global politics : इजरायल, मध्य पूर्व, रियाद बैठक, इस्लामिक देश, कतर, UAE, अंतरराष्ट्रीय कानून, सैन्य तनाव, वैश्विक राजनीति

global politics : नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इसी बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में इन देशों ने ईरान की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की। बयान जारी करने वाले देशों में अजरबैजान बहरीन मिस्र जॉर्डन कुवैत लेबनान पाकिस्तान कतर सऊदी अरब सीरिया तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। विदेश मंत्रियों ने आरोप लगाया कि ईरान ने रिहायशी इलाकों तेल सुविधाओं एयरपोर्ट डीसेलिनेशन प्लांट और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने कतर और यूएई के ऊर्जा ढांचे पर हमला किया। कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाए जाने के बाद वहां आग लगने की खबरें सामने आईं जबकि सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया। कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया और कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर दिया। उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया। कतर ने कहा कि यह कदम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक था। संयुक्त बयान में यह भी चेतावनी दी गई कि ईरान के साथ भविष्य के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है या नहीं। विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और सैन्य दबाव की नीति स्वीकार नहीं की जाएगी। इस बीच ईरानी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर उसके तेल और गैस उत्पादन केंद्रों पर हमले का आरोप लगाया है जिससे हालात और अधिक जटिल हो गए हैं। कुल मिलाकर मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव अब क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति और संयम की अपील कर रहा है।
PRIYANKA GANDHI MET NITIN GADKARI: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नितिन गडकरी से मुलाकात बस ट्रक बॉडी उद्योग की समस्याओं पर मंथन तेज

PRIYANKA GANDHI MET NITIN GADKARI: नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बस और ट्रक बॉडी निर्माण से जुड़ा उद्योग कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और उद्योग जगत अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए बैठा है। इस बैठक में राजस्थान के बस और ट्रक बॉडी बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को विस्तार से सामने रखा। उद्योग से जुड़े लोगों ने खासतौर पर नए तकनीकी मानकों, बढ़ती उत्पादन लागत और मंत्रालय के अनुपालन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि लगातार बदलते नियम और मानकों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है। राहुल गांधी ने इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और इन मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उन्होंने नितिन गडकरी से आग्रह किया कि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए ताकि इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि नियमों और शुल्कों का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की बात कही। बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। उस दौरान भी उन्होंने यह चिंता जताई थी कि लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय लगने के कारण छोटे निर्माताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही नए मानकों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है। प्रियंका गांधी ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रतिनिधियों ने लाइसेंस और अनुपालन से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुख रूप से उठाया है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी ने इन समस्याओं को समझते हुए जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। इस बयान से उद्योग जगत में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है। यह बैठक ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। सरकार जहां नियमों को सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है वहीं उद्योग जगत चाहता है कि इन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि छोटे और मध्यम उद्यम भी टिक सकें। कुल मिलाकर यह मुलाकात सिर्फ एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि उद्योग और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है और बस ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग को किस तरह राहत मिलती है
Gold Price India : सोने-चांदी की कीमतों में दबाव, अमेरिकी फेड की नीति ने बनाया मार्केट चुनौतीपूर्ण

