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‘माधुरी के सामने डांस करने से डरती थीं एक्ट्रेसेस’, करिश्मा कपूर ने खोला ‘दिल तो पागल है’ का बड़ा राज

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे सफल और यादगार फिल्मों में शामिल ‘दिल तो पागल है’ ने 90 के दशक में रोमांस और डांस आधारित फिल्मों की परिभाषा बदल दी थी। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की तिकड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। खास तौर पर करिश्मा कपूर द्वारा निभाया गया ‘निशा’ का किरदार आज भी बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली महिला किरदारों में गिना जाता है। हालांकि हाल ही में करिश्मा कपूर ने खुलासा किया कि इस भूमिका को करने से पहले कई अभिनेत्रियों ने इसे ठुकरा दिया था। एक इंटरव्यू के दौरान करिश्मा कपूर ने बताया कि उस समय इंडस्ट्री में माधुरी दीक्षित का दबदबा इतना अधिक था कि कई अभिनेत्रियां उनके साथ स्क्रीन शेयर करने से भी घबराती थीं। करिश्मा के मुताबिक, जब ‘दिल तो पागल है’ बन रही थी, तब कोई भी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के सामने डांस करने या उनके साथ डांस फेस-ऑफ करने के लिए तैयार नहीं थी। माधुरी की बेहतरीन नृत्य कला और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस को देखते हुए कई अभिनेत्रियों को लगता था कि उनकी तुलना में वे फीकी पड़ सकती हैं। करिश्मा ने कहा कि यही वजह थी कि ‘निशा’ का किरदार कई अभिनेत्रियों ने स्वीकार नहीं किया। लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और पूरी मेहनत से निभाया। बाद में यही किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस भूमिका के लिए करिश्मा कपूर को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था और दर्शकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा था। करिश्मा ने अपने किरदार के भावनात्मक पक्ष पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘निशा’ एक पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइन नहीं थी। वह नायक से प्यार करती है, लेकिन उसे बदले में प्यार नहीं मिलता। आमतौर पर फिल्मों में हीरो और हीरोइन की प्रेम कहानी को केंद्र में रखा जाता है, लेकिन ‘दिल तो पागल है’ में निशा का दर्द और उसका एकतरफा प्रेम दर्शकों को गहराई से छूता है। यही बात इस किरदार को खास बनाती है। अभिनेत्री ने बताया कि जब भी वह उस किरदार के बारे में सोचती हैं, आज भी भावुक हो जाती हैं। उनके मुताबिक, निशा की भावनात्मक यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण और यादगार थी। वह एक ऐसी लड़की थी जो अपने प्यार को खोने के बावजूद मजबूती से खड़ी रहती है और यही उसकी सबसे बड़ी खूबी थी। हाल ही में करिश्मा कपूर और माधुरी दीक्षित ने रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर 5’ में ‘दिल तो पागल है’ के कुछ यादगार पलों को दोबारा जीवंत किया। इस दौरान दोनों अभिनेत्रियों का रीयूनियन फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं था। सोशल मीडिया पर भी दोनों की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए। वर्कफ्रंट की बात करें तो करिश्मा कपूर लंबे समय बाद वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आई हैं, जिसमें उन्होंने एक एंग्लो-इंडियन डिटेक्टिव की भूमिका निभाई है। वहीं माधुरी दीक्षित अपनी नई फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों अभिनेत्रियां आज भी अपने अभिनय और व्यक्तित्व से दर्शकों का दिल जीत रही हैं। करिश्मा कपूर का यह खुलासा एक बार फिर साबित करता है कि बड़े कलाकारों के साथ काम करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उतना ही सीखने और खुद को साबित करने का अवसर भी देता है। ‘दिल तो पागल है’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

