IPL 2026 क्वालिफायर-1: धर्मशाला में आज RCB-GT की टक्कर, रोचक होने वाला है मुकाबला

नई दिल्ली । IPL 2026 का लीग चरण समाप्त हो चुका है और अब मुकाबला उन मैचों का है, जहां एक छोटी गलती पूरे सीजन की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। मंगलवार को धर्मशाला में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटन्स (GT) आमने-सामने होंगी। इस मुकाबले की अहमियत सिर्फ जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि विजेता टीम सीधे फाइनल में अपनी जगह पक्की करेगी। दोनों टीमों ने लीग स्टेज 18-18 अंकों के साथ खत्म किया, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के आधार पर RCB अंक तालिका में शीर्ष पर रही। हालांकि अब लीग चरण के आंकड़ों का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि अगले 40 ओवर ही तय करेंगे कि फाइनल का पहला टिकट किस टीम को मिलेगा। RCB ने इस सीजन अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से विरोधी टीमों पर लगातार दबाव बनाया है। विराट कोहली ने अनुभव और निरंतरता से टीम को कई मुश्किल हालात से बाहर निकाला, जबकि फिल सॉल्ट, रजत पाटीदार और मिडिल ऑर्डर के अन्य बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर मैचों का रुख बदला। टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी बल्लेबाजी की गहराई रही है, जिसके कारण कई बार 200 से अधिक स्कोर खड़े किए गए। इस बार RCB की गेंदबाजी भी पिछले सीजन की तुलना में अधिक संतुलित नजर आई है। जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार ने नई गेंद से शुरुआती विकेट दिलाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी है। वहीं गुजरात टाइटन्स की सफलता का आधार उसकी अनुशासित और धारदार गेंदबाजी रही है। शुभमन गिल, साई सुदर्शन और जोस बटलर ने बल्लेबाजी में योगदान दिया, लेकिन टीम को सबसे खतरनाक बनाने का काम गेंदबाजों ने किया। मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा की तेज गेंदबाजी तिकड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। नई गेंद से विकेट निकालने के साथ डेथ ओवर्स में भी इन गेंदबाजों ने शानदार नियंत्रण दिखाया। इसके अलावा राशिद खान और साई किशोर ने मिडिल ओवर्स में रन गति पर लगाम लगाकर विरोधी टीमों को दबाव में रखा। चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 89 रन की बड़ी जीत के बाद गुजरात का आत्मविश्वास काफी ऊंचा है। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कई व्यक्तिगत भिड़ंत भी मैच का परिणाम तय कर सकती हैं। पावरप्ले में विराट कोहली और कगिसो रबाडा की टक्कर सबसे अहम मानी जा रही है। वहीं फिल सॉल्ट के आक्रामक अंदाज के सामने मोहम्मद सिराज की रणनीति भी दिलचस्प होगी। गुजरात की बल्लेबाजी काफी हद तक शुभमन गिल और साई सुदर्शन पर निर्भर करती है। ऐसे में अगर हेजलवुड और भुवनेश्वर शुरुआती झटके देने में सफल रहे, तो GT दबाव में आ सकती है। दूसरी ओर राशिद खान का स्पेल RCB के मिडिल ऑर्डर के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि रजत पाटीदार का स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ रिकॉर्ड टीम के लिए राहत की बात है। अगर बल्लेबाजी की गहराई देखी जाए तो RCB थोड़ी मजबूत दिखाई देती है, लेकिन गेंदबाजी में निरंतरता और नियंत्रण के मामले में गुजरात टाइटन्स पूरे सीजन में सबसे प्रभावशाली टीम रही है। यही कारण है कि धर्मशाला में होने वाला यह मुकाबला फाइनल से पहले के फाइनल जैसा माना जा रहा है। मंगलवार की रात एक टीम सीधे फाइनल में पहुंचेगी, जबकि दूसरी टीम को खिताबी दौड़ में बने रहने के लिए एक और कठिन मुकाबला खेलना होगा।
फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक और अभिनेता Kishore Kumar अपने शानदार गीतों के साथ-साथ अपनी अनोखी आदतों और मजाकिया स्वभाव के लिए भी खूब पहचाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले कलाकार और फिल्मकार अक्सर उनके अलग अंदाज और अप्रत्याशित व्यवहार के बारे में बातें करते रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा एक बड़ी फिल्म से जुड़ा है, जिसने बाद में हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह बनाई।