Chambalkichugli.com

जब मोहम्मद रफी के सदाबहार गीत पर अड़ गए थे शम्मी कपूर: राज कपूर के दखल के बाद रिलीज हुआ गाना, प्रीमियर पर खड़े होकर तालियां बजाने लगे थे देव आनंद और आरडी बर्मन

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में मोहम्मद रफी और शम्मी कपूर की जोड़ी को संगीत की दुनिया की सबसे कामयाब जोड़ियों में से एक माना जाता है। रफी साहब की बुलंद आवाज और शम्मी कपूर के अनूठे डांसिंग स्टाइल ने मिलकर बॉलीवुड को दर्जनों सदाबहार गाने दिए हैं। हालांकि, संगीत के इस सुनहरे सफर के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया था जब शम्मी कपूर खुद मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के एक प्रतिष्ठित गाने के पूरी तरह खिलाफ हो गए थे। वह इस गाने को फिल्म से हटवाना या बदलवाना चाहते थे, लेकिन बाद में इसी गाने ने सिनेमाघरों में ऐसा तूफान लाया कि हर कोई देखता रह गया। यह पूरा विवाद साल 1962 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘प्रोफेसर’ के एक बेहद लोकप्रिय गीत से जुड़ा हुआ है। इस फिल्म के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के कंधों पर थी। उन्होंने फिल्म के लिए एक बेहद खूबसूरत और रूहानी धुन तैयार की थी, जिसके बोल थे ‘आवाज देके हमें तुम बुलाओ’। इस रूमानी गीत को सुर कोकिला लता मंगेशकर और संगीत के सरताज मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। रिकॉर्डिंग के बाद संगीत से जुड़े सभी लोग इस गाने की तारीफ कर रहे थे, लेकिन जैसे ही फिल्म के मुख्य अभिनेता शम्मी कपूर ने इसे सुना, उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जता दी। अभिनेता शम्मी कपूर को असल में इस बात से गहरी दिक्कत थी कि गाने की शुरुआत मुख्य अभिनेत्री की आवाज से हो रही थी और पूरे दृश्य में उनका खुद का स्क्रीन टाइम बहुत कम नजर आ रहा था। उनका मानना था कि एक मुख्य अभिनेता के तौर पर इस गाने में उनकी मौजूदगी को सही ढंग से नहीं दर्शाया गया है और वह इसमें नाममात्र के लिए ही दिखाई दे रहे हैं। शम्मी कपूर इस बात पर अड़ गए कि इस गाने को फिल्म से बदल दिया जाए। जब यह विवाद काफी बढ़ गया और मेकर्स असमंजस की स्थिति में आ गए, तब फिल्म इंडस्ट्री के ‘शोमैन’ राज कपूर को इस मामले में बीच-बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा। राज कपूर ने शम्मी कपूर के गुस्से को शांत करते हुए उन्हें समझाया कि वह इस कंपोजिशन और गाने के मिजाज पर भरोसा रखें। उन्होंने शम्मी को सलाह दी कि गाने को बिना किसी बदलाव के फिल्म में वैसे ही रहने दिया जाए जैसा इसे रिकॉर्ड किया गया है। राज कपूर के दखल और उनके विजन पर भरोसा करते हुए शम्मी कपूर आखिरकार मान गए। इसके बाद जब फिल्म बनकर तैयार हुई, तो उद्योग के तमाम दिग्गजों के लिए फिल्म का एक भव्य प्रीमियर शो आयोजित किया गया। इस प्रीमियर में देव आनंद, आरडी बर्मन और महमूद जैसी सिनेमा जगत की कई नामचीन हस्तियां मौजूद थीं। थिएटर के भीतर जब फिल्म के दौरान यह गाना बजना शुरू हुआ, तो शुरुआत में लता मंगेशकर की सुरीली आवाज को हॉल में बैठे सभी दिग्गज बेहद शांति और एकाग्रता से सुन रहे थे। जैसे ही गाने के बीच में मोहम्मद रफी की जादुई लाइनें गूंजी, थिएटर का माहौल पूरी तरह बदल गया। रफी साहब की आवाज का जादू ऐसा चला कि वहां बैठे संगीतकार आरडी बर्मन, सदाबहार अभिनेता देव आनंद और मशहूर कॉमेडियन महमूद अपनी सीटों से खड़े हो गए और उत्साह में आकर लगातार तालियां बजाने लगे। थिएटर के अंदर मौजूद दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का यह अद्भुत रिस्पॉन्स देखकर खुद शम्मी कपूर भी पूरी तरह हैरान रह गए थे। इस घटना के बाद शम्मी कपूर को भी अहसास हो गया कि स्क्रीन टाइम से ज्यादा गाने की आत्मा और उसकी गायकी मायने रखती है। बाद में यह गाना न केवल चार्टबस्टर साबित हुआ, बल्कि इसे हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन गानों की फेहरिस्त में शामिल किया गया। मोहम्मद रफी ने इसके बाद भी शम्मी कपूर के लिए ‘चाहें कोई मुझे जंगली कहे’, ‘बदन पे सितारे’, ‘तारीफ करूं क्या उसकी’, और ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’ जैसे अनगिनत कल्ट गाने गाए, जिन्होंने शम्मी कपूर को इंडस्ट्री का ‘एल्विस प्रेस्ली’ बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पाकिस्तान में आटे का बड़ा संकट, 92% सरकारी खरीद फेल, कीमतें बढ़ीं, रोटी पर मंडराया खतरा

