऐक्शननए प्रस्तावों में उन देशों के बैंकों, हथियार बनाने वाली कंपनियों, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है, जिन पर रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। करीब 90 बैंकों की संपत्ति फ्रीज की जा सकती है। इसके अलावा रूस और अन्य जगहों के 30 से अधिक बैंकों के ट्रांजैक्शन पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किए जाएंगे। इस पैकेज के तहत 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के लेनदेन पर भी बैन लगाने की तैयारी है। रूस की कमाई और ट्रांसपोर्ट को भी टारगेट किया गयारूस को आर्थिक मोर्चे पर घेरने के लिए यूरोपीय संघ ने उसके एनर्जी रेवेन्यू (ऊर्जा राजस्व) पर भी चोट की है। तेल (Oil) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से जुड़ी गतिविधियों पर पहले से ज्यादा सख्त पाबंदियां लगाई जाएंगी। रूस के ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े 30 अतिरिक्त जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही 2 रूसी बंदरगाहों और 4 हवाई अड्डों पर भी ट्रांजैक्शन बैन का प्रस्ताव है। यूरोपीय आयोग की ओर से पेश किए गए इस 21वें प्रतिबंध पैकेज को अभी लागू नहीं किया गया है। इन सभी प्रस्तावों पर कोई भी अंतिम फैसला या मंजूरी देने से पहले इन्हें यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों के सामने विचार-विमर्श के लिए रखा जाएगा। पाकिस्तान का दौरा कर लौटीं काजा कलासयूरोपीय संघ (EU) की शीर्ष कूटनीतिज्ञ काजा कलास अपनी हालिया पाकिस्तान यात्रा पूरी कर वापस यूरोप लौट आई हैं। उनकी इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा के दौरान यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार (विशेषकर GSP+ व्यापार दर्जे), मानवाधिकारों की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूरोप, दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता- विशेष रूप से अफगानिस्तान के हालात और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों को लेकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के लिए भी यूरोपीय संघ एक प्रमुख निर्यात बाजार है, ऐसे में कलास की यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संवाद को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। भारत-ईयू का ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंटबता दें कि भारत की कंपनियों पर यह ऐक्शन ऐसे समय में लेने की तैयारी है जब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच जनवरी 2026 में हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है, जिसे यूरोपीय आयोग द्वारा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का नाम दिया गया है। इस समझौते के तहत भारत से कपड़ा, समुद्री उत्पाद, फार्मा और ज्वेलरी जैसे 90% से अधिक उत्पादों को यूरोपीय बाजार में टैक्स-फ्री (जीरो-ड्यूटी) एंट्री मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर भी टैरिफ 110% से घटाकर मात्र 10% (एक तय कोटे के तहत) कर दिया गया है। इसके साथ ही, एक बड़ा ताजा अपडेट यह भी है कि ईयू ने अपने नए और सख्त क्वालिटी नियमों के बावजूद सितंबर 2026 के बाद भी भारत से मछली (एक्वाकल्चर), अंडे और शहद के आयात को जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस हालिया फैसले से भारत के करीब 1.59 अरब डॉलर के समुद्री निर्यात सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। बदलती वैश्विक सियासत और अमेरिका-चीन पर सप्लाई चैन की निर्भरता कम करने के लिहाज से यह ऐतिहासिक डील भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है।
नितिन नवीन की नई टीम का काउंटडाउन शुरू…. जल्द बदलेगा BJP का संगठनात्मक ढांचा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) (Bharatiya Janata Party – BJP) के संगठनात्मक ढांचे में जल्द ही बड़ा फेरबदल (Organizational Structure Major Change) देखने को मिल सकता है। पार्टी के शीर्ष निकाय यानी संसदीय बोर्ड सहित कई अहम संगठनात्मक टीमों में बदलाव की पूरी तैयारी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 15 जून के बाद नए पदाधिकारियों की टीम की घोषणा की जा सकती है। पार्टी की यह परंपरा रही है कि नए अध्यक्ष के चुने जाने के बाद संगठन में बदलाव किए जाते हैं। इसी कड़ी में, जनवरी में नितिन नवीन (Nitin Navin) के बीजेपी अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। बुधवार को एनडीए (NDA) की होने वाली एक बड़ी बैठक के बीच पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि लगभग एक हफ्ते के भीतर नए पदाधिकारियों के नामों का ऐलान कर दिया जाएगा। युवा और अनुभव का दिखेगा संगम, इन वर्गों पर होगा फोकस45 वर्षीय नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान संगठन को अधिक युवा और सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाला बनाने पर जोर दे रहा है। माना जा रहा है कि पदाधिकारियों की नई टीम में ‘युवा और अनुभव’ का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। आगामी राजनीतिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए इस नई टीम में ओबीसी (OBC) और दलितों जैसे प्रमुख