MP: नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- फर्जी बात पेश की

भोपाल। मंगलवार को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से कांग्रेस (Congress) की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Rajya Sabha candidate Meenakshi Natarajan) का नामांकन रद्द कर दिया गया. चुनाव अधिकारियों ने पाया कि उनके नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए हलफनामे में एक मामले से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर छिपाई गई थी। यह घटनाक्रम तब हुआ, जब बीजेपी नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए नटराजन की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की. बीजेपी का आरोप था कि लीडर नेता ने तेलंगाना में चल रहे एक अदालती मामले की जानकारी अपने चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी, यह एक जरूरी दस्तावेज है, जिसे उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय जमा करना होता है। पार्टी ने तर्क दिया कि जानकारी न देना ज़रूरी जानकारी छिपाने के बराबर है और इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन रद्द होने के बाद बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस का पूरा विधायक दल एकजुट है और सभी विधायक लगातार पार्टी बैठकों में शामिल हो रहे हैं, तब उसे समझ आ गया कि खरीद-फरोख्त की राजनीति सफल नहीं होगी. उनके मुताबिक, बीजेपी ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर पहले ही यह दिखा दिया था कि उसकी राजनीतिक शुचिता किस स्तर पर पहुंच चुकी है. जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायकों में कोई टूट नहीं है, तब इस स्थिति से निपटने के लिए एक ‘फर्जी बात’ पेश कर दी। मीनाक्षी ने कहा कि जिस मामले को आधार बनाकर उनका नामांकन रद्द किया गया, वह केवल एक कानूनी नोटिस था. उस पर न तो किसी अदालत ने संज्ञान लिया था और न ही कोई मामला दर्ज हुआ था. उन्होंने कहा कि वह मामला प्री-कॉग्निसेंस स्टेज पर था, इसलिए उसे चुनावी हलफनामे में दर्ज करने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई कानूनी मामला ही अस्तित्व में नहीं है, तब जानकारी छिपाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है. उनके मुताबिक, अगर किसी मामले में अदालत संज्ञान ले चुकी होती या उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके होते और वह उसे छिपातीं, तब यह आरोप उचित माना जा सकता था। कांग्रेस लीडर ने यह भी आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर के आखिरी आदेश में उनकी तरफ से रखे गए कानूनी तर्कों का कोई उल्लेख नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि इससे साफ हो जाता है कि यह फैसला किस राजनीतिक दबाव और मंशा से प्रेरित था. मीनाक्षी नटराजन ने कहा, “यह ऐसी कानूनी लड़ाई नहीं है, जिसे हम अदालत में हार गए हों, बल्कि यह वह लड़ाई है जिसे हमने राजनीतिक इच्छाशक्ति के सामने गंवाया है। उन्होंने आगे कहा कि यह लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है, जो पहले वोट चोरी से शुरू हुई और अब सीट चोरी तक पहुंच गई है. चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष संवैधानिक संस्था की तरह नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के एक फ्रंटल संगठन की तरह काम कर रहा है. उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
50 कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में EU…. युद्ध में रूस की आर्थिक मदद का आरोप

ब्रूसेल्स। यूरोपीय यूनियन (European Union- EU) ने यूक्रेन (Ukraine) पर हमले को लेकर रूस (Russia) के खिलाफ अपने प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत यूरोपीय संघ ने रूस की ‘वॉर इकोनॉमी’ को कमजोर करने के लिए अपना 21वां प्रतिबंध पैकेज प्रस्तावित किया है। इस नए पैकेज की जद में भारत (India) स्थित कुछ कंपनियां भी आ सकती हैं। रूसी अर्थव्यवस्था की कथित तौर पर मदद करने के आरोप में यूरोपीय यूनियन करीब 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल यानी निर्यात प्रतिबंध लगाने जा रहा है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास (Vice President Kaja Kalas) ने इन नए प्रतिबंधों का ऐलान करते हुए कहा कि ब्रुसेल्स पिछले दो सालों में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस कदम का मुख्य मकसद रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ढहाना है। बता दें कि काजा कलास हाल ही में पाकिस्तान का दौरा कर यूरोप लौटी हैं। किन देशों की कंपनियों पर लटकी तलवार?