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में गेहूं की गंभीर कमी ने खाद्य संकट की स्थिति पैदा कर दी है। कृषि और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमजोरियों के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने खुले बाजार में गेहूं की बढ़ती कीमतों पर गहरी चिंता जताई है और इसे प्रशासनिक विफलता से जुड़ा मामला बताया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 4 जून तक खाद्य विभाग ने 10 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 79,835.66 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है, जो लक्ष्य का 8 प्रतिशत से भी कम है। सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य (PKR 3,500 प्रति 40 किलो) बाजार दर से काफी कम होने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों को गेहूं बेचने के बजाय निजी खरीदारों को प्राथमिकता दी। इस स्थिति का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। खुले बाजार में गेहूं की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। कराची में गेहूं का भाव PKR 11,100 प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि हैदराबाद में यह PKR 10,900 प्रति 100 किलोग्राम तक दर्ज किया गया है। इसके चलते आटे की खुदरा कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं और यह PKR 135 से PKR 140 प्रति किलो के बीच पहुंच गई हैं, जो सरकारी सब्सिडी दर PKR 107 प्रति किलो से काफी अधिक है। इसका सबसे ज्यादा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने सीएम हाउस में उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमाखोरी और सट्टेबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को बाजार पर सख्त नियंत्रण रखने और कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी रोकने के निर्देश दिए। साथ ही नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया। उन्होंने कहा कि गेहूं केवल एक वस्तु नहीं बल्कि जनता के जीवन और सामाजिक स्थिरता की बुनियाद है, इसलिए इसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। हालांकि, स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सरकार के प्रयासों के बावजूद जमीनी हालात में सुधार नहीं दिख रहा है। जमाखोरी और सप्लाई चेन की समस्याएं बनी हुई हैं, जिससे सिंध प्रांत एक गंभीर खाद्य संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

मेथड एक्टिंग के चक्कर में नाना पाटेकर ने जड़ा था जोरदार तमाचा, सह-कलाकार मधु ने भी तुरंत सेट पर ही सिखाया सबक, आधा दिन पहले खत्म हुई थी शूटिंग

