भोपाल का मौसम अपडेट: 5 जून 2026 को गर्मी के साथ हल्की बारिश की संभावना, तापमान 35°C तक पहुंचने के आसार

नई दिल्ली । भोपाल में 5 जून 2026 को मौसम आमतौर पर गर्म रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार दिन के समय तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर सकती है, हालांकि दोपहर के बाद हल्की बारिश या फुहारें राहत दे सकती हैं। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। सुबह से ही गर्मी का असर महसूस किया जा सकता है, लेकिन बीच-बीच में बादलों की आवाजाही बनी रहने की संभावना है। दोपहर में बदल सकता है मौसम का मिजाज मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दोपहर के समय हल्की धूप के साथ बादल छाने की स्थिति बन सकती है। इस दौरान कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की भी संभावना है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि यह बारिश ज्यादा देर तक रहने वाली नहीं होगी, लेकिन इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिल सकती है। मौसम में इस तरह का उतार-चढ़ाव मानसून के नजदीक आने के संकेत भी देता है। गर्मी और उमस से बढ़ सकती है परेशानीदिन के पहले हिस्से में तेज धूप के कारण गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है। खासकर दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने वालों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मौसम में पर्याप्त पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और धूप से बचाव करना जरूरी है, ताकि लू या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचा जा सके। रात में मौसम होगा अपेक्षाकृत सुहावनादिनभर की गर्मी के बाद शाम और रात के समय मौसम कुछ हद तक सुहावना हो सकता है। तापमान में गिरावट आने से लोगों को राहत मिलेगी और हल्की ठंडक का एहसास हो सकता है। हालांकि वातावरण में नमी बनी रह सकती है, जिससे हल्की चिपचिपाहट महसूस हो सकती है। फिर भी दिन की तुलना में रात का मौसम अधिक आरामदायक रहने की संभावना है। कुल मिलाकर भोपाल का मौसम 5 जून 2026 को गर्म और उमस भरा रहने का अनुमान है, लेकिन दोपहर में हल्की बारिश की संभावना लोगों के लिए राहत लेकर आ सकती है। बदलते मौसम के इस दौर में सतर्क रहना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।
“जीवन का आधार है पर्यावरण” – पृथ्वी को बचाने का सामूहिक संकल्प

पर्यावरण दिवस 2026 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध की याद दिलाता है। यह दिन पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और हरित जीवनशैली अपनाने का संदेश देता है। पर्यावरण: जीवन की असली नींवपर्यावरण केवल पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों और हवा-पानी का नाम नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण जीवन प्रणाली है जिसमें मनुष्य, जीव-जंतु और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि यदि प्रकृति संतुलन बिगड़ गया तो मानव जीवन भी संकट में पड़ सकता है। आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, वनों की कटाई, प्लास्टिक कचरा और जलवायु परिवर्तन पृथ्वी के लिए गंभीर खतरे बन चुके हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य बन जाता है। पर्यावरण दिवस का उद्देश्यविश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। इस दिन दुनिया भर में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जागरूकता रैलियां और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि विकास तभी सार्थक है जब वह प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर हो। बढ़ता प्रदूषण और चुनौतीआज शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। वाहनों का धुआं, औद्योगिक कचरा और प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। नदियों का प्रदूषण और भूजल स्तर का गिरना भी चिंता का विषय है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, पानी और हरियाली एक सपना बनकर रह जाएगी। समाधान की दिशा में कदमपर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं। जैसे-अधिक से अधिक वृक्षारोपण करनाप्लास्टिक का उपयोग कम करनासार्वजनिक परिवहन को अपनानाजल और ऊर्जा की बचत करनाकचरे का सही प्रबंधन करनाइसके साथ ही लोगों को पर्यावरण शिक्षा देना भी जरूरी है ताकि बचपन से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके। “हरित भारत” का सपनाभारत जैसे देश में जहां प्रकृति और संस्कृति का गहरा संबंध है, वहां “हरित भारत” का सपना केवल नारा नहीं बल्कि एक जरूरत है। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में पृथ्वी फिर से हरी-भरी हो सकती है। पर्यावरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पृथ्वी हमारी साझा धरोहर है। इसे बचाना केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की आदत होनी चाहिए। यदि हम आज जागरूक हो गए, तो भविष्य सुरक्षित रहेगा। आइए, इस पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पृथ्वी सौंपेंगे।
