देवास में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, मौत और घायलों से मचा हड़कंप

देवास (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में अब तक 3 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और फैक्ट्री परिसर मलबे में तब्दील हो गया। यह हादसा करीब सुबह 11:30 बजे हुआ, जब फैक्ट्री में मजदूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। धमाके से फैक्ट्री की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं और आसपास का इलाका दहशत में आ गया। हादसे में मृत मजदूरों की पहचान धीरज, सनी और सुमित के रूप में हुई है। घायलों में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई मजदूर शामिल हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। कई घायलों का इलाज जारी, कुछ की हालत गंभीप्रशासन के अनुसार, घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। देवास जिला अस्पताल में 12 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 6 लोग अमलतास अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं 7 गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गया है, जहां MY अस्पताल और चोइथराम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। केमिकल मिक्सिंग के दौरान हुआ विस्फोटमौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान केमिकल की मात्रा में गड़बड़ी होने से अचानक जोरदार धमाका हो गया। उस समय करीब 15 से 20 मजदूर मौके पर मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे से कुछ मिनट पहले ही मजदूरों का लंच तैयार था, लेकिन उससे पहले ही धमाका हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई मजदूर झुलसी हालत में खुद बाहर निकलते दिखाई दिए। अवैध फैक्ट्री और सुरक्षा पर उठे सवाहादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फैक्ट्री के खिलाफ पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का दावा है कि यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। इस घटना के बाद फैक्ट्री को प्रशासन ने सील कर दिया है और मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में ले लिया गया है। सीएम ने दिए जांच के आदेशमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। पहले भी हो चुका था हादसास्थानीय लोगों के अनुसार, इसी फैक्ट्री में मार्च 2026 में भी ब्लास्ट हुआ था। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया, जिससे एक बार फिर यह बड़ा हादसा हो गया। इलाके में दहशत का माहौधमाके के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। फैक्ट्री परिसर में अब भी रुक-रुककर छोटे धमाकों जैसी आवाजें आ रही हैं, जिससे रेस्क्यू टीम को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है।
हल्दी असली या नकली? घर बैठे इन आसान तरीकों से मिनटों में करें शुद्धता की पहचान

नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी केवल एक मसाला नहीं बल्कि सेहत और परंपरा का अहम हिस्सा मानी जाती है। दाल, सब्जी और कई घरेलू नुस्खों में इसका नियमित उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में भी हल्दी को इसके औषधीय गुणों के लिए विशेष स्थान दिया गया है। लेकिन बदलते समय के साथ बाजार में मिलने वाली हर हल्दी की शुद्धता पर भरोसा करना अब आसान नहीं रहा है। मिलावट के बढ़ते मामलों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। आजकल कई बार हल्दी में चमकदार रंग और बेहतर दिखावट देने के लिए कृत्रिम रंगों और रसायनों का उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले पदार्थ भी मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि घर में इस्तेमाल होने वाली हल्दी की शुद्धता की जांच की जाए। हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका पानी का परीक्षण माना जाता है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में हल्दी डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है। यदि हल्दी नीचे बैठ जाती है और पानी हल्का पीला रहता है, तो इसे अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है। लेकिन यदि हल्दी तेजी से घुलने लगे और पानी का रंग गहरा पीला हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है। इसके अलावा एक और सरल तरीका हथेली परीक्षण है, जिसे घर पर आसानी से किया जा सकता है। इसमें हल्दी की थोड़ी मात्रा हथेली पर रखकर उंगलियों से हल्के से रगड़ा जाता है। यदि हल्दी असली होती है, तो यह हथेली पर हल्का पीला रंग छोड़ती है और उसकी प्राकृतिक खुशबू महसूस होती है। जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर असमान होता है या जल्दी फीका पड़ जाता है। कुछ मामलों में हल्दी में खतरनाक रसायनों की मिलावट की भी आशंका होती है। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक परीक्षणों की आवश्यकता पड़ती है, जिनमें रासायनिक प्रतिक्रिया के आधार पर मिलावट की पहचान की जाती है। यह बताया जाता है कि कुछ विशेष रसायनों की मौजूदगी से हल्दी का रंग बदल सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावटी हल्दी लंबे समय में पेट संबंधी समस्याएं, एलर्जी, मतली और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए केवल हल्दी ही नहीं बल्कि सभी रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बाजार से हल्दी खरीदते समय उपभोक्ताओं को विश्वसनीय स्रोत और ब्रांड का चयन करना चाहिए। पैक्ड और प्रमाणित उत्पादों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही समय-समय पर घर में हल्दी की शुद्धता की जांच करना भी एक अच्छी आदत हो सकती है। कुल मिलाकर कहा जाए तो हल्दी जैसी साधारण दिखने वाली चीज भी अगर मिलावटी हो, तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए थोड़ी सावधानी और जागरूकता अपनाकर हम अपने परिवार की सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं।
स्क्रीन टाइम की आदत बिगाड़ रही नींद का पैटर्न, शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ रहा असर..

