Chambalkichugli.com

पेट्रोल की बढ़ती चिंता के बीच Hero का बड़ा दांव, नई फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से बदलेगा दोपहिया बाजार का भविष्य

नई दिल्ली । भारत के दोपहिया वाहन बाजार में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव की शुरुआत हो गई है। देश की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनियों में शामिल हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी लोकप्रिय कम्यूटर बाइक्स Splendor+ और HF Deluxe के फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण लॉन्च कर दिए हैं। यह पहली बार है जब कंपनी ने ऐसे मॉडल बाजार में उतारे हैं जो E20 से लेकर E85 तक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर संचालित हो सकते हैं। नई तकनीक के साथ पेश की गई Splendor+ फ्लेक्स-फ्यूल की एक्स-शोरूम कीमत 82,710 रुपये निर्धारित की गई है, जबकि HF Deluxe फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल 72,792 रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध होगा। कंपनी के अनुसार इन मोटरसाइकिलों की बिक्री जुलाई से दिल्ली और महाराष्ट्र के चुनिंदा शहरों में शुरू होगी। शुरुआती चरण के बाद इन्हें देशभर के बाजारों में उपलब्ध कराया जाएगा। फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को भारत के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस तकनीक की मदद से वाहन पेट्रोल के साथ अधिक मात्रा में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर सकते हैं। E20 का अर्थ है 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण, जबकि E85 में इथेनॉल की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत तक होती है। इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल आधारित ईंधन के बढ़ते उपयोग से देश के ऊर्जा आयात बिल में कमी आ सकती है। साथ ही गन्ना और कृषि आधारित उद्योगों को भी इसका लाभ मिलेगा। सरकार पहले ही इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है और भविष्य में E22 से E30 तक के मिश्रित ईंधन को भी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। हीरो मोटोकॉर्प ने इन दोनों मोटरसाइकिलों के इंजन की मूल संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। Splendor+ और HF Deluxe पहले की तरह 97.2 सीसी सिंगल-सिलेंडर इंजन से लैस रहेंगी। हालांकि, फ्लेक्स-फ्यूल संचालन के लिए कंपनी ने इंजन कंट्रोल यूनिट यानी ECU को दोबारा कैलिब्रेट किया है और फ्यूल सिस्टम में आवश्यक तकनीकी सुधार किए हैं। इनमें नया फ्यूल पंप, अतिरिक्त फ्यूल फिल्टर और इथेनॉल के अनुरूप विशेष कंपोनेंट्स शामिल हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में फ्यूल टैंक, फ्यूल लाइन, इंजेक्टर, सील और अन्य हिस्सों को इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि वे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के प्रभाव को लंबे समय तक सहन कर सकें। E85 ईंधन की ऑक्टेन रेटिंग भी सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक होती है, जिससे इंजन को बेहतर प्रदर्शन और दक्षता प्राप्त हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि तकनीकी बदलावों के बावजूद इन मोटरसाइकिलों की कीमतों में बड़ा अंतर नहीं रखा गया है। HF Deluxe फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल मौजूदा संस्करण से केवल मामूली रूप से महंगा है, जबकि Splendor+ में भी सीमित मूल्य वृद्धि देखने को मिली है। इससे नई तकनीक को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। ऑटोमोबाइल उद्योग में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को भविष्य की महत्वपूर्ण दिशा माना जा रहा है। हीरो मोटोकॉर्प की यह पहल न केवल हरित परिवहन को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत को वैकल्पिक ईंधन आधारित मोबिलिटी की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नहर हादसे के बाद लापता जवान की तलाश तेज, आज एक महिला को डूबने से बचाया गया