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत में कलाकारों के आपसी तालमेल और अभिनय के तौर-तरीकों को लेकर अक्सर कई तरह के किस्से सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मधु ने किया है। उन्होंने नब्बे के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के दौरान का एक ऐसा वाकया साझा किया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मधु के अनुसार, एक बेहद संवेदनशील दृश्य की शूटिंग के दौरान उनके और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बीच सेट पर ही थप्पड़बाजी की नौबत आ गई थी। यह घटना फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के दौरान घटी थी, जिसके लिए निर्देशक अनिल मात्तू ने पूरा एक दिन निर्धारित किया था। मधु ने एक साक्षात्कार में बताया कि वह एक ऐसी अभिनेत्री रही हैं जो ‘स्विच ऑन और स्विच ऑफ’ पद्धति पर काम करती हैं, यानी कैमरे के सामने आते ही किरदार में आना और कट बोलते ही बाहर निकल जाना। इस सीन में उन्हें रोना था और इसके लिए वह आंखों में ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन उनके सह-कलाकार नाना पाटेकर इसके पूरी तरह खिलाफ थे। नाना पाटेकर फिल्म जगत में अपनी सजीव और ‘मेथड एक्टिंग’ के लिए जाने जाते हैं और वह चाहते थे कि दृश्य पूरी तरह वास्तविक लगे। अभिनेत्री के मुताबिक, कई बार रिहर्सल करने के बावजूद जब वह स्वाभाविक रूप से रोने में असमर्थ रहीं, तो नाना पाटेकर ने अचानक उन्हें बेहद जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। बिना किसी पूर्व सूचना या तैयारी के अचानक पड़े इस तमाचे से मधु अवाक रह गईं और दर्द तथा गुस्से के कारण उनकी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। नाना पाटेकर के इस अप्रत्याशित व्यवहार ने मधु को इतना क्रोधित कर दिया कि उन्होंने बिना सोचे-समझे तुरंत पलटवार किया और सेट पर मौजूद पूरी टीम के सामने नाना पाटेकर को भी एक करारा थप्पड़ रसीद कर दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सेट पर कुछ समय के लिए सन्नाटा पसर गया था, लेकिन इसके कारण दृश्य में जो वास्तविक भावनाएं और गुस्सा उभरकर आया, उसने पूरे शॉट को एक ही टेक में जीवंत कर दिया। स्वाभाविक और वास्तविक प्रतिक्रिया होने के कारण निर्देशक को वह शॉट बेहद पसंद आया। नतीजा यह हुआ कि जिस महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया गया था, वह महज आधे दिन में ही पूरी तरह से संपन्न हो गया। इस शॉट के पूरा होते ही नाना पाटेकर ने भी स्थिति को संभालते हुए पैकअप की घोषणा कर दी। बरसों पुराने इस वाकये को याद करते हुए मधु ने स्पष्ट किया कि इस तीखी नोकझोंक के बावजूद नाना पाटेकर का इरादा कभी भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने का नहीं था। वह केवल पर्दे पर अभिनय के स्तर को उत्कृष्ट बनाना चाहते थे। जब भी वह सेट पर ग्लिसरीन का उपयोग करती थीं या अपने किरदार से भटकती थीं, तो नाना पाटेकर थोड़े असहज और नाखुश दिखाई देते थे। मधु ने माना कि नाना पाटेकर चाहते थे कि सह-कलाकार केवल अभिनय न करें, बल्कि उस किरदार को पूरी शिद्दत से जिएं, और यही वजह थी कि उस दिन उन्होंने अनजाने में मधु को भी एक ‘मेथड एक्टर’ बना दिया था। बॉलीवुड में नाना पाटेकर के कड़क मिजाज और काम के प्रति उनके सख्त रवैये को लेकर पहले भी कई किस्से सामने आते रहे हैं। इससे पहले दिग्गज फिल्ममेकर सई परांजपे ने भी फिल्म ‘दिशा’ की शूटिंग के दौरान चप्पल के एक सीन को लेकर नाना पाटेकर के साथ हुई अपनी तीखी बहस का जिक्र किया था। बहरहाल, मधु द्वारा साझा किया गया यह संस्मरण यह दिखाता है कि सिनेमा के पर्दे पर दिखने वाले बेहतरीन दृश्यों के पीछे कलाकारों को कभी-कभी किस तरह की शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

