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पत्नी के प्रति वफादारी पर बोले आर माधवन, दिया मजेदार और ईमानदार जवाब

नई दिल्ली। अभिनेता आर. माधवन ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक दिलचस्प और बेहद साफगोई भरा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि पत्नी सरिता के साथ उनकी 27 साल लंबी शादी की मजबूत नींव भरोसे, ईमानदारी और आपसी समझ पर टिकी है। माधवन ने कहा कि उनके लिए लॉयल्टी कोई रणनीति नहीं, बल्कि परिवार से मिली हुई एक सीख है। उनके अनुसार, “मुझे लगता है लॉयल रहना हमारे परिवार की परंपरा में है। मेरा पूरा खानदान हमेशा अपनी जिम्मेदारियों के प्रति वफादार रहा है।” ‘डरपोक मद्रासी मिडल क्लास हूं’ -खुद को लेकर खुलकर बोले माधवनअपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आर. माधवन ने हल्के-फुल्के अंदाज में खुद को “डरपोक मद्रासी मिडल क्लास आदमी” बताया। उन्होंने कहा कि वह भले ही आकर्षण महसूस करते हों, लेकिन अंत में उनके लिए परिवार और पत्नी ही सबसे अहम हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनकी पत्नी सरिता उनकी जिंदगी के कई अहम पहलुओं को संभालती हैं, यहां तक कि फाइनेंस और अकाउंट्स तक का जिम्मा भी उनके पास है। मणिरत्नम की सीख और रिश्तों की समझमाधवन ने फिल्मकार मणिरत्नम से मिली एक सलाह का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मणिरत्नम ने उन्हें कहा था कि जब रिश्ता अच्छा चल रहा हो, तो उसे बार-बार “टेस्ट” नहीं करना चाहिए। माधवन के मुताबिक, “कभी-कभी रिश्तों को परखने की कोशिश ही उन्हें खराब कर देती है। बेहतर है कि चीजों को स्वाभाविक रूप से चलने दिया जाए। शादी के वक्त भी रखा सच का रास्ताअभिनेता ने यह भी बताया कि जब उन्होंने सरिता से शादी की थी, तब वह अपने करियर के शुरुआती और सफल दौर में थे। उस समय उन्हें सलाह दी गई थी कि शादी को छिपाकर रखें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि रिश्तों में पारदर्शिता ही असली ताकत होती है। इसलिए उन्होंने कभी भी अपनी शादी को छिपाने की कोशिश नहीं की। प्रोफेशनल लाइफ में भी लगातार सक्रियवर्क फ्रंट की बात करें तो आर. माधवन हाल ही में अपनी फिल्मों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी परफॉर्मेंस को लगातार सराहा जाता रहा है। आने वाले समय में वह कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं, जिनमें मल्टीस्टार कास्ट भी शामिल है।

सलमान के देर रात पोस्ट ने मचाया हलचल, वरुण धवन ने दिया मजेदार जवाब

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के पीछे की सच्चाई पर बात की। उन्होंने कहा कि बाहर से एक्टर्स की जिंदगी जितनी ग्लैमरस दिखती है, अंदर से उतनी ही अकेली और दबाव से भरी होती है। वरुण के मुताबिक, “अक्सर 90 प्रतिशत एक्टर्स अकेलेपन का सामना करते हैं। स्टारडम का प्रेशर इतना होता है कि लोग मानसिक रूप से भी संघर्ष करते हैं, लेकिन यह सब बाहर नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें करियर की शुरुआत में ही इस हकीकत का एहसास हो गया था, इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वह ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन एक जैसी ही पर्सनैलिटी रखेंगे। ‘मैं वही हूं जो मैं हूं’ -वरुण की सोचवरुण धवन ने कहा कि उन्होंने कभी भी अलग-अलग पर्सनैलिटी बनाने की कोशिश नहीं की। उनके अनुसार, यह दिखावा मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। उन्होंने कहा, “मैं वही हूं जो मैं यहां और वहां हूं। अगर आप अलग-अलग चेहरे बनाएंगे तो एक समय के बाद वह बबल फट जाता है और आप खुद को खो देते हैं।” वरुण ने यह भी माना कि सोशल मीडिया के दौर में लोग अब बहुत सोच-समझकर बोलते हैं, लेकिन वह खुद पहले की तरह बेझिझक बात करना पसंद करते हैं। सलमान खान के वायरल पोस्ट पर प्रतिक्रियाइंटरव्यू के दौरान वरुण धवन से सलमान खान के हाल ही में वायरल हुए देर रात के इंस्टाग्राम पोस्ट के बारे में भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि,“जब मैंने सलमान भाई के रात वाले पोस्ट देखे, तो वह अलग ही जोन में चले गए थे। उनका इशारा इस बात की ओर था कि कभी-कभी बड़े सितारे भी अपने निजी मूड या भावनात्मक स्थिति में सोशल मीडिया पर अलग तरह से प्रतिक्रिया दे देते हैं। सोशल मीडिया और सीमाओं की बातवरुण ने यह भी कहा कि आज के समय में हर चीज सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैलती है। ऐसे में कलाकारों को हर कदम सोचकर उठाना पड़ता है, क्योंकि एक छोटी सी बात भी बड़े विवाद में बदल सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे लोग आपको पसंद करें या आलोचना करें, सबसे जरूरी है कि इंसान अपनी असल पहचान बनाए रखे। फिल्मी करियर की बातवर्क फ्रंट की बात करें तो वरुण धवन की हालिया फिल्म “है जवानी तो इश्क होना है” रिलीज हो चुकी है, जिसमें उनके साथ पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है।

