Chambalkichugli.com

मोहम्मद रफी ने अपने बच्चों को क्यों रखा सिंगिंग से दूर? दिग्गज गायक की सोच जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली । भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में जब भी महान गायकों का जिक्र होगा, मोहम्मद रफी का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा। अपनी मधुर आवाज और बहुमुखी गायन शैली से उन्होंने दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। रोमांटिक गीत हों, दर्द भरे नगमे हों या फिर देशभक्ति के गीत, रफी साहब ने हर अंदाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी। लेकिन उनके जीवन से जुड़ा एक सवाल हमेशा लोगों के मन में उठता रहा है कि आखिर उनके बच्चों ने गायकी को अपना करियर क्यों नहीं बनाया। मोहम्मद रफी के कुल सात बच्चे थे। उनकी पहली शादी बशीरा से हुई थी, जिनसे उनका एक बेटा सईद हुआ। बाद में उन्होंने बिलकिस बानो से निकाह किया, जिनसे उनके तीन बेटे और तीन बेटियां हुईं। इतने बड़े संगीत परिवार से होने के बावजूद उनके किसी भी बच्चे ने प्रोफेशनल सिंगिंग की दुनिया में कदम नहीं रखा। इसके पीछे की वजह खुद रफी साहब की सोच थी। मोहम्मद रफी पर लिखी गई किताब ‘मोहम्मद रफी: माय अब्बा’ में उनकी बहू यास्मीन खालिद ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है। उनके अनुसार रफी साहब कभी नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे केवल उनके नाम और विरासत के सहारे संगीत जगत में उतरें। उनका मानना था कि जिस मुकाम तक वह अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर पहुंचे थे, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है। उन्हें डर था कि उनके बच्चों की तुलना हमेशा उनसे की जाएगी और यह दबाव उनके लिए बोझ बन सकता है। यास्मीन के मुताबिक, रफी साहब ने अपने बच्चों को शुरू से ही एक सामान्य जीवन देने की कोशिश की। उन्होंने उन्हें बोर्डिंग स्कूलों में पढ़ाया और संगीत की दुनिया की चमक-दमक से दूर रखा। वह चाहते थे कि उनके बच्चे अपनी पसंद और योग्यता के अनुसार जीवन में आगे बढ़ें, न कि पिता की पहचान के दबाव में कोई रास्ता चुनें। रफी साहब की सादगी भी उतनी ही मशहूर थी जितनी उनकी गायकी। बताया जाता है कि वह रोज सुबह पांच बजे उठते थे और नियमित रूप से रियाज करते थे। उन्हें साधारण जीवन पसंद था और वह घर का बना खाना ही खाना पसंद करते थे। मीडिया से दूरी बनाए रखना भी उनकी आदतों में शामिल था। उनका मानना था कि वह एक आम इंसान हैं और उनके पास बताने के लिए कोई सनसनीखेज कहानी नहीं है। संगीत के इस महान सितारे का जीवन भले ही बेहद सफल रहा, लेकिन उनका व्यक्तिगत जीवन विनम्रता और अनुशासन से भरा हुआ था। यही कारण था कि उन्होंने अपने बच्चों पर कभी अपनी पहचान का बोझ नहीं डाला। उन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से जीवन जीने और अपनी राह चुनने की आजादी दी। 31 जुलाई 1980 को मात्र 55 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से मोहम्मद रफी का निधन हो गया था। उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था। भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि रफी साहब केवल एक महान गायक ही नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों की धड़कन थे। आज भी मोहम्मद रफी के गीत लोगों की जुबान पर हैं और उनकी आवाज संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है। उनके बच्चों ने भले ही गायकी को पेशा नहीं बनाया, लेकिन रफी साहब की विरासत आज भी भारतीय संगीत जगत की सबसे अनमोल धरोहरों में गिनी जाती है।

