दहेज हत्या केस में तेज़ी, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से 5 दिन तक पूछताछ करेगी सीबीआई

नई दिल्ली । भोपाल में ट्विशा शर्मा कथित दहेज हत्या मामले ने एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया में बड़ा मोड़ ले लिया है, जहां अदालत ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को पांच दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। यह निर्णय उस समय आया जब मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो के पास आने के बाद आरोपियों से गहन पूछताछ की आवश्यकता बताई गई। अदालत ने सभी तथ्यों और जांच की प्रगति को देखते हुए यह अनुमति दी, ताकि केस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की गहराई से जांच की जा सके। जानकारी के अनुसार दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया था। इससे पहले उनकी मेडिकल जांच कराई गई और फिर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत सेशन कोर्ट में लाया गया। सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों आरोपी एक साथ कटघरे में खड़े रहे और कार्यवाही के दौरान आपस में धीमी आवाज में बातचीत करते देखे गए। इस पूरे घटनाक्रम ने अदालत परिसर में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सीबीआई ने इस मामले में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरिबाला सिंह को उनके भोपाल स्थित निवास से कई घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनके घर पर विस्तृत पूछताछ और प्रारंभिक जांच भी की थी। इसके बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए एक विशेष केंद्र में ले जाया गया और फिर अदालत में पेश किया गया। दूसरी ओर समर्थ सिंह को पहले ही पुलिस हिरासत में लिया गया था। उन्हें 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद कुछ दिनों तक लापता रहने के बाद जबलपुर से गिरफ्तार किया गया था। प्रारंभिक पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें पहले पुलिस रिमांड पर भेजा गया था, जो अब समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद सीबीआई ने मामले की गहराई से जांच के लिए उनकी नई हिरासत की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इस मामले की पृष्ठभूमि में ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर गंभीर आरोप सामने आए थे, जिसमें परिवार ने दहेज उत्पीड़न और ससुराल पक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए थे। आरोप है कि ट्विशा शर्मा अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। इसके बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया और विस्तृत जांच की मांग उठी। जांच के दौरान सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर और आसपास के स्थानों का भी निरीक्षण किया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल रही। एजेंसी ने घटनाक्रम को समझने के लिए विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं की भी जांच शुरू की है। गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी उस समय हुई जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने उन्हें अपनी हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की। अब अदालत के आदेश के बाद दोनों आरोपियों से पांच दिन तक गहन पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले से जुड़े कई अहम तथ्यों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत–ओमान आर्थिक साझेदारी लागू होने की तैयारी, टैरिफ छूट से बदल सकती है एक्सपोर्ट तस्वीर

नई दिल्ली । भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी सीईपीए के लागू होने की संभावना के साथ भारतीय व्यापार जगत में नई उम्मीदें जगी हैं। इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल व्यापार में वृद्धि होगी बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए खाड़ी क्षेत्र के बाजारों में प्रवेश और आसान हो जाएगा। लंबे समय से स्थिर बने हुए भारत–ओमान व्यापार को अब नई दिशा मिलने की संभावना है, जिससे विभिन्न उद्योगों में विस्तार के अवसर पैदा हो सकते हैं। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से भारत का ओमान को निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर के स्तर पर स्थिर बना हुआ था, जिसमें अपेक्षित वृद्धि नहीं देखी जा रही थी। लेकिन सीईपीए लागू होने के बाद इस स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। समझौते के तहत लगभग 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क मुक्त पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे भारतीय उत्पादों की लागत प्रतिस्पर्धी बनेगी और उनकी मांग में वृद्धि हो सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे करीब 3.64 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर मौजूदा शुल्क समाप्त