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साइबर फ्रॉड पर सख्ती: वरिष्ठ नागरिकों के लिए डबल OTP सिस्टम से बढ़ेगी बैंकिंग सुरक्षा

नई दिल्ली । देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। डिजिटल लेनदेन के दौरान होने वाली ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से अब “डबल OTP सिस्टम” लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के खाताधारकों के बैंक ट्रांजैक्शन को तभी मंजूरी मिलेगी जब दो अलग-अलग स्तरों पर OTP की पुष्टि पूरी हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली के तहत पहला OTP खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जबकि दूसरा OTP उस व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर जाएगा जिसे खाताधारक ने अपने विश्वसनीय संपर्क यानी “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” के रूप में चुना होगा। यह संपर्क आमतौर पर परिवार का कोई सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति होता है। जब तक दोनों OTP की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक कोई भी वित्तीय लेनदेन पूरा नहीं किया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी न हो सके। कई बार देखा गया है कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, लिंक या खुद को अधिकारी बताकर लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। ऐसे मामलों में बुजुर्ग अधिक असुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि वे तकनीकी धोखाधड़ी को तुरंत पहचान नहीं पाते। डबल OTP सिस्टम इस खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा। फिलहाल इस व्यवस्था को सीमित स्तर पर लागू किया गया है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ बैंकों में शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में चुनिंदा शाखाओं को इसमें शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों के लिए इस नई सुविधा का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण सफल रहने के बाद इसे धीरे-धीरे अन्य बैंकों में भी लागू किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे न केवल धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि परिवार के सदस्यों की भागीदारी भी वित्तीय सुरक्षा में बढ़ेगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ सिस्टम को सरल बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में यह डबल OTP सिस्टम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत की तरह काम करेगा, जिससे बिना दूसरी पुष्टि के कोई भी बड़ा लेनदेन संभव नहीं होगा। इससे ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लेनदेन जैसे मामलों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

दर्दनाक घटना: डॉक्टर की संदिग्ध मौत, परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

मध्यप्रदेश । इंदौर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जूनियर डॉक्टर अमन पटेल की आत्महत्या मामले ने नया मोड़ ले लिया है। परिजनों और दोस्तों ने इस मामले में प्रेम प्रसंग और इंटरकास्ट विवाह को लेकर बढ़ते तनाव को कारण बताया है। घटना के बाद पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर में तनाव और सवालों का माहौल बना हुआ है। परिजनों का आरोप है कि अमन पटेल का कॉलेज की ही एक छात्रा के साथ लगभग तीन साल से प्रेम संबंध था और दोनों शादी को लेकर गंभीर थे। लेकिन पिछले कुछ समय से रिश्तों में आई दूरी और मानसिक तनाव ने स्थिति को बिगाड़ दिया। परिजनों के अनुसार युवती के व्यवहार में बदलाव आया था और वह किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करने लगी थी, जिससे अमन गहरे तनाव में आ गए थे। सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना से पहले फोन पर बातचीत के दौरान युवती ने कथित रूप से कहा था—“जो करना है कर लो”, जिसके बाद अमन हॉस्टल की पांचवीं मंजिल पर पहुंचे और छलांग लगा दी। घटना के बाद उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। परिजनों ने दावा किया है कि इस रिश्ते में इंटरकास्ट शादी को लेकर भी विरोध था। युवती के परिवार ने कथित रूप से इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया और हाल ही में इंदौर आकर इसका विरोध जताया था। परिजनों का कहना है कि इसी दबाव और मानसिक तनाव के कारण अमन टूट गए। घटना से पहले अमन ने अपनी लकवाग्रस्त मां को फोन कर कहा था कि “अच्छा नहीं लग रहा है।” इसके बाद उन्होंने अपने एक दोस्त को मोबाइल पासवर्ड भी भेजा था। पुलिस ने उनका मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया है और कॉल रिकॉर्ड, चैट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। दोस्तों का दावा है कि अमन और युवती के बीच संबंध लंबे समय से मजबूत थे और दोनों ने साथ में कई बार समय भी बिताया था। इसी महीने की शुरुआत में दोनों इंदौर से जबलपुर भी घूमने गए थे, जहां वे कई जगह साथ रहे थे। परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना से 24 घंटे पहले युवती के माता-पिता इंदौर पहुंचे थे और उन्होंने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया था। इसके बाद युवती ने अमन से दूरी बना ली, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गए। वहीं, अंतिम संस्कार के दौरान युवती की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। दोस्तों का कहना है कि यदि रिश्ता इतना गहरा था तो उसकी गैरमौजूदगी कई संदेह पैदा करती है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब प्रेम संबंध, मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव के गंभीर पहलुओं से जुड़ गया है।