नए प्रतिबंध पैकेज का मुख्य फोकस रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को सीमित करना और युद्ध के लिए हो रही उसकी फाइनेंसिंग को रोकना है। एक्सपोर्ट प्रतिबंधों वाली 50 कंपनियों की सूची में भारत के अलावा चीन, तुर्किये, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा ड्रोन निर्माण से जुड़ी 30 से ज्यादा नई संस्थाओं/कंपनियों को भी इस सूची में जोड़ा गया है। बैंकों और क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा ऐक्शननए प्रस्तावों में उन देशों के बैंकों, हथियार बनाने वाली कंपनियों, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है, जिन पर रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। करीब 90 बैंकों की संपत्ति फ्रीज की जा सकती है। इसके अलावा रूस और अन्य जगहों के 30 से अधिक बैंकों के ट्रांजैक्शन पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किए जाएंगे। इस पैकेज के तहत 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के लेनदेन पर भी बैन लगाने की तैयारी है। रूस की कमाई और ट्रांसपोर्ट को भी टारगेट किया गयारूस को आर्थिक मोर्चे पर घेरने के लिए यूरोपीय संघ ने उसके एनर्जी रेवेन्यू (ऊर्जा राजस्व) पर भी चोट की है। तेल (Oil) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से जुड़ी गतिविधियों पर पहले से ज्यादा सख्त पाबंदियां लगाई जाएंगी। रूस के ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े 30 अतिरिक्त जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही 2 रूसी बंदरगाहों और 4 हवाई अड्डों पर भी ट्रांजैक्शन बैन का प्रस्ताव है। यूरोपीय आयोग की ओर से पेश किए गए इस 21वें प्रतिबंध पैकेज को अभी लागू नहीं किया गया है। इन सभी प्रस्तावों पर कोई भी अंतिम फैसला या मंजूरी देने से पहले इन्हें यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों के सामने विचार-विमर्श के लिए रखा जाएगा। पाकिस्तान का दौरा कर लौटीं काजा कलासयूरोपीय संघ (EU) की शीर्ष कूटनीतिज्ञ काजा कलास अपनी हालिया पाकिस्तान यात्रा पूरी कर वापस यूरोप लौट आई हैं। उनकी इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा के दौरान यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार (विशेषकर GSP+ व्यापार दर्जे), मानवाधिकारों की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूरोप, दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता- विशेष रूप से अफगानिस्तान के हालात और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों को लेकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के लिए भी यूरोपीय संघ एक प्रमुख निर्यात बाजार है, ऐसे में कलास की यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संवाद को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। भारत-ईयू का ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंटबता दें कि भारत की कंपनियों पर यह ऐक्शन ऐसे समय में लेने की तैयारी है जब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच जनवरी 2026 में हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है, जिसे यूरोपीय आयोग द्वारा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का नाम दिया गया है। इस समझौते के तहत भारत से कपड़ा, समुद्री उत्पाद, फार्मा और ज्वेलरी जैसे 90% से अधिक उत्पादों को यूरोपीय बाजार में टैक्स-फ्री (जीरो-ड्यूटी) एंट्री मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर भी टैरिफ 110% से घटाकर मात्र 10% (एक तय कोटे के तहत) कर दिया गया है। इसके साथ ही, एक बड़ा ताजा अपडेट यह भी है कि ईयू ने अपने नए और सख्त क्वालिटी नियमों के बावजूद सितंबर 2026 के बाद भी भारत से मछली (एक्वाकल्चर), अंडे और शहद के आयात को जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस हालिया फैसले से भारत के करीब 1.59 अरब डॉलर के समुद्री निर्यात सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। बदलती वैश्विक सियासत और अमेरिका-चीन पर सप्लाई चैन की निर्भरता कम करने के लिहाज से यह ऐतिहासिक डील भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है।