ज्योतिषाचार्य की सलाह: शुक्रवार के उपाय से बदल सकती है किस्मत, दूर होंगे आर्थिक संकट

नई दिल्ली: सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, इन उपायों से न केवल आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि भी बढ़ती है। झाड़ू का दान: दरिद्रता दूर करने का सरल उपायज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्रवार के दिन मंदिर में झाड़ू का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसे गुप्त दान की श्रेणी में रखा गया है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। शिवलिंग पर गुलाब अर्पित करेंशुक्रवार को शिवलिंग पर गुलाब का फूल चढ़ाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुलाब में माता पार्वती का वास होता है। इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। कौड़ियां और गोमती चक्र से बढ़ेगा धन योगमां लक्ष्मी को कौड़ियां और गोमती चक्र अर्पित करना भी शुभ माना गया है। ज्योतिष के अनुसार इससे आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और धन प्राप्ति के नए योग बनते हैं। यह उपाय समृद्धि बढ़ाने में सहायक माना जाता है। चावल और गन्ने के रस का उपायशुक्रवार को दोनों हाथों में चावल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। इससे घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होने की मान्यता है। वहीं शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में खुशहाली और आर्थिक मजबूती आने की बात कही जाती है। अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ है बेहद प्रभावीज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्रवार के दिन अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। नियमित पाठ से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में धन, वैभव तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर श्रद्धा और विश्वास के साथ इन सरल उपायों को अपनाया जाए, तो जीवन में आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से समृद्धि के नए रास्ते खुल सकते हैं।
तुला राशि का आज का राशिफल: मिला-जुला दिन, कार्यक्षेत्र में सतर्कता जरूरी

नई दिल्ली । तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव के चलते मिला-जुला रहने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है, जिससे कामकाज में थोड़ी अस्थिरता महसूस हो सकती है। ऐसे में किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में लेने से बचने की सलाह दी गई है। ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार आज का दिन धैर्य और संतुलन बनाए रखने का है। नौकरीपेशा और व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी, क्योंकि छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय फिलहाल टालना बेहतर रहेगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके। कार्यस्थल पर सोच-समझकर उठाएं कदमतुला राशि के जातकों को आज अपने कार्यक्षेत्र में पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना और किसी भी विवाद से दूर रहना लाभकारी होगा। व्यापार से जुड़े लोगों को निवेश या नए सौदों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। आज का दिन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठीक है, लेकिन उन्हें अंतिम रूप देने से पहले दोबारा विचार करना जरूरी रहेगा। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी आर्थिक या मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। सेहत और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरतआज तुला राशि वालों को अपनी सेहत और खानपान पर खास ध्यान देना होगा। अनियमित दिनचर्या या लापरवाही से शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही मानसिक तनाव से बचने के लिए खुद को शांत रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज का दिन संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और सकारात्मक सोच के साथ बेहतर बनाया जा सकता है। अत्यधिक भागदौड़ या तनावपूर्ण परिस्थितियों से दूरी बनाए रखना ही सही रहेगा। मानसिक संतुलन और संयम से मिलेगा लाभतुला राशि के जातकों के लिए आज का सबसे बड़ा मंत्र धैर्य और संयम है। भावनाओं में बहकर कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक बहस या विवाद से दूरी बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। दिन के दूसरे हिस्से में स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है, लेकिन इसके लिए सकारात्मक सोच और शांत व्यवहार जरूरी होगा। यदि आप संतुलन बनाए रखते हैं तो दिन सामान्य रूप से सफल और स्थिर रह सकता है। आज का दिन तुला राशि के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर कार्यक्षेत्र में सतर्कता जरूरी है, वहीं दूसरी ओर संयम और धैर्य से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। सेहत और मानसिक शांति पर ध्यान देकर ही दिन को सफल बनाया जा सकता है।