दिल्ली के झुग्गी पुनर्वास पर बड़ा फैसला, 4 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ; यमुना जल परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और शहरी विकास को लेकर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राजधानी के करीब 4 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाने वाली व्यापक पुनर्वास योजना को मंजूरी देने की दिशा में सहमति बनी है। इस बैठक में दिल्ली के शहरी ढांचे को मजबूत करने और झुग्गी क्षेत्रों को व्यवस्थित आवासीय कॉलोनियों में बदलने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नई पुनर्वास कॉलोनियों का विकास केवल आवास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आंगनवाड़ी केंद्र, विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान और अन्य आवश्यक सामुदायिक सुविधाएं भी शामिल होंगी। इसका उद्देश्य पुनर्वासित परिवारों को बेहतर और संतुलित शहरी जीवन उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि झुग्गी पुनर्वास नीति-2026 को जल्द अधिसूचित किया जाए ताकि प्रक्रिया को कानूनी और प्रशासनिक आधार मिल सके। इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta तथा उपराज्यपाल T. S. Singh Sandhu भी मौजूद रहे। सभी पक्षों ने मिलकर पुनर्वास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और PPP मॉडल के तहत विकास कार्यों को लागू करने पर सहमति जताई। योजना के तहत DDA और DUSIB को निर्देश दिया गया है कि पांच झुग्गी क्लस्टरों के लिए 45 दिनों के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए और 50 अतिरिक्त क्लस्टरों के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए। सरकार का लक्ष्य है कि पुनर्वास कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित की जाए, ताकि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके। बैठक में यमुना नदी के जल प्रबंधन और किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर भी अहम निर्णय लिया गया। छह राज्यों ने मिलकर इस परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति जताई है, जिससे दिल्ली सहित पूरे यमुना बेसिन क्षेत्र में जल आपूर्ति को मजबूत करने की उम्मीद है। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से में से कुछ भाग दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है, जिससे राजधानी में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह समग्र योजना दिल्ली के शहरी विकास और जल संसाधन प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में इससे न केवल झुग्गी क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, बल्कि राजधानी के बुनियादी ढांचे में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

प्रभास स्टारर महागाथा 'कल्कि 2' की स्टारकास्ट को लेकर सस्पेंस बरकरार, दीपिका को रिप्लेस करने के दावों पर आया फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों का बड़ा बयान

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार ‘क‍ल्कि 2898 AD’ के दूसरे भाग को लेकर फिल्म गलियारों में कयासों और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। साल 2024 में सुपरस्टार प्रभास और दीपिका पादुकोण अभिनीत इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। फिल्म में दीपिका पादुकोण के किरदार और उनके अभिनय को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों द्वारा भी काफी सराहा गया था। अब जबकि निर्माता-निर्देशक इस महागाथा के दूसरे हिस्से की तैयारियों और निर्माण में जुटे हैं, तब सोशल मीडिया पर फिल्म की स्टारकास्ट में बड़े बदलाव को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स में यह बात तेजी से वायरल हो रही है कि दीपिका पादुकोण अब इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं और वे इस फ्रेंचाइजी से बाहर हो चुकी हैं। इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब कुछ समय पहले यह दावा किया गया कि फिल्म निर्माताओं ने दीपिका पादुकोण की जगह दक्षिण भारतीय सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्री साई पल्लवी को इस प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया है। इन तमाम खबरों के बीच अब एक नया मोड़ सामने आया है, जिसमें बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्री आलिया भट्ट का नाम भी इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के साथ जोड़ा जा रहा है। सोशल मीडिया पर तैर रही विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आलिया भट्ट ने इस मेगा बजट फिल्म के लिए अपनी सहमति दे दी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि आलिया भट्ट फिल्म में दीपिका पादुकोण को पूरी तरह से रिप्लेस कर रही हैं, जबकि उद्योग जगत के कुछ अन्य सूत्रों का मानना है कि आलिया का किरदार पूरी तरह से नया, अनूठा और फिल्म की कहानी को एक नया आयाम देने वाला होगा। इंटरनेट पर चल रही खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि इस गुप्त प्रोजेक्ट के लिए आलिया भट्ट ने हैदराबाद का दौरा किया था, जहां उन्होंने फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों की शूटिंग भी पूरी कर ली है। यदि इन अटकलों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो दर्शकों को पर्दे पर पहली बार साई पल्लवी और आलिया भट्ट की दो दमदार अभिनेत्रियों की जुगलबंदी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और कास्टिंग को लेकर अभी तक आलिया भट्ट या फिल्म के मुख्य निर्माताओं की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है। फिल्म ‘कल्कि 2’ की निर्माण टीम से जुड़े एक विश्वसनीय सूत्र ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि सोशल मीडिया पर चल रही ये खबरें पूरी तरह से अपुष्ट हैं। सूत्र के अनुसार, किसी एक सोशल मीडिया हैंडल से इस तरह का भ्रामक दावा किया गया और बिना किसी प्रामाणिक तथ्य के अन्य प्लेटफॉर्म्स पर इसे कॉपी-पेस्ट किया जाने लगा। वर्तमान में आलिया भट्ट की इस प्रोजेक्ट में कास्टिंग को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि दीपिका पादुकोण को लेकर पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में कई तरह की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। चर्चा है कि उनके हाथ से एक के बाद एक दो बड़े प्रोजेक्ट्स निकल गए हैं। पहले निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर कुछ मतभेदों की खबरें आईं, जिसके बाद तृप्ति डिमरी को कास्ट कर लिया गया। इसके तुरंत बाद निर्देशक नाग अश्विन की ‘कल्कि 2’ से भी उनके अलग होने की अफवाहों ने तूल पकड़ लिया। दूसरी तरफ, आलिया भट्ट इस समय अपने कई अन्य बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। वे जल्द ही यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की आगामी फिल्म ‘अल्फा’ में मुख्य भूमिका निभाती नजर आएंगी, जिसका निर्देशन शिव रवैल कर रहे हैं और इसमें उनके साथ शरवरी, बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे कलाकार दिखाई देंगे। इसके अतिरिक्त, आलिया भट्ट प्रसिद्ध निर्देशक संजय लीला भंसाली की आगामी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की तैयारियों में भी जुटी हैं, जिसमें वे रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ स्क्रीन स्पेस साझा करती नजर आएंगी। ‘कल्कि 2’ में उनकी एंट्री केवल एक अफवाह है या इसमें कोई वास्तविक सच्चाई है, यह आने वाले समय में मेकर्स की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ हो पाएगा।

