Iran-US War: ईरान का बड़ा बयान- वॉरशिप पर हमले का बदला लेंगे: हिंद महासागर में अमेरिकी अटैक में 104 नौसैनिक मारे गए

Iran-US War: नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। Iran और United States के बीच टकराव के 15वें दिन ईरान ने अपने युद्धपोत पर हुए हमले का बदला लेने की चेतावनी दी है। ईरान की सेना के प्रमुख Amir Hatami ने कहा कि हिंद महासागर में ईरानी वॉरशिप पर हुआ हमला भुलाया नहीं जाएगा और इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency के मुताबिक ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर 4 मार्च 2026 को हमला किया गया था। यह हमला हिंद महासागर में Galle के समुद्री क्षेत्र के पास हुआ। हमले में जहाज पर सवार 104 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार यह युद्धपोत भारत में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में हिस्सा लेने के बाद वापस ईरान लौट रहा था। उस समय जहाज किसी युद्ध अभियान में शामिल नहीं था। ईरान ने इसे “अनुचित और आक्रामक हमला” बताया है। ईरानी सेना प्रमुख ने कहा कि IRIS डेना और उसके जवानों की कुर्बानी ईरानी नौसेना के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए नौसेना को और मजबूत करेगा और हमले के जिम्मेदारों को जवाब दिया जाएगा। उधर युद्ध का असर खाड़ी देशों में भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा कारणों से Global Village Dubai में ईद के मौके पर होने वाली आतिशबाजी रद्द कर दी गई है और परिसर को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। इसके अलावा Dubai Parks and Resorts और Ain Dubai को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि Israel और अमेरिका के हमलों में उसके 56 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है। ईरान के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार राजधानी Tehran में सबसे ज्यादा 19 ऐतिहासिक इमारतें प्रभावित हुई हैं, जबकि कुर्दिस्तान प्रांत में भी कई पुराने स्मारकों को नुकसान हुआ है। इस बीच ईरान ने तेल व्यापार को लेकर भी नई शर्त सामने रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान कुछ तेल टैंकरों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दे सकता है, लेकिन इसके लिए तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर की जगह चीनी मुद्रा Chinese Yuan में करने की शर्त रखी जा सकती है। वहीं क्षेत्र में सुरक्षा खतरे अभी भी बने हुए हैं। Dubai में एक हवाई हमले की कोशिश को नाकाम कर दिया गया, जबकि Saudi Arabia में सेना ने 19 ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। Bahrain में एहतियातन सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। मध्य पूर्व में बढ़ते इस सैन्य तनाव के चलते वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
LPG CRISES: फर्रुखाबाद में गैस सिलेंडर की लाइन बनी काल, इंतजार करते-करते बुजुर्ग की मौत

LPG CRISES: फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लंबी कतार एक बुजुर्ग के लिए जानलेवा साबित हो गई। घंटों से लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।लाल सराय इलाके में हुई दर्दनाक घटना यह घटना कोतवाली क्षेत्र के लाल सराय स्थित पानी की टंकी के पास सामने आई। जानकारी के मुताबिक यहां स्थित भारत गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने के लिए सुबह से ही लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी। इसी लाइन में एक बुजुर्ग भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अचानक बिगड़ी तबीयत, गिर पड़े बुजुर्ग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लंबे समय तक धूप में खड़े रहने, भूख-प्यास और थकान के कारण बुजुर्ग की अचानक तबीयत खराब हो गई। वह अचानक जमीन पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें संभालने की कोशिश की और सीपीआर देकर होश में लाने का प्रयास किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषितघटना के बाद परिजन उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सिलेंडर लेने के लिए लगी यह कतार आखिरकार एक परिवार के लिए दुखद खबर बन गई। रिश्तेदार ने बताया क्या हुआ मृतक के रिश्तेदार मोहम्मद बसी ने बताया कि घर