‘लगान’ ने मुझे बर्बाद कर दिया…’, आमिर खान की फिल्म के अभिनेता अमीन हाजी का चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली । आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘लगान’ को रिलीज हुए 25 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी और इसके कलाकारों को भी रातोंरात लोकप्रियता मिली। लेकिन फिल्म में ‘बागा’ का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता अमीन हाजी के लिए यह सफलता एक अलग ही अनुभव लेकर आई। अमीन हाजी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि ‘लगान’ ने उन्हें “बर्बाद” कर दिया था। उनका यह बयान सुनकर फिल्म प्रेमी हैरान रह गए। अमीन हाजी ने बताया कि ‘लगान’ उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन यही उपलब्धि उनके लिए आगे बढ़ने में बाधा भी बन गई। उन्होंने कहा कि फिल्म के बाद उन्हें कई ऑफर मिले, लेकिन कोई भी किरदार या कहानी ‘लगान’ के स्तर की नहीं लगी। ऐसे में उन्होंने अभिनय जारी रखने के बजाय खुद को पीछे खींच लिया। अमीन के मुताबिक, वह अपनी मेहनत से कमाई गई प्रतिष्ठा को खोना नहीं चाहते थे और उन्हें लगता था कि अगर कमजोर भूमिकाएं स्वीकार करेंगे तो उनकी पहचान प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अपनी स्थिति को मशहूर शायरी की पंक्तियों से बयां करते हुए कहा, “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर कम निकले।” अमीन ने माना कि ‘लगान’ जैसी फिल्म जीवन में बार-बार नहीं मिलती और उस अनुभव ने उनके लिए अभिनय की कसौटी बहुत ऊंची कर दी थी। अमीन हाजी ने यह भी बताया कि एक समय ऐसा आया जब निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और उनकी पत्नी ने उनसे पूछा कि आखिर वह आगे क्या करना चाहते हैं। तब उन्होंने साफ कहा कि वह केवल अभिनय के लिए अभिनय नहीं करना चाहते। इसके बाद आशुतोष गोवारिकर ने उन्हें अपनी अगली फिल्म ‘स्वदेश’ के लेखन से जुड़ने का प्रस्ताव दिया। उस समय फिल्म का नाम ‘देश’ था। अमीन ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए उन्हें क्यों चुना जा रहा है, तो आशुतोष ने उनकी ईमानदारी और रचनात्मक सोच की तारीफ करते हुए उन्हें टीम में शामिल कर लिया। यहीं से अमीन हाजी के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। अभिनय से दूरी बनाने वाले अमीन ने लेखन की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे एक सफल लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘हॉन्टेड 3डी’ और ‘डेंजरस इश्क’ जैसी फिल्मों में सह-लेखक के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने अपनी फिल्म ‘कोई जाने ना’ का निर्देशन भी किया। अमीन हाजी ने कहा कि ‘लगान’ उनके लिए किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं रही। इस फिल्म ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि सिनेमा की बारीकियां भी सिखाईं। उन्होंने आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर और पूरी टीम का आभार जताते हुए कहा कि अगर ‘लगान’ नहीं होती तो शायद उनका फिल्मी सफर इस तरह आकार नहीं ले पाता। भले ही अमीन हाजी ने मजाकिया अंदाज में कहा हो कि ‘लगान’ ने उन्हें बर्बाद कर दिया, लेकिन उनके पूरे बयान से साफ है कि यह फिल्म उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सीख और सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। यही वजह है कि 25 साल बाद भी ‘लगान’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसी पाठशाला है जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।

आज का राशिफल 17 जून 2026: कन्या राशि वालों को आर्थिक लाभ के योग, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली । बुधवार, 17 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के कारण कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। आज चंद्रमा और अन्य प्रमुख ग्रहों की स्थिति करियर, व्यापार, आर्थिक मामलों और पारिवारिक जीवन पर विशेष प्रभाव डालेगी। कुछ राशियों को धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे, तो कुछ को अपने कार्यों में सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। वृषभ राशि वालों के लिए दिन लाभदायक साबित हो सकता है। सामाजिक संबंध मजबूत होंगे और किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में फायदा पहुंचा सकती है। धन संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। मिथुन राशि के जातकों को आज कार्यक्षेत्र में सफलता मिल सकती है। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। आय के नए स्रोत बनने के योग हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन पारिवारिक खुशियां लेकर आएगा। किसी पुराने विवाद का समाधान हो सकता है। निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। सिंह राशि के लोगों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल पर धैर्य और संयम बनाए रखें। जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। कन्या राशि के लिए आज का दिन विशेष रूप से शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ के मजबूत संकेत हैं। नौकरी और व्यापार में प्रगति होगी। टीमवर्क और सहयोग से महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हो सकती है। निवेश से भी लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। तुला राशि वालों को करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आपकी कार्यकुशलता की सराहना होगी और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। वृश्चिक राशि के जातकों को शिक्षा, प्रतियोगिता और यात्रा से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम पूरे होंगे। धनु राशि वालों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी बड़े निवेश या लेन-देन से पहले अच्छी तरह विचार कर लें। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। मकर राशि के लिए साझेदारी और सहयोग लाभदायक साबित हो सकता है। व्यवसाय में नई संभावनाएं बनेंगी और नौकरीपेशा लोगों को उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। कुंभ राशि के जातकों को आज अपने कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने की जरूरत है। अनावश्यक खर्चों से बचें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। मीन राशि वालों के लिए दिन रचनात्मकता और उपलब्धियों से भरा रहेगा। नई योजनाएं सफल हो सकती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। प्रेम और पारिवारिक जीवन में भी सुखद वातावरण बना रहेगा। कुल मिलाकर 17 जून 2026 का दिन अधिकांश राशियों के लिए सकारात्मक रहने वाला है। विशेष रूप से कन्या, मिथुन, मकर और मीन राशि के जातकों को करियर और आर्थिक मामलों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।

भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव

नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए फ्रांस के प्रमुख रिटेल केंद्रों में प्रवेश कर लिया है। फ्रांस के नीस मैसेना स्थित प्रतिष्ठित गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा की शुरुआत के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इसे भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद अब भारतीय पर्यटक और ग्राहक फ्रांस के इस प्रसिद्ध रिटेल स्टोर में सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया अधिक आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सीमापार डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने और वैश्विक भुगतान प्रणाली में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि फ्रांस के प्रमुख रिटेल गंतव्यों में से एक गैलरीज लाफायेट में यूपीआई का लॉन्च होना भारत की तकनीकी प्रगति और विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान समाधान की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी और इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इस पहल को सफल बनाने में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनियों और तकनीकी साझेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारियां वैश्विक स्तर पर सहज, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही इससे विदेशी बाजारों में भारतीय फिनटेक समाधानों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे। भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूपीआई का विस्तार इसी मजबूत होते संबंध का एक नया उदाहरण माना जा रहा है। फ्रांस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फ्रांसीसी उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया। यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र Sophia Antipolis का भी दौरा किया। यह केंद्र शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां हजारों तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार केंद्र भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक मान्यता दिलाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में अन्य देशों और प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी यूपीआई की पहुंच बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

सुपरहिट गाने पर तमन्ना का बड़ा खुलासा, 'कावाला' में अपने प्रदर्शन को लेकर जताई कमी, बताया क्यों नहीं थीं पूरी तरह खुश

मुंबई । फिल्म जगत में अक्सर कलाकारों के काम को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिलती है, लेकिन कई बार स्वयं कलाकार अपने प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। ऐसा ही कुछ अभिनेत्री Tamannaah Bhatia के साथ भी हुआ। साउथ सुपरस्टार Rajinikanth की फिल्म Jailer के बेहद लोकप्रिय गाने Kaavaalaa ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई, लेकिन अभिनेत्री का कहना है कि वह अपने प्रदर्शन को और बेहतर बना सकती थीं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान तमन्ना ने अपने करियर, डांस और अभिनय को लेकर खुलकर विचार साझा किए। चर्चा के दौरान जब ‘कावाला’ गाने का जिक्र हुआ तो उन्होंने स्वीकार किया कि शूटिंग पूरी होने के बाद उन्हें महसूस हुआ था कि उनके प्रदर्शन में और सुधार की गुंजाइश थी। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह गाने में कुछ और बेहतर कर सकती थीं और शायद अपनी प्रस्तुति को अगले स्तर तक ले जा सकती थीं। तमन्ना की इस आत्ममूल्यांकन वाली सोच को लेकर निर्देशक और कोरियोग्राफर Farah Khan ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तमन्ना हमेशा अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। फराह के अनुसार, अभिनेत्री उन कलाकारों में शामिल हैं जो सफलता के बाद भी खुद को चुनौती देना नहीं छोड़ते और हर बार पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश करते हैं। बातचीत के दौरान तमन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को स्वाभाविक रूप से प्रशिक्षित डांसर नहीं मानतीं। यही कारण है कि किसी भी डांस नंबर को परफेक्ट बनाने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत और अभ्यास करना पड़ता है। उनका मानना है कि रिहर्सल किसी भी प्रस्तुति की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है और तैयारी जितनी बेहतर होगी, प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली होगा। अभिनेत्री ने अपने एक अन्य चर्चित गीत Aaj Ki Raat का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके लिए उन्होंने लगभग पंद्रह दिनों तक लगातार अभ्यास किया था। वह चाहती थीं कि गाने का हर स्टेप, हर मूवमेंट और हर भाव पूरी तरह समझने के बाद ही कैमरे के सामने प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार तैयारी में लगाया गया समय कलाकार के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और स्क्रीन पर उसका असर साफ दिखाई देता है। ‘कावाला’ गाना रिलीज के बाद सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक चर्चा का विषय बन गया था। इसके संगीत, नृत्य और प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बावजूद इसके, तमन्ना का मानना है कि एक कलाकार के रूप में निरंतर सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। यही सोच उन्हें हर नए प्रोजेक्ट में और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि किसी सफल प्रस्तुति के बाद भी स्वयं का निष्पक्ष मूल्यांकन करने की क्षमता ही कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखती है। तमन्ना भाटिया का यह नजरिया भी उनके पेशेवर दृष्टिकोण और अपने काम के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जिसने उन्हें भारतीय मनोरंजन उद्योग की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल किया है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अकासा एयर की उड़ानों का आगाज, नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए मिली सीधी हवाई कनेक्टिविटी