‘माधुरी के सामने डांस करने से डरती थीं एक्ट्रेसेस’, करिश्मा कपूर ने खोला ‘दिल तो पागल है’ का बड़ा राज

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे सफल और यादगार फिल्मों में शामिल ‘दिल तो पागल है’ ने 90 के दशक में रोमांस और डांस आधारित फिल्मों की परिभाषा बदल दी थी। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की तिकड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। खास तौर पर करिश्मा कपूर द्वारा निभाया गया ‘निशा’ का किरदार आज भी बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली महिला किरदारों में गिना जाता है। हालांकि हाल ही में करिश्मा कपूर ने खुलासा किया कि इस भूमिका को करने से पहले कई अभिनेत्रियों ने इसे ठुकरा दिया था। एक इंटरव्यू के दौरान करिश्मा कपूर ने बताया कि उस समय इंडस्ट्री में माधुरी दीक्षित का दबदबा इतना अधिक था कि कई अभिनेत्रियां उनके साथ स्क्रीन शेयर करने से भी घबराती थीं। करिश्मा के मुताबिक, जब ‘दिल तो पागल है’ बन रही थी, तब कोई भी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के सामने डांस करने या उनके साथ डांस फेस-ऑफ करने के लिए तैयार नहीं थी। माधुरी की बेहतरीन नृत्य कला और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस को देखते हुए कई अभिनेत्रियों को लगता था कि उनकी तुलना में वे फीकी पड़ सकती हैं। करिश्मा ने कहा कि यही वजह थी कि ‘निशा’ का किरदार कई अभिनेत्रियों ने स्वीकार नहीं किया। लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और पूरी मेहनत से निभाया। बाद में यही किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस भूमिका के लिए करिश्मा कपूर को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था और दर्शकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा था। करिश्मा ने अपने किरदार के भावनात्मक पक्ष पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘निशा’ एक पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइन नहीं थी। वह नायक से प्यार करती है, लेकिन उसे बदले में प्यार नहीं मिलता। आमतौर पर फिल्मों में हीरो और हीरोइन की प्रेम कहानी को केंद्र में रखा जाता है, लेकिन ‘दिल तो पागल है’ में निशा का दर्द और उसका एकतरफा प्रेम दर्शकों को गहराई से छूता है। यही बात इस किरदार को खास बनाती है। अभिनेत्री ने बताया कि जब भी वह उस किरदार के बारे में सोचती हैं, आज भी भावुक हो जाती हैं। उनके मुताबिक, निशा की भावनात्मक यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण और यादगार थी। वह एक ऐसी लड़की थी जो अपने प्यार को खोने के बावजूद मजबूती से खड़ी रहती है और यही उसकी सबसे बड़ी खूबी थी। हाल ही में करिश्मा कपूर और माधुरी दीक्षित ने रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर 5’ में ‘दिल तो पागल है’ के कुछ यादगार पलों को दोबारा जीवंत किया। इस दौरान दोनों अभिनेत्रियों का रीयूनियन फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं था। सोशल मीडिया पर भी दोनों की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए। वर्कफ्रंट की बात करें तो करिश्मा कपूर लंबे समय बाद वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आई हैं, जिसमें उन्होंने एक एंग्लो-इंडियन डिटेक्टिव की भूमिका निभाई है। वहीं माधुरी दीक्षित अपनी नई फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों अभिनेत्रियां आज भी अपने अभिनय और व्यक्तित्व से दर्शकों का दिल जीत रही हैं। करिश्मा कपूर का यह खुलासा एक बार फिर साबित करता है कि बड़े कलाकारों के साथ काम करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उतना ही सीखने और खुद को साबित करने का अवसर भी देता है। ‘दिल तो पागल है’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