में एक दिन पहले गैस खत्म हो गई थी। इसी वजह से उनके चाचा सिलेंडर लेने भारत गैस एजेंसी पहुंचे थे। वहां लंबी लाइन होने के कारण उन्हें एक पर्ची देकर अगले दिन आने को कहा गया था। इसके बाद वह सुबह करीब 9 बजे फिर लाइन में लगने पहुंचे, लेकिन घंटों इंतजार के दौरान अचानक गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। अव्यवस्था पर उठे सवालघटना के बाद मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का कहना है कि घर का सहारा गैस लेने गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा। वहीं मौके पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि गैस एजेंसी पर भारी अव्यवस्था थी और लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा था। इस दर्दनाक घटना ने गैस आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लाइव इंटरव्यू के बीच मंत्री को अचानक अंदर से खींच ले गए आए अफसर बोले-राष्ट्रपति इंतजार कर रहे हैं

तेहरान। ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच पूरी दुनिया का निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। इस बीच, अमेरिका में एक नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें टीवी पर लाइव इंटरव्यू दे रहे एक मंत्री को बीच इंटरव्यू से खींचकर निकाल लिया गया। दरअसल, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट स्काई न्यूज को एक इंटरव्यू दे रहे थे। एंकर उनसे सवार पूछ रहे थे, तभी अंदर एक अफसर आया और कहा कि राष्ट्रपति आपको बुला रहे हैं। इसके बाद मंत्री बेसेंट ने वहीं इंटरव्यू छोड़ दिया और वाइट हाउस के सिचुएशन रूम पहुंच गए। इंटरव्यू के बीच आया अचानक संदेश 63 वर्षीय बेसेंट उस समय Sky News के पत्रकार विल्फर्ड फोर्स्ट के साथ “The Master Investor Podcast” के लिए इंटरव्यू दे रहे थे। यह बातचीत वाशिंगटन स्थित ट्रेजरी विभाग के ऐतिहासिक कैश रूम में चल रही थी। इंटरव्यू के अभी करीब 13 मिनट ही हुए थे कि अचानक एक सहयोगी कमरे में आया और बेसेंट से कहा, “राष्ट्रपति आपको तुरंत बुला रहे हैं।” इसके बाद बेसेंट ने इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया। उनका माइक्रोफोन हटाया गया और वे सुबह लगभग 10:22 बजे व्हाइट हाउस के लिए रवाना हो गए। दो घंटे बाद लौटे मंत्री रिपोर्ट के अनुसार बेसेंट करीब दो घंटे बाद वापस लौटे। बाद में उन्होंने बताया कि बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति बेहद सकारात्मक मूड में हैं और ईरान मिशन तय समय से पहले आगे बढ़ रहा है।” बता दें कि ईरान के साथ यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका ने Operation Epic Fury के तहत इज़रायल के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। इस अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी और खाड़ी क्षेत्र में कई सैन्य व ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर युद्ध के चलते वैश्विक बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी डॉलर हाल के दिनों में मजबूत हुआ है, जबकि अन्य कई आर्थिक संकेतकों पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति और जटिल हो सकती है क्योंकि ईरान ने रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। विश्लेषकों के अनुसार यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर ऊर्जा बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। इसी कारण वॉशिंगटन में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर लगातार जारी है।
अचानक टूट पड़ा मधुमक्खियों का झुंड, गांव में मची भगदड़; कई लोग घायल

रंगारेड्डी । तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के एक गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में कई लोग घायल हो गए और कुछ समय के लिए पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। वेंकटापुरम गांव में हुई घटना यह घटना संगारेड्डी जिले के वेंकटापुरम गांव की बताई जा रही है। शुक्रवार को गांव के लोग रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। कोई खेतों की ओर जा रहा था तो कोई घर के बाहर काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड गांव की तरफ आ गया और लोगों पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए भागने लगे लोग स्थानीय लोगों के मुताबिक मधुमक्खियां अचानक लोगों को डंक मारने लगीं। इससे घबराकर लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई ग्रामीण घरों के अंदर छिप गए, जबकि कुछ लोग खेतों और खुले इलाकों की ओर दौड़ पड़े। हमला इतना अचानक था कि कई लोग संभल ही नहीं पाए और मधुमक्खियों के डंक से घायल हो गए। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाए गए घायल घटना की सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस सेवा को मौके पर बुलाया गया। घायलों को एंबुलेंस के जरिए Sadasivpet के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। घायलों की संख्या ज्यादा होने के कारण कुछ लोगों को निजी वाहनों से भी अस्पताल पहुंचाना पड़ा। CCTV में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम घटना के कुछ दृश्य आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हो गए। फुटेज में देखा जा सकता है कि अचानक मधुमक्खियों का झुंड लोगों पर हमला करता है और लोग डरकर इधर-उधर भागने लगते हैं। कारण का अभी नहीं चला पता फिलहाल प्रशासन ने घायलों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि संभवतः मधुमक्खियों का छत्ता छेड़ दिए जाने या मौसम में बदलाव के कारण वे आक्रामक हो गई होंगी, हालांकि असली वजह का अभी पता नहीं चल पाया है। डॉक्टरों के मुताबिक सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
मोनालिसा की शादी पर बोले देवकीनंदन ठाकुर, कहा— कहीं सनातन को बदनाम करने की साजिश तो नहीं

इंदौर । इंदौर में आयोजित सनातन क्रिकेट प्रीमियर लीग के कार्यक्रम में पहुंचे प्रसिद्ध कथावाचक Devkinandan Thakur ने मोनालिसा भोंसले की शादी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें सोशल मीडिया के जरिए काफी प्रसिद्धि दिलाई गई और बाद में उन्होंने एक मुस्लिम युवक से शादी कर ली। ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं यह सनातन को बदनाम करने की कोई साजिश तो नहीं है। सरकार से कानून बनाने की मांग मोनालिसा भोंसले के विवाह पर प्रतिक्रिया देते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने सरकार से एक कानून बनाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि अगर किसी दूसरे धर्म का युवक या युवती किसी हिंदू से शादी करता है तो शादी के बाद उसे हिंदू धर्म अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कानून बनता है तो उन्हें किसी भी अंतरधार्मिक विवाह से आपत्ति नहीं होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए क्रिकेट इंदौर में आयोजित सनातन क्रिकेट प्रीमियर लीग में 8 राज्यों की टीमें हिस्सा ले रही हैं और टूर्नामेंट 10-10 ओवर के मैचों के साथ खेला जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देना और उन्हें सनातन की परंपराओं से जोड़ना बताया गया है। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आज का युवा धीरे-धीरे सनातन से दूर होता जा रहा है और नशे व गलत रास्तों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में खेल के जरिए युवाओं को सकारात्मक दिशा देना जरूरी है। उनका लक्ष्य सनातन के संदेश को एक करोड़ युवाओं तक पहुंचाने का है। विजेता टीम को मिलेगा 31 लाख का इनाम सनातन प्रीमियर लीग में अलग-अलग दिनों में कई धर्मगुरु शामिल होंगे। टूर्नामेंट जीतने वाली टीम को 31 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा, जबकि उपविजेता टीम को 15 लाख रुपये मिलेंगे। इसके अलावा ‘मैन ऑफ द सीरीज’ बनने वाले खिलाड़ी को कार पुरस्कार के रूप में दी जाएगी।
ईरान युद्ध खत्म करने की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे ट्रंप? व्हाइट हाउस में मतभेद, फैसले पर बढ़ा दबाव