दोस्ती और दुविधा के बीच फंसे थे किशोर कुमारउस दौर में मशहूर फिल्म निर्देशक Hrishikesh Mukherjee और किशोर कुमार के बीच गहरी दोस्ती थी। निर्देशक अपनी नई फिल्म के लिए ऐसे कलाकार की तलाश में थे जो मुख्य किरदार को जीवंत बना सके। उनकी पसंद किशोर कुमार थे और वे चाहते थे कि वही फिल्म के नायक बनें। लेकिन दूसरी तरफ किशोर कुमार इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं थे। परेशानी यह थी कि गहरी दोस्ती के कारण वह सीधे तौर पर मना भी नहीं कर पा रहे थे। फिल्म से बचने के लिए अपनाया अनोखा तरीकाकाफी सोच-विचार के बाद किशोर कुमार ने एक अलग रास्ता चुना। फिल्म शुरू होने से पहले जब उन्हें लुक और कॉस्ट्यूम को लेकर चर्चा के लिए बुलाया गया तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर चौंक गए। वह पूरी तरह गंजे होकर पहुंचे थे। इतना ही नहीं, वह पूरे ऑफिस में घूमते हुए मजाकिया अंदाज में नाचते और गाते रहे। उनका यह रूप देखकर सभी हैरान रह गए। एक फैसले ने बदल दी पूरी कहानीनिर्देशक के लिए यह दृश्य अप्रत्याशित था। फिल्म के मुख्य किरदार के लिए जिस छवि की कल्पना की गई थी, उसके विपरीत किशोर कुमार का यह अंदाज था। आखिरकार बात इतनी आगे बढ़ी कि उन्हें फिल्म से अलग कर दिया गया। बाद में उसी किरदार के लिए दूसरे कलाकार को चुना गया और फिल्म ने आगे चलकर बड़ी सफलता हासिल की। फिल्म इतिहास का यादगार अध्यायबाद में यह फिल्म बनी Anand, जिसमें मुख्य भूमिका Rajesh Khanna ने निभाई और उनके साथ Amitabh Bachchan भी नजर आए। फिल्म की कहानी और अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। इस घटना ने यह भी साबित किया कि किशोर कुमार केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि उनका जीवन अनोखे और दिलचस्प किस्सों से भी भरा हुआ था, जिनकी चर्चा आज भी उतनी ही दिलचस्पी से होती है।
भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, देश के कई राज्यों में पानी-बिजली की किल्लत

नई दिल्ली । देशभर में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से पानी और बिजली की मांग तेजी से बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों और गांवों में जल संकट और बिजली कटौती की गंभीर स्थिति बन गई है। कहीं लोग पानी के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं, तो कहीं अनियमित बिजली आपूर्ति ने रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है। गर्मी बढ़ने के साथ टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। बिजली संकट के चलते पानी की मोटरें भी बंद पड़ रही हैं, जिससे हालात और खराब हो रहे हैं। दिल्ली के दक्षिणपुरी और देवली क्षेत्रों में पिछले करीब दो महीने से पानी की सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। ब्लॉक 10 और 11 समेत कई इलाकों में लोगों के घरों के नल सूख चुके हैं। लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर घंटों पानी का इंतजार कर रहे हैं। संगम विहार, अंबेडकर नगर, खानपुर, तिगड़ी, मदनगीर और तुगलकाबाद एक्सटेंशन जैसे इलाकों में भी जल संकट गहरा गया है। वहीं पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में स्थानीय लोगों ने जल बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र में भी गर्मी और पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुंबई में पानी की उपलब्धता घटने के बाद 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू की गई है। शहर की सात झीलों का जलस्तर 19.22 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है। अमरावती, अकोला, मेलघाट और चंद्रपुर जैसे जिलों में तापमान 45 से 47 डिग्री तक पहुंच गया है। ग्रामीण इलाकों में लोग टैंकरों के सहारे हैं और कई गांवों में महिलाएं दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं। चंद्रपुर के कुछ गांवों में आज भी लोग सूखे नालों में गड्ढे खोदकर रिसता पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। मध्य प्रदेश के दतिया और बुरहानपुर जिलों में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। दतिया में 3 से 4 दिन में एक बार सीमित समय के लिए पानी की सप्लाई हो रही है, जबकि कई क्षेत्रों में दूषित पानी आने की शिकायतें हैं। बुरहानपुर के धुलकोट इलाके में भी पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में भी बिजली और पानी दोनों संकट का कारण बने हुए हैं। लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बिजली कटौती के चलते पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। गोरखपुर, प्रयागराज, सहारनपुर और कानपुर में भी लोग जल संकट और बिजली कटौती से परेशान हैं। गाजियाबाद और खोड़ा क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। सहारनपुर की अजीज कॉलोनी में करीब 300 परिवार पिछले एक महीने से पानी की समस्या झेल रहे हैं। वहीं कानपुर के 80 फीट रोड इलाके में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच पानी और बिजली की समस्या ने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई जगहों पर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं।
