कांग्रेस और राहुल गांधी पर पोस्टरों के जरिए निशाना, इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले राजधानी में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

नई दिल्ली । विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी में सामने आई पोस्टर राजनीति ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। सोमवार को प्रस्तावित बैठक से पहले दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राजधानी के विभिन्न रणनीतिक और व्यस्त स्थानों पर लगाए गए इन पोस्टरों में इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के कई प्रमुख नेताओं के पुराने बयानों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इन बयानों के माध्यम से कांग्रेस की राजनीतिक विश्वसनीयता और विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी संबंधों पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया है। पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि महत्वपूर्ण बैठक से पहले इस तरह की गतिविधियों का क्या राजनीतिक संदेश है। दिल्ली के अशोका रोड गोलचक्कर, रेल भवन गोलचक्कर, ली मेरिडियन क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे पोस्टरों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों के नेताओं के कथित पुराने बयान उद्धृत किए गए हैं। इनमें कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली, गठबंधन राजनीति और विपक्षी दलों के बीच तालमेल को लेकर पूर्व में दिए गए विचारों का उल्लेख किया गया है। पोस्टरों का केंद्रीय संदेश यह दर्शाने का प्रयास करता है कि विपक्षी दलों के बीच विचारों की समानता और राजनीतिक विश्वास को लेकर चुनौतियां मौजूद हैं। पोस्टरों में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली की राजनीति से जुड़े प्रमुख नेताओं के बयानों को शामिल किया गया है। इन उद्धरणों के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अलग-अलग समय पर गठबंधन के सहयोगी दलों ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे पोस्टरों का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना हो सकता है। इंडिया ब्लॉक की बैठक ऐसे समय हो रही है जब विपक्ष आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने की तैयारी में है। इस बैठक को विपक्षी एकता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विभिन्न दल राष्ट्रीय स्तर पर साझा मुद्दों और समन्वय को लेकर चर्चा करने वाले हैं। ऐसे समय में राजधानी में लगे पोस्टरों ने राजनीतिक चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन पोस्टरों को किस संगठन, समूह या राजनीतिक इकाई द्वारा लगाया गया है। पोस्टरों पर किसी जिम्मेदार व्यक्ति या संगठन का स्पष्ट उल्लेख सामने नहीं आया है। इसके कारण राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी पक्ष ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस की ओर से भी सतर्क प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पार्टी नेताओं ने पोस्टरों को लेकर तत्काल कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है। उनका कहना है कि पहले पूरे मामले की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है, जिसके बाद ही कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल अपनी एकजुटता और साझा रणनीति का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पोस्टर विवाद ने यह संकेत दिया है कि गठबंधन राजनीति में पुराने मतभेद और राजनीतिक बयान आज भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। अब सभी की नजरें इंडिया ब्लॉक की बैठक और उससे निकलने वाले राजनीतिक संदेश पर टिकी हुई हैं।
भारत के लिए यूरोप और अफ्रीका का नया आर्थिक गलियारा बन सकता है मोरक्को, निवेश और व्यापार को लेकर दिया बड़ा प्रस्ताव

