Chambalkichugli.com

भोपाल में बड़ा अग्निकांड टला, तीन मंजिला बिल्डिंग में लगी आग; दमकलकर्मियों ने दिखाया साहस

भोपाल । विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर रविवार सुबह राजधानी भोपाल की सड़कों पर उत्साह, ऊर्जा और फिटनेस का अनूठा संगम देखने को मिला। टीटी नगर स्टेडियम से शुरू हुए ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान में हजारों लोगों ने हिस्सा लेकर स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सुबह की ताजगी भरी हवा में साइकिलों का लंबा काफिला शहर की सड़कों पर निकला तो लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं भी साइकिल चलाकर अभियान में भाग लिया और लोगों को नियमित व्यायाम तथा फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। टीटी नगर स्टेडियम से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा लिंक रोड और रोशनपुरा सहित विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। साईं (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभियान को इस वर्ष विशेष रूप से व्यापक स्वरूप दिया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, छात्र और आम नागरिक शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने एकजुट होकर फिट इंडिया के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। अभियान के दौरान राजधानी की सड़कें साइकिल चालकों से गुलजार नजर आईं। प्रतिभागियों ने न केवल शारीरिक फिटनेस के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने का भी संदेश दिया। कई लोगों ने कहा कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी है, इसलिए इसे दैनिक जीवन में अधिक से अधिक अपनाने की जरूरत है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण के लिए फिटनेस को जनआंदोलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है और ‘संडे ऑन साइकिल’ जैसे आयोजन उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सारंग ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता कई बीमारियों को जन्म दे रही है। ऐसे में नियमित व्यायाम, खेलकूद और साइकिलिंग जैसी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। विश्व साइकिल दिवस पर आयोजित यह अभियान केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि जनजागरूकता का माध्यम भी बना। इसमें शामिल लोगों ने फिटनेस, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। राजधानी भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि नागरिक नियमित रूप से साइकिलिंग और शारीरिक गतिविधियों को अपनाएं तो स्वस्थ जीवन के साथ-साथ स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त शहर का सपना भी साकार किया जा सकता है। ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि फिटनेस केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन भी बन सकती है। यही कारण है कि इस आयोजन को लोगों का व्यापक समर्थन और उत्साहपूर्ण सहभागिता मिली।

भोपाल में तीन मंजिला इमारत में भीषण आग: 6 रेस्टोरेंट चपेट में आए, दीवार तोड़कर अंदर घुसे दमकलकर्मी

भोपाल । राजधानी भोपाल के लालघाटी इलाके में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत से घना धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। एलर कॉम्प्लेक्स नामक इस इमारत में छह रेस्टोरेंट संचालित होते हैं। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। जानकारी के अनुसार, आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगी थी, लेकिन इसका पता सुबह तब चला जब पास की एक बिल्डिंग के गार्ड ने कॉम्प्लेक्स की खिड़कियों से धुआं निकलते देखा। शुरुआत में उसे लगा कि यह रेस्टोरेंट के किचन से उठने वाला सामान्य धुआं है, लेकिन जब धुएं के साथ आग की लपटें दिखाई देने लगीं तो उसने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। एलर कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट में ‘बापू की कुटिया’ सहित कई प्रतिष्ठान संचालित हैं, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर प्रसिद्ध फूड आउटलेट और अन्य दुकानें मौजूद हैं। आग मुख्य रूप से दूसरी मंजिल पर स्थित ‘भोज इन’ रेस्टोरेंट से शुरू हुई। बताया गया कि रेस्टोरेंट का किचन तीसरी मंजिल पर बना हुआ है, जहां से आग ने विकराल रूप लेना शुरू किया और धीरे-धीरे अन्य हिस्सों की ओर फैलने लगी। सूचना मिलते ही शहर के विभिन्न फायर स्टेशनों से आठ दमकल वाहन और तीन वाटर टैंकर मौके पर भेजे गए। आग इतनी घनी थी कि दमकलकर्मियों को सीधे अंदर प्रवेश करने में कठिनाई हुई। स्थिति को देखते हुए उन्होंने इमारत की दीवार तोड़कर अंदर जाने का फैसला किया। इसके बाद टीम ने अंदर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। हादसे के दौरान सबसे बड़ा खतरा रेस्टोरेंट के किचन में रखे चार कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों से था। यदि आग इन सिलेंडरों तक पहुंच जाती तो बड़ा विस्फोट हो सकता था और नुकसान कई गुना बढ़ सकता था। दमकलकर्मियों ने सूझबूझ और तेजी दिखाते हुए सबसे पहले सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट प्रतीत हो रहा है। घटना के समय रेस्टोरेंट बंद था और अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट में अग्निशमन यंत्र मौजूद थे, लेकिन आग की तीव्रता अधिक होने के कारण फायर ब्रिगेड की मदद जरूरी हो गई। आग से उठता धुआं इतना अधिक था कि वह करीब पांच किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के लोगों में भी दहशत का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। फायर ब्रिगेड ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए आग को अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों तक फैलने से रोक लिया। फिलहाल प्रशासन और फायर विभाग नुकसान का आकलन कर रहे हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आग लगने के वास्तविक कारणों और सुरक्षा मानकों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