विक्रम भट्ट ने रिलेशनशिप और करियर पर की खुलकर बात, कहा- दोनों साथ नहीं चले

नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर और हॉरर फिल्मों के लिए जाने जाने वाले विक्रम भट्ट एक बार फिर अपने निजी जीवन को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने पुराने रिश्तों, खासकर सुष्मिता सेन और अमीषा पटेल के साथ डेटिंग को लेकर खुलकर बातचीत की। विक्रम भट्ट ने बताया कि उनके जीवन का एक दौर ऐसा भी था जब पेशेवर सफलता और निजी जीवन दोनों ही एक साथ उलझे हुए थे। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों ने तो सफलता हासिल की, लेकिन उनकी रिलेशनशिप्स लंबे समय तक नहीं टिक सकीं। इसी बात को मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा, “मेरी फिल्में तो चलीं, लेकिन रिलेशनशिप नहीं।” विक्रम भट्ट और सुष्मिता सेन की मुलाकात 1996 में फिल्म ‘दस्तक’ के सेट पर हुई थी। उस समय विक्रम, महेश भट्ट को असिस्ट कर रहे थे और सुष्मिता अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं। वहीं से दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और डेटिंग शुरू हुई, लेकिन कुछ समय बाद यह रिश्ता खत्म हो गया। इसी तरह विक्रम भट्ट का नाम एक्ट्रेस अमीषा पटेल के साथ भी जुड़ा। दोनों ने साल 2002 से 2007 के बीच एक-दूसरे को डेट किया। हालांकि यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका। इंटरव्यू के दौरान विक्रम भट्ट ने अपने संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थे। उनके पास साधारण जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं होते थे। उन्होंने कहा, “मैं स्ट्रगलिंग डायरेक्टर था, कई बार हालात ऐसे थे कि मेरे पास सीडी खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे।” उन्होंने यह भी कहा कि जब लोग उन्हें सफल समझ रहे थे, तब भी उनकी जिंदगी आसान नहीं थी। उन्होंने कहा कि उसी दौर में वह सुष्मिता सेन जैसी बड़ी हस्ती को डेट कर रहे थे, लेकिन अंदर से वह संघर्ष कर रहे थे। विक्रम ने आगे कहा कि उनके जीवन में जो भी लोग आए, उन्होंने कुछ न कुछ अच्छा ही दिया। उनके मुताबिक, हर रिश्ता एक सीख लेकर आया। चाहे वह प्यार हो, समय हो या जीवन का अनुभव—हर किसी ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है। उन्होंने अपने पुराने रिश्तों को लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई, बल्कि उन्हें सकारात्मक अनुभव बताया। विक्रम भट्ट ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें केवल प्यार और सीख ही नजर आती है। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि असली जीत फिल्मों और मेहनत की होती है, क्योंकि वही समय के साथ लोगों को याद रहती है, जबकि निजी जीवन की कहानियां धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं।

OTT पर धमाका: 8 से 14 जून के बीच 12 फिल्में और सीरीज होंगी रिलीज, नेटफ्लिक्स पर आएंगी 9 टाइटल्स