नई दिल्ली । भारत और मोरक्को के बीच आर्थिक तथा औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने की संभावनाएं तेजी से उभर रही हैं। उत्तर अफ्रीका में स्थित मोरक्को ने भारतीय व्यवसायों और निवेशकों को अपने यहां अवसरों का लाभ उठाने का आमंत्रण दिया है। मोरक्को का मानना है कि उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति भारत के लिए यूरोप और अफ्रीका दोनों महाद्वीपों के विशाल बाजारों तक पहुंच का प्रभावी माध्यम बन सकती है। मोरक्को वर्तमान समय में अफ्रीका की अग्रणी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। हाल के वर्षों में देश ने विनिर्माण, निर्यात, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसी आधार पर मोरक्को भारतीय कंपनियों को अपने औद्योगिक प्लेटफॉर्म का उपयोग कर वैश्विक विस्तार का अवसर देने की बात कर रहा है। मोरक्को के अनुसार भारत और उसकी अर्थव्यवस्था के बीच कई समानताएं मौजूद हैं, जो दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत बनाती हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, ग्रीन टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की व्यापक संभावनाएं देखी जा रही हैं। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी से नए निवेश और रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। भारत के लिए मोरक्को का महत्व केवल औद्योगिक सहयोग तक सीमित नहीं है। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी यह देश एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। मोरक्को के पास दुनिया के सबसे बड़े फॉस्फेट भंडार मौजूद हैं और वह भारत के लिए फॉस्फेट का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। कृषि उत्पादन और उर्वरक उद्योग में फॉस्फेट की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ती अनिश्चितताओं और विभिन्न देशों द्वारा निर्यात प्रतिबंधों के बीच मोरक्को का प्रस्ताव भारत के लिए एक वैकल्पिक और भरोसेमंद व्यापारिक मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विविध आपूर्ति स्रोत विकसित करने की भारत की नीति में मोरक्को महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मोरक्को की एक और बड़ी ताकत उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते हैं। देश के यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। इसके अलावा वह अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र का भी प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में भारतीय कंपनियों को मोरक्को के माध्यम से कई बड़े बाजारों तक प्रतिस्पर्धी पहुंच मिल सकती है। मोरक्को का टैंजियर मेड बंदरगाह इस रणनीति का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह आधुनिक बंदरगाह दुनिया के अनेक प्रमुख समुद्री मार्गों से जुड़ा हुआ है। इसकी सहायता से यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न बाजारों तक कम समय में माल पहुंचाया जा सकता है। यही कारण है कि इसे वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और मोरक्को के बीच बढ़ता सहयोग केवल व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक विकास, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रणनीतिक साझेदारी को भी नई गति दे सकता है। बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध भविष्य में व्यापक लाभ देने की क्षमता रखते हैं।
PVC कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद पाइप कंपनियों के अच्छे दिन लौटने के संकेत, बड़ी कंपनियों को मिल सकता है सबसे ज्यादा फायदा

नई दिल्ली । पिछले कुछ वर्षों से कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता, कमजोर मांग और परियोजनाओं में सुस्ती जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा प्लास्टिक पाइप उद्योग अब धीरे-धीरे सुधार की राह पर लौटता दिखाई दे रहा है। उद्योग से जुड़े संकेतकों और कंपनियों के हालिया प्रदर्शन ने यह उम्मीद जगाई है कि वित्त वर्ष 2027 इस क्षेत्र के लिए बेहतर अवसर लेकर आ सकता है। विशेष रूप से संगठित और बड़ी कंपनियों के लिए विकास की संभावनाएं अधिक मजबूत मानी जा रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में पाइप सेक्टर ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। पीवीसी की कीमतों में आई तेजी के कारण बाजार में खरीदारी बढ़ी और डीलरों ने भविष्य में संभावित मूल्य वृद्धि को देखते हुए पहले से स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया। इसका सीधा लाभ पाइप निर्माताओं को मिला और उनकी बिक्री तथा मुनाफे में सुधार देखने को मिला। हालांकि आने वाले वित्त वर्ष की शुरुआत पूरी तरह आसान नहीं मानी जा रही है। पीवीसी की कीमतों में बाद में आई तेज गिरावट से कुछ कंपनियों को शुरुआती दबाव का सामना करना पड़ सकता है। जिन कंपनियों ने ऊंची कीमतों पर कच्चा माल खरीदा था, उन्हें मूल्य समायोजन के कारण अल्पकालिक चुनौतियां झेलनी पड़ सकती हैं। इसके बावजूद बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक नजर