एमपी में भीषण गर्मी का कहर, 45 जिले हीटवेव की गिरफ्त में, 28 मई से प्री-मानसून के आसार

भोपाल । मध्यप्रदेश में इस बार नौतपा की शुरुआत तेज गर्मी के साथ आंधी और बारिश से हुई है। पहले ही दिन भोपाल, उमरिया, दमोह समेत 15 से अधिक जिलों में उमस भरी गर्मी और हल्की बारिश का असर देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार 28 मई से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने के संकेत हैं। इस दौरान उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के 14 जिलों में बारिश हो सकती है। मंगलवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में तीव्र लू का रेड अलर्ट जारी किया गया है। छतरपुर जिले के खजुराहो और नौगांव सबसे अधिक गर्म रहे, जहां तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। भोपाल और ग्वालियर सहित प्रदेश के कुल 45 जिले हीटवेव की चपेट में हैं। वहीं इंदौर और नर्मदापुरम में गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों का पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया है कि 28 मई को ग्वालियर, चंबल, सागर और जबलपुर संभाग के 14 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इससे पहले 25 मई को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई थी। पश्चिमी क्षेत्र से गुजर रहे ट्रफ के कारण मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है। भोपाल में बीते 14 वर्षों में नौतपा के दौरान सात बार बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि दो बार केवल बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी शुरुआत में ही हल्की बारिश दर्ज हो चुकी है। वर्ष 2018 और 2019 में नौतपा के दौरान सबसे अधिक गर्मी पड़ी थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था। सोमवार को नौतपा के पहले दिन प्रदेश में कहीं बारिश तो कहीं भीषण गर्मी का असर रहा। खजुराहो में तापमान रिकॉर्ड 47.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। नौगांव में 46.8 डिग्री, दतिया में 45.6 डिग्री, मंडला में 45.5 डिग्री और टीकमगढ़ में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 41.8 डिग्री और इंदौर में 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 31 मई तक प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी रह सकता है। हालांकि 28 मई को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है।
CBSE मूल्यांकन विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, राहुल गांधी बोले- सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी से डर रही सरकार

नई दिल्ली। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों की शिकायतों के बीच विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबावलोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना चिंता का विषय है। उनका कहना था कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए। OSM प्रणाली पर उठे नए सवालकक्षा 12वीं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर स्क्रीन पर जांचा जाता है। हाल के दिनों में इस प्रणाली को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ छात्रों ने गलत मूल्यांकन और अंकों में विसंगति जैसे मुद्दे उठाए हैं। इसी के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया और इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। युवाओं और छात्रों की भूमिका पर बहसविवाद के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि नई पीढ़ी अब शिक्षा और व्यवस्था से जुड़े सवालों पर खुलकर अपनी बात रख रही है। छात्रों की आवाज और उनकी शिकायतों को लेकर बहस तेज हुई है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। शिक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है। सुधार की मांग हुई तेजविपक्षी नेताओं ने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। परीक्षा प्रक्रिया से लेकर मूल्यांकन और परिणाम तक पूरे ढांचे को और मजबूत बनाने की बात कही जा रही है। उनका मानना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम से कम हो।शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर चर्चाइस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ मजबूत निगरानी और स्पष्ट प्रक्रिया भी जरूरी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बहस देखने को मिल सकती है क्योंकि यह सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा विषय है।