वॉशिंगटन। ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के सामने बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। व्हाइट हाउस के भीतर ही इस बात को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है कि युद्ध को कब और किस तरह खत्म घोषित किया जाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन के भीतर कुछ अधिकारी मानते हैं कि संघर्ष लंबा खिंचने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर कुछ सख्त रुख वाले नेता ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने के पक्ष में हैं। तेल की कीमतों को लेकर चिंता अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो अमेरिका में इस अभियान के लिए जनसमर्थन कम हो सकता है। हालांकि कुछ रिपब्लिकन नेता और रणनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हर हाल में रोकना होगा और अमेरिकी सैनिकों या जहाजों पर हमले का कड़ा जवाब देना चाहिए। लंबी जंग से बचना चाहते हैं कई रणनीतिकार ट्रंप के कुछ करीबी सलाहकार और समर्थक यह भी चाहते हैं कि अमेरिका मध्यपूर्व में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में न फंसे। वे चाहते हैं कि मौजूदा संघर्ष को सीमित रखा जाए और जल्द कोई रास्ता निकाला जाए। ईरान की सरकार गिरने की संभावना कम अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि फिलहाल ईरान की मौजूदा सरकार के जल्द गिरने की संभावना कम है। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में तेहरान की सरकार को हटाने की बात भी कम कर दी है। युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे ट्रंप सूत्रों के अनुसार ट्रंप प्रशासन अब इस संघर्ष से निकलने का रास्ता खोज रहा है। युद्ध शुरू होने के समय इसके कई लक्ष्य बताए गए थे—जैसे ईरान के हमलों को रोकना, उसके परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना और उसकी सैन्य क्षमता को सीमित करना। युद्ध रोकना भी आसान नहीं विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू करने के बाद उसे खत्म करना भी उतना ही मुश्किल होता है। अगर अमेरिका अचानक जीत का ऐलान कर सैन्य कार्रवाई रोक देता है और सैनिकों की वापसी शुरू कर देता है, तो अल्पकाल में वैश्विक बाजार शांत हो सकते हैं। लेकिन यदि ईरान की धार्मिक सरकार सत्ता में बनी रहती है और उसके पास परमाणु सामग्री, मिसाइल और ड्रोन मौजूद रहते हैं, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए खतरे पैदा हो सकते हैं। ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर ईरान के पास अभी भी कई कम दूरी की मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगें हैं। इनके जरिए वह तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, खासकर Strait of Hormuz के रास्ते। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। होर्मुज को खोलना भी चुनौती सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना हो तो ईरान के तटीय इलाकों में जमीनी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ऐसा कदम युद्ध को और व्यापक बना सकता है और अमेरिकी सैनिकों के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप के लिए युद्ध शुरू करना जितना आसान था, उसे खत्म करना उतना ही कठिन साबित हो रहा है।
CONGRESS LEADER: ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना

CONGRESS LEADER: लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में अपनी ही पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, लेकिन उसके कई बड़े नेता अमीर हैं।राहुल गांधी ने कहा, “कांग्रेस गरीब पार्टी है, लेकिन उसके जो बड़े-बड़े नेता हैं वे बहुत अमीर हैं। हम अमीर पार्टी बनना भी नहीं चाहते, क्योंकि जिस दिन कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी, वह Bharatiya Janata Party बन जाएगी।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह ढांचा Mahatma Gandhi के समय से ही तय किया गया था और पार्टी का उद्देश्य हमेशा गरीबों और वंचितों की आवाज बनना रहा है। कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन लखनऊ में Kanshi Ram की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की कुछ कमजोरियों के कारण ही बहुजन आंदोलन को ताकत मिली और कांशीराम राजनीति में बड़ी सफलता हासिल कर पाए। उनका कहना था कि अगर कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव की दिशा में तेज़ी से काम किया होता, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी राजनीतिक सफलता नहीं मिलती।