केंद्रीय मंत्री की स्वीकृति: पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक एथलेटिक ट्रैक और ग्रामीण खेल केंद्रों का विकास

नई दिल्ली । केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पंजाब विश्वविद्यालय में ओलंपिक स्तर के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा केंद्रीय मंत्री को प्रस्तुत किए गए विस्तृत सुझावों के बाद आया है। प्रस्ताव में देशभर में खेल संस्कृति के विकास और युवा प्रतिभाओं को सशक्त बनाने के लिए कई पहलुओं पर जोर दिया गया। इस प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को प्रत्येक राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना, राष्ट्रीय स्तर पर खेल उत्कृष्टता केंद्र और मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने के सुझाव भी प्रस्तुत किए। इसके अलावा, ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की खोज और उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उपायों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से, ABVP ने 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें खिलाड़ियों के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, स्पोर्ट्स सामग्री बैंक, राष्ट्रीय डिजिटल एथलीट पोर्टल और ‘माई भारत’ वालंटियर्स के मानदेय में वृद्धि जैसी सिफारिशें शामिल थीं। इन सभी सुझावों को केंद्रीय मंत्री ने गंभीरता से लिया और कई मामलों में सरकार द्वारा शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। पंजाब विश्वविद्यालय में ओलंपिक मानक के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की स्थापना इस चर्चा की प्रमुख उपलब्धि मानी जा रही है। निर्माण कार्य की प्रक्रिया को अगले दो से तीन महीनों में तेज़ गति से आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रैक न केवल छात्रों और एथलीटों के प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाएगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारत की तैयारी को भी मजबूत करेगा। सरकारी अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘स्पोर्ट्स सामग्री बैंक’ स्थापित करने की योजना की भी सराहना की। यह पहल खिलाड़ियों को आवश्यक खेल उपकरण और संसाधन प्रदान करने में मदद करेगी। मंत्रालय ने बताया कि इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। ABVP का मानना है कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी संपत्ति है और इसे खेल के माध्यम से सशक्त बनाने से न केवल खेल क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा। आधुनिक खेल अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की ओर तेजी से बढ़ सकता है। छात्र संगठन ने सरकार के सकारात्मक आश्वासनों का स्वागत किया और कहा कि शीघ्र और प्रभावी निर्णयों से देश में खेल संस्कृति को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही यह पहल युवाओं और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं भविष्य में देश की अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाने में निर्णायक साबित होंगी। पंजाब विश्वविद्यालय में इस उच्च स्तरीय ट्रैक के निर्माण से राज्य और देश दोनों में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के अवसर मिलेंगे। इस परियोजना से न केवल छात्रों और एथलीटों का विकास होगा बल्कि खेल क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना

नई दिल्ली । भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए झारखंड से पहली बार ताजे आमों का वाणिज्यिक निर्यात शुरू हो गया है। राज्य के सिमडेगा जिले में उत्पादित आम्रपाली किस्म के आमों की पहली खेप यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना की गई है। इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उत्पादित आम्रपाली आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। लगभग 1.5 मीट्रिक टन आमों की पहली खेप को कोलकाता के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम भेजा गया। इस उपलब्धि ने राज्य के बागवानी क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं। इस निर्यात की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही है। किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े समूहों ने गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, फसल प्रबंधन और निर्यात मानकों के अनुरूप खेती को अपनाकर यह उपलब्धि हासिल की है। इससे न केवल महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले कृषि उद्यमों को भी नई पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की लगातार बढ़ती मांग का लाभ अब उन राज्यों को भी मिलने लगा है, जो अब तक निर्यात गतिविधियों में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। झारखंड से शुरू हुआ यह निर्यात राज्य के किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें घरेलू बाजार पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। इस सफलता के पीछे किसानों को निर्यात संबंधी जानकारी, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराने के लिए किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। किसानों और निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित कर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम पहली निर्यात खेप के रूप में सामने आया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान दिया जाए तो झारखंड के अन्य फल एवं कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। इससे राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्र के किसान आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत होगी। झारखंड से आमों का यह पहला निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिला कृषकों की क्षमता और संभावनाओं का प्रमाण भी है। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ भारत के बढ़ते कृषि निर्यात अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले समय में इससे राज्य के अन्य किसान समूहों को भी वैश्विक बाजारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

भोपाल में तेज रफ्तार कार का कहर: बाइक को टक्कर मार दो लोगों को किया घायल, गुस्साई भीड़ ने कार पलटी

भोपाल । राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बाइक पर सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कार में जमकर तोड़फोड़ करने के बाद उसे पलट दिया। घटना के चलते अस्पताल परिसर में कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। जानकारी के अनुसार, हादसा कोहेफिजा थाना क्षेत्र स्थित हमीदिया अस्पताल परिसर में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार तेज गति से परिसर के अंदर से गुजर रही थी। इसी दौरान उसने सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में घायल लोगों की पहचान गीता सेन (44), पति प्रहलाद सेन, निवासी पिपलानी और जावेद नामक युवक के रूप में हुई है। दोनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार घायलों को गंभीर चोटें आई हैं और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना के तुरंत बाद अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। लोगों का आरोप था कि कार चालक लापरवाही से और अत्यधिक तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद लोगों में इतना आक्रोश था कि उन्होंने कार को घेर लिया और उसके शीशे तथा अन्य हिस्सों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। देखते ही देखते भीड़ का गुस्सा बढ़ गया और लोगों ने कार को पलट दिया। अस्पताल परिसर में अचानक हुए इस हंगामे से वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत का माहौल बन गया। कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में यातायात भी प्रभावित रहा। घटना की सूचना मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए भीड़ को शांत कराया और क्षतिग्रस्त कार को अपने कब्जे में ले लिया। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई। पुलिस का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। कार चालक से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय वाहन की गति कितनी थी तथा दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही कार में हुई तोड़फोड़ और वाहन पलटने की घटना की भी जांच की जाएगी। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल परिसर में हुई इस घटना ने अस्पताल क्षेत्र में यातायात सुरक्षा और वाहन संचालन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अमेरिका-ईरान तनाव, एआई शेयरों की गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी भारतीय बाजार की दिशा: निवेशक सतर्क