जब एक्टर की भविष्यवाणी सच निकली, बॉलीवुड में मच गया था सनसनी

नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई कलाकार अपनी दमदार एक्टिंग और यादगार किरदारों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं, लेकिन कुछ सितारों की जिंदगी से जुड़े किस्से उन्हें और भी खास बना देते हैं। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी मौत को लेकर जो भविष्यवाणी की थी, वह बाद में सच साबित हुई। 1960 के दशक में फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले संजीव कुमार ने अपने अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। एक समय ऐसा था जब वे अमिताभ बच्चन और शशि कपूर जैसे बड़े सितारों को कड़ी टक्कर देते थे। उनकी फिल्मों और किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उन्होंने गंभीर, कॉमिक और भावनात्मक हर तरह के रोल निभाकर खुद को बहुमुखी अभिनेता साबित किया। संजीव कुमार की जिंदगी से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा उनकी मौत की भविष्यवाणी से जुड़ा है। बताया जाता है कि एक इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया था कि कम उम्र में भी वे फिल्मों में बुजुर्गों के किरदार इतनी सहजता से कैसे निभा लेते हैं। इस पर अभिनेता ने बेहद चौंकाने वाला जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि वे कभी बूढ़े हो पाएंगे, क्योंकि उनके परिवार के ज्यादातर पुरुष 50 साल की उम्र से पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं। संजीव कुमार का मानना था कि वे भी 50 साल की उम्र तक जीवित नहीं रह पाएंगे। यही वजह थी कि वे कम उम्र में ही बड़े पर्दे पर बुजुर्ग किरदार निभाने में सहज महसूस करते थे। बाद में उनकी यह बात सच साबित हुई। 6 नवंबर 1985 को हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 47 साल थी। बताया जाता है कि उनके दादा, पिता और छोटे भाई का निधन भी कम उम्र में ही हो गया था। परिवार के इस इतिहास का असर संजीव कुमार की सोच पर भी पड़ा था और उन्हें अपनी उम्र को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती थी। अपने करियर में संजीव कुमार ने कई यादगार फिल्मों में काम किया। शोले, त्रिशूल, अंगूर, पति पत्नी और वो और हीरो जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी सराहा जाता है। उनकी मौत के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जो दर्शकों के बीच चर्चा में रहीं। संजीव कुमार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अदाकारी और उनसे जुड़े किस्से आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।
बकरा मंडियों में दिखी त्योहार की चमक, लाखों के बकरों ने खींचा ध्यान, खरीदारों के सामने बढ़ी नई चुनौतियां

नई दिल्ली। बकरीद के त्योहार से पहले देशभर की बकरा मंडियों में रौनक अपने चरम पर पहुंच गई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक मंडियों में बड़ी संख्या में खरीदारों और व्यापारियों की भीड़ दिखाई दे रही है। त्योहार के करीब आते ही बाजारों में खरीदारी की रफ्तार बढ़ गई है और खास नस्ल के बकरों की मांग तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। इस बार कई ऐसे बकरे लोगों का ध्यान खींच रहे हैं जिनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच गई है।विशेष बकरों ने बढ़ाया आकर्षणदेश के कई शहरों की मंडियों में दूर-दराज इलाकों से व्यापारी अपने खास बकरे लेकर पहुंचे हैं। कई बकरे अपने भारी वजन, अलग पहचान और विशेष नस्ल के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर ऐसे बकरे भी पहुंचे हैं जिनकी कीमत 11 लाख रुपये तक बताई जा रही है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंडियों का रुख कर रहे हैं। कई खरीदार इन बकरों के साथ तस्वीरें लेते भी दिखाई दे रहे हैं। त्योहारी बाजार में बढ़ी हलचलत्योहार नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी का माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। सुबह से देर रात तक मंडियों में भीड़ बनी हुई है। कई लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार बकरों का चयन कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ी है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है। महंगाई बनी बड़ी चुनौतीइस बार व्यापारियों और खरीदारों दोनों के सामने बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। चारा, परिवहन और देखभाल का खर्च बढ़ने का असर बकरों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई व्यापारियों का कहना है कि पहले की तुलना में खर्च काफी बढ़ चुका है, जिसके कारण कीमतों में भी अंतर दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर ग्राहक भी बजट के हिसाब से खरीदारी करने की कोशिश कर रहे हैं। भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानीत्योहार की तैयारियों के बीच तेज गर्मी ने भी चिंता बढ़ाई है। लगातार बढ़ते तापमान का असर व्यापारियों और पशुओं दोनों पर देखा जा रहा है। कई जगह व्यापारी बकरों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। छाया, पानी और देखभाल पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है ताकि पशुओं की सेहत प्रभावित न हो। मंडियों में बढ़ी उम्मीदेंव्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले के अंतिम दिनों में बिक्री और बढ़ेगी। खरीदार भी अपने परिवार और परंपराओं के अनुसार तैयारी में जुटे हुए हैं। हर साल की तरह इस बार भी बकरीद की तैयारियों ने बाजारों में अलग उत्साह पैदा किया है और देशभर की मंडियां इस उत्साह का केंद्र बन गई हैं।
700 फिल्मों वाला बॉलीवुड स्टार: सलमान-शाहरुख भी रह गए पीछे

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपने दमदार अभिनय और लगातार मेहनत के बल पर लंबा और सफल करियर बनाया। कुछ सितारे अपने स्टारडम के लिए जाने गए, तो कुछ कलाकारों ने फिल्मों की संख्या के मामले में रिकॉर्ड कायम कर दिए। दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा फिल्में करने की सूची में सिर्फ सुपरस्टार ही नहीं, बल्कि एक ऐसे अभिनेता का नाम सबसे ऊपर है जिसने विलेन, कॉमेडियन और कैरेक्टर रोल्स से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। सबसे ज्यादा फिल्में करने वाले कलाकारों की बात करें तो शक्ति कपूर इस सूची में सबसे आगे नजर आते हैं। शक्ति कपूर ने अपने करियर में 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। 80 और 90 के दशक में उन्होंने खलनायक और कॉमिक किरदारों से जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। उनकी खास डायलॉग डिलीवरी और अलग अंदाज ने उन्हें बॉलीवुड का यादगार कलाकार बना दिया। इस सूची में दूसरा बड़ा नाम अनुपम खेर का है। अनुपम खेर ने 500 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने गंभीर, कॉमिक और भावनात्मक हर तरह के किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई। खास बात यह है कि लंबे समय से इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के बावजूद आज भी वे लगातार फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आते हैं। वहीं धर्मेंद्र भी बॉलीवुड के सबसे व्यस्त कलाकारों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। एक्शन, रोमांस और पारिवारिक फिल्मों में उनकी लोकप्रियता दशकों तक बनी रही। उनका नाम हिंदी सिनेमा के सबसे सफल अभिनेताओं में गिना जाता है। कॉमेडी की दुनिया के मशहूर कलाकार जॉनी लीवर ने भी 280 से ज्यादा फिल्मों में काम कर दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अलग अंदाज ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन बना दिया। इसके अलावा परेश रावल ने 250 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। कॉमेडी से लेकर निगेटिव और गंभीर किरदारों तक, उन्होंने हर भूमिका में अपनी छाप छोड़ी। उनकी कई फिल्में आज भी दर्शकों की पसंदीदा मानी जाती हैं। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी इस सूची में शामिल हैं। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है और उम्र के इस पड़ाव पर भी लगातार सक्रिय हैं। वहीं अक्षय कुमार ने 150 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर खुद को इंडस्ट्री के सबसे व्यस्त सितारों में शामिल किया है। इन कलाकारों ने साबित किया कि मेहनत, निरंतरता और दर्शकों का प्यार किसी भी अभिनेता को इतिहास में खास जगह दिला सकता है।
बैन विवाद पर रणवीर सिंह की टीम की सफाई, बोले- सोच-समझकर रखी चुप्पी