आज का राशिफल 5 जून 2026: कन्या राशि वालों के लिए बड़ी सफलता के संकेत, जानें सभी राशियों का हाल

नई दिल्ली । 5 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार मिश्रित परिणाम लेकर आ रहा है। कुछ राशियों के लिए यह दिन तरक्की और लाभ का संकेत दे रहा है, वहीं कुछ के लिए संयम और सतर्कता जरूरी होगी। मेष से कर्क राशिफल: आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का दिनमेष राशि: अधिकारों की रक्षा में सफलता मिलेगी। सरकारी कामों में प्रगति संभव है।वृष राशि: भाग्य का साथ मिलेगा, करियर में सकारात्मकता बनी रहेगी।मिथुन राशि: सेहत और नियमों पर ध्यान दें, खर्च बढ़ सकता है।कर्क राशि: घर में खुशियों का माहौल रहेगा और आर्थिक कार्यों में सुधार होगा। सिंह से वृश्चिक राशिफल: सावधानी और अवसर दोनोंसिंह राशि: करियर में धैर्य रखें और खर्च पर नियंत्रण जरूरी है।कन्या राशि: मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा, व्यापार में लाभ के योग हैं और मनोबल ऊंचा रहेगा।तुला राशि: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और खरीदारी के अवसर मिलेंगे, लेकिन विवाद से बचें।वृश्चिक राशि: व्यापार में तेजी आएगी और प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलेगी। धनु से मीन राशिफल: प्रगति और संतुलन का समयधनु राशि: पारिवारिक और आर्थिक जीवन में सुधार होगा।मकर राशि: रचनात्मक कार्यों में सफलता और नए अवसर मिलेंगे।कुंभ राशि: धैर्य और अनुशासन से आगे बढ़ें, खर्च नियंत्रित रखें।मीन राशि: आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। 5 जून 2026 का दिन कई राशियों के लिए शुभ संकेत दे रहा है, खासकर कन्या, तुला और मीन राशि वालों के लिए यह दिन लाभदायक साबित हो सकता है। कुछ राशियों को संयम और सतर्कता के साथ निर्णय लेने की सलाह दी गई है।
रिकॉर्ड IPO, लेकिन नया निवेश कम: भारतीय बाजार से विदेशी कंपनियों की बड़ी पूंजी निकासी ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की गतिविधियां पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं। लगातार बढ़ती लिस्टिंग, निवेशकों की मजबूत भागीदारी और ऊंचे वैल्यूएशन ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक पूंजी बाजारों में शामिल कर दिया है। हालांकि इस तेजी के बीच एक ऐसा रुझान उभर रहा है, जिसने बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कई विदेशी कंपनियां अपनी भारतीय इकाइयों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कर रही हैं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य नया निवेश जुटाना नहीं बल्कि अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बेचकर पूंजी निकालना दिखाई दे रहा है। हाल के वर्षों में बाजार में आई कई बड़ी लिस्टिंग में देखा गया है कि कंपनियों ने नए शेयर जारी करने के बजाय ऑफर फॉर सेल मॉडल को प्राथमिकता दी। इस व्यवस्था में कंपनी के कारोबार के लिए नई पूंजी नहीं आती, बल्कि मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचकर धन प्राप्त करते हैं। परिणामस्वरूप बाजार से जुटाई गई बड़ी राशि सीधे पुराने निवेशकों या मूल कंपनियों के पास पहुंच जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में मिल रहा प्रीमियम वैल्यूएशन इस प्रवृत्ति की सबसे बड़ी वजह है। वैश्विक स्तर पर कई कंपनियों को अपने घरेलू बाजारों की तुलना में भारत में कहीं अधिक मूल्यांकन मिल रहा है। ऐसे में विदेशी कंपनियों के लिए अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर आकर्षक लाभ अर्जित करना स्वाभाविक रणनीति बन गया है। इससे उन्हें नकदी प्राप्त होती है और निवेश पर बेहतर रिटर्न भी हासिल होता है। यह स्थिति तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब बड़ी संख्या में आईपीओ का उद्देश्य विस्तार, उत्पादन क्षमता बढ़ाने या रोजगार सृजन के लिए पूंजी जुटाना न होकर केवल हिस्सेदारी का हस्तांतरण बन जाए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिकांश लिस्टिंग इसी दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो आईपीओ बाजार की मूल अवधारणा पर सवाल उठ सकते हैं। आम तौर पर आईपीओ को कंपनियों के विकास, नए निवेश और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का माध्यम माना जाता है। दूसरी ओर, इस प्रवृत्ति का असर विदेशी मुद्रा प्रवाह और रुपये की स्थिति पर भी पड़ सकता है। जब बड़ी मात्रा में धन विदेशी मूल कंपनियों के पास वापस जाता है, तो पूंजी निकासी का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि इसका प्रभाव तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन दीर्घकाल में यह मुद्रा