नई दिल्ली। जून का दूसरा हफ्ता ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन का बड़ा पैकेज लेकर आ रहा है। 8 जून से 14 जून 2026 के बीच अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कुल 12 फिल्में, वेब सीरीज और एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने जा रही हैं। खास बात यह है कि इनमें से 9 टाइटल्स अकेले नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होंगे, जिससे प्लेटफॉर्म पर इस हफ्ते जबरदस्त कंटेंट की भरमार देखने को मिलेगी। इस हफ्ते की शुरुआत बच्चों के लिए लोकप्रिय शैक्षिक कार्यक्रम ‘सेसमे स्ट्रीट’ के नए सीजन से होगी, जो 8 जून को रिलीज होगा। इसके बाद 9 जून को नेटफ्लिक्स पर स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री ‘नॉर्वे: द डार्क हॉर्स’ दर्शकों को फुटबॉल की एक इमोशनल कहानी से जोड़ती नजर आएगी। 10 जून को ओटीटी पर कई बड़े टाइटल रिलीज होंगे। प्राइम वीडियो पर रोमांटिक फिल्म ‘एवरी इयर आफ्टर’ प्रेम और रिश्तों की उलझनों को दिखाएगी। इसी दिन नेटफ्लिक्स पर क्राइम थ्रिलर ‘कलर्स ऑफ इविल: ब्लैक’ और सर्वाइवल रियलिटी शो ‘आउटलास्ट: द जंगल’ भी रिलीज होंगे। फैमिली ड्रामा ‘माई फैमिली’ भी इसी दिन दर्शकों के सामने आएगा, जो परिवार और रिश्तों की भावनात्मक कहानी पेश करेगा। 11 जून को नेटफ्लिक्स पर लीगल क्राइम थ्रिलर ‘द एविल लॉयर’, फील-गुड सीरीज ‘स्वीट मैगनोलियास’ का नया सीजन और जापानी एक्शन सीरीज ‘वायरल हिट’ रिलीज होगी। यह दिन खास तौर पर थ्रिलर और ड्रामा पसंद करने वालों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। 12 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर और भी विविध कंटेंट देखने को मिलेगा। हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ (नेटफ्लिक्स) दर्शकों को मनोरंजन और डर का मिश्रण देगी, जबकि प्राइम वीडियो पर क्राइम थ्रिलर ‘राख’ 1978 के चर्चित रंगा-बिल्ला केस से प्रेरित कहानी दिखाएगी। वहीं जियो हॉटस्टार पर मलयालम फिल्म ‘ड्रिडम’ एक पुलिस अफसर की जांच पर आधारित थ्रिलर कहानी लेकर आएगी। इन रिलीज़ का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि हर जॉनर के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ मौजूद है—क्राइम थ्रिलर से लेकर फैमिली ड्रामा, रोमांस, हॉरर और रियलिटी शो तक। नेटफ्लिक्स इस हफ्ते सबसे ज्यादा 9 टाइटल्स के साथ कंटेंट की दौड़ में आगे नजर आ रहा है, जबकि प्राइम वीडियो और जियो हॉटस्टार भी मजबूत लाइनअप के साथ दर्शकों को आकर्षित करने की तैयारी में हैं। ओटीटी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह हफ्ता दर्शकों के लिए खास साबित होने वाला है। जहां एक तरफ बड़े बजट की सीरीज और फिल्में रिलीज हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विविध विषयों पर आधारित कंटेंट दर्शकों को लगातार बांधे रखने का वादा कर रहा है।

11 जून को व्रत-पूजा से मिल सकता है विशेष लाभ, ज्योतिषीय दृष्टि से अहम दिन

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, लेकिन 11 जून 2026 का दिन और भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस दिन परमा एकादशी का दुर्लभ योग बन रहा है। यह एकादशी अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में पड़ रही है, जो तीन साल में एक बार आता है। यही कारण है कि इस दिन का महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी को मोक्षदायिनी तिथि माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से 100 यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में धन, समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है। यही नहीं, यह व्रत पापों के नाश और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खोलता है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून 2026 को सुबह 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर परमा एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को ही रखा जाएगा। इसके अगले दिन 12 जून को व्रत का पारण किया जाएगा, जिसका शुभ समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक बताया गया है। परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। पूजा के दौरान पीले वस्त्रों का उपयोग शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त पीले कपड़े पर चांदी का सिक्का और हल्दी की गांठ रखकर पूजा करते हैं और उसे बाद में तिजोरी या धन स्थान पर रख देते हैं। मान्यता है कि इससे घर में धन और समृद्धि बढ़ती है। इसके अलावा इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का चौमुखी दीपक जलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। दीपक में हल्दी या कुमकुम मिलाना शुभ माना जाता है। भक्त तुलसी की परिक्रमा करते हुए मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि परिक्रमा के दौरान तुलसी पौधे को स्पर्श नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भी कहा गया है कि यदि इस दिन व्रत और पूजा का अवसर चूक गया, तो ऐसा दुर्लभ योग लंबे समय तक फिर नहीं मिलता। यही कारण है कि श्रद्धालु इस तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। परमा एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आस्था, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। यह दिन भक्तों को भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर प्रदान करता है।