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच फिल्म डॉन 3 को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। Federation of Western India Cine Employees यानी FWICE द्वारा रणवीर सिंह को बैन किए जाने के बाद अब पहली बार उनकी टीम की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। रणवीर के प्रवक्ता ने साफ किया है कि अभिनेता ने इस पूरे विवाद पर जानबूझकर चुप्पी बनाए रखी थी, क्योंकि वे निजी और पेशेवर मामलों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा नहीं बनाना चाहते थे। रणवीर सिंह की टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री और डॉन 3 फ्रैंचाइजी से जुड़े सभी लोगों का सम्मान करते हैं। बयान के मुताबिक, रणवीर का मानना है कि प्रोफेशनल बातचीत और व्यक्तिगत रिश्तों को गरिमा, परिपक्वता और आपसी सम्मान के साथ संभाला जाना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने विवाद के दौरान सामने आई अटकलों और चर्चाओं पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझा। टीम ने यह भी कहा कि रणवीर का पूरा ध्यान फिलहाल अपने काम और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर है। उन्होंने कभी भी विवाद को हवा देने या किसी पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की कोशिश नहीं की। बयान में यह भी जोड़ा गया कि अभिनेता डॉन 3 से जुड़े सभी कलाकारों और निर्माताओं की सफलता की कामना करते हैं और आगे भी धैर्य और शांति बनाए रखेंगे। दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब अप्रैल 2026 में फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह के खिलाफ FWICE में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रणवीर ने कंपनी के साथ तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था और उनमें से एक फिल्म प्री-प्रोडक्शन स्टेज में पहुंच चुकी थी। लेकिन शूटिंग शुरू होने से करीब तीन सप्ताह पहले अभिनेता ने अचानक फिल्म छोड़ दी, जिससे प्रोडक्शन हाउस को लगभग 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। FWICE के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद रणवीर सिंह को हर 10 दिन के अंतराल पर तीन नोटिस भेजे गए थे। इसके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभिनेता को बैन करने का फैसला लिया। संगठन ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से अपील की है कि जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक रणवीर के साथ काम न किया जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच समझौता होता है या विवाद और बढ़ता है।
LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत…. PNG कनेक्शन लेने पर सरेंडर नहीं होगा सिलेंडर, बदला नियम!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं (Domestic LPG consumers) को राहत देने के लिए एलपीजी सप्लाई और वितरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है. केंद्र सरकार ने 25 मई 2026 को ‘लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) संशोधन आदेश 2026’ को अधिसूचित किया. इस संशोधन का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा देना है, जिन्होंने PNG कनेक्शन ले लिया है। ऐसे में नए नियमों के तहत पीएनजी लेने पर अब उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन हमेशा के लिए सरेंडर करने की मजबूरी नहीं होगी। दरअसल, मिडिल ईस्ट संकट के चलते एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चल रही वेटिंग को कम करने के लिए सरकार लोगों को लगातार पीएनजी कनेक्शन लेने की सलाह दे रही है. इसको लेकर हाल ही में सरकार ने पीएनजी कनेक्शन के आवेदन पर 7 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. इस बीच सरकार पीएनजी कनेक्शन लेने वालों को और सुविधा देने जा रही है। पेट्रोल-डीजल के स्टॉक पर सरकार का बड़ा बयानअब नए नियमों के तहत एलपीजी उपभोक्ताओं के पास दो विकल्प होंगे. पहला, यदि किसी उपभोक्ता ने PNG कनेक्शन ले लिया है तो वह 30 दिनों के भीतर अपने एलपीजी कनेक्शन को बंद कराने के लिए आवेदन कर सकता है. दूसरा, उपभोक्ता चाहें तो भविष्य में एलपीजी कनेक्शन दोबारा शुरू कराने के लिए ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं. सरकार के अनुसार यह ट्रांसफर वाउचर उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित होते रहते हैं जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे मामलों में उपभोक्ता भविष्य में गैर-PNG क्षेत्र में जाने पर आसानी से अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से बहाल करा सकेंगे। यह नई व्यवस्था विशेष रूप से ट्रांसफरेबल नौकरी करने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किराएदारों, छात्रों और उन परिवारों के लिए लाभकारी मानी जा रही है जो समय-समय पर शहर बदलते रहते हैं। सरकार का कहना है कि इस संशोधन से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी और उन्हें बार-बार नए एलपीजी कनेक्शन लेने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. साथ ही PNG और LPG दोनों सुविधाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।