केवल इच्छा से नहीं होता बदलाव कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में केवल चाहने से कुछ नहीं होता। बदलाव के लिए विचारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब तक लोग यह तय नहीं करेंगे कि अन्याय को स्वीकार नहीं करना है और उसके खिलाफ खड़ा होना है, तब तक समाज में बदलाव संभव नहीं है। संविधान और मौजूदा सरकार पर टिप्पणी संविधान पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान में हजारों साल पुरानी सभ्यता की आवाज़ है और इसकी मूल भावना सामाजिक न्याय और बराबरी की है। उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज की सत्ता इस मूल भावना को स्वीकार नहीं करती। अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का जिक्र अपने संबोधन में राहुल गांधी ने B. R. Ambedkar और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों पर संघर्ष किया। ऊर्जा नीति और सरकार पर आरोप राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा है। समाज में असमानता का मुद्दा राहुल गांधी ने कहा कि देश का समाज आज 15 प्रतिशत और 85 प्रतिशत में बंट गया है, जहां संसाधनों और अवसरों का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है। 2027 चुनाव की तैयारी कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति को बदलने का समय आ गया है और सबकी हिस्सेदारी वाली राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है। गौरतलब है कि हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था। अब यही गठबंधन 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उसी सफलता को दोहराने की रणनीति पर काम कर रहा है।
नींद नहीं आती? नासा के बताए 7 तरीके बदल सकते हैं आपकी लाइफस्टाइल

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अच्छी और पूरी नींद लेना आसान नहीं होता। International Space Station पर अंतरिक्ष यात्रियों को हर 90 मिनट में सूर्योदय और सूर्यास्त दिखाई देता है। इससे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी Circadian Rhythm प्रभावित हो जाती है। जब यह प्राकृतिक चक्र बिगड़ता है तो नींद की कमी, थकान, ध्यान में कमी और गंभीर गलतियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने कुछ खास तरीके विकसित किए हैं, जो न केवल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बल्कि पृथ्वी पर रहने वाले आम लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये तरीके शिफ्ट में काम करने वाले लोगों, लगातार यात्रा करने वालों और नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए खास तौर पर मददगार हो सकते हैं। 1. सोने और जागने का समय तय करेंनियमित नींद का सबसे बड़ा नियम है कि रोज एक ही समय पर सोना और जागना। इससे शरीर को पहले से पता होता है कि कब आराम करना है और कब सक्रिय रहना है। अगर समय तय हो तो शरीर धीरे-धीरे उसी लय में ढल जाता है और अनिद्रा या थकान की समस्या कम होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी दिनचर्या में रोशनी, व्यायाम और भोजन का समय भी व्यवस्थित रखें। 2. नींद के बारे में जागरूकता बढ़ाएंअच्छी नींद के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सी आदतें नींद को प्रभावित करती हैं। शाम के समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट कम करनी चाहिए। साथ ही देर रात भारी भोजन से बचें और नियमित व्यायाम करें। ये आदतें शरीर की प्राकृतिक लय को संतुलित रखती हैं और नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाती हैं। 3. सोने के लिए सही वातावरण बनाएंअच्छी नींद के लिए शांत, अंधेरा और ठंडा कमरा सबसे बेहतर माना जाता है। अंतरिक्ष में भी अंतरिक्ष यात्रियों को अलग-अलग सोने के छोटे कमरे दिए जाते हैं, जहां आंखों पर मास्क और कान में प्लग का उपयोग किया जाता है। पृथ्वी पर भी शोर कम रखें, कमरे का तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें और आरामदायक बिस्तर का इस्तेमाल करें। इससे शरीर जल्दी आराम की स्थिति में पहुंचता है। 4. रोशनी का सही उपयोग करेंनासा के वैज्ञानिक बताते हैं कि रोशनी का हमारी नींद पर सीधा असर पड़ता है। अंतरिक्ष स्टेशन पर खास लाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है जिससे दिन और रात का एहसास कराया जा सके। घर पर भी सुबह प्राकृतिक धूप लेना और शाम को तेज रोशनी व स्क्रीन टाइम कम करना फायदेमंद होता है। इससे शरीर को संकेत मिलता है कि अब आराम का समय है। 