बाजार और निवेश प्रवाह के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि केवल ऑफर फॉर सेल आधारित आईपीओ को नकारात्मक नहीं माना जा सकता। कई बार शुरुआती निवेशकों या प्रमोटरों के लिए आंशिक एग्जिट स्वाभाविक व्यावसायिक प्रक्रिया होती है। लेकिन जब अधिकांश बड़ी लिस्टिंग में नए निवेश की हिस्सेदारी सीमित हो और पूंजी निकासी प्रमुख उद्देश्य बन जाए, तब संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता महसूस होती है। भारत का पूंजी बाजार वर्तमान में मजबूत निवेशक आधार, बेहतर आर्थिक वृद्धि और उच्च वैल्यूएशन के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यही वजह है कि आने वाले समय में भी कई बड़ी विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों के आईपीओ बाजार में आने की संभावना है। इससे निवेशकों के लिए नए अवसर तो पैदा होंगे, लेकिन साथ ही यह बहस भी तेज होगी कि क्या आईपीओ बाजार आर्थिक विकास को गति देने का माध्यम बना हुआ है या फिर बड़े निवेशकों के लिए लाभ निकालने का मंच बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में नियामकों, निवेशकों और कंपनियों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होगी ताकि आईपीओ बाजार का मूल उद्देश्य बरकरार रहे और पूंजी बाजार विकास, निवेश तथा रोजगार सृजन की दिशा में अपनी प्रभावी भूमिका निभाता रहे।
सेबी की सख्त कार्रवाई से घिरी Rajesh Exports, 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व घोटाले ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

नई दिल्ली । देश की प्रमुख स्वर्ण आभूषण निर्यातक कंपनियों में शामिल Rajesh Exports एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से कंपनी और उसके प्रमोटर समूह के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और अंतरिम कार्रवाई के बाद निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल शेयर मूल्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी की साख और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। मामला कथित तौर पर राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने और धन के संभावित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है। सेबी की कार्रवाई के बाद बाजार में कंपनी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला, जहां कंपनी के शेयर में पांच प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया और यह 104.65 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। पिछले कुछ महीनों से शेयर में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई है। इस घटनाक्रम का सबसे अधिक ध्यान बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी पर गया है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, Life Insurance Corporation of India यानी एलआईसी के पास कंपनी में 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी 14.19 प्रतिशत और खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 14.55 प्रतिशत है। प्रमोटर समूह अभी भी कंपनी में 54.55 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि एलआईसी जैसे बड़े संस्थागत निवेशक के लिए यह निवेश उसके कुल पोर्टफोलियो का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, इसलिए इस मामले का एलआईसी की वित्तीय स्थिति या उसके शेयर पर कोई बड़ा दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, Rajesh Exports के निवेशकों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि नियामकीय जांच का असर अक्सर निवेशक विश्वास पर पड़ता है। इक्विटी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की कार्रवाई अपने आप में गंभीर संकेत है। उनके अनुसार, जब किसी सूचीबद्ध कंपनी के खिलाफ वित्तीय पारदर्शिता और फंड उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं तो निवेशकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सेबी का आदेश केवल अंतरिम प्रकृति का है और अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। कंपनी का दावा है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े पूरी तरह सही हैं और राजस्व बढ़ाकर दिखाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि मामले में किसी प्रकार की संचार संबंधी गलतफहमी हो सकती है और जल्द ही विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि Rajesh Exports का शेयर शेयर बाजार के ‘Z’ ग्रुप में सूचीबद्ध है, जहां केवल ट्रेड-फॉर-ट्रेड आधार पर कारोबार की अनुमति होती है। इस श्रेणी में शामिल कंपनियों पर पहले से ही निवेशकों की विशेष नजर रहती है। कंपनी का शेयर दिसंबर 2025 में 239 रुपये के अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से करीब 56 प्रतिशत तक टूट चुका है। ऐसे में सेबी की जांच ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में सेबी की जांच रिपोर्ट और कंपनी के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर बाजार की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि निवेशकों का भरोसा दोबारा बहाल हो पाता है या नहीं।