16 जून को त्रिपुष्कर योग से इन राशियों के लिए बन रहे धन लाभ और सफलता के योग

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 16 जून को एक विशेष शुभ संयोग बन रहा है, जिसे त्रिपुष्कर योग कहा जाता है। मान्यता है कि यह योग तब बनता है जब विशेष तिथि, वार और नक्षत्र का संयोग एक साथ होता है। इसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है, विशेषकर नए कार्य शुरू करने, निवेश करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए। इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आर्थिक लाभ के संकेत बताए जा रहे हैं। मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से लाभकारी हो सकता है। निवेश से लाभ मिलने और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। मानसिक रूप से भी सकारात्मकता बनी रहेगी। सिंह राशिसिंह राशि के लिए यह योग करियर में प्रगति के संकेत दे रहा है। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होगी और पारिवारिक वातावरण भी सुखद रहेगा। कन्या राशिकन्या राशि वालों के लिए नए अवसरों का निर्माण हो सकता है। शिक्षा, लेखन और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। मकर राशिमकर राशि के लिए यह समय रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं और धन संबंधी स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ के योग भी बन सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस प्रकार के योगों का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए परिणाम भिन्न हो सकते हैं।

सूर्य गोचर से बना भद्र राजयोग, मिथुन सहित 5 राशियों के लिए धन लाभ और तरक्की के प्रबल योग

नई दिल्ली। सूर्य गोचर के प्रभाव से इस बार एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसमें भद्र राजयोग का निर्माण माना जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार 16 जून को सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही बुध ग्रह विराजमान हैं। इस स्थिति से बुधादित्य राजयोग भी बनेगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ योग माना जाता है। इस ग्रह स्थिति का असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार पांच राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। इन जातकों के जीवन में धन लाभ, करियर में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बन रहे हैं। मिथुन राशिसूर्य का गोचर आपकी ही राशि में होने से आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में वृद्धि होगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में साझेदारी से लाभ के संकेत हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। सिंह राशिसूर्य आपकी राशि के स्वामी होकर लाभ स्थान में गोचर करेंगे। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। सरकारी क्षेत्र या राजनीति से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। कन्या राशिबुध ग्रह की राशि में यह गोचर करियर के दसवें भाव में होगा, जिससे कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता मिलने के संकेत हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और व्यापार में प्रगति होगी। तुला राशिभाग्य भाव में सूर्य का गोचर रुके हुए कार्यों को गति देगा। यात्राएं लाभकारी साबित हो सकती हैं और विदेश से जुड़े कामों में प्रगति के संकेत हैं। सामाजिक संपर्क भी मजबूत होंगे। कुंभ राशिपांचवें भाव में यह योग विद्यार्थियों और निवेशकों के लिए शुभ माना जा रहा है। शिक्षा में सफलता, संतान पक्ष से शुभ समाचार और आकस्मिक धन लाभ के संकेत हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह समय कुछ राशियों के लिए सकारात्मक परिवर्तन लेकर आ सकता है, हालांकि परिणाम व्यक्ति की कुंडली और परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं।

FIFA World Cup से पहले बढ़ा विवाद, इराक के दिग्गज फुटबॉलर के साथ एयरपोर्ट पर हुआ नाटकीय घटनाक्रम