सोमवार वास्तु टिप्स: घर में इन उपायों से बढ़ेगी शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र के अनुसार सोमवार का संबंध चंद्रमा और जल तत्व से होता है। यह दिन मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन किए गए छोटे-छोटे वास्तु उपाय भी जीवन में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। 1. घर की सफाई और हल्कापन रखेसोमवार के दिन घर की विशेष सफाई करना शुभ माना जाता है। बेकार और टूटी-फूटी वस्तुओं को घर से बाहर निकालने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मानसिक तनाव घटता है। 2. उत्तर-पूर्व दिशा को साफ और हल्का रखेंवास्तु के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए। सोमवार को इस क्षेत्र को साफ रखना विशेष रूप से लाभकारी होता है। 3. पानी से जुड़े उपाय करेंचंद्रमा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए सोमवार को घर में साफ पानी रखना, पानी के बर्तन भरकर रखना या पौधों को जल देना शुभ माना जाता है। इससे मानसिक शांति बढ़ती है। 4. शिवलिंग या शिव प्रतिमा की स्थापनाघर में यदि शिव प्रतिमा या शिवलिंग हो तो उसे स्वच्छ स्थान पर रखें। सोमवार को जल और बेलपत्र अर्पित करना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। 5. सफेद रंग का उपयोग बढ़ाएंसोमवार के दिन सफेद रंग का उपयोग करना शुभ माना जाता है। सफेद कपड़े, सफेद फूल या सफेद वस्तुएं घर में रखने से चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 6. दीपक और सुगंध का उपयोगघर में घी का दीपक जलाना और हल्की सुगंध (अगरबत्ती या धूप) करना वातावरण को शांत और पवित्र बनाता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है। 7. मुख्य द्वार को साफ और सुसज्जित रखेंमुख्य द्वार को साफ रखना और वहां हल्की सजावट करना सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को बढ़ाता है। सोमवार को विशेष रूप से यह उपाय शुभ माना जाता है। सोमवार के दिन किए गए वास्तु उपाय न केवल घर का वातावरण शांत बनाते हैं बल्कि मानसिक संतुलन और आर्थिक समृद्धि में भी मदद करते हैं। सरल बदलावों से जीवन में बड़ा सकारात्मक असर देखा जा सकता है।

