Chambalkichugli.com

महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना

नई दिल्ली । भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए झारखंड से पहली बार ताजे आमों का वाणिज्यिक निर्यात शुरू हो गया है। राज्य के सिमडेगा जिले में उत्पादित आम्रपाली किस्म के आमों की पहली खेप यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना की गई है। इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उत्पादित आम्रपाली आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। लगभग 1.5 मीट्रिक टन आमों की पहली खेप को कोलकाता के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम भेजा गया। इस उपलब्धि ने राज्य के बागवानी क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं। इस निर्यात की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही है। किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े समूहों ने गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, फसल प्रबंधन और निर्यात मानकों के अनुरूप खेती को अपनाकर यह उपलब्धि हासिल की है। इससे न केवल महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले कृषि उद्यमों को भी नई पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की लगातार बढ़ती मांग का लाभ अब उन राज्यों को भी मिलने लगा है, जो अब तक निर्यात गतिविधियों में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। झारखंड से शुरू हुआ यह निर्यात राज्य के किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें घरेलू बाजार पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। इस सफलता के पीछे किसानों को निर्यात संबंधी जानकारी, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराने के लिए किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। किसानों और निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित कर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम पहली निर्यात खेप के रूप में सामने आया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान दिया जाए तो झारखंड के अन्य फल एवं कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। इससे राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्र के किसान आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत होगी। झारखंड से आमों का यह पहला निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिला कृषकों की क्षमता और संभावनाओं का प्रमाण भी है। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ भारत के बढ़ते कृषि निर्यात अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले समय में इससे राज्य के अन्य किसान समूहों को भी वैश्विक बाजारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

भोपाल में तेज रफ्तार कार का कहर: बाइक को टक्कर मार दो लोगों को किया घायल, गुस्साई भीड़ ने कार पलटी

भोपाल । राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बाइक पर सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कार में जमकर तोड़फोड़ करने के बाद उसे पलट दिया। घटना के चलते अस्पताल परिसर में कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। जानकारी के अनुसार, हादसा कोहेफिजा थाना क्षेत्र स्थित हमीदिया अस्पताल परिसर में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार तेज गति से परिसर के अंदर से गुजर रही थी। इसी दौरान उसने सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में घायल लोगों की पहचान गीता सेन (44), पति प्रहलाद सेन, निवासी पिपलानी और जावेद नामक युवक के रूप में हुई है। दोनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार घायलों को गंभीर चोटें आई हैं और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना के तुरंत बाद अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। लोगों का आरोप था कि कार चालक लापरवाही से और अत्यधिक तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद लोगों में इतना आक्रोश था कि उन्होंने कार को घेर लिया और उसके शीशे तथा अन्य हिस्सों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। देखते ही देखते भीड़ का गुस्सा बढ़ गया और लोगों ने कार को पलट दिया। अस्पताल परिसर में अचानक हुए इस हंगामे से वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत का माहौल बन गया। कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में यातायात भी प्रभावित रहा। घटना की सूचना मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए भीड़ को शांत कराया और क्षतिग्रस्त कार को अपने कब्जे में ले लिया। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई। पुलिस का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। कार चालक से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय वाहन की गति कितनी थी तथा दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही कार में हुई तोड़फोड़ और वाहन पलटने की घटना की भी जांच की जाएगी। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल परिसर में हुई इस घटना ने अस्पताल क्षेत्र में यातायात सुरक्षा और वाहन संचालन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अमेरिका-ईरान तनाव, एआई शेयरों की गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी भारतीय बाजार की दिशा: निवेशक सतर्क

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह महत्वपूर्ण संकेत लेकर आ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। मध्य पूर्व में अमेरिका के ठिकानों पर ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया और इजरायल की लेबनान में बमबारी की खबरें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशक इन geopolitical घटनाओं पर नजर रखकर जोखिम और अवसर का मूल्यांकन करेंगे। कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के मूड पर सीधे असर डाल रही हैं। ब्रेंट क्रूड वर्तमान में 93 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ऊर्जा और इनर्जी सेक्टर से जुड़े शेयरों की चाल को प्रभावित कर सकता है। उच्च तेल मूल्य न केवल ए너지 कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक महंगाई को भी बढ़ा सकता है। अमेरिका में एआई से जुड़े शेयरों की गिरावट ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में शुक्रवार को 5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेष रूप से एनवीडिया, माइक्रोन टेक्नोलॉजी और मार्वल टेक्नोलॉजी जैसी एआई थीम वाले शेयरों में लगभग 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस प्रवृत्ति से भारतीय निवेशक भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि कई एआई और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर वैश्विक निवेश प्रवाह से जुड़े हैं। भारत में निवेशकों की निगाह 12 जून को जारी होने वाले खुदरा महंगाई आंकड़ों पर भी रहेगी। महंगाई के आंकड़े समग्र आर्थिक स्थिति और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर असर डालते हैं। यदि महंगाई दर उम्मीद से अधिक होती है, तो इससे ब्याज दरों में संभावित बदलाव और निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है। बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार नुकसान के साथ बंद हुआ। निफ्टी 181.05 अंक या 0.77 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,366.70 पर रहा। सेंसेक्स 532.40 अंक या 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। हालांकि, कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में तेजी रही। निफ्टी मीडिया 6.69 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.49 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। क्रमशः 1.30 से 2.19 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। यह संकेत है कि निवेशकों ने जोखिम वाले और साइकिलिक सेक्टरों से परहेज किया और सुरक्षित या अधिक स्थिर क्षेत्रों की ओर रुख किया। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एआई शेयरों की चाल और महंगाई के आंकड़े मिलकर निवेशकों की रणनीति और बाजार की उतार-चढ़ाव की सीमा तय करेंगे। इस अवधि में निवेशक सतर्क रहकर बाजार की हर छोटी-सी प्रतिक्रिया का अध्ययन करेंगे। कुल मिलाकर, अगले सप्ताह भारतीय इक्विटी बाजार में सतर्कता और रणनीति की आवश्यकता होगी। निवेशक वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों के आधार पर अपने निवेश निर्णय लेंगे। सुरक्षित सेक्टरों और स्थिर प्रदर्शन वाले शेयरों में निवेश को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि जोखिम वाले क्षेत्र अस्थिर रह सकते हैं।

रिकॉर्ड भाव पर पहुंचा सोना, फिर भी नहीं टूटा ग्राहकों का भरोसा; हल्के गहनों की बढ़ी मांग

नई दिल्ली । शादी-ब्याह के सीजन की शुरुआत होने वाली है, लेकिन इस बार सराफा बाजार में उत्साह के साथ-साथ चिंता भी दिखाई दे रही है। सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं, जिससे आम ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद जरूरत और परंपरा के कारण लोग सोने की खरीदारी से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर सराफा कारोबारी कारोबार में आई मंदी से परेशान नजर आ रहे हैं। भोपाल के सराफा बाजार में ग्राहकों का कहना है कि चाहे कीमतें कितनी भी बढ़ जाएं, शादी और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना मजबूरी बन जाता है। कई ग्राहकों ने कहा कि सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि सामाजिक परंपरा और भविष्य की सुरक्षा का भी माध्यम है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री या विशेषज्ञ निवेश के दूसरे विकल्पों की सलाह दे सकते हैं, लेकिन भारतीय परिवारों में शादी के अवसर पर सोना खरीदने की परंपरा आज भी मजबूत है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों को निवेश के लिए केवल सोने पर निर्भर नहीं रहने और अन्य वित्तीय विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी थी। हालांकि बाजार में इसका सीमित असर दिखाई दे रहा है। ग्राहक मानते हैं कि निवेश के लिए विकल्प हो सकते हैं, लेकिन शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में सोने का महत्व अभी भी कम नहीं हुआ है। दूसरी ओर सराफा व्यापारियों की स्थिति कुछ अलग है। कारोबारियों का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है। पहले जहां लोग भारी और पारंपरिक आभूषण खरीदते थे, वहीं अब हल्के वजन वाले डिजाइनर जेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। कई ग्राहक बजट को ध्यान में रखते हुए कम वजन के आभूषण चुन रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में कारोबार में लगभग 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की जा रही है। उनका कहना है कि शादी सीजन शुरू होने के बावजूद बाजार में अपेक्षित रौनक नहीं दिख रही है। ग्राहक दुकानों तक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन खरीदारी का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा हो गया है। एक और बड़ा बदलाव कैरेट के चयन में देखने को मिल रहा है। पहले जहां अधिकांश ग्राहक 18 कैरेट या उससे अधिक शुद्धता वाले आभूषण खरीदना पसंद करते थे, वहीं अब कम कीमत वाले विकल्पों की मांग बढ़ी है। कई ग्राहक 9 कैरेट और हल्के वजन के गहनों की ओर रुख कर रहे हैं ताकि बजट के भीतर खरीदारी की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही तो आने वाले समय में ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि भारतीय समाज में सोने का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व इतना गहरा है कि इसकी मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। फिलहाल भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों के सराफा बाजारों में यही तस्वीर दिखाई दे रही है। ग्राहक जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं, जबकि व्यापारी बेहतर कारोबार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। शादी सीजन के आगामी महीनों में बाजार की वास्तविक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

नई दिल्ली । जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में केंद्र सरकार की प्रायोजित योजनाओं का सकारात्मक असर अब साफ नजर आने लगा है। युवा बेरोजगार और किसान अब स्थिर आय के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन को एक आकर्षक विकल्प मान रहे हैं। तांडवाल-मुबारकपुरा क्षेत्र के निवासी एहतेशाम ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। इस उद्यम के माध्यम से अब उनकी मासिक आय लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक पहुंच गई है। एहतेशाम के फार्म ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। इस पहल से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ किस प्रकार जमीनी स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद कर सकती हैं। राजौरी के मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. खालिद ने बताया कि मुर्गी पालन जिले में आजीविका का एक संभावित और लाभदायक विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि लाभार्थियों को उद्यम स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हो। डॉ. खालिद के अनुसार, विशेष रूप से शिक्षित बेरोजगार युवा इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। ये युवा अपने घरों के पास स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं और पोल्ट्री फार्म उनके लिए स्थिर आय का स्रोत बन गया है। विभाग लगातार नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है और उन्हें व्यवसाय में स्थायित्व और सफलता दिलाने के लिए सभी संभव साधन प्रदान कर रहा है। एहतेशाम ने बताया कि उनके पिता को इस योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने इसका आवेदन किया। पशुपालन विभाग ने उन्हें मुर्गियों के बच्चों के साथ प्रशिक्षण और लोन उपलब्ध कराए। पहले परिवार के लिए जीवन बहुत कठिन था और घर चलाने के लिए अक्सर कर्ज लेना पड़ता था। अब फार्म शुरू होने के बाद एहतेशाम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनका मासिक आय स्तर 50,000 से 60,000 रुपये तक है और उन्होंने पांच स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है। यह स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक स्पष्ट उदाहरण है। राजौरी जिले में केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग की योजनाओं ने दिखा दिया है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के साथ छोटे स्तर के व्यवसाय भी लाभदायक और टिकाऊ बन सकते हैं। इस सफलता ने स्थानीय युवाओं और किसानों में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी जगाई है। यह कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाएँ केवल लाभार्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके माध्यम से व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी उत्पन्न होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और स्थानीय रोजगार सृजन करना इन योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य हैं। राजौरी के उदाहरण ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और विभागीय सहयोग के माध्यम से छोटे उद्यमी भी बड़े आर्थिक बदलाव ला सकते हैं। मुर्गी पालन का यह मॉडल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवाओं और बेरोजगारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आखिरी मौका: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आज अंतिम दिन

नई दिल्ली । कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए सीबीएसई द्वारा री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन का आवेदन आज अंतिम दिन है। जिन छात्रों को अपने परीक्षा परिणाम पर आपत्ति है, उनके पास अब केवल कुछ घंटे बचे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की समय सीमा आज रात 11 बजकर 59 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस बार पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल के माध्यम से छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जांच कराने का अवसर दिया है। पहले यह समय सीमा 6 जून तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं और उच्च मांग को देखते हुए इसे एक दिन बढ़ा दिया गया। छात्रों के लिए इस प्रक्रिया में सबसे पहले अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद छात्र सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं या किसी विशेष प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन और सत्यापन की यह व्यवस्था मूल्यांकन की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और छात्रों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस वर्ष बोर्ड ने कक्षा 12वीं के परिणाम तैयार करने में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली का उपयोग किया है। कई छात्रों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में धुंधली तस्वीरें या अंकन न दिखने जैसी समस्याओं की शिकायत की थी। यही कारण है कि इस प्रक्रिया के लिए आवेदन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अब तक 70 हजार से अधिक आवेदन दर्ज किए जा चुके हैं। छात्रों को सत्यापन के लिए निर्धारित शुल्क और पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न शुल्क जमा करना होता है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जारी अंक अंतिम और बाध्यकारी होंगे। इसके बाद किसी अन्य स्तर पर अपील की अनुमति नहीं होगी। इसलिए जिन छात्रों को अपने परिणाम पर संदेह है, उनके लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीबीएसई ने छात्रों से अपील की है कि वे समय रहते पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। रात 11:59 के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा और इसके बाद कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कदम छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता का भरोसा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। छात्रों के लिए यह अवसर उनकी मेहनत और प्रयासों की सही पहचान सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। बोर्ड की यह व्यवस्था छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे को बढ़ाने में सहायक साबित होगी। इसलिए कक्षा 12वीं के वे छात्र जिन्होंने अपने अंक या परिणाम पर आपत्ति दर्ज कराई है, उन्हें तुरंत री-इवैल्यूएशन और सत्यापन के लिए आवेदन करना चाहिए। समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

नई दिल्ली। बॉलीवुड के ‘धुरंधर’ और वर्सेटाइल अभिनेता रणवीर सिंह अपने बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ अपने सतरंगी, अनूठे और अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके इस जुदा अंदाज पर जहां लाखों फैंस फिदा रहते हैं, वहीं कई बार उन्हें सोशल मीडिया और इंडस्ट्री के भीतर भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। अब इस फेहरिस्त में नब्बे के दशक की मशहूर अभिनेत्री मधु का नाम भी जुड़ गया है। मधु ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया है कि वह भी एक वक्त पर रणवीर सिंह के पहनावे और उनके फैशन चॉइस पर जमकर हंसती थीं और उन्हें ट्रोल किया करती थीं। अभिनेत्री मधु ने अपने पुराने दिनों और विचारों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में रणवीर सिंह को पब्लिक अपीयरेंस और अवॉर्ड फंक्शन्स में लीक से हटकर कपड़े पहने हुए देखा था, तो उन्हें यह काफी अजीब लगा था। मधु के अनुसार, वह अक्सर रणवीर के लुक को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाती थीं और सोचती थीं कि कोई अभिनेता ऐसे अजीब कपड़े पहनकर बाहर कैसे आ सकता है। उन्होंने माना कि वह भी उन लोगों में शामिल थीं जो रणवीर सिंह के कपड़ों का मजाक उड़ाते थे और उनके स्टाइल स्टेटमेंट को समझ नहीं पाती थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ रणवीर सिंह के प्रति मधु की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। मधु ने कहा कि जैसे-जैसे उन्होंने रणवीर सिंह की फिल्मों को देखा और पर्दे पर उनके दमदार अभिनय को महसूस किया, वैसे-वैसे कपड़ों को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने महसूस किया कि रणवीर सिंह सिर्फ कपड़ों से नहीं, बल्कि अपनी असाधारण अभिनय क्षमता से इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ और ‘गली बॉय’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने मधु को प्रभावित किया। अपने इस बदले हुए नजरिए के बाद, अब अभिनेत्री मधु ने रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह रणवीर सिंह की अभिनय कला की बहुत बड़ी प्रशंसक बन चुकी हैं और भविष्य में यदि मौका मिले, तो वह उनके साथ एक फिल्म में काम करना पसंद करेंगी। मधु ने रणवीर सिंह को मौजूदा दौर का एक बेहद प्रभावशाली और ऊर्जावान कलाकार बताया, जो किसी भी किरदार में पूरी तरह जान फूंकने का दम रखता है। गौरतलब है कि रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें फरहान अख्तर के निर्देशन में बनने वाली ‘डॉन 3’ सबसे प्रमुख है। इसके अलावा वह इंडस्ट्री के कई बड़े प्रोजेक्ट्स का भी हिस्सा हैं। दूसरी तरफ, ‘रोजा’ और ‘जेंटलमैन’ जैसी कल्ट फिल्मों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मधु भी इन दिनों विभिन्न प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यूज के जरिए लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनका यह बयान यह साफ तौर पर दिखाता है कि कला और टैलेंट के आगे अंततः हर तरह की रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रह घुटने टेक देते हैं।

बॉक्स ऑफिस पर राम चरण की 'पेद्दी' का महातूफान: टिकट बिक्री में अपनी ही ब्लॉकबस्टर 'RRR' को पछाड़ा, ढाई दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा टिकट

नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के ग्लोबल सुपरस्टार राम चरण और बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की हालिया रिलीज फिल्म ‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी धुआंधार कमाई और टिकटों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री से तहलका मचा दिया है। फिल्म समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बावजूद, इस एक्शन-ड्रामा फिल्म को देखने के लिए थिएटर्स में दर्शकों का हुजूम उमड़ रहा है। आलम यह है कि टिकट बुकिंग के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुकमाईशो पर इस फिल्म ने कमाई और बुकिंग के कई पुराने कीर्तिमानों को ध्वस्त करते हुए इतिहास रच दिया है। फिल्म ने महज ढाई दिनों के भीतर अपनी सफलता का जो परचम लहराया है, उसने ट्रेड एनालिस्ट्स को भी हैरान कर दिया है। रिलीज के साथ ही ‘पेद्दी’ ने टिकटों की रफ्तार के मामले में राम चरण की ही ऑस्कर विजेता और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘RRR’ की बराबरी कर ली है। बुकमाईशो पर सबसे तेजी से 20 लाख टिकट बेचने वाली फिल्मों की सूची में ‘पेद्दी’ अब ‘RRR’ के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर आ गई है। इस ऐतिहासिक लिस्ट में केवल प्री-रिलीज के जरिए सबसे आगे रहने वाली ‘पुष्पा 2: द रूल’ पहले नंबर पर है, जबकि ‘कल्कि 2898 AD’ डेढ़ दिन के साथ दूसरे और ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूज़न’ दो दिन के रिकॉर्ड के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। ‘पेद्दी’ ने महज 2.5 दिनों में 20 लाख का आंकड़ा पार कर इस सूची में अपनी जगह पक्की की है। फिल्म की इस तूफानी रफ्तार का अंदाजा इसके शुरुआती आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अपनी रिलीज से पहले ही भारी बज के कारण फिल्म के प्री-सेल में रिकॉर्ड 8,74,900 टिकट बिक चुके थे। इसके बाद गुरुवार को ओपनिंग डे पर जनता ने इस पर खूब प्यार लुटाया और पहले दिन 6,51,040 टिकटों की बुकिंग हुई। यह सिलसिला शुक्रवार को भी थमा नहीं और उस दिन भी 3,87,780 टिकट बिक गए। शनिवार की सुबह तक कुल बिक्री का ग्राफ 19,13,720 तक पहुंच चुका था, जो वीकेंड की छुट्टी शुरू होते ही कुछ ही घंटों में 20 लाख के पार चला गया। इस जबरदस्त रिस्पॉन्स के दम पर फिल्म ने केवल दो दिनों में ही दुनिया भर से लगभग 150 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है। बात सिर्फ कुल टिकटों की संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ‘पेद्दी’ ने पीक आवर्स यानी सबसे व्यस्त घंटों के दौरान प्रति घंटा टिकट बिक्री में भी एक नया बेंचमार्क सेट किया है। बुकमाईशो पर इस फिल्म ने अपने सबसे व्यस्ततम समय में एक घंटे के भीतर 47,330 टिकट बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। इस मामले में राम चरण की इस फिल्म ने जूनियर एनटीआर की ‘देवरा’ और खुद राम चरण की ही बहुचर्चित फिल्म ‘गेम चेंजर’ को बहुत पीछे छोड़ दिया है। ‘देवरा’ जहां पीक आवर्स में 38.02K टिकटों के साथ छठे और ‘गेम चेंजर’ 36.74K टिकटों के साथ सातवें नंबर पर है, वहीं ‘पेद्दी’ ने चौथे स्थान पर छलांग लगाई है। पीक आवर्स की इस विशिष्ट टॉप 10 सूची में भी अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ (107.65K) शीर्ष पर है, प्रभास की ‘कल्कि 2898 AD’ (95.71K) दूसरे और ‘सालार’ (54.76K) तीसरे स्थान पर बनी हुई है। ‘पेद्दी’ के बाद इस सूची में ‘राजा साहब’, ‘एमएसजी’, ‘दे कॉल हिम ओजी’ और ‘एसकेवी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि कई फिल्म समीक्षकों ने ‘पेद्दी’ की कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर कुछ कमजोर कड़ियां गिनाई थीं, लेकिन थिएटर्स की तरफ खिंची चली आ रही आम जनता के उत्साह ने यह साफ कर दिया है कि राम चरण का स्क्रीन प्रेजेंस और जाह्नवी कपूर के साथ उनकी नई ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह कामयाब रही है।

"हिम्मत है तो शाहरुख खान से कहकर दिखाओ…" रोमांटिक फिल्मों के लिए अभिनेत्रियों की उम्र पर उठने वाले सवालों पर भड़कीं तापसी पन्नू

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों के करियर की उम्र और उनके किरदारों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब इस गंभीर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के दोहरे रवैये को उजागर किया है। तापसी पन्नू ने खुलासा किया है कि जैसे ही कोई अभिनेत्री 30 वर्ष की उम्र पार करती है, फिल्म गलियारों में उसे रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों के लिए अनुपयुक्त या ‘बड़ी उम्र’ का माना जाने लगता है। अभिनेत्री ने साफ किया कि यह रूढ़िवादी सोच सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा (साउथ इंडस्ट्री) में भी पैर पसारे हुए है। एक हालिया इंटरव्यू में अपने संघर्ष और कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए तापसी पन्नू ने कहा कि वह अपने ‘मिड 20’ (25-26 साल की उम्र) में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनी थीं। इसके बाद किसी भी कलाकार को खुद को साबित करने और एक मजबूत मुकाम हासिल करने में कम से कम तीन से चार साल का कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब तक एक अभिनेत्री इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाती है और एक स्थापित पोजीशन पर पहुंचती है, तब तक उसकी उम्र 30 वर्ष को पार कर जाती है। इसके ठीक बाद मेकर्स और आलोचकों का यह कहना शुरू हो जाता है कि आप अब इतनी यंग नहीं बची हैं कि किसी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा सकें। तापसी पन्नू ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि पर्दे पर रोमांटिक किरदारों को निभाने के लिए हमेशा बहुत कम उम्र की ही लड़की की जरूरत क्यों समझी जाती है। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं के बीच होने वाले इस उम्र के भेदभाव (एजिस्म) पर उंगली उठाते हुए कहा कि यह नियम केवल अभिनेत्रियों पर ही लागू होता है, पुरुष कलाकारों पर नहीं। उन्होंने समाज और इंडस्ट्री के इस सच को सामने रखते हुए कहा कि बड़ी उम्र के पुरुष अभिनेता पर्दे पर बेहद कम उम्र की लड़कियों के साथ रोमांस करते हैं, जिसे सहजता से स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन अभिनेत्रियों के मामले में नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। इस दौरान तापसी ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री का एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वहां के कुछ सीनियर सुपरस्टार्स के साथ फिल्में कीं, तो उसके बाद वहां के युवा अभिनेताओं ने उनके साथ काम करने से साफ मना कर दिया। युवा अभिनेताओं का मानना था कि सीनियर एक्टर्स के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने के बाद तापसी उनके अपोजिट फिट नहीं बैठेंगी। इसी बात पर तीखा पलटवार करते हुए तापसी ने कहा कि क्या किसी में इतनी हिम्मत है कि वह यही बात सुपरस्टार शाहरुख खान से जाकर बोल सके? उन्होंने कहा कि शाहरुख खान जैसे महानायक के साथ काम करने के बाद किसी भी अभिनेत्री का करियर और जीवन पूरी तरह बदल जाता है, वहां उम्र का कोई टैबू नहीं होता, लेकिन अन्य स्तरों पर अभिनेत्रियों को इस रूढ़िवादिता का सामना करना पड़ता है। इंटरव्यू के दौरान तापसी ने सोशल मीडिया से करीब एक साल लंबे ब्रेक के बाद अपनी वापसी पर भी बात की। उन्होंने बताया कि वह वर्चुअल दुनिया में समय बर्बाद करने के बजाय अपनी वास्तविक जिंदगी का आनंद लेना चाहती थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दौर में ब्रांड्स की यह अनिवार्य शर्त होती है कि वे केवल उन्हीं चेहरों के साथ काम करना चाहते हैं जो सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय और दिखाई देते हैं। काम की बात करें तो तापसी आखिरी बार फिल्म ‘अस्सी’ में एक वकील की भूमिका में नजर आई थीं और आने वाले समय में वह ‘वो लड़की है कहां’ और ‘गांधारी’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाती नजर आएंगी।

शिल्पा शिंदे के समर्थन में उतरीं अर्शी खान ने हिना खान पर निकाला पुराना गुस्सा, बीमारी के वक्त मैसेज का जवाब न देने पर लगाया गंभीर आरो

नई दिल्ली। टेलीविजन जगत के सबसे विवादित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 11’ की पुरानी प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए सतह पर आ गई है। अभिनेत्री शिल्पा शिंदे द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान किए गए चौंकाने वाले खुलासे के बाद से ही मनोरंजन जगत में एक नई बहस छिड़ गई है। इस पूरे मामले में जब ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ फेम अभिनेत्री हिना खान ने शिल्पा शिंदे के रुख की आलोचना करते हुए उन पर निशाना साधा, तो दोनों अभिनेत्रियों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। अब इस हाई-प्रोफाइल विवाद में उनकी पूर्व सह-प्रतियोगी अर्शी खान भी शामिल हो गई हैं, जिन्होंने हिना खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शिल्पा शिंदे ने भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के टॉक शो में यह स्वीकार किया कि उन्होंने ‘भाभी जी घर पर हैं’ के शो मेकर्स पर जो सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का आरोप लगाया था, वह पूरी तरह से सच नहीं था बल्कि एक रणनीति का हिस्सा था। शिल्पा ने कहा कि उनके दिल पर यह एक बहुत बड़ा बोझ था, जिसे वह अब उतारना चाहती थीं। शिल्पा के इस कबूलनामे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया। इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर उंगली उठाई, जिसके बाद शिल्पा ने भी हिना पर पलटवार करते हुए उन पर पब्लिसिटी के लिए अपनी बीमारी का इस्तेमाल करने का ताना मार दिया। अब हिना और शिल्पा की इस आपसी जंग में अर्शी खान ने सीधे तौर पर एंट्री ली है और उन्होंने हिना खान पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी तीखी भड़ास निकाली है। अर्शी खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी साझा करते हुए हिना खान के रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। अर्शी ने लिखा कि जब कुछ समय पहले हिना खान बीमार थीं, तो उन्हें बहुत बुरा लगा था और उन्होंने हिना की सेहत के लिए बाकायदा दुआएं भी मांगी थीं। अर्शी के मुताबिक, उन्होंने हिना को सहानुभूति का एक संदेश भी भेजा था, लेकिन हिना खान ने पलटकर यह बताने के लिए एक साधारण सा रिप्लाई तक नहीं किया कि वह अब कैसी हैं। अर्शी खान ने हिना खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे लिखा कि इस महिला की हर एक चीज केवल और केवल पब्लिसिटी बटोरने के लिए होती है। अर्शी ने हिना के पुराने रियलिटी शो के सफर का जिक्र करते हुए उन्हें ‘काले दिल वाली’ तक कह डाला और दावा किया कि वह जो ‘बिग बॉस’ के घर के अंदर थीं, आज भी बिल्कुल वैसी ही हैं। इसके साथ ही अर्शी खान ने शिल्पा शिंदे की सराहना करते हुए लिखा कि शाबाश शिल्पा, हम इस पूरे मामले में सिर्फ तुम्हारे साथ खड़े हैं। शिल्पा शिंदे ने भी अर्शी खान के इस खुले समर्थन को हाथों-हाथ लिया और अर्शी की इस इंस्टाग्राम स्टोरी को अपने अकाउंट पर दोबारा शेयर करते हुए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद व्यक्त किया। गौरतलब है कि ‘बिग बॉस 11’ के दौरान भी अर्शी खान और शिल्पा शिंदे के बीच काफी अच्छा तालमेल देखा गया था और उस वक्त भी यह दोनों कंटेस्टेंट्स घर के भीतर हिना खान की रणनीतियों और उनके व्यवहार के खिलाफ लगातार मुखर रही थीं। शो खत्म होने के बरसों बाद भी इन अभिनेत्रियों के बीच का मनमुटाव कम नहीं हुआ है। दूसरी तरफ, अपने ऊपर हो रही भारी ट्रोलिंग को लेकर शिल्पा शिंदे ने एक वीडियो जारी कर साफ कहा है कि उन्हें लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। शिल्पा का कहना है कि जब वह अतीत में मुश्किल दौर से गुजर रही थीं, तब भी इंडस्ट्री में किसी ने उनका साथ नहीं दिया था और आज भी उन्हें किसी से किसी तरह के समर्थन की उम्मीद नहीं है। बहरहाल, अर्शी खान के इस विवाद में कूदने के बाद से सोशल मीडिया पर हिना खान और शिल्पा शिंदे के फैंस के बीच भी जंग और तेज हो गई है।