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रेल यात्रियों को बड़ी राहत: बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर और अजमेर-बांद्रा टर्मिनस ट्रेनें अब नियमित होंगी

रतलाम। यात्रियों की बढ़ती मांग और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे ने बड़ा निर्णय लिया है। अब स्पेशल ट्रेन के रूप में चल रही दो प्रमुख ट्रेनों को नियमित सेवा में शामिल कर दिया गया है। इनमें ट्रेन संख्या 20163/20164 बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस और 19625/19626 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस शामिल हैं। इस फैसले से मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को स्थायी और सुगम रेल सेवा उपलब्ध होगी। बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस का नया शेड्यूलट्रेन संख्या 20163 बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस 30 मई से हर शनिवार को बांद्रा टर्मिनस से शाम 4:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन रतलाम (02:45/02:50 रविवार) और उज्जैन (05:10/05:15) होते हुए अगले दिन दोपहर 3:10 बजे जबलपुर पहुंचेगी। वहीं, वापसी में ट्रेन संख्या 20164 जबलपुर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस 29 मई से हर शुक्रवार को जबलपुर से शाम 5:00 बजे चलेगी और रतलाम (03:50/03:55 शनिवार) तथा उज्जैन (02:10/02:12) होते हुए अगले दिन दोपहर 2:15 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे। इन प्रमुख स्टेशनों पर होगा ठहरावदोनों दिशाओं में इस ट्रेन का ठहराव बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, भोपाल, नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया और नरसिंहपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर होगा। अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस का संचालन भी नियमितरेलवे ने ट्रेन संख्या 19625 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस को भी नियमित किया है, जो रविवार को अजमेर से सुबह 6:35 बजे रवाना होकर रतलाम (17:30/17:40) होते हुए सोमवार को बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 19626 बांद्रा टर्मिनस-अजमेर एक्सप्रेस सोमवार को बांद्रा टर्मिनस से सुबह 8:35 बजे चलेगी और रतलाम (21:05/21:15) होते हुए मंगलवार सुबह 9:10 बजे अजमेर पहुंचेगी। यात्रियों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटीइन दोनों ट्रेनों के नियमित होने से मुंबई, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब यात्रियों को स्पेशल ट्रेन की अनिश्चितता से नहीं गुजरना पड़ेगा और नियमित शेड्यूल के साथ यात्रा आसान हो जाएगी। रेलवे के इस फैसले को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यात्री सुविधा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

संत सुरक्षा की मांग तेज: रतलाम में जैन समाज ने उठाई सख्त कार्रवाई की आवाज

मध्य प्रदेश । रतलाम में रीवा जिले की दर्दनाक घटना के बाद जैन समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिला। सकल जैन श्री संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाजजन कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए जैन संतों की सुरक्षा के लिए विशेष “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग की। समाजजनों ने इस घटना को केवल सड़क दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे “संदिग्ध और गंभीर मामला” बताया। ज्ञापन अपर कलेक्टर डॉ. शालिनी श्रीवास्तव को सौंपा गया। इस दौरान समाज के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ-साथ हिंदू संगठन और व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। ‘यह हादसा नहीं, हत्या है’ – समाज का आरोपज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि रीवा में 20 मई को हुई घटना एक साधारण सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही या सुनियोजित कृत्य हो सकता है। जैन समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।समाज ने आरोप लगाया कि पैदल विहार कर रहे निहत्थे साधु-संतों की सुरक्षा के लिए अब ठोस नीति बनाना जरूरी हो गया है, क्योंकि लगातार इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 7 प्रमुख मांगें रखी गईंज्ञापन में प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं, जिनमें शामिल हैं-घटना की SIT या न्यायिक जांच कराई जाएसभी CCTV और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंदोषियों पर कठोरतम धाराओं में कार्रवाई होयदि षड्यंत्र के संकेत मिलें तो हत्या का केस दर्ज किया जाए“संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” तत्काल लागू किया जाएराष्ट्रीय स्तर पर संत सुरक्षा नीति और गाइडलाइन बनाई जाएविहार मार्गों पर पुलिस सहायता, संकेतक और ट्रैफिक नियंत्रण बढ़ाया जाएइसके अलावा समाज ने मांग की कि पैदल विहार करने वाले संतों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था सरकारी स्कूलों और पंचायत भवनों में की जाए। रीवा हादसे में दो साध्वियों की मौत, एक गंभीररीवा में 20 मई को हुए हादसे में तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे विहार कर रही जैन साध्वियों को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में श्रुति मति माता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य साध्वी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। एक साध्वी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, जिसमें कार को तेज रफ्तार में साध्वियों को टक्कर मारते देखा गया। इसके बाद प्रदेशभर में जैन समाज में आक्रोश फैल गया। प्रदेशभर में विरोध, प्रशासन पर बढ़ा दबावरतलाम में ज्ञापन के बाद अब यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। समाजजन लगातार मांग कर रहे हैं कि संतों की सुरक्षा के लिए स्थायी और सख्त नीति बनाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI की टिप्पणी ने खींचा सबका ध्यान