नितिन नवीन की नई टीम का काउंटडाउन शुरू…. जल्द बदलेगा BJP का संगठनात्मक ढांचा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) (Bharatiya Janata Party – BJP) के संगठनात्मक ढांचे में जल्द ही बड़ा फेरबदल (Organizational Structure Major Change) देखने को मिल सकता है। पार्टी के शीर्ष निकाय यानी संसदीय बोर्ड सहित कई अहम संगठनात्मक टीमों में बदलाव की पूरी तैयारी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 15 जून के बाद नए पदाधिकारियों की टीम की घोषणा की जा सकती है। पार्टी की यह परंपरा रही है कि नए अध्यक्ष के चुने जाने के बाद संगठन में बदलाव किए जाते हैं। इसी कड़ी में, जनवरी में नितिन नवीन (Nitin Navin) के बीजेपी अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। बुधवार को एनडीए (NDA) की होने वाली एक बड़ी बैठक के बीच पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि लगभग एक हफ्ते के भीतर नए पदाधिकारियों के नामों का ऐलान कर दिया जाएगा। युवा और अनुभव का दिखेगा संगम, इन वर्गों पर होगा फोकस45 वर्षीय नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान संगठन को अधिक युवा और सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाला बनाने पर जोर दे रहा है। माना जा रहा है कि पदाधिकारियों की नई टीम में ‘युवा और अनुभव’ का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। आगामी राजनीतिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए इस नई टीम में ओबीसी (OBC) और दलितों जैसे प्रमुख वर्गों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है। राज्यों का दौरा कर फीडबैक ले रहे अध्यक्षपार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन इन दिनों लगातार कई राज्यों का सघन दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे राज्य की पार्टी इकाइयों से जमीनी फीडबैक जुटाने के साथ-साथ अपनी प्राथमिकताएं भी तय कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके इन दौरों से मिलने वाला फीडबैक संगठन में होने वाले समग्र बदलावों के लिए बीजेपी आलाकमान के फैसलों में अहम भूमिका निभाएगा। मोदी कैबिनेट में भी फेरबदल की सुगबुगाहटपार्टी संगठन में होने वाले इन बदलावों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में भी फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। गौरतलब है कि पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे करने जा रहे हैं, जिसे देखते हुए कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार और संगठन में बदलाव की इन सुगबुगाहटों को हाल के कुछ फैसलों से भी बल मिला है। दो केंद्रीय मंत्रियों- पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पार्टी की राज्य इकाइयों का प्रमुख बनाकर भेजा गया है। वहीं, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किया है। इन हालिया घटनाक्रमों के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार और संगठन, दोनों स्तरों पर बड़ी तब्दीलियां देखने को मिल सकती हैं। कई चौंकाने वाले नामों को मिल सकती है जगहभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई कोर टीम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कैबिनेट विस्तार में कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं। 15 जून को ‘अधिकमास’ (मलमास) खत्म होने के बाद जून के अंत तक नए पदाधिकारियों की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है। भाजपा आलाकमान की रणनीति में दक्षिण भारत में पार्टी की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 46 वर्षीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को उपाध्यक्ष और युवा चेहरों को अन्य पदों पर जगह मिल सकती है। रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का क्या होगा?केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राजस्थान से दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह के करीबी बिट्टू को पंजाब चुनाव के मद्देनजर वहां कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी या चुनाव अभियान का अहम जिम्मा सौंपा जा सकता है। वहीं केरल से आने वाले मंत्री जॉर्ज कुरियन का भी राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है और उन्हें भी दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया है। चर्चा है कि उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता है। मोदी कैबिनेट में किन्हें मिल सकती है जगह?चूंकि पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को राज्यों के संगठन में भेज दिया गया है, इसलिए मोदी कैबिनेट में पहले से ही जगह खाली हो रही है। 