नई दिल्ली । देश के विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अकासा एयर ने अपनी वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस कदम के साथ एयरलाइन उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है जिन्होंने देश के इस नए और महत्वाकांक्षी हवाई अड्डे से नियमित संचालन शुरू किया है। कंपनी ने पहले चरण में नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन शुरू होना क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों के यात्रियों को अब वैकल्पिक हवाई यात्रा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे दिल्ली क्षेत्र के अन्य हवाई अड्डों पर दबाव कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है। एयरलाइन के अनुसार, नवी मुंबई से रवाना हुई पहली उड़ान निर्धारित समय पर नोएडा पहुंची और इसके बाद वापसी सेवा भी संचालित की गई। इसी क्रम में बेंगलुरु के लिए भी सीधी उड़ानों की शुरुआत की गई है। इन नई सेवाओं से व्यापारिक यात्रियों, कॉर्पोरेट सेक्टर, छात्रों और पर्यटन गतिविधियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। कंपनी ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट से शुरुआती चरण में परिचालन शुरू करना उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। एयरलाइन तेजी से विकसित हो रहे शहरों और नए विमानन बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। इसके साथ ही आधुनिक विमानन अवसंरचना के विकास में भागीदारी को भी कंपनी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के प्रमुख विमानन केंद्रों में शामिल हो सकता है। ऐसे में शुरुआती दौर में सेवाएं शुरू करने वाली एयरलाइनों को भविष्य में यात्री आधार और नेटवर्क विस्तार के मामले में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। अकासा एयर का यह कदम इसी रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा रहा है। एयरलाइन प्रबंधन ने कहा कि नोएडा से उड़ान संचालन की शुरुआत कंपनी की विकास यात्रा में एक अहम उपलब्धि है। कंपनी का लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके लिए नए मार्गों के विकास और बेहतर सेवा गुणवत्ता पर लगातार ध्यान दिया जाएगा। वहीं हवाई अड्डा प्रबंधन ने भी अकासा एयर के परिचालन को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए सकारात्मक कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, नई उड़ानों से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और हवाई यात्रा का दायरा विस्तारित होगा। इससे नोएडा एयरपोर्ट के विकास को भी गति मिलेगी और भविष्य में अन्य शहरों के लिए नई सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। विमानन उद्योग के जानकारों का कहना है कि उत्तर भारत में बढ़ती हवाई यात्रा मांग, बेहतर अवसंरचना और नए हवाई अड्डों के विकास के बीच यह पहल पूरे क्षेत्र के आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में अधिक एयरलाइनों के जुड़ने से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के प्रमुख विमानन केंद्रों में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता निर्णायक मोड़ पर, स्विट्जरलैंड में शुरू होगी अंतिम दौर की बातचीत; मध्य पूर्व की नजरें टिकीं