नई दिल्ली ।देश में तेजी से चर्चा का विषय बने कॉकरोच जनता पार्टी विवाद ने अब न्यायिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। इस मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आईं। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार तो किया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि भावनात्मक दृष्टिकोण से अधिक कानूनी तथ्यों और प्रक्रियाओं पर ध्यान देना आवश्यक है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को शांत रहने की सलाह देते हुए कहा कि मामलों को अत्यधिक भावनात्मक तरीके से देखने के बजाय तथ्यों के आधार पर समझने की आवश्यकता है। अदालत की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गई। दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया था कि एक विशेष डिजिटल अभियान और उससे जुड़े कथित नैरेटिव के जरिए न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। याचिकाकर्ता का दावा था कि विवादित टिप्पणियों को वास्तविक संदर्भ से हटाकर अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। हालांकि अदालत ने मामले को तत्काल सुनवाई योग्य नहीं माना और कहा कि फिलहाल ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति दिखाई नहीं देती, जिसके आधार पर तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने संकेत दिए कि आने वाले समय में सभी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी और उसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। याचिकाओं में कई गंभीर मांगें भी रखी गई हैं। इनमें न्यायालय में होने वाली बहसों के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने, फर्जी कानूनी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों की जांच तथा विवादित डिजिटल गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की मांग शामिल बताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक विवादित टिप्पणी से जुड़ी चर्चा के बाद हुई थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि उन लोगों पर चिंता जताना था जो गलत तरीकों से पेशे में प्रवेश कर व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुआ व्यंग्यात्मक अभियान धीरे-धीरे एक बड़े डिजिटल विमर्श में बदलता दिखाई दिया। समय के साथ यह केवल मजाक या ऑनलाइन ट्रेंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाने का माध्यम बन गया। इसने शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवालों को लेकर व्यापक चर्चा भी पैदा की। फिलहाल यह मामला केवल एक ऑनलाइन बहस नहीं रह गया है बल्कि न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जैसे बड़े विषयों को भी केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर होने वाली सुनवाई पर कई लोगों की नजर बनी रह सकती है।

मैदा मिल में भीषण अग्निकांड, लाखों का नुकसान लेकिन टली बड़ी जनहानि

मध्य प्रदेश । सीहोर जिले के ग्राम पिपलिया मीरा में बीती रात एक मैदा मिल में अचानक भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया और आसपास खड़ी कई चीजें भी जलकर राख हो गईं। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की लपटें इतनी तेज थीं कि मिल के पास खड़ा एक ऑटो पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इसके साथ ही मिल परिसर में रखे कई महंगे कृषि यंत्र और उपकरण भी आग की चपेट में आ गए, जिससे भारी आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश शुरू की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी। इसके बाद तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी गई। दमकल की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई के कारण आग आसपास की अन्य इमारतों या खेतों तक नहीं फैल सकी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। शुरुआती अनुमान के अनुसार शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी को वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन की टीम मामले की जांच में जुट गई है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

लंबे समय की गिरावट के बाद शेयर में जबरदस्त वापसी, तेज उछाल ने बाजार का खींचा ध्यान

