सेबी की सख्त कार्रवाई से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भूचाल, 5% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंचे; वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया और यह बीएसई पर अपने पिछले बंद स्तर 110.15 रुपये से गिरकर 104.65 रुपये पर पहुंच गया। सेबी की ओर से जारी आदेश में कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और कारोबारी लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नियामक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर संकेत दिए हैं कि कंपनी द्वारा घोषित कुल राजस्व का लगभग 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा वास्तविकता से अधिक दिखाया गया हो सकता है। सेबी ने इन निष्कर्षों को बेहद गंभीर और अभूतपूर्व बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक माना है। आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आई अनियमितताएं सामान्य कारोबारी त्रुटियों से कहीं अधिक गंभीर प्रतीत होती हैं। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने स्पष्ट किया कि निवेशकों के हितों की रक्षा और बाजार की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियामक कदम उठाना जरूरी था। इसी के तहत प्रमोटर राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों की खरीद, बिक्री अथवा किसी भी प्रकार के लेन-देन से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह मामला मार्च 2024 में प्राप्त एक शेयरधारक की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट में दर्ज बड़े व्यापारिक देयकों और वित्तीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि की विस्तृत जांच शुरू की और स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट के लिए बीडीओ इंडिया सर्विसेज को नियुक्त किया। जांच के दौरान फॉरेंसिक ऑडिटर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सेबी के अनुसार कंपनी ने कई अवसरों पर आवश्यक लेखा प्रणालियों, वित्तीय रिकॉर्ड और प्रमुख दस्तावेजों तक पूर्ण पहुंच उपलब्ध नहीं कराई। इसके कारण ऑडिटर कई महत्वपूर्ण लेन-देन और वित्तीय दावों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं कर सका। केवल सीमित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई। नियामक ने कंपनी की विदेशी सहायक और अप्रत्यक्ष सहायक इकाइयों की भी समीक्षा की। सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित कुछ इकाइयों के वित्तीय लेन-देन और रिपोर्टिंग पैटर्न को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सेबी का मानना है कि कुछ वित्तीय संरचनाओं का उपयोग धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाने के लिए किया गया हो सकता है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं द्वारा मांगी गई सभी लंबित जानकारियां 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए। साथ ही कंपनी के खातों और लेन-देन की विस्तृत समीक्षा के लिए नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का भी आदेश दिया गया है। इस घटनाक्रम का असर केवल राजेश एक्सपोर्ट्स तक सीमित नहीं रहा। कंपनी में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरों पर भी दबाव देखा गया और कारोबार के दौरान उसके शेयरों में लगभग 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच की दिशा और निष्कर्ष निवेशकों की धारणा तथा कंपनी के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी

मध्य प्रदेश । जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कुछ ही पलों में पूरे अस्पताल परिसर, वार्डों और गलियारों में अंधेरा छा गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही गर्मी और उमस बढ़ गई, जिससे कई मरीज बेचैन हो गए। जनरल वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकलते भी देखा गया। हालांकि, यह स्थिति करीब 15 से 20 मिनट तक बनी रही, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई। गर्मी और अंधेरे से परेशान हुए मरीज, परिजनों में चिंताअस्पताल में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं, जिनमें कई गंभीर स्थिति वाले मरीज भी शामिल हैं जो जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर थे। अचानक बिजली गुल होने से परिजनों में चिंता बढ़ गई कि कहीं इलाज प्रभावित न हो जाए। कुछ लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली कटौती जैसी स्थिति में तुरंत और सुचारू बैकअप सिस्टम का प्रभावी होना जरूरी है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। बिजली विभाग ने मांगी रिपोर्ट, अस्पताल प्रशासन का दावा- जनरेटर तुरंत चालू हुएइस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) के अधिकारियों ने भी जानकारी ली है। अधीक्षण यंत्री संजय अरोरा ने कहा कि उन्हें इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, लेकिन संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल के बड़े जनरेटर सिस्टम के बावजूद स्थिति कैसे प्रभावित हुई। वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बिजली गुल होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शहर में उस समय बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में बैकअप के लिए सात बड़े जनरेटर लगे हुए हैं, जिनमें पर्याप्त डीजल भी उपलब्ध था। जैसे ही बिजली गई, जनरेटर सिस्टम स्वतः सक्रिय हो गया। डीन के अनुसार, अस्पताल में किसी भी मरीज को गंभीर परेशानी नहीं हुई और न ही किसी को वार्ड से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं। प्रशासनिक दावे बनाम हकीकत, जांच की मांग उठीइस घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर बिजली विभाग इसकी जानकारी जुटा रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन अपने सिस्टम को पूरी तरह कार्यशील बता रहा है। अब देखना होगा कि जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
पश्चिम एशिया संकट पर राहत के संकेत, कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक फिसला; वैश्विक बाजारों में फिर भी बनी रही अनिश्चितता