5. जरूरत पड़ने पर मेलाटोनिन या कैफीन का उपयोगकुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह से मेलाटोनिन या सीमित मात्रा में कैफीन का उपयोग भी मददगार हो सकता है। Melatonin एक प्राकृतिक हार्मोन है जो शरीर को नींद के लिए तैयार करता है। जेट लैग या अनियमित दिनचर्या की स्थिति में इसका उपयोग सर्कैडियन रिदम को संतुलित करने में मदद कर सकता है। 6. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी अपनाएंनींद की समस्या का एक बड़ा कारण मानसिक तनाव भी होता है। ऐसे में स्लीप कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) काफी प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक के जरिए व्यक्ति सोने से पहले मन को शांत करना, नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करना और अच्छी आदतें विकसित करना सीखता है। 7. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेंअगर अन्य उपायों से राहत न मिले तो डॉक्टर की सलाह से कुछ दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना सलाह के कोई भी दवा लेना सुरक्षित नहीं होता।उचित मार्गदर्शन के साथ दवाइयों का उपयोग किया जाए तो वे नींद की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती हैं। अच्छी नींद क्यों है जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार लगातार नींद की कमी से मेटाबॉलिज्म गड़बड़ी, हृदय रोग, पाचन समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसीलिए वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि नियमित दिनचर्या, सही खान-पान और बेहतर नींद की आदतों को अपनाकर न केवल नींद सुधारी जा सकती है बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन भी पाया जा सकता है।
ऊर्जा आपूर्ति को राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ जहाज

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई हैभारत आने वाला जहाज ‘नंदा देवी’ भी दुनिया का सबसे पवित्र समुद्री जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गया है। इससे पहले क्रूज़ लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी इसी जलडमरूमध्य को मजबूती से पार कर चुका है। सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा के बावजूद दोनों पार्टिसिपेंट्स के सीक्वल पर नजर रखी जा रही थी। ईरान की ओर से प्रामाणिक बैठक के बाद इन साथियों को सुरक्षित मार्ग दिया गया, ताकि वे इस नामित समुद्री मार्ग को पार कर सकें। 46 हजार टन से अधिक वजन लेकर आ रही हैं ‘नंदा देवी’आधिकारिक तौर पर जहाज ‘नंदा देवी’ भारत के लिए 46,000 मक्के टन से अधिक कोयला लेकर आ रहा है। यह घरेलू गैस और औद्योगिक इंजीनियरों के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, इस जहाज का सुरक्षित नेतृत्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्व से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर भारतीय नौसेना की सुरक्षा में जहाज ‘शिवालिक’ को भारत लाया जा रहा है। फर्जी का कहना है कि अगले दो दिन में आप किसी भी भारतीय पोर्ट पर पहुंच सकते हैं। संभावना है कि यह जहाज मुंबई या कांडला पोर्ट पर स्थित होगा। समुद्री जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और नौसेना की दिशा में सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रहा है। मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुई अहम बातचीतइन खिलाड़ियों की सुरक्षित छुट्टियों के पीछे उच्च सरकारी छात्रवृत्ति का प्रयास भी अहम रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के बीच माल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अहम बातचीत हुई। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित मार्ग मिलने का रास्ता साफ हो गया। ईरान ने भारतीय खिलाड़ियों को संकेत के संकेत दिए थे सुरक्षित मार्गइस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी संकेत दिया कि बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय छात्रों को जल्द ही होर्मुज जल्दरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के इस क्षेत्र में साझा हित हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध के बाद की स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है, इसलिए दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हैं। इससे एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची ने भी कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के