नई दिल्ली । FIFA विश्व कप 2026 के आगाज से पहले अमेरिका में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने खेल जगत में चर्चा छेड़ दी है। इराक की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के स्टार स्ट्राइकर आयमेन हुसैन को अमेरिका पहुंचने पर शिकागो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगभग सात घंटे तक रोककर पूछताछ की गई। हालांकि लंबी जांच के बाद उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति दे दी गई, लेकिन टीम के आधिकारिक फोटोग्राफर तलाल सलाह को अमेरिका में एंट्री नहीं मिली और उन्हें वापस भेज दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयमेन हुसैन शनिवार तड़के अमेरिका पहुंचे थे, जहां इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की गई। करीब सात घंटे तक चली प्रक्रिया के बाद अधिकारियों ने उन्हें क्लियरेंस देते हुए अमेरिका में प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी। आयमेन हुसैन इराकी फुटबॉल के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। 30 वर्षीय स्ट्राइकर ने विश्व कप क्वालिफायर में शानदार प्रदर्शन किया था और उनके अहम गोलों की बदौलत इराक ने चार दशकों बाद FIFA विश्व कप के लिए क्वालिफाई किया। ऐसे में टूर्नामेंट से ठीक पहले उनके साथ हुई इस घटना ने इराकी फुटबॉल प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति और अधिक गंभीर तब हो गई जब इराकी राष्ट्रीय टीम के फोटोग्राफर तलाल सलाह को 10 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद अमेरिका में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, उनसे भी विस्तृत पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन की जांच की गई। इसके बावजूद अधिकारियों ने उन्हें देश में प्रवेश की मंजूरी नहीं दी। इराकी ओलंपिक समिति से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि दोनों मामलों में सुरक्षा और इमिग्रेशन जांच काफी विस्तृत रही। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इतनी लंबी पूछताछ का कारण क्या था। दूसरी ओर, अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की ओर से भी इस मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। गौरतलब है कि FIFA विश्व कप 2026 की मेजबानी संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको कर रहे हैं। यह टूर्नामेंट इतिहास का सबसे बड़ा विश्व कप माना जा रहा है, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में टीमें हिस्सा ले रही हैं। इराक भी उन देशों में शामिल है जिसने लंबे इंतजार के बाद विश्व कप में जगह बनाई है। इराक की टीम को ग्रुप-1 में फ्रांस, सेनेगल और नॉर्वे जैसी मजबूत टीमों के साथ रखा गया है। आयमेन हुसैन के अलावा टीम में इप्सविच टाउन के फॉरवर्ड अली अल-हमादी, युवा प्रतिभा अली जसीम और यूसुफ अमीन जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। ऐसे में टूर्नामेंट से पहले सामने आई यह घटना टीम की तैयारियों पर असर डाल सकती है। फिलहाल आयमेन हुसैन टीम के साथ जुड़ चुके हैं, लेकिन फोटोग्राफर तलाल सलाह को प्रवेश न मिलने का मामला इराकी फुटबॉल प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है। विश्व कप के माहौल के बीच यह घटना सुरक्षा, इमिग्रेशन प्रक्रियाओं और खिलाड़ियों के साथ व्यवहार को लेकर कई सवाल भी खड़े कर रही है।

गरुड़ पुराण का रहस्य: मृत्यु के बाद गहनों और सामान को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र?

नई दिल्ली । सनातन धर्म में जीवन और मृत्यु दोनों को प्रकृति का शाश्वत सत्य माना गया है। जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों का भी धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्हीं ग्रंथों में एक प्रमुख ग्रंथ गरुड़ पुराण है, जिसमें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, कर्मों के फल और अंतिम संस्कार से जुड़े अनेक नियमों का उल्लेख किया गया है। जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तब उसके अंतिम संस्कार के दौरान उपयोग में आने वाले कपड़े, बिस्तर और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं को प्रायः घर से बाहर कर दिया जाता है या दान कर दिया जाता है। हालांकि एक बात अक्सर लोगों के मन में सवाल पैदा करती है कि मृतक के गहनों को आमतौर पर सुरक्षित क्यों रखा जाता है। गरुड़ पुराण में इसके पीछे एक विशेष मान्यता का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक आत्मा का अपने जीवन से जुड़ी वस्तुओं और प्रिय लोगों के प्रति मोह बना रह सकता है। माना जाता है कि आभूषण ऐसी वस्तुएं होती हैं जिनसे व्यक्ति का भावनात्मक और व्यक्तिगत जुड़ाव अधिक होता है। इसी कारण गरुड़ पुराण में सलाह दी गई है कि मृतक के गहनों का तुरंत नियमित उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे आत्मा का उन वस्तुओं के प्रति मोह बढ़ सकता है, जो उसकी आगे की यात्रा में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसी वजह से कई परिवार मृतक के गहनों को संभालकर रखते हैं और उनका उपयोग लंबे समय तक नहीं करते। कुछ लोग धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें शुद्धिकरण के बाद परिवार में सुरक्षित रखते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें दान करना अधिक उचित मानते हैं। मान्यता है कि यदि किसी को इन गहनों को घर में रखने में असहजता महसूस हो, तो उनका दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। गरुड़ पुराण में केवल गहनों ही नहीं, बल्कि मृतक द्वारा उपयोग की गई अन्य वस्तुओं के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के कपड़े, चश्मा, हाथ की घड़ी, बिस्तर और दैनिक उपयोग की अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं का उपयोग करने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से इन वस्तुओं को दान करना या उचित तरीके से अलग कर देना बेहतर माना गया है। इसके अलावा सामान्य पुस्तकों को भी घर में न रखने की सलाह दी गई है, यदि उनका नियमित उपयोग मृतक द्वारा किया जाता था। हालांकि धार्मिक ग्रंथों के मामले में अलग व्यवस्था बताई गई है। मान्यता है कि धार्मिक पुस्तकों पर गंगाजल का छिड़काव कर उन्हें पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। इसी प्रकार यदि मृतक की जन्म कुंडली मौजूद हो, तो उसे किसी पवित्र जल में प्रवाहित करने या पीपल के वृक्ष के नीचे मिट्टी में दबाने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि ये मान्यताएं केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही नहीं बल्कि परिवार को मानसिक रूप से शोक से उबरने का अवसर देने का भी एक माध्यम हैं। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए इन विषयों में स्थानीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं का भी विशेष महत्व माना जाता है।