हो जाएगा, जो अभी तक पांच प्रतिशत तक के टैक्स के दायरे में आता था। इस समझौते का सबसे बड़ा प्रभाव फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, रत्न एवं आभूषण और वस्त्र उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा। इन क्षेत्रों को ओमान के बाजार में लगभग शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। खासकर दवा उद्योग और इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग खाड़ी देशों में लगातार बढ़ रही है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए ऑर्डर और दीर्घकालिक व्यापार संभावनाएं बन सकती हैं। इसके अलावा यह समझौता भारत को खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक दृष्टि से और मजबूत स्थिति में लाने में मदद कर सकता है। ओमान एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है, जो व्यापारिक मार्गों के लिहाज से भी अहम माना जाता है। ऐसे में यह समझौता भारतीय वस्तुओं के परिवहन और वितरण को अधिक सुगम बनाने में सहायक हो सकता है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आने की संभावना है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से केवल बड़े उद्योग ही नहीं बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों को भी लाभ मिल सकता है। नए बाजारों तक पहुंच आसान होने से एमएसएमई सेक्टर को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार का अवसर मिलेगा। साथ ही निर्यात में विविधता आने से भारत का व्यापार पोर्टफोलियो अधिक मजबूत और स्थिर हो सकता है। कुल मिलाकर यह समझौता भारत और ओमान के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। आने वाले समय में यदि इसका प्रभाव अपेक्षाओं के अनुरूप रहा तो भारतीय निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे देश की वैश्विक व्यापार स्थिति और अधिक मजबूत होने की संभावना है।
भारत के बॉन्ड बाजार में बड़े सुधार की तैयारी, सेबी की योजनाओं से निवेश ढांचे में आ सकता है बदलाव

नई दिल्ली । भारत का बॉन्ड मार्केट अब एक बड़े संरचनात्मक बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जहां बाजार नियामक सेबी इसे अधिक गहरा, पारदर्शी और निवेशकों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में नई पहल कर रहा है। हाल के वर्षों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके मुकाबले बॉन्ड मार्केट अभी भी सीमित दायरे में सिमटा हुआ है। ऐसे में सेबी की नई योजनाएं इस अंतर को कम करने और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को अधिक आकर्षक बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सुधार प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो निवेश के पारंपरिक ढांचे में बड़ा बदलाव संभव है और छोटे निवेशकों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं। सेबी का मुख्य फोकस बॉन्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी बॉन्ड ETF और कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स से जुड़े डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को विकसित करने पर है। इन उपकरणों के माध्यम से बॉन्ड बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने, निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने और ब्याज दर जोखिम को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही टोकनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीक पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे डिजिटल लेजर सिस्टम के जरिए बॉन्ड ट्रेडिंग और सेटलमेंट को तेज और अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। यह कदम भारतीय वित्तीय बाजार को वैश्विक मानकों के करीब लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है, लेकिन वैश्विक तुलना में यह अभी भी छोटा है। आंकड़ों के अनुसार भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार देश की जीडीपी का लगभग 16 प्रतिशत है, जबकि चीन, मलेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में यह अनुपात कहीं अधिक है। इस अंतर के कारण भारत में कंपनियों की फंडिंग का बड़ा हिस्सा अभी भी बैंकिंग सिस्टम पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बॉन्ड बाजार से न केवल कंपनियों को सस्ते और विविध फंडिंग स्रोत मिलेंगे, बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि और बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलेगी। हालांकि रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना आसान नहीं माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय निवेशक अभी भी उच्च रिटर्न वाले इक्विटी निवेश की ओर अधिक आकर्षित होते हैं, जबकि बॉन्ड को अपेक्षाकृत कम लाभ वाला विकल्प माना जाता है। इसके अलावा डेट फंड्स और कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश की जटिल संरचना भी छोटे