‘लगान’ ने मुझे बर्बाद कर दिया…’, आमिर खान की फिल्म के अभिनेता अमीन हाजी का चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली । आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘लगान’ को रिलीज हुए 25 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी और इसके कलाकारों को भी रातोंरात लोकप्रियता मिली। लेकिन फिल्म में ‘बागा’ का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता अमीन हाजी के लिए यह सफलता एक अलग ही अनुभव लेकर आई। अमीन हाजी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि ‘लगान’ ने उन्हें “बर्बाद” कर दिया था। उनका यह बयान सुनकर फिल्म प्रेमी हैरान रह गए। अमीन हाजी ने बताया कि ‘लगान’ उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन यही उपलब्धि उनके लिए आगे बढ़ने में बाधा भी बन गई। उन्होंने कहा कि फिल्म के बाद उन्हें कई ऑफर मिले, लेकिन कोई भी किरदार या कहानी ‘लगान’ के स्तर की नहीं लगी। ऐसे में उन्होंने अभिनय जारी रखने के बजाय खुद को पीछे खींच लिया। अमीन के मुताबिक, वह अपनी मेहनत से कमाई गई प्रतिष्ठा को खोना नहीं चाहते थे और उन्हें लगता था कि अगर कमजोर भूमिकाएं स्वीकार करेंगे तो उनकी पहचान प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अपनी स्थिति को मशहूर शायरी की पंक्तियों से बयां करते हुए कहा, “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर कम निकले।” अमीन ने माना कि ‘लगान’ जैसी फिल्म जीवन में बार-बार नहीं मिलती और उस अनुभव ने उनके लिए अभिनय की कसौटी बहुत ऊंची कर दी थी। अमीन हाजी ने यह भी बताया कि एक समय ऐसा आया जब निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और उनकी पत्नी ने उनसे पूछा कि आखिर वह आगे क्या करना चाहते हैं। तब उन्होंने साफ कहा कि वह केवल अभिनय के लिए अभिनय नहीं करना चाहते। इसके बाद आशुतोष गोवारिकर ने उन्हें अपनी अगली फिल्म ‘स्वदेश’ के लेखन से जुड़ने का प्रस्ताव दिया। उस समय फिल्म का नाम ‘देश’ था। अमीन ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए उन्हें क्यों चुना जा रहा है, तो आशुतोष ने उनकी ईमानदारी और रचनात्मक सोच की तारीफ करते हुए उन्हें टीम में शामिल कर लिया। यहीं से अमीन हाजी के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। अभिनय से दूरी बनाने वाले अमीन ने लेखन की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे एक सफल लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘हॉन्टेड 3डी’ और ‘डेंजरस इश्क’ जैसी फिल्मों में सह-लेखक के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने अपनी फिल्म ‘कोई जाने ना’ का निर्देशन भी किया। अमीन हाजी ने कहा कि ‘लगान’ उनके लिए किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं रही। इस फिल्म ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि सिनेमा की बारीकियां भी सिखाईं। उन्होंने आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर और पूरी टीम का आभार जताते हुए कहा कि अगर ‘लगान’ नहीं होती तो शायद उनका फिल्मी सफर इस तरह आकार नहीं ले पाता। भले ही अमीन हाजी ने मजाकिया अंदाज में कहा हो कि ‘लगान’ ने उन्हें बर्बाद कर दिया, लेकिन उनके पूरे बयान से साफ है कि यह फिल्म उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सीख और सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। यही वजह है कि 25 साल बाद भी ‘लगान’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसी पाठशाला है जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।