रीवा: जिले के सिलपरा डैम में बुधवार सुबह डूबे सेना के जवान गौरव द्विवेदी (28) की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही, लेकिन गुरुवार शाम तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना के बाद से इलाके में चिंता का माहौल बना हुआ है और एसडीईआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार, बघवार गांव निवासी गौरव द्विवेदी अपने परिवार के साथ डैम घूमने गए थे। इस दौरान नहाते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए। देखते ही देखते वे पानी में लापता हो गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। SDERF की टीम का लगातार सर्च ऑपरेशनघटना की जानकारी मिलते ही बिछिया थाना पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से डैम में लगातार सर्चिंग की जा रही है, लेकिन अब तक जवान का कोई पता नहीं चल पाया है। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया है। सर्चिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, महिला को बचाया गयासर्च ऑपरेशन के दौरान गुरुवार को एक और हादसा होते-होते टल गया। भटलो गांव निवासी पार्वती देवी चिराहुला कॉलोनी से अपने गांव लौट रही थीं, तभी सिलपरा नहर के पास अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे नहर में गिर गईं। तेज बहाव के बीच स्थिति गंभीर हो सकती थी, लेकिन मौके पर मौजूद SDERF टीम ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से एक बड़ी अनहोनी टल गई। अस्पताल में भर्ती, जवान की तलाश जारीरेस्क्यू के बाद महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया और डायल-112 की मदद से अस्पताल भेजा गया, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण जारी है। वहीं डूबे हुए जवान की तलाश में टीमें लगातार जुटी हुई हैं। डीएसपी उदित मिश्रा ने बताया कि सर्च ऑपरेशन बिना रुके जारी है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि जवान को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके। रीवा का सिलपरा डैम हादसा एक तरफ दुखद स्थिति पैदा कर रहा है, वहीं रेस्क्यू टीम की तत्परता ने एक और जान बचाकर बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। फिलहाल पूरे इलाके की नजरें जवान की तलाश पर टिकी हैं।

“NEET दोबारा करा लोगे, बेटी लौटा पाओगे?”-परिवार का दर्द और राहुल के बयान पर मचा राजनीतिक घमासान

नई दिल्ली: NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनिश्चितता के बीच नागपुर में आत्महत्या करने वाली मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिवार गहरे सदमे में है और मां की आंखों से निकलता हर शब्द दर्द की कहानी बयां कर रहा है। मां नीलम चतुर्वेदी का कहना है, “पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या?” घटना के बाद मामला केवल पारिवारिक त्रासदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आकांक्षा की मौत को सिस्टम की विफलता बताया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परीक्षा में अनिश्चितता ने छात्रा के भविष्य और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाला, जिससे यह दुखद कदम उठाना पड़ा। राहुल गांधी का सरकार पर हमला, BJP ने किया पलटवारराहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि यह घटना केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठाए। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर “प्रोपेगेंडा फैलाने” का आरोप लगाया। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष भय और भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। इस बयानबाजी के बीच मामला लगातार गरमाता जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। परिवार का दर्द: कर्ज, संघर्ष और टूटे सपनेउधर मऊगंज स्थित परिवार में मातम पसरा है। परिवार के अनुसार आकांक्षा बेहद मेधावी छात्रा थी और डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए 15–20 लाख रुपये तक का कर्ज लिया था। आर्थिक दबाव और भविष्य की उम्मीदों के बीच परिवार संघर्ष कर रहा था। मां ने रोते हुए बताया कि परिवार पहले ही भारी कर्ज में डूबा हुआ था, और बेटी पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। पिता की तबीयत भी खराब बताई जा रही है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। डिप्रेशन और तनाव की स्थिति ने बढ़ाई चिंतापरिजनों के अनुसार, पेपर लीक की खबरों के बाद छात्रा मानसिक तनाव में आ गई थी। परीक्षा परिणाम और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वह चुपचाप रहने लगी थी और उसने खाना-पीना भी कम कर दिया था। गांव में मातम और डर का माहौलइस घटना के बाद गांव में भी गहरा असर देखने को मिल रहा है। लोग अपनी बेटियों को बाहर पढ़ाई के लिए भेजने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल है। आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि परीक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामला राजनीतिक बहस और सामाजिक चिंता दोनों का केंद्र बना हुआ है।

शरीर में पानी की कमी बन सकती है गंभीर खतरा, जानिए घर पर ORS बनाने का सही और आसान तरीका

नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीटवेव जैसी परिस्थितियों के बीच डिहाइड्रेशन एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनकर सामने आ रहा है। तेज धूप, अत्यधिक पसीना और शरीर से लगातार पानी निकलने के कारण लोगों में कमजोरी, चक्कर, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में शरीर में पानी और आवश्यक खनिजों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। गर्मी के दौरान शरीर से केवल पानी ही नहीं निकलता, बल्कि सोडियम, पोटैशियम और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो जाते हैं। ऐसे में केवल पानी पीना कई बार पर्याप्त नहीं होता। इसी वजह से ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन यानी ORS को डिहाइड्रेशन से बचाव का प्रभावी उपाय माना जाता है। यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है तथा थकान और कमजोरी जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बाजार में ORS उपलब्ध न हो तो इसे घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए केवल तीन सामान्य चीजों की आवश्यकता होती है। एक लीटर साफ पीने के पानी में छह चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक अच्छी तरह मिलाकर ORS तैयार किया जा सकता है। यह घोल शरीर में पानी की कमी को दूर करने और आवश्यक लवणों की पूर्ति करने में मदद करता है। हालांकि ORS बनाते समय सही मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नमक या चीनी की अधिक मात्रा घोल के प्रभाव को कम कर सकती है और कुछ मामलों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती है। इसलिए निर्धारित अनुपात में ही इसे तैयार करने की सलाह दी जाती है। तैयार घोल को साफ बर्तन में रखना चाहिए और लंबे समय तक उपयोग के लिए संग्रहित नहीं करना चाहिए। डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को पहचानना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अत्यधिक प्यास लगना, मुंह सूखना, सिरदर्द, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना और पेशाब की मात्रा कम होना इसके सामान्य लक्षण हैं। बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए उनके स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मी के मौसम में केवल ORS पर निर्भर रहने के बजाय नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। इसके अलावा मौसमी फल, नारियल पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थ भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचना और हल्के कपड़े पहनना भी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, दस्त, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या भ्रम जैसी गंभीर समस्याएं महसूस हों तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर पहचान और सही देखभाल से डिहाइड्रेशन से जुड़ी जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। गर्मी के इस मौसम में सावधानी, पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन और जरूरत पड़ने पर ORS का उपयोग लोगों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरल घरेलू उपायों को अपनाकर शरीर को पानी की कमी से बचाया जा सकता है और भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

प्रोटीन की दौड़ में कौन सबसे आगे? चिकन, मछली और मटन की पोषण क्षमता का पूरा सच

नई दिल्ली । स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवनशैली के लिए प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक माना जाता है। यह न केवल मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मरम्मत में मदद करता है, बल्कि त्वचा, बाल, नाखून और शरीर की कई आवश्यक जैविक प्रक्रियाओं के लिए भी जरूरी होता है। नॉन-वेज आहार लेने वाले लोगों के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि चिकन, मछली और मटन में से कौन-सा खाद्य पदार्थ सबसे अधिक प्रोटीन प्रदान करता है और स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे बेहतर विकल्प कौन है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार 100 ग्राम पके हुए चिकन ब्रेस्ट में लगभग 30 से 31 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। यही कारण है कि चिकन को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सबसे लोकप्रिय स्रोत माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें प्रोटीन अधिक और फैट अपेक्षाकृत कम होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले लोग, खिलाड़ी और फिटनेस प्रेमी अपनी डाइट में चिकन को प्राथमिकता देते हैं। मछली भी प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। सामान्य तौर पर 100 ग्राम मछली में 20 से 26 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है, हालांकि यह मात्रा मछली की प्रजाति के अनुसार बदल सकती है। मछली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पोषक तत्व हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने और शरीर में सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसी कारण पोषण विशेषज्ञ नियमित रूप से मछली का सेवन करने की सलाह देते हैं। मटन भी प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों में शामिल है। 100 ग्राम मटन में लगभग 25 से 27 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके साथ ही यह आयरन, जिंक और विटामिन बी12 जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का भी अच्छा स्रोत है। हालांकि मटन में फैट की मात्रा चिकन और अधिकांश मछलियों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। यदि केवल प्रोटीन की मात्रा के आधार पर तुलना की जाए तो चिकन सबसे आगे माना जाता है। इसके बाद मटन और फिर मछली का स्थान आता है। लेकिन स्वास्थ्य लाभों के व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मछली को सबसे संतुलित विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभकारी ओमेगा-3 फैटी एसिड भी मौजूद होता है। खिलाड़ियों, बॉडीबिल्डर्स और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों के लिए चिकन और मछली दोनों ही उत्कृष्ट विकल्प हो सकते हैं। बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए भी प्रोटीन युक्त आहार शरीर की रिकवरी में मददगार साबित होता है। वहीं आयरन और विटामिन बी12 की कमी से जूझ रहे लोगों को सीमित मात्रा में मटन का सेवन लाभ पहुंचा सकता है। बुजुर्गों के लिए भी पर्याप्त प्रोटीन का सेवन आवश्यक माना जाता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की शक्ति कम होने लगती है। ऐसे में मछली और चिकन जैसे आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ का चुनाव केवल प्रोटीन की मात्रा के आधार पर नहीं, बल्कि संपूर्ण पोषण प्रोफाइल और व्यक्तिगत स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