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह महत्वपूर्ण संकेत लेकर आ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। मध्य पूर्व में अमेरिका के ठिकानों पर ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया और इजरायल की लेबनान में बमबारी की खबरें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशक इन geopolitical घटनाओं पर नजर रखकर जोखिम और अवसर का मूल्यांकन करेंगे। कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के मूड पर सीधे असर डाल रही हैं। ब्रेंट क्रूड वर्तमान में 93 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ऊर्जा और इनर्जी सेक्टर से जुड़े शेयरों की चाल को प्रभावित कर सकता है। उच्च तेल मूल्य न केवल ए너지 कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक महंगाई को भी बढ़ा सकता है। अमेरिका में एआई से जुड़े शेयरों की गिरावट ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में शुक्रवार को 5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेष रूप से एनवीडिया, माइक्रोन टेक्नोलॉजी और मार्वल टेक्नोलॉजी जैसी एआई थीम वाले शेयरों में लगभग 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस प्रवृत्ति से भारतीय निवेशक भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि कई एआई और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर वैश्विक निवेश प्रवाह से जुड़े हैं। भारत में निवेशकों की निगाह 12 जून को जारी होने वाले खुदरा महंगाई आंकड़ों पर भी रहेगी। महंगाई के आंकड़े समग्र आर्थिक स्थिति और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर असर डालते हैं। यदि महंगाई दर उम्मीद से अधिक होती है, तो इससे ब्याज दरों में संभावित बदलाव और निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है। बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार नुकसान के साथ बंद हुआ। निफ्टी 181.05 अंक या 0.77 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,366.70 पर रहा। सेंसेक्स 532.40 अंक या 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। हालांकि, कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में तेजी रही। निफ्टी मीडिया 6.69 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.49 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। क्रमशः 1.30 से 2.19 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। यह संकेत है कि निवेशकों ने जोखिम वाले और साइकिलिक सेक्टरों से परहेज किया और सुरक्षित या अधिक स्थिर क्षेत्रों की ओर रुख किया। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एआई शेयरों की चाल और महंगाई के आंकड़े मिलकर निवेशकों की रणनीति और बाजार की उतार-चढ़ाव की सीमा तय करेंगे। इस अवधि में निवेशक सतर्क रहकर बाजार की हर छोटी-सी प्रतिक्रिया का अध्ययन करेंगे। कुल मिलाकर, अगले सप्ताह भारतीय इक्विटी बाजार में सतर्कता और रणनीति की आवश्यकता होगी। निवेशक वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों के आधार पर अपने निवेश निर्णय लेंगे। सुरक्षित सेक्टरों और स्थिर प्रदर्शन वाले शेयरों में निवेश को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि जोखिम वाले क्षेत्र अस्थिर रह सकते हैं।

रिकॉर्ड भाव पर पहुंचा सोना, फिर भी नहीं टूटा ग्राहकों का भरोसा; हल्के गहनों की बढ़ी मांग

नई दिल्ली । शादी-ब्याह के सीजन की शुरुआत होने वाली है, लेकिन इस बार सराफा बाजार में उत्साह के साथ-साथ चिंता भी दिखाई दे रही है। सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं, जिससे आम ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद जरूरत और परंपरा के कारण लोग सोने की खरीदारी से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर सराफा कारोबारी कारोबार में आई मंदी से परेशान नजर आ रहे हैं। भोपाल के सराफा बाजार में ग्राहकों का कहना है कि चाहे कीमतें कितनी भी बढ़ जाएं, शादी और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना मजबूरी बन जाता है। कई ग्राहकों ने कहा कि सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि सामाजिक परंपरा और भविष्य की सुरक्षा का भी माध्यम है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री या विशेषज्ञ निवेश के दूसरे विकल्पों की सलाह दे सकते हैं, लेकिन भारतीय परिवारों में शादी के अवसर पर सोना खरीदने की परंपरा आज भी मजबूत है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों को निवेश के लिए केवल सोने पर निर्भर नहीं रहने और अन्य वित्तीय विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी थी। हालांकि बाजार में इसका सीमित असर दिखाई दे रहा है। ग्राहक मानते हैं कि निवेश के लिए विकल्प हो सकते हैं, लेकिन शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में सोने का महत्व अभी भी कम नहीं हुआ है। दूसरी ओर सराफा व्यापारियों की स्थिति कुछ अलग है। कारोबारियों का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है। पहले जहां लोग भारी और पारंपरिक आभूषण खरीदते थे, वहीं अब हल्के वजन वाले डिजाइनर जेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। कई ग्राहक बजट को ध्यान में रखते हुए कम वजन के आभूषण चुन रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में कारोबार में लगभग 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की जा रही है। उनका कहना है कि शादी सीजन शुरू होने के बावजूद बाजार में अपेक्षित रौनक नहीं दिख रही है। ग्राहक दुकानों तक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन खरीदारी का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा हो गया है। एक और बड़ा बदलाव कैरेट के चयन में देखने को मिल रहा है। पहले जहां अधिकांश ग्राहक 18 कैरेट या उससे अधिक शुद्धता वाले आभूषण खरीदना पसंद करते थे, वहीं अब कम कीमत वाले विकल्पों की मांग बढ़ी है। कई ग्राहक 9 कैरेट और हल्के वजन के गहनों की ओर रुख कर रहे हैं ताकि बजट के भीतर खरीदारी की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही तो आने वाले समय में ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि भारतीय समाज में सोने का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व इतना गहरा है कि इसकी मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। फिलहाल भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों के सराफा बाजारों में यही तस्वीर दिखाई दे रही है। ग्राहक जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं, जबकि व्यापारी बेहतर कारोबार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। शादी सीजन के आगामी महीनों में बाजार की वास्तविक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