एक टैप में रुक जाएगा गलत मैसेज! Google Messages का नया सेफ्टी फीचर यूजर्स के लिए राहत

नई दिल्ली । स्मार्टफोन पर चैटिंग करते समय कई बार एक छोटी सी गलती बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन जाती है। खासकर तब, जब किसी जरूरी या प्रोफेशनल बातचीत के दौरान गलती से AI द्वारा सुझाए गए Smart Reply पर उंगली पड़ जाए और मैसेज बिना सोचे-समझे सामने वाले व्यक्ति तक पहुंच जाए। अब Google ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। कंपनी ने Google Messages ऐप में एक नया सुरक्षा फीचर पेश किया है, जो यूजर्स को अनजाने में गलत मैसेज भेजने से बचाएगा। Google Messages का नया फीचर ‘Tap to Draft’ नाम से लॉन्च किया गया है। यह फीचर खास तौर पर उन एंड्रॉयड यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो अक्सर Smart Reply की वजह से गलत संदेश भेजने की परेशानी का सामना करते हैं। नए अपडेट के बाद अब किसी भी AI-सुझावित रिप्लाई पर टैप करने से वह मैसेज तुरंत सेंड नहीं होगा, बल्कि पहले ड्राफ्ट के रूप में मैसेज बॉक्स में दिखाई देगा। अब तक Google Messages में Smart Reply पर टैप करते ही मैसेज सीधे सामने वाले यूजर को भेज दिया जाता था। कई बार यूजर किसी अन्य विकल्प को चुनना चाहता था या केवल सुझाव देखना चाहता था, लेकिन एक टैप से मैसेज भेजा जाता था। इससे व्यक्तिगत, प्रोफेशनल और ऑफिस चैट्स में असहज स्थिति पैदा हो सकती थी। Google का नया फीचर इसी समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से लाया गया है। ‘Tap to Draft’ फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यूजर को अब संदेश भेजने से पहले उसे पढ़ने, एडिट करने और अपनी जरूरत के अनुसार बदलने का पूरा मौका मिलेगा। यदि AI द्वारा सुझाया गया जवाब पूरी तरह सही नहीं है, तो यूजर उसमें बदलाव कर सकता है या उसे हटाकर नया संदेश लिख सकता है। अंतिम निर्णय पूरी तरह यूजर के हाथ में रहेगा। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब AI आधारित फीचर्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि AI कई बार उपयोगी सुझाव देता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में उसके जवाब बातचीत के संदर्भ से मेल नहीं खाते। ऐसे में बिना समीक्षा के संदेश भेजा जाना परेशानी का कारण बन सकता है। नया फीचर इस जोखिम को काफी हद तक कम कर देगा। इस फीचर को सक्रिय करना भी बेहद आसान है। यूजर्स को Google Messages ऐप की Settings में जाकर ‘Suggestions & Actions’ विकल्प चुनना होगा। इसके बाद ‘Suggestions’ सेक्शन में जाकर ‘Tap to Draft’ फीचर को ऑन किया जा सकता है। फिलहाल यह फीचर Opt-in मोड में उपलब्ध है, यानी इसे उपयोग करने के लिए यूजर को स्वयं सक्रिय करना होगा। डिफॉल्ट रूप से ऐप अभी भी पुराने ‘Tap to Send’ मोड पर काम करेगा। Google ने इस फीचर को Google Messages के लेटेस्ट स्टेबल वर्जन v20260522_00_RC00 के साथ जारी करना शुरू कर दिया है। मार्च 2026 में इसकी टेस्टिंग शुरू हुई थी और करीब तीन महीने के परीक्षण के बाद अब इसे आम यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। तकनीक के इस नए कदम को यूजर अनुभव और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह फीचर लाखों एंड्रॉयड यूजर्स को अनजाने में होने वाली मैसेजिंग गलतियों से बचाने में मदद करेगा।