7 एयरबैग और 15 KMPL माइलेज के साथ आई नई इनोवा क्रिस्टा, टोयोटा ने प्रीमियम फीचर्स के साथ अपडेटेड एमपीवी की लॉन्च

नई दिल्ली । भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में बहुउपयोगी वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है और इसी कड़ी में टोयोटा ने अपनी लोकप्रिय एमपीवी इनोवा क्रिस्टा के नए संस्करण को लॉन्च कर दिया है। लंबे समय से परिवारों, व्यवसायिक उपयोगकर्ताओं और फ्लीट ऑपरेटरों की पसंद बनी यह गाड़ी अब नए डिजाइन, प्रीमियम इंटीरियर और अतिरिक्त सुविधाओं के साथ बाजार में उतारी गई है। कंपनी का लक्ष्य ग्राहकों को पहले से अधिक आरामदायक और आधुनिक अनुभव प्रदान करना है। नई इनोवा क्रिस्टा 2026 के बाहरी स्वरूप में कई बदलाव किए गए हैं। वाहन को अधिक आकर्षक और दमदार बनाने के लिए फ्रंट रेडिएटर ग्रिल को नया डिजाइन दिया गया है। इसके अलावा फ्रंट और रियर बंपर में भी बदलाव किए गए हैं, जिससे वाहन का लुक पहले की तुलना में अधिक प्रीमियम और आधुनिक दिखाई देता है। कंपनी का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य वाहन की पहचान को बनाए रखते हुए उसे नया और ताजा रूप देना है। इंटीरियर की बात करें तो नई इनोवा क्रिस्टा में आराम और प्रीमियम अनुभव पर विशेष ध्यान दिया गया है। केबिन में डुअल-टोन लेदर सीट अपहोल्स्ट्री का इस्तेमाल किया गया है, जिससे अंदर का माहौल अधिक आकर्षक बनता है। इंस्ट्रूमेंट पैनल और डोर ट्रिम्स पर वुड पैटर्न फिनिश दी गई है, जो वाहन को लक्जरी एहसास प्रदान करती है। इसके अलावा वायरलेस चार्जिंग और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। हालांकि कुछ फीचर्स केवल चुनिंदा वेरिएंट्स में उपलब्ध होंगे। इंजन के मोर्चे पर कंपनी ने किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। नई इनोवा क्रिस्टा में पहले की तरह 2.4 लीटर डीजल इंजन दिया गया है, जो मैन्युअल ट्रांसमिशन के साथ आता है। यह इंजन अपनी विश्वसनीयता और प्रदर्शन के लिए पहले से ही ग्राहकों के बीच लोकप्रिय रहा है। कंपनी के अनुसार वाहन लगभग 15 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देने में सक्षम है, जो इस श्रेणी की एमपीवी के लिए संतोषजनक माना जाता है। सुरक्षा के क्षेत्र में भी कंपनी ने कई महत्वपूर्ण फीचर्स शामिल किए हैं। नई इनोवा क्रिस्टा में 7 एयरबैग दिए गए हैं, जो चालक और यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम, व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल, हिल स्टार्ट असिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक फोर्स डिस्ट्रीब्यूशन जैसे आधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य विभिन्न सड़क परिस्थितियों में बेहतर नियंत्रण और सुरक्षित ड्राइविंग अनुभव प्रदान करना है। नई इनोवा क्रिस्टा को 7 सीटर और 8 सीटर दोनों विकल्पों में पेश किया गया है। यह वाहन विभिन्न रंग विकल्पों में उपलब्ध होगा, जिससे ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार चयन कर सकेंगे। कंपनी ने इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 19.72 लाख रुपये रखी है, जबकि टॉप वेरिएंट की कीमत 26.63 लाख रुपये तक जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनोवा क्रिस्टा की मजबूत ब्रांड पहचान, विश्वसनीयता और व्यावहारिकता इसे भारतीय बाजार में लगातार लोकप्रिय बनाए हुए है। नए अपडेट्स के साथ यह मॉडल उन ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है जो एक ऐसी एमपीवी की तलाश में हैं जो आराम, सुरक्षा, स्पेस और प्रदर्शन का संतुलित संयोजन प्रदान करे।