आ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि उद्योग में अब धीरे-धीरे संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। छोटी कंपनियां लगातार बदलती लागत और पूंजी संबंधी चुनौतियों से जूझ रही हैं, जबकि बड़ी कंपनियों के पास मजबूत ब्रांड, व्यापक वितरण नेटवर्क और वित्तीय मजबूती मौजूद है। यही कारण है कि ग्राहक और डीलर दोनों बड़े ब्रांडों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। उद्योग में एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ग्राहक केवल कम कीमत वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं रह रहे, बल्कि बेहतर गुणवत्ता और विशेष उपयोग वाले पाइपों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। सीपीवीसी पाइप, गैस पाइपिंग सिस्टम और औद्योगिक उपयोग के लिए बनाए जाने वाले विशेष उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे कंपनियों को बेहतर मार्जिन और अधिक लाभ कमाने का अवसर मिल रहा है। सरकारी स्तर पर चल रही कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं भी इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं। जल आपूर्ति नेटवर्क, गैस वितरण व्यवस्था, सीवेज सिस्टम और शहरी आधारभूत ढांचे के विकास से पाइप उद्योग को निरंतर मांग मिलने की संभावना है। इसके अलावा आवास निर्माण और भवन मरम्मत गतिविधियों में बढ़ोतरी भी इस क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में प्रमुख संगठित कंपनियां दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज कर सकती हैं। आवास, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रीमियम उत्पादों की मांग इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा सकती है। यही वजह है कि निवेशकों की रुचि एक बार फिर पाइप उद्योग की प्रमुख कंपनियों की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। बाजार विश्लेषकों ने विशेष रूप से एस्ट्रल, सुप्रीम इंडस्ट्रीज और प्रिंस पाइप्स जैसी कंपनियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। इन कंपनियों की मजबूत बाजार उपस्थिति, विविध उत्पाद पोर्टफोलियो और वितरण नेटवर्क को भविष्य की वृद्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग में सुधार का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान कर सकता है। कुल मिलाकर, कई चुनौतियों से गुजरने के बाद पाइप उद्योग में स्थिरता और विकास के संकेत उभर रहे हैं। बाजार की बदलती परिस्थितियों और बढ़ती मांग के बीच बड़ी कंपनियां इस संभावित उछाल का सबसे अधिक लाभ उठाने की स्थिति में दिखाई दे रही हैं।
शाजापुर में अगले 3 घंटे में आंधी-बारिश के आसार, उमस से लोग परेशान; 12 जून के बाद फिर बदलेगा मौसम

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों से शाम के समय हो रही हल्की बारिश के बाद अब दिन के समय तेज गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान कर दिया है। सोमवार सुबह से ही तेज धूप और नमी के कारण वातावरण भारी महसूस हुआ, जिससे आमजन को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। मौसम में हल्की गिरावट के बावजूद गर्मी का असर लगातार बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। साथ ही करीब 52 प्रतिशत आर्द्रता के कारण उमस का प्रभाव और बढ़ गया है। पश्चिमी-उत्तर पश्चिमी दिशा से लगभग 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन घंटों के भीतर शाजापुर में आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार से प्री-मानसून गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है, जिससे बारिश की तीव्रता घट सकती है। हालांकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है। वहीं, अनुमान लगाया गया है कि 12 जून के बाद जिले में मौसम एक बार फिर सक्रिय होगा और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव की संभावना है।
मंदसौर के फतेहगढ़ में फोरलेन पर स्क्रैप लदा वाहन पलटा, बड़ा हादसा टला

