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नींद नहीं आती? नासा के बताए 7 तरीके बदल सकते हैं आपकी लाइफस्टाइल

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अच्छी और पूरी नींद लेना आसान नहीं होता। International Space Station पर अंतरिक्ष यात्रियों को हर 90 मिनट में सूर्योदय और सूर्यास्त दिखाई देता है। इससे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी Circadian Rhythm प्रभावित हो जाती है। जब यह प्राकृतिक चक्र बिगड़ता है तो नींद की कमी, थकान, ध्यान में कमी और गंभीर गलतियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने कुछ खास तरीके विकसित किए हैं, जो न केवल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बल्कि पृथ्वी पर रहने वाले आम लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये तरीके शिफ्ट में काम करने वाले लोगों, लगातार यात्रा करने वालों और नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए खास तौर पर मददगार हो सकते हैं। 1. सोने और जागने का समय तय करेंनियमित नींद का सबसे बड़ा नियम है कि रोज एक ही समय पर सोना और जागना। इससे शरीर को पहले से पता होता है कि कब आराम करना है और कब सक्रिय रहना है। अगर समय तय हो तो शरीर धीरे-धीरे उसी लय में ढल जाता है और अनिद्रा या थकान की समस्या कम होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी दिनचर्या में रोशनी, व्यायाम और भोजन का समय भी व्यवस्थित रखें। 2. नींद के बारे में जागरूकता बढ़ाएंअच्छी नींद के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सी आदतें नींद को प्रभावित करती हैं। शाम के समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट कम करनी चाहिए। साथ ही देर रात भारी भोजन से बचें और नियमित व्यायाम करें। ये आदतें शरीर की प्राकृतिक लय को संतुलित रखती हैं और नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाती हैं। 3. सोने के लिए सही वातावरण बनाएंअच्छी नींद के लिए शांत, अंधेरा और ठंडा कमरा सबसे बेहतर माना जाता है। अंतरिक्ष में भी अंतरिक्ष यात्रियों को अलग-अलग सोने के छोटे कमरे दिए जाते हैं, जहां आंखों पर मास्क और कान में प्लग का उपयोग किया जाता है। पृथ्वी पर भी शोर कम रखें, कमरे का तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें और आरामदायक बिस्तर का इस्तेमाल करें। इससे शरीर जल्दी आराम की स्थिति में पहुंचता है। 4. रोशनी का सही उपयोग करेंनासा के वैज्ञानिक बताते हैं कि रोशनी का हमारी नींद पर सीधा असर पड़ता है। अंतरिक्ष स्टेशन पर खास लाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है जिससे दिन और रात का एहसास कराया जा सके। घर पर भी सुबह प्राकृतिक धूप लेना और शाम को तेज रोशनी व स्क्रीन टाइम कम करना फायदेमंद होता है। इससे शरीर को संकेत मिलता है कि अब आराम का समय है। 5. जरूरत पड़ने पर मेलाटोनिन या कैफीन का उपयोगकुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह से मेलाटोनिन या सीमित मात्रा में कैफीन का उपयोग भी मददगार हो सकता है। Melatonin एक प्राकृतिक हार्मोन है जो शरीर को नींद के लिए तैयार करता है। जेट लैग या अनियमित दिनचर्या की स्थिति में इसका उपयोग सर्कैडियन रिदम को संतुलित करने में मदद कर सकता है। 6. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी अपनाएंनींद की समस्या का एक बड़ा कारण मानसिक तनाव भी होता है। ऐसे में स्लीप कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) काफी प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक के जरिए व्यक्ति सोने से पहले मन को शांत करना, नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करना और अच्छी आदतें विकसित करना सीखता है। 7. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेंअगर अन्य उपायों से राहत न मिले तो डॉक्टर की सलाह से कुछ दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना सलाह के कोई भी दवा लेना सुरक्षित नहीं होता।उचित मार्गदर्शन के साथ दवाइयों का उपयोग किया जाए तो वे नींद की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती हैं। अच्छी नींद क्यों है जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार लगातार नींद की कमी से मेटाबॉलिज्म गड़बड़ी, हृदय रोग, पाचन समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसीलिए वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि नियमित दिनचर्या, सही खान-पान और बेहतर नींद की आदतों को अपनाकर न केवल नींद सुधारी जा सकती है बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन भी पाया जा सकता है।