नई दिल्ली । जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में केंद्र सरकार की प्रायोजित योजनाओं का सकारात्मक असर अब साफ नजर आने लगा है। युवा बेरोजगार और किसान अब स्थिर आय के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन को एक आकर्षक विकल्प मान रहे हैं। तांडवाल-मुबारकपुरा क्षेत्र के निवासी एहतेशाम ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। इस उद्यम के माध्यम से अब उनकी मासिक आय लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक पहुंच गई है। एहतेशाम के फार्म ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। इस पहल से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ किस प्रकार जमीनी स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद कर सकती हैं। राजौरी के मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. खालिद ने बताया कि मुर्गी पालन जिले में आजीविका का एक संभावित और लाभदायक विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि लाभार्थियों को उद्यम स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हो। डॉ. खालिद के अनुसार, विशेष रूप से शिक्षित बेरोजगार युवा इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। ये युवा अपने घरों के पास स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं और पोल्ट्री फार्म उनके लिए स्थिर आय का स्रोत बन गया है। विभाग लगातार नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है और उन्हें व्यवसाय में स्थायित्व और सफलता दिलाने के लिए सभी संभव साधन प्रदान कर रहा है। एहतेशाम ने बताया कि उनके पिता को इस योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने इसका आवेदन किया। पशुपालन विभाग ने उन्हें मुर्गियों के बच्चों के साथ प्रशिक्षण और लोन उपलब्ध कराए। पहले परिवार के लिए जीवन बहुत कठिन था और घर चलाने के लिए अक्सर कर्ज लेना पड़ता था। अब फार्म शुरू होने के बाद एहतेशाम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनका मासिक आय स्तर 50,000 से 60,000 रुपये तक है और उन्होंने पांच स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है। यह स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक स्पष्ट उदाहरण है। राजौरी जिले में केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग की योजनाओं ने दिखा दिया है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के साथ छोटे स्तर के व्यवसाय भी लाभदायक और टिकाऊ बन सकते हैं। इस सफलता ने स्थानीय युवाओं और किसानों में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी जगाई है। यह कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाएँ केवल लाभार्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके माध्यम से व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी उत्पन्न होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और स्थानीय रोजगार सृजन करना इन योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य हैं। राजौरी के उदाहरण ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और विभागीय सहयोग के माध्यम से छोटे उद्यमी भी बड़े आर्थिक बदलाव ला सकते हैं। मुर्गी पालन का यह मॉडल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवाओं और बेरोजगारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आखिरी मौका: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आज अंतिम दिन

नई दिल्ली । कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए सीबीएसई द्वारा री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन का आवेदन आज अंतिम दिन है। जिन छात्रों को अपने परीक्षा परिणाम पर आपत्ति है, उनके पास अब केवल कुछ घंटे बचे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की समय सीमा आज रात 11 बजकर 59 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस बार पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल के माध्यम से छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जांच कराने का अवसर दिया है। पहले यह समय सीमा 6 जून तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं और उच्च मांग को देखते हुए इसे एक दिन बढ़ा दिया गया। छात्रों के लिए इस प्रक्रिया में सबसे पहले अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद छात्र सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं या किसी विशेष प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन और सत्यापन की यह व्यवस्था मूल्यांकन की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और छात्रों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस वर्ष बोर्ड ने कक्षा 12वीं के परिणाम तैयार करने में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली का उपयोग किया है। कई छात्रों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में धुंधली तस्वीरें या अंकन न दिखने जैसी समस्याओं की शिकायत की थी। यही कारण है कि इस प्रक्रिया के लिए आवेदन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अब तक 70 हजार से अधिक आवेदन दर्ज किए जा चुके हैं। छात्रों को सत्यापन के लिए निर्धारित शुल्क और पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न शुल्क जमा करना होता है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जारी अंक अंतिम और बाध्यकारी होंगे। इसके बाद किसी अन्य स्तर पर अपील की अनुमति नहीं होगी। इसलिए जिन छात्रों को अपने परिणाम पर संदेह है, उनके लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीबीएसई ने छात्रों से अपील की है कि वे समय रहते पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। रात 11:59 के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा और इसके बाद कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कदम छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता का भरोसा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। छात्रों के लिए यह अवसर उनकी मेहनत और प्रयासों की सही पहचान सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। बोर्ड की यह व्यवस्था छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे को बढ़ाने में सहायक साबित होगी। इसलिए कक्षा 12वीं के वे छात्र जिन्होंने अपने अंक या परिणाम पर आपत्ति दर्ज कराई है, उन्हें तुरंत री-इवैल्यूएशन और सत्यापन के लिए आवेदन करना चाहिए। समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