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में सोमवार को एक सड़क हादसा उस समय हो गया जब स्क्रैप से भरा एक लोडिंग वाहन अचानक नियंत्रण खो बैठा और पलट गया। यह घटना फतेहगढ़ क्षेत्र में महू–नीमच फोरलेन हाईवे पर हुई। जानकारी के अनुसार, वाहन क्रमांक MP13 GA 3596 दलौदा से स्क्रैप सामग्री लेकर फतेहगढ़ स्थित टीएमटी फैक्ट्री की ओर जा रहा था। रास्ते में अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया, जिसके बाद लोडिंग वाहन सड़क पर पलट गया। वाहन में भारी मात्रा में स्क्रैप भरा होने के कारण पलटने के बाद सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई और यातायात प्रभावित हुआ। हादसे के समय चालक कालू वाहन में ही मौजूद था, जिसे इस दुर्घटना में मामूली चोटें आई हैं। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उसकी मदद की। राहत की बात यह रही कि चालक गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ और उसकी जान बच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का निरीक्षण किया। इसके बाद क्रेन की मदद से पलटे हुए वाहन को हटाया गया और सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर खड़ा कराया गया, जिससे हाईवे पर यातायात सामान्य हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के समय आसपास कोई अन्य वाहन मौजूद नहीं था, वरना स्थिति और गंभीर हो सकती थी। गनीमत रही कि इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि वाहन वसीम नामक व्यक्ति का है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और प्रारंभिक तौर पर चालक का नियंत्रण खोना ही हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच जारी है।
उज्जैन में मलेरिया निरोधक माह की शुरुआत, जागरूकता रैली और रथ को सीएमएचओ ने दिखाई हरी झंडी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के उज्जैन में मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ जागरूकता अभियान की शुरुआत हो गई है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सोमवार को मलेरिया निरोधक माह का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) उज्जैन ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली सीएमएचओ कार्यालय और चरक अस्पताल परिसर से शुरू होकर चामुंडा माता चौराहे तक निकाली गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे। रैली के साथ ही एक विशेष जागरूकता रथ भी रवाना किया गया, जो जिले के विभिन्न विकासखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव के उपाय बताएगा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों की मदद से पंपलेट वितरण भी किया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण बनता है। साथ ही मच्छरदानी के उपयोग, साफ-सफाई और बुखार होने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उज्जैन शहर में पिछले पांच महीनों में मलेरिया का कोई भी नया मरीज सामने नहीं आया है, जो राहत की बात है। हालांकि विभाग ने सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया है। डॉ. प्रशांत तिवारी ने जानकारी दी कि जागरूकता रथ पूरे जिले की सभी तहसीलों में पहुंचेगा और लोगों को लगातार जागरूक करेगा। इसके साथ ही फीवर सर्विलेंस अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत बुखार के मरीजों की जांच कर तुरंत इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान पूरे महीने चलेगा, जबकि मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों को लेकर जागरूकता गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहेंगी।
रीवा को मिली तैराकी की बड़ी सुविधा, मिहिर सेन तरणताल फिर से शुरू; महिलाओं के लिए अलग समय तय

मध्य प्रदेश । रीवा शहर के लोगों के लिए राहत और खुशी की खबर है। वर्षों से बंद पड़े पुराने मिहिर सेन तरणताल को अब फिर से शुरू कर दिया गया है। नगर निगम ने 8 जून से इसे आम नागरिकों के लिए खोल दिया है, जिससे शहरवासियों को तैराकी की सुविधा दोबारा मिल सकेगी। यह तरणताल करीब तीन दशक पुराना है, जिसका हाल ही में व्यापक जीर्णोद्धार किया गया है। इसके बाद अब इसे आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों के साथ फिर से शुरू किया गया है। मिहिर सेन तरणताल के संचालन के लिए नगर निगम ने दो तरह की व्यवस्था लागू की है। नियमित तैराकी करने वालों के लिए 2500 रुपये प्रतिमाह सदस्यता शुल्क तय किया गया है, जबकि कभी-कभार आने वाले लोग 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से इसका उपयोग कर सकते हैं। तैराकी के लिए दिनभर को तीन सत्रों में बांटा गया है। सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सभी नागरिकों के लिए पूल खुला रहेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से 6 बजे तक का समय विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है, ताकि वे सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में तैराकी कर सकें। शाम 6 बजे से 8 बजे तक फिर से सभी लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई है। नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए हर सत्र में प्रशिक्षित लाइफगार्ड और कोच की तैनाती की है। साथ ही एक समय में अधिकतम 30 लोगों को ही पूल में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि भीड़ और दुर्घटनाओं से बचा जा सके। बच्चों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जबकि 5 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अभिभावक के साथ ही पूल में आने की अनुमति होगी। तरणताल में प्रवेश के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक की लिखित अनुमति भी जरूरी होगी। सुरक्षा कारणों से फिलहाल डाइविंग पूल को बंद रखा गया है और केवल मुख्य स्विमिंग पूल ही चालू किया गया है। नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पूल में प्रवेश नहीं मिलेगा। नगर निगम के अनुसार तरणताल के संचालन के लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन जनता की मांग को देखते हुए फिलहाल इसका संचालन नगर निगम स्वयं कर रहा है।
Wipro में 6% से ज्यादा गिरावट, रिकॉर्ड डेट गुजरते ही बढ़ी बिकवाली; अब निवेशकों की नजर अगले बड़े कदम पर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला, जिसमें विप्रो के शेयर सबसे अधिक चर्चा में रहे। कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार के दौरान छह प्रतिशत से अधिक टूट गया और अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल सेक्टर से जुड़ी चुनौतियां ही नहीं, बल्कि हाल ही में समाप्त हुई बायबैक रिकॉर्ड डेट भी एक महत्वपूर्ण कारण है। विप्रो ने कुछ समय पहले 15,000 करोड़ रुपये के बड़े बायबैक कार्यक्रम की घोषणा की थी। कंपनी ने 250 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर वापस खरीदने की योजना बनाई है, जो मौजूदा बाजार मूल्य से काफी अधिक है। इसी कारण रिकॉर्ड डेट से पहले निवेशकों में उत्साह देखा गया था। हालांकि रिकॉर्ड डेट गुजरने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना, जिससे शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। विश्लेषकों के अनुसार बायबैक से जुड़े शेयरों में अक्सर ऐसा रुझान देखने को मिलता है। रिकॉर्ड डेट तक पात्रता सुनिश्चित करने के लिए निवेशक शेयर खरीदते हैं, जबकि रिकॉर्ड डेट निकलने के बाद कुछ निवेशक अपने निवेश से बाहर निकलने लगते हैं। विप्रो के शेयर में भी इसी प्रकार की तकनीकी कमजोरी देखने को मिली है। हालांकि कंपनी के शेयर पर दबाव का कारण केवल बायबैक नहीं है। वैश्विक आईटी उद्योग इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिकी बाजारों में हालिया गिरावट और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने भारतीय आईटी कंपनियों पर भी असर डाला है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से आता है, इसलिए वहां के आर्थिक संकेतकों और निवेश माहौल का सीधा प्रभाव इन कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। बाजार में चिंता का एक बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है। इसका असर वैश्विक निवेश प्रवाह और तकनीकी कंपनियों के मूल्यांकन पर पड़ रहा है। इसी बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव भी आईटी उद्योग के लिए नई चुनौती और अवसर दोनों बनकर उभरा है। दुनिया भर की कंपनियां अब पारंपरिक आईटी सेवाओं के साथ-साथ एआई आधारित समाधानों पर तेजी से निवेश कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों की अपेक्षा है कि बड़ी आईटी कंपनियां बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप अपने कारोबार मॉडल को तेजी से विकसित करें। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में केवल पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को नई तकनीकों, ऑटोमेशन और एआई आधारित सेवाओं के जरिए राजस्व वृद्धि के नए स्रोत तैयार करने होंगे। इसी वजह से निवेशक उन कंपनियों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं जो तकनीकी बदलावों को तेजी से अपनाने में सक्षम दिखाई दे रही हैं। विप्रो के लिए फिलहाल स्थिति मिश्रित बनी हुई है। एक ओर बायबैक का आकर्षण निवेशकों की रुचि बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर आईटी सेक्टर की सुस्त वृद्धि और वैश्विक अनिश्चितताएं शेयर पर दबाव बना रही हैं। बाजार की नजर अब कंपनी की आगामी रणनीति, बायबैक प्रक्रिया के अगले चरण और एआई आधारित विकास योजनाओं पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन निवेशकों के लिए कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और तकनीकी बदलावों के प्रति उसकी तैयारी सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित होगी। इसी आधार पर भविष्य में शेयर की दिशा तय होने की संभावना है।