नई दिल्ली ।शेयर बाजार में कई बार ऐसे घटनाक्रम देखने को मिलते हैं जो कुछ ही मिनटों में निवेशकों और ट्रेडर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। सोमवार के कारोबारी सत्र में फार्मा सेक्टर की एक कंपनी के शेयर ने कुछ ऐसा ही प्रदर्शन किया, जिसने बाजार में अचानक हलचल बढ़ा दी। लंबे समय से दबाव में चल रहा यह शेयर कुछ ही मिनटों के भीतर तेज रफ्तार पकड़ता नजर आया और इसकी असाधारण तेजी ने निवेशकों की उत्सुकता बढ़ा दी। कारोबार की शुरुआत में शेयर सामान्य गति से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा था। शुरुआती घंटों तक इसमें कोई बड़ी हलचल नहीं दिखी और यह सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। लेकिन दोपहर के दौरान अचानक बाजार में इसकी खरीदारी बढ़ गई और देखते ही देखते इसमें जोरदार उछाल दर्ज किया गया। कुछ ही मिनटों के भीतर शेयर ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि बाजार में इसकी चर्चा तेज हो गई। सबसे दिलचस्प पहलू केवल तेजी नहीं बल्कि ट्रेडिंग वॉल्युम रहा। सामान्य दिनों की तुलना में इस शेयर में कई गुना अधिक कारोबार देखने को मिला। जब किसी शेयर में अचानक तेज खरीदारी और असामान्य वॉल्युम दिखाई देता है, तो बाजार के बड़े और छोटे निवेशकों की नजरें तुरंत उस पर टिक जाती हैं। यही वजह रही कि यह शेयर दिनभर चर्चा का केंद्र बना रहा। हालांकि इस कंपनी का शेयर पिछले एक वर्ष में भारी दबाव का सामना कर चुका है और इसमें बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। लेकिन हाल के समय में इसमें कुछ सुधार के संकेत भी दिखाई देने लगे थे। बीते कुछ हफ्तों में शेयर ने रिकवरी के संकेत दिए हैं, जिससे निवेशकों के बीच एक बार फिर उम्मीद जगी है कि इसमें आगे भी सुधार देखने को मिल सकता है। कंपनी का कारोबार फार्मा सेक्टर से जुड़ा हुआ है और यह स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग होने वाले कई महत्वपूर्ण उत्पाद तैयार करती है। इसके उत्पादों का उपयोग मेडिकल तकनीकों, दवा निर्माण और आधुनिक उपचार प्रक्रियाओं में किया जाता है। खासकर नई पीढ़ी की दवाओं से जुड़े सेगमेंट में इसकी मौजूदगी बाजार की दिलचस्पी बढ़ाने वाली मानी जाती है। बाजार में इस तेजी की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि सीमित उपलब्धता वाले शेयरों में जब अचानक मांग बढ़ती है तो इस तरह की तेज हलचल देखने को मिल सकती है। यदि किसी कंपनी में प्रमोटर हिस्सेदारी अधिक हो और बाजार में उपलब्ध शेयर कम हों, तो थोड़ी बड़ी खरीदारी भी शेयर की कीमत को तेजी से ऊपर ले जा सकती है। हालांकि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले शेयरों में निवेश के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी माना जाता है। बाजार विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते हैं कि केवल तेजी देखकर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को समझकर ही कोई निर्णय लेना बेहतर होता है। फिलहाल यह शेयर बाजार की चर्चाओं में बना हुआ है और अब निवेशकों की नजर इसके अगले कदम पर टिकी हुई है।

हीट स्ट्रोक से बच्चों की सुरक्षा: WHO ने बताए खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके

मध्य प्रदेश । देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी, लू और उमस का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे खासकर छोटे बच्चों के लिए खतरा और अधिक बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों की अतिरिक्त देखभाल करने की सलाह दी है। WHO के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से गर्म हो जाता है, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते लक्षणों की पहचान और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर रखें नजरडब्ल्यूएचओ के मुताबिक बच्चों में गर्मी से जुड़ी गंभीर समस्या के संकेत कई तरह से दिखाई दे सकते हैं। इनमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन शामिल हैं। इसके अलावा तेज दिल की धड़कन, सांस फूलना, कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है या उल्टी की शिकायत भी करता है। हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें फर्स्ट एडWHO ने बताया है कि अगर बच्चे में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो घबराने की बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए। बच्चे को सबसे पहले किसी छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं। अगर बच्चा होश में है तो उसे छोटे-छोटे घूंट में पानी, ओआरएस या नींबू पानी पिलाएं। बच्चे को लिटाकर उसके पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें और शरीर पर ठंडे पानी से स्पंज करें ताकि शरीर का तापमान कम हो सके।अगर बच्चा बेहोश हो जाए तो उसे पानी या कोई भी तरल पदार्थ जबरदस्ती न दें। उल्टी की स्थिति में बच्चे को करवट पर लिटाना चाहिए ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो। इन बातों का रखें विशेष ध्यानWHO ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सीधे धूप में न भेजें और भारी या गर्म कपड़े बिल्कुल न पहनाएं। गर्मी के समय दोपहर में बच्चों को बाहर खेलने से रोकना चाहिए। घर से निकलते समय पानी की बोतल, टोपी और छाता जरूर साथ रखें। बच्चों को हमेशा हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों की सलाहस्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर कदम उठाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है। अगर लक्षण गंभीर दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