ऊर्जा आपूर्ति को राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ जहाज

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई हैभारत आने वाला जहाज ‘नंदा देवी’ भी दुनिया का सबसे पवित्र समुद्री जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गया है। इससे पहले क्रूज़ लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी इसी जलडमरूमध्य को मजबूती से पार कर चुका है। सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा के बावजूद दोनों पार्टिसिपेंट्स के सीक्वल पर नजर रखी जा रही थी। ईरान की ओर से प्रामाणिक बैठक के बाद इन साथियों को सुरक्षित मार्ग दिया गया, ताकि वे इस नामित समुद्री मार्ग को पार कर सकें। 46 हजार टन से अधिक वजन लेकर आ रही हैं ‘नंदा देवी’आधिकारिक तौर पर जहाज ‘नंदा देवी’ भारत के लिए 46,000 मक्के टन से अधिक कोयला लेकर आ रहा है। यह घरेलू गैस और औद्योगिक इंजीनियरों के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, इस जहाज का सुरक्षित नेतृत्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्व से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर भारतीय नौसेना की सुरक्षा में जहाज ‘शिवालिक’ को भारत लाया जा रहा है। फर्जी का कहना है कि अगले दो दिन में आप किसी भी भारतीय पोर्ट पर पहुंच सकते हैं। संभावना है कि यह जहाज मुंबई या कांडला पोर्ट पर स्थित होगा। समुद्री जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और नौसेना की दिशा में सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रहा है। मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुई अहम बातचीतइन खिलाड़ियों की सुरक्षित छुट्टियों के पीछे उच्च सरकारी छात्रवृत्ति का प्रयास भी अहम रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के बीच माल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अहम बातचीत हुई। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित मार्ग मिलने का रास्ता साफ हो गया। ईरान ने भारतीय खिलाड़ियों को संकेत के संकेत दिए थे सुरक्षित मार्गइस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी संकेत दिया कि बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय छात्रों को जल्द ही होर्मुज जल्दरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के इस क्षेत्र में साझा हित हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध के बाद की स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है, इसलिए दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हैं। इससे एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची ने भी कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के सहयोगियों को इस समुद्री मार्ग से यात्रा की अनुमति दे दी है। दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्गहोर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन परिवहन में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस के सहयोगियों का इसी रास्ते से दबदबा है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार को प्रभावित कर सकता है। फारस की खाड़ी में 28 भारतीय खिलाड़ियों की निगरानीइस बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में इस समय भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद हैं। इन कर्मचारियों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार इन खिलाड़ियों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्सों में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक इंजीनियर शामिल हैं। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिर स्थिति में भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शामिल है। ऐसे में ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ का सुरक्षित बाहर जाना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

उज्जैन में गैस संकट: रेस्टोरेंट संचालकों ने डीजल लकड़ी भट्टियों का सहारा लिया, 10 दिन की वेटिंग

उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में रेस्टोरेंट संचालकों और व्यवसायियों के लिए गैस संकट एक बड़ी चुनौती बन गया है। इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति के चलते पूरे देश में एलपीजी गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। उज्जैन सहित प्रदेश के कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है। इससे रेस्टोरेंट संचालकों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि शहर के लगभग 700 रेस्टोरेंट प्रतिदिन सिलेंडर पर ही निर्भर रहते हैं। गैस संकट के कारण रेस्टोरेंट संचालक अब डीजल और लकड़ी की भट्टियों का विकल्प तलाशने लगे हैं। हालांकि फैक्ट्री संचालकों के पास अचानक इतनी डिमांड बढ़ गई कि डिलीवरी में 10 से 15 दिन का समय लग रहा है। ढांचा भवन अवंतीपूरा कोयला फाटक और ढाबा रोड पर स्थित कई फैक्ट्री में डीजल भट्टियां 20–22 हजार रुपये में बन रही हैं जबकि लकड़ी की भट्टियां 60 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक में मिल रही हैं। राजेश शर्मा जो ढांचा भवन स्थित डायमंड फैक्ट्री के संचालक हैं ने बताया कि गैस की दिक्कत आने के बाद दो दिन में बड़ी संख्या में लोग डीजल भट्टियों के लिए पूछताछ करने आ रहे हैं। पहले महीने में एक या दो लोग ही आते थे अब रोजाना 10–15 लोग भट्टियों की जानकारी लेने आते हैं। हमारी क्षमता सीमित है इसलिए डिलीवरी में 10 दिन तक का समय लग रहा है उन्होंने कहा। रेस्टोरेंट संचालक महावीर जैन ने बताया कि उनके अस्पताल की कैंटीन में प्रतिदिन 6 सिलेंडर लगते हैं। सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने दो ड्रम की भट्टियां और 1.40 हजार रुपये कीमत वाली ब्लोवर वाली भट्टियों की बुकिंग करवाई है। आर्डर के तीन दिन बाद भी हमें भट्टी सप्लाई नहीं हो पा रही है। लेकिन खाना बनाना जरूरी है इसलिए विकल्प अपनाना पड़ रहा है उन्होंने कहा। इसी तरह लकड़ी भट्टियों का विकल्प चुनने वालों में लोकेश भाकचंदानी शामिल हैं। उन्होंने कहा एलपीजी मिल नहीं रही लेकिन रेस्टोरेंट बंद नहीं कर सकते। इसलिए जो विकल्प मिलेगा वही करेंगे। इसके अलावा शहर में इंडेक्शन कुकर की बिक्री भी बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में पहले रोजाना 3–5 इंडेक्शन बिकते थे लेकिन अब 20–25 इंडेक्शन रोजाना बिक रहे हैं। उज्जैन में प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए आते हैं और उनमें से लगभग एक लाख बाहर से आए लोग विभिन्न रेस्टोरेंट में भोजन करते हैं। इस वजह से गैस की किल्लत का असर पूरे शहर के रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ा है। प्रदेश में एलपीजी गैस की ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम भी सही ढंग से काम नहीं कर रही है। कई जगह वेटिंग 7–8 दिन तक पहुंच गई है और कई बार बुकिंग के बावजूद सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इससे उपभोक्ता और व्यवसाय दोनों ही परेशान हैं।

3 बार ‘तलाक’ बोलकर पत्नी को छोड़ा, दूसरी शादी कर लाया पति: खंडवा में ट्रिपल तलाक केस, पति समेत सास-ससुर पर FIR

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के खंडवा में ट्रिपल तलाक कानून से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एक 31 वर्षीय महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति, सास और ससुर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला का आरोप है कि मामूली विवाद के बाद पति ने तीन बार “तलाक” कहकर उसे मायके छोड़ दिया और बाद में दूसरी शादी कर ली। मामला खंडवा के पदमनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, सिंघाड़ तलाई इलाके में रहने वाली महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उसका निकाह मार्च 2021 में उसी मोहल्ले में रहने वाले सलमान से हुआ था। शादी के शुरुआती कुछ महीनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन करीब छह महीने बाद पति और ससुराल पक्ष का व्यवहार बदलने लगा। महिला का आरोप है कि पति अक्सर उसके साथ मारपीट करता था और सास-ससुर भी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। पीड़िता के मुताबिक एक दिन मामूली कहासुनी के बाद पति ने गुस्से में तीन बार “तलाक-तलाक-तलाक” कह दिया और उसे मायके छोड़ आया। इसके बाद वह उसे लेने कभी नहीं आया। महिला का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से वह मायके में ही रह रही है और अब उसे पता चला कि पति ने दूसरी शादी कर ली है और घर में दूसरी पत्नी को ले आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पति जिला अस्पताल में आउटसोर्स पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करता है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति सलमान, सास नसरीन और ससुर शेख रफीक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों पर दहेज प्रताड़ना, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार का संरक्षण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई हैं। इस कानून के तहत ट्रिपल तलाक को अपराध माना गया है और दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। पदमनगर थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं पीड़िता ने न्याय की मांग करते हुए कहा है कि उसे ससुराल पक्ष से काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी और अब उसे इंसाफ चाहिए। Keywords: खंडवा ट्रिपल तलाक केस, तीन तलाक मामला, पति पर FIR, मुस्लिम महिला अधिनियम, खंडवा पुलिस, दहेज