निवेशकों को दूर रखती है। हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए बॉन्ड खरीदना आसान हुआ है, लेकिन निवेश का दायरा अभी भी सीमित है और अधिकांश निवेशक जोखिम भरे हाई-यील्ड बॉन्ड की ओर झुकाव रखते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल नए वित्तीय उत्पाद लाने से बदलाव पूरा नहीं होगा, बल्कि टैक्स संरचना में सुधार और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन भी जरूरी है। यदि डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर टैक्स बोझ कम किया जाता है और उन्हें इक्विटी के समान प्रतिस्पर्धी बनाया जाता है, तो रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है। इसके साथ ही निवेशकों की वित्तीय शिक्षा और जागरूकता भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि बॉन्ड बाजार में जोखिम और रिटर्न की समझ जरूरी होती है। सेबी इस समय सिर्फ उत्पाद विकास पर ही नहीं, बल्कि नियामकीय ढांचे में भी बदलाव पर विचार कर रहा है। लिस्टेड डेट कंपनियों के लिए अनुपालन नियमों को सरल बनाने की दिशा में समीक्षा चल रही है, ताकि अधिक कंपनियां बॉन्ड बाजार में प्रवेश कर सकें। इसके अलावा टोकनाइजेशन और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रयोगों पर भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम किया जा रहा है। यदि ये सभी पहल सफल होती हैं, तो भारत का बॉन्ड बाजार आने वाले वर्षों में निवेश और पूंजी जुटाने का एक मजबूत वैकल्पिक मंच बन सकता है।
मजबूत ऑर्डर बुक के दम पर Siemens को लेकर ब्रोकरेज में भरोसा कायम, मुनाफे पर दबाव के बावजूद खरीदारी की राय बरकरार

नई दिल्ली । इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Siemens Limited के ताजा तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच मिला-जुला लेकिन काफी हद तक सकारात्मक रुख देखने को मिल रहा है। कंपनी के प्रदर्शन में जहां एक ओर कारोबार और ऑर्डर इनफ्लो में मजबूती दर्ज की गई है, वहीं बढ़ती लागत, कच्चे माल की कीमतों में उछाल और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण मुनाफे पर दबाव साफ नजर आया है। इसके बावजूद ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में इसके बिजनेस में स्थिरता और विस्तार की संभावना बनी रह सकती है। तिमाही नतीजों के अनुसार कंपनी की आय में सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इसके विविध कारोबार क्षेत्रों में मांग के मजबूत बने रहने का संकेत देती है। हालांकि इसी अवधि में शुद्ध मुनाफा करीब 10 प्रतिशत घटकर प्रभावित हुआ, जिसका मुख्य कारण इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा की अस्थिरता रही। इसके बावजूद कंपनी के परिचालन आधार में कोई बड़ी कमजोरी नहीं दिखी, बल्कि इसके विपरीत ऑर्डर बुक में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जिसने बाजार को भरोसा दिया है कि आने वाली तिमाहियों में राजस्व प्रवाह स्थिर रह सकता है। सबसे महत्वपूर्ण संकेत कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो से मिला है, जो इस तिमाही में करीब 33 प्रतिशत बढ़कर नए स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही कुल ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए लगभग 450 अरब रुपये तक दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि कंपनी के पास आने वाले समय में लगातार प्रोजेक्ट्स का मजबूत बैकअप मौजूद है, जिससे उसकी कमाई की दृश्यता बेहतर बनी हुई है। डेटा सेंटर, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिफिकेशन, स्मार्ट सिटी और निजी क्षेत्र के निवेश जैसे क्षेत्रों से मिल रही मांग कंपनी के लिए मुख्य ग्रोथ ड्राइवर के रूप में उभर रही है। ब्रोकरेज हाउसों की बात करें तो अधिकांश विश्लेषकों ने शेयर को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है। कुछ प्रमुख ब्रोकरेज संस्थानों ने स्टॉक पर खरीदारी की सलाह देते हुए मौजूदा स्तर से बेहतर अपसाइड की संभावना जताई है, जबकि कुछ ने इसे होल्ड या न्यूट्रल श्रेणी में रखते हुए अल्पकालिक मार्जिन दबाव की चेतावनी दी है। उनका मानना है कि भले ही लागत का दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है, लेकिन रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी जैसे सेगमेंट से मिलने वाले बड़े ऑर्डर कंपनी की स्थिति को मजबूत बनाए रखेंगे। बाजार प्रदर्शन के लिहाज से भी Siemens का शेयर निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न देता रहा है। हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इसमें स्थिर बढ़त देखी गई है और लंबे समय में इसने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले एक साल में शेयर में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि तीन साल की अवधि में इसमें उल्लेखनीय मजबूती दिखी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कंपनी के बिजनेस मॉडल पर बना हुआ है। कुल मिलाकर स्थिति यह दर्शाती है कि अल्पकालिक मुनाफे पर दबाव के बावजूद Siemens की दीर्घकालिक विकास कहानी मजबूत बनी हुई है। मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन, बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर मांग और विविध व्यवसाय मॉडल इसे आने वाले समय में स्थिर वृद्धि का आधार प्रदान कर सकते हैं, हालांकि वैश्विक लागत दबाव और मुद्रा जोखिमों पर नजर रखना आवश्यक रहेगा।