Xiaomi 17T की भारत में एंट्री, 50MP ट्रिपल कैमरा, Dimensity 8500-Ultra प्रोसेसर और 120Hz AMOLED डिस्प्ले बना आकर्षण

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में प्रीमियम सेगमेंट की प्रतिस्पर्धा को और तेज करते हुए शाओमी ने अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Xiaomi 17T लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस डिवाइस को अत्याधुनिक कैमरा तकनीक, दमदार प्रदर्शन क्षमता और लंबी बैटरी लाइफ के साथ पेश किया है। खास बात यह है कि फोन में Leica-ट्यून्ड कैमरा सिस्टम दिया गया है, जो फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के शौकीनों को बेहतर अनुभव देने का दावा करता है। Xiaomi 17T को प्रीमियम स्मार्टफोन श्रेणी में उतारा गया है और इसमें आधुनिक तकनीक से लैस कई फीचर्स शामिल किए गए हैं। फोन में 6.59 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz एडैप्टिव रिफ्रेश रेट और 3500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करता है। यह डिस्प्ले तेज धूप में भी स्पष्ट विजिबिलिटी प्रदान करने में सक्षम माना जा रहा है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए गोरिल्ला ग्लास 7i का इस्तेमाल किया गया है। प्रोसेसिंग क्षमता की बात करें तो Xiaomi 17T में MediaTek Dimensity 8500-Ultra चिपसेट दिया गया है। यह प्रोसेसर मल्टीटास्किंग, गेमिंग और हाई-परफॉर्मेंस कार्यों को सहज बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। डिवाइस Android 16 आधारित HyperOS 3 पर कार्य करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को नया और अधिक स्मार्ट यूजर इंटरफेस मिलने की उम्मीद है। बेहतर तापमान नियंत्रण के लिए कंपनी ने इसमें 3D IceLoop कूलिंग सिस्टम भी दिया है। कैमरा सेक्शन इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। फोन में Leica तकनीक से लैस ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसका मुख्य कैमरा 50 मेगापिक्सल का Light Fusion 800 सेंसर है। इसके अलावा 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ मौजूद है, जबकि 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस भी शामिल किया गया है। यह कैमरा सिस्टम विभिन्न परिस्थितियों में बेहतर तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करने में सक्षम माना जा रहा है। पावर बैकअप के लिए Xiaomi 17T में 6500mAh की बड़ी सिलिकॉन-कार्बन बैटरी दी गई है। यह 67W HyperCharge फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है, जिससे फोन कम समय में चार्ज किया जा सकता है। साथ ही 22.5W रिवर्स चार्जिंग फीचर भी उपलब्ध है, जिससे अन्य डिवाइसों को भी चार्ज किया जा सकता है। कनेक्टिविटी के लिहाज से फोन में Wi-Fi 7, Bluetooth 6.0, NFC और NavIC जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। वहीं IP68 रेटिंग के कारण यह डिवाइस धूल और पानी से सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे इसकी टिकाऊ क्षमता और बढ़ जाती है। कंपनी ने Xiaomi 17T को दो स्टोरेज विकल्पों में लॉन्च किया है। 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 59,999 रुपये रखी गई है, जबकि 12GB रैम और 512GB स्टोरेज मॉडल 64,999 रुपये में उपलब्ध होगा। चुनिंदा बैंक कार्ड्स और एक्सचेंज ऑफर्स के तहत ग्राहकों को 5,000 रुपये तक का लाभ भी मिलेगा। फोन की बिक्री 10 जून से कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल स्टोर्स के माध्यम से शुरू होगी। नए फीचर्स और प्रीमियम स्पेसिफिकेशन्स के साथ Xiaomi 17T भारतीय फ्लैगशिप स्मार्टफोन बाजार में एक मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है।