IPL 2026: क्वालिफायर-1 में RCB का शानदार रिकॉर्ड, फाइनल की उम्मीदें तेज

 आईपीएल 2026 का पहला क्वालिफायर मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच मंगलवार (26 मई) को खेला जाएगा। यह हाई-वोल्टेज मुकाबला हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, धर्मशाला में आयोजित होगा। दोनों टीमें लीग स्टेज में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप-2 में जगह बनाने में सफल रही हैं, लेकिन इतिहास की नजरें खास तौर पर RCB के क्वालिफायर-1 रिकॉर्ड पर टिकी हैं। RCB का पहले क्वालिफायर में प्रदर्शन अब तक काफी मजबूत रहा है। टीम ने इससे पहले तीन बार क्वालिफायर-1 में जगह बनाई है। साल 2011 में टीम को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बाद 2016 में RCB ने शानदार वापसी करते हुए गुजरात लायंस को हराकर आगे बढ़ने में सफलता हासिल की थी। पिछले सीजन यानी आईपीएल 2025 में रजत पाटीदार की कप्तानी में RCB ने एक और ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। टीम ने पंजाब किंग्स को हराकर फाइनल में जगह बनाई और खिताब जीतने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया था। अब तक खेले गए तीन क्वालिफायर-1 में RCB ने 2 जीत और 1 हार दर्ज की है, जो उनके बड़े मुकाबलों में मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है। आईपीएल इतिहास की बात करें तो RCB अब तक चार बार फाइनल में पहुंच चुकी है, लेकिन टीम ने एक बार ही ट्रॉफी अपने नाम की है। पिछले सीजन टीम ने 18 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए पहली बार आईपीएल खिताब जीता था, जो फ्रेंचाइजी के लिए ऐतिहासिक पल था। इस सीजन भी RCB का प्रदर्शन बेहद संतुलित नजर आया है। टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल बने हुए हैं। विराट कोहली इस समय शानदार फॉर्म में हैं और 557 रन बना चुके हैं। वहीं कप्तान रजत पाटीदार ने मुश्किल परिस्थितियों में अहम पारियां खेली हैं। टिम डेविड ने फिनिशर की भूमिका को मजबूती दी है। गेंदबाजी में भुवनेश्वर कुमार ने 24 विकेट लेकर टीम को लगातार सफलता दिलाई है। उनके साथ जोश हेजलवुड और रसिख सलाम ने भी अच्छा सहयोग दिया है। स्पिन विभाग में सुयश और क्रुणाल पांड्या की जोड़ी ने मध्य ओवरों में विपक्षी टीमों पर दबाव बनाए रखा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या RCB अपने मजबूत क्वालिफायर रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए पांचवीं बार फाइनल में जगह बना पाएगी या फिर गुजरात टाइटंस इस बार इतिहास बदल देगी।

यूसीसी पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- वनवासियों की परंपराओं से नहीं होगी छेड़छाड़, धर्मांतरण पर भी दी सख्त चेतावनी

नई दिल्ली ।यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनजातीय समाज को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान देते हुए वनवासी समाज को आश्वस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो आशंकाएं फैलाई जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है और जनजातीय समुदाय की परंपराओं, अधिकारों तथा सांस्कृतिक पहचान पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर चल रही बहस को नया आयाम मिल गया है। एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि समाज में एक भ्रम फैलाया जा रहा है कि यूसीसी लागू होने के बाद जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली से वंचित हो जाएगा। उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि वनवासी समाज के अधिकारों और परंपराओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में उनके सांस्कृतिक मूल्यों के साथ हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां-जहां यूसीसी लागू किया गया है, वहां जनजातीय समाज को विशेष प्रावधानों के तहत अलग रखा गया है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय परंपराएं, सामाजिक ढांचे और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। उन्होंने वनवासी समाज से अपील करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है। इस दौरान गृह मंत्री ने धर्मांतरण के विषय पर भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म और परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। लेकिन लालच, दबाव या किसी अन्य माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल पहचान की रक्षा करने का संदेश भी दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय परंपराओं और धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वनवासी समाज और सनातन संस्कृति के ऐतिहासिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करने में उनका योगदान विशेष रहा है। इसके अलावा उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में विकास और बदलाव को लेकर भी कई बातें रखीं। उन्होंने कहा कि अब दूरस्थ और वन क्षेत्रों में विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और सरकार इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के जरिए जनजातीय समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। यूसीसी और जनजातीय अधिकारों को लेकर दिया गया यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है, क्योंकि इससे कानून, संस्कृति और सामाजिक संरचना जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं।