कोटक निफ्टी अल्फा लो-वोलैटिलिटी 30 इंडेक्स फंड का एनएफओ खुला, इक्विटी निवेशकों के लिए नया फैक्टर-बेस्ड ऑप्शन

नई दिल्ली । भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में निवेशकों के लिए एक नया विकल्प सामने आया है, जहां Kotak Mahindra Asset Management Company ने अपना नया इंडेक्स फंड Kotak Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index Fund लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड स्कीम है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को एक ऐसा इक्विटी निवेश विकल्प देना है जो बेहतर रिटर्न की संभावना के साथ-साथ जोखिम नियंत्रण पर भी ध्यान केंद्रित करे। इस नए फंड का न्यू फंड ऑफर 29 मई 2026 से निवेश के लिए खुल चुका है और यह 12 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगा। कंपनी ने इस फंड में न्यूनतम निवेश राशि 1000 रुपये रखी है और इसमें किसी प्रकार का एग्जिट लोड नहीं लगाया गया है, जिससे निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार आसानी से एंट्री और एग्जिट कर सकते हैं। यह फंड Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index पर आधारित है, जो 30 चुनिंदा कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है। इन कंपनियों का चयन दो प्रमुख फैक्टर्स के आधार पर किया जाता है, जिनमें अल्फा और लो-वॉलेटिलिटी शामिल हैं। अल्फा का अर्थ उन शेयरों से है जिनमें बाजार के औसत प्रदर्शन से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है, जबकि लो-वॉलेटिलिटी उन शेयरों को दर्शाता है जिनमें कीमतों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम होता है। इन दोनों फैक्टर्स के संयोजन का उद्देश्य एक ऐसा पोर्टफोलियो तैयार करना है जो एक तरफ बेहतर रिटर्न की संभावना दे और दूसरी तरफ बाजार की अस्थिरता के प्रभाव को कम कर सके। फंड हाउस के अनुसार यह रणनीति पूरी तरह नियम-आधारित यानी रूल-बेस्ड है, जिसमें समय-समय पर इंडेक्स की पुनर्संतुलन प्रक्रिया की जाती है ताकि बदलते बाजार हालात के अनुसार पोर्टफोलियो को अपडेट किया जा सके। फंड का मुख्य उद्देश्य इंडेक्स के प्रदर्शन को करीब से ट्रैक करना है, इसलिए इसमें उन्हीं कंपनियों को शामिल किया जाएगा जिनका वेटेज इंडेक्स में तय है। इसके अलावा फंड जरूरत के अनुसार डेरिवेटिव्स जैसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस में भी निवेश कर सकता है ताकि ट्रैकिंग को अधिक सटीक बनाया जा सके। कंपनी के प्रबंधन के अनुसार यह फंड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हो सकता है जो लंबी अवधि के लिए इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं और साथ ही स्थिरता और जोखिम नियंत्रण को भी प्राथमिकता देते हैं। इस रणनीति का उद्देश्य एक ऐसा संतुलित पोर्टफोलियो तैयार करना है जो विभिन्न बाजार चक्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सके और निवेशकों को अधिक स्थिर परिणाम प्रदान कर सके। फंड मैनेजर का कहना है कि यह मॉडल ऐसे शेयरों की पहचान करने में मदद करता है जो न केवल प्रदर्शन की क्षमता रखते हैं बल्कि बाजार की तेज हलचलों में भी अपेक्षाकृत स्थिर बने रहते हैं। इस स्कीम के तहत निवेशकों को इक्विटी, डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में भी अप्रत्यक्ष एक्सपोजर मिलेगा, जिससे पोर्टफोलियो में विविधता बनी रहेगी। सरकार और कॉरपोरेट बॉन्ड्स के साथ-साथ शॉर्ट टर्म डिपॉजिट और ट्रेजरी बिल जैसे सुरक्षित विकल्पों में भी निवेश की संभावना रखी गई है। कुल मिलाकर यह नया इंडेक्स फंड निवेशकों को एक संरचित, पारदर्शी और फैक्टर-आधारित निवेश मॉडल प्रदान करता है, जो आधुनिक निवेश रणनीतियों के अनुरूप माना जा रहा है।
प्रणति नायक की एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल 2026 की तैयारी को मिला मजबूत सरकारी समर्थन