आज का राशिफल 17 जून 2026: कन्या राशि वालों को आर्थिक लाभ के योग, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली । बुधवार, 17 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के कारण कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। आज चंद्रमा और अन्य प्रमुख ग्रहों की स्थिति करियर, व्यापार, आर्थिक मामलों और पारिवारिक जीवन पर विशेष प्रभाव डालेगी। कुछ राशियों को धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे, तो कुछ को अपने कार्यों में सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। वृषभ राशि वालों के लिए दिन लाभदायक साबित हो सकता है। सामाजिक संबंध मजबूत होंगे और किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में फायदा पहुंचा सकती है। धन संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। मिथुन राशि के जातकों को आज कार्यक्षेत्र में सफलता मिल सकती है। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। आय के नए स्रोत बनने के योग हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन पारिवारिक खुशियां लेकर आएगा। किसी पुराने विवाद का समाधान हो सकता है। निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। सिंह राशि के लोगों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल पर धैर्य और संयम बनाए रखें। जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। कन्या राशि के लिए आज का दिन विशेष रूप से शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ के मजबूत संकेत हैं। नौकरी और व्यापार में प्रगति होगी। टीमवर्क और सहयोग से महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हो सकती है। निवेश से भी लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। तुला राशि वालों को करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आपकी कार्यकुशलता की सराहना होगी और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। वृश्चिक राशि के जातकों को शिक्षा, प्रतियोगिता और यात्रा से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम पूरे होंगे। धनु राशि वालों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी बड़े निवेश या लेन-देन से पहले अच्छी तरह विचार कर लें। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। मकर राशि के लिए साझेदारी और सहयोग लाभदायक साबित हो सकता है। व्यवसाय में नई संभावनाएं बनेंगी और नौकरीपेशा लोगों को उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। कुंभ राशि के जातकों को आज अपने कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने की जरूरत है। अनावश्यक खर्चों से बचें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। मीन राशि वालों के लिए दिन रचनात्मकता और उपलब्धियों से भरा रहेगा। नई योजनाएं सफल हो सकती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। प्रेम और पारिवारिक जीवन में भी सुखद वातावरण बना रहेगा। कुल मिलाकर 17 जून 2026 का दिन अधिकांश राशियों के लिए सकारात्मक रहने वाला है। विशेष रूप से कन्या, मिथुन, मकर और मीन राशि के जातकों को करियर और आर्थिक मामलों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।

भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव

नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए फ्रांस के प्रमुख रिटेल केंद्रों में प्रवेश कर लिया है। फ्रांस के नीस मैसेना स्थित प्रतिष्ठित गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा की शुरुआत के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इसे भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद अब भारतीय पर्यटक और ग्राहक फ्रांस के इस प्रसिद्ध रिटेल स्टोर में सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया अधिक आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सीमापार डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने और वैश्विक भुगतान प्रणाली में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि फ्रांस के प्रमुख रिटेल गंतव्यों में से एक गैलरीज लाफायेट में यूपीआई का लॉन्च होना भारत की तकनीकी प्रगति और विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान समाधान की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी और इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इस पहल को सफल बनाने में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनियों और तकनीकी साझेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारियां वैश्विक स्तर पर सहज, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही इससे विदेशी बाजारों में भारतीय फिनटेक समाधानों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे। भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूपीआई का विस्तार इसी मजबूत होते संबंध का एक नया उदाहरण माना जा रहा है। फ्रांस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फ्रांसीसी उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया। यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र Sophia Antipolis का भी दौरा किया। यह केंद्र शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां हजारों तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार केंद्र भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक मान्यता दिलाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में अन्य देशों और प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी यूपीआई की पहुंच बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