Gold Price India : नई दिल्ली। सोने और चांदी के बाजार में गुरुवार को कमजोरी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:21 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.62 प्रतिशत यानी 953 रुपए की गिरावट के साथ 1,52,072 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन भर में सोने ने 1,51,712 रुपए का न्यूनतम और 1,53,025 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ। चांदी की कीमतों में भी गिरावट रही। 5 मई, 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट 3,945 रुपए या 1.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,44,249 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,43,083 रुपए का न्यूनतम और 2,45,387 रुपए का उच्चतम स्तर दर्ज किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में दबाव देखा गया। खबर लिखे जाने तक सोना 0.92 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,850 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75.735 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का हालिया निर्णय सोने और चांदी में गिरावट का मुख्य कारण है। बुधवार को अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार यथावत रखते हुए 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच बनाए रखा। इससे पहले 2025 में सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में दरों में कटौती की गई थी। वीटी मार्केट्स के वरिष्ठ विश्लेषक – एपीएसी जस्टिन खू के अनुसार, फेड का यह कदम भू-राजनीतिक झटकों और लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति से जूझ रही समिति के दृष्टिकोण को दर्शाता है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी कहा कि कई अधिकारियों ने अपने पूर्वानुमानों में कटौती की संख्या घटाकर केवल एक कटौती पर सहमति दी है। यह बदलाव मुख्य रूप से ईरान युद्ध और वैश्विक तेल बाजार पर उसके प्रभाव के कारण मुद्रास्फीति में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के बाद आया है।
HDFC Bank shares drop : बाजार का झटका: पार्ट-टाइम चेयरमैन के त्यागपत्र के बाद HDFC Bank के स्टॉक्स में गिरावट

HDFC Bank shares drop : नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank के शेयर गुरुवार को सुर्खियों में रहे, जब पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर Atanu Chakraborty ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बैंक की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, चक्रवर्ती का इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हो गया। इसके चलते सुबह 11:16 बजे एचडीएफसी बैंक का शेयर 802 रुपए पर था, जो 40 रुपए या 4.80 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक के अनुरोध पर Keki Mistry को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। मिस्त्री ने निवेशकों और बाजार को आश्वस्त किया कि बैंक के भीतर कोई बड़ी समस्या नहीं है और बैंक संचालन सुचारू रूप से जारी है। चक्रवर्ती, जो 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे, ने अपने इस्तीफे पत्र में कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और प्रक्रियाएं देखीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय पूरी तरह से वैचारिक मतभेदों पर आधारित है और किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी के कारण नहीं है। एनडीटीवी प्रॉफिट को दिए बयान में चक्रवर्ती ने कहा, “मैं बैंक में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की ओर इशारा नहीं कर रहा हूं। मेरी विचारधाराएं संगठन से मेल नहीं खाती थीं, इसलिए अलग होने का समय आ गया था।” विश्लेषकों के अनुसार, बोर्ड स्तर पर किसी वरिष्ठ पदाधिकारी के इस्तीफे से शेयरों में अल्पकालिक अस्थिरता आम है। हालांकि, आरबीआई और बैंक प्रबंधन ने दोनों ने स्पष्ट किया है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है और संचालन पूरी तरह से पेशेवर ढंग से हो रहा है। मिस्त्री ने भी कहा कि उनकी नियुक्ति के पीछे प्राथमिक उद्देश्य संक्रमण काल को सुचारू रखना है, और निवेशकों को किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
PACKAGED FOOD INIDA : रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी

PACKAGED FOOD INIDA : नई दिल्ली। भारत का पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है। कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2030 तक करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में लगभग 100 अरब डॉलर के आसपास है। इस तेजी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ क्विक कॉमर्स का माना जा रहा है, जिसने फार्मासिस्ट की खरीदारी की आदत को पूरी तरह बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब क्विक कॉमर्स केवल ‘लास्ट मिनट’ बिजनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की खरीदारी का अहम हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक कॉमर्स बिजनेस का सकल व्यापार मूल्य (GMV) 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर के पार जा सकता है। इसका मुख्य कारण है तेजी से डिलीवरी, सुविधा और बार-बार खरीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति। आज के समय में 10-15 मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड फार्मासिस्ट को आकर्षित कर रहा है, जिससे ऑन-डिमांड खपत तेजी से बढ़ रही है। देश के 250 से ज़्यादा शहरों में 5 करोड़ से ज़्यादा मासिक कमाने वालों के साथ, इस दूध की पैकेज्ड फ़ूड मार्केट में भी 2030 तक 4 प्रतिशत से बढ़कर 15-20 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। बदले हुए लाइफस्टाइल और हेल्थ ट्रेंड्स से जहाँ मांग रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बदले हुए लाइफस्टाइल और कंज्यूमर रहने वालों ने इस बढ़ोतरी को और गति दी है। खासकर युवा वर्ग अब प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और मोटापे से जूझने वालों की ओर तेज़ी से झुक रहा है। पैकेज्ड फ़ूड में ‘क्लीन लेबल’ और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, छोटे परिवार, व्यस्त लाइफस्टाइल और समय की कमी के चलते रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट दूध भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मृगांक गुटगुटिया ने इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्विक कॉमर्स अब एक ‘संरचनात्मक शक्ति’ के रूप में उभर रहा है, जो न केवल डिस्ट्रीब्यूशन बल्कि प्रोडक्ट बढ़ाना, कैटेगरी स्ट्रेटेजी और निवेश को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनियां अब उपभोक्ता की तत्काल आमदनी और हेल्थ ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं। स्वास्थ्य पर केंद्रित पेय पदार्थों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। चीजों पर प्रोटीन आधारित ड्रिंक्स और पैकेटबंद नारियल पानी जैसे विकल्पों को उपभोक्ता पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, क्विक कॉमर्स और बदले हुए उपभोक्ता आदत का मेल भारत के पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट को नई मजबूती तक पहुंचाने के लिए तैयार है।
अमेरिकी हमलों से कमजोर हुआ ईरान, लेकिन खतरा बरकरार: इंटेलिजेंस एजेंसियों की चेतावनी

वॉशिंगटन। हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों के बाद ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने सीनेट को जानकारी देते हुए कहा है कि ईरानी शासन कमजोर जरूर हुआ है पर अब भी क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी हितों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट सिलेक्ट इंटेलिजेंस कमेटी को बताया कि हमलों के चलते ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत काफी हद तक प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति प्रदर्शित करने की क्षमता कमजोर पड़ी है जिससे उसके विकल्प सीमित हो गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार अभी कायम है और समय के साथ अपनी सैन्य ताकत फिर से खड़ी करने की क्षमता रखती है। CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए खतरा रहा है और वर्तमान में यह खतरा और अधिक तात्कालिक हो गया है। उन्होंने ईरान की मिसाइल और स्पेस लॉन्च तकनीक को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि इसे बिना रोक-टोक जारी रहने दिया गया तो भविष्य में ईरान के पास पूरे अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता हो सकती है। इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक ईरान और उसके सहयोगी संगठन मध्य पूर्व में लगातार अमेरिकी हितों को निशाना बना रहे हैं। तुलसी गबार्ड ने बताया कि ईरान के प्रॉक्सी समूह क्षेत्र में सक्रिय हैं और समय-समय पर हमले करते रहते हैं। हालांकि सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान की आंतरिक स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ने से देश के भीतर तनाव जरूर बढ़ सकता है लेकिन शासन अभी भी स्थिर बना हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाल के ऑपरेशनों जैसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को बाधित किया है। इसके बावजूद सीनेटरों ने सवाल उठाया कि क्या ईरान से खतरा पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं। कुल मिलाकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान को भले ही सैन्य झटका लगा हो लेकिन वह अभी भी एक बड़ा रणनीतिक खतरा बना हुआ है और भविष्य में अपनी ताकत फिर से खड़ी कर सकता है।