शिवपुरी में महिला का बच्चों संग प्रदर्शन: माधव चौक पर पेट्रोल छिड़ककर बैठी

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले के माधव चौक पर गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ अचानक सड़क पर पहुंची और खुद पर पेट्रोल छिड़ककर धरना प्रदर्शन करने लगी। महिला ने इस दौरान भीम आर्मी नेता ठाकुरलाल जाटव और उनके साथियों पर मारपीट, छेड़छाड़ और जमीन विवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। घटना की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को समझाइश देकर थाने ले गई। महिला ने बताया कि वह देहात थाना क्षेत्र के रायश्री गांव की रहने वाली है। उसके अनुसार पति ने उसे छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहना शुरू कर दिया, जिसके बाद वह अपने तीन बच्चों के साथ कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हो गई। महिला ने आरोप लगाया कि परिवार के कुछ सदस्यों ने मिलकर उसकी संपत्ति और जमीन से उसे वंचित कर दिया, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। महिला का यह भी कहना है कि भीम आर्मी नेता ठाकुरलाल जाटव और उनके परिवार के सदस्यों ने न केवल उसकी जमीन का सौदा करवाया बल्कि उसका हिस्सा भी नहीं दिया। इसी विवाद को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। महिला ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसकी बेटी के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी हुईं। पीड़िता ने दावा किया कि उसने पहले भी थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी से परेशान होकर उसने गुरुवार को बच्चों के साथ माधव चौक पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की। वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष के भीम आर्मी नेता ठाकुरलाल जाटव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि महिला का बेटा उनके रिश्तेदार की दुकान में चोरी का प्रयास करते हुए पकड़ा गया था। इसी विवाद को दबाने के लिए उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला पूरी तरह संपत्ति और पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार यह मामला दो परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल जरूर बना, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में आ गई। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

यातायात विभाग का सख्त एक्शन: एक बस पर 10 हजार का चालान

मध्यप्रदेश । शाजापुर में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर आरटीओ और यातायात विभाग ने गुरुवार सुबह संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान शहर और आसपास के मार्गों पर चल रही बसों की सघन जांच की गई, जिसमें नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दो बसों को मौके पर ही जब्त कर लिया गया। साथ ही एक बस पर 10 हजार रुपये का चालान भी किया गया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दोनों बसें वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना ही सड़क पर संचालित हो रही थीं। इसके अलावा बसों में जरूरी सुरक्षा उपकरणों की भी कमी पाई गई। इमरजेंसी एग्जिट गेट, अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं या तो अनुपस्थित थीं या खराब हालत में थीं। इन गंभीर खामियों को देखते हुए विभाग ने सख्त कार्रवाई की। यातायात थाना प्रभारी सौरव शुक्ला ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना फिटनेस और सुरक्षा मानकों को पूरा किए कोई भी बस सड़क पर नहीं चलने दी जाएगी। नियमों का पालन न करने वाले वाहन मालिकों पर आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। यह कार्रवाई हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद और अधिक तेज कर दी गई है। कुछ दिन पहले शाजापुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक होटल के पास खड़ी बस में अचानक आग लग गई थी, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना ने परिवहन विभाग और प्रशासन को सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता से कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया है। घटना के बाद से ही जिले में बसों की फिटनेस, सुरक्षा उपकरणों और परमिट की जांच को तेज कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और मांग की है कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं ताकि सड़क दुर्घटनाओं और आगजनी जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। कुल मिलाकर, शाजापुर में की गई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अब परिवहन नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