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

नई दिल्ली । बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बीच एक 95 वर्षीय महिला की सूझबूझ और साहस की कहानी सामने आई है, जिसने इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जगा दी। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती राधा देवी ने समय रहते आग और धुएं की जानकारी नर्सिंग स्टाफ को देकर कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि उन्हें अब इस हादसे की ‘मसीहा’ के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में देर रात आग लग गई थी। आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में धुआं फैलने लगा, जिससे वहां भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और धुएं के कारण उनका दम घुटने लगा। इस हादसे में पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है। इसी आईसीयू में छपरा मेघ क्षेत्र की निवासी 95 वर्षीय राधा देवी भी भर्ती थीं। उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने सबसे पहले स्थिति की गंभीरता को समझा। परिजनों के अनुसार, धुआं फैलते ही उन्होंने अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क हटाया और स्वयं बाहर निकलकर नर्स को आग लगने की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई। राधा देवी ने स्थानीय बज्जिका बोली में घटना का वर्णन करते हुए बताया कि अचानक धुआं फैलने लगा और आसपास अंधेरा सा महसूस होने लगा। उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन धुआं देखते ही वह बाहर निकलीं और तुरंत नर्स को इसकी सूचना दी। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने स्थिति की जांच की और राहत कार्य शुरू किए। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि राधा देवी समय रहते सतर्कता नहीं दिखातीं, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। रात करीब साढ़े तीन बजे आग लगने की बात सामने आई, जबकि कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के साथ-साथ अस्पताल में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। बचाव दल ने करीब 15 से 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि धुएं और आग की चपेट में आने से कई मरीज गंभीर रूप से प्रभावित हुए, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है। घटना के बाद अस्पताल के आईसीयू की तस्वीरों ने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया है। आग में बेड, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन बुरी तरह जल गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे के बीच राधा देवी की सतर्कता और साहस ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में जागरूकता और त्वरित निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकते हैं। उनकी भूमिका को स्थानीय लोग और प्रभावित परिवार एक असाधारण मानवीय उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जिसने एक बड़े हादसे को और भयावह होने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर भाजपा का राष्ट्रव्यापी अभियान, उपलब्धियों का लेखा-जोखा लेकर जनता के बीच उतरेंगे नेता