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी परमाणु विवाद एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर अंतिम चरण की बातचीत शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में शुरू होने जा रही है। इस बैठक को केवल द्विपक्षीय वार्ता के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे मध्य पूर्व की भविष्य की रणनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया माना जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि आगामी दौर की बातचीत विशेष रूप से परमाणु मुद्दों पर केंद्रित होगी। उनके अनुसार, दोनों पक्ष कई चरणों की चर्चा के बाद अब ऐसे बिंदु पर पहुंचे हैं जहां प्रमुख मतभेदों को दूर करने और संभावित समझौते का रास्ता तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इसी प्रक्रिया के तहत एक प्रस्तावित समझौता ढांचे और पारस्परिक समझ से जुड़े दस्तावेजों पर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से तनाव बना हुआ है। पश्चिमी देशों की चिंता यह रही है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम भविष्य में सैन्य क्षमता हासिल करने की दिशा में इस्तेमाल हो सकता है, जबकि ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिए है। यही विवाद दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिबंधों, कूटनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों की बड़ी वजह बना हुआ है। स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब मध्य पूर्व पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। क्षेत्र में जारी संघर्षों, सीमा विवादों और विभिन्न गुटों की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की प्रगति को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री ने बातचीत से पहले क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय संतुलन भी ईरान की प्राथमिक चिंताओं में शामिल हैं। उनके अनुसार, क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव बढ़ाने वाले कदमों का व्यापक असर पड़ सकता है और इससे कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्विट्जरलैंड वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के बीच वर्षों से जमे अविश्वास को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों, व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं। हालांकि, बातचीत के सफल होने की राह आसान नहीं मानी जा रही क्योंकि कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अब भी महत्वपूर्ण मतभेद मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बैठक को लेकर काफी उत्सुकता है। यूरोपीय देशों सहित कई वैश्विक शक्तियां चाहती हैं कि कूटनीतिक समाधान के माध्यम से परमाणु विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा हो। इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि मध्य पूर्व की राजनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया साबित हो सकती है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं या फिर क्षेत्र में तनाव का दौर आगे भी जारी रहता है।

16 जून का इतिहास: शिवाजी महाराज की वीरता

इतिहास के पन्नों में 16 जून का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं और उपलब्धियों के कारण विशेष स्थान रखता है। यह तारीख केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व इतिहास के लिए भी यादगार रही है। समय-समय पर इस दिन घटित घटनाओं ने समाज, राजनीति, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की है। छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के उन महान योद्धाओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने स्वराज्य की अवधारणा को साकार रूप दिया। उनके साहस, नेतृत्व और रणनीति ने मराठा साम्राज्य को नई पहचान दी। शिवाजी महाराज का जीवन भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और सुशासन का प्रतीक माना जाता है। आज भी उनकी वीरता और राष्ट्र निर्माण की भावना देशवासियों को प्रेरित करती है। 16 जून का दिन विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी विशेष महत्व रखता है। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में अपने उल्लेखनीय योगदान से दुनिया भर में पहचान बनाई। उन्होंने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहकर कई रिकॉर्ड स्थापित किए और विज्ञान के क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रेरित किया। उनकी उपलब्धियां भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इतिहासकारों का मानना है कि 16 जून को घटित कई घटनाओं ने अपने-अपने समय में समाज और शासन व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इतिहास केवल बीते समय की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाला अनुभव भी है। भारत के इतिहास में यह दिन उन महान व्यक्तित्वों को स्मरण करने का अवसर भी है, जिन्होंने अपने कार्यों और उपलब्धियों से देश का नाम रोशन किया। चाहे वह युद्धभूमि में दिखाई गई वीरता हो, विज्ञान के क्षेत्र में हासिल की गई सफलता हो या समाज सुधार के लिए किए गए प्रयास, 16 जून का इतिहास प्रेरणादायक उदाहरणों से भरा हुआ है। आज के दौर में जब नई पीढ़ी तेजी से बदलती दुनिया के साथ आगे बढ़ रही है, तब इतिहास के ऐसे दिनों को याद करना और उनसे सीख लेना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इतिहास हमें बताता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प, साहस और मेहनत के बल पर असंभव को संभव बनाया जा सकता है। 16 जून की ऐतिहासिक घटनाएं हमें यह संदेश देती हैं कि राष्ट्र निर्माण में हर पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि यह दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा, उपलब्धि और गौरव का प्रतीक बनकर हमारे सामने आता है।

पेपर लीक और फर्जी दावों पर रोक के लिए सरकार का कड़ा कदम, Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध; Android यूजर्स के लिए डाउनलोड बंद

नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने परीक्षा सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार के निर्देशों के बाद लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को भारत में गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है। इसके चलते एंड्रॉयड उपयोगकर्ता फिलहाल आधिकारिक माध्यम से इस ऐप को डाउनलोड नहीं कर सकेंगे। हालांकि, एप्पल डिवाइस उपयोगकर्ताओं के लिए यह प्लेटफॉर्म अभी भी ऐप स्टोर पर उपलब्ध बना हुआ है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब 21 जून को आयोजित होने वाली NEET (UG) पुनर्परीक्षा को लेकर सुरक्षा व्यवस्थाएं अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी हैं। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ ऑनलाइन चैनलों और समूहों के जरिए परीक्षा संबंधी भ्रामक सूचनाएं, फर्जी पेपर लीक के दावे और नकल से जुड़े नेटवर्क सक्रिय थे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कई टेलीग्राम चैनलों पर अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर गुमराह किया जा रहा था। जांच में ऐसे कई दावों को भ्रामक पाया गया, लेकिन इनके कारण छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बन रहा था। इसी को देखते हुए व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप का निर्णय लिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने परीक्षा एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लागू किया है। यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल परीक्षा अवधि तक सीमित सुरक्षा उपाय है, जिसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के डिजिटल दुरुपयोग को रोकना और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना है। सरकार ने टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों के मुताबिक, इस सुविधा का उपयोग पहले ऐसे मामलों में किया गया था जहां पुराने संदेशों में बाद में नई सामग्री जोड़ दी जाती थी, जबकि संदेश का मूल समय वही दिखाई देता था। इससे फर्जी दस्तावेज, भ्रामक स्क्रीनशॉट और कथित पेपर लीक के नकली प्रमाण तैयार किए जाने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण प्लेटफॉर्म को भारत में निर्धारित अवधि तक इस सुविधा को निष्क्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में NEET 2026 प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों और दावों ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने की कोशिश की। इसी वजह से केवल कुछ चैनलों या समूहों को हटाने के बजाय व्यापक कार्रवाई को अधिक प्रभावी माना गया। इस पूरे अभियान में साइबर अपराध से जुड़ी केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और फर्जी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। सरकार का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कड़े कदम आवश्यक हैं। परीक्षा से जुड़े सभी हितधारकों को यह संदेश दिया गया है कि किसी भी अपुष्ट सूचना, पेपर लीक के दावे या संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि पर भरोसा न करें। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से केवल आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की अपील की है ताकि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

क्या आधार के सहारे बन रहे वोटर और साबित हो रही नागरिकता? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली । आधार कार्ड के उपयोग और उसकी कानूनी सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, निवास और पते के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को निर्धारित की गई है। याचिका में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी आधार कार्ड का मूल उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है। इसके बावजूद कई सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में इसे नागरिकता, स्थायी निवास, जन्मतिथि और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे आधार अधिनियम की भावना और कानूनी प्रावधानों के विपरीत बताया है। मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र और राज्यों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आधार कार्ड के उपयोग को निर्धारित कानूनी सीमाओं के भीतर रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में आधार को किस प्रकार स्वीकार किया जा रहा है और क्या इसके उपयोग में निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है। याचिका में विशेष रूप से नए मतदाता पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि वोटर रजिस्ट्रेशन के दौरान कुछ स्थानों पर आधार कार्ड को जन्मतिथि और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह व्यवस्था कानूनी रूप से उचित नहीं है, क्योंकि आधार अधिनियम में स्पष्ट उल्लेख है कि आधार नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं माना जाएगा। याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को निर्देश दिए जाएं ताकि आधार कार्ड का उपयोग केवल पहचान सत्यापन तक सीमित रखा जा सके। इसके अलावा सभी संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है, जिससे किसी भी प्रकार की कानूनी भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आधार देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली है और करोड़ों लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं तथा अन्य सुविधाओं के लिए इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में इसके उपयोग की सीमा और कानूनी स्थिति को लेकर स्पष्टता बेहद आवश्यक है। यदि विभिन्न विभाग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए आधार को स्वीकार करते हैं, तो इससे प्रशासनिक और कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में आधार कार्ड की वैधानिक भूमिका और उसकी स्वीकार्यता को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश तय हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का प्रभाव चुनावी प्रक्रियाओं, सरकारी सेवाओं और पहचान सत्यापन से जुड़ी कई व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और राज्य सरकारें अदालत के समक्ष क्या पक्ष रखती हैं तथा आधार कार्ड के उपयोग को लेकर भविष्य में क्या स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आते हैं।