उत्तराधिकारी की चर्चा के बीच नीतीश और सम्राट की बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली/मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सियासत में संभावित उत्तराधिकार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच दिखाई देने वाली नजदीकी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। विभिन्न मंचों पर नीतीश कुमार का सम्राट चौधरी के प्रति भरोसा और उन्हें आगे की जिम्मेदारियों के संकेत के रूप में देखे जा रहे बयानों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयासों को जन्म दिया है। सम्राट चौधरी को लेकर चर्चा तब और बढ़ गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान अलग अलग मंचों पर उनके साथ दिखे। जमुई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने यह संकेत दिया कि आगे की जिम्मेदारियां अब उन्हीं के नेतृत्व में आगे बढ़ेंगी। इस बयान को लेकर मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने का संकेत माना। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी विजय चौधरी ने स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का यह स्वभाव रहा है कि वह अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित करते हैं। विजय चौधरी ने यह भी कहा कि जिस तरह की व्याख्या की जा रही है वह मीडिया की अपनी कल्पना है और इसका वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री के साथ पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं और सरकार के कार्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी को भी उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने की बात को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार में सत्ता का स्वरूप कैसा होगा। कुछ लोग मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिल सकता है जबकि जनता दल यूनाइटेड के हिस्से से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार को भविष्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है। इन तमाम चर्चाओं के बीच जातीय समीकरण और बिहार की राजनीति की जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता का भविष्य केवल संकेतों या बयानों पर निर्भर नहीं करता बल्कि जमीनी गठजोड़ और राजनीतिक समीकरण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अटकलें किस दिशा में जाती हैं और वास्तव में बिहार की सत्ता का अगला चेहरा कौन बनता है
RBI ने दिया भरोसा, HDFC Bank की फाइनेंशियल हेल्थ मजबूत, ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शुमार HDFC Bank को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने स्पष्ट शब्दों में भरोसा जताया है कि बैंक पूरी तरह से मजबूत स्थिति में है। गुरुवार को जारी बयान में केंद्रीय बैंक ने कहा कि एचडीएफसी बैंक एक ‘घरेलू स्तर पर प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक’ (D-SIB) है, जिसका मतलब है कि यह देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद अहम है। ऐसे में इसकी स्थिरता पर लगातार नजर रखी जाती है। आरबीआई के मुताबिक, बैंक के पास पर्याप्त पूंजी, मजबूत बैलेंस शीट और भरपूर तरलता मौजूद है, जिससे किसी भी तरह की तात्कालिक वित्तीय चिंता की गुंजाइश नहीं बनती। यह बयान ऐसे समय आया है जब बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty ने ‘नैतिक मतभेद’ का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद बाजार में हलचल देखी गई और बैंक के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया कि उसने बैंक के हालिया घटनाक्रमों का संज्ञान लिया है और अपने नियमित मूल्यांकन में उसे बैंक के संचालन या प्रशासन में कोई गंभीर खामी नजर नहीं आई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह बैंक के बोर्ड और प्रबंधन के साथ आगे की रणनीति को लेकर लगातार संपर्क में है, जिससे पारदर्शिता और स्थिरता बनी रहे। अंतरिम चेयरमैन की नियुक्ति को मंजूरी, निवेशकों को दिया भरोसाइसी बीच आरबीआई ने बैंक के अनुरोध पर Keki Mistry को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम संक्रमण काल को सुचारू रूप से संभालने के लिए उठाया गया है। केकी मिस्त्री, जो बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत में एक अनुभवी नाम हैं, ने पद संभालने के बाद निवेशकों और विश्लेषकों को भरोसा दिलाया कि बैंक के अंदर कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह जिम्मेदारी उनके मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होती, तो वह इसे स्वीकार नहीं करते, खासकर 71 वर्ष की आयु में। कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान मिस्त्री ने यह भी संकेत दिया कि आरबीआई का तेजी से उनकी नियुक्ति को मंजूरी देना इस बात का प्रमाण है कि केंद्रीय बैंक बैंक के मौजूदा संचालन से संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि बैंक का प्रबंधन पूरी तरह पेशेवर है और सभी प्रक्रियाएं नियामकीय मानकों के अनुरूप चल रही हैं। बाजार में आई अस्थायी गिरावट को उन्होंने सामान्य प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर, आरबीआई और बैंक प्रबंधन दोनों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि एचडीएफसी बैंक की नींव मजबूत है और भविष्य को लेकर कोई बड़ा जोखिम फिलहाल नजर नहीं आता।