वर्गों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है। राज्यों का दौरा कर फीडबैक ले रहे अध्यक्षपार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन इन दिनों लगातार कई राज्यों का सघन दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे राज्य की पार्टी इकाइयों से जमीनी फीडबैक जुटाने के साथ-साथ अपनी प्राथमिकताएं भी तय कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके इन दौरों से मिलने वाला फीडबैक संगठन में होने वाले समग्र बदलावों के लिए बीजेपी आलाकमान के फैसलों में अहम भूमिका निभाएगा। मोदी कैबिनेट में भी फेरबदल की सुगबुगाहटपार्टी संगठन में होने वाले इन बदलावों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में भी फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। गौरतलब है कि पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे करने जा रहे हैं, जिसे देखते हुए कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार और संगठन में बदलाव की इन सुगबुगाहटों को हाल के कुछ फैसलों से भी बल मिला है। दो केंद्रीय मंत्रियों- पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पार्टी की राज्य इकाइयों का प्रमुख बनाकर भेजा गया है। वहीं, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किया है। इन हालिया घटनाक्रमों के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार और संगठन, दोनों स्तरों पर बड़ी तब्दीलियां देखने को मिल सकती हैं। कई चौंकाने वाले नामों को मिल सकती है जगहभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई कोर टीम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कैबिनेट विस्तार में कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं। 15 जून को ‘अधिकमास’ (मलमास) खत्म होने के बाद जून के अंत तक नए पदाधिकारियों की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है। भाजपा आलाकमान की रणनीति में दक्षिण भारत में पार्टी की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 46 वर्षीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को उपाध्यक्ष और युवा चेहरों को अन्य पदों पर जगह मिल सकती है। रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का क्या होगा?केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राजस्थान से दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह के करीबी बिट्टू को पंजाब चुनाव के मद्देनजर वहां कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी या चुनाव अभियान का अहम जिम्मा सौंपा जा सकता है। वहीं केरल से आने वाले मंत्री जॉर्ज कुरियन का भी राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है और उन्हें भी दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया है। चर्चा है कि उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता है। मोदी कैबिनेट में किन्हें मिल सकती है जगह?चूंकि पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को राज्यों के संगठन में भेज दिया गया है, इसलिए मोदी कैबिनेट में पहले से ही जगह खाली हो रही है। 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद कैबिनेट में एक बड़े फेरबदल (करीब 12 मंत्रियों के विभाग या पद में बदलाव) की सुगबुगाहट है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को पार्टी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। इस कदम से मजबूत कयास लगाए जा रहे हैं कि चुघ को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री पद से नवाजा जा सकता है। राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को भी राज्यसभा भेजा जा रहा है। संसद में उनका यह डेब्यू उन्हें केंद्र की राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी दिला सकता है। एनडीए के सहयोगी दलों जैसे जेडीयू (JDU), टीडीपी (TDP), एनसीपी (NCP) और आरएलएम (RLM) के नेताओं को इस कैबिनेट विस्तार में तवज्जो मिलने की उम्मीद है। जेडीयू और टीडीपी के खाते में कुछ ‘राज्यमंत्री’ पद जा सकते हैं। पंजाब से आप (AAP) के बागी सांसद: चर्चा यह भी है कि आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पंजाब के एक राज्यसभा सांसद को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठ रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि उनके विभाग में भी बदलाव किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा (यूपी से कुर्मी नेता) का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है, लेकिन 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें दोबारा टिकट मिलने और कैबिनेट में बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है।
ताश के पत्तों की तरह ढह रहा विपक्ष का किला… राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब BJP