नई दिल्ली। बॉलीवुड के ‘धुरंधर’ और वर्सेटाइल अभिनेता रणवीर सिंह अपने बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ अपने सतरंगी, अनूठे और अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके इस जुदा अंदाज पर जहां लाखों फैंस फिदा रहते हैं, वहीं कई बार उन्हें सोशल मीडिया और इंडस्ट्री के भीतर भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। अब इस फेहरिस्त में नब्बे के दशक की मशहूर अभिनेत्री मधु का नाम भी जुड़ गया है। मधु ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया है कि वह भी एक वक्त पर रणवीर सिंह के पहनावे और उनके फैशन चॉइस पर जमकर हंसती थीं और उन्हें ट्रोल किया करती थीं। अभिनेत्री मधु ने अपने पुराने दिनों और विचारों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में रणवीर सिंह को पब्लिक अपीयरेंस और अवॉर्ड फंक्शन्स में लीक से हटकर कपड़े पहने हुए देखा था, तो उन्हें यह काफी अजीब लगा था। मधु के अनुसार, वह अक्सर रणवीर के लुक को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाती थीं और सोचती थीं कि कोई अभिनेता ऐसे अजीब कपड़े पहनकर बाहर कैसे आ सकता है। उन्होंने माना कि वह भी उन लोगों में शामिल थीं जो रणवीर सिंह के कपड़ों का मजाक उड़ाते थे और उनके स्टाइल स्टेटमेंट को समझ नहीं पाती थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ रणवीर सिंह के प्रति मधु की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। मधु ने कहा कि जैसे-जैसे उन्होंने रणवीर सिंह की फिल्मों को देखा और पर्दे पर उनके दमदार अभिनय को महसूस किया, वैसे-वैसे कपड़ों को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने महसूस किया कि रणवीर सिंह सिर्फ कपड़ों से नहीं, बल्कि अपनी असाधारण अभिनय क्षमता से इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ और ‘गली बॉय’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने मधु को प्रभावित किया। अपने इस बदले हुए नजरिए के बाद, अब अभिनेत्री मधु ने रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह रणवीर सिंह की अभिनय कला की बहुत बड़ी प्रशंसक बन चुकी हैं और भविष्य में यदि मौका मिले, तो वह उनके साथ एक फिल्म में काम करना पसंद करेंगी। मधु ने रणवीर सिंह को मौजूदा दौर का एक बेहद प्रभावशाली और ऊर्जावान कलाकार बताया, जो किसी भी किरदार में पूरी तरह जान फूंकने का दम रखता है। गौरतलब है कि रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें फरहान अख्तर के निर्देशन में बनने वाली ‘डॉन 3’ सबसे प्रमुख है। इसके अलावा वह इंडस्ट्री के कई बड़े प्रोजेक्ट्स का भी हिस्सा हैं। दूसरी तरफ, ‘रोजा’ और ‘जेंटलमैन’ जैसी कल्ट फिल्मों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मधु भी इन दिनों विभिन्न प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यूज के जरिए लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनका यह बयान यह साफ तौर पर दिखाता है कि कला और टैलेंट के आगे अंततः हर तरह की रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रह घुटने टेक देते हैं।