समाज की उल्टी परंपरा, जहां दूल्हा जाता है ससुराल और निभाता है अनोखी रस्म

नई दिल्ली। सहारा रेगिस्तान की तपती रेत और कठिन जीवन परिस्थितियों के बीच एक ऐसी जनजाति भी रहती है, जिसकी परंपराएं दुनिया की आम सामाजिक संरचना से बिल्कुल अलग हैं। यह है तुआरेग जनजाति, जिसे “ब्लू मेन ऑफ द सहारा” भी कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान है पुरुषों का घूंघट पहनना और शादी के बाद पति का पत्नी के घर जाकर रहना। तुआरेग समाज में पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला नीला घूंघट, जिसे स्थानीय भाषा में ‘टैगेलमस्ट’ कहा जाता है, केवल परंपरा नहीं बल्कि उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा है। लगभग 25 वर्ष की उम्र के बाद पुरुष इस घूंघट को पहनना शुरू करते हैं। यह कपड़ा उन्हें रेगिस्तान की तेज धूप, धूल और रेत से बचाता है। समय के साथ यह नीला रंग उनके चेहरे पर भी उतर आता है, जिससे उनकी पहचान और भी विशिष्ट हो जाती है। इस समाज की सबसे चौंकाने वाली विशेषता इसकी पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था है। यहां शादी के बाद पुरुष अपने घर में नहीं रहता, बल्कि पत्नी के घर जाकर शिफ्ट हो जाता है। यह व्यवस्था पूरी तरह मातृसत्तात्मक (matrilineal) है, जिसमें वंश और संपत्ति मां की लाइन से आगे बढ़ती है। बच्चों की पहचान भी मां के परिवार से जुड़ी होती है। तुआरेग समाज में घर या तंबू महिलाओं की संपत्ति माना जाता है। शादी के समय भी महिला अपना तंबू लेकर आती है और परिवार की अधिकांश संपत्ति, जैसे पशुधन और घरेलू सामान, महिलाओं के नियंत्रण में रहते हैं। यदि तलाक होता है, तो पुरुष को घर छोड़ना पड़ता है, जबकि बच्चे अपनी मां के साथ ही रहते हैं। इस जनजाति में महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी स्वतंत्रता प्राप्त है। वे व्यापार करती हैं, बाजार संभालती हैं और सामाजिक फैसलों में भी अहम भूमिका निभाती हैं। पारंपरिक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रहती है। यहां महिलाएं अपनी इच्छा से विवाह कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर तलाक का निर्णय भी ले सकती हैं। हालांकि समाज में नेतृत्व पूरी तरह महिलाओं के हाथ में नहीं है। जनजाति के प्रमुख और सरदार आमतौर पर पुरुष ही होते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नेतृत्व की वंश परंपरा भी मां के परिवार से जुड़ी होती है। तुआरेग जनजाति की परंपराएं आज भी माली, नाइजर, अल्जीरिया, लीबिया और बुर्किना फासो जैसे देशों के रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीवित हैं। हालांकि आधुनिक शिक्षा और शहरी जीवन के प्रभाव से कुछ युवा इन परंपराओं से दूर हो रहे हैं, फिर भी गांवों में यह संस्कृति मजबूत बनी हुई है। सोशल मीडिया पर जब भी इस जनजाति की तस्वीरें सामने आती हैं, लोग हैरान रह जाते हैं। कोई इसे महिला सशक्तिकरण का उदाहरण मानता है, तो कोई इसे एक अलग सामाजिक व्यवस्था के रूप में देखता है। लेकिन सच्चाई यह है कि तुआरेग समाज अपनी जरूरतों और जीवन परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई एक अनोखी सांस्कृतिक व्यवस्था है।

सोमवार विशेष: शिवलिंग पूजा से महादेव होंगे प्रसन्न, जानिए कौन-सी चीजें चढ़ाना है सबसे शुभ

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार को भगवान शिव का अत्यंत प्रिय दिन माना गया है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव पूजा से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर सही विधि से अर्पित की गई वस्तुएं न केवल पूजा का फल बढ़ाती हैं, बल्कि जीवन की बाधाओं को भी दूर करती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि शिवलिंग पर अर्पण की गई प्रत्येक सामग्री का अलग-अलग महत्व होता है, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होती है। गंगाजल से होती है शुद्धि और शांतिसोमवार को शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाना अत्यंत पवित्र माना गया है। इससे न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि मन की अशांति भी दूर होती है। यह उपाय मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करता है। बेलपत्र: भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्रशिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे उल्टा करके अर्पित करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि बेलपत्र चढ़ाने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धतूरा और आक का फूल: बाधाओं का नाशधतूरा और आक का फूल भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। इन्हें शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं। यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने में सहायक माना जाता है। शहद और दूध से मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वादशिवलिंग पर शहद अर्पित करने से जीवन में मिठास और सकारात्मकता बढ़ती है। वहीं, कच्चे दूध से अभिषेक करने पर मानसिक तनाव कम होता है और दही से अभिषेक करने पर जीवन में स्थिरता आती है। घी चढ़ाने से ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि होती है। चंदन और शमी के फूल का महत्वशिवलिंग पर चंदन लगाने से मन को शीतलता और शांति मिलती है। वहीं शमी के फूल अर्पित करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह पूजा विधि भक्तों के जीवन में संतुलन और सौभाग्य लाने वाली मानी जाती है। सोमवार के दिन श्रद्धा और नियम से शिवलिंग की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गंगाजल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद और अन्य पवित्र वस्तुओं का अर्पण न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि मानसिक शांति और सुख-समृद्धि भी प्रदान करता है।