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद कैबिनेट में एक बड़े फेरबदल (करीब 12 मंत्रियों के विभाग या पद में बदलाव) की सुगबुगाहट है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को पार्टी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। इस कदम से मजबूत कयास लगाए जा रहे हैं कि चुघ को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री पद से नवाजा जा सकता है। राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को भी राज्यसभा भेजा जा रहा है। संसद में उनका यह डेब्यू उन्हें केंद्र की राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी दिला सकता है। एनडीए के सहयोगी दलों जैसे जेडीयू (JDU), टीडीपी (TDP), एनसीपी (NCP) और आरएलएम (RLM) के नेताओं को इस कैबिनेट विस्तार में तवज्जो मिलने की उम्मीद है। जेडीयू और टीडीपी के खाते में कुछ ‘राज्यमंत्री’ पद जा सकते हैं। पंजाब से आप (AAP) के बागी सांसद: चर्चा यह भी है कि आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पंजाब के एक राज्यसभा सांसद को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठ रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि उनके विभाग में भी बदलाव किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा (यूपी से कुर्मी नेता) का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है, लेकिन 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें दोबारा टिकट मिलने और कैबिनेट में बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है।
ताश के पत्तों की तरह ढह रहा विपक्ष का किला… राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब BJP

नई दिल्ली। दो साल पहले हुए लोकसभा चुनावों (Lok Sabha elections) में भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को कड़ी टक्कर देने वाला विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। आंतरिक कलह, हालिया चुनावी हार और घटक दलों के पाला बदलने के कारण लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 के नीचे गिरने की कगार पर पहुंच गया है। विपक्ष के रणनीतिकारों को डर है कि इस बिखराव के बाद संसद के भीतर सरकार के विधायी और राजनीतिक एजेंडे को चुनौती देने की विपक्ष की बची-कुची क्षमता भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। संसद के भीतर इंडिया गठबंधन (India Alliance) का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। 22 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने हाल ही में इंडिया का साथ छोड़ दिया। इससे इंडिया गठबंधन की लोकसभा में ताकत 2024 के 234 से घटकर पहले ही 209 पर आ चुकी है। अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई के बागी होने की खबरों ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। अगर ऐसा होता है तो विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे चला जाएगा। भाजपा की नजर पूर्ण बहुमत परविपक्ष के इस पतन से उत्साहित होकर भाजपा लोकसभा में अपने दम पर साधारण बहुमत 272 का आंकड़ा पार करने की रणनीति बना रही है। फिलहाल भाजपा के यहां 240 सांसद हैं। अगर टीएमसी के सांसदों का विलय हो जाता है तो भाजपा का यह आंकड़ा बहुमत के काफी करीब पहुंच जाएगा। वहीं, संकट सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के बीच विभाजन की पूरी संभावना है। हाल ही में आम आदमी पार्टी में भी यह देखा गया। इन बदलते समीकरणों के कारण राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच रहा है। इंडिया गठबंधन के कुछ पदाधिकारियों को डर है कि इस मजबूती से उत्साहित होकर सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) विपक्ष के अन्य कमजोर या असंतुष्ट धड़ों को भी अपने पाले में लाने के लिए प्रेरित हो सकता है। महिला आरक्षण और परिसीमन बिल की वापसी तयदोनों सदनों में सरकार का विधायी रास्ता पूरी तरह साफ होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कई महत्वाकांक्षी और लंबित विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह केवल समय की बात है कि सरकार महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को दोबारा संसद में पेश कर पास करा लेगी, जिन्हें पिछले सत्र में इंडिया गठबंधन ने एकजुट होकर रोक दिया था। हार का सिंड्रोम और कांग्रेस पर आरोपसोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में जमकर आरोप-प्रत्यारोप और घोर निराशा का माहौल देखा गया। विपक्षी नेताओं का यह गुस्सा और हताशा लगातार मिली चुनावी शिकस्त का नतीजा है। 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्ष को हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस राजनीतिक कुप्रबंधन के चलते क्षेत्रीय दलों खासकर TMC, RJD, DMK, शिवसेना-UBT, एनसीपी-शरदचंद्र पवार, आप और लेफ्ट का कांग्रेस के नेतृत्व की क्षमता पर से भरोसा उठ गया है। अब सिर्फ 6 राज्यों में बची INDIA की सत्तालगातार मिली हार के बाद अब ‘इंडिया’ गठबंधन का शासन देश के गिने-चुने राज्यों में ही सिमट कर रह गया है। उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष की सरकार है। वहीं, दक्षिण भारत में कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में कांग्रेस सत्ता में है।