नई दिल्ली। दो साल पहले हुए लोकसभा चुनावों (Lok Sabha elections) में भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को कड़ी टक्कर देने वाला विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। आंतरिक कलह, हालिया चुनावी हार और घटक दलों के पाला बदलने के कारण लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 के नीचे गिरने की कगार पर पहुंच गया है। विपक्ष के रणनीतिकारों को डर है कि इस बिखराव के बाद संसद के भीतर सरकार के विधायी और राजनीतिक एजेंडे को चुनौती देने की विपक्ष की बची-कुची क्षमता भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। संसद के भीतर इंडिया गठबंधन (India Alliance) का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। 22 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने हाल ही में इंडिया का साथ छोड़ दिया। इससे इंडिया गठबंधन की लोकसभा में ताकत 2024 के 234 से घटकर पहले ही 209 पर आ चुकी है। अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई के बागी होने की खबरों ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। अगर ऐसा होता है तो विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे चला जाएगा। भाजपा की नजर पूर्ण बहुमत परविपक्ष के इस पतन से उत्साहित होकर भाजपा लोकसभा में अपने दम पर साधारण बहुमत 272 का आंकड़ा पार करने की रणनीति बना रही है। फिलहाल भाजपा के यहां 240 सांसद हैं। अगर टीएमसी के सांसदों का विलय हो जाता है तो भाजपा का यह आंकड़ा बहुमत के काफी करीब पहुंच जाएगा। वहीं, संकट सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के बीच विभाजन की पूरी संभावना है। हाल ही में आम आदमी पार्टी में भी यह देखा गया। इन बदलते समीकरणों के कारण राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच रहा है। इंडिया गठबंधन के कुछ पदाधिकारियों को डर है कि इस मजबूती से उत्साहित होकर सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) विपक्ष के अन्य कमजोर या असंतुष्ट धड़ों को भी अपने पाले में लाने के लिए प्रेरित हो सकता है। महिला आरक्षण और परिसीमन बिल की वापसी तयदोनों सदनों में सरकार का विधायी रास्ता पूरी तरह साफ होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कई महत्वाकांक्षी और लंबित विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह केवल समय की बात है कि सरकार महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को दोबारा संसद में पेश कर पास करा लेगी, जिन्हें पिछले सत्र में इंडिया गठबंधन ने एकजुट होकर रोक दिया था। हार का सिंड्रोम और कांग्रेस पर आरोपसोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में जमकर आरोप-प्रत्यारोप और घोर निराशा का माहौल देखा गया। विपक्षी नेताओं का यह गुस्सा और हताशा लगातार मिली चुनावी शिकस्त का नतीजा है। 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्ष को हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस राजनीतिक कुप्रबंधन के चलते क्षेत्रीय दलों खासकर TMC, RJD, DMK, शिवसेना-UBT, एनसीपी-शरदचंद्र पवार, आप और लेफ्ट का कांग्रेस के नेतृत्व की क्षमता पर से भरोसा उठ गया है। अब सिर्फ 6 राज्यों में बची INDIA की सत्तालगातार मिली हार के बाद अब ‘इंडिया’ गठबंधन का शासन देश के गिने-चुने राज्यों में ही सिमट कर रह गया है। उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष की सरकार है। वहीं, दक्षिण भारत में कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में कांग्रेस सत्ता में है।
दिल्ली में धरना…. कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द को बताया सीट चोरी.. EC से भिड़ गए रमेश

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में होने वाले राज्य सभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन खारिज कर दिया गया है। उन पर आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने के आरोप हैं। इस घटना से नाराज कांग्रेस नेताओं ने जहां इसे सीट चोरी बताया है, वहीं इसकी शिकायत करने सीधे चुनाव आयोग के दफ्तर जा पहुंचे। मामले में शिकायत दर्ज करवाने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंगलवार (9 जून) की शाम नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचे तो उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इस दौरान कांग्रेस महासिव जयराम रमेश को आयोग के सुरक्षा अधिकारियों से भिड़ते हुए देखा गया। रमेश ने धौंस दिखाते हुए सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि कहानी मत बनाओ, 35 साल से सांसद हूं। अंदर आयोग के वेटिंग रूम में जाने दो, जब इसके बाद भी उन्हें इजाजत नहीं मिली तो कांग्रेस नेता मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। जयराम रमेश के साथ कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सचिन पायलट तथा कुछ अन्य नेता मंगलवार देर शाम आयोग के मुख्यालय पहुंचे थे। कांग्रेस का आरोप है कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज कर दिया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। वेणुगोपाल ने संवाददाताओं ने कहा कि जब तक कांग्रेस नेताओं को आयोग के भीतर जाने की इजाजत नहीं मिलती, तब तक धरना जारी रहेगा। हालांकि, कुछ देर बाद आयोग की ओर से पार्टी के दो नेताओं को ज्ञापन सौंपने की अनुमति मिली और फिर वेणुगोपाल एवं बघेल ने अंदर जाकर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद घरना खत्म कर दिया गया। इंसाफ दीजिए, नहीं तो जाएंगे कोर्टवेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ”शाम 7.25 बजे हमने निर्वाचन आयोग