तेल संकट का असर एयरलाइन किराए पर: ग्वालियर-बेंगलुरु फ्लाइट में एयर इंडिया ने जोड़ा 300 रुपए सरचार्ज, 20% छूट का दावा

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Air India ने ग्वालियर से Bengaluru जाने वाली अपनी फ्लाइट के टिकट पर 300 रुपए का नया सरचार्ज जोड़ दिया है। हालांकि एयरलाइन की ओर से इस अतिरिक्त शुल्क की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। दिलचस्प बात यह है कि सरचार्ज जोड़ने के साथ ही एयरलाइन टिकटों पर 20 प्रतिशत तक छूट देने का दावा भी कर रही है। इस वजह से यात्रियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई यात्रियों का कहना है कि पहले टिकट की मूल कीमत बढ़ाई जाती है और फिर उस पर छूट का प्रचार करके वास्तविक बढ़ोतरी को कम दिखाने की कोशिश की जाती है। एयरलाइन के स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह सरचार्ज पिछले दो दिनों से लागू किया गया है और फिलहाल 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस को अपने संचालन खर्च को संतुलित करने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। दरअसल, वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में अस्थिरता के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लागत भी बढ़ रही है। विमानन उद्योग में ईंधन खर्च संचालन लागत का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए कीमतों में बदलाव का असर सीधे टिकट किराए पर पड़ता है। ग्वालियर से फिलहाल IndiGo की नियमित उड़ानें Delhi और Mumbai के लिए संचालित हो रही हैं, जबकि बेंगलुरु रूट पर एयर इंडिया की सेवा उपलब्ध है। ऐसे में इस रूट पर लगाए गए नए सरचार्ज ने यात्रियों का ध्यान खींचा है और टिकट कीमतों में बदलाव चर्चा का विषय बन गया है। यात्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले समय में अन्य रूट्स पर भी एयरलाइंस इसी तरह के अतिरिक्त शुल्क या किराया संशोधन कर सकती हैं।

वनडे इतिहास की सबसे सुस्त पारी, 36 रन बनाने के लिए खेल डाली 174 गेंद, मैच देखते हुए सो गए फैंस!