दिल्ली में धरना…. कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द को बताया सीट चोरी.. EC से भिड़ गए रमेश

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में होने वाले राज्य सभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन खारिज कर दिया गया है। उन पर आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने के आरोप हैं। इस घटना से नाराज कांग्रेस नेताओं ने जहां इसे सीट चोरी बताया है, वहीं इसकी शिकायत करने सीधे चुनाव आयोग के दफ्तर जा पहुंचे। मामले में शिकायत दर्ज करवाने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंगलवार (9 जून) की शाम नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचे तो उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इस दौरान कांग्रेस महासिव जयराम रमेश को आयोग के सुरक्षा अधिकारियों से भिड़ते हुए देखा गया। रमेश ने धौंस दिखाते हुए सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि कहानी मत बनाओ, 35 साल से सांसद हूं। अंदर आयोग के वेटिंग रूम में जाने दो, जब इसके बाद भी उन्हें इजाजत नहीं मिली तो कांग्रेस नेता मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। जयराम रमेश के साथ कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सचिन पायलट तथा कुछ अन्य नेता मंगलवार देर शाम आयोग के मुख्यालय पहुंचे थे। कांग्रेस का आरोप है कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज कर दिया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। वेणुगोपाल ने संवाददाताओं ने कहा कि जब तक कांग्रेस नेताओं को आयोग के भीतर जाने की इजाजत नहीं मिलती, तब तक धरना जारी रहेगा। हालांकि, कुछ देर बाद आयोग की ओर से पार्टी के दो नेताओं को ज्ञापन सौंपने की अनुमति मिली और फिर वेणुगोपाल एवं बघेल ने अंदर जाकर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद घरना खत्म कर दिया गया। इंसाफ दीजिए, नहीं तो जाएंगे कोर्टवेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ”शाम 7.25 बजे हमने निर्वाचन आयोग को शिकायत दर्ज कराने के मकसद से मुलाकात के वक्त के लिए पत्र दिया। अब निर्वाचन आयोग के अंदर हमें जाने नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने सवाल किया, ”इस देश में क्या हो रहा है? क्या यह ‘बनाना रिपब्लिक’ है?” वेणुगोपाल का कहना था, ”हमें इंसाफ चाहिए, (हम) कानूनी कदम उठाएंगे, हम अदालत भी जाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि बिना किसी कारण के नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआवहीं सचिन पायलट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ न तो कोई मामला दर्ज है, न आरोप-पत्र दाखिल हुआ है और न ही किसी मामले में सजा हुई है, इसके बावजूद एक नोटिस मिलने का हवाला देकर नामांकन खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई षड्यंत्र है और इसपर निर्वाचन आयोग को ध्यान देना चाहिए। पायलट का कहना था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि एक राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन बिना किसी कारण के खारिज कर दिया गया हो। नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा की साजिशइससे पहले, वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज करना भाजपा द्वारा गुप्त तरीके से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का एक प्रयास है। उनके नामांकन में किसी भी त्रुटि या कोई जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण है और कांग्रेस से एक सीट छीनने का यह हताशापूर्ण प्रयास है।” उनका कहना था, ”जब उन्हें (भाजपा को) एहसास हुआ कि हमारे कांग्रेस विधायकों से सौदा करने की उनकी गंदी चालें विफल होने वाली हैं, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उनका (मीनाक्षी नटराजन का) नामांकन खारिज करवा दिया।” वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह संविधान और लोकतंत्र के प्रति भाजपा की खोखली प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वह हर कदम पर किसी न किसी तरह “वोट चोरी” पर आमादा है। कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम लोकतंत्र की इस दिनदहाड़े लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ कानूनी तथा सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।”
आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प है FD…. जानें कहां मिलेगा अच्छा रिटर्न?