को शिकायत दर्ज कराने के मकसद से मुलाकात के वक्त के लिए पत्र दिया। अब निर्वाचन आयोग के अंदर हमें जाने नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने सवाल किया, ”इस देश में क्या हो रहा है? क्या यह ‘बनाना रिपब्लिक’ है?” वेणुगोपाल का कहना था, ”हमें इंसाफ चाहिए, (हम) कानूनी कदम उठाएंगे, हम अदालत भी जाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि बिना किसी कारण के नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआवहीं सचिन पायलट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ न तो कोई मामला दर्ज है, न आरोप-पत्र दाखिल हुआ है और न ही किसी मामले में सजा हुई है, इसके बावजूद एक नोटिस मिलने का हवाला देकर नामांकन खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई षड्यंत्र है और इसपर निर्वाचन आयोग को ध्यान देना चाहिए। पायलट का कहना था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि एक राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन बिना किसी कारण के खारिज कर दिया गया हो। नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा की साजिशइससे पहले, वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है। उनके नामांकन में किसी भी त्रुटि या कोई जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण है और कांग्रेस से एक सीट छीनने का यह हताशापूर्ण प्रयास है।” उनका कहना था, ”जब उन्हें (भाजपा को) एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका (मीनाक्षी नटराजन का) नामांकन खारिज करवा दिया।” वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह संविधान और लोकतंत्र के प्रति भाजपा की खोखली प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वह हर कदम पर किसी न किसी तरह “वोट चोरी” पर आमादा है। कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ कानूनी तथा सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।”
आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प है FD…. जानें कहां मिलेगा अच्छा रिटर्न?

नई दिल्ली। अगर आप अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए अच्छा रिटर्न (Good Return) कमाना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit- FD) आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों (Most Reliable Investment Options) में से एक माना जाता है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD एक ऐसा निवेश है, जहां जोखिम कम होता है और तय ब्याज के साथ नियमित आय की सुविधा मिलती है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। इसके बावजूद देश के बड़े बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक FD ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं। SBI बैंक की FD ब्याज दरदेश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बात करें तो यह सामान्य ग्राहकों को 3.05% से 6.45% तक और वरिष्ठ नागरिकों को 3.55% से 6.90% तक ब्याज दे रहा है। SBI की लोकप्रिय अमृत वृष्टि योजना भी निवेशकों के बीच काफी पसंद की जा रही है। HDFC बैंक की FD ब्याज दरनिजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंकों में शामिल HDFC Bank अपने ग्राहकों को 2.75% से 6.50% तक और वरिष्ठ नागरिकों को 3.25% से 7% तक ब्याज दे रहा है। बैंक की सबसे ज्यादा ब्याज दर 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम अवधि वाली FD पर मिल रही है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है। वहीं ICICI Bank वरिष्ठ नागरिकों को सबसे आकर्षक दरों में से एक ऑफर कर रहा है। बैंक सामान्य ग्राहकों को 2.75% से 6.50% और वरिष्ठ नागरिकों को 3.25% से 7.10% तक ब्याज दे रहा है। 3 साल 1 दिन से 5 साल की अवधि वाली FD पर यह सबसे ज्यादा रिटर्न दे रहा है। PNB बैंक की FD ब्याज दरअगर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की बात करें तो बैंक सामान्य ग्राहकों को 3% से 6.60% और वरिष्ठ नागरिकों को 3.50% से 7.10% तक ब्याज दे रहा है। खास बात यह है कि PNB की 444 दिनों की FD स्कीम पर सबसे ज्यादा ब्याज मिल रहा है, जो निवेशकों को आकर्षित कर रही है। BoB बैंक की FD ब्याज दरसरकारी क्षेत्र के एक और बड़े बैंक Bank of Baroda भी ग्राहकों को बेहतर रिटर्न दे रहा है। बैंक सामान्य ग्राहकों को 3.50% से 6.45% और वरिष्ठ नागरिकों को 4% से 6.95% तक ब्याज ऑफर कर रहा है। यहां भी 444 दिनों की FD पर सबसे अधिक ब्याज दर उपलब्ध है। एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा समय में ब्याज दरें आकर्षक स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए जिन निवेशकों को शेयर बाजार की अस्थिरता से बचते हुए सुरक्षित निवेश करना है, उनके लिए FD एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हालांकि, निवेश से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और अवधि की तुलना जरूर कर लेनी चाहिए, ताकि अधिकतम रिटर्न प्राप्त किया जा सके। SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) जैसी बड़ी बैंकें इस समय FD पर 7% से अधिक तक ब्याज दे रही हैं। ऐसे में यह समय FD निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।