नई दिल्ली। मॉर्डन डे क्रिकेट में आज फैंस हर गेंद पर चौका-छक्का देखना पसंद करते हैं. अगर ऐसा न हो तो उस मैच को बोरिंग मान लिया जाता है. यही कारण है कि बदलते दौर में कुछ ऐसे रिकॉर्ड बने जो कल्पना से परे था. चाहे वो फास्टेस्ट फिफ्टी का रिकॉर्ड हो या फिर सेंचुरी का, लेकिन जब क्रिकेट फल-फुल रहा था तो मामला बिल्कुल अलग था. शुरुआती दौर में क्रिकेट में सिर्फ टेस्ट फॉर्मेट का चलन था. उसके बाद 1971 में वनडे की शुरुआत हुई. जिसके बाद लंबे समय तक इस फॉर्मेट का बोलबाला रहा. वनडे फॉर्मेट में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हुए. उन्हीं में से एक नाम भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर का भी है. वैसे तो गावस्कर का क्रिकेटिंग करियर उपलब्धियों से भरा हुआ है, लेकिन उनके नाम एक रिकॉर्ड ऐसा भी है जो शायद ही कभी टूट पाए. ये रिकॉर्ड है वनडे क्रिकेट में सबसे धीमी पारी खेलने का. भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज सुनील गावस्कर ने इंग्लैंड के खिलाफ साल 1975 में वनडे इतिहास की सबसे धीमी पारी खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था. विश्व कप के इस मुकाबले में सुनील गावस्कर ने 36 रन बनाने में 174 गेंद खेल डाली थी. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट महज 20 का रहा और पारी में वह सिर्फ 1 चौका ही लगा पाए. सुनील गावस्कर का ये रिकॉर्ड मॉर्डन डे क्रिकेट में अब शायद ही कभी टूट पाए. क्रिस गेल ने गेंदबाजों को जमकर तोड़ा थाक्योंकि, जिस तरह की पारी सुनील गावस्कर ने खेली थी अगर आज के दौर में कोई क्रिकेटर ऐसा करता है तो उसका करियर बर्बाद हो जाएगा. आज के दौर में खिलाड़ियों का करियर और उसकी प्रतिभा इस बात पर निर्भर करती है कि उसका स्ट्राइक रेट का ग्राफ कितना ऊंचा है. यही वजह है कि वनडे क्रिकेट में कम से कम सुनील गावस्कर के सबसे धीमी पारी के रिकॉर्ड का टूटना नामुमकिन है. भारत-इंग्लैंड के उस मैच में क्या हुआ था?सुनील गावस्कर के वनडे में सबसे धीमी पारी वाले मैच की बात करें तो इंग्लैंड ने टीम इंडिया को 202 रन से हराया था. मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डेनिस एमिस की शतकीय पारी से 4 विकेट के नुकसान पर 334 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था. इंग्लैंड के इस स्कोर के जवाब में टीम इंडिया पूरे 60 ओवर खेलकर 3 विकेट के नुकसान 132 रन ही बना पाई थी. भारत के लिए सुनील गावस्कर के अलावा मैच में गुंडप्पा विश्वनाथ ने 37 रनों का योगदान दिया था.

सीएम डॉ. मोहन यादव के बैतूल-कटनी दौरे, भोपाल में गैस कालाबाजारी पर पुलिस कार्रवाई और TET परीक्षा को लेकर शिक्षक आंदोलन का उबाल

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव आज यानी 14 मार्च को बैतूल और कटनी जिलों के दौरे पर रहेंगे। उनका कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुजालपुर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल होने से शुरू होगा जिसमें वे नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री भोपाल से बैतूल के लिए रवाना होंगे। बैतूल आरंभ वे सबसे पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निवास पर जाएंगे। दोपहर 1:15 बजे सीएम बैतूल से कटनी जिले के बरही क्षेत्र में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान वे किसानों को संबोधित करेंगे और उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। शाम 5:40 बजे बरही से जबलपुर के लिए रवाना होने के बाद डुमना एयरपोर्ट से 6:30 बजे तक भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम है। इसी बीच राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। थाना कोलार रोड पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक पिकअप वाहन को रोककर जांच की जिसमें इंडेन कंपनी के कुल 25 घरेलू गैस सिलेंडर बरामद हुए। यह सिलेंडर घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित थे लेकिन इन्हें काले बाजार में बेचने के इरादे से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने वाहन और सिलेंडर दोनों जब्त कर पूरे मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। इसी समय प्रदेशभर में शिक्षक समाज में TET परीक्षा को लेकर उबाल देखा जा रहा है। शिक्षकों ने कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे हैं जबकि सुसनेर के पूर्व बीजेपी विधायक मुरलीधर पाटीदार ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को पत्र लिखा लिखकर TET परीक्षा के आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि 25 साल से अधिक अनुभव रखने वाले संविदा शिक्षकों ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूर्व विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि TET परीक्षा के आदेश निरस्त नहीं किए गए और शिक्षकों के उचित वातावरण और सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षक समाज उग्र आंदोलन की ओर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षक समाज का पूरा समर्थन उनके आंदोलन के साथ रहेगा और जरूरत पड़ने पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम में संशोधन की भी मांग की जाएगी। राज्य प्रशासन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ मुख्यमंत्री के दौरे और कार्यक्रम हैं वहीं दूसरी ओर शिक्षक आंदोलन और गैस कालाबाजारी जैसे मुद्दे समाज में असंतोष बढ़ा रहे हैं। प्रशासन के लिए इन सभी घटनाओं को संतुलित ढंग से संभालना एक बड़ी जिम्मेदारी साबित हो सकती है।