चैत्र नवरात्रि में उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर बनता है आस्था का महापर्व स्थल जहां पूरी होती हैं मन की हर मुराद

मध्य प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक नगर उज्जैन में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास का एक अद्भुत संगम भी माना जाता है चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर जाता है इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसका संबंध सम्राट विक्रमादित्य की आस्था और भक्ति से भी जुड़ा हुआ है हरसिद्धि माता मंदिर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से कुछ ही दूरी पर स्थित है और इसकी ऐतिहासिकता हजारों वर्षों पुरानी बताई जाती है मान्यता है कि माता सती की दाहिनी कोहनी यहां गिरी थी जिसके कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे मंगल चंडी शक्ति स्थल के रूप में जाना जाता है यहां माता को विशेष सिद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन होता है पहले दिन प्रातःकाल मंदिर के पट खोले जाते हैं और विधिवत पूजा की शुरुआत होती है शैलपुत्री माता की आराधना के साथ घट स्थापना की जाती है और इसके बाद नौ दिनों तक क्रमशः सभी नौ देवियों की पूजा की जाती है इस दौरान मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है और दूर दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं हरसिद्धि मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की विशाल दीपमाला है जिसे सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित किया गया माना जाता है इस दीपमाला में लगभग 51 फीट ऊंचे दो दीप स्तंभ हैं जिनमें एक साथ 1011 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं दीपों की यह ज्योति न केवल दृश्य रूप से आकर्षक होती है बल्कि इसे अत्यंत शुभ और पवित्र भी माना जाता है पहले यह दीपमाला केवल नवरात्रि के दौरान ही प्रज्वलित की जाती थी लेकिन अब श्रद्धालुओं की आस्था और बुकिंग के चलते इसे नियमित रूप से जलाया जाने लगा है भक्तों की मान्यता है कि संध्या आरती के समय जब दीपमाला प्रज्वलित होती है और भक्त माता के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं तो वह अवश्य पूर्ण होती है इसी विश्वास के कारण नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भारी भीड़ रहती है और श्रद्धालु विशेष रूप से दीप जलाने के लिए पहुंचते हैं सम्राट विक्रमादित्य को इस मंदिर का प्रमुख भक्त और संरक्षक माना जाता है कहा जाता है कि उन्होंने यहां माता की कठोर तपस्या की और माता ने उन्हें विशेष कृपा प्रदान की जिसके बाद वे महान और न्यायप्रिय शासक बने यह कथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है और उनकी आस्था को और भी मजबूत बनाती है नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर का हर कोना भक्ति के रंग में रंगा रहता है भजन कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण गूंजता रहता है और श्रद्धालु माता की कृपा पाने के लिए पूरे मन से पूजा अर्चना करते हैं हरसिद्धि माता का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है जहां हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है और उसे पूर्ण होने की आशा के साथ लौटता है
मिलावटी डेयरी मामले में जयश्री फूड्स के किशन मोदी की 11 संपत्तियां अटैच, 20 करोड़ की कार्रवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक किशन मोदी की 20.59 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ED ने अटैच कर दी है। ईडी ने “मिल्क मैजिक” ब्रांड से जुड़े मिलावटी डेयरी उत्पाद मामले में कार्रवाई करते हुए उनकी 11 अचल संपत्तियों को अटैच किया। न्यायिक हिरासत में किशन मोदी इस मामले में किशन मोदी मुख्य आरोपी हैं। पहले 13 मार्च 2026 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 18 मार्च तक रिमांड पर रहने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से किशन मोदी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले का विवरण किशन मोदी पर आरोप है कि उन्होंने दूध में पाम ऑयल और हानिकारक रसायनों मिलाकर मिलावटी डेयरी उत्पाद तैयार किए और निर्यात किया। “मिल्क मैजिक” ब्रांड के तहत काम करने वाली इस कंपनी पर फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट का इस्तेमाल कर बहरीन, हांगकांग, सिंगापुर, ओमान, कतर और UAE जैसे देशों में घटिया दूध और डेयरी उत्पाद भेजने का आरोप है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि प्रवर्तन निदेशालय और प्रशासन मिलावट और उपभोक्ता सुरक्षा के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है।