सीएमएचओ मुंगेली ने जारी किया भर्ती नोटिफिकेशन, 20 जून तक करें आवेदन, 8वीं पास से स्नातकोत्तर तक के लिए अवसर

नई दिल्ली :स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और अनुभवी अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय (सीएमएचओ), मुंगेली द्वारा विभिन्न संविदा पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 106 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े कई पदों को शामिल किया गया है। इनमें प्रयोगशाला तकनीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट, पोषण परामर्शदाता, स्टाफ नर्स, नर्सिंग अधिकारी, ऑडियोलॉजिस्ट, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, रेडियोग्राफर, परामर्शदाता, परिचारक, जूनियर सेक्रेटेरियल असिस्टेंट, ब्लॉक डेटा मैनेजर और अन्य पद शामिल हैं। भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना तथा विभिन्न संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 2 जून से प्रारंभ हो चुकी है। अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। शैक्षणिक योग्यता पदानुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। कुछ पदों के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं, जबकि अन्य पदों के लिए डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा विशेष तकनीकी और व्यावसायिक योग्यता अनिवार्य रखी गई है। नर्सिंग, ऑडियोलॉजी, स्वास्थ्य शिक्षा, सामाजिक कार्य, गृह विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित योग्यताधारी अभ्यर्थियों के लिए भी विभिन्न अवसर उपलब्ध हैं। आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। अधिकतम आयु सीमा संबंधित पदों के अनुसार तय की गई है और कुछ श्रेणियों के लिए यह 70 वर्ष तक रखी गई है। आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को शासन के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ भी मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का चयन शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव, कौशल परीक्षण, लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार जैसे विभिन्न चरणों के आधार पर किया जाएगा। अंतिम चयन मेरिट और निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार मासिक मानदेय प्रदान किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वेतनमान 8,800 रुपये से लेकर 25,000 रुपये प्रतिमाह तक निर्धारित किया गया है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक उम्मीदवारों को रोजगार का अच्छा अवसर मिल सकता है। आवेदन शुल्क भी वर्गवार निर्धारित किया गया है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 300 रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 200 रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को 100 रुपये शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। स्वास्थ्य विभाग में निकली यह भर्ती विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और भर्ती संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है।
दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

नई दिल्ली । वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 11 जून निर्धारित की है। अदालत को गुरुवार को इस मामले में निर्णय सुनाना था, लेकिन अब फैसला अगले सप्ताह सुनाया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद सभी पक्षों की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं। अंकित शर्मा हत्याकांड दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल रहा है। यह मामला न केवल अपनी गंभीरता बल्कि इससे जुड़े आरोपों और लंबे न्यायिक प्रक्रिया के कारण भी लगातार चर्चा में बना रहा। मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपी न्यायालय के समक्ष पेश हैं, जिन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। घटना फरवरी 2020 की है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव खजूरी खास क्षेत्र के एक नाले से बरामद किया गया था। उनकी मौत ने पूरे देश का ध्यान इस मामले की ओर खींचा था। इसके बाद पुलिस ने हत्या और दंगों से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी एक संगठित भीड़ और कथित साजिश का हिस्सा थे, जिसने दंगों के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों ने अदालत के समक्ष विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री प्रस्तुत की है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे हैं। मार्च 2023 में अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इनमें हत्या, दंगा, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके बाद लंबे समय तक चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से प्रस्तुत किए। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान यह केस कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। अदालतों में हुई सुनवाई, जमानत याचिकाओं और कानूनी बहसों ने इसे लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। इसी वजह से फैसले का इंतजार केवल संबंधित पक्षों को ही नहीं बल्कि कानूनी और राजनीतिक हलकों को भी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मामलों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी तथ्यों के आधार पर होगा, जिसका सभी पक्षों को इंतजार है। फिलहाल अदालत द्वारा फैसला टाले जाने के बाद एक सप्ताह और प्रतीक्षा बढ़ गई है। अब 11 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट इस बहुचर्चित मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। ऐसे में आगामी तारीख को लेकर सुरक्षा एजेंसियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर बनी हुई हैं।
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष तेज, रितब्रता गुट ने 60 विधायकों के समर्थन का दावा कर बढ़ाया दबाव

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरे नए शक्ति संघर्ष ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद पार्टी जिस आत्ममंथन के दौर से गुजर रही थी, उसी बीच अब संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पहली बार विधायक बने Ritabrata Banerjee के नेतृत्व में एक बागी समूह ने पार्टी के भीतर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए 60 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। घटनाक्रम ने उस समय और अधिक गंभीर रूप ले लिया जब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा रितब्रता बनर्जी को नेता विपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान सार्वजनिक बहस का विषय बन गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर जो सवाल उठ रहे थे, अब वे खुलकर सामने आने लगे हैं। विवाद की शुरुआत उस आरोप से जुड़ी बताई जा रही है जिसमें दावा किया गया कि विपक्ष के नेता के चयन संबंधी एक पत्र में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुईं। इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पार्टी नेतृत्व और कुछ विधायकों के बीच तनाव बढ़ गया। इसके तुरंत बाद संबंधित नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई, जिससे असंतोष और गहरा गया। राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि आखिर एक नए विधायक ने इतनी कम अवधि में बड़ी संख्या में विधायकों को अपने साथ कैसे जोड़ लिया। जानकारों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद संगठन के भीतर कई स्तरों पर असंतोष मौजूद था, जिसे रितब्रता गुट ने राजनीतिक रूप से संगठित करने में सफलता हासिल की। हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों में बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति को भी इसी असंतोष का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee के आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए थे। इसके अलावा चुनावी हार के बाद आयोजित कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी अपेक्षित उपस्थिति नहीं देखी गई। इन घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व की पकड़ और संगठनात्मक एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि बागी समूह का कहना है कि उसका उद्देश्य पार्टी को तोड़ना नहीं है। समूह से जुड़े नेताओं का दावा है कि वे अब भी तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक मंच और विचारधारा के साथ जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि वे नेतृत्व परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे, बल्कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विधायकों की राय को महत्व दिए जाने की बात उठा रहे हैं। इसके बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि यदि यह असंतोष लंबे समय तक बना रहता है तो पार्टी के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। विधानसभा के भीतर शक्ति संतुलन, संगठनात्मक नियंत्रण और भविष्य की रणनीति जैसे मुद्दों पर नेतृत्व को जल्द निर्णय लेने पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद केवल आंतरिक मतभेदों तक सीमित रहता है या फिर बंगाल की राजनीति में किसी बड़े पुनर्संरेखण का कारण बनता है। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहां संगठनात्मक एकता बनाए रखना और असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलना उसके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है।