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ग्रामीण कनेक्टिविटी को ऐतिहासिक रफ्तार: वित्त वर्ष 2027 में 26,474 किमी नई सड़कों का निर्माण होगा, 18,907 करोड़ रुपए के निवेश से दूरदराज गांवों तक पहुंचेगी विकास की नई राह

नई दिल्ली। देश के ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 26,474 किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 18,907 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। सरकार का उद्देश्य उन गांवों और बस्तियों तक हर मौसम में सड़क सुविधा पहुंचाना है जो अभी भी पर्याप्त संपर्क व्यवस्था से वंचित हैं। ग्रामीण सड़क विकास को लेकर आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और निर्माणाधीन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति के साथ आगामी लक्ष्यों पर चर्चा की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क केवल परिवहन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियाद है। बैठक के दौरान उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया जो अब तक सड़क नेटवर्क से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। राज्यों को निर्देश दिए गए कि वे शेष असंबद्ध गांवों और बस्तियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए कार्यों में तेजी लाएं। इसके साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने को कहा गया। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बस्तियों तक सड़क पहुंच सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा। अधिकारियों ने कहा कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज करने और स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। समीक्षा बैठक में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में चल रही सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में बेहतर सड़क ढांचा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक पहुंच और विकास गतिविधियों को गति देने में सहायक होगा। संबंधित राज्यों से विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर परियोजनाओं को तय समय के भीतर पूरा करने को कहा गया। बैठक के दौरान राज्यों ने आश्वासन दिया कि लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और वार्षिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने भी परियोजनाओं की नियमित निगरानी और तकनीकी सहायता के माध्यम से राज्यों को सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता और दीर्घकालिक टिकाऊपन को भी समीक्षा का प्रमुख विषय बनाया गया। अधिकारियों ने कहा कि केवल सड़क निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका बेहतर रखरखाव और गुणवत्ता मानकों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। राज्यों को फील्ड निरीक्षण बढ़ाने, निगरानी तंत्र मजबूत करने और निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देने के लिए ई-मार्ग प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया गया। यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रियाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में मदद करती है। सरकार को उम्मीद है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा ग्रामीण सड़क विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून अब 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून की इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बोवनी प्रभावित होने लगी है। प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तो देखने को मिली हैं, लेकिन बारिश की मात्रा खेती के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच मध्य प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी यानी करीब 1.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल लगभग 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 13 जिलों में आधा इंच यानी 12.5 मिमी से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन शामिल हैं। वहीं आलीराजपुर ऐसा जिला है जहां अब तक बारिश का आंकड़ा शून्य है। कम बारिश और मानसून की देरी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ का कहना है कि सफल बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक है। इतनी बारिश होने पर मिट्टी में पर्याप्त नमी बनती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बोवनी करने से बचें। दरअसल, मानसून के समय पर आने की उम्मीद में कई किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बोवनी कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से उनके बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि पर्याप्त नमी नहीं मिली तो किसानों को दोबारा बोवनी करनी पड़ सकती है, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ेंगी। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी अच्छी बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हुआ। बैतूल में तापमान एक दिन में करीब 10 डिग्री तक नीचे आ गया। मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 28 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी और बारिश दोनों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मानसून की वास्तविक एंट्री पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही खरीफ सीजन और जल संसाधनों की स्थिति तय करेगा।

मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 29 आईएएस अधिकारियों के तबादले करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी आदेश में भोपाल और रीवा संभाग के आयुक्तों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस प्रशासनिक पुनर्संरचना को आगामी नीतिगत और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने भोपाल संभाग के आयुक्त संजीव सिंह और रीवा संभाग के आयुक्त बाबू सिंह जामोद को उनके पदों से हटाकर मंत्रालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब कर्मवीर शर्मा को भोपाल संभाग का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि शैलेंद्र सिंह को रीवा संभाग की कमान सौंपी गई है। इन दोनों अधिकारियों की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह को उनके पद से हटाकर पंजीयन महानिरीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक गलियारों में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय को राज्य शासन की सबसे प्रभावशाली इकाइयों में गिना जाता है। इस फेरबदल में जबलपुर नगर निगम के अपर आयुक्त अरविंद कुमार शाह का नाम भी चर्चा में रहा। हाल ही में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के साथ विवाद के बाद उनका तबादला कर दिया गया है। हालांकि सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्य सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। बाबू सिंह जामोद को नगरीय विकास एवं आवास विभाग का सचिव बनाया गया है। मुकेश चंद्र गुप्ता को जेल विभाग का प्रमुख सचिव, डॉ. ई. रमेश कुमार को राजस्व विभाग का प्रमुख सचिव तथा विवेक कुमार पोरवाल को खनिज साधन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। इस सूची में एक और महत्वपूर्ण नाम अमन वीर सिंह का है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के पुत्र अमन वीर सिंह पर सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें ओएसडी सह आयुक्त कोष एवं लेखा तथा पदेन अपर सचिव वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी है। इससे पहले वे ऊर्जा विकास निगम में प्रबंध संचालक के रूप में कार्यरत थे। वित्त विभाग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। अपर सचिव वित्त रोहित सिंह को मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पास स्कूल शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। वहीं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह को बजट संचालक नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक फेरबदल के दौरान शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति भी चर्चा में रही। हाल ही में उनके ‘वॉश ऑन व्हील्स’ नवाचार को लेकर आईएएस एसोसिएशन के समूह में चर्चा और विवाद की स्थिति बनी थी। बाद में मुख्य सचिव ने उनके कार्यों की सराहना की थी। अब उन्हें नगरीय विकास विभाग के सचिव पद से हटाकर रीवा संभाग का आयुक्त बनाया गया है। इसके अलावा सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। मनु श्रीवास्तव को कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। गुलशन बामरा को अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि अनिरुद्ध मुखर्जी को पर्यावरण विभाग और एपको की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार का यह व्यापक प्रशासनिक फेरबदल आने वाले समय में शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे आगामी रणनीतिक बदलावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

एफएसएसएआई का सख्त निर्देश: खाद्य कारोबार में जंग लगे चाकू और क्षतिग्रस्त कटिंग टूल्स पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली । देश में खाद्य सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राधिकरण ने सभी खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि खाद्य पदार्थों के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वितरण के दौरान केवल फूड-ग्रेड तथा जंग-रोधी चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों का ही उपयोग किया जाए। यह निर्देश ऐसे समय में जारी किया गया है जब विभिन्न क्षेत्रों से खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाले जंग लगे और क्षतिग्रस्त उपकरणों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं। एफएसएसएआई के अनुसार कई खाद्य प्रतिष्ठानों में ऐसे चाकू और कटिंग टूल्स उपयोग में पाए गए हैं जो जंग लगे हुए, टूटे-फूटे, दरारयुक्त या अत्यधिक खराब स्थिति में हैं। कुछ मामलों में पेंट किए गए या क्षतिग्रस्त उपकरणों के इस्तेमाल की भी जानकारी मिली है। ऐसे उपकरण खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। नियामक का मानना है कि इनकी वजह से खाद्य उत्पादों में भौतिक, रासायनिक और सूक्ष्मजीव संबंधी दूषण की आशंका बढ़ जाती है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियम पहले से ही यह निर्धारित करते हैं कि भोजन के संपर्क में आने वाले सभी उपकरण, बर्तन और सतहें सुरक्षित, गैर-विषाक्त और जंग-रोधी सामग्री से निर्मित होनी चाहिए। इसके बावजूद यदि कहीं अनुपयुक्त उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है तो यह निर्धारित मानकों और स्वच्छता संबंधी प्रावधानों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। एफएसएसएआई ने अपने निर्देश में कहा है कि सभी खाद्य कारोबारी यह सुनिश्चित करें कि उनके यहां उपयोग में आने वाले चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरण पूरी तरह साफ-सुथरे और कार्यक्षम स्थिति में हों। इनमें जंग, टूट-फूट, दरार, रंग उखड़ने या किसी अन्य प्रकार की ऐसी खामी नहीं होनी चाहिए जिससे खाद्य पदार्थ दूषित होने का जोखिम उत्पन्न हो। इसके साथ ही उपकरणों की नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन और आवश्यकता पड़ने पर स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उत्पादन और प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की गुणवत्ता सीधे तौर पर उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। यदि कटिंग उपकरणों से धातु के कण, जंग या अन्य हानिकारक तत्व खाद्य सामग्री में मिल जाएं तो यह खाद्य जनित बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा मानकों में उपकरणों की गुणवत्ता और रखरखाव को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। नियामक संस्था ने खाद्य कारोबारियों को सलाह दी है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में मौजूद सभी पुराने, जंग लगे या अनुपयोगी कटिंग टूल्स की तत्काल समीक्षा करें और आवश्यक होने पर उन्हें बदल दें। इसके साथ ही समय-समय पर उपकरणों की जांच और रखरखाव की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की भी सिफारिश की गई है ताकि दूषण की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके। एफएसएसएआई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जारी एडवाइजरी का पालन न करने वाले कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक दंड सहित अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य देशभर में खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद पहुंचाना है।

अमेरिकी फेड के सख्त संकेतों के बीच भारतीय बाजार की सतर्क शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी फ्लैट; 24,100 के अहम स्तर पर टिकी निवेशकों की नजर

नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया मौद्रिक नीति के प्रभाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बेहद सीमित दायरे में की। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जबकि निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक बना हुआ दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशक अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर के मुकाबले हल्की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। हालांकि शुरुआती मिनटों में ही दोनों प्रमुख सूचकांकों ने कुछ हद तक स्थिरता दिखाई और सीमित दायरे में कारोबार जारी रखा। इससे संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने के बजाय बाजार की अगली दिशा का इंतजार कर रहे हैं। व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया। दोनों श्रेणियों के सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और कॉर्पोरेट आय की उम्मीदों के कारण मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिसके पीछे अमेरिकी बाजारों से जुड़े संकेत और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, धातु और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इन सेक्टरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भविष्य के संकेत निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को यथावत रखने के बावजूद भविष्य में संभावित सख्ती के संकेतों ने वैश्विक बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सीमित गतिविधि दिखाई। हालांकि वैश्विक स्तर पर कुछ सकारात्मक घटनाक्रम भी बाजार के लिए सहायक बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों में कमी आने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना है। तेल कीमतों में नरमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो बाजार की मौजूदा संरचना अब भी सकारात्मक बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार प्रमुख तकनीकी संकेतक खरीदारी की ताकत को दर्शा रहे हैं। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण अवरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल रहता है तो आगे और तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,800 के बीच का क्षेत्र मजबूत समर्थन प्रदान कर सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर पर बनी रहेगी।

एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून

भोपाल । मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी सुधार को लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयान से संकेत मिले हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके लिए गठित समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने यूसीसी का मसौदा तैयार किया है। समिति राज्यभर में जाकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और नागरिक संगठनों से संवाद कर रही है। साथ ही सरकार ऑनलाइन माध्यम से भी लोगों की राय ले रही है ताकि कानून को व्यापक जनसमर्थन और सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके। प्रस्तावित यूसीसी का ढांचा मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर आधारित होगा। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों में लागू व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली कानूनी जटिलताओं को समाप्त कर सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है। ड्राफ्ट का सबसे चर्चित पहलू लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार लिव-इन संबंधों को कानूनी पहचान देने के साथ उनका पंजीकरण या घोषणा अनिवार्य की जा सकती है। यदि ऐसे संबंध टूटते हैं तो महिला को भरण-पोषण और आर्थिक सहायता का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को भी पूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्हें माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक उत्तराधिकार और अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे, जिससे उनके अधिकारों को लेकर किसी प्रकार का विवाद न रहे। यूसीसी का एक प्रमुख उद्देश्य लैंगिक समानता सुनिश्चित करना भी है। प्रस्तावित कानून के तहत महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान अधिकार दिए जाएंगे। तलाक की प्रक्रिया को भी एक समान कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी है। किसी भी धर्म के व्यक्ति द्वारा लिया गया तलाक तभी मान्य होगा जब उसका विधिवत पंजीकरण किया जाएगा। तलाक के बाद भरण-पोषण और गुजारा भत्ते के नियम भी सभी समुदायों के लिए समान होंगे। सरकार का दावा है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित किए बिना नागरिकों के समान अधिकारों को मजबूत करेगा। संविधान के समानता संबंधी प्रावधानों और नीति निर्देशक तत्वों के अनुरूप इसे तैयार किया जा रहा है ताकि सभी नागरिकों को एक समान कानूनी संरक्षण मिल सके। हालांकि प्रस्तावित यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाता है तो इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है। इन तमाम बहसों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार यूसीसी को लेकर गंभीर है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो मानसून सत्र में यह विधेयक विधानसभा में पेश कर पारित कराया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूसीसी मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का सबसे बड़ा विषय बनने जा रहा है।

भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

भोपाल । राजधानी भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नाइट ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे एक पेट्रोल पंप कर्मचारी की आयशर वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय नितेश यादव पुत्र अशोक यादव निवासी आमना खेड़ी के रूप में हुई है। नितेश भैंसा खेड़ी स्थित एक पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के पद पर कार्यरत था। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात वह अपनी नियमित ड्यूटी पर था। ड्यूटी समाप्त होने के बाद वह सुबह बाइक से अपने घर लौट रहा था। सुबह करीब 10:15 बजे जब नितेश खजूरी सड़क क्षेत्र के पास एक मोड़ से गुजर रहा था, तभी सामने से आ रहे एक आयशर वाहन ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नितेश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के बाद आयशर चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। इसके बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही खजूरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा कर लिया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नितेश यादव की निजी जिंदगी भी जिम्मेदारियों से भरी हुई थी। करीब छह वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी और वह दो बच्चों का पिता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसी के कंधों पर थी। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार दोपहर शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। अस्पताल की मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस हादसे को लेकर स्तब्ध हैं। मोहल्ले और परिचितों में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के गंभीर खतरे की याद दिलाता है। एक पल की असावधानी ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि उसके परिवार को जीवनभर का दुख दे दिया।