होंडा सिटी फेसलिफ्ट और ZR-V कल होंगी लॉन्च, 360° कैमरा और वेंटिलेटेड सीट जैसी प्रीमियम फीचर्स से लैस

नई दिल्ली। होंडा कार्स इंडिया कल (22 मई) भारत में अपनी दो नई कारों की कीमतों का ऐलान करने जा रही है। इसमें फेसलिफ्टेड होंडा सिटी सेडान और बिल्कुल नई होंडा ZR-V SUV शामिल हैं। खास बात यह है कि ZR-V लंबे समय बाद कंपनी का नया मॉडल नाम है और इसे भारत में ब्रांड का फ्लैगशिप SUV माना जा रहा है। नई होंडा सिटी फेसलिफ्ट में कई कॉस्मेटिक और फीचर अपडेट किए गए हैं, जिनमें नया फ्रंट और रियर डिजाइन, LED DRLs, LED लाइट बार, डुअल-टोन अलॉय व्हील्स और अपडेटेड बूटलिड शामिल हैं। इंटीरियर में बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, अपडेटेड AC कंट्रोल, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें और 360-डिग्री कैमरा जैसे प्रीमियम फीचर्स मिलेंगे। इंजन की बात करें तो इसमें 1.5-लीटर VTEC पेट्रोल इंजन मिलने की संभावना है, जो 119bhp पावर और 145Nm टॉर्क जनरेट करेगा, साथ ही मैनुअल और CVT गियरबॉक्स ऑप्शन मिल सकते हैं। वहीं, नई होंडा ZR-V में 2.0-लीटर पेट्रोल हाइब्रिड पावरट्रेन मिलने की उम्मीद है, जो करीब 180bhp पावर और 240Nm टॉर्क देगा। यह मॉडल CVT गियरबॉक्स के साथ आएगा और प्रीमियम SUV सेगमेंट में टिगुआन R-Line और स्कोडा कोडियाक जैसी गाड़ियों को टक्कर देगा।

बंगाल की राजनीति में हलचल तेज, शुभेंदु अधिकारी के PA हत्या मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, जांच में सामने आई बड़ी चूक

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में अब जांच एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। लंबे समय से चल रही पड़ताल के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जिसे इस पूरे हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद शुरुआती जांच प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि मामले में पहले एक निर्दोष व्यक्ति को गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया था। जांच के शुरुआती दौर में पुलिस ने बिहार और उत्तर प्रदेश से तीन लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें मयंक मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह नाम के व्यक्ति शामिल थे। पुलिस का दावा था कि ये लोग हत्या की साजिश और वारदात से जुड़े हुए हैं। हालांकि परिवार वालों ने शुरुआत से ही राज सिंह की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि घटना के समय वह अयोध्या में मौजूद था और उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। बावजूद इसके उसे कई दिनों तक हिरासत में रखा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई। इसके बाद जब पूरे नेटवर्क और घटनाक्रम की दोबारा जांच की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एजेंसी ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्धों के आपसी संपर्कों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पहले गिरफ्तार किया गया व्यक्ति गलत पहचान का शिकार हुआ था और वास्तविक साजिशकर्ता कोई दूसरा व्यक्ति है। इसके बाद जांच टीम ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में छापेमारी कर राजकुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार वही इस पूरे हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता है और लंबे समय से वारदात की योजना तैयार कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि हत्या के पीछे की पूरी साजिश और अन्य जुड़े लोगों की जानकारी हासिल की जा सके। इसी बीच जांच एजेंसी ने वाराणसी से विनय राय नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस हत्याकांड का नेटवर्क अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है और आने वाले दिनों में कुछ और नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने शुरुआती जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तारी और निर्दोष व्यक्ति को कई दिनों तक हिरासत में रखने की घटना ने पुलिस कार्रवाई की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की नजर अब जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। फिलहाल जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या के पीछे आखिर असली मकसद क्या था और इस साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड से जुड़े नए खुलासे सामने आने की संभावना भी बढ़ती जा रही है।

पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम, आरजी कर मामले की नए सिरे से होगी गहन जांच

नई दिल्ली । आरजी कर मामले में एक बार फिर न्यायिक सख्ती देखने को मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले में लगाए गए गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से जांच कराने के आदेश दिए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद पूरे मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पकड़ ली है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है तो उसकी गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। अदालत ने विशेष जांच दल को घटना की पूरी श्रृंखला की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। जांच केवल घटना तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि घटना वाली रात के भोजन से लेकर अंतिम संस्कार तक की सभी परिस्थितियों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा है कि जांच एजेंसी किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है और जरूरत पड़ने पर नए तथ्यों को भी रिकॉर्ड में शामिल कर सकती है। मामले में गठित विशेष जांच दल का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारी करेंगे और टीम को पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की गुंजाइश न बचे। जांच एजेंसी को यह भी निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का सत्यापन गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए। इस फैसले के बाद मामले से जुड़े कई सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। सबूतों से छेड़छाड़ के दावों ने पहले ही मामले को संवेदनशील बना दिया था और अब अदालत के हस्तक्षेप ने जांच की दिशा को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। माना जा रहा है कि दोबारा जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए थे। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया है। अदालत की निगरानी में होने वाली इस जांच पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले को राहत भरा कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि इस बार पूरी सच्चाई सामने आएगी। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि अदालत का यह आदेश न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करेगा। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच ही न्याय की सबसे बड़ी आधारशिला होती है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह जांच केवल एक मामले की सच्चाई सामने लाने तक सीमित नहीं मानी जा रही बल्कि इसे न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी को मिला प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल

नई दिल्ली । भारत की कृषि नीतियों और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और किसानों के कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर कृषि और खाद्य प्रबंधन के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में माना जाता है। इस उपलब्धि के बाद देशभर में खुशी का माहौल है और इसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सम्मान को देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में सुधार लाने और आधुनिक तकनीक को खेती से जोड़ने के लिए लगातार काम किया गया है। यही कारण है कि आज भारत कृषि क्षेत्र में तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया भारत के मॉडल को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में रिसर्च, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है। खासतौर पर मोटे अनाज यानी श्री अन्ना को वैश्विक पहचान दिलाने में भारत की भूमिका बेहद अहम रही है। सरकार अब इस दिशा में और तेजी से काम कर रही है ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिल सके। कृषि अनुसंधान संस्थानों को भी आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाया जा सके। कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने वाला देश बन सकता है। इसके लिए पूर्वी भारत समेत कई क्षेत्रों में कृषि विकास को नई दिशा देने का काम किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों तक नई तकनीक, रिसर्च और आधुनिक संसाधनों का लाभ पहुंचे ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। इसके साथ ही खेती की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब भारत कृषि उत्पादन, खाद्यान्न निर्यात और किसानों के हितों से जुड़े कई बड़े फैसलों के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया गया है। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई देने लगा है। इस सम्मान को केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि देश के करोड़ों किसानों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की कृषि नीतियों को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों और रिसर्च को भी नई पहचान हासिल होगी। देश के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसे भारत के कृषि भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर विकसित करेंगे लेजर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा क्षेत्र में भविष्य की तकनीकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश अब मिलकर अगली पीढ़ी के आधुनिक हथियार सिस्टम विकसित और निर्मित करेंगे। इसमें लेजर आधारित हथियार, गाइडेड एनर्जी वेपन और अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिन्हें भविष्य की ‘स्टार वॉर्स’ तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। यह महत्वपूर्ण पहल राजनाथ सिंह के सियोल दौरे के दौरान सामने आई। इस दौरान उन्होंने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त निर्माण और उभरती रक्षा तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मिलकर रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश भविष्य के एडवांस रक्षा सिस्टम संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे। सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की Hanwha Co. Ltd. के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन समझौतों के तहत गाइडेड एनर्जी वेपन, लेजर डिफेंस सिस्टम और ऑटोमेटिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म को मिलकर विकसित और निर्मित किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, गाइडेड एनर्जी वेपन भविष्य की युद्ध तकनीक मानी जाती है। यह लेजर या उच्च ऊर्जा किरणों के जरिए दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई खतरों को पलभर में नष्ट करने में सक्षम होती है। दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां पहले से ही इस दिशा में काम कर रही हैं और अब भारत भी इस तकनीक की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजार में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान भारत-कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन का आयोजन भी किया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में रक्षा निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी बीच भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। निबा लिमिटेड द्वारा विकसित ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर’ ने ओडिशा के चांदीपुर में सफल लाइव-फायरिंग ट्रायल किया। इस सिस्टम ने 150 और 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट दागकर सटीक निशाना साधा। रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 किलोमीटर की दूरी से दागे गए रॉकेट ने लक्ष्य के मात्र 2 मीटर के दायरे में निशाना लगाकर अपनी उच्च सटीकता साबित की। इसे भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग आने वाले समय में एशिया की रणनीतिक ताकतों के संतुलन पर भी असर डाल सकता है। आधुनिक तकनीक आधारित हथियार प्रणालियों का यह साझा विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

तपती धूप बनी खतरा: बढ़ती गर्मी के बीच हीटस्ट्रोक ने बढ़ाई चिंता, जानिए बचने के उपाय

नई दिल्ली । राजधानी समेत देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी अब लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालने लगी है। लगातार बढ़ते तापमान और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी खतरनाक समस्याओं का शिकार होकर अस्पताल पहुंचने लगे हैं। इसी बीच राजधानी में इस सीजन का पहला हीटस्ट्रोक का गंभीर मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले दिनों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। जानकारी के अनुसार, तेज गर्मी के कारण एक युवक की तबीयत यात्रा के दौरान अचानक बिगड़ गई। उसे तेज बुखार, चक्कर और बेहोशी जैसी शिकायतों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाना हीटस्ट्रोक का सबसे बड़ा संकेत होता है। यह स्थिति शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिमाग, दिल और किडनी पर गंभीर असर डाल सकती है। कई मामलों में मरीज की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि जान का खतरा तक पैदा हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार धूप में रहने, शरीर में पानी की कमी होने और तेज गर्मी के बीच अधिक शारीरिक मेहनत करने से हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, अत्यधिक पसीना आना, त्वचा का गर्म और रूखा हो जाना, घबराहट, सांस तेज चलना और शरीर में जकड़न शामिल हैं। कई बार मरीज को उल्टी, दस्त और बेहोशी जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उसे ठंडी जगह पर ले जाकर प्राथमिक उपचार देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचाना चाहिए। भीषण गर्मी को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। खासतौर पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे अधिक खतरनाक मानी जा रही है। बाहर निकलते समय सिर को सूती कपड़े, टोपी या छाते से ढंककर रखना जरूरी बताया गया है। साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, बेल का शरबत और आम पन्ना जैसे पेय पदार्थ शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों ने खानपान को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। गर्मी के मौसम में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, दही और प्याज जैसी चीजें शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करती हैं। वहीं तली-भुनी और अधिक मसालेदार चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि उनमें हीटस्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। तेज गर्मी के बीच स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। फिलहाल बढ़ती गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना के बीच स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है।