सूर्यकुमार यादव पर बड़ा खुलासा! पूर्व चयनकर्ता ने बताई पर्दे के पीछे की असली वजह

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में कप्तानी परिवर्तन के बाद सबसे अधिक चर्चा यदि किसी खिलाड़ी को लेकर हो रही है तो वह हैं सूर्यकुमार यादव। भारतीय टी20 टीम की कप्तानी से हटाए जाने और आयरलैंड, इंग्लैंड तथा एशियन गेम्स के लिए घोषित किसी भी टी20 स्क्वॉड में जगह नहीं मिलने के बाद यह माना जा रहा था कि चयनकर्ताओं ने उनसे आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है। लेकिन अब टीम इंडिया के पूर्व मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने इस पूरे मुद्दे को नई दिशा दे दी है। एमएसके प्रसाद का दावा है कि सूर्यकुमार यादव को टीम से बाहर नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें आराम दिया गया है। उनके मुताबिक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और चयन समिति ने जसप्रीत बुमराह तथा हार्दिक पांड्या की तरह सूर्यकुमार को भी कुछ समय का ब्रेक दिया है, ताकि वह तरोताजा होकर टीम में वापसी कर सकें। प्रसाद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि कोई भी बोर्ड या चयन समिति विश्व कप विजेता कप्तान को अगले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में बाहर नहीं करती। उन्होंने कहा कि सूर्यकुमार यादव भारतीय क्रिकेट के बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं और उनकी गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उनके अनुसार इतने बड़े खिलाड़ी को केवल खराब फॉर्म के आधार पर पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। पूर्व चयनकर्ता ने कहा कि सूर्यकुमार, हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह लंबे समय तक आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। बुमराह आज भी दुनिया के नंबर-1 गेंदबाजों में गिने जाते हैं। ऐसे में इन खिलाड़ियों को समय-समय पर आराम देना टीम प्रबंधन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि तीनों खिलाड़ी जल्द ही भारतीय टीम में फिर दिखाई देंगे। हालांकि दूसरी ओर चयनकर्ताओं के फैसले ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। बीसीसीआई द्वारा घोषित आयरलैंड दौरे, इंग्लैंड दौरे और 2026 एशियन गेम्स की टी20 टीमों में सूर्यकुमार यादव का नाम शामिल नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि जसप्रीत बुमराह को एशियन गेम्स की टीम में जगह दी गई है, जबकि सूर्यकुमार पूरी तरह बाहर हैं। इसी वजह से कई क्रिकेट विशेषज्ञ इसे केवल आराम नहीं, बल्कि चयन संबंधी बड़ा फैसला मान रहे हैं। सूर्यकुमार यादव की हालिया फॉर्म भी चर्चा का विषय रही है। आईपीएल 2026 में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा और लगातार रन बनाने में उन्हें संघर्ष करना पड़ा। माना जा रहा है कि यही वजह चयनकर्ताओं के फैसले के पीछे प्रमुख कारण हो सकती है। वहीं उनकी बढ़ती उम्र भी भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। 35 वर्षीय सूर्यकुमार के सामने अब युवा खिलाड़ियों की मजबूत चुनौती मौजूद है। इस बीच चयनकर्ताओं ने टी20 टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंप दी है। अय्यर को भविष्य की टीम तैयार करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि सूर्यकुमार के अनुभव और उपलब्धियों को देखते हुए उनकी वापसी की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। फिलहाल भारतीय क्रिकेट में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सूर्यकुमार यादव वास्तव में केवल आराम पर हैं या फिर यह भारतीय टी20 टीम में एक नए युग की शुरुआत है। आने वाले महीनों में उनका प्रदर्शन और चयनकर्ताओं की रणनीति इस सवाल का जवाब देगी।