सुपरहिट गाने पर तमन्ना का बड़ा खुलासा, 'कावाला' में अपने प्रदर्शन को लेकर जताई कमी, बताया क्यों नहीं थीं पूरी तरह खुश

मुंबई । फिल्म जगत में अक्सर कलाकारों के काम को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिलती है, लेकिन कई बार स्वयं कलाकार अपने प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। ऐसा ही कुछ अभिनेत्री Tamannaah Bhatia के साथ भी हुआ। साउथ सुपरस्टार Rajinikanth की फिल्म Jailer के बेहद लोकप्रिय गाने Kaavaalaa ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई, लेकिन अभिनेत्री का कहना है कि वह अपने प्रदर्शन को और बेहतर बना सकती थीं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान तमन्ना ने अपने करियर, डांस और अभिनय को लेकर खुलकर विचार साझा किए। चर्चा के दौरान जब ‘कावाला’ गाने का जिक्र हुआ तो उन्होंने स्वीकार किया कि शूटिंग पूरी होने के बाद उन्हें महसूस हुआ था कि उनके प्रदर्शन में और सुधार की गुंजाइश थी। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह गाने में कुछ और बेहतर कर सकती थीं और शायद अपनी प्रस्तुति को अगले स्तर तक ले जा सकती थीं। तमन्ना की इस आत्ममूल्यांकन वाली सोच को लेकर निर्देशक और कोरियोग्राफर Farah Khan ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तमन्ना हमेशा अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। फराह के अनुसार, अभिनेत्री उन कलाकारों में शामिल हैं जो सफलता के बाद भी खुद को चुनौती देना नहीं छोड़ते और हर बार पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश करते हैं। बातचीत के दौरान तमन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को स्वाभाविक रूप से प्रशिक्षित डांसर नहीं मानतीं। यही कारण है कि किसी भी डांस नंबर को परफेक्ट बनाने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत और अभ्यास करना पड़ता है। उनका मानना है कि रिहर्सल किसी भी प्रस्तुति की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है और तैयारी जितनी बेहतर होगी, प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली होगा। अभिनेत्री ने अपने एक अन्य चर्चित गीत Aaj Ki Raat का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके लिए उन्होंने लगभग पंद्रह दिनों तक लगातार अभ्यास किया था। वह चाहती थीं कि गाने का हर स्टेप, हर मूवमेंट और हर भाव पूरी तरह समझने के बाद ही कैमरे के सामने प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार तैयारी में लगाया गया समय कलाकार के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और स्क्रीन पर उसका असर साफ दिखाई देता है। ‘कावाला’ गाना रिलीज के बाद सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक चर्चा का विषय बन गया था। इसके संगीत, नृत्य और प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बावजूद इसके, तमन्ना का मानना है कि एक कलाकार के रूप में निरंतर सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। यही सोच उन्हें हर नए प्रोजेक्ट में और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि किसी सफल प्रस्तुति के बाद भी स्वयं का निष्पक्ष मूल्यांकन करने की क्षमता ही कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखती है। तमन्ना भाटिया का यह नजरिया भी उनके पेशेवर दृष्टिकोण और अपने काम के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जिसने उन्हें भारतीय मनोरंजन उद्योग की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल किया है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अकासा एयर की उड़ानों का आगाज, नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए मिली सीधी हवाई कनेक्टिविटी