सहयोगियों को इस समुद्री मार्ग से यात्रा की अनुमति दे दी है। दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्गहोर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन परिवहन में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस के सहयोगियों का इसी रास्ते से दबदबा है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार को प्रभावित कर सकता है। फारस की खाड़ी में 28 भारतीय खिलाड़ियों की निगरानीइस बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में इस समय भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद हैं। इन कर्मचारियों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार इन खिलाड़ियों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्सों में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक इंजीनियर शामिल हैं। विशेषज्ञ का मानना है कि भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिर स्थिति में भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शामिल है। ऐसे में ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ का सुरक्षित बाहर जाना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
उज्जैन में गैस संकट: रेस्टोरेंट संचालकों ने डीजल लकड़ी भट्टियों का सहारा लिया, 10 दिन की वेटिंग

उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में रेस्टोरेंट संचालकों और व्यवसायियों के लिए गैस संकट एक बड़ी चुनौती बन गया है। इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति के चलते पूरे देश में एलपीजी गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। उज्जैन सहित प्रदेश के कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है। इससे रेस्टोरेंट संचालकों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि शहर के लगभग 700 रेस्टोरेंट प्रतिदिन सिलेंडर पर ही निर्भर रहते हैं। गैस संकट के कारण रेस्टोरेंट संचालक अब डीजल और लकड़ी की भट्टियों का विकल्प तलाशने लगे हैं। हालांकि फैक्ट्री संचालकों के पास अचानक इतनी डिमांड बढ़ गई कि डिलीवरी में 10 से 15 दिन का समय लग रहा है। ढांचा भवन अवंतीपूरा कोयला फाटक और ढाबा रोड पर स्थित कई फैक्ट्री में डीजल भट्टियां 20–22 हजार रुपये में बन रही हैं जबकि लकड़ी की भट्टियां 60 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक में मिल रही हैं। राजेश शर्मा जो ढांचा भवन स्थित डायमंड फैक्ट्री के संचालक हैं ने बताया कि गैस की दिक्कत आने के बाद दो दिन में बड़ी संख्या में लोग डीजल भट्टियों के लिए पूछताछ करने आ रहे हैं। पहले महीने में एक या दो लोग ही आते थे अब रोजाना 10–15 लोग भट्टियों की जानकारी लेने आते हैं। हमारी क्षमता सीमित है इसलिए डिलीवरी में 10 दिन तक का समय लग रहा है उन्होंने कहा। रेस्टोरेंट संचालक महावीर जैन ने बताया कि उनके अस्पताल की कैंटीन में प्रतिदिन 6 सिलेंडर लगते हैं। सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने दो ड्रम की भट्टियां और 1.40 हजार रुपये कीमत वाली ब्लोवर वाली भट्टियों की बुकिंग करवाई है। आर्डर के तीन दिन बाद भी हमें भट्टी सप्लाई नहीं हो पा रही है। लेकिन खाना बनाना जरूरी है इसलिए विकल्प अपनाना पड़ रहा है उन्होंने कहा। इसी तरह लकड़ी भट्टियों का विकल्प चुनने वालों में लोकेश भाकचंदानी शामिल हैं। उन्होंने कहा एलपीजी मिल नहीं रही लेकिन रेस्टोरेंट बंद नहीं कर सकते। इसलिए जो विकल्प मिलेगा वही करेंगे। इसके अलावा शहर में इंडेक्शन कुकर की बिक्री भी बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में पहले रोजाना 3–5 इंडेक्शन बिकते थे लेकिन अब 20–25 इंडेक्शन रोजाना बिक रहे हैं। उज्जैन में प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए आते हैं और उनमें से लगभग एक लाख बाहर से आए लोग विभिन्न रेस्टोरेंट में भोजन करते हैं। इस वजह से गैस की किल्लत का असर पूरे शहर के रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ा है। प्रदेश में एलपीजी गैस की ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम भी सही ढंग से काम नहीं कर रही है। कई जगह वेटिंग 7–8 दिन तक पहुंच गई है और कई बार बुकिंग के बावजूद सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इससे उपभोक्ता और व्यवसाय दोनों ही परेशान हैं।