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत दी है। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है और इससे व्यापक कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क में गिरावट देखी गई। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि युद्धविराम की दिशा में बढ़ते कदमों ने बाजार की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिला। बाजार विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति के आधार पर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से भी गहराई से प्रभावित होती हैं। पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष या अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तुरंत असर डालती है। हालिया गिरावट इसी धारणा को दर्शाती है कि निवेशक अब स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान की संभावना को महत्व दे रहे हैं। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्कों पर भी वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है। अमेरिकी नेतृत्व की ओर से बातचीत में प्रगति के संकेत दिए गए हैं, जबकि ईरान की तरफ से भी संवाद पूरी तरह समाप्त न होने की बात कही गई है। हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक किसी ठोस समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बातचीत जारी रहने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसके विपरीत खाड़ी क्षेत्र में कुछ घटनाओं ने अनिश्चितता को पूरी तरह समाप्त नहीं होने दिया है। हालिया सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ता है तो तेल बाजार में उतार-चढ़ाव दोबारा तेज हो सकता है। इसलिए निवेशक फिलहाल हर कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। तेल बाजार की नरमी का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार दबाव में रहे और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाए रखी। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे वैश्विक निवेश भावना पर असर पड़ा। घरेलू बाजार भी इस वैश्विक माहौल से अछूते नहीं रहे। भारतीय शेयर बाजारों में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निवेशकों का ध्यान अब पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों और ऊर्जा बाजार की आगामी दिशा पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम स्थायी रूप लेता है और क्षेत्रीय तनाव में और कमी आती है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार अभी भी सतर्क है और किसी भी नए घटनाक्रम का प्रभाव तेल तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।
फूलों और ड्रायफ्रूट से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गुरुवार भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा

मध्य प्रदेश । Ujjain स्थित Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में गुरुवार तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। पंचामृत और भस्म से हुआ अभिषेकआरती के दौरान प्रथम घंटा बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भांग, चंदन और फूलों से राजा स्वरूप श्रृंगारभस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का अत्यंत दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग, चंदन, गुलाब के फूलों की माला, रजत चंद्र, रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजाया गया। इसके अलावा शेषनाग का रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्प मालाएं भी अर्पित की गईं। भगवान को भव्य “राजा स्वरूप” में सजाया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहा। ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल, ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग लगाया गया। पूरे गर्भगृह में फूलों और सुगंधित मालाओं से अलौकिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” की गूंज सुनाई दी। भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है, जो हर दिन Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple को दिव्यता से भर देता है।
वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया। बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है। घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।
सूक्ष्म कला का अद्भुत उदाहरण, छात्रा ने दाल पर बनाए 12 ज्योतिर्लिंग और दर्ज कराया वर्ल्ड रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर अपनी प्रतिभा के कारण चर्चा में है। यहां के उत्कृष्ट विद्यालय की 12वीं की छात्रा दीक्षा कुशवाह ने ऐसी सूक्ष्म कला प्रस्तुत की है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। दीक्षा ने केवल 8 मिलीमीटर आकार की चने की दाल पर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की बेहद बारीक पेंटिंग बनाई। खास बात यह है कि उन्होंने यह पूरा कार्य सिर्फ 22 मिनट में पूरा किया। वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नामदीक्षा की इस असाधारण उपलब्धि को World Wide Book of Records में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि सूक्ष्म कला (micro art) के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान मानी जा रही है। एक साल की मेहनत और कला का सफरऋषि नगर निवासी दीक्षा कुशवाह फ्रीगंज स्थित आर्ट क्लास में सूक्ष्म चित्रकला सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस कला को निखारा और लगातार अभ्यास किया। इस कार्य के लिए उन्हें विशेष उपकरणों, धैर्य और अत्यधिक एकाग्रता की जरूरत पड़ी। इतने छोटे आकार में सटीक आकृतियां बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। आस्था और प्रेरणा से मिली दिशादीक्षा ने बताया कि उन्हें 12 ज्योतिर्लिंग बनाने की प्रेरणा केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के बाद मिली। साथ ही कॉलेज के अन्य छात्रों की वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धियों ने भी उन्हें प्रेरित किया। स्थानीय प्रतिभा की वैश्विक पहचानदीक्षा की यह उपलब्धि न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और लगन से छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। छोटी सी दाल पर इतनी सूक्ष्म कला बनाकर दीक्षा कुशवाह ने साबित कर दिया कि प्रतिभा आकार नहीं, समर्पण और अभ्यास से बनती है। उनकी यह उपलब्धि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान

मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में है। यहां स्थित Sandipani Ashram को अब भव्य ‘सांदीपनि लोक’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 139 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे सिंहस्थ कुंभ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के तहत तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली को आधुनिक और भव्य स्वरूप देना है। 108 फीट ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बनेगी मुख्य आकर्षणइस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण होगी भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा। इसे प्रदेश की सबसे ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बताया जा रहा है। इस प्रतिमा का डिजाइन तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार किया जाएगा, ताकि इसकी संरचना पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ हो। महर्षि सांदीपनि और गुरुकुल परंपरा का भव्य प्रदर्शनपरियोजना के तहत आश्रम परिसर में महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा, गुरुकुल परंपरा से जुड़े थीम आधारित क्षेत्र, मंदिर परिसर और जल फाउंटेन विकसित किए जाएंगे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है, जहां मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ शिक्षा प्राप्त की थी। डिजिटल अनुभव से जुड़ेगा इतिहास और आस्थासांदीपनि लोक को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए AR/VR आधारित अनुभव, डिजिटल प्रदर्शनी और मल्टी-लैंग्वेज ऑडियो-विजुअल सिस्टम उपलब्ध होगा। पर्यटक हेडफोन या VR डिवाइस के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, 64 कलाओं और गुरुकुल परंपरा को इंटरैक्टिव तरीके से समझ सकेंगे। लाइट एंड साउंड शो से जीवंत होगी श्रीकृष्ण कथापरिसर में इमर्सिव लाइट एंड साउंड शो भी विकसित किया जाएगा, जिसमें श्रीकृष्ण की जीवनगाथा और उज्जैन से उनका ऐतिहासिक संबंध दर्शाया जाएगा। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तैयारीयह पूरी योजना आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे Ujjain को एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। महाकाल लोक के बाद अब सांदीपनि लोक को भी उसी स्तर का बड़ा आध्यात्मिक और पर्यटन प्रोजेक्ट माना जा रहा है। महाकाल लोक के बाद बढ़ा धार्मिक पर्यटनमहाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। अब प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिला है। सांदीपनि लोक परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि यह उज्जैन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर एक वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।
दर्दनाक हादसा उज्जैन में, टवेरा वाहन पलटने से 9 श्रद्धालु घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी

मध्य प्रदेश । Ujjain में गुरुवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया, जब ऋणमुक्तेश्वर मंदिर से Bhartrihari Gufa की ओर जा रही श्रद्धालुओं से भरी टवेरा गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। वाहन में आंध्र प्रदेश से आए 9 श्रद्धालु सवार थे, जिनमें बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। हादसा इतना अचानक हुआ कि कई यात्री वाहन के अंदर ही फंस गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और महंत ने दिखाया साहसघटना के तुरंत बाद Rinmukteshwar Mahadev Temple के महंत महावीरनाथ महाराज और स्थानीय लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की और घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। स्थानीय लोगों की मदद से कई यात्रियों को तुरंत बाहर निकाला गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गयासूचना मिलने पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ श्रद्धालु वाहन के नीचे दब गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। निर्माण कार्य और संकरी सड़क बनी वजह?स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा उस क्षेत्र में चल रहे घाट निर्माण कार्य के कारण हुआ, जहां एक तरफ निर्माण कार्य और दूसरी तरफ दीवार होने से रास्ता संकरा हो गया था। इसी वजह से वाहन असंतुलित होकर पलट गया। पुलिस जांच जारी, ड्राइवर पर शकMadhya Pradesh Police ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर ड्राइवर के नशे में होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हादसा तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति या मानवीय गलती किस वजह से हुआ। धार्मिक यात्रा के दौरान हुआ यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर सावधानी की जरूरत को उजागर करता है। स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन की तत्परता ने कई जानें बचाने में अहम भूमिका निभाई।
जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां

नई दिल्ली । फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA World Cup में जहां हर खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना सपना मानता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी रहे हैं जिनमें यह सपना दो पीढ़ियों तक पूरा हुआ। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप में जगह बनाई। 1. लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)पिता लुइस पेरेज ने 1930 के विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया था। उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 के वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय टीम की ओर से खेला। हालांकि दोनों ही अपने-अपने विश्व कप में गोल नहीं कर सके। 2. मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)मार्टी वैंटोलरा 1934 में स्पेन की टीम का हिस्सा थे, जबकि उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 में मेक्सिको के लिए विश्व कप खेला। दोनों ही खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो पाए। 3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)डोमिंगोस ने 1938 में Brazil national football team की ओर से विश्व कप खेला। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया 1974 में ब्राजील टीम का हिस्सा रहे, लेकिन सीमित अवसरों में उन्हें भी गोल नहीं मिला। 4. रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)रोजर रियो ने 1934 में France national football team के लिए विश्व कप खेला। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 में फ्रांस की टीम में शामिल रहे, लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके। 5. निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)निकोले लुपस्कु ने 1970 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मैच खेले, लेकिन गोल नहीं कर पाए। विरासत की कहानीये सभी जोड़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली फुटबॉल परंपरा भी है, जहां एक ही परिवार का नाम दो अलग-अलग युगों में इतिहास बनाता है।
UN सुरक्षा परिषद चुनाव में बड़ा बदलाव: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार किर्गिस्तान को मिली UNSC में जगह

नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों के लिए हुए चुनाव में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक माने जाने वाले सुरक्षा परिषद में कई नए देशों की एंट्री हुई है, जबकि कुछ मौजूदा सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के साथ परिषद से बाहर हो जाएंगे। इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत रही, जिसने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में जगह बनाई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद किर्गिस्तान को दो वर्षीय कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना गया। इसके साथ ही देश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सुरक्षा परिषद में उसकी मौजूदगी को मध्य एशियाई क्षेत्र के बढ़ते महत्व और वैश्विक मंच पर उसकी सक्रिय भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। इस चुनाव के परिणामों के बाद पाकिस्तान का कार्यकाल समाप्त होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों में शामिल है, लेकिन उसका कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत में समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही परिषद में उसकी जगह नए सदस्य देश अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। पाकिस्तान के अलावा पनामा, डेनमार्क, ग्रीस और सोमालिया भी अपना कार्यकाल पूरा कर परिषद से बाहर हो जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान पांच सीटों के लिए सात देशों के बीच मुकाबला हुआ। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार देश को जीत के लिए महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के कम से कम दो-तिहाई मत प्राप्त करना आवश्यक होता है। मतदान के पहले दौर में ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा जिम्बाब्वे को पर्याप्त समर्थन मिल गया और वे सीधे निर्वाचित हो गए। शेष सीट के लिए कई दौर की वोटिंग हुई, जिसके बाद किर्गिस्तान ने फिलीपींस को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की। नवनिर्वाचित देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा और 31 दिसंबर 2028 तक जारी रहेगा। इस दौरान ये देश वैश्विक सुरक्षा, संघर्ष समाधान, शांति स्थापना अभियानों और अंतरराष्ट्रीय संकटों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। सुरक्षा परिषद में उनकी भूमिका न केवल क्षेत्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुल 15 सदस्य देशों से मिलकर बनी है। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें वीटो शक्ति प्राप्त है। इनके अलावा दस गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है। हर वर्ष पांच सीटों पर नए सदस्यों का चयन होता है, जिससे परिषद में विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। सुरक्षा परिषद को संयुक्त राष्ट्र की सबसे प्रभावशाली संस्था माना जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बाध्यकारी निर्णय लेने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने की शक्ति रखती है। ऐसे में परिषद की सदस्यता किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत और नए सदस्य देशों की एंट्री को इसी संदर्भ में वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।