देश में गहराया LPG संकट: बिहार में बढ़ी लकड़ी-कोयले की मांग, राजस्थान के होटल लकड़ी पर बना रहे खाना; कई राज्यों में गोदामों पर छापे

नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के असर अब भारत में भी दिखाई देने लगे हैं। देशभर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत तेजी से बढ़ रही है। कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि बिहार में लोग लकड़ी और कोयले पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जबकि राजस्थान के कई होटल और ढाबे गैस की जगह लकड़ी की भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में लोग रात से ही गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर के इंतजार में बैठे रहे। कई जगहों पर घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर की कालाबाजारी भी सामने आई है। करीब 2000 रुपए का कॉमर्शियल सिलेंडर कुछ इलाकों में 4000 रुपए तक बेचा जा रहा है। जमाखोरी की शिकायतों के बाद सरकार ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में गैस गोदामों पर छापेमारी शुरू कर दी है। पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है।पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है। तेज धूप में घंटों इंतजार करने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हरियाणा में गैस डिलीवरी में 20 से 25 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग और फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने से लोग सीधे एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण होटल और ढाबा संचालक इंडक्शन हीटर खरीदने लगे हैं। दुकानदारों के अनुसार पहले हफ्ते में एक-दो इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब रोज 8 से 15 तक बिक रहे हैं। इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के अधिकारियों की हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की निगरानी कर रही है। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू किया गया है। सिलेंडर की डिलीवरी में OTP और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम भी बदल दिए हैं। अब एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिन कर दिया गया है। वहीं सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और उत्पादन में करीब 28% तक बढ़ोतरी की गई है। इसके बावजूद जमीनी हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बनी हुई हैं और होटल-ढाबा संचालकों ने खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक एलपीजी सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है।

रिपोर्ट का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस बढ़ाने के लिए मेटा में छंटनी संभव