नई दिल्ली । देश के विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अकासा एयर ने अपनी वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस कदम के साथ एयरलाइन उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है जिन्होंने देश के इस नए और महत्वाकांक्षी हवाई अड्डे से नियमित संचालन शुरू किया है। कंपनी ने पहले चरण में नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन शुरू होना क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों के यात्रियों को अब वैकल्पिक हवाई यात्रा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे दिल्ली क्षेत्र के अन्य हवाई अड्डों पर दबाव कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है। एयरलाइन के अनुसार, नवी मुंबई से रवाना हुई पहली उड़ान निर्धारित समय पर नोएडा पहुंची और इसके बाद वापसी सेवा भी संचालित की गई। इसी क्रम में बेंगलुरु के लिए भी सीधी उड़ानों की शुरुआत की गई है। इन नई सेवाओं से व्यापारिक यात्रियों, कॉर्पोरेट सेक्टर, छात्रों और पर्यटन गतिविधियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। कंपनी ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट से शुरुआती चरण में परिचालन शुरू करना उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। एयरलाइन तेजी से विकसित हो रहे शहरों और नए विमानन बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। इसके साथ ही आधुनिक विमानन अवसंरचना के विकास में भागीदारी को भी कंपनी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के प्रमुख विमानन केंद्रों में शामिल हो सकता है। ऐसे में शुरुआती दौर में सेवाएं शुरू करने वाली एयरलाइनों को भविष्य में यात्री आधार और नेटवर्क विस्तार के मामले में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। अकासा एयर का यह कदम इसी रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा रहा है। एयरलाइन प्रबंधन ने कहा कि नोएडा से उड़ान संचालन की शुरुआत कंपनी की विकास यात्रा में एक अहम उपलब्धि है। कंपनी का लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके लिए नए मार्गों के विकास और बेहतर सेवा गुणवत्ता पर लगातार ध्यान दिया जाएगा। वहीं हवाई अड्डा प्रबंधन ने भी अकासा एयर के परिचालन को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए सकारात्मक कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, नई उड़ानों से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और हवाई यात्रा का दायरा विस्तारित होगा। इससे नोएडा एयरपोर्ट के विकास को भी गति मिलेगी और भविष्य में अन्य शहरों के लिए नई सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। विमानन उद्योग के जानकारों का कहना है कि उत्तर भारत में बढ़ती हवाई यात्रा मांग, बेहतर अवसंरचना और नए हवाई अड्डों के विकास के बीच यह पहल पूरे क्षेत्र के आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में अधिक एयरलाइनों के जुड़ने से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के प्रमुख विमानन केंद्रों में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता निर्णायक मोड़ पर, स्विट्जरलैंड में शुरू होगी अंतिम दौर की बातचीत; मध्य पूर्व की नजरें टिकीं

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी परमाणु विवाद एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर अंतिम चरण की बातचीत शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में शुरू होने जा रही है। इस बैठक को केवल द्विपक्षीय वार्ता के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे मध्य पूर्व की भविष्य की रणनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया माना जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि आगामी दौर की बातचीत विशेष रूप से परमाणु मुद्दों पर केंद्रित होगी। उनके अनुसार, दोनों पक्ष कई चरणों की चर्चा के बाद अब ऐसे बिंदु पर पहुंचे हैं जहां प्रमुख मतभेदों को दूर करने और संभावित समझौते का रास्ता तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इसी प्रक्रिया के तहत एक प्रस्तावित समझौता ढांचे और पारस्परिक समझ से जुड़े दस्तावेजों पर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से तनाव बना हुआ है। पश्चिमी देशों की चिंता यह रही है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम भविष्य में सैन्य क्षमता हासिल करने की दिशा में इस्तेमाल हो सकता है, जबकि ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिए है। यही विवाद दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिबंधों, कूटनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों की बड़ी वजह बना हुआ है। स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब मध्य पूर्व पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। क्षेत्र में जारी संघर्षों, सीमा विवादों और विभिन्न गुटों की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की प्रगति को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री ने बातचीत से पहले क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय संतुलन भी ईरान की प्राथमिक चिंताओं में शामिल हैं। उनके अनुसार, क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव बढ़ाने वाले कदमों का व्यापक असर पड़ सकता है और इससे कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्विट्जरलैंड वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के बीच वर्षों से जमे अविश्वास को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों, व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं। हालांकि, बातचीत के सफल होने की राह आसान नहीं मानी जा रही क्योंकि कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अब भी महत्वपूर्ण मतभेद मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बैठक को लेकर काफी उत्सुकता है। यूरोपीय देशों सहित कई वैश्विक शक्तियां चाहती हैं कि कूटनीतिक समाधान के माध्यम से परमाणु विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा हो। इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि मध्य पूर्व की राजनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया साबित हो सकती है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं या फिर क्षेत्र में तनाव का दौर आगे भी जारी रहता है।