नई दिल्ली । Pranati Nayak की आगामी राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल 2026 की तैयारियों को केंद्र सरकार और खेल संस्थानों से लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, Sports Authority of India (SAI) और Target Olympic Podium Scheme (TOPS) मिलकर उनके प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी पर फोकटोक्यो 2020 ओलंपियन प्रणति नायक इस समय भुवनेश्वर स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में चल रहे सीनियर और जूनियर महिला आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स राष्ट्रीय कोचिंग शिविर का हिस्सा हैं। यह शिविर 22 मई से 20 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चीन में होने वाली 13वीं सीनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए टीम को तैयार करना है। इस कैंप में कुल 21 सदस्य शामिल हैं, जिनमें खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ हैं। सरकार ने इस प्रशिक्षण शिविर के लिए करीब 23.52 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। चीन में होने वाली चैंपियनशिप के लिए आर्थिक सहायताआगामी 25 से 28 जून 2026 तक चीन के जुनी में आयोजित होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय जिमनास्टिक्स टीम की भागीदारी के लिए भी सरकार ने 36.59 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की है। इस दल में सीनियर और जूनियर महिला जिमनास्ट शामिल होंगे, जिनमें प्रणति नायक भी प्रमुख खिलाड़ी के रूप में मौजूद हैं। TOPS के तहत व्यक्तिगत सहयोगTarget Olympic Podium Scheme (TOPS) के तहत प्रणति नायक को व्यक्तिगत स्तर पर भी महत्वपूर्ण सहायता दी गई है। 19 से 25 मई 2026 तक उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित एफआईजी आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स वर्ल्ड चैलेंज कप में भाग लेने के लिए उन्हें, उनके कोच और फिजियोथेरेपिस्ट के साथ 5.89 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। इसी प्रतियोगिता में प्रणति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक भी जीता। विदेशी प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाभारत के जिमनास्टिक्स कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए TOPS ने यूके में प्रस्तावित एक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण शिविर के लिए भी 75.65 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह शिविर नवंबर से दिसंबर 2025 के बीच आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा 2026 की शुरुआत में होने वाली दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी खिलाड़ियों को सहायता दी जाएगी। हालांकि, चोट के कारण प्रणति कुछ पिछली प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकीं, लेकिन वे अब पूरी तरह से वापसी की तैयारी में जुटी हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग के चलते प्रणति नायक की तैयारी को मजबूत आधार मिल रहा है। आने वाले राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल 2026 में उनसे भारत को जिमनास्टिक्स में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
धोखाधड़ी मामलों में गिरावट के बावजूद बैंकिंग सिस्टम को भारी झटका, तीन साल में रकम चार गुना तक बढ़ी

नई दिल्ली । देश के बैंकिंग क्षेत्र में सामने आए ताज़ा आंकड़े एक विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां एक तरफ धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर इन मामलों से जुड़े वित्तीय नुकसान में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। एक हालिया वार्षिक वित्तीय आकलन के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी मामलों की संख्या घटकर लगभग 10,114 रह गई, जबकि एक वर्ष पहले यह संख्या 23,722 के करीब थी। इसके बावजूद इन मामलों में शामिल कुल रकम बढ़कर लगभग 48,021 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति इस ओर संकेत करती है कि छोटे स्तर की धोखाधड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े और जटिल वित्तीय घोटालों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान यह रुझान और अधिक स्पष्ट हो गया है, जिसमें मामलों की संख्या लगातार कम होती गई लेकिन वित्तीय नुकसान कई गुना बढ़ता गया। विशेष रूप से बैंकिंग प्रणाली में कर्ज और एडवांस से जुड़े धोखाधड़ी मामलों ने सबसे बड़ा योगदान दिया है, जो कुल धोखाधड़ी राशि का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यह दर्शाता है कि बैंकिंग संस्थानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब डिजिटल या छोटे स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि बड़े कॉरपोरेट और लोन आधारित घोटाले बन चुके हैं। सरकारी बैंकों पर इन धोखाधड़ी मामलों का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है, जहां नुकसान की राशि में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी से होने वाला वित्तीय नुकसान 35,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 51 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कुल धोखाधड़ी राशि में इन बैंकों की हिस्सेदारी भी बढ़कर तीन-चौथाई के करीब पहुंच गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस चुनौती का सबसे बड़ा बोझ उठा रहे हैं। दूसरी ओर निजी बैंकों में भी धोखाधड़ी की रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि वहां इसका दायरा अपेक्षाकृत सीमित रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर बैंकिंग मॉडल, जोखिम मूल्यांकन और ऋण वितरण प्रक्रियाओं में अंतर के कारण देखा जा रहा है। वहीं डिजिटल भुगतान, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तकनीकी सुरक्षा उपायों ने छोटे साइबर फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। हालांकि डिजिटल क्षेत्र में सुधार के बावजूद बड़े वित्तीय घोटाले बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। कर्ज आधारित धोखाधड़ी मामलों में लगातार वृद्धि इस बात की ओर इशारा करती है कि ऋण मंजूरी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वित्तीय संस्थानों को जोखिम आकलन और अनुपालन तंत्र को अधिक सख्त करने की दिशा में कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान को रोका जा सके। कुल मिलाकर यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी का स्वरूप बदल रहा है। जहां छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर नियंत्रण बढ़ा है, वहीं बड़े वित्तीय घोटाले अब सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं, जिनका सीधा असर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ सकता है।
भारतीय–पाकिस्तानी प्रवासियों पर ब्रिटिश सांसद के बयान से मचा विवाद, आंकड़ों ने दावों की खोली पोल

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन में प्रवासन और रोजगार को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जब एक ब्रिटिश सांसद द्वारा भारतीय और पाकिस्तानी मूल के प्रवासियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। सांसद ने दावा किया कि बड़ी संख्या में प्रवासी स्थानीय नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है और देश के श्रम बाजार पर दबाव बन रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विभिन्न वर्गों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सांसद ने यह भी कहा कि यदि उनके विचारों को विवादित या कठोर माना जाता है तो वे इसके लिए तैयार हैं, जिससे विवाद और गहरा गया। हालांकि इस पूरे मुद्दे पर सामने आए आधिकारिक और उपलब्ध आंकड़े सांसद के दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं। जनसंख्या और रोजगार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिस निर्वाचन क्षेत्र का उल्लेख किया गया, वहां भारतीय और पाकिस्तानी मूल के निवासियों की संख्या कुल आबादी का बहुत छोटा हिस्सा है, जो एक प्रतिशत से भी कम बैठता है। ऐसे में यह दावा कि प्रवासी बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं, आंकड़ों के आधार पर मजबूत नहीं माना जा रहा है। रोजगार से जुड़े व्यापक आंकड़े यह संकेत देते हैं कि ब्रिटेन के श्रम बाजार में बड़ी संख्या में गैर-स्थानीय नागरिक विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, लेकिन इसका कारण स्थानीय स्तर पर कई उद्योगों में कर्मचारियों की कमी बताया जाता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और देखभाल जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी बनी हुई है, जिसे पूरा करने के लिए विदेशी श्रमिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार इन क्षेत्रों में प्रवासी कर्मचारियों की भागीदारी आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ी है, न कि स्थानीय रोजगार को प्रभावित करने के उद्देश्य से। इसके साथ ही सामाजिक लाभों को लेकर भी गलत धारणाओं का मुद्दा सामने आया है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि विदेशी नागरिकों की तुलना में स्थानीय नागरिकों की हिस्सेदारी कई मामलों में अधिक या समान बनी रहती है। वीजा नियमों के तहत आने वाले अधिकांश प्रवासी सार्वजनिक धन से मिलने वाले लाभों के लिए पात्र भी नहीं होते, जिससे यह दावा और कमजोर हो जाता है कि वे प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। इस पूरे विवाद ने ब्रिटेन में प्रवासन नीति और रोजगार संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है, जहां एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी है तो दूसरी तरफ आंकड़ों पर आधारित वास्तविकता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर भावनात्मक बयानों की बजाय तथ्यों और डेटा के आधार पर चर्चा होना जरूरी है, ताकि समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति न बने और वास्तविक आर्थिक जरूरतों को सही तरीके से समझा जा सके।
विनेश फोगाट को कोर्ट से राहत, एशियन गेम्स ट्रायल में वापसी का रास्ता साफ