श्रेयस अय्यर का कप्तानी धमाका! बल्लेबाजी से दिया बड़ा संदेश, बढ़ी टी20 टीम की दावेदारी

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में कप्तानी परिवर्तन के बीच श्रेयस अय्यर ने अपने बल्ले से ऐसा जवाब दिया है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारतीय टी20 टीम का नया कप्तान घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद श्रेयस अय्यर ने मुंबई टी20 लीग में धमाकेदार अर्धशतक जड़कर यह संकेत दे दिया कि वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बीसीसीआई ने शनिवार को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के साथ आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टी20 टीम की घोषणा की। इस टीम में श्रेयस अय्यर को कप्तान नियुक्त किया गया, जबकि पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव को टीम में जगह नहीं मिली। इस बड़े फैसले के बाद सभी की नजरें दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर थीं और शाम को मुंबई टी20 लीग में दोनों आमने-सामने भी आ गए। मुंबई टी20 लीग का 12वां मुकाबला ट्रायम्फ्स नाइट्स एमएनई और सोबो मुंबई फाल्कन्स के बीच खेला गया। ट्रायम्फ्स नाइट्स की कप्तानी सूर्यकुमार यादव कर रहे थे, जबकि सोबो मुंबई फाल्कन्स की ओर से श्रेयस अय्यर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि भारतीय टी20 क्रिकेट के दो बड़े चेहरों के बीच भी माना जा रहा था। पहले बल्लेबाजी करते हुए ट्रायम्फ्स नाइट्स एमएनई ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने संघर्षपूर्ण पारी खेलते हुए 48 रन बनाए। अपनी इस पारी में उन्होंने 3 चौके और 4 शानदार छक्के लगाए। हालांकि उनका अर्धशतक पूरा नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। 148 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सोबो मुंबई फाल्कन्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद टीम दबाव में नजर आ रही थी। ऐसे समय में नंबर चार पर बल्लेबाजी करने उतरे श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 36 गेंदों में 61 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। अय्यर की यह पारी केवल तेज रन बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने मैच की दिशा भी पूरी तरह बदल दी। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने विपक्षी गेंदबाज बेबस नजर आए। परिणामस्वरूप सोबो मुंबई फाल्कन्स ने 20 गेंदें शेष रहते ही पांच विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया। श्रेयस अय्यर की इस शानदार पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। खास बात यह रही कि जिस दिन उन्हें भारतीय टी20 टीम की कप्तानी मिली, उसी दिन उन्होंने बल्ले से भी अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन कर दिया। दूसरी ओर, सूर्यकुमार यादव के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। टी20 विश्व कप विजेता कप्तान होने के बावजूद हालिया खराब फॉर्म के चलते उन्हें राष्ट्रीय टीम से बाहर किया गया है। आईपीएल 2026 में भी उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। हालांकि मुंबई टी20 लीग में उनकी 48 रन की पारी ने यह जरूर दिखाया कि वह अभी भी वापसी की क्षमता रखते हैं। फिलहाल क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें श्रेयस अय्यर पर टिकी हैं, जो अब भारतीय टी20 टीम को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। कप्तानी की शुरुआत जिस अंदाज में हुई है, उसने उनके समर्थकों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।