रीवा में शराब के लिए पैसे न देने पर बर्बर हमला, जेसीबी संचालक का पैर टूटा, लूटपाट भी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। मनगवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत मनिकवार नंबर-2 इलाके में शराब के लिए पैसे न देने पर कुछ बदमाशों ने दिनदहाड़े हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार, रविवार रात कुछ युवक इलाके में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। जब लोगों ने पैसे देने से इनकार किया, तो विवाद अचानक हिंसक हो गया और आरोपियों ने लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से हमला कर दिया। इस दौरान बदमाशों ने न सिर्फ लोगों को बेरहमी से पीटा, बल्कि वहां खड़ी जेसीबी मशीन और बोलेरो वाहन को भी निशाना बनाया। दोनों वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और मौके पर जमकर उत्पात मचाया गया। हमले में पवन पटेल, पुनीत पटेल और अंकित पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें से जेसीबी संचालक की हालत ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जिसका पैर टूट गया है। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि हमलावर करीब 70 से 80 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन भी लूटकर फरार हो गए। उनका कहना है कि यह हमला पहले पैसों की मांग से शुरू हुआ और बाद में लूटपाट व मारपीट में बदल गया। घटना की सूचना मिलते ही मनगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि इलाके में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक जल परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा जल पहुंचाने की 17 साल पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अब लगभग पूरी होने वाली है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब 98 प्रतिशत तक तैयार हो चुकी है, और केवल 108 मीटर की खुदाई बाकी रह गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद बरगी बांध से पानी पहली बार सीधे रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों तक पहुंचेगा, जिससे करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कटनी जिले को पीने के पानी की बड़ी राहत भी मिलेगी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पिछले 17 वर्षों से कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों से जूझती रही है। कभी खुदाई के दौरान चट्टानी परतें और बड़े बोल्डर सामने आए, तो कभी मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। कई बार मीथेन गैस के रिसाव और भूजल के तेज प्रवाह ने काम को रोक दिया। परियोजना के दौरान करोड़ों रुपये के टनल कटर भी बदलने पड़े, और करीब 100 करोड़ रुपये की अमेरिकी मशीन भी इस कठिन भूगर्भीय स्थिति में सफल नहीं हो सकी। कुल मिलाकर यह परियोजना भारत की सबसे जटिल जल सुरंग परियोजनाओं में गिनी जा रही है। फिलहाल अंतिम चरण में एक जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) लगातार 100 मीटर से ज्यादा हिस्से की खुदाई कर रही है। यह मशीन सुरंग को अंतिम आकार देने का काम भी कर रही है। अत्यधिक तापमान और नमी के कारण यहां काम करने वाले तकनीशियन केवल सीमित समय तक ही कार्य कर पा रहे हैं, और उनकी लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है। सुरंग के भीतर काम की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। अंदर करीब तीन फीट पानी के बीच लोको ट्रेन केवल 3–4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पाती है। हर दिन हजारों लीटर भूजल को निकालने के लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन लगातार काम कर रहे हैं। टनल का व्यास 10.14 मीटर है, जो किसी तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। सुरक्षा के लिए M-50 ग्रेड सीमेंट से बने भारी कंक्रीट रिंग्स का उपयोग किया गया है, जिनका वजन लगभग 1420 किलो है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 30 जून 2026 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद विंध्य क्षेत्र में कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।