वायु प्रदूषण का दिमाग पर गंभीर असर: याददाश्त हो सकती है कमजोर, शोध में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली। वायु प्रदूषण को लेकर दुनिया भर में लगातार चिंता बढ़ती जा रही है। अब तक इसे मुख्य रूप से सांस संबंधी बीमारियों, हृदय रोगों और जीवन प्रत्याशा में कमी के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आए एक अध्ययन ने इसके एक और गंभीर प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रदूषित हवा का लंबे समय तक संपर्क मानव मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और इससे याददाश्त कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में संज्ञानात्मक क्षमता यानी सोचने, समझने, सीखने और याद रखने की शक्ति पर नकारात्मक असर देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रदूषण का प्रभाव इतना गहरा हो सकता है कि यह मस्तिष्क पर लगभग 10 वर्ष अतिरिक्त उम्र बढ़ने के समान असर डाल सकता है। यह निष्कर्ष विशेष रूप से उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो लंबे समय तक अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) कहा जाता है, शरीर में प्रवेश कर रक्त प्रवाह के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं। ये कण सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ावा देते हैं, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसके परिणामस्वरूप याददाश्त कमजोर होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और मानसिक कार्यक्षमता में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। शोध में यह भी पाया गया कि वृद्ध लोगों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। हालांकि, युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी लगातार प्रदूषण के संपर्क से संज्ञानात्मक क्षमता में कमी के संकेत मिले हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए कई बार लोग इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के मामले बढ़ सकते हैं। बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या में वृद्धि और औद्योगिक गतिविधियों के कारण कई शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग प्रदूषण के अधिक स्तर वाले दिनों में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, घरों और कार्यालयों में वेंटिलेशन का ध्यान रखें तथा जहां संभव हो, एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। इसके अलावा पौधारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के सामुदायिक प्रयास भी लंबे समय में सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि स्वच्छ हवा केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक और बौद्धिक क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक है। यह अध्ययन इस बात की याद दिलाता है कि वायु प्रदूषण का असर हमारी सांसों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे मस्तिष्क और भविष्य की मानसिक सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में किए गए प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

रिश्तों का कत्ल: अस्पताल में डिलीवरी का दर्द झेल रही थी मां, घर पर कलयुगी दादा ने 4 साल की पोती को बनाया हवस का शिकार

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और इंसानियत को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। जौरा थाना क्षेत्र के ग्राम पन्नू का पुरा में एक कलयुगी दादा (बाबा) ने अपनी ही 4 साल की मासूम पोती/नातिन के साथ हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। यह घटना उस वक्त की है जब मासूम की मां अस्पताल में प्रसव पीड़ा झेल रही थी और एक नवजात शिशु को जन्म दे रही थी। परिवार ने जिस दादा के भरोसे अपनी 4 साल की बच्ची को घर पर छोड़ा था, उसी ने उसकी बेबसी का फायदा उठाकर उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला। इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरे इलाके में भारी आक्रोश और सनसनी का माहौल व्याप्त है मासूम की तोतली जुबान ने खोला खौफनाक राजइस रूह कंपा देने वाले सच का खुलासा तब हुआ जब मां अस्पताल में डिलीवरी के बाद अपने नवजात बच्चे को लेकर घर लौटी। घर आते ही मां ने देखा कि उसकी 4 साल की मासूम बेटी अत्यंत पीड़ा में है और उसे लगातार ब्लीडिंग (रक्तस्राव) हो रही है। बेटी की यह हालत देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। घबराए परिजन आनन-फानन में बच्ची को लेकर स्थानीय डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टरों ने जब बच्ची का गंभीर परीक्षण किया, तो उन्होंने साफ तौर पर बच्ची के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि की। डॉक्टरों की बात सुनकर परिवार सन्न रह गया। इसके बाद जब डरी-सहमी मासूम बच्ची से उसकी मां ने दुलारते हुए पूछताछ की, तो बच्ची ने रोते हुए अपनी तोतली जुबान में जो दास्तान बयां की, उसे सुनकर मां का कलेजा फट गया। मासूम ने बताया कि उसकी मां की गैरमौजूदगी में उसके सगे दादा ने ही उसके साथ यह गंदा काम किया था। अस्पताल में इलाज जारी, आरोपी दादा की तलाश में पुलिस की दबिशबच्ची की स्थिति नाजुक होने के कारण परिजन उसे तुरंत जिला चिकित्सालय मुरैना लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की विशेष देखरेख में उसका उपचार और मेडिकल परीक्षण किया जा रहा है। चूंकि मामला बेहद गंभीर और आपराधिक था, इसलिए ड्यूटी डॉक्टर ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय जौरा पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए जिला चिकित्सालय पहुंची और पीड़ित बच्ची की मां व अन्य परिजनों के बयान दर्ज किए। मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर ली है। एएसआई जेपी शर्मा के मुताबिक, घटना के बाद से ही कलयुगी आरोपी दादा घर से फरार है। पुलिस की कई टीमें गठित कर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि कानून के शिकंजे से आरोपी ज्यादा दिन दूर नहीं रह पाएगा और जल्द ही वह सलाखों के पीछे होगा।