IPL 2026 प्लेऑफ: क्वालिफायर-1 में हारकर भी RCB और GT को मिलेगा दूसरा मौका

आईपीएल 2026 के 70 लीग मुकाबलों के बाद अब प्लेऑफ की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। अंक तालिका में टॉप-4 टीमें तय हो गई हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच होने वाले क्वालिफायर-1 मुकाबले की हो रही है। इस मुकाबले में जीतने वाली टीम सीधे फाइनल में पहुंच जाएगी, जबकि हारने वाली टीम का सफर खत्म नहीं होगा। आईपीएल के नियमों के अनुसार टॉप-2 में रहने का सबसे बड़ा फायदा यही है कि टीम को फाइनल में पहुंचने का एक और मौका मिलता है। क्वालिफायर-1 में हारने वाली टीम सीधे बाहर नहीं होगी, बल्कि उसे क्वालिफायर-2 में खेलने का अवसर मिलेगा। वहां उसका सामना एलिमिनेटर जीतकर आने वाली टीम से होगा। यानी RCB और GT में से जो भी टीम पहले मुकाबले में हारती है, उसके पास फाइनल में पहुंचने का एक और मौका मौजूद रहेगा। इस सीजन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। रजत पाटीदार की कप्तानी में टीम ने 14 मैचों में 9 जीत दर्ज की और 18 अंकों के साथ अंक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। टीम की बैटिंग लाइनअप में विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल लगातार रन बना रहे हैं। कोहली ने 557 रन बनाए हैं, जबकि टिम डेविड ने फिनिशर की भूमिका बखूबी निभाई है। गेंदबाजी में भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड और रसिख सलाम ने शानदार प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर गुजरात टाइटंस ने भी 14 मैचों में 9 जीत हासिल कर 18 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। शुभमन गिल और साई सुदर्शन की ओपनिंग जोड़ी इस सीजन सबसे मजबूत कड़ी साबित हुई है। सुदर्शन 638 रन और गिल 616 रन बना चुके हैं। जोस बटलर ने भी अहम मौकों पर टीम को मजबूती दी है। गेंदबाजी में मोहम्मद सिराज और कगिसो रबाडा की जोड़ी ने लगातार विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया है। यही वजह है कि GT इस समय एक संतुलित और खतरनाक टीम के रूप में नजर आ रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्वालिफायर-1 में कौन सी टीम बाजी मारती है और कौन सी टीम क्वालिफायर-2 के जरिए फाइनल की दूसरी राह पकड़ती है।

उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

नई दिल्ली ।उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक यात्रा को और तेज, आसान और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला नया बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आने वाले समय में यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल पहाड़ों का सफर आसान होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से आने वाले यात्रियों को भी लंबी दूरी और ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पुराने मार्गों का विस्तार करने के बजाय एक बिल्कुल नए मार्ग का निर्माण किया जाएगा। इससे यात्रा अधिक सुगम होगी और स्थानीय ट्रैफिक की बाधाओं से भी बचा जा सकेगा। प्रस्तावित मार्ग को नियंत्रित एक्सेस प्रणाली के तहत विकसित किया जाएगा, जिससे वाहन बिना किसी रुकावट के तेज गति से सफर कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे लगभग 100 किलोमीटर लंबा होगा और चार लेन की आधुनिक सड़क सुविधा से लैस रहेगा। इसके निर्माण के बाद बरेली से हल्द्वानी के बीच यात्रा करने वाले लोगों को बड़े शहरों और कस्बों में लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा। अभी इस मार्ग पर कई ऐसे इलाके पड़ते हैं जहां अक्सर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है, जिसके कारण यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और यात्रा का समय भी बढ़ जाता है। नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बरेली से हल्द्वानी तक पहुंचने का समय कम होने की संभावना जताई जा रही है। यात्रा के दौरान एक से डेढ़ घंटे तक की बचत हो सकती है, जो विशेष रूप से पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान बड़ी राहत साबित हो सकती है। हल्द्वानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है और यहीं से नैनीताल समेत कई प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थलों की शुरुआत होती है। इस परियोजना का लाभ केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के यात्रियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों से उत्तराखंड की ओर जाने वाले मार्गों पर अक्सर भारी ट्रैफिक और जाम की स्थिति बनी रहती है। नए एक्सप्रेसवे को बड़े राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिससे यात्रा और अधिक सरल हो सकेगी। आधुनिक सड़क परियोजनाएं केवल दूरी कम करने तक सीमित नहीं होतीं बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देती हैं। ऐसे में बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे को भविष्य की एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में लाखों लोगों के सफर को नई रफ्तार दे सकती है।