नई दिल्ली । केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी पूरी कर ली है। पार्टी आगामी दिनों में देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को जनता के सामने प्रस्तुत करेगी। इस अभियान का उद्देश्य पिछले बारह वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए प्रमुख बदलावों और नीतिगत निर्णयों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस विशेष अभियान के तहत सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण पांच अलग-अलग बुकलेट में प्रकाशित किया जाएगा। इन बुकलेटों को विभिन्न विषयों के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए कार्यों और उपलब्धियों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया जा सके। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना विकास, सामाजिक कल्याण, आर्थिक सुधार और जनहित से जुड़े प्रमुख फैसलों का उल्लेख किया जाएगा। बताया गया है कि “राष्ट्र प्रथम” शीर्षक वाली बुकलेट में उन महत्वपूर्ण निर्णयों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लागू किया गया। वहीं “राष्ट्र निर्माण” में देशभर में सड़कों, रेल, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विवरण दिया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य क्षमता से जुड़े विषयों को भी अलग श्रेणी में शामिल किया गया है, जिसमें सशस्त्र बलों की उपलब्धियों और सुरक्षा अभियानों का उल्लेख रहेगा। भाजपा इस पूरे अभियान को “बारह साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के” थीम के साथ आयोजित करेगी। पार्टी का दावा है कि पिछले एक दशक से अधिक समय में गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिनका व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिला है। इसी उपलब्धि को जनता तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। कार्यक्रमों के तहत 8 जून से 12 जून तक देशभर में मीडिया संवाद आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता इन संवादों में सरकार की नीतियों और उपलब्धियों पर विस्तार से जानकारी देंगे। इसी अवधि में विशेष बुकलेटों का भी औपचारिक विमोचन किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि इससे सरकार के कार्यों की जानकारी अधिक संगठित और प्रभावी तरीके से आम जनता तक पहुंचेगी। 8 जून से 14 जून के बीच विशेष जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में नागरिकों से सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और स्थानीय उपलब्धियों की जानकारी साझा की जाएगी। साथ ही वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, प्रगति पथ यात्राएं और “विकसित भारत संकल्प सम्मेलन” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। पार्टी ने प्रत्येक जिले में कम से कम 500 प्रमुख व्यक्तियों से संपर्क स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, पेशेवर संगठनों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का संदेश पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। 12 जून से 20 जून के बीच देशभर में जनकल्याण शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में आयुष्मान भारत, पीएम स्वनिधि, पीएम सूर्य घर और अन्य प्रमुख योजनाओं के लाभार्थियों का पंजीकरण कराया जाएगा। भाजपा संगठन को निर्देश दिया गया है कि पात्र लोगों को शिविरों तक पहुंचाने और योजनाओं से जोड़ने में सक्रिय सहयोग दिया जाए। अभियान के दौरान पर्यावरण दिवस पर “एक पेड़ मां के नाम” कार्यक्रम तथा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मंडल स्तर तक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह अभियान केवल उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा।

चुनावी हार के बाद बढ़ीं ममता बनर्जी की चुनौतियां, बागी विधायकों के बाद अब सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद जारी सियासी उथल-पुथल अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य में चुनावी पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच ऐसे दावे भी किए जा रहे हैं कि पार्टी के कुछ सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं और भविष्य में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं और वैकल्पिक राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कई सांसदों और भाजपा नेतृत्व के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। यदि भविष्य में इस तरह का कोई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और संसद में विपक्षी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है। हालांकि हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही संगठन के भीतर असंतोष की खबरें सामने आने लगी थीं। पार्टी के कुछ नेताओं और विधायकों ने नेतृत्व की कार्यशैली, संगठनात्मक निर्णयों और विभिन्न विवादों के प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। राज्य विधानसभा में भी राजनीतिक स्थिति तेजी से बदली है। बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा अलग रुख अपनाने और नए नेतृत्व के समर्थन की खबरों ने तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक संकट को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े चुनावी झटके के बाद दलों के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर असहमति उभरना असामान्य नहीं है, लेकिन यदि यह असंतोष लगातार बढ़ता है तो इसका असर पार्टी की भविष्य की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। संसद में तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की प्रमुख पार्टियों में गिनी जाती रही है। ऐसे में सांसदों के संभावित राजनीतिक बदलाव की अटकलें विपक्षी राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संसद में किसी भी बड़े दल की संख्या में बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व संगठन को एकजुट रखने और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में जुटा हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाए रखना और कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास कायम रखना होगा। इसके साथ ही पार्टी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चुनावी हार के बाद उत्पन्न असंतोष और मतभेदों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल राजनीतिक परिदृश्य में अनिश्चितता बनी हुई है और सभी की निगाहें संभावित घटनाक्रमों पर टिकी हैं। यदि सांसदों के पाला बदलने संबंधी दावे आगे चलकर वास्तविक रूप लेते हैं तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव का कारण बन सकता है। वहीं यदि पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने में सफल रहता है तो यह संकट उसके लिए संगठनात्मक पुनर्गठन का अवसर भी साबित हो सकता है।