एनएसई का 30,000 करोड़ रुपये का मेगा आईपीओ तैयार, भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में बन सकता है सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर

नई दिल्ली । भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपने बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नियामकीय प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। लंबे समय से बाजार की नजर जिस प्रस्ताव पर टिकी हुई थी, वह अब औपचारिक रूप से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। अनुमान है कि यह सार्वजनिक निर्गम करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जो भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की क्षमता रखता है। इस प्रस्तावित आईपीओ की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आधारित होगा। इसका अर्थ है कि कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी नहीं जुटाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। इस मॉडल के तहत कंपनी की बैलेंस शीट पर कोई नई पूंजी नहीं आएगी, जबकि निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी के आंशिक विनिवेश का अवसर मिलेगा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के आसपास आंका जा रहा है। इसी आधार पर यदि कुल हिस्सेदारी का सीमित प्रतिशत भी सार्वजनिक निर्गम के तहत पेश किया जाता है, तो इसका आकार 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के कई बड़े आईपीओ को पीछे छोड़ सकता है और पूंजी बाजार में नया रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है। इस इश्यू में कई प्रमुख संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। लंबे समय से एनएसई में निवेश बनाए रखने वाले बड़े वित्तीय संस्थान और विदेशी निवेशक इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से आंशिक निकास प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि देश की सबसे बड़ी बीमा संस्था एलआईसी इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना में शामिल नहीं है। बाजार विश्लेषक इसे एनएसई में दीर्घकालिक विश्वास और रणनीतिक निवेश दृष्टिकोण के रूप में देख रहे हैं। एनएसई की लिस्टिंग का महत्व केवल इश्यू के आकार तक सीमित नहीं है। यह कदम भारतीय वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और निवेशकों की भागीदारी को नई दिशा दे सकता है। देश के अधिकांश इक्विटी और डेरिवेटिव कारोबार का संचालन इसी एक्सचेंज के माध्यम से होता है। ऐसे में इसका सार्वजनिक कंपनी के रूप में सामने आना बाजार संरचना के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। आईपीओ प्रक्रिया तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न नियामकीय और प्रक्रियात्मक चुनौतियों के कारण यह योजना कई बार चर्चा में रही। अब आवश्यक मंजूरियां और प्रक्रियाएं आगे बढ़ने के बाद बाजार को इस ऐतिहासिक निर्गम का इंतजार है। निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की नजर आगामी चरणों पर बनी हुई है, जहां मूल्य निर्धारण, हिस्सेदारी के आकार और निवेशकों की प्रतिक्रिया जैसे पहलू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आईपीओ अनुमानित आकार में सफलतापूर्वक पूरा होता है तो यह केवल एक कॉर्पोरेट इवेंट नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार की परिपक्वता और वैश्विक निवेश आकर्षण का प्रतीक भी बनेगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है तथा बाजार को नई गति मिल सकती है। भारतीय शेयर बाजार के विकास की यात्रा में यह कदम एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ सकता है। आने वाले महीनों में इस आईपीओ से जुड़ी गतिविधियां निवेश जगत के केंद्र में रहने की संभावना है और पूरा वित्तीय क्षेत्र इसके अगले चरणों पर बारीकी से नजर रखेगा।

मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा

भोपाल । भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने मामले के दोनों आरोपियों अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 8-8 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले का महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हुआ है। यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था और उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। घटना 30 अप्रैल 2019 की है, जब आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। आरोप है कि टेकरी पर दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के उद्देश्य से पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को लगभग 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया था ताकि किसी को घटना की जानकारी न मिल सके। घटना के बाद आरोपी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए छात्रा की तलाश का नाटक करते रहे। जब बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली तो कोहेफिजा थाना पुलिस ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली। जांच के दौरान पुलिस को अविनाश साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास दिखाई दिया। संदेह गहराने पर पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, जिसके बाद उसने पूरी वारदात कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने खाई में छिपाया गया छात्रा का शव बरामद किया। जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित किया। पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश भी की थी। हालांकि बाद में सीबीआई ने पुलिस की डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोनों आरोपियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। लेकिन अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और उससे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद मामले का ट्रायल जारी रहा और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं। इसी आधार पर दोनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई गई। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य और सतत न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण में आया फैसला न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को भी मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

भोपाल । मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है। एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका। पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।