नई दिल्ली । Vinesh Phogat को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। यह ट्रायल 30 और 31 मई को आयोजित किए जाएंगे। अदालत के इस फैसले से उनका अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी का रास्ता एक बार फिर खुल गया है। डब्ल्यूएफआई के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोपूरा मामला तब शुरू हुआ जब Wrestling Federation of India (WFI) ने विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने से रोक दिया था। फेडरेशन का कहना था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और डोपिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले लंबित हैं, इसलिए वे ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकतीं। WFI ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विनेश को ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में WFI को नोटिस प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की कमी पर फटकार भी लगाई थी। हाई कोर्ट के निर्देश और पारदर्शिता पर जोहाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि चयन ट्रायल की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इसके साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि खेल में खिलाड़ियों के अधिकार और उनके करियर को ध्यान में रखना जरूरी है, और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता। WFI का पक्ष और लगाए गए आरोWFI ने विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कई सवालों के जवाब मांगे थे। फेडरेशन ने उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्हें 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। फेडरेशन का तर्क था कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों को नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि का पालन करना जरूरी होता है। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल से बाहर रखा गया था। कोर्ट में पहुंचा मामला, फिर मिली राहतWFI के फैसले के खिलाफ विनेश फोगाट ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अंतिम सुनवाई में अदालत ने उनकी भागीदारी को मंजूरी दे दी। खेल करियर के लिए अहम मोडसुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विनेश फोगाट के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। अब सबकी नजरें 30-31 मई को होने वाले ट्रायल पर टिकी हैं, जहां उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि वे एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर पाएंगी या नहीं।
IPL 2026 क्वालीफायर-2: राजस्थान के ये 5 खिलाड़ी बदल सकते हैं मैच का रुख

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के दूसरे क्वालीफायर में Rajasthan Royals और Gujarat Titans के बीच होने वाला मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। एलिमिनेटर में धमाकेदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी राजस्थान रॉयल्स की टीम इस बार भी अपने कई मैच विनर खिलाड़ियों के दम पर गुजरात के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। इस मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की हो रही है, जिन्होंने पिछले मैच में सिर्फ 29 गेंदों में 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया था। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की क्षमता रखती है। अगर वैभव शुरुआती ओवरों में टिक गए, तो गुजरात के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। उनके साथ यशस्वी जायसवाल भी टीम के लिए बड़ी उम्मीद हैं। इस सीजन उन्होंने लगातार तेज तर्रार बल्लेबाजी करते हुए 426 रन बनाए हैं। यशस्वी न केवल पारी को संभाल सकते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर तेजी से रन बनाकर विपक्षी टीम पर दबाव भी बना सकते हैं। गेंदबाजी विभाग में जोफ्रा आर्चर राजस्थान के सबसे बड़े हथियार साबित हो सकते हैं। उन्होंने इस सीजन 24 विकेट लेकर लगातार विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया है। पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर तक उनकी गेंदबाजी मैच का रुख बदलने में सक्षम है। पिछले मुकाबले में भी उन्होंने तीन अहम विकेट लेकर टीम की जीत सुनिश्चित की थी। मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल भी राजस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। नंबर तीन पर खेलते हुए उन्होंने लगातार प्रभावशाली पारियां खेली हैं। एलिमिनेटर में उनकी 21 गेंदों में 50 रनों की पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। वहीं कप्तान रियान पराग का प्रदर्शन भले ही इस सीजन कुछ उतार-चढ़ाव भरा रहा हो, लेकिन वह किसी भी समय मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। अगर वह क्रीज पर जम गए, तो गुजरात के गेंदबाजों के लिए उन्हें रोकना आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर, राजस्थान रॉयल्स के ये पांच खिलाड़ी गुजरात टाइटंस के लिए बड़े खतरे के रूप में सामने आ सकते हैं और यह मुकाबला पूरी तरह से इन मैच विनर्स के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।