नई दिल्ली ।आज की डिजिटल जीवनशैली में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। काम से लेकर मनोरंजन तक लगभग हर गतिविधि स्क्रीन पर ही निर्भर हो गई है। लेकिन इसी आदत का एक गंभीर असर अब लोगों की नींद और स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम शरीर के प्राकृतिक नींद चक्र को प्रभावित कर रहा है, जिससे स्लीप साइकिल बिगड़ती जा रही है। दिनभर काम के दौरान कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन पर समय बिताने के बाद भी कई लोग रात में भी फोन का इस्तेमाल जारी रखते हैं। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या देर रात तक चैटिंग करना अब एक सामान्य आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे यह पैटर्न शरीर और दिमाग दोनों को थका देता है, लेकिन व्यक्ति को इसका एहसास तब होता है जब नींद प्रभावित होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन का समय है। इससे शरीर का प्राकृतिक नींद तंत्र बाधित होता है। आमतौर पर शरीर रात के समय मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनाता है, जो नींद लाने में मदद करता है। लेकिन जब व्यक्ति सोने से पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखता है, तो इस हार्मोन का निर्माण प्रभावित होता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को समय पर नींद नहीं आती और वह बिस्तर पर लंबे समय तक करवटें बदलता रहता है। लगातार ऐसा होने पर नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता। इसका असर अगले दिन थकान, सिर भारी रहना, आंखों में जलन और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है। खराब स्लीप साइकिल का प्रभाव केवल थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। नींद पूरी न होने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, काम में मन नहीं लगता और मानसिक थकान बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मानसिक स्वास्थ्य और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। आजकल कई लोग सुबह उठने में परेशानी महसूस करते हैं और दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसका एक बड़ा कारण अनियमित नींद और देर रात तक स्क्रीन का उपयोग है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर की प्राकृतिक लय को बिगाड़ देती है, जिसे ठीक होने में समय लग सकता है। हालांकि, कुछ आसान बदलाव अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है। इसके अलावा रात के समय हल्की रोशनी में रहना, अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचना और नींद के लिए शांत माहौल तैयार करना मददगार हो सकता है। दिनभर स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों को बीच-बीच में आंखों को आराम देना भी जरूरी है, ताकि आंखों और दिमाग पर दबाव कम हो सके। सोने से पहले किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या परिवार के साथ समय बिताना भी नींद को बेहतर बनाने में मदद करता है। कुल मिलाकर, बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है और अच्छी नींद के लिए स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखना आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके स्लीप साइकिल को सुधारा जा सकता है और शरीर को फिर से प्राकृतिक ऊर्जा और संतुलन दिया जा सकता है।
पंजाब बोर्ड परिणाम ने बढ़ाया गौरव: टॉपर छात्राओं की ऐतिहासिक सफलता और सरकारी स्कूलों का शानदार प्रदर्शन चर्चा में

नई दिल्ली । पंजाब में इस वर्ष घोषित हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सकारात्मक तस्वीर पेश की है। पूरे राज्य में छात्रों के प्रदर्शन ने यह दिखाया कि मेहनत, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। इस बार विशेष रूप से छात्राओं का प्रदर्शन सबसे अधिक चर्चा में रहा, जिन्होंने न केवल शानदार सफलता हासिल की बल्कि मेरिट सूची में भी अपना दबदबा कायम रखा। घोषित परिणामों में कुल सफलता प्रतिशत 91 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। छात्राओं ने इस बार लड़कों से आगे निकलते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। परीक्षा परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य में बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और अपनी मेहनत से प्रेरणा बन रही हैं। इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि तीन छात्राओं ने 500 में से पूरे 500 अंक प्राप्त कर राज्यभर में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। तीनों ने शत-प्रतिशत अंक हासिल कर ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसने पूरे शिक्षा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस उपलब्धि को लगातार मेहनत और समर्पण का परिणाम माना जा रहा है। परिणाम घोषित होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने इन प्रतिभाशाली छात्राओं और उनके परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल विद्यार्थियों की नहीं बल्कि उनके माता-पिता और शिक्षकों की मेहनत का भी परिणाम है। उन्होंने छात्रों की उपलब्धियों को पंजाब के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि सही अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने पर सामान्य परिवारों के बच्चे भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के प्रयासों का असर अब परिणामों में साफ दिखाई देने लगा है। इस बार सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी बेहद उल्लेखनीय रहा। राज्य के 416 सरकारी स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम दर्ज कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है और छात्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबे समय तक निजी स्कूलों को लेकर जो धारणा बनी हुई थी, उसे अब सरकारी स्कूलों के परिणाम चुनौती देते नजर आ रहे हैं। परीक्षाओं में लाखों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था और उनमें बड़ी संख्या में छात्र सफल रहे। छात्राओं का सफलता प्रतिशत विशेष रूप से प्रभावशाली रहा, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मजबूत होती स्थिति को दर्शाया। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे परिणाम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं और दूसरे छात्रों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही यह सफलता शिक्षकों की मेहनत और परिवारों के सहयोग को भी सामने लाती है, जिन्होंने छात्रों को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। कुल मिलाकर पंजाब बोर्ड का इस वर्ष का परीक्षा परिणाम शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव और बेहतर भविष्य का संकेत देता है। छात्राओं की ऐतिहासिक सफलता और सरकारी स्कूलों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा और निरंतर प्रयासों के साथ शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
घर से काम में बढ़ेगी स्पीड और आराम: जानिए 10 स्मार्ट डिवाइस जो बढ़ाएँगे प्रोडक्टिविटी

नई दिल्ली । वर्क फ्रॉम होम आज केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि आधुनिक कार्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। घर से काम करने की सुविधा ने लोगों को लचीलापन तो दिया है, लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना कई बार थकान, असुविधा और ध्यान भटकने जैसी समस्याएं भी पैदा करता है। ऐसे में सही तकनीकी उपकरणों का उपयोग इस अनुभव को काफी हद तक बेहतर बना सकता है और काम की गति को भी बढ़ा सकता है। घर से काम करने के लिए सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण आवश्यकता एक स्थिर और तेज इंटरनेट कनेक्शन होती है। यदि वीडियो कॉल बार-बार रुकती हैं या फाइलें धीमी गति से डाउनलोड होती हैं, तो काम की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी समस्या को हल करने के लिए एक अच्छा डुअल-बैंड Wi-Fi राउटर बेहद उपयोगी साबित होता है, जो कनेक्शन को स्थिर और तेज बनाए रखता है। लंबे समय तक लैपटॉप पर झुककर काम करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गर्दन और पीठ में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इस स्थिति से बचने के लिए एडजस्टेबल लैपटॉप स्टैंड एक महत्वपूर्ण समाधान है, जो स्क्रीन को आंखों के स्तर पर लाकर सही पोश्चर बनाए रखने में मदद करता है। इसी तरह वायरलेस कीबोर्ड और माउस भी वर्क फ्रॉम होम सेटअप का अहम हिस्सा बन सकते हैं। छोटे लैपटॉप ट्रैकपैड पर लगातार काम करना कई बार धीमा और असुविधाजनक हो जाता है। वायरलेस डिवाइस टाइपिंग और नेविगेशन को तेज और आरामदायक बनाते हैं, जिससे लंबे समय तक काम करना आसान हो जाता है। घर के माहौल में अक्सर शोर और अन्य गतिविधियों के कारण ध्यान भटक सकता है। ऐसे में नॉइज़ कैंसिलिंग हेडफोन्स एक शांत कार्य वातावरण तैयार करने में मदद करते हैं। यह न केवल बाहरी आवाज़ों को कम करते हैं बल्कि ऑनलाइन मीटिंग के दौरान आवाज की स्पष्टता भी बढ़ाते हैं। वीडियो कॉल और ऑनलाइन मीटिंग आज के कामकाज का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में एक अच्छा वेबकैम और रिंग लाइट प्रोफेशनल लुक देने में मदद करता है। सही रोशनी और स्पष्ट वीडियो गुणवत्ता से संवाद अधिक प्रभावी बन जाता है। कम रोशनी में लंबे समय तक काम करना आंखों पर दबाव डाल सकता है। स्मार्ट LED डेस्क लैंप, जिसमें ब्राइटनेस और रंग तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है, इस समस्या का समाधान प्रदान करता है और काम के दौरान आंखों को आराम देता है। वर्क फ्रॉम होम के दौरान बिजली की अनिश्चितता भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है। ऐसे में छोटा UPS या पावर बैकअप डिवाइस लैपटॉप और इंटरनेट उपकरणों को चालू रखकर काम को बिना रुकावट जारी रखने में मदद करता है। बड़ी फाइलों के ट्रांसफर और सुरक्षित स्टोरेज के लिए पोर्टेबल SSD एक तेज और भरोसेमंद विकल्प है। यह सामान्य स्टोरेज डिवाइस की तुलना में अधिक गति और सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा स्मार्ट स्पीकर भी मल्टीटास्किंग को आसान बना सकता है। रिमाइंडर सेट करने से लेकर जानकारी प्राप्त करने तक, यह हाथों के बिना काम करने की सुविधा देता है। सही स्मार्ट गैजेट्स का उपयोग न केवल वर्क फ्रॉम होम को अधिक आरामदायक बनाता है, बल्कि उत्पादकता और कार्यक्षमता को भी कई गुना बढ़ा देता है। यदि कार्यस्थल को सही तरीके से तकनीकी रूप से सुसज्जित किया जाए, तो घर से काम करना भी एक पूर्ण पेशेवर ऑफिस अनुभव जैसा बन सकता है
10वीं और आईटीआई पास उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी, रेलवे में निकली बंपर वैकेंसी..

नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए रेलवे क्षेत्र से एक बड़ी अवसरभरी खबर सामने आई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेड अप्रेंटिस के 1,191 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान को तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए करियर की मजबूत शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में पद उपलब्ध होने के कारण रोजगार की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में उत्साह का माहौल बना हुआ है। इस भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी और गैर-तकनीकी ट्रेडों में पद शामिल किए गए हैं। फिटर, इलेक्ट्रीशियन, वायरमैन, पेंटर, प्लंबर, वेल्डर, मशीनिस्ट और डीजल मैकेनिक जैसे प्रमुख ट्रेडों के साथ-साथ कंप्यूटर ऑपरेटर और स्टेनोग्राफर से जुड़े पदों पर भी भर्ती की जाएगी। अलग-अलग ट्रेडों में पदों की संख्या तय की गई है ताकि विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं को अवसर मिल सके। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन प्रक्रिया को अंतिम दिनों तक टालने के बजाय समय रहते पूरा कर लें। ऑनलाइन आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपने शैक्षणिक दस्तावेज और आवश्यक जानकारी सही तरीके से भरनी होगी। इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही संबंधित ट्रेड में आईटीआई प्रमाणपत्र होना भी जरूरी रखा गया है। रेलवे की यह भर्ती विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो तकनीकी कौशल के आधार पर सरकारी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी। इससे विभिन्न सामाजिक वर्गों के अभ्यर्थियों को समान अवसर देने का प्रयास किया गया है। चयन प्रक्रिया मेरिट के आधार पर पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के अनुसार मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें सीखने के साथ आर्थिक सहायता भी मिल सके। रेलवे में अप्रेंटिसशिप को हमेशा से युवाओं के लिए व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का एक मजबूत माध्यम माना गया है। इस प्रशिक्षण के जरिए उम्मीदवारों को तकनीकी कार्यों की वास्तविक समझ मिलती है, जो भविष्य में स्थायी रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद करती है। बड़े संस्थान में काम करने का अनुभव युवाओं के आत्मविश्वास और कौशल दोनों को मजबूत करता है। कुल मिलाकर यह भर्ती अभियान उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो तकनीकी क्षेत्र में सरकारी नौकरी की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। सीमित योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए भी यह मौका भविष्य में बेहतर करियर और स्थिर रोजगार की नई संभावनाएं खोल सकता है।
राजधानी में संसाधन बचाने की मुहिम तेज: दिल्ली सरकार ने विदेश यात्राओं और सरकारी खर्चों में कटौती का किया ऐलान

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में अब सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक सादगीपूर्ण और संसाधन-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। ऊर्जा बचत, सरकारी खर्चों में कटौती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इन फैसलों के तहत आने वाले एक वर्ष तक सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी सरकारी विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी कई नई व्यवस्थाएं लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सरकार का मानना है कि मौजूदा समय में ईंधन और संसाधनों का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ राजधानी में एक व्यापक जन-अभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य केवल सरकारी स्तर पर बदलाव करना नहीं बल्कि आम लोगों को भी इस पहल से जोड़ना है। सरकार का कहना है कि यदि प्रशासन और जनता दोनों मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं तो बड़े स्तर पर बचत और सकारात्मक बदलाव संभव हो सकते हैं। वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। सरकारी विभागों में सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की योजना तैयार की गई है। साथ ही निजी कंपनियों और संस्थानों से भी अपील की जाएगी कि वे अपने कर्मचारियों को सीमित दिनों के लिए घर से काम करने की सुविधा दें। माना जा रहा है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, ट्रैफिक का दबाव घटेगा और पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी। सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को भी सीमित करने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम की जाएगी और जहां संभव होगा वहां सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले छह महीनों तक नई पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या हाइब्रिड गाड़ियों की खरीद नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को मेट्रो और बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है। राजधानी में मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच आसान बनाने के लिए विशेष बस सेवाएं शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा बैठकों और प्रशासनिक गतिविधियों को अधिक से अधिक ऑनलाइन मोड में करने की योजना बनाई जा रही है। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों से भी ऑनलाइन क्लास और मीटिंग्स को बढ़ावा देने की अपील की गई है, ताकि अनावश्यक यात्रा को कम किया जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले कुछ महीनों तक बड़े सरकारी आयोजन और खर्चीले कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही “मेड इन India” उत्पादों को बढ़ावा देने और सरकारी विभागों में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्राथमिकता देने की दिशा में भी काम किया जाएगा। ऊर्जा बचत के तहत सरकारी दफ्तरों में बिजली उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। एयर कंडीशनर के तापमान को सीमित रखने और बिजली की अनावश्यक खपत रोकने पर भी ध्यान दिया जाएगा। कुल मिलाकर राजधानी में शुरू की गई यह पहल केवल खर्च कम करने का प्रयास नहीं बल्कि एक नई प्रशासनिक सोच का संकेत मानी जा रही है। सरकार इस अभियान के जरिए सादगी, जिम्मेदारी और संसाधनों के संतुलित उपयोग का संदेश जनता तक पहुंचाना चाहती है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में जांच तेज, कई शहरों में पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली । रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच अब और अधिक गंभीर होती दिखाई दे रही है। देश के कई बड़े शहरों में एक साथ चलाए गए तलाशी अभियान ने कारोबारी और वित्तीय जगत में नई हलचल पैदा कर दी है। यह कार्रवाई उन मामलों से जुड़ी बताई जा रही है जिनमें भारी वित्तीय नुकसान और नियमों के कथित उल्लंघन की जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियों की टीमों ने मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु समेत कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कंपनी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशकों से जुड़े परिसरों पर केंद्रित रही। बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों के यहां तलाशी ली गई, वे वर्ष 2015 से 2017 के बीच कंपनी के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे और वित्तीय संचालन से जुड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका थी। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि कथित गड़बड़ियों और पैसों के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इन रिकॉर्ड्स से जांच को नई दिशा मिल सकती है। पिछले कुछ महीनों में इस मामले में लगातार नई कार्रवाइयां देखने को मिली हैं। कई वित्तीय संस्थानों और बैंकों की शिकायतों के बाद यह जांच शुरू हुई थी। आरोप है कि संबंधित मामलों में हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय नुकसान की आशंका है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां लगातार अलग-अलग स्तरों पर दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही हैं। इस पूरे मामले में पहले भी कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए जा चुके हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत एकत्र किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। अधिकारियों का मानना है कि मामले में कई जटिल वित्तीय लेनदेन शामिल हो सकते हैं, जिनकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। इससे पहले कंपनी से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। उन पर बैंकिंग संचालन और फंड के इस्तेमाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप लगे हैं। फिलहाल उनसे पूछताछ की प्रक्रिया जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। बड़े कॉरपोरेट संस्थानों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की सख्ती यह संदेश देती है कि वित्तीय नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जा रहा है। वहीं, कारोबारी जगत की नजरें अब इस जांच के अगले चरण पर टिकी हुई हैं। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है। लगातार बढ़ती जांच गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि एजेंसियां इस पूरे मामले की हर परत तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, ताकि वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर साफ हो सके।
दिल्ली में बस्तर के भविष्य पर बड़ी बैठक, अमित शाह और सीएम विष्णु देव साय ने तैयार किया विकास का खाका

नई दिल्ली ।छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अब केवल सुरक्षा चुनौतियों के लिए नहीं बल्कि तेजी से बदलते विकास मॉडल के लिए भी चर्चा में आने लगा है। इसी बदलाव को लेकर नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें बस्तर के विकास कार्यों, स्वास्थ्य सुविधाओं और नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक पहुंच को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में अब सरकारी योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जिन गांवों तक पहले स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बेहद कठिन माना जाता था, वहां अब डॉक्टरों और स्वास्थ्य टीमों की नियमित पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। कई इलाकों में मेडिकल टीमें पैदल पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच अभियान चलाकर लाखों लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं। डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल के जरिए अब मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी। इसके साथ ही गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अब बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुराने सुरक्षा शिविरों को धीरे-धीरे जन सुविधा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इससे उन लोगों को राहत मिली है जिन्हें पहले छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बैठक में बस्तर के लिए तैयार किए गए विकास रोडमैप पर भी चर्चा हुई। इसमें सड़क निर्माण, रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे मुख्यधारा से तेजी से जुड़ सकें। जगदलपुर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को भी इस बदलाव का अहम हिस्सा बताया गया। नए चिकित्सा संस्थानों और आपातकालीन सेवाओं के विस्तार से अब लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रशासन का मानना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से क्षेत्र में स्थायी बदलाव संभव होगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि बस्तर में अब सकारात्मक माहौल बन रहा है और लोगों का भरोसा सरकार की योजनाओं पर बढ़ रहा है। पहले जो इलाके लंबे समय तक विकास से दूर रहे, वहां अब सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी सहायता पहुंच रही हैं। इससे आम लोगों के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देने लगा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बस्तर में हो रहे कार्यों की सराहना की और संकेत दिए कि आने वाले समय में इस मॉडल को और मजबूत किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर को विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नए उदाहरण के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं।
सावधान! इन गलतियों की वजह से खराब होजाता जाता है अचार, ऐसे रखें सुरक्षित

नई दिल्ली। भारतीय रसोई में अचार सिर्फ एक साइड डिश नहीं बल्कि स्वाद और परंपरा का हिस्सा होता है। आम, नींबू, मिर्च या आंवले का अचार हर घर में खास जगह रखता है। लेकिन कई बार मेहनत से तैयार किया गया अचार कुछ ही दिनों या महीनों में खराब होने लगता है और उसके ऊपर सफेद या हरे रंग की फफूंदी दिखाई देने लगती है। यह समस्या किसी एक मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि साल के किसी भी समय हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार अचार में फफूंदी लगने का सबसे बड़ा कारण नमी और हवा का संपर्क है। जब भी जार के अंदर नमी पहुंचती है या अचार खुले वातावरण के संपर्क में आता है, तो उसमें फफूंदी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कई बार छोटी-छोटी गलतियां जैसे गीला चम्मच इस्तेमाल करना या जार को खुला छोड़ देना भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। गंध और स्वाद से मिलते हैं शुरुआती संकेतअचार खराब होने का पहला संकेत उसकी गंध से मिलता है। ताजा अचार की खुशबू तीखी और खट्टी होती है, लेकिन अगर उसमें सड़ी हुई या अजीब सी बदबू आने लगे, तो यह खराब होने का संकेत है। कई बार स्वाद में भी बदलाव आने लगता है, जिससे अचार कड़वा, फीका या अजीब सा लगने लगता है। ऐसे अचार का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। बनावट और रंग में बदलाव भी खतरे का संकेतजब अचार खराब होने लगता है, तो उसकी बनावट में भी बदलाव दिखाई देता है। अगर अचार चिपचिपा, बहुत नरम या रंग बदलने लगे, तो इसे खाने से बचना चाहिए। उदाहरण के लिए आम का अचार भूरा और मुलायम हो जाए या लहसुन का अचार लिसलिसा महसूस हो, तो यह संकेत है कि उसमें खराबी शुरू हो चुकी है। तेल की स्थिति भी काफी अहम होती है। अगर अचार का तेल धुंधला दिखे, अलग-अलग परतों में बंट जाए या उसमें झाग बनने लगे, तो यह भी खराबी की निशानी है। अचार में फफूंदी क्यों लगती है?Pickle में फफूंदी तब लगती है जब उसमें नमी, हवा या गंदगी पहुंच जाती है। कई बार अचार को स्टोर करते समय सावधानी नहीं बरती जाती, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ने लगते हैं। अचार को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?Pickle को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। हमेशा सूखे और साफ चम्मच का इस्तेमाल करें, क्योंकि एक बूंद पानी भी फफूंदी का कारण बन सकती है। जार को हर बार अच्छी तरह बंद करें ताकि हवा अंदर न जा सके। अचार को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखें। सीधी धूप और ज्यादा गर्मी मसालों और तेल को खराब कर सकती है। इसके अलावा ध्यान रखें कि अचार पूरी तरह तेल की परत में ढका रहे। अगर तेल कम हो जाए, तो ऊपर से साफ तेल डालकर उसे सुरक्षित रखा जा सकता है। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर अचार को लंबे समय तक ताजा और स्वादिष्ट रखा जा सकता है, जिससे उसका असली स्वाद बरकरार रहता है और वह फफूंदी से सुरक्षित रहता है।