नई दिल्ली। अगर आप अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए अच्छा रिटर्न (Good Return) कमाना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit- FD) आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों (Most Reliable Investment Options) में से एक माना जाता है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD एक ऐसा निवेश है, जहां जोखिम कम होता है और तय ब्याज के साथ नियमित आय की सुविधा मिलती है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। इसके बावजूद देश के बड़े बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक FD ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं। SBI बैंक की FD ब्याज दरदेश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बात करें तो यह सामान्य ग्राहकों को 3.05% से 6.45% तक और वरिष्ठ नागरिकों को 3.55% से 6.90% तक ब्याज दे रहा है। SBI की लोकप्रिय अमृत वृष्टि योजना भी निवेशकों के बीच काफी पसंद की जा रही है। HDFC बैंक की FD ब्याज दरनिजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंकों में शामिल HDFC Bank अपने ग्राहकों को 2.75% से 6.50% तक और वरिष्ठ नागरिकों को 3.25% से 7% तक ब्याज दे रहा है। बैंक की सबसे ज्यादा ब्याज दर 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम अवधि वाली FD पर मिल रही है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है। वहीं ICICI Bank वरिष्ठ नागरिकों को सबसे आकर्षक दरों में से एक ऑफर कर रहा है। बैंक सामान्य ग्राहकों को 2.75% से 6.50% और वरिष्ठ नागरिकों को 3.25% से 7.10% तक ब्याज दे रहा है। 3 साल 1 दिन से 5 साल की अवधि वाली FD पर यह सबसे ज्यादा रिटर्न दे रहा है। PNB बैंक की FD ब्याज दरअगर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की बात करें तो बैंक सामान्य ग्राहकों को 3% से 6.60% और वरिष्ठ नागरिकों को 3.50% से 7.10% तक ब्याज दे रहा है। खास बात यह है कि PNB की 444 दिनों की FD स्कीम पर सबसे ज्यादा ब्याज मिल रहा है, जो निवेशकों को आकर्षित कर रही है। BoB बैंक की FD ब्याज दरसरकारी क्षेत्र के एक और बड़े बैंक Bank of Baroda भी ग्राहकों को बेहतर रिटर्न दे रहा है। बैंक सामान्य ग्राहकों को 3.50% से 6.45% और वरिष्ठ नागरिकों को 4% से 6.95% तक ब्याज ऑफर कर रहा है। यहां भी 444 दिनों की FD पर सबसे अधिक ब्याज दर उपलब्ध है। एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा समय में ब्याज दरें आकर्षक स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए जिन निवेशकों को शेयर बाजार की अस्थिरता से बचते हुए सुरक्षित निवेश करना है, उनके लिए FD एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हालांकि, निवेश से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और अवधि की तुलना जरूर कर लेनी चाहिए, ताकि अधिकतम रिटर्न प्राप्त किया जा सके। SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) जैसी बड़ी बैंकें इस समय FD पर 7% से अधिक तक ब्याज दे रही हैं। ऐसे में यह समय FD निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
Skin Care with Cucumber: खीरे से निखरेगी त्वचा, गर्मियों में मिलेगा प्राकृतिक ग्लो और ठंडक

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, पसीना, धूल-मिट्टी और बढ़ता तापमान त्वचा की नमी छीन लेते हैं, जिससे स्किन बेजान और रूखी नजर आने लगती है। ऐसे में लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार घरेलू और प्राकृतिक उपाय अधिक प्रभावी साबित होते हैं। इन्हीं प्राकृतिक उपायों में खीरा एक ऐसा सुपरफूड है, जिसे स्किन केयर का सबसे आसान और असरदार साथी माना जाता है। खीरे में लगभग 95 प्रतिशत पानी पाया जाता है, जो त्वचा को भीतर से हाइड्रेट रखने में मदद करता है। पर्याप्त नमी मिलने से त्वचा तरोताजा और चमकदार दिखाई देती है। यही कारण है कि गर्मियों में खीरे का सेवन करने के साथ-साथ इसका उपयोग चेहरे पर भी किया जाता है। खीरे में मौजूद विटामिन-सी, विटामिन-के और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को पोषण देने और उसे स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आंखों के नीचे सूजन या डार्क सर्कल की समस्या हो तो खीरे के ठंडे स्लाइस काफी लाभदायक साबित हो सकते हैं। खीरे की प्राकृतिक ठंडक आंखों को आराम देती है और सूजन कम करने में मदद करती है। यही वजह है कि ब्यूटी पार्लर और स्पा थेरेपी में भी खीरे का व्यापक उपयोग किया जाता है। गर्मियों में सनबर्न की समस्या भी आम हो जाती है। लंबे समय तक धूप में रहने के कारण त्वचा लाल हो जाती है और जलन महसूस होने लगती है। ऐसे में खीरे का रस त्वचा को ठंडक पहुंचाने का काम करता है। इसे सीधे प्रभावित हिस्से पर लगाने से त्वचा को राहत मिल सकती है और जलन कम महसूस होती है। इसके अलावा खीरा त्वचा की प्राकृतिक नमी बनाए रखने में भी मदद करता है। ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए भी खीरा बेहद फायदेमंद माना जाता है। खीरे का रस चेहरे पर लगाने से अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह रोमछिद्रों को साफ रखने और त्वचा को फ्रेश महसूस कराने में भी सहायक होता है। नियमित उपयोग से चेहरे पर ताजगी बनी रहती है और त्वचा अधिक स्वस्थ दिखाई देती है। खीरे का फेस पैक भी घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए खीरे को कद्दूकस करके उसमें थोड़ा दही या एलोवेरा जेल मिलाया जा सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाने के बाद साफ पानी से धो लें। इससे त्वचा को ठंडक मिलती है और प्राकृतिक चमक बढ़ने में मदद मिलती है। वहीं खीरे और गुलाबजल का मिश्रण भी त्वचा को ताजगी देने के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है या किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या है, तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। साथ ही त्वचा संबंधी गंभीर समस्याओं में विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है। कुल मिलाकर खीरा केवल खाने के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा की देखभाल के लिए भी एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है। नियमित रूप से इसका उपयोग करने से त्वचा को ठंडक, नमी और प्राकृतिक चमक मिल सकती है, जिससे गर्मियों में भी चेहरा स्वस्थ और आकर्षक बना रहता है।
शेयर बाजार आज: क्या 10 जून को भी जारी रहेगी तेजी? निवेशकों की नजर बैंकिंग और वैश्विक संकेतों पर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने 9 जून को शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दो दिनों की गिरावट पर विराम लगाया। बीएसई सेंसेक्स 395 अंकों की बढ़त के साथ 73,919 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 23,242 अंक पर पहुंच गया। इस मजबूती ने निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है और अब 10 जून के कारोबारी सत्र पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार को बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से तय होगी। सबसे बड़ा सहारा बैंकिंग और वित्तीय शेयरों से मिलने की उम्मीद है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर बाजार में दिखाई दे रहा है। इसी वजह से सरकारी और निजी बैंकों के शेयरों में खरीदारी का माहौल बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर भी माहौल कुछ हद तक सकारात्मक नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों की चिंता घटी है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत की खबर मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होता है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर अहम सपोर्ट बन गया है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो आने वाले दिनों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं 23,400 से 23,500 का स्तर निकट भविष्य में महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है। निवेशकों को इस दायरे पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी लगातार निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। पिछले सत्र में इन दोनों सूचकांकों ने प्रमुख इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया, जो बाजार की व्यापक मजबूती का संकेत है। यदि यही रुझान जारी रहता है तो 10 जून को भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, अमेरिकी बाजारों का रुख, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। ऐसे में किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की चाल और खबरों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, 10 जून का शेयर बाजार सकारात्मक संकेतों के साथ शुरुआत कर सकता है। यदि बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और वैश्विक बाजारों का समर्थन बना रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह दिन अवसरों और सतर्कता दोनों का मिश्रण रहने वाला है।
बुधवार की पूजा: गणपति कृपा पाने का सरल और प्रभावी उपाय, दूर होंगे विघ्न और बढ़ेगा सौभाग्य

नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति बुधवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक गणेश जी की पूजा करता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलने लगती है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है। इसलिए विद्यार्थी, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद साफ और हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा घास, हरे रंग के पुष्प, सिंदूर, अक्षत और मोदक या लड्डू अर्पित करें। मान्यता है कि भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इनका भोग लगाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा के समय दीपक और धूप जलाकर गणेश मंत्रों का जाप करना चाहिए। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके साथ ही गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना गया है। पूजा के अंत में आरती कर भगवान से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करनी चाहिए। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बुधवार को हरे मूंग का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को हरे वस्त्र, हरी सब्जियां या मूंग दाल का दान करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और आर्थिक परेशानियां कम होती हैं। जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है, उन्हें बुधवार का व्रत और गणेश पूजा विशेष लाभ प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बुधवार के दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। इस दिन सकारात्मक सोच और संयमित व्यवहार रखने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। व्यापार और करियर में उन्नति की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए भी यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेश की कृपा जिस व्यक्ति पर बनी रहती है, उसके जीवन में आने वाली कठिनाइयां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। इसलिए बुधवार को श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, सफलता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
आज का मौसम: गर्मी के बीच राहत की उम्मीद, शाम को बदल सकता है मौसम का मिजाज

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में आज मौसम मिला-जुला रहने का अनुमान है। सुबह से ही तेज धूप और बढ़ती गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है, जबकि दोपहर के बाद मौसम करवट ले सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय होने लगी हैं, जिसके चलते कई क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। बीते दिनों भोपाल में हुई छिटपुट बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी थी। सोमवार को दिनभर गर्म और उमसभरा मौसम रहने के बाद शाम को हुई बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई। मौसम विभाग का मानना है कि ऐसी परिस्थितियां आज भी देखने को मिल सकती हैं। आज दिन का अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। सुबह के समय मौसम अपेक्षाकृत साफ रहेगा, लेकिन दोपहर बाद बादलों का असर बढ़ सकता है। प्री-मानसून गतिविधियों के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है, जिससे उमस महसूस होगी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की प्रगति के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। फिलहाल लोगों को गर्मी और उमस के बीच राहत के लिए शाम के मौसम का इंतजार करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय तेज धूप में निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और मौसम में अचानक बदलाव की स्थिति में सतर्क रहें। गरज-चमक की संभावना वाले क्षेत्रों में खुले स्थानों पर खड़े होने से बचना चाहिए। कुल मिलाकर आज का दिन गर्मी और उमस के साथ शुरू होगा, लेकिन शाम होते-होते बादल और हल्की बारिश मौसम को सुहावना बना सकते हैं। ऐसे में किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की नजरें आसमान पर टिकी रहेंगी, क्योंकि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं दिख रही है।