नई दिल्ली। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी में शामिल मेटा प्लेटफॉर्म एक बार फिर बड़े स्तर के कर्मचारियों के ड्रॉ पर विचार कर रही है। कंपनी का फोकस अब तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल टेक्निकल टेक्नोलॉजी (मैटोलिट) सेक्टर पर है और इसी वजह से वह अपने प्लांट को नई कंपनी से सलाह देने की योजना बना रही है। मीडिया विद्वान का कहना है कि मेटा अपने आर्किटेक्चर और डेटा सेंटर की मजबूती को मजबूत करने के लिए भारी निवेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी की लागत कम करने और कार्यकुशल बनाने की दिशा में भी अधिक कदम उठाए जा सकते हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के अंदर चल रही चर्चाओं में कर्मचारियों की बड़ी कटौती पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटा के कुल कर्मचारियों में से लगभग 20 प्रतिशत या उससे अधिक की निकासी की संभावना बनी हुई है। करीब 16 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकटदिसंबर के अंत तक मेटा में करीब 79,000 कर्मचारी कर्मचारी थे। यदि प्रस्तावित अधिसूचना लागू होती है तो लगभग 16,000 कर्मचारियों की नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इस रिपोर्ट में केवल विशाल पर आधारित रेटिंग के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अभी तक बड़े पैमाने पर खींचने या समय लेने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग तरह के आंकड़ों से यह आकलन किया है कि किस तरह के ऑपरेशन को और अधिक कुशल बनाया जा सकता है और किस तरह के ढांचे का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। मेटा में पहले भी हो चुका है बड़ा ड्रॉयदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को खींचा जाता है तो यह मेटा के इतिहास की सबसे बड़ी पुनर्स्थापना प्रक्रिया हो सकती है। इससे पहले भी कंपनी की लागत के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। 2022 और 2023 के दौरान मेटा ने दो चरणों में 21,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। उस समय कंपनी ने इसे “ईयर ऑफ फिशिएंसी” यानि कि प्रशिक्षण की रणनीति का हिस्सा बताया था। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग कंपनी को जनरेटिव फिल्म के क्षेत्र में मजबूत स्थिति के लिए तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि नीतिगत रणनीति के तहत आर्किटेक्चरल टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई जा रही है। मस्जिद से लेकर सभी प्रकार के प्रभावशालीइस बीच इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टैनली की टॉयलेट रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल के गोदाम पर सिक्किम के प्रभाव से कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मशीनों को ऑटोमेट किया जा सकता है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पूरी तरह से ऑर्डर होने की संभावना कम है। इसके बजाय कई कर्मचारी नए प्रकार के कर्मचारियों में स्थानांतरण हो सकते हैं और भविष्य में ऐसे रोजगार भी पैदा हो सकते हैं जो अभी मौजूद नहीं हैं। हालांकि टेक इंस्टीट्यूट के कुछ दिग्गजों का मानना ​​है कि अगले 12 से 18 महीनों में कंप्यूटर आधारित कई व्हाइट-कॉलर की हिस्सेदारी काफी हद तक ऑटोमेटेड हो सकती है। टेक इंडस्ट्री में ड्रॉ का जबरदस्त ट्रेंडमेटा इको कंपनी नहीं है जो निवेश के लिए काम में बदलाव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ओरेकल ने भी अपने स्मार्टफोन डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए 20,000 से 30,000 बेरोजगारी खत्म करने की योजना बनाई है। वहीं ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न ने भी हाल ही में लगभग 16,000 कर्मचारियों के लिए प्लॉट आधारित रिवाइवल योजना की घोषणा की है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि आने वाले वर्षों में टेक सोसायटी की रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इंटरमीडिएट पारंपरिक प्रयोगशालाओं से अधिकांश ध्यान स्टूडियो, क्लाउड स्टूडियो और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र पर केंद्रित कर रहे हैं।

मध्य पूर्व तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में हफ्तेभर में 6% गिरावट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई और बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा। सप्ताह के दौरान Nifty 50 में 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 2.06 प्रतिशत टूटकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं BSE Sensex 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 के स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक चिंताओं को बढ़ाती है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावटइस गिरावट का सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा। Nifty Auto Index में इस सप्ताह करीब 10 से 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। ऑटो इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके अलावा सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसानशुक्रवार को बाजार में आई तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई। अनुमान के मुताबिक सिर्फ एक कारोबारी सत्र में ही निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए। वहीं व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिली। Nifty Midcap 100 4.59 प्रतिशत गिर गया, जबकि Nifty Smallcap 100 में 3.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में बढ़ा डर और उतार-चढ़ावविश्लेषकों के अनुसार बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ रही है। इसका संकेत India VIX से भी मिलता है, जो 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है। यह आने वाले समय में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। इसके बाद 23,300 और 23,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। वहीं Bank Nifty के लिए 53,500 पहला सपोर्ट स्तर है और इसके नीचे 53,000 का स्तर अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर 54,000 और 54,300 के स्तर को प्रमुख रेजिस्टेंस बताया जा रहा है। कच्चे तेल और गैस की चिंता बढ़ीविशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, खासकर उन शहरों में जहां सीएनजी वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल होता है। रुपये पर भी बढ़ा दबाववैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा भी कमजोर हुई है। भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इस हफ्ते